राजू की बातें हरिया के कानों में शुल की तरह चुभ रही थी लेकिन वह मजबूर था,,, उसे अपने ही बेटे के द्वारा बहुत बड़ी सजा मिली थी लेकिन फिर उसे अपने ही बेटे की बात याद आ गई कि गलती भी तो बहुत बड़ी थी आखिरकार उसका बेटा सच ही कह रहा था कि हरिया के द्वारा की गई गलती भी बहुत बड़ी थी क्योंकि वह अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना रहा था,,,,,,,,,,,,, राजू ने तो अपने पिता को,,, आमंत्रण तक दे डाला था कि अगर उसकी कई बातों पर उसे विश्वास ना हो तो अपनी आंखों से सब कुछ देख सकता है,,, और इसी बात को लेकर हरिया बहुत परेशान था सब कुछ उसे मुमकिन लगता था लेकिन मधु का इस तरह से बेवफाई करना नामुमकिन लग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह राजू की बातों पर भरोसा करें या वह यह समझे कि राजू बनावटी बातें कर रहा है,,,
लेकिन जिस तरह कि उसने कहानी सुनाई थी उसे सुनकर हरिया को ना चाहते हुए भी अपने बेटे की बातों का विश्वास करना पड़ रहा था क्योंकि हरिया भी अपनी आंखों से अपने बेटे के लंड को देख चुका था जो कि उसका लंड नहीं एकदम मुसल था,,,,,
मधु और राजु

जैसे तैसे करके वह रात गुजार दिया लेकिन उसका मन नहीं मान रहा था वह इस बात को मधु से तो पूछ नहीं सकता था क्योंकि मधु इस तरह की बातों का जवाब देना उचित नहीं समझती और हो सकता था कि इस तरह के सवाल से मधु एकदम से भड़क जाए जिसमें हरिया का ही घाटा निश्चित नजर आ रहा था,,,,,,,,, अपने मन की शांति के लिए वह अपने मन में ठान लिया था कि आज वह अपनी बीवी की हकीकत को जानकारी रहेगा जिस पर वह इतना भरोसा करता था क्या वाकई में मधु ने उसके भरोसे को तार-तार कर दिया है बरसों के प्यार मोहब्बत को विश्वास को पलभर में ही बिस्तर पर पिघलाकर बेवफा बन गई,,,,, वैसे तो हरिया को अपने बेटे की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से अपने मन में उठे शंका को निश्चित कर लेना चाहता था,,,,
इसलिए आज वह सुबह से ही अपने घर में बता दिया कि आज बारात को पड़ोस के गांव में शादी में जाने वाला है इस बात को सुनते ही राजू का मन मयूर बन कर नाचने लगा,,,, वह अपने मन में यह सोच कर बहुत ज्यादा उत्तेजित और खुश हो रहा था कि आज वह अपने ही बाप की आंखों के सामने अपनी ही मां की चुदाई करेगा,,,, वह मंजर कैसा होगा वह एहसास कैसा होगा इस बारे में सोच सोच कर ही उसके बदन में गुदगुदी हो रही थी,,,,, उसकी मां और उसकी बुआ को यही लग रहा था कि वास्तव में वह शादी में जाने वाले हैं इसलिए वह लोग बिल्कुल सहज थे लेकिन इस बात से खुद हरिया और राजू असहज थे,,,,, राजू को इस बात से और उसके तन बदन में आग लगी हुई थी कि उसके पिताजी ने इशारों में ही अपनी बीवी को चुदते हुए देखने का आग्रह कर दिए थे,,,,, नित्य कर्म से निपट कर हरिया बेल गाड़ी लेकर रोज की तरह घर से निकल गया था जिस तरह से हरिया को रात होने का इंतजार था उसी बेसब्री से राजू को भी रात होने का इंतजार था वह आज अपनी मां के साथ अपने पिताजी की आंखों के सामने ही सुहागरात मनाना चाहता था आज की रात वह एकदम हसीन बना देना चाहता था,,,,, और इस बारे में राजू ने अपनी मां को भनक तक नहीं लगने दिया था वह चाहता था कि कमरे के अंदर उसकी मां उसके साथ एकदम खुल कर मजे ले उसे इस बात का अहसास तक नहीं होना चाहिए कि कमरे के बाहर दरवाजे पर खड़े होकर खुद उसके पतिदेव उसकी काम क्रीड़ा को अपनी आंखों से देख रहे हैं वरना वह काम क्रीडा में आत्मविश्वास नहीं दिखा पाएगी और बार-बार दरवाजे पर अपने पति के खड़े होने का एहसास उसे शर्मिंदगी का अहसास दिलाएगा,,,,।
मधु ओर राजू

आखिरकार शाम के ढलते ही हरिया बेल गाड़ी लेकर घर पर पहुंच गया था और अपने आप को कोश रहा था कि आखिर क्यों वह रंगे हाथों पकड़ा गया अगर ऐसा ना होता तो शायद आज जीवन की तस्वीर इस तरह से बदल नहीं गई होती लेकिन जो होना था वह तो हो गया था लेकिन अब आगे जो होना था उसके बारे में लेकर हरिया चिंतित भी था और अपने आपको तैयार भी कर रहा था आखिरकार एक पति जो अपनी बीवी को एकदम चरित्रवान और संस्कारी समझता है जिस पर आंख बंद करके वह भरोसा कर सकता है ऐसी बीवी अगर किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर हो जाए तो उस पति पर क्या गुजरेगी,,,, यही एहसास हरिया को दुखी कर रहा था,,,,,
मौका देखकर राजू ने अपनी मां से अपने मन की बात कर दिया था कि आज उसके पिताजी शादी में जाने वाले हैं और सुबह ही लौटेंगे तो क्यों ना आज के साथ रंगीन कर ली जाए और जिसमें मधु को बिल्कुल भी इनकार नहीं था वह तो पहले से ही तैयार थी मतलब अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ या बाद राजू ने कह दिया वरना वह खुद राजू को अपने कमरे में बुलाने वाली थी,,,,
हरिया सिर्फ एक रोटी खाकर यह कहकर घर से निकल गया कि शादी में जाकर खाएगा इसलिए किसी को हरिया की बातों पर शक भी नहीं हुआ और हरिया घर से निकल गया मधु और राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था गुलाबी भी पूरी तरह से निश्चिंत थी,,,, जिस तरह की कुल बुला हट मधु को अपनी बुर में महसूस हो रही थी उसी तरह की कुलबुलाहट गुलाबी को अपनी भी बुर में महसूस हो रही थी,,,, इसलिए राजू अपनी मां के कमरे में जाने से पहले गुलाबी को अपने कमरे में ले गया और जमकर उसकी चुदाई करने के बाद उसे उसी हाल में खटिया पर छोड़कर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि राजू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जमकर चुदा लेने के बाद गुलाबी गहरी नींद में सो जाती है,,,,।
मधु की गोरी गोरी गांड और राजु का बमपिलाड लंड

