,,, लेकिन यह बारिश यह एकांत और बादलों की गड़गड़ाहट घर के अंदर के माहौल को गर्मी प्रदान कर रही थी,,,,
रिंकी अपने एक पैर को सोफे पर रख कर आराम से बैठ गई लेकिन वह अपने पैर को जानबूझ कर इतना उठाई थी की स्कर्ट ऊपर की तरफ सरक गई और उसकी पिंडलियां जो कि एकदम गोरी थी वह साफ साफ नजर आने लगी उस पिंडलियों पर मेरी नजर चली गई,,,, जिसे देख कर मेरा लंड ठुनकी लेने लगा,,,,।
बाप बेटी दोनों ही सही मौके का इंतजार कर रहे थे बाप बेटी दोनों ने अपनी जिंदगी में कभी गाली को भी अपने होठों पर नहीं आने दी थी आज वह दोनों खुद एक दूसरे के सामने खोलकर धीरे-धीरे कामुक् बातें कर एक दूसरे को उकसा रहे थे।
रिंकी की स्कर्ट जांघो पर चढ़ी हुई थी टॉप के दोनों बटन खुले हुए थे जिसमें से आधे से भी ज्यादा चुचीयां बाहर को लटकी हुई थी। यह सब देख कर मेरी हालत संभाले नहीं संभल रही थी मै अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही मसल रहा था।
अपने पापा को इस तरह से अपनी आंखों के सामने लंड को मसलता हुआ देखकर रिंकी की बुर में चीटियां रेंगने लगी थी। वह अपने पापा के हथियार को अच्छी तरह से अपनी टाँगो के बीच जांघो में स्पर्श कर चुकी थी इसके लिए वह जानती थी कि उसमें कितना दम है बस आजमाना बाकी था। रिंकी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके एक इशारे पर उसके पापा उस पर टूट पड़ेगे और कई दिनों से ना बुझने वाली प्यास कौ वह अपने लंड से रगड़ कर एकदम तृप्त कर देंगे।
बाप बेटी दोनों ही सांभोगिक मुठभेड़ के लिए पूरी तरह से तैयार थे लेकिन फिर भी अभी आगे बढऩे मैं थोड़ा सा कतरा रहे थे। अभी भी थोड़ी सी झिझक दोनों के अंदर बाकी थीै और वह इस झिझक को बातचीत से खत्म करना चाहते थे।
इस बात का एहसास रिंकी को भी हो गया कि उसकी गोरी पिंडली को देखकर पापा के बदन में हलचल सी मचनें लगी है,,, इसलिए वह अपनी हथेली को अपनी पिंडली पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी जिसे देखकर मै बावला होने लगा। और अपने बदन में अपनी बेटी की गोरी गोरी पिंडली की गर्माहट को महसूस करते हुए बोला।
किस तरह की बातें बेटी मुझे भी तो बता,,,,,
पापा हम सब सहेलिया एक दूसरे के मम्मी पापा, भैया भाभी, दीदी जीजा की गंदी बातें उनकी चुदाई करने और देखने की बातें करके मजा लेते है,,,,
मुझको को अपनी बेटी की बात सुनते ही मेरे बदन में गुदगुदी होने लगी और मै बोला
क्या एक दूसरे की मम्मी पापा, भैया भाभी, दीदी जीजा चुदाई देखने की बातें करती थी,, मैने चुदाई शब्द को कुछ ज्यादा ही जोर देकर बोला ताकि रिंकी के बदन में मस्ती की लहर दौडने़ लगे और वैसा हो भी रहा था रिंकी ने कभी सोचा नहीं था कि उसके पापा ऐसे शब्दों का प्रयोग करेंगे और वह भी उसके ही सामने इसलिए आज पहली बार अपने पापा के मुंह से सेक्स चुदाई की बात सुनकर उसके बदन में हलचल सी मचने लगी थी। रिंकी का भी मन खुलने लगा वह मन ही मन सोच रही था कि जब पापा इतना खुल सकते है तो वह भी अपनी बात को नमक मिर्च लगाकर क्यों नहीं बता सकती इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली इस बार वह अपने अंदर चल रही हलचल को अपने शब्दों में बाहर लाते हुए बोली … .
