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अभी के लिए तो उनका वहां से निकलना ज़रूरी था

इसलिए निशा ने जल्दी-2 अपने सारे कपड़े पहने

फिर दोनो ने बाथरूम में जाकर अपना हुलिया भी ठीक किया और चुपचाप दोनो स्कूल से बाहर निकल आए

दूर छुपा हुआ बिनोद उन दोनो को जाते हुए देखता रहा

वो आने वाले दिनों के बारे में सोच-सोचकर खुश हो रहा था

अनु को भी घर पहुँचने की जल्दी थी

अपनी माँ की चुदाई वो एक बार फिर से देखना चाहती थी

घर पहुँची तो सर की कार उसे बाहर ही दिख गयी, जैसी की उसे उम्मीद थी

उसने बेग से डुप्लीकेट चाभी निकाली और धीरे से दरवाजा खोलकर वो अंदर आ गयी

हालाँकि सर को निकले हुए एक घंटे के करीब हो चुका था, पर उसे ये भी उम्मीद थी की आने के साथ ही वो चुदाई तो नही करने लग जाएँगे

चाय या लंच तो करेंगे ही

पर जब ठरक चढ़ी हो तो इन बातों की फ़िक्र भी तो नही रहती

वो तो बस एक उम्मीद ही कर सकती थी की उन्होने अभी तक कुछ ना किया हो

ताकी वो सब अपनी आँखों से एक बार फिर से देख सके

पर ऐसा तो हो ही नही सकता था ना

सुधीर को आए एक घंटा हो चुका था और उनका एक राउंड पूरा भी हो चुका था

और चुदाई के बाद दोनो एक दूसरे के नंगे जिस्मो से लिपटकर बेड पर लेटे थे

अब एक राउंड हो चुका है, इसका मतलब ये तो नही की आपको उसका नज़ारा देखने को ना मिले

ये मैं कैसे होने दे सकता हूँ

इसलिए आपको पिछले एक घंटे की कहानी सुधीर सर के नज़रिए से सुनाते है

सुधीर सर की ज़ुबानी

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जैसे ही अनु ने बताया की शेफाली मेरा इंतजार कर रही है तो मेरे दिमाग़ में उसका नंगा जिस्म कौंध गया

जहाँ वो बेड पर नंगी मेरा ही इंतजार कर रही थी

 

मैने जल्दी से अपना लैपटॉप फोल्ड करके बेग में डाला

और लगभग भागता हुआ स्कूल से निकलकर बाहर खड़ी अपनी कार में बैठ गया

स्कूल से शेफाली के घर का रास्ता करीब 20 मिनट का था पर पता नही कैसे मैं सिर्फ़ 10 मिनट में ही वहाँ पहुँच गया

वक़्त तो कार का इंजन बंद करके चाभी निकालने का भी नही था

मन कर रहा था की कूदकर अंदर पहुँच जाऊं

दरवाजे पर पहुँचकर मैं थोड़ा सामान्य हुआ और अपने कपड़े और हुलिया ठीक करके बेल बजाई

कुछ ही देर में शेफाली ने दरवाजा खोल दिया

उसे लग रहा था की शायद अनु होगी क्योंकि ये उसके घर आने का समय होता है

पर मुझे देखकर वो चोंक गयी और अंदर भाग गयी

और उसका कारण था उसके कपड़े

जो उसने पहने ही नहीं थे

जी हां , वो नंगी ही दरवाजा खोलने चली आई थी

 

रात को सैक्स की खुमारी में नंगी सोने का शौंक जो था उसे

और उसी आलस्य की वजह से आज छुट्टी भी की थी

बेल बजी तो आधी अधूरी नींद में उसने घड़ी देखी और दरवाजा खोलने चल दी नंगी ही

बिना इस बात की परवाह किए की बाहर कोई और भी हो सकता है

अंदर आकर उसने जल्दी से चादर उठाई और अपने जिस्म पर लपेट ली और दीवार से जा चिपकी

उसका दिल जोरों से धड़क रहा था

ये तो शुक्र था की मैं था

कोई और होता और उसे इस हालत में देख लेता तो उसकी इज़्ज़त का क्या होता

यही सोचकर बेचारी शेफाली शर्म से गड़ी जा रही थी

मेरा तो मुँह ही खुला रह गया उस बेशक़ीमती नंगेपन को देखकर

जैसे हीरों से भरी कोई तिज़ोरी देख ली हो

इसे जितनी बार भी देखो अलग ही लगती है

मेरा शादी करने का निर्णय बिल्कुल सही था शेफाली के साथ

ऐसे रोज इसे देखकर लाइफ एकदम मस्त होने वाली है मेरी तो

मैने दरवाजा बंद किया और भागकर अंदर आ गया

वो डरी सहमी सी दीवार से चिपककर खड़ी थी

चादर तो लपेटी थी पर उसका तराशा हुआ बदन सॉफ देखा जा सकता था

कमर तो पूरी नंगी थी उसकी

पर आँखे बंद करते ही मुझे अनु की लॅंड चुसाई याद आ गयी

उसी का कमरा था ये, कल की तो बात थी जब वो मुझे इसी बेड पर लिटा कर मेरा लॅंड चूस रही थी