राजू धीरे से अपने कमरे से बाहर निकला चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था वह अपनी मां के कमरे की तरफ देखा तो दरवाजा हल्का से खुला हुआ था और अंदर लालटेन की पीली रोशनी कमरे को प्रकाशित कर रही थी वह अपनी मां के कमरे की तरफ जाने के बजाए घर के मुख्य द्वार की तरफ चल दिया ताकि घर के मुख्य द्वार को वहां खोल सके और मुख्य द्वार से उसके पिताजी घर में प्रवेश कर सकें वह जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंचकर दरवाजा खोलकर बाहर की तरफ देखा तो दीवाल की ओट से सटकर उसके पिताजी खड़े थे और राजू अपने पिताजी को देख कर मुस्कुराया और उन्हें अंदर आने का आमंत्रण दिया यह पल बेहद अद्भुत और उत्तेजना से भरा हुआ था राजू के लिए यह पर उत्तेजना से भरा हुआ था लेकिन हरिया के लिए यह पल डूब मरने वाला जैसा था क्योंकि वह अपनी आंखों से अपनी बीवी को अपने ही बेटे से चुदवाते हुए देखने जा रहा था,,,,,, धीरे से हरिया घर में प्रवेश किया और राजू दरवाजे को बंद करके कभी लगा दिया और होठो पर उंगली रखकर शांत रहने का इशारा करते हुए अपने पिताजी को पीछे पीछे आने का इशारा कर दिया,,,,
बाप बेटे दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था और कमरे में करवटें बदलते हुए मधु का भी दिल जोरों से धड़क रहा था देखते ही देखते दोनों बाप बेटे मधु के कमरे के करीब पहुंच गए जिसका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और हल्के से खुले हुए दरवाजे को देखकर ही हरिया समझ गया कि आखिरकार मामला क्या है क्योंकि इस तरह से मधु अपने दरवाजे को कभी खुला नहीं छोड़ दी थी पहली नजर में ही हरिया पूरी तरह से विवश हो गया था वह समझ गया था कि राजू जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी,,,,, राजू धीरे से अपनी मां के कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हम कैसे बिना करी लगाए बंद कर दिया और दरवाजा बंद होने के बावजूद भी उसमें इतनी जगह तो थी ही कि हरिया आराम से कमरे के अंदर के हर एक पल को अपनी आंखों से आराम से और एकदम साफ तौर पर देख सके क्योंकि कमरे के अंदर लालटेन भी जल रही थी जिसकी पीली रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी,,,,,।
मधु अपने बेटे के साथ

राजू कमरे में प्रवेश करते ही खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई अपनी मां पर नजर दौड़ाया और मुस्कुराने लगा जोकि हरिया भी दरवाजे पर अपनी नजर टीका कर कमरे के अंदर देखने लगा जो कि एकदम साफ दिखाई दे रहा था उसे दिखाई दे रहा था कि उसकी बीवी खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी साड़ी उसकी छाती से नीचे गिरी हुई थी और उसके विशाल छाती ब्लाउज में कैद नजर आ रही थी जो कि गहरी गहरी सांस लेने की वजह से उसके खरबूजे जैसी चूचियां बलाउज में कैद होने के बावजूद भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देख कर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो जाए,,,,, सबसे पहले उसे अपनी बीवी की आवाज सुनाई दी और उसे सुनकर वह दंग रह गया,,,,।
क्या रे राजू कितना इंतजार करवा रहा है मेरी हालत खराब हो रही है और तू है कि सो रहा था,,,
नहीं मां तुम्हारी खूबसूरत जवानी का रस चखने के बाद भला मेरी आंखों में नींद कैसे आ सकती है मैं तो इसी समय का इंतजार कर रहा था,,,,,
क्यों जल्दी नहीं आ सकता था क्या,,,,
अरे मुझे डर था कि कहीं पिता जी वापस आ गए तो,,,
चुदवाते समय मधु की हिलती हुई चुचीया
अरे अब वह सुबह ही लौटेंगे तभी तो मैं तेरा इतनी बेसब्री से इंतजार कर रही थी,,,।
(इतना सुनते ही हरिया के कान खड़े हो गए उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि पहली बार में ही यह असर है अभी उसे अपने बेटे के लंड की मजबूती का एहसास हुआ और उसे पक्का विश्वास हो गया कि दुनिया की हर एक औरत मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर अपने ईमान से अपने संस्कार से फिसल सकती हैं जिसका जीता जागता सबूत उसकी आंखों के सामने था,,,, अपनी मां की बात सुनकर राजू जवाब देते हुए बोला,,,)
मुझे जरा भी इस बात का एहसास होता तो मैं अब तक तुम्हारी बाहों में होता,,,,
तो देर किस बात की है आजा मैं तो कब से तैयार हूं,,,,
तुम चिंता मत करो मैं आज की रात तुम्हारी जिंदगी की इतनी हसीन रात बना दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(अपने कुर्ते को उतारता हुआ राजू बोला और खटिए पर पीठ के बल लेटी हुई मधु अपनी नजरों को अपने बेटे की तरफ घुमा कर उसके पजामे में बने तंबू को देखने लगी और बोली,,,)
तेरे से जल्दी तो तेरा लंड तैयार हो जाता है,,,, देख कैसा पजामे में उछल रहा है,,,
क्या करूं मैं तुम्हारी नमकीन जवानी को देखकर ही इसकी हालत खराब हो जाती है,,,।