और तो और पापा जब उन लोगों की मैंने यह बात सुनी कि वह लोग अपने पापा को भी गंदी नजर से देखते हैं तो मेरा दिमाग एकदम सन्न हो गया।
रिंकी ने सहेलियों के पापा वाली बात जानबूझकर बोली थी ताकि वह अपने लिए रास्ता साफ कर सके और अपनी बेटी के मुंह से सहेलियों के पापा वाली बात सुनकर मै भी हैरान था मै रिंकी से बोला.. . ….
क्या………? सच में तुम्हारी सहेलिया अपने पापा को गंदी नजर से देखती हैं पर तुझे कैसे मालूम पड़ा क्या बोल रही थी वह लोग। ?
पापा कैसे बताऊं मुझे शर्म आ रही है,,,,
शर्मा मत देख मैं तुझे बता चुका हूं कि तू मुझे अपना बॉयफ्रेंड समझ और मुझे सब कुछ बता दे ।
“मुझे अपना बॉयफ्रेंड समझ” ये शब्दों को सुनते ही रिंकी ने अपनी पिंडली को खुजलाते खुजलाते एक बहाने से स्कर्ट को हल्के से और ऊपर उठा दी जिससे रिंकी की जांघ का थोड़ा भाग नजर आने लगा। चिकनी गोरी जांघ का थोड़ा सा भाग देख कर मेरे मन पर बिजलियां दौड़ने लगी,,
और वह बोली पापा वो सभी ढेर सारी बातें करते है जब हम लोग क्लास में कभी कभी टीचर नही आने पर मस्ती करते रहते हैं तो आपस में यही बातें करते हैं जो कि मुझे साफ साफ सुनाई देती है… मेरी एक सहेली तो कल ही मुझसे बोल रही थी कि,,,,, यार आज तो सुबह-सुबह ही मेरा मूड बन गया और मुझे उंगली से जलेबी की चाशनी (शीरा) निकालनी पड़ी,,,,
मै तो अपने बेटी के मुंह से “उंगली से जलेबी की चाशनी (शीरा)” शब्द सुनते ही दंग रह गया और बोला
मूड बन गया मतलब कैसे,,,,,?
पापा वह बोल रही थी कि जब वह सुबह उठ कर बाथरूम की तरफ गयी तो उसे नहीं मालूम था कि बाथरुम में उसके पापा है और वह बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला ही था कि उसके पापा उसे एकदम नंगे बाथरूम में नहाते हुए दिखे,,, पापा का “डिक” देखकर उसे “किक” लगी…. और वह बताने लगी कि उसके पापा के बड़े से लांड (लंड) और उनकी बड़ी आंड को देखकर सहेली की चूत रिसने लगी।
( पापा के बड़े से लांड (लंड) और उनकी बड़ी आंड की बात सुनते ही मेरे लंड में भी ऐठन होने लगी)
और तों और पापा जब उसने कहा कि,,, अगर सहेली के पापा जरा सा इशारा कर देते तो वह बाथरुम में घुसकर अपने पापा का लंड अपनी बुर में डलवा कर चुदवा लिया होता।
( अपनी बेटी के मुंह से इस तरह की चुदाई की बातें सुनकर मेरा लंड उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगा,,,, आश्चर्य के साथ मेरा मुंह खुला का खुला रह गया था)
मैने हैरान होते हुए और साथ ही लंड को हथेली से सहलाते हुए पूछा फिर क्या किया उसने,,,
फिर उसने बताया पापा कि वह वंही दरवाजे पर ही अपने आप को छुपा कर खड़ी रही और धीरे से अपनी पजामी को नीचे कर दिया,,, और वही खड़े खड़े अपने पापा को नँगा देखते हुए अपनी चूत में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगी,,,,, और तब तक अंदर बाहर करती रही जब तक कि उसका पानी नहीं निकल गया,,,,,
तुझे कैसे मालूम कि वह पानी निकलते तक अंदर बाहर करती रही।
उसी ने तो बताया था।
( इतना सुनते हुए मै फीर से अपने खड़े लंड को एडजस्ट करने लगा। जो कि रिंकी अपने पापा की ईस हरकत को वह कनखियों से देख रही थी। )