उफ्फ

ये तो ज़्यादा ख़तरनाक है

क्योंकि अनु के बारे में सोचकर तो मैं बिना हिलाए ही झड़ सकता हूँ

इतना सैक्स भरा है उसके नाम में ही

मैने आँखे खोल ली, शेफाली अब खुद अपनी आँखे बंद करके मज़े से मेरा लॅंड चूस रही थी

अब मुझे जल्दी झड़ने का कोई डर नही था

पर मुझे भी तो कुछ मज़े लेने थे

इसलिए मैने उसे पलटकर 69 के पोज़ में कर लिया और अब वो मेरा लॅंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत

मुझे इन माँ बेटी में एक बात सबसे ज़्यादा पसंद आई थी

वो ये की दोनो अपनी चूत हमेशा चिकनी रखती थी

जीभ रखो तो फिसलती चली जाए

जैसे मक्खन की टिकिया पर रख दी हो जीभ

दोनो की चूत का स्वाद भी एक जैसा ही था

होता भी क्यों नही, इसी चूत से जो निकली है अनु

करीब 5 मिनट तक हम दोनो ने एक दूसरे के अंगो को पूरी तरह से चमका कर चुदाई के लिए तैयार कर दिया

एक मर्द को यही तो चाहिए

पहले लिप्स और बूब्स चूसने को मिल जाए

फिर लॅंड चूस ले वो और फिर 69 में अपनी मलाई भी खिला दे

उसके बाद जो चुदाई का मज़ा आता है ना, उसका कोई मुकाबला ही नही है

और अब चुदाई का वक़्त आ चुका था

वो खुद पलटी और अपने गीले होंठो से मुझे अच्छे से चूसा

उसके होंठो से मेरे लॅंड की महक आ रही थी

और मेरे मुँह से उसकी चूत की

सब कुछ मिलकर एक नयी खुश्बू का निर्माण कर रहे थे

मेरे होंठो को चूसते-2 उसकी चूत मेरे खड़े लॅंड से छेड़खानी कर रही थी

मैने हाथ नीचे करके लॅंड को अंदर धकेलना चाहा तो उसने शरारतीपन दिखाते हुए मेरे दोनो हाथों को मेरे सिर के पास दबा कर दबोच लिया और मुस्कुरा दी

मैं : “क्यों तरसा रही हो शेफाली…प्लीज़ डालने दो ना…”

शेफाली : “इतनी भी क्या जल्दी है, ये तुम्हारी सज़ा है, बिना बताए आने की…”

मैं : “अच्छा जी, एक तो सरप्राइज़ दिया तुम्हे, उपर से मुझे सज़ा दे रही हो , मैं ना आता तो आज का दिन तुम ऐसे ही सोते हुए निकाल देती, बिना कुछ करे, मैं आ गया तो ये सब करने को मिला…“

उसके चेहरे की हँसी बता रही थी की बात तो मैने सही कही थी, इसलिए उसने मेरे हाथ छोड़ दिए

पर इस बार मैने अपने लॅंड को पकड़ कर अंदर नही डाला बल्कि उसके दोनो हाथो को पकड़ कर उसकी पीठ पर बाँध दिया

वो कसमसा कर रह गयी, उसके दोनो मोटे मुम्मे मेरी छाती पर और ज़ोर से दब गये

अब गिड़गिड़ाने की बारी उसकी थी

वो कराहती हुई बोली : “प्लीज़ सुधीर ….डाल दो ना अब….अब रहा नही जा रहा”

वो अपने गीले होंठ मेरे पूरे चेहरे पर रगड़ रही थी

मैं मुस्कुरा दिया और उसके हाथो को वैसे ही पकडे रहा

और बिना लॅंड को हाथ लगाए मैने अपने कड़क लॅंड को हिला डुला कर उसकी चूत के दरवाजे पर ले जाने लगा

अब वो मेरा खेल समझ गयी थी

पर ऐसी हालत में जब लॅंड को एक ही बार में अंदर लेने का मन करे तो ये छेड़खानी बहुत तकलीफ़ देती है