(हरिया तो अपनी बीवी के मुंह से लंड शब्द सुनकर एकदम से चौक गया था दोनों मां बेटों की बातें उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी एक तरफ उसे अपनी बीवी की बातों को सुनकर उसकी हरकत को देख कर गुस्सा भी आ रहा था तो अंदर का गरमा गरम नजारा उसे उत्तेजित भी कर रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें इतना तो तय हो गया था कि उसके बेटे ने जो कुछ भी बताया था उसमें बिल्कुल भी अविश्वसनीय झूठापन नहीं था बल्कि उसका का एक-एक शब्द सच्चाई से भरा हुआ था जो कि वह अपनी आंखों से देख रहा था,,,, हरिया की खुद की हालत खराब हो रही थी क्योंकि खटिया पर लेटी हुई मधु की चूचियां जिस तरह से ऊपर नीचे हो रही थी उसे देखकर हरिया की धोती में हलचल मचने लगी थी,,, देखते ही देखते राजू अपनी कुर्ते को उतार फेंका था उसकी नंगी चौड़ी छाती को देखकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे की चौड़ी छाती में समा जाना चाहती थी उसकी बाहों में अपने आपको सिमटता हुआ महसूस करना चाहती थी इसलिए खुद मधु अपनी बाहों को अपने बेटे की तरह फैला कर उसे खटिया पर आने का आमंत्रण दे रही थी जिसे राजू बिल्कुल भी ठुकराने के मूड में नहीं था और वह पजामे के ऊपर से ही अपनी खड़े लंड को पकड़ कर उसे जोर से दबाते हुए अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि अब कुछ भी छुपाने से कोई फायदा नहीं है लेकिन वह इस बात को अपनी मां से बिल्कुल भी बताना नहीं चाहता था कि दरवाजे पर उसके पिताजी खड़े हैं वरना जिस तरह से प्राकृतिक रूप से उसकी मां हमबिस्तर होने में उसका साथ दे रही है ऐसा वह हीचक के मारा कर नहीं पाएगी और फिर सारा मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,,
लालटेन की पीली रोशनी में सबकुछ साफ नजर जा था राजू और मधु दोनों ने ही कमरे में अंधेरा करना,,, उचित नहीं समझा और इसीलिए उजाले में ही काम क्रीड़ा को अंजाम देने लगे देखते ही देखते राजू खटिया पर घुटनों के बल चल गया और तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी मां की पीठ के नीचे की तरफ ले जाकर उसे हल्के से उठा लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा या देखकर दरवाजे पर खड़ा हरिया तिलमिला उठा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देख रहा है वह हकीकत है या कोई सपना है क्योंकि वह कभी इस तरह के नजारे के बारे में कल्पना भी नहीं किया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बीवी उसे इस तरह की बेवफाई करेगी,,,,,
राजू पागलों की तरह अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसने का उसके रस को नहीं छोड़ रहा था जिसमें हरिया की बीवी उसका बराबर का साथ दे रहे थे और अपने दोनों हाथों का घेरा बनाकर उसकी पीठ को सहला रही थी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,,,
कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां के लाल लाल होठों का रसपान करते रहो अच्छी तरह से जानता था कि दरवाजे पर खड़े उसके पिताजी सब कुछ देख रहे होंगे और ना जाने अपने मन में कैसे-कैसे विचार ला रहे होंगे,,,,, राजू सब कुछ जानता था इस मौके को वह हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह आज वह अपने पिताजी के सामने अपनी मां की ऐसी चलकर चुदाई करना चाहता था जिसे देखकर उसके पिताजी भी दंग रह जाएं,,,, उसके पिताजी को इस बात का एहसास हो कि असली मर्द किसे कहते हैं,,,,, इसीलिए कुछ देर तक अपनी मां के लाल लाल होठों का रस पीने के बाद राजू अपनी मां के होठों से अपने होठों को अलग करके गहरी गहरी सांस लेते हुए आंखों में खुमारी लेकर अपनी मां की तरफ देखने लगा और मधु भी अपने बेटे की तरफ देखने लगी और मंद मंद मुस्कुराते हुए शर्मा गई और बोली,,,,।
इस तरह से मत देख मुझे शर्म आती है,,,,
अच्छा जब मेरा मोटा लंड अपनी बुर में लेती हो तब शर्म नहीं आती,,,,।
(हरिया के कानों में अपनी बीवी और अपने बेटे की बात पढ़ते ही उसके तो होश उड़ गए इस तरह से खुलकर दोनों बात करेंगे इस बात का अंदाजा हरिया को बिल्कुल भी नहीं था इस तरह से खुलकर दो हरिया भी अपनी बीवी से बात नहीं करता था,,,, इसीलिए तो हरिया उन दोनों की बातों को सुनकर हैरान हो गया था और राजू की बात सुनकर हरिया की बीवी जवाब देते हुए बोली,,,)
बुर की बात कुछ और होती है वह तो पागल हो जाती है तेरे लंड को अपने अंदर लेकर लेकिन जब तुम मेरे चेहरे को इस तरह से देखता है तो शर्म से मेरा चेहरा लाल हो जाता है,,,,
और जब तुम्हारा चेहरा शर्म से लाल हो जाता है तो तुम दुनिया की सबसे ज्यादा खूबसूरत औरत नजर आने लगती हो जैसा कि इस समय तुम्हारे चेहरे पर शर्म की लाली एकदम साफ दिखाई दे रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है मां,,,,, बोलो तो आगे बढ़ु,,,,
(राजू जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था वह जानबूझकर आगे बढ़ने के लिए अपनी मां की इजाजत मांग रहा था वह जानता था कि उसकी मां उसे इनकार करने वाली नहीं है और अपनी मां की हामी सुनकर उसके पिताजी की हालत खराब हो जाएगी इसलिए राजू की बात को सुनकर मधु शरमाते हुए बोली)
तुझे रोका किसने है रे मेरे तन बदन पर तेरा पूरा अधिकार है क्योंकि तुझे मैं अपना तन सौंपती हूं तो तुझसे भी मुझे एक अपेक्षा रहती है कि तू मुझे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास कराएगा और जिसमें तो सफल भी हो जाता है इसीलिए तो मैं तुझे बिल्कुल भी रोक नहीं रही हूं तू अपनी मर्जी से आगे बढ़े और मुझे अपनी बाहों में लेकर पिघला दे,,,
ओहहहह मां तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम निश्चिंत रहो तुम्हें इतना सुख दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी लेकिन पहले हम दोनों के प्यार करने के बीच में जो वस्त्र आ रहे हैं उन्हें तो उतार दुंं,,,,
उतार दे बेटा तू सही कह रहा है इस खेल को खेलने के लिए नंगी होना बहुत जरूरी है वरना खेल का मजा अधूरा रह जाता है,,,,
अभी तुम्हारे कपड़े उतार कर तुम्हें नंगी कर देता हूं,,,