अच्छा जब तेरी सहेलिया एक दूसरे के पापा के बारे में बारे में गंदी बातें करते हैं तो वह जरूर तेरे पापा के बारे में भी कुछ ना कुछ तो बोली ही होगी,,,,,
रिंकी समझ गयी कि पापा अपने बारे में भी सुनना चाहते है लेकिन फिर भी वह जान बूझकर ना बताने का नाटक करते हुए बोली।
नहीं पापा जाने दो ना,,,,,
अरे कैसे जाने दो,,,,, बता तो सही वो लोग मेरे बारे में क्या बताते हैं तुझसे,,,,, क्या सोचते हैं वह लोग मेरे बारे में,,,,,
जाने दो ना पापा क्या करोगे सुनकर वह लोग तुम्हारे बारे में इतनी गंदी बातें बोल रही थी कि मेरा तो एक बार झगड़ा भी हो चुका था।,,,,
अरे बता तो सही बोलो क्या बोल रही थी मैं भी तो सुनूं कि मेरे पीठ पीछे लोग क्या क्या मेरे बारे में बोलते हैं और सोचते हैं।
देखो शर्मा मत इतना कुछ बता दिया है तो यह भी बता दे।
पापा मेरी सहेली ऋतु वो ही जिसे आपने पार्किंग में एक लड़के के साथ गाड़ी में देखा था….. याद आया…. ???

हा…
वो मुझे बोल रही थी कि रिंकी तेरे पापा क्या कमाल लगते है…. तू अपने पापा को मुझसे बदल ले….। मैने उससे कहा मेरे पापा ऐसे वैसे तेरे जैसे नही है…?? वो बहुत ही शरीफ है।
तो वो हस्ती हुयी बोली ” शरीफो का क्या खड़ा नही होता ” हाहा हाहा
रिंकी तुझे नही पता तेरे पापा बहुत गजब के शिल्पकार है जब कुसुम आंटी ( तेरी मम्मी ) मस्त मटक मटक कर अपनी गांड मटकाकर चलती है आंटी की बड़ी बड़ी गांड देख कर मुझे तेरे पापा के हथौड़े की चोटों अंदाजा हो गया है। हां अगर तेरे पापा मुझ को मौका दे तो तेरे पापा के हथौड़े से मै भी अपने जिस्म पे उनसे शराफत की कारीगरी करवा लू।
मै जानबूझकर अपने मुंह पर हाथ रखते हुए हैरान होने का नाटक करते हुए…
क्या तेरी सहेली मेरे बारे में इस तरह की बातें करती हैं।( मै हैरान होने का सिर्फ नाटक कर रहा था लेकिन मुझे अपनी बेटी की यह बात सुनकर बड़ा ही मजा आ रहा था…. मै सोच रहा था वाइफ स्वैप सुना था लेकिन पापा स्वैप भी शुरु हो गया )
कुछ देर तक हम दोनों के बीच खामोशी छाई रही मेरे साथ साथ रिंकी भी पूरी तरह से कमातेजित हो चुकी थी जबकि मेरा लंड पैंट में जोऱ दिए हुए था,, जिसे बार-बार अपने हाथ से एडजस्ट कर रहा था, थोड़ी देर बाद मै बोला…
रिंकी तेरी सहेलिया तो बहुत ही गंदी बातें करती हैं । क्या वह सब सच में ऐसा करती हैं क्या सच में वह अपने पापा के साथ सेक्स की ख्वाहिश रखती हैं। मै गहरी सांसे लेते हुए बोला….?????
पापा मेरी एक सहेली है उर्फी जावेद…….!

उर्फी जावेद जो नंगे बदन आये दिन फोटो वीडियो पोस्ट करती रहती है, मै मजाक अपनी बेटी की चुटकी लेते हुए बोला।
ह्म्म्म ह्म्म्म ह्म्म्म काश वो मेरी फ्रेंड होती है, नही पापा एक और है जो मेरे क्लास में साथ पढ़ती है….. अरे जिसने मेरे कहने पर आपको एक बार व्हाट्सप् पर मैसेज भेजा था…. रिंकी कामुक् और एक आँख मार कर हँसी हस्ती हुए बोली।
मेरे व्हाट्सप् पर मैसेज भेजा था। मैने आश्चर्य से कहा…! और रिंकी की ये बात सुनकर तुरंत अपने मोबाइल में व्हाट्सप् मैसेज चेक करने लगा…. मुझे मैसेज चेक करता देख रिंकी मुझे अपनी फ्रेंड उर्फी का नम्बर बताने लगी जिससे मैसेज ढूढ़ने में आसानी हो। अंततः मुझे मैसेज मिल गया और दोबारा से पढ़ने लगा…..
