The Jungle – Update 16 | Incest Story

The Jungle - Family Chudai Ki Kahani
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chapter 16

अमृता बिनीता आयुसी तीनो आयुस् के बच्चे की मा बनने वाले थे रात 10 बज रहे थे कैप मे बिस्तर पे सब लेते थे आयुसी आयुस् के ऊपर लेती हुई चुत पे लंड ले रही थी

बिनीता अमृता आयुस् के दोनो तरफ नंगे लेते थे

बिनीता हस्ते हुवे – हम तीनो के पेट मे आयुस् का बच्चा h यकीन नही होता

अमृता हस्ते हुवे – सही कहा सब सपना जैसा लगता है

आयुसी लंड चुत मे लेते हुवे – आह उफ सपना नही हकीकत है उफ

बिनीता आयुसी को देख – तेरी चुत पे तो आग लगी रहती है

आयुसी – तो जवान हु आग होगी ही ना

अमृता – कितनी बेशर्म हो गई है

आयुस् आयुसी के चुचे दबाते हुवे – उफ मेरी गुरिया आह तेरा भाई सब गर्मी निकाल देगा

आयुसी मुस्कुराते हुवे – हा भाई आप ही निकाल सकते है उफ

आयुस् रात को सब की चुदाई कर सो जाते है

दिन महीने गुजरते है आयुस् सब को जंगल मे आये पुरे तीन महीने हो गये थे इस बीच सिर्फ दो शिप गुजरी लेकिन वो शिप बहोत दूर से आके चली गई

आयुस् सभी के हिम्मत भी जवाब दे रहे थे उमीद टूट रही थी आयुस् की टेंसन बढ़ती जा रही थी जंगल से जा नही सकते थे मौत पक्की थी और यहा रुक भी नही सकते थे

एक महिना और गुजर जाता है

रात 8 बजे कैप के बाहर आग जला के सब बैठे बात कर रहे थे

अमृता – सिर्फ दो शिप गुजरी जो भी हमने इतनी दूर ही ना हमारे आवाज उन तक गई ना वो सब हमे देख सकते थे

आयुस् – वो इस लिये कियुंकी वो दोनो शिप समान ले जाने वाला बरी शिप थी बरी शिप समुंदर के बीच गहराई से ही जा सकती है

आयुसी आयुस् के सीने पे सर रख – भाई अब हम किया करे

आयुस् आयुसी को बाहों मे लेके – कुछ तो करना ही होगा मे नही चाहता हमारा बच्चा इस जंगल मे पैदा हो नही तो बरी दिकत हो जायेगी

अमृता अपने पेट पे हाथ रख – देख अब पेट भी दिखने लगा है 6 महीने और है

बिनीता – हा हर ये है इस जंगल मे बच्चा पैदा हुवा कोई परोबलम् हुई बच्चा बीमार हुआ तो

आयुस् – यही डर मुझे भी है

अमृता – अब किया करे

आयुस् 4 महीने हो गये एक महीने और रुकते है एक भी शिप नही आई तो हम पूरी तैयारी करेगे फिर जंगल के बीच से जायेंगे खतरा बहोत होगा लेकिन हमे रिस्क लेना ही होगा

अमृता – हु कोई कोई रास्ता भी नही है

बिनीता – ठीक है

आयुसी – अब तो उमीद भी टूट रही है

आयुस् – समझ नही आ रहा शिप इस रास्ते से आते जाते रहनी चाहिये थी पर कुछ तो गर्बर् है

एक महीने और गुजर जाते है

अब बच्ची उमीद ही टूट गई थी अब आयुस् को भी लगने लगा था कोई शिप नही आयेगी और इस जंगल मे रहा भी नही जा सकता था अभी ही आयुस् को जंगल से निकला था

अभी अमृता बिनीता आयुसी के पेट मे 4 महीने का बच्चा पल रहा था देर हुई तो बाद मे जंगल से निकलना मुश्किल हो जायेगी कियुंकी तीनो लम्बा सफर बच्चे के साथ कर नही सकते थे वो खतरों से भरा था

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सुबह 10 बजे झरने के पास आयुस् नीचे लेता था अमृता आयुसी मजे से आयुस् का लंड चाट कर रस पी रही थी उफ सीन मस्त था