वही तकलीफ़ शेफाली को भी हो रही थी

वो भी अपनी गांड मटका-2 कर मेरे लॅंड का टोपा ढूँढने लगी

आग तो दोनो तरफ बराबर लगी हुई थी, इसलिए मैने भी ज़्यादा परेशन नही किया उसे

जब लॅंड उस गर्म दरवाजे पर पहुँच गया तो दोनो ने एक दूसरे को देखा और फिर एक तेज हुंकार भरती हुई शेफाली ने अपने गद्देदार कूल्हे नीचे खिसका दिए

और एक ही बार में मेरा राजस्थानी लॅंड उसकी चूत के रेगिस्तान में पहुँच गया जहाँ इकलौती झील उफन-2 कर पानी छोड़ रही थी

सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआआआअहह मजाआाआआआआआअ आआआआआआआआअ गय्ाआआआआआआआआआअ मेरी ज़ाआाआआआआन्न्नननननननननणणन्

कुछ देर तक उसकी गर्म और तेज साँसे मेरे कान को पास गूँजती रही

फिर मैने उसके हाथ पकड़े-2 नीचे से धक्के लगाने शुरू किए

हर धक्के से मेरे सीने पर अपने पैने निप्पल से वो अपनी सिसकारियाँ लिख रही थी

कानो को अपने होंठो के बीच लेकर उन्हे मेरे होंठो की तरह चूस रही थी

मेरे कान में अपनी जीभ डाल कर मुझे अंदर तक गीला कर रही थी

मैं भी कुछ कम नही था

मैं भी अपना लॅंड पूरा बाहर तक लाकर फिर से उसे अंदर पेल रहा था

कई बार तो लॅंड फिसल कर बाहर भी निकल जाता पर हम दोनो की लय ऐसी बन चुकी थी आपस में की एक-दो बार टटोलते तो अपने आप लॅंड को छेद मिल जाता और वो उसके अंदर खिसककर फिर से वही धमाल चौकड़ी मचाने लगता

अब मैने उसके हाथ खोल दिए

और वो अपने काले घने बालों को हवा में लहराते हुए मेरे उपर नागिन डांस करने लगी

शेफाली सिर्फ़ उपर नीचे नही हो रही थी बल्कि लॅंड को पूरा अंदर लेने के बाद उसे गोलाई में घुमा भी रही थी

जैसे गिलोरी में चटनी पीस रही हो

ये सब उसका एक्सपीरियेन्स बोल रहा था

ऐसा करने से जो घर्षण मेरे लॅंड को और उसके दाने को मिल रहा था, उसका बयान करना काफ़ी मुश्किल था

मैने उसके मुम्मे अपने दोनो हाथों में भरकर एक-2 करके उन्हे पिया भी

और एक बार फिर से मुझे इस वक़्त अनु की याद आ गयी, क्योंकि वो भी इन्हे ही पीकर बड़ी हुई थी

यहाँ तक की आजकल फिर से उन्हे रोजाना पीने लगी थी

काश इस वक़्त दूसरे मुम्मे को वो चूस रही होती बीच में

ये सब याद करके शायद मैं खुद ही अपने आप को और ज़्यादा उत्तेजित करने की कोशिश कर रहा था

पर मेरा मन अंदर से कह रहा था की आज नही तो कल ऐसा ज़रूर होकर रहेगा

मुझे शेफाली की मोटी गांड बहुत पसंद थी, जिसे पकड़कर चूत मारने का मज़ा अलग ही आता है

इसलिए मैने पोज़िशन चेंज की और उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लॅंड डाल दिया

एक घोड़ी की तरह हिनहिनाते हुए उसने वो लॅंड अंदर लिया और दौड़ पड़ी मेरे साथ अपने ओर्गास्म का मेडल लेने के लिए..

मेरी हर ताल से उसकी गांड की चर्बी ऐसे हिल रही थी जैसे दही जमे कटोरे को कोई हिला रहा हो

सारा दही इधर से उधर हिचकोले मार रहा था उसकी गांड का

अचानक मेरी नज़र उसकी गांद के सुनहरे छेद पर गयी, जो हर झटके के साथ खुल और बंद हो रहा था

मैने अपना अंगूठा उस छेड़ पर रखकर जोरों से दबा दिया

ऐसा करते ही उसके अंदर जैसे कोई पिशाचिनी घुस गयी हो

वो ज़ोर से चिल्ला पड़ी

“आआआआआआआआआआआआआअहह…… ओह फककककककककककककक ओह फककककककककककककक………….. सूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ गूऊऊड …… फीईएलिंग सूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ गुड…….”