(इतना कहने के साथ ही राजू अपने दोनों हाथों को बढ़ाकर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा और यह नजारा देखकर दरवाजे पर खड़े हरिया की हालत खराब होने लगे उसकी आंखों में खून उतर आ रहा था लेकिन जितना खून उसकी आंखों में उतर रहा था उससे भी कहीं ज्यादा खून उसके लंड पर उतर रहा था जिसके चलते ना चाहते हुए भी अंदर के नजारे को देखकर खुद उसका भी लंड खड़ा हो गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था किस तरह के नजारे को देखकर गुस्सा करेगा इस नजारे का आनंद ले,,,, क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से चुदाई के खेल को देख रहा था,,,,, देखते ही देखते एक-एक करके राजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और अगले ही पल उसके दोनों खरबूजे ब्लाउज के कैद से आजाद हो गए,,,,, अपनी मां के खरबूजे को देखकर राजू की हालत खराब होने लगी और वह फटी आंखों से अपनी मां की चुचियों को देखने लगा,,,, ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां को नंगी कर रहा था उसकी चूची को देख रहा था बल्कि इस बार उसकी उत्तेजना और अत्यधिक बढ़ गई थी क्योंकि दरवाजे पर खुद उसके पिताजी खड़े होकर इस दृश्य को देख रहे थे और यह सोचकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित था कि एक बाप को कैसा महसूस होता है जब उसका ही बेटा उसकी ही बीवी को अपने हाथों से ही के कपड़े उतारकर उसे नंगी करें और यही एहसास इस समय राजू के तन बदन में आग लगाया हुआ था अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर दोनों सूची को दोनों हाथों में दशहरी आम की तरह पकड़कर दबाते हुए राजू एक बार फिर से अपनी मां के लाल लाल होठों पर हाथ रख दिया और उसके लाल होठों को चूसते हुए जोर-जोर से चूची को दबाना शुरू कर दिया राजू की हरकत से मधु के तन बदन में आग लगने लगी एकदम से उत्तेजना से बिलबिला उठी,,,,,।
सहहहरह आहहहहहह राजु,,,,,,
मजा आ रहा है ना मां,,,,
हा रे बहुत मजा आ रहा है तु कितनी जोर जोर से दबा रहा है,,,,,,,,,
क्या करूं मां तुम्हारी बड़ी बड़ी चूची देख कर मुझसे रहा नहीं जाता,,,,, कल तुम्हें बहुत मजा आया था ना,,,,
कमरे में राजु और उसकी मां कुछ ईस तरह से

हा रे पगले कल मुझे बहुत मजा आया था ऐसा सुख तो तेरे पिताजी ने भी आज तक नहीं दिया,,,,।
(इतना सुनते ही हरिया के होश उड़ गए उसे इसी बात का डर था वह जानता था कि,,, राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड को एक बार अपनी बुर में ले लेने के बाद मधु उसकी दीवानी हो जाएगी,,,,, और उसका यह डर हकीकत में बदलता नजर आ रहा था हरिया को अपनी बीवी से इस तरह के नीच हरकत की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी उसे ऐसा ही लगता था कि राजू के मन की बात जानते ही उसकी बीवी राजू को डाटेगी फटकारेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था बल्कि उल्टा एक मां अपने ही बेटे की मर्दानी की की दीवानी हो चुकी थी जो कि इस समय कमरे के अंदर पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आई थी,,,,, राजू पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को जोर जोर से दबा दबा उसका रस निचोड़ रहा था और मधु मदहोश ले जा रही थी उसकी आंखों में 100 बोतलों का नशा छाया हुआ था जो कि किसी भी तरह से उतरने वाला नहीं था,,,,, लेकिन अगले ही पल हरिया की आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर हरिया के होश उड़ गए क्योंकि आज तक इस तरह की क्रिया बेशर्मी से भरी हुई खुद उसके साथ उसकी बीवी ने नहीं की थी लेकिन अपने बेटे के साथ और पूरी तरह से खुल चुकी थी दरवाजे के पीछे खड़े होकर हरिया ने देखा कि उसकी बीवी पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़कर दबाते हुए गरम आहें भर रही थी और बोली,,,,
सहहहह आहहहहह मेरे बेटे,,,, तेरा तो एकदम मुसल जैसा खड़ा हो गया है रे,,,,।
आहहहह मां धीरे से क्या करूं जब से तुम्हारी बुर के दर्शन हुए हैं तब से मेरे लंड की हालत ऐसे ही खराब रहती है,,,,
मेरी बुर तुझे इतनी प्यारी लगने लगी है,,,,
राजु और उसकी मां कुछ ईस तरह से

तो क्या दुनिया में मेरे लिए तुम्हारी बुर से बेशकीमती उपहार और कोई नहीं है,,,, एक तरफ दुनिया भर का खजाना पड़ा हो और एक तरफ तुम्हारी बुर तुम्हें खजाना को छोड़कर तुम्हारी बुर को पसंद करो क्योंकि जो मजा जो स्वर्ग का आनंद मुझे तुम्हारी बुर से मिलता है वह मुझे दुनिया भर के खजाने से कभी नहीं मिल सकता,,,,,
ओह मेरे राजा मैं कभी सोची नहीं थी कि तू मेरी बुर से इतना प्यार करने लगेगा,,,(पैजामा के ऊपर से ही मधु अपने बेटे के लंड को जोर-जोर से दबाते हुए बोली अंदर के गरमा गरम नजारे को देखकर और मां बेटे की मदहोश कर देने वाली वार्तालाप को सुन कर खुद हरिया के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी इस समय हरिया को अपनी बीवी एक रंडी की तरह लग रही थी जो कि पूरी तरह से अपने रंडी पन पर उतर आई थी,,,,,)
मुझे तो तुमसे तुम्हारी खूबसूरत बदन से तुम्हारे हर एक अंग से प्यार हो गया है,,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी प्यासे होठों को आगे बढ़ाया और अगले ही पल अपनी मां की चूची के छुहारे को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और अपने बेटे की इस हरकत पर मधु पूरी तरह से सिहर उठी,,,,,, राजू पागलों की तरह अपनी मां की दोनों चूची को दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था मानो कोई भूखा बच्चा दूध पीने की कोशिश कर रहा हो,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां की दोनों चुचियों को दशहरी आम समझकर बारी-बारी से पीता रहा,,,, और राजू को इस बात का एहसास और ज्यादा मदहोश कर रहा था कि बाहर दरवाजे पर खड़े होकर उसके पिता अंदर के नजारे को अपनी आंखों से देख रहे हैं और यह भी देख रहे हैं कि एक जवान लड़का कैसे अपनी मां के खूबसूरत अंगों से खेल रहा है,,,,। हरिया की धोती में उसका खुद का लंड बगावत पर उतर आया था जिस तरह का नजारा वह अपनी आंखों से देख रहा था उसका मन कर रहा था कि जाकर अपनी बहन के कमरे का दरवाजा खोल कर कमरे में प्रवेश कर जाए और फिर उसकी जमकर चुदाई करके अपने बदन की गर्मी को शांत कर दें लेकिन शायद उस सुख से ज्यादा अत्यधिक सुख उसे इस समय अपने बीवी और अपने बेटे की कामलीला कुछ ज्यादा ही आनंददायक लग रहा था,,,,,