आयुस् मजे से – उफ यही असली सुकून है आह मा गुरिया चुसो मजा आ रहा है

लंड चुदाई के बाद

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आयुस् आयुस् को घोरी बना के चोदने लगता है आयुसी अपनी मा के चुचे मुह मे लेके चूस रही थी अमृता अपनी बरी गांड पथर् पे टिकाये हुवे थी आयुस् चुदाई करते हुवे अपनी मा को किस कर रहा था

बिनीता की चुदाई हो गई थी तो आराम से नहा रही थी

आयुसी की चुदाई के बाद अमृता -बेटा अब मेरी बारी

आयुस् – उफ मा

आयुस् एक पथर् पे लेत जाता है पूरा नही पीछे हाथ से अपने आप को उठाये हुवे था

आयुस् मुस्कुराते हुवे – मा आ जाइये मेरे लंड की सवारी करिये

अमृता जैसे तैसे आयुस् के ऊपर आके अपनी गांड नीचे करने लगती है आयुस् लंड चुत पे सामने कर देता है अमृता जैसे ही चुत के छेद पे लंड फिल करती है बैठ जाती है लंड सीधा अंदर घुस जाता है

अमृता आयुस् को पकरे तेजी से अपनी गांड उपर नीचे कर लंड चुत पे लेने लगती है लंड फच् फच् तेजी से अमृता की चुत मे जा रहा था आयुसी सब साफ देख पा रही थी कैसे मा भाई का लंड मजे से ले रही है

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अमृता मजे से गांड उपर नीचे करते अपने बेटे के लंड की सवारी करते हुवे – आह उफ बेटा बहोत मजा आ रहा है तेरा लंड उफ बहोत मस्त मोटा लम्बा है मजा ही आ जाता है

आयुस् – उफ मा आपकी चुत भी मस्त फूली गर्म है मजा आ जाता है

चुदाई हो जाती है सब नहा के बैठे थे अब मामला सिर्यस् था

अमृता – अब किया एक महीने मे कोई शिप नही आया

बिनीता टेंसन मे – आगे आयेगा या नही ये भी नही पता रुके की जाये

आयुसी – रुके और कोई नही आया तो हमे बच्चे को यही जन्म देना होगा कियुंकी अभी समय है फैसला करने का जंगल से जाना है या रुकना है

आयुस् – गुरिया तेरी हर बात सही है 5 महीने बच्चे है आगे तुम लोगों का पेट और बाहर निकल आयेगा फिर तुम तीनो चल नही पाउंगी सही तो ऐसे मे जंगल के उचे रास्ते पहार् ना मुमकिन होगा और मुश्किल और बढ़ जायेगी

अमृता – हा तो अभी ही तय करना होगा

आयुस् – ठीक है हम जंगल के बीच से जायेंगे लेकिन हमे उसकी तैयारी करनी होगी ताकि रास्ते मे हम सब मुश्किल खतरों का सामना कर सके

अमृता आयुसी बिनीता सब डरे थे आयुस् भी डरा था जंगल के अंदर से जाना जिंदा बाहर निकला बहुत मुश्किल था कोन से खतरे कैसे रास्ते और किया कुछ झेलना पड़ेगा सब को अंदाज़ा था इसी लिये डरे थे

प्लान हो गया था जंगल के बीच से जाना है आयुस् सभी मिल  तैयारी करने मे लग जाते है जिसमे 2 दिन लगने वाले थे

कई हथियार बनाने थे पानी खाना ले जाने के लिये भी सब तैयारी करनी थी

अगले दिन दोपहर 12 बजे सब झूले पे लेते हुवे थे

आयुस् – मा सब तैयारी हो गई है कल सुबह होते ही निकलेगे

अमृता – सच कहु बहोत डरी हुई हु पहले मे आयुसी बिनीता एक जान थे अब दो है

बिनीता पेट सेहलाते हुवे – इतने लंबे बाद मा बनने का सुख मिला है और अब एक बरी परोबलम् पता नही जिंदा

आयुस् – बुआ मा गुरिया केह तू नही सकता आगे क्या होगा पर मे पूरी जान लगा दूंगा ताकि हम सेफ निकल सके

आयुस् पेट सेहलाते हुवे – आपपे हमे भरोसा है भाई

आयुसी समुंदर की तरफ देखते हुवे – काश कोई आ जाता तो हमे जंगल से होके नही जाना

तभी आयुस् को दूर एक छोटी शिप सिखाई देखती है आयुसी गोर से देखती है जब यकीन हो जाता है तो चिल्लाते हुवे – भाई शिप