मेरा एक मन तो किया की लॅंड निकाल कर उस छेद में पेल दूँ , एक ही बार में इसे फील गुड करवा देता हूँ

पर उसकी गांड हिलाने की गति इतनी तेज थी की मुझे अंदर से लॅंड निकालने का मौका ही नही मिला और अगले ही पल मेरे लॅंड का सारा पानी निकलकर उसकी चूत में जाने लगा

ऐसा ओर्गास्म आज तक महसूस नही किया था मैने

जिसपर मेरा खुद का कंट्रोल नही था

वो सब कुछ खुद ही कंट्रोल कर रही थी

यहाँ तक की मेरे लॅंड के पानी को भी अपनी चूत के अंदर निकलकर उसकी गर्मी भी वो ले रही थी

लड़खड़ाती हुई आवाज़ के साथ वो भी भरभराकर बेड पर गिर पड़ी

” उम्मम्मम्म सससससस आआअह्हह्ह्ह्ह मजाआssssss आआआआआ ssssss गयाआआ “

मेरा लॅंड भी बेचारा टीचर की डांट खाए स्टूडेंट की तरह फिसलकर क्लासरूम से बाहर आकर बैठ गया

शेफाली ने मेरी तरफ मुँह किया और मेरे कंधे पर सिर रखकर मुझसे लिपट गयी, मैने भी उसे अपने अंदर समेट कर उसके माथे पर किस कर दी

और यही वो वक़्त था जब अनु स्कूल से आ गयी थी, दरवाजा खोलकर वो चुपचाप अंदर आई

अब कहानी की बागडोर फिर से अनु को सौंपते है

अनु जैसे ही अंदर आई तो उसे अपनी मॉम और सर की बात करने की आवाज़ सुनाई दी

पहले तो वो मॉम के रूम की तरफ चली पर आवाज़ तो उसके रूम से आ रही थी

यानी, मॉम और सुधीर सर उसके रूम में थे

ये सर भी ना

मेरे पीछे कितने पागल है, मेरे बेड पर मॉम की चुदाई करके वो मेरी फीलिंग लेना चाहते है शायद

मैं मुस्कुराते हुए अपने रूम की तरफ चल दी

वो अंदर बाते कर रहे थे, पूरे नंगे, कमरे से सैक्स की ताज़ा-2 महक आ रही थी यानी अभी कुछ देर पहले ही चुदाई ख़त्म हुई थी

कमरे की हालत बता रही थी की करीब 40-45 मिनट तक चुदाई का नंगा खेल चला था वहां

मॉम : “वैसे फकिंग करते-2 वो क्या किया था तुमने ?”

सुधीर सर : “मैने ?? मैने क्या किया ?”

मॉम : “अब इतने भोले भी ना बनो….वो बैक डोर पर तुमने उंगली लगाई थी ना….वो बोल रही हूँ मैं ”

सुधीर : “अच्छा वो….वो तो मैं सोच रहा था की काश इसके अंदर भी….”

इतना कहकर शायद उन्होने अपना हाथ नीचे करके फिर से उनके पिछले छेद पर रख दिया था

शेफाली फिसलकर दूर होने लगी और हंसते हुए बोली : “तुम्हे बड़ी जल्दी है हर जगह अपना झंडा गाड़ने की….थोड़ा वेट करो…कुछ तो सुहागरात के लिए भी छोड़ दो…”

ये सुनते ही सुधीर सर की आँखे चमक उठी…

वो बोले : “सच में ….यानी….यानी आज तक तुमने ….“

शेफाली : “यस …..आई एम् वर्जिन फ्रॉम बिहाइंड….आज तक मेरी पीछे से किसी ने नही मारी…..पर अब लगता है वो सील तुड़वाने का समय आ चुका है “

इतना कहते हुए वो दोनो एक बार फिर से एक गहरी स्मूच में डूब गये

मेरी मॉम अपनी गांड मरवाने की प्लानिंग कर रही थी

ये सुनकर अचानक मुझे पता नही क्या हुआ,

मैं एकदम से कमरे में घुसती हुई बोली : “मॉम .मैं आ गयी….”

और उन्हे अपने बिस्तर पर देखकर मैने चौंकने का नाटक भी किया

जैसे मुझे कुछ पता ही नही था की वो वहाँ है

अब आलम ये था की मैं उनके बेड के बिल्कुल करीब खड़ी थी

और वो दोनो एकदम नंगे लेटे थे, मेरे ही बेड पर

बेचारों का चेहरा देखने लायक था

पर देखने लायक तो मेरे निप्पल्स भी थे

जो शर्ट पहने होने के बावजूद ऐसे चमक रहे थे जैसे कुछ पहना ही नही है मैने..

पता नही क्या होने वाला था अब उस कमरे में.

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