लालटेन की पीली रोशनी में हरिया को एकदम साफ नजर आ रहा था और राजू खुद कमरे की लालटेन को बुझाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं किया था और जानबूझकर कमरे में उजाला किए हुए था ताकि उसके पिताजी अपनी ही बीवी की कामलीला को अपनी आंखों से देख सकें,,,,, मधु की गरम आहे साफ बयां कर रही थी कि उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह पागलों की तरह पजामे में कैद अपने बेटे के लंड को जोर जोर से दबा रही थी लेकिन जब बिल्कुल भी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो वह अपने बेटे से बोली,,,,)
राजू और उसकी मां कुछ ईस तरह से

मेरे राजा मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है जल्दी से अपना पजामा उतार दे,,,,, मैं तेरे लंड को अपनी आंखों से देखना चाहती हूं इसे छूना चाहती हूं पकड़ना चाहती हूं दबोचना चाहती हूं,,,,, जल्दी कर मेरे राजा,,,,ओहहहह मेरे राजा,,,,,
(इतना सुनते ही राजू जो कि पहले से ही खटिया पर बैठा हुआ था वह खटिया पर ही घुटनों के बल हो गया और वह खुद अपने पैजामा को नीचे सरका पाता इससे पहले ही मधु अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ा कर खुद अपने हाथों से अपने बेटे के पजामे को नीचे खींच ली और तुरंत राजू का बमपिलाट लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर मधु के मुंह में पानी आ गया और इस नजारे को देखकर खुद हरिया की आंखें फटी की फटी रह गई और अपने मन मे यह सोचने लगा कि आखिर क्यों औरत का मन ना बहक जाए जब उसकी आंखों के सामने इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड हो तो,,,,,,, खुद हरिया का दिल जोरो से धड़कने लगा था अपने बेटे के लंड को देखकर और उसे देख कर जिस तरह की चमक उसकी बीवी की आंखों में दिखाई दे रही थी उससे एक तरफ वह शर्मिंदा भी था और उत्सुक भी था कि अब उसकी बीवी अपने ही बेटे के लंड के साथ क्या करेगी और उसके सोचने के मुताबिक ही मधु झट से अपना एक हाथ आगे बढ़ाई और अगले ही पल अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ कर पागलों की तरह उसे दबाने लगी पुचकारने लगी,,,,,
इस नजारे को देखकर हरिया समझ गया था कि उसकी बीवी कुछ अद्भुत करने वाली है और यही सोच कर उसका दिल बैठा जा रहा था राजू अच्छी तरह से जानता था कि आप उसके लंड के साथ उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए दरवाजे की तरफ मुस्कुराता हुआ देख ले रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसके पिताजी उन दोनों को ही देख रहे हैं,,,,, और देखते ही देखते मुझे अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे के लैंड के करीब ले जाने लगी और यह नजारा देखकर हरिया की धोती में गदर मचाने लगा हरिया पागल होने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह जानता था कि आप अगले पल क्या होने वाला है उसके सोच के मुताबिक ही मधु अपने बेटे के लंड के आलूबुखारा के सामान सुपाड़े को अपने लाल-लाल होठों के बीच दबा ली और से चूसना शुरु कर दी यह देखकर हरिया की हालत ऐसी हो गई मानो कि जैसे उसे सांप सो गया हो वह पागलों की तरह फटी आंखों से अपनी संस्कारी बीवी की छीनार वाली हरकत को देख रहा था,,,,, कुछ पल के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है लेकिन जब उसे थोड़ी देर में इस बात का एहसास हुआ तब तक मधु पूरी तरह से अपने बेटे के ऊपर छा चुकी थी वह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को पूरा गले तक उतार कर उसे चूस रही थी,,,,,,
मधु

हरिया इस बात से हैरान था कि उसकी बीवी इस तरह का सुख उसे कभी नहीं दी थी हालांकि वह भी अपने पति के लैंड को मुंह में लेकर चुस्ती थी लेकिन उसके इस हरकत में वह रंडी पर नजर नहीं आ रहा था जैसा कि अपने बेटे के साथ नजर आ रहा था,,,,,, हरिया को साफ नजर आ रहा था कि अपनी मां की हरकत से राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा है उसकी आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी है और वह हल्की-हल्की अपनी कमर को पानी के हिलोरे की तरह चला रहा था और बार-बार बंद आंखों से दरवाजे की तरफ देख ले रहा था और मुस्कुरा दे रहा था मानो कि जैसे राजू अपने पिता की चुटकी ले रहा हो कि देखो मैं तुम्हारी बीवी के साथ क्या कर रहा हूं,,,,।
ओहहह मां,,,,, मेरी रानी मेरा मोटा लंड तुम्हारे मुंह में कितना खूबसूरत लग रहा है,,, पिताजी का भी इसी तरह से मुंह में लेकर चुस्ती होगी ना,,,,।
हां रे,,,(कुछ पल के लिए अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर) लेकिन मेरे राजा जो मजा तेरे लंड को मुंह में लेकर आता है,,,, वह मजा तेरे पिताजी के लंड में बिल्कुल भी नहीं आता क्योंकि तेरे पिताजी का लंड तेरे से भी आधा है,,,
और मेरा,,,,
तेरा तो इतना मोटा और लंबा है कि ठीक तरह से मुंह में भी नहीं आता,,,,,(और इतना कह कर वापस लंड को मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दी,,,,)
मोटा और लंबा लंड की औरत को ज्यादा मजा देता है तभी तो मैं तुम्हें पिताजी से भी ज्यादा मजा देता हूं और उससे ज्यादा देर तक तुम्हारी चुदाई करता हूं,,,,.