उसे पढ़कर मेरा माथा ठनका….. इस मैसेज को पढ़कर मेरे तन बदन में आग लग गयी। लेकिन जो शब्द लिखे थे वो सत्यता की कसोटी पर खरे थे। खुद के लगाए पेड़ के फल खाने में कैसा पाप????? खुद की मेहनत से तैयार की गयी फसल का भोग करने में कैसा दोष???? अपनी पाली गयी भैस का दूध पीना कैसा अधर्म ????? मेरे अंदर कामवासना का संचार होने लगा।
मेरी उत्सुकता उर्फी के बारे में जानने के लिए बढ़ चुकी थी। क्या वह सब सच में ऐसा करती हैं क्या सच में वह अपने पापा के साथ सेक्स की ख्वाहिश रखती हैं। मै दोबारा से गहरी सांसे लेते हुए बोला….?????
ख्वाहिश ही नहीं पापा मेरी सहेली उर्फी जावेद ने तो यहां तक बताया कि वो तो अगले महीने अपने अब्बू के साथ तेहरान (ईरान) जा रही है, और उनके साथ निकाह कर वही रहेगी…..!
क….क……क्या मै ये सुनकर बड़ा ही अचम्भे था। ऐसा कैसे हो सकता है किसी भी मजहब में एक बाप – बेटी निकाह कैसे कर सकते है…???
ओफ़ ओ पापा मुझे आपको अपनी फ्रेंड उर्फी की कहानी शॉर्ट में बताती हूँ….
उर्फी की फैमिली में पापा मम्मी और 2 बच्चे एक बेटी और एक बेटा है. उर्फी के पापा गुलफाम और उर्फी की मम्मी
गुलिस्ता शादी की कम उम्र में हुई थी और दोनों जल्द ही माँ – बाप बन गए. शादी के बाद दोनों के रिश्ते अच्छे थे और दोनों ही अपनी जिंदगी में काफ़ी ख़ुश थे, एक बार दोनों में किसी बात पर बहस इतनी बढ़ गयी कि गुलफाम ने अपनी बीवी को तलाक दे दिया. जिससे गुलिस्ता अपने बच्चों के साथ अपने पिता के घर चली गयी. कुछ ही हफ्तों में गुलफाम को अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ और वह गुलिस्ता के घर दुबारा निकाह की बात करने गया. वहाँ पर बात करने के बाद मौलवी ने उन्हें बताया कि तुम्हें और तुम्हारी बीवी को ***** करना पड़ेगा तभी तुम दोनों दुबारा निकाह कर सकते हो.
अब सवाल ये था कि किससे किया जाए, मौलाना साहब ने कहा कि तुम्हें अपने घर के किसी सदस्य के साथ करना चाहिए जिससे कुछ हफ्तों में तलाक ले कर तुम दोनों दुबारा आपस में निकाह कर सको.
चूकिं बेटा और बेटी भी व्यस्क हो रहे थे, और मौलाना साहब ने कहा कि गुलफाम तुम्हें अपनी बेटी से तथा गुलिस्ता को अपने बेटे से करना होगा . पहले तो वह दोनों इससे असहमत थे कि बाप बेटी और माँ बेटे में कैसे हो सकता है लेकिन मौलाना साहब ने कहा कि यह ख़ुदा की रहमत है कि तुम्हारे पास बेटा और बेटी दोनों है और अपनी जवानी की दहलीज पर कदम रख रहे हैं, ख़ुदा का शुक्र मनाओ कि तुम्हें किसी बाहर वाले के साथ नहीं करना पड़ेगा और तुम्हारे घर की आबरू चारदीवारी में ही रहेगी. फ़िर घर वालों के समझाने पर दोनों सहमत हो गए.