आयुसी की बात सुनते ही सब समुंदर की तरफ देखते है तो सही मे शिप था

टाइम ना गवाते हुवे सभी तेजी से समुंदर किनारे खरे होके हाथ उपर कर चिल्लाते हुवे आवाज लगाने लगते है

किस्मत ने आयुस् अमृता बिनीता आयुसी को इस जंगल मे फेका था और वही किस्मत सब का साथ देती है

शिप किनारे आती है लेकिन उस शिप पे नाइट्स लोग थे जो जंगल मे रिसर्च करने आये थे जिसमे 5 लोग थे सब आयुस् अमृता आयुसी बिनीता को देख हैरान थे हालत थोरि खराब थी कपड़े भी गंदे फटे थे

आयुस् सब को एक झूठी कहानी बताता है की वो सब घूमने आये थे लेकिन वो सब जंगल मे अंदर खो गये और जिस शिप पे आये थे सब चले गये

सभी साइटेस् आयुस् की बात पे बिस्वास कर लेते है अजीब तो लगता है पर यकीन कर लेते है

एक साइटेस् – देखा हमे कोई फरक नही परता तुम सब कैसे आये बाकी हम 3 दिन यही रहने वाले है जब रिसर्च पुरा हो जायेगा तब हम तुम लोगो को साथ मे ले जायेंगे

आयुस् अमृता आयुसी सब बहोत खुश होते है

साइटेंस् सब अपना कैप लगा लेते है और जंगल मे अपना रिसर्च करने चले जाते है

आयुस् सब झूले पे बैठ बाते करने लगते है

अमृता खुश होके- सुकर है कल अब जाने वाले थे लेकिन आज किस्मत ने हमारा साथ दिया

बिनीता खुश होके – हा अब हम बच गये

आयुसी खुश होके – अब हमे खतरनाक जंगल से नही जाना होगा

आयुस् – हा मा बच गये किस्मत ने साथ दिया नही तो पता नही क्या होता

अमृता – लेकिन ये लोग जंगल मे रिसर्च किया करने आये है

आयुस् – जंगल में बहोत कुछ है रिसर्च करने के लिये मा

अमृता – अच्छा

किस्मत ने साथ दिया आयुस् अमृता सब की

अगले दिन जो साइटेस् थे सब 45 55 ke पास के थे सब के पास खाना था तो कई महीने बाद आयुस् सब अच्छा खाना खाते है

सभी एक जगह बैठे थे आयुस् सभी से साइटेस् लोग पूछते है कितने समय से इस जंगल मे है और जिंदा कैसे रहे तो आयुस् सब कहानी बता देता है जिसे सुन सब हैरान होते है

3 दिन सुबह साइटेस् का काम पुरा हो जाता है फिर सब निकल परते है अगली सुबह 11 बजे सब एक सेहर मे आते है साइटेस् सभी को छोर चले जाते है और कुछ पैसे भी दे देते है

अमृता आयुसी आयुस् बिनीता जंगल से बाहर निकल लोगो को देख बहोत खुश थे आयुस् सभी गारी पकर सीधा जाते है राहुल के पास

हॉल मे राहुल उसके पापा बैठे थे जैसे ही आयुसी आयुस् सब अंदर आते है राहुल आयुसी सब को देखता है तो उसकी फट जाती है

आयुसी तेजी से जाके राहुल की धुलाई करने लगता है राहुल दर्द मे चिल्लाने लगता है राहुल के पापा तो आयुसी को देख हैरान खुश हो जाते है उसका बेटा मार खा गया रहा है उसपे ध्यान ही नही था

आयुस् – अंकल

आयुसी जाके गले लग जाती है

अंकल – बेटा तुम सब कहा गायब हो गये थे

आयुसी सब सच बता देती है जिसे सुन गुस्से से लाल अपने बेटे के पास जाके बहोत मारता है

राहुल की अच्छी धुलाई के बाद सभी बैठे थे

राहुल के पापा का नाम भूल गया तो मे – रंजीत कहुंगा

रंजीत अमृता बिनीता सब  से माफी मांगते हुवे – माफ कर दो यकीन नही होता मेरा बेटा इतना गिर ऐसा कुछ करेगा

अमृता – देखिये भाई साहब आपके बेटे ने बहोत गलत क्या हमारी जान जा सकती थी लेकिन जब हम जिंदा है तो जाने देते है वैसे भी उसे सजा मिल गई है