(हरिया हैरान था अपनी बीवी और अपने बेटे की बातों को सुनकर क्योंकि उसे साफ महसूस हो रहा था कि वह दोनों बातों ही बातों में उसकी मर्दानगी पर सवाल उठा रहे थे,,,, कोई और समय होता तो शायद हरिया इस बात का जवाब जरूर देता लेकिन इस समय मजबूर था,, कुछ भी कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था इसलिए खामोश होकर अंदर के नजारे को देखता ही रहा,,,,
ओहहह मां,,,सहहह आहहहहहहहह,,,,, बहुत मजा आ रहा है मेरी रानी बस ऐसे ही पूरी अंदर तक लो,ऊममममम लाजवाब अति उत्तम तुम बहुत अच्छी हो,,,आहहहहह,,,,।
(राजू पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और इस नजारे को देखकर हरिया की हालत खराब हो रही थी,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से मजा लेता रहा और अपनी मां को देता है लेकिन अब वह कुछ और करना चाहता था इसलिए अपनी मां की कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर उसे धक्का दिया और उसकी मां खटिया पर पीठ के बल लेट गई और फिर,,,, राजू धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को उतारना शुरू कर दिया और देखते ही देखते अपनी मां का साथ पाकर राजू अपनी मां की साड़ी उतारने में कामयाब हो गया जिसे उतार करवा नीचे जमीन पर फेंक दिया और इस समय उसकी मां उसकी आंखों के सामने केवल पेटीकोट में थी और उसकी बड़ी-बड़ी दोनों खरबूजा जैसी चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह छाती पर लौट रही थी,,,,, जिसे देखकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी अपनी मां की पेटीकोट उतार करवा उसे पूरी तरह से नंगी करता है इससे पहले वह धीरे से खड़ा हुआ और खटिया पर खड़े खड़े ही अपने पजामे को उतारकर वह भी एकदम नंगा हो गया उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर हरिया का गला सूखता जा रहा था,,,,, और फिर धीरे से राजू अपनी मां के करीब बैठ गया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटिकोट की डोरी को पकड़ता हुआ बोला,,,,)
मजा तो तब आता है जब तु एकदम नंगी हो जाती है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की पेटीकोट की डोरी को एक झटके से खींच दिया और अगले ही पल कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई जिसे राजू अपने हाथों का सहारा देकर उतारने लगा और अपने बेटे का साथ देते हुए मधु खुद अपनी बारी बड़ी गांड को हवा में ऊपर की तरफ उठाकर उसे पेटीकोट उतारने में मदद करने लगी और जैसे ही राजू ने देखा कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाई है तो वह तुरंत पेटीकोट को एक झटके से नीचे खींच कर उसके पैरों से बाहर निकाल कर फेंक दिया और अपनी मां को एकदम नंगी कर दिया,,,,,।
नंगी होने के बाद मधु की जवानी एकदम से खिल उठी थी जिसे देखकर खुद उसके बेटे के मुंह में पानी आ रहा था और बाहर खड़े हरिया के द्वारा तो यह दृश्य देखा नहीं जा रहा था अपने बेटे की आंखों के सामने उसकी बीवी पूरी तरह से नंगी खटिया पर लेटी हुई थी जिसमें बिल्कुल भी शर्म नहीं थी वह एकदम से बेशर्म हो चुकी थी वरना ऐसी कौन सी मां होगी जो अपने बेटे के सामने एकदम नंगी बिस्तर पर लेटी होगी,,,,
सहहहरह ,,(जांघों पर दोनों हाथ रखते हुए) कसम से मेरी जान नंगी होने के बाद तो तो तू स्वर्ग से उतरी भी अप्सरा लगती है तुझे देखकर मैं पागल हुआ जा रहा हूं,,,(अपनी मां की बुर की तरफ देखते हुए) देख नहीं रही है मेरी रानी तेरी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,,(अपने बेटे के मुंह से इस तरह के शब्दों का प्रयोग और अपनी ही मां के लिए करता हुआ देखकर हरिया खुद शर्म से पानी पानी हो जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा अपनी मां से इस तरह की गंदी बातें कैसे कर सकता है)
कसम से मैं तेरी बुर का पानी एकदम अमृत की तरह है जिसे पीना बहुत जरूरी है,,,
तो रोका किसने है मेरे राजा,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने दोनों टांगों को खोलकर अपने बेटे को आमंत्रण देने लगी कि अंदर आकर अपनी मनमानी कर ले और इस नजारे को देखकर हरिया के तन बदन में आग लग गई क्योंकि अपने बीवी के रंडीपन से वह पहली बार वाकिफ हो रहा था,,,। और दूसरी तरफ राजू अपनी मां की तरफ से आमंत्रण बातें ही उसकी इजाजत मिलते ही वह तुरंत अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंच गए और फिर दोनों हाथों से थोड़ा सा भी मां की टांगों को खोलता हुआ अपने लिए जगह बनाने लगा ठीक उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत रसों से भरा हुआ बुर अपना पूरा उभार लिए हुए नजर आ रहा था,,,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह तुरंत अपने पैसे होठों को अपनी मां की फूली हुई बुर पर चिपका दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया उत्तेजना के मारे मधु की बुर कचोरी की तरह भूल चुकी थी जो कि देखने में बहुत ही मदहोश कर देने वाली नजर आ रही थी एक तरफ मधु अपनी बुर से अपने बेटे को पूरी तरह से पागल किया हुए थी वहीं दूसरी तरफ हरिया अपनी बीवी और अपने बेटे की हरकत पर पूरी तरह से शर्मिंदगी से गड़ा जा रहा था एक तरफ वह शर्म से पानी पानी भी हो रहा था और एक तरफ अपनी बीवी के साथ अपने ही बेटे को इस तरह की शर्मनाक हरकत करते हुए उसके बदन में अजीब सी हलचल भी पैदा हो रही थी अपने बेटे से और अपनी बीवी से उसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी जिस तरह से उसका बेटा पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था यह देखकर हरिया को समझ में नहीं आ रहा था कि वाकई में यह उसी का बेटा है या कोई और आया है जो अपनी ही मां को पागलों की तरह प्यार करते हुए उसकी बुर को चाट रहा है,,,,