कुछ दिनों में पारिवारिक सदस्यों के मौजूदगी में निकाह हो गया, गुलफाम का अपनी नई बीवी से और गुलदस्ता का अपने नए पति के साथ शारीरिक संबंध कायम हो गया , यह सिलसिला चलता रहा और करीब 6 महीने बाद जब मेरी फ्रेंड उर्फी अपने पापा गुलफाम की बीवी बन गर्भ से हो गयी तो परिवार में कानाफूसी होने लगी कि आख़िर ये कब तक चलता रहेगा. परिवार भी उनपर थोड़ा दबाव बनाने लगा कि अब उन्हें तलाक ले लेना चाहिए लेकिन वो दोनों अब तलाक के लिए राज़ी नहीं है.
उसके बाद घर में कलहपूर्ण वातावरण बनने लगा उसके पापा को उर्फी की माँ से ज्यादा अपनी बेटी उर्फी से लगाव हो गया है इसलिए रिश्ते को जारी रखा हुआ है और उर्फी और उसके पापा अब भी सेक्स संबंध कायम करते हैं.और अब वह दोनों एक साथ है और उसके परिणामस्वरूप उर्फी के अब्बू और उर्फी ईरान में जाकर निकाह कर वही रहेंगे और होने वाले बच्चों की परवरिश मिल कर बिना किसी रोक टोक के कर सके।
अपनी बेटी रिंकी के मुह से उसकी सहेली उर्फी की कहानी सुनने के बाद मै आश्चर्य में था….. मुझे ये समझ आ गया खुद की बेटी के साथ रिश्ता कायम करने की राह आसान कर देते है……. काश ये प्रथा या चलन हमारे मजहब में भी शुरू हो जाये……!
लेकिन अब भी उसकी बातों पर भरोसा कर मै उसे चोद तो नही सकता हूँ…… वो मेरी बेटी है और मेरा मजहब मुझे ये करने की इजाजत नही देता। मेरी नादान बेटी अपनी फ्रेंड के जिस विवाह का वर्णन कर रही उसे मेरे धर्म में पिशाच विवाह की श्रेणी में रखा गया है। मेरे धर्मनुसार उससे भी कुछ निकृष्ट हो, तो उस श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
( भीगती तुफानी बारीश मे घर के अंदर का तापमान एकदम गर्म हो चुका था। दोनों बाप बेटी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आपस में बैठकर इस तरह से गंदी बातें करेंगे और एक दूसरे के अंगों को प्यासी नजरों से देखेंगे लेकिन अब यह एक दम सच हो चुका था तूफानी बारिश में दोनों बाप बेटी दोनों अपनी वासना का तूफान लिए दरिया को पार करने की पूरी कोशिश कर रहे थे।)
रिंकी भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके हुस्न का जादू पापा पर पूरी तरह से छा चुका था। मुझ को अपनी बेटी की हालत पर हंसी आ रही थी आज पहली बार रिंकी ऐसे हालात के दौर से गुजर रही थी कि पापा के सामने वह अपने हुस्न का जलवा बिखेरते हुए अपने अंदर दबी हुई चिंगारी को भड़का रही थी। क्या हुआ पापा आप इतने खामोश क्यो हो गये…… किस सोच में पड़ गये… रिंकी ने अपनी जाँघों की कैंची खोलते हुए कहा जिससे मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिख गयी।
रिंकी बेटी तू जो कह रही है, वो तेरी फ्रेंड के मजहब में जायज रिश्ता होगा लेकिन हमारे मजहब और धर्म में इसे नाजायज रिश्ता माना जाता है और तो और हमारे यहाँ तो
पिता – पुत्री का रिश्ता ऐसा होता है कि अगर कोई बेटी की तरफ आँख उठाकर भी देख ले तो पिता के लिए असहनीय होता है।
“मर्यदाये इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है कि जिसे हम प्यार करते हैं और पल भर में हमारे परिवारिजनो की वजह से उससे रिश्ता ही बदल जाये। और हम पर जबरदस्ती उस रिश्ते को थोप दिया जाये जिस रिश्ते में बांधकर हम अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर ले।” अपनी बेटी के शब्दों में मुझे अपना अतीत याद आ रहा था, जब मै भी कुसुम को शादी के लिए देखने गया था और मुझे अपनी पत्नी के रूप में अपनी बेटी रिंकी पसंद आई थी लेकिन शादी कुसुम से करनी पड़ी और ना चाहते हुए भी मर्यादाओं के कारण मुझे उसे बेटी मानना पड़ रहा है।
इतना सुनते ही मेरे पिछवाडे में मिर्ची लगी… और आवेश में, मै बोला बेटी तो अपनी फ्रेंड उर्फी को बोलो ईरान क्यों जा रही हो यही रहकर प्यार फैल्लाओ……. ??