रंजीत – सजा और. मिलेगी उसने कोई छोटी नही बरी गलती की है

आयुसी – अंकल सजा जरूर देना ताकि फिर कोई गलती नाकरे

आयुस् – अंकल राहुल ने सीधा मडर करने ki कोसिस की है ये मामला 4 लोगो के जान का था फिर भी आप मेरी बहन को अपनी बेटी की तरह प्यार करते थे तो हम भूल जाते है

रंजीत – सुक्रिया बेटा आप सब का

रंजीत राहुल को देख गुस्से से – कमीने तुम ने नेक लोगो की जान लेने की कोसिस की आयुसी बेटी इतनी अच्छी थी लेकिन खुद उसे गवा दिया प्यार ये सब तेरी गलती थी

रंजीत अमृता सब को देख – मेने फैसला कर लिया आयुसी बेटा मेरे पास जो है आधा हिस्सा तुम सब के नाम कर दूंगा जैसा है बेटा है तो आधा उसको बाकी अपना खुद देखे

फिर किया रंजीत आधा हिस्सा आयुसी सब के नाम कर देता है लेकिन रंजीत एक सर्ट रहता है लोगो की मदद करने का

पैसे आ गये थे तो आयुस सब को लेके दूर एक सेहर के साइड जहा कोई परोसी ना हो वहा एक घर लेके रहने लगता है घर के पास पास कोई देखने झाकने वाला नही था परोसी थे लेकिन दूर थे यानी आयुस् सब आराम से रह सकते थे वैसे रंजीत ने सब की पहचान बदल दी थी

आयुसी आयुस् की बीवी थी दुनिया के लिये नये पहचान मे अमृता बाकी बिनीता आसु मा अमृता मा थी मा ही रही

आयुस् गया था छोरी छुपे गाव और बिनीता के घर जाया वही हो चुका था जो आयुस् को लगा था बिनीता के पति ने दूसरी सादी कर ली थी जो आयुस् बिनीता के लिये मुश्किल आसान हो गई थी और बिनीता को कोई गीलती नही रही

जब आयुस् अमृता आयुसी बिनीता पूरी तरह सेटल हो गये तब आयुस् जाता है अपने गाव और रीमा से मिलता है रीमा पूरी शोक मे थी और खुश भी फिर रीमा कई सवाल करती है

आयुस् सब बताते जाता जिसे सुन रीमा हैरान शोक और झटका भी लगता है

रीमा – किया कहा बाप रे वो कमीना ऐसे कैसे कर सकता है चलो तुम सब सेफ हो मे देख बहोत खुश हु लेकिन तुमने जंगल मे जाके कांड कर दिया हा मा बहन बुआ को ही

आयुस् मुस्कुराते हुवे – क्या करू आप की बहोत याद आती थी

रीमा हस्ते हुवे – अच्छा मुझे भी बहोत याद आई

फिर दोनो मे चुदाई सुरु हो जाती है आयुस् खूब चोदता है चुदाई के बाद

आयुस् – मे आता रहुंगा आप भी आती रहना और जरूरी बात राज को या किसी को हमारे बारे मे नही बताना

आयुस् एक लाख रुपये निकाल देते हुवे – ये रख लीजिये आपके बहोत काम आयेगे

रीमा हैरान – बेटा लेकिन मे

आयुस् गले लगा के – आप भी मेरी बीवी ही है पति दे रहा है रख लो

रीमा सर्म से – अगर ऐसा है तो ठीक है

आयुस् रीमा को किस करते हुवे प्यार से – मे जा रहा हु मेने आपको बता दिया नम्बर दे दिया बात करना हो फोन करना बाकी मे आता रहुंगा

रीमा – ठीक है अपना खयाल रखना जब आउंगी तो दीदी से मिल कर बाते करुगी

आयुस् मुस्कुराते हुवे – हा ठीक है.