चपर चपर बुर चाटने की आवाज हरिया के कानों तक सुनाई दे रही थी जो कि इस बात की पूर्ति कर रहे थे कि राजू कितना मदहोश होकर अपनी मां की बुर से प्यार कर रहा है और अपने बेटे का यह प्यार पाकर खुद मधु मदहोश में जा रही है वह पागलों की तरह अपना सरदाएं पानी पटक रही थी उससे यह उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,,, राजू जहां तक होता था वहां तक अपनी जीभ को अपनी मां की बुर की गहराई में उतार कर उधर की मलाई चाटने की पूरी कोशिश कर रहा था और राजू की यह हरकत मधु की उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहे थे,,,,, अपनी बीवी की मदहोशी पन को देखकर हरिया धोती के ऊपर से यह अपने लंड को पकड़ कर दबा रहा था वह चाहता तो अपनी बहन के कमरे में जाकर अपने बदन की गर्मी को शांत कर सकता था लेकिन वह अपनी बीवी और अपने बेटे की कामलीला को पूरी तरह से अपनी आंखों से देख लेना चाहता था अब इसमें तो उसे बिल्कुल भी शक नहीं रह गया था कि जो कुछ भी राजू कह रहा था वह बिल्कुल ही सच कह रहा था उसमें जरा सी भी झूठा पन नहीं था या बनावटी नहीं था,,,,
राजू और उसकी मां कुछ ईस तरह से

कुछ देर तक राजू इसी तरह से खटिया पर घमासान युद्ध की तैयारी करता रहा वह अपनी मां की बुर में लंड डालने से पहले उसे पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहता था ताकि वह बड़े आराम से मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में ले सकें,,,, और फिर धीरे से अपने फोटो को अपनी मां की बुर पर से अलग किया और अभी भी राजू के होठों से उसकी मां का काम रस टपक रहा था,,,,,
अपनी मां की दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल अपने लिए जगह बनाता हुआ अपने लंड को एक हाथ से हीलाते हुए वह बोला,,,,।
बस करो मेरी रानी थोड़ा सा अपनी गांड ऊपर उठाओ और फिर तब देखना मैं तुम्हें कैसे आसमान की सैर कराता हूं,,,,
(और फिर इतना कहते ही राजू अपनी मां की कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी आदि गांड को अपनी जान पर चढ़ा लिया ऐसा करने पर उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ नजर आने लगी और फिर एक बार फिर से दरवाजे की तरफ राजू अपने पिता को देखा और फिर जैसे कि उनसे आशीर्वाद मांग रहा हो इस तरह से वह खुश होकर अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद से छुआ दिया जिसका स्पर्श पाते ही मधु एकदम से सिहर उठी और अगले ही पल वह अपनी बुर के अंदरूनी भाग में अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को प्रवेश करता हुआ महसूस करने लगी और अपनी आंखों से देखने भी लगी,,,
देखते ही देखते राजू अपने पिता की मौजूदगी में ही भले ही वह कमरे के बाहर दरवाजे के पास खड़े होकर अंदर का द नजारा देख रहे हैं फिर भी राजू के मन में जरा सा भी झिझक जरा सा भी डर अपने पिताजी को लेकर नहीं थी और इसी का फायदा उठाते हुए राजू अपने पिताजी के सामने ही अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया देखते ही देखते अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में उतारकर उसे बाहर की तरफ खींच कर अपनी कमर को हल्के हल्के हिलाना शुरू कर दिया और इस तरह से अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया,,,,,
मधु का चेहरे का रंग बदलने लगा था वह मदहोश हुए जा रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी बढ़ रही थी,, राजू के धक्के का प्रहार बढ़ता जा रहा था उसके धक्कों के साथ खटिया चरर मरर कर रही थी खटिया के चरर मरर की आवाज को सुनकर हरिया का लंड अपनी औकात से बाहर आ गया था,,,। इतनी जबरदस्त चुदाई तो उसने आज तक नहीं किया था लगातार अपनी बीवी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर वह समझ गया था कि अगर ऐसा सुख औरत को बाहर मिलने लगेगा तो घरवाले की जरूरत ही नहीं पड़ेगी वह अपने बेटे की मर्दानगी को देखकर अपनी मर्दानगी से शर्मिंदा होने लगा था,,,,,
फच्च फुच्च की आवाज के साथ राजू अपनी मां को चोद रहा था और बाहर खड़ा हरिया कुछ भी कर नहीं पा रहा था ना ही इस काम क्रीड़ा को बंद कर पा रहा था क्योंकि अगर वह ऐसा करता तो राजू अपनी मां को उसके और गुलाबी के बीच के रिश्ते के बारे में बता देता और फिर ना जाने क्या हो जाता इसी डर से राजू कि पिताजी एकदम खामोश खड़े होकर अपनी आंखों के सामने ही अपनी बीवी की बेवफाई देख रहे थे एक मां को अपने बेटे के साथ हमबिस्तर होता हुआ देख रहे थे,,,,
हर धक्के के साथ मधु की आह निकल जा रही थी उसके मुंह से चीख निकल जा रही थी लेकिन उसे मजा भी बेहद अद्भुत तरीके का प्राप्त हो रहा था जिसे महसूस करके वह तृप्त हुए जा रही थी जो कि उसका चेहरा साफ बता रहा था देखते ही देखते मर्दों की सांसे अपने बेटे के तेज झटकों के साथ बढ़ने लगी और कुछ ही झटको में मां बेटे पूरी तरह से एक दूसरे को आपस में कस के पकड़ कर झढ़ना शुरू कर दिए,,,, हरिया या देखकर पूरी तरह से शर्म से गड़ा जा रहा था कि एक सका बेटा अपनी ही मां की बुर में झड़ रहा था और खुद उसकी मां अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रखकर उसे कस के दबाई हुई थी मानो कि उसके लंड का सहारा रस अपनी बुर से निचोड लेना चाहती थी,,,,,
दोनों चरम सुख को प्राप्त कर चुके थे दोनों एक दूसरे की बाहों में कुछ देर इसी तरह से लेटे रहे हरिया वहां से चला जाना चाहता था लेकिन उसका एक मन वहां उसे रोकने के लिए कह रहा था वह देखना चाहता था कि अब आगे क्या होता है थोड़ी देर बाद मधु अपने ऊपर से अपने बेटे को हटाने लगी तो राजू धीरे से अपनी मां के ऊपर से उठने लगा और साथ ही उसका मोटा सा बड़ा लंड जो कि अभी भी मधु की बुर में घुसा हुआ था वो धीरे से बाहर निकला और फिर मधु मुस्कुराते हुए अपनी जगह से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठाकर पहनने लगी तो राजू अपनी मां की सारी को अपने हाथ से पकड़ कर खींच कर फिर से उसे जमीन पर फेंकता हुआ बोला,,,,।
अभी से साड़ी क्यों फेंक रही हो अभी तो पूरी रात बाकी है,,,
(इतना सुनकर खुद हरिया हैरान हो गया उसे लगा था कि यह खेल नहीं बंद हो जाएगा और राजू वापस अपने कमरे में चला जाएगा लेकिन वह तो इस खेल को भी जारी रखना चाहता है जोकि हरिया आज तक ऐसा नहीं कर पाया था क्योंकि जिस तरह की घमासान में चुदाई कर रहा था इसे चुदाई करने पर वह खुद एकदम से थक जाता था लेकिन राजू की तरह वह फिर भी चुदाई नहीं कर पाता था,,,,)