रिंकी जबाब देते हुए ….. उसकी वजह है हमारे डॉक्टर साहब और उनका बनाया कानून जो कि ईरान में नही है, तेहरान-ईरान की संसद में एक खूबसूरत बिल पास हुआ है, इस बिल के अनुसार पिता अपनी पुत्री, दूसरी पत्नी की पुत्री और गोद ली पुत्री से विवाह कर सकता है।
हालांकि के कई हमारे देश के एक्टिविट्स इस बिल के विरोध में हैं। ये पढ़े लिखे गँवार
सिर्फ फैमिली में बाप बेटी और सगे रिश्तों के प्यार के दुश्मन है….. इन्होंने हमेशा से बाप बेटी के होंठो पे चुंबन, स्तन् स्पर्श, नितम्बो के आलिंगन में वासना दिखी है, उनके अंदर की फीलिंग्स, प्यार, इमोशन, नही देखा इन लोगों से बड़े बड़े सेलेब्रिटी नही बच पाये चाहे…… आमिर खान का अपनी ब्रा पैंटी पहने हुए बेटी लिपटना, और महेश भट्ट और पूजा भट्ट, शाहूरख और सुहाना, सैफ और सारा, का रिश्ता हो इन लोगों से कभी भी बर्दाश्त नही हुआ है ??
जिस दिन एक्टिविट्स को एक बेटी की पापा के लिए पनपती कामुकता, एक बहन की भाई के लिए बेचैन यौवन और एक माँ के जवान बेटे के लिए आँचल में उमड़ता, सिसकता देहिक प्यार, समझ आयेगा……. उसी दिन होगी सच्ची महिला दिवस।
रिंकी इस तथाकथित समाज के बनाये हुए सिद्धांतों और लाज-ओ-शर्म व मान-मर्यादा की दीवार को धवस्त करके पापा की बांहों में समा जाने के लिए उत्सुक थी.उसके हाव-भाव में अब समाज के प्रति बागी तेवर साफ साफ नजर आने लगे थे.
रात गहराती जा रही थी बादल अभी भी बरस रहे थे और साथ में गरज भी रहे थे खिड़कियों से खाली बिजली के चमकने की रोशनी नजर आ रही थी पूरे घर में अंधेरा पड़ा था ऐसे में बाप और बेटी बैठ कर एक दूसरे के मन को उधेड़ रहे थे। आपसी बातचीत के दौरान दोनों को एक दूसरे को समझने में काफी मदद मिल रही थी। दोनों इतना तो जान ही चुके थे कि इस तूफानी बारिश का दूसरा अध्याय दोनों के लिए कुछ अजीब और अद्भुत लेकर आने वाला है।
रिंकी तेरी सभी सहेली अपने पापा के बारे में गंदी विचार रखते हैं और वह सेक्स भी करना चाहती हैं,, तो अपनी सहेलियों की बातें सुन कर तेरे मन में भी तो कुछ कुछ होता होगा,,,, तू भी मुझे गंदी नजर से देखती होगी मेरे बदन पर अपनी नजरें दूड़ाती होगी,,,,,,,,, सच सच बताना
अपने पापा की यह बात सुनकर रिंकी एकदम से सक पका गयी पापा अब एकदम खुले शब्दों में उस से बातें कर रहे थे क्योंकि रिंकी को अच्छी भी लग रही थी लेकिन ईस सवाल पर वह थोड़ा सा घबरा गयी। उसे कुछ समझ में नहीं आया कि अपने पापा के सवाल का वह क्या जवाब दे।
मै अपने सवाल से अपनी बेटी के चेहरे के बदले भाव को देख रहा था सांसों के साथ साथ ऊपर नीचे होती हुई रिंकी की चूचीयां किसी समुंदर में तैरते हुए पहाड़ की तरह लग रही थी।