आयुस् फिर अपने घर आ जाता है

साम 4 बजे आयुस् बाजार से खरीदारी कर घर आता है अंदर जाते ही

एक छोटी प्यारी बच्ची आयुस् को देख खुशी से पापा पापा करते आयुस् का पैर पकर लेती है

तभी एक और बच्ची भी आके पापा पापा केह आयुस् के पैर पकर लेती है फिर एक बच्चा भी आके आयुस् से लिपट जाता है

आयुस् समान रख – मेरी प्यारी बेटी बेटा तुम सब को मे एक साथ कैसे उठाउ

आयुस् एक बच्ची को उठा के गाल पे किस करते हुवे – मेरा बच्चा

तभी दोनो बच्चे भी जिद करने लगते है गोदी के लिये

आयुस् – अरे यार एक बार मे कैसे सब को गोद मे लू

अमृता आते हुवे – किसने कहा था एक साथ हम सब को पेग्नेंट करने को अब पता चल रहा है ना

बिनीता भी आते हुवे हस्ते हुवे – मेरे बच्चे के पापा परेसान हो गये

आयुसी भी आते हुवे – ओ हो भाई मजे तो बहोत लिये अब ये सजा है

आयुस् तीनो को देख – सजा जब से ये तीनो शैतान पैदा हुवे है मेरी नींद चैन उर गई है तीनो एक साथ आयेगे तो मे कैसे क्या करुगा

हा भाई आयुस् के तीनो बच्चे xx साल के होने वाले है

अमृता ने बेटी को जन्म दिया नाम रखा गया – सीवानी

आयुसी ने भी बेटी को जन्म दिया नाम – रवीना

बिनीता ने बेटे को जन्म दिया नाम – अशोक

आयुस् सोफे के बैठ जाता है तीनो आयुस् के ऊपर चढ़ जाते है आयुस् बेचारा अमृता आयुसी बिनीता को देख – यार इन सैतानो को पकरो ना

अमृता आयुसी बिनीता जोर जोर से हस्ते हुआ – मजा तो बहोत लिये अब सजा मिल रही है

आयुसी रवीना को गोद मे लेके – मेरी बच्ची पापा को परेसान मत करो

रवीना – मा पापा के पास जाना है मुझे

आयुस् गाल पे किस करती है और एक चुचे निकाल – दूध पिलो फिर जाना

रवीना – हु कर दूध पीने लगती है

आयुस् – अशोक सीवानी के साथ खेलने लगता है

रात 11 बजे तीनो बच्चे सो गये थे और अमृता बिनीता आयुसी सब पास वाले कमरे मे बात कर रहे थे

आयुस् – बहोत मजे लेते लेती हो मुझे परेसान देख कर अब मे लूंगा

अमृता आयुसी बिनीता मुस्कुराते हुवे – हम रेडी है

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आयुस् अमृता के चुचे निकाल एक चुचे पकर मुह मे लेके चूस कर दूध पीने लगता है अमृता – आह बेटा ऐसे ही पिता था जब तु छोटा था

आयुस् – उफ मा बहोत मिठा है

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आयुस् फिर आयुसी के चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है आयुसी – उफ भाई पिलो आह बहोत दूध है आपकी बहन के चुचे मे

आयुस् – उफ मजा आ रहा है गुरिया उफ दूध पीके

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आयुस् फिर बिनीता के चुचे मुह मे लेके पीने लगता है – उफ बच्चे के पापा भी बच्चे से कम नही है

अमृता हस्ते हुवे – हा तुमने सही कहा

आयुसी – मुझे खुशी है मे मा बनी भाई की बीवी भी

अमृता बिनीता – हमे भी

अमृता – जैसा भी है ये पल खुशी बहोत खास है और हमारी लाइफ की सब से बरी खुशी आयुस् बेटा हमारे बच्चे है

        (  कहानी यही कतम् होती है  )

देखा भाई लोग मुझे पता है आप सब चाहते थे कहानी और आगे जाये आप सब क्या चाहते है मुझे पता है पर आप चिंता मत करो एक स्टोरी है जिसमे आप को आगे तक सब मजा मिलेगा लेकिन इंतज़ार करना होगा मे दो बरी स्टोर नही लेके चल सकता

सो मेरे दिमाग मे कई छोटी स्टोरी है उसे खतम करुगा

तु लौट के आजा मेरे लाल – जब एंड होगा तो बरी स्टोरी सुरु करुगा जिसमे आगे तक की कहानी होगी और और मेरी अब तक की सब से हट कर स्टोरी भी आप सब को मजा आयेगा लेकिन ( तु लौट के आजा मेरे लाल – के खतम होने का इंतज़ार करना होगा

बाकी छोटी लेकिन मजेदार स्टोरी लेके आता ही रहुंगा सो कल सुबह 11 बजे आपको पता चल जायेगा अगली स्टोरी के बारे मे

बाकी प्यार देने के लिये साथ देने के लिये आपक सब का  सुक्रिया

      मिलते है नई स्टोरी के साथ  🙏🙏🙏🙏

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