अरे पेशाब करने जा रही हूं मुझे बड़े जोरों की लगी है,,,
(इतना सुनते ही हरिया एकदम से हड़बड़ा गया क्योंकि अगर मधु पेशाब करने के लिए निकलेगी तो बाहर आ जाएगी और फिर वह हरिया को देख लेगी लेकिन तभी राजू मामले को संभालते हुए बोला)
तो इसके लिए बाहर जाने की क्या जरूरत है यहीं पर पेशाब करना वह कोने में,,,,,
तु सच में बहुत पागल है,,,(कमरे में कोने की तरफ देखते हुए मधु बोली,,,, हरिया को ऐसा लग रहा था कि उसकी बीवी अपने बेटे की आंखों के सामने पेशाब नहीं करेंगे क्योंकि यह भी एक अपने बेटे के सामने करने वाली शर्मनाक हरकत थी लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध मधु बोली,,,) तेरे सामने पेशाब करने में शर्म आती है,,,,।
(शर्म आती है इस तरह का शब्द अपनी बीवी के मुंह से सुनकर हरिया को कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि इस तरह का शब्द है तभी प्रयोग किया जाता है जब इस तरह की हरकत बहुत पहले से की जाती हो लेकिन राजू के कहे मुताबिक उन दोनों के बीच कल ही इस तरह का रिश्ता बना था लेकिन फिर हरिया अपने मन में सोचने लगा कि कल दिन भर उन दोनों के पास समय तो हो सकता है दोनों आपस में खुलकर इतना खुल गए हो कि मधु अपने ही बेटे के सामने पेशाब करने में शर्म नहीं महसूस करती हो और यही सोचकर हरिया बात को आई गई कर गया था और अपनी आंखों के सामने अपनी बीवी को गांड मटका ते हुए कमरे के कोने में जाते हुए देखने लगा यह देख कर हरिया के लंड का पानी निकलते निकलते बचा जब वह अपने ही बेटे के सामने मुस्कुराते हुए देखकर मुतने के लिए बैठने लगी,,,, और फिर उसी तरह से बैठकर पेशाब करने लगी,,,, जिस तरह से पूरी तरह से खुलकर बेशर्म की तरह मधु अपने ही बेटे के सामने पेशाब कर रही थी इस तरह से खुलकर कभी वह अपने पति के सामने नहीं की थी और इस बात का मलाल हरिया के चेहरे पर साफ झलक रहा था और हरिया यह देखकर यह सोचने लगा कि,,,, शायद उम्र के इस पड़ाव पर एक जवान लड़का और उसका जवान लंड पाकर उसकी जवानी एकदम से खिल उठी हो,,,,।
जहां एक तरफ अपनी बीवी की शर्मनाक हरकत देखकर हरिया अचंभित था वहीं दूसरी तरफ अपने बेटे की हरकत को भी देख रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि लालटेन की पीली रोशनी में उसकी बीवी एकदम नग्नावस्था में कमरे के कोने में बैठकर पेशाब कर रही है और अपनी ही मां की नंगी गांड और उसे पेशाब करता हुआ देखकर राजू का लंड फिर से खड़ा होने लगा था जिसे वह अपने हाथ में लेकर पकड़ कर उसे हिला रहा था,,,,,
अपनी मां की घमासान चुदाई किए हुए उसे अभी 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि अपनी मां की नंगी गांड को देखकर एक बार फिर से उसका लंड खड़ा हो गया था और वह देखकर हरिया खुद आश्चर्यचकित हो गया था क्योंकि इतने कम अंतराल के समय में खुद उसका लंड इतनी जल्दी खड़ा नहीं हुआ था लेकिन उसके बेटे का लंड पल भर में ही खड़ा हो चुका था एक बार फिर से वह अपनी मां को चोदने के लिए तैयार हो चुका था अपने बेटे की मर्दानगी भरी ताकत को देखकर खुद है हरिया की हालत खराब हो गई थी राजू धीरे से खटिया पर से उतरा और अपना लंड हिलाते हुए धीरे से अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपनी मां को पेशाब कर लेने का इंतजार करने लगा और फिर जैसे ही मधु पेशाब करने के बाद उठ कर खड़ी हुई और राजू की तरफ घूमी राजू पल भर का भी समय अपनी मां को दिए बिना उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर पीता हुआ अद्भुत ताकत का परिचय दिखाते हुए तुरंत अपनी मां को गोद में उठा लिया और उसकी दोनों टांगों को उठाकर अपनी कमर के इर्द-गिर्द लपेट लिया जिससे उसके कंधों में बाहों का हार डालकर मधु एकदम से उसके ऊपर लटक गई और राजू मौके का फायदा उठाते हुए अपने मोटे खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मां की गुलाबी छेद का रास्ता अपने लंड को दिखाता हुआ वह धीरे-धीरे उसमें अपने लंड को प्रवेश कराने लगा,,,,,
हरिया अपने बेटे की अद्भुत काम शक्ति को देखकर पूरी तरह से प्रभावित हो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे में इतनी अत्यधिक प्रचुर मात्रा में काम शक्ति भरी हुई है जो कि वह पूरी तरह से अपनी काम शक्ति का प्रयोग अपनी मां पर ही कर रहा था और इसी काम शक्ति के प्रभाव में उसकी मां पूरी तरह से अपने बेटे की आकर्षण में डूब चुकी थी देखते ही देखते राजू अपने लंड की सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद में डालकर उसे अपनी बाहों के झूले में झूला थे उसे चोदना शुरू कर दिया हरिया इस बात से भी हैरान था कि उसकी बीवी का वजन कुछ ज्यादा था लेकिन राजू को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था उसके वजन को लेकर क्योंकि राजू की काम शक्ति का पलड़ा को ज्यादा ही भारी था वह बड़े आराम से अपनी मां को गोद में लेकर चोद रहा था और इस चुदाई का भरपूर आनंद उसकी माल ले रही थी जांघों से जांघों के टकराने की आवाज पूरे कमरे में अद्भुत वातावरण को बना रही थी इस आवाज को सुन कर खुद हरिया की हालत खराब हो जा रही थी और राजू इसी अवस्था में अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही ताबड़तोड़ धक्के पर धक्के लगा रहा था और वह भी बिना थके बिना हिले वह एकदम मदहोश होकर अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसे चोद रहा था और ऐसा लग रहा था कि मधु को भी अपने बेटे पर पूरा भरोसा था जो कि निश्चिंत होकर उसकी गोद में झूल रही थी,,,,,
इस तरह से राजू अपनी मा को गोद में उठा कर चोदता हुआ

और राजू इसी तरह से अपनी मां को चोदते हुए एक बार फिर से उसका पानी निकाल चुका था अब हरिया का वहां खड़ा रहना उचित नहीं था वह शर्मसार हो चुका था अपनी आंखों के सामने अपनी संस्कारी बीवी को रंडी की तरह चुदवाते हुए देखकर उसकी खुद की आत्मा जवाब दे चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और वो धीरे से घर से बाहर निकल गया और रात भर राजू अपनी मां को सोने नहीं दिया और उसको चोदता रहा,,,,।