आज वह बाप बेटी के रिश्तो की मर्यादा को तार-तार करने के लिए पूरी तरह से उतारू हो चुकी थी। प्यासी रिंकी आज हर रिश्ते को भूल जाना चाहती थी । समाज के पन्ने पर लिखे हुए बाप बेटी के रिश्ते को वह वासना के रबड़ से मिटा देना चाहतेी थी।और वह कर भी क्या सकती थी जिस उम्र के दौर से वह गुजर रही थी ऐसे मैं अक्सर जवान होती लड़कियों की नजर ना चाहते हुए भी आपसी रिश्तो के पीछे छुपे खूबसूरत आकर्षण के प्रति आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाती।
मेरा हाथ लंड पर पेंट के ऊपर से ही उसे सेहला रहा था मै भी अपनी शर्म को भूल चुका था इसमें मेरी भी कोई गलती नहीं थी हालात ही कुछ ऐसे बन चुके थे कि जिससे नजर. फेर पाना मेरे बस मे नहीं था। मेरे सामने तो रूप खूबसूरती और सेक्स से भरा हुआ एक पतीला पड़ा था जिसमें से मै पेट भरना चाहता था,,, अपनेी प्यास को बुझाना चाहता था अपनी भुख मिटाना चाहता था। लेकिन स्वादिष्ट व्यंजन से भरे हुए पतीले में मै हाथ बढ़ाने से डरता था जबकि रिंकी तो खुद ही मेरे सामने परोसी हुई थाली बन कर बैठी थी। रिंकी अपने पापा के आगे हाथ बढ़ाने का इंतजार कर रही थी लेकिन पापा की हालत देखकर वह समझ गई थी कि पापा से कुछ होने वाला नहीं है जो भी करना है उसे ही करना होगा।
आप मुझसे क्या पूछना चाहते है वो मैं जानती हूं” रिंकी ने कहा
“क्या…….” मै घबरा कर बोला
” यही न कि थोड़ी देर पहले मेरे इस तरह चिपकने से आप उत्तेजित हो गए और आपका वो…मेरा मतलब है कि…..वो मेरी जांघो से टच हो गया” रिंकी अब पूरी तरह हवस की शिकार हो चुकी थी।
“मुझे माफ़ करना बेटी, मैंने जानबूझकर नही किया, वो बस अपने आप हो गया, मुझे माफ़ कर दो प्लीज़” मैने घबरा कर कहा
“आप चिंता मत कीजिये, मैं बिल्कुल भी नाराज़ नही हूँ, मैन कहा था न कि मैं आपकी भावनाओं को समझती हूं, आप बिलकुल भी मत घबराइए” रिंकी ने इतने आराम से अपनी बात कही जैसे ये कोई मामूली सी बात हो
मै रिंकी के इस रवैये से बिल्कुल हैरान रह गया, मुझे भरोसा ही ही नही हो रहा था कि मेरी बेटी आज इतना कुछ होने पर भी इसे मामूली सी बात कह रही है
“क्या हुआ पापा, आप क्या सोच रहे है” रिंकी ने अपनी मादक आवाज़ में कहा
” कककुछ नही बेटी” मैंने कहा
“ये बेटी बेटी क्या लगा रखा है पापाआआआ, भूल गए आपने मुझसे वादा किया था कि आप मुझे अकेले में डार्लिंग कहकर पुकारेंगे” रिंकी की आवाज़ से अब वासना साफ साफ झलक रही थी
” पर वो मैं …..” मै बोलते हुए हकला रहा था
“मैं कुछ नही सुनना चाहती, आप बस आज के बाद अकेले में मुझे डार्लिंग ही कहोगे” रिंकी ने चहक कर कहा
“चलो ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी बेटी ….. मेरा मतलब डार्लिंग” मैने कहा इतने दिनों बाद अपने पापा के मुंह से अपने लिए डार्लिंग शब्द सुनकर रिंकी के जिस्म में सुरसुराहट सी दौड़ गयी।
धीरे धीरे हम दोनों के बीच की ये कशिश और चाहत दोनों को एक दूसरे के करीब ले आयी. शायद कुदरत भी उनके इस प्यार को आगे ले जाने में उनकी मदद कर रही थी.
जारी है……….
