Update 9 C
उसके लफ्ज़ सुनकर मेरे कानों से धुआं निकलने लगा । मेरे शरीर का सारा खून मेरे लन्ड पर पर एकत्रित हो गया । धड़कने तेज हो गई । मैं उसके आंखों में देखते हुए अपनी जांघिया को पकड़ कर नीचे खिसका दिया । जांघिया के हटते ही लन्ड स्प्रिंग की तरह उछल पड़ा ।
श्वेता दी की नजर मेरे लन्ड पर पड़ी । उसकी आंखें वहीं अटक गई ।
वो मेरा लन्ड देख रही थी और मैं उसकी चुत देख रहा था ।
” अद्भुत , अनुपम , अदि्वतीय , अव्वल ” मैं फुसफुसाया ।
” क्या ।”
” तेरी बुर ।”
” शरम नहीं आती है ।”
” किसलिए ।”
” अपनी बहन की बुर की बड़ाई करते हुए ।”
” जब देखते हुए और ‘ बुर ‘ बोलते हुए शर्म नहीं आती है तो बड़ाई करने में शरम क्यों आयेगी ।”
” हमम “…..” मेरी कच्छी दो ।”
” क्यों ।”
देखते नहीं कितनी पानी छोड़ रही है ।” -उसने अपनी टांगें फैला कर अपने चुत में ऊंगली डाल कर चोदने लगी और रस से सराबोर अपनी ऊंगली मुझे दिखाते हुए बोली ।
मैंने तेजी से अपना जांघिया निकाल फर्श पर फेंक दिया । हम दोनों पुरी तरह मादरजात नंगें हो गये थे ।
हम दोनों अपने अपने गुप्तांगों को एक दुसरे को दिखा कर मसलने लगे ।
” तुम्हारी कछी गन्दी हो जाएगी । “- मैं कभी उसकी चुत तो कभी उसकी रस से भरी हुई ऊंगली को देखते हुए कहा -” इससे अच्छा है मैं चाट कर साफ कर देता हूं ।”
” मेरी बुर चाट कर साफ करोगे ।”
” हमम ।”
” कहीं तुम्हारे जीजा को पता चल गया तो ।”
” क्या ।”
” की उनकी बीवी की बुर को उसका छोटा भाई चाट चाट कर साफ़ करता है ।”
अब वो तेजी से अपनी चुत को उंगलियों से चोद रही थी और मैं उसके सामने बैठा मुठ मारे जा रहा था ।
” जीजा को कैसे पता चलेगा कि उसकी बीवी अपने भाई से अपनी बुर चुसवा रही है । जीजा को कैसे पता चलेगा कि उसकी बीवी अपने भाई से चोदवा रही है ।”
‘ अच्छा चोदवा भी रही है ” – वो सरक कर मेरे गोद में बैठ गई ।
” हां ” कहकर मैंने उसकी चूचियों को दबोच लिया ।
” उसे पता चल जाएगा ।”
” कैसे ।”
वो मेरा लन्ड पकड़ कर मसलते हुए बोली -” बुर फट जायेगी । तुम्हारा लौड़ा बहुत बड़ा जो है ।”
मैंने उसकी चुत में अपनी ऊंगली डाल दी और ऊंगली से चोदते हुए कहा -” बुर तो फटने के लिए ही होती है । लन्ड जितना बड़ा होगा बुर को उतनी ही ज्यादा मजा आयेगा ।”
” अच्छा ! और उसे पता नहीं चल जाएगा कि उसकी बीवी की बुर अपने भाई के मोटे लन्ड से चुद चुद कर ज्यादा ढीली हो गई है ।” वो मेरे लन्ड को मुठ मारते हुए बोली ।
” उसे तो ये भी पता नहीं चल पाएगा कि उसके होने वाले बच्चों का बाप वो नहीं बल्कि उसके बीबी का भाई होगा ….उसे ये भी पता नहीं चलेगा कि उसकी बीवी उसी के बगल में लेट कर अपने भाई से अपनी रसीली चुत कुटवायेगी ।”
वो काफी उत्तेजित हो गई ।
” अच्छा ? …तो शुरू करो ।”
” क्या ।”
” चोदन पर्व …. तभी न बहनचोद बनोगे ।”
” हां और तुम्हारे होने वाले बच्चों का मामा और बाप ।”
अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था । उसने मुझे धक्का दिया । मैं बिस्तर पर पीठ के बल गिर पड़ा । वो मुझ पर झुकी । अपनी चूची को मेरे सीने पर रगड़ी और अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दी ।
मैंने उसे अपने बाहों में कस कर दबोच लिया । वो अपने बाहों को हार मेरे गले में डाल कर मुझ पर पसर गई । उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां मेरे चौड़े सीने से दब गई ।
हम दोनों का गहरा चुम्बन शुरू हो गया था । मैं उसके निचले होंठ को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा । वो मेरा उपर वाले होंठ चुस रही थी । थोड़ी देर बाद उसने मेरे निचले होंठ को अपने होंठों में दबा लिया और बुरी तरह चूसने लगी । मैं उसके ऊपर वाले होंठ चूसने लगा ।
मैं उसकी चूचियों को दबाना चाहता था लेकिन वो मुझसे जोंक की तरह चिपकी हुई थी अतः मैंने उसके बड़े बड़े गांड़ को हाथों से सहलाने और मसलने लगा । क्या गांड़ थी उसकी । एक दम बड़े बड़े और मांस से भरपूर । वो उत्तेजित हो कर मेरे होंठों को बुरी तरह चूसने लगी । हम दोनों इतनी बुरी तरह एक दूसरे को चूम रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे मुंह में अपनी मुंह घुसाए जा रही थी और मैं उसके मुंह में । दोनों के थुक लार मिल कर एक हो गए थे । मै उसके थूक अपने गले से निगल रहा था और वो मेरी थूक निगल रही थी ।
हमारी सांसें फूलने लगी थी । उसने अपना मुंह उपर किया तब जाकर हमारी सांसें व्यवस्थित हुई । हम दोनों एक-दूसरे के आंखों में देखते जा रहे थे । मैंने उसकी आंखों में देखते हुए अपनी ऊंगली उसके गांड़ के छेद में डाल कर कुरेदने लगा । उसकी आंखें वासना से लाल हो गई थी । उसने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी रसीली जीभ को बाहर निकाला तो मैंने भी अपनी जीभ निकाल ली । वो फिर मेरे होंठों पर झुकी और अपने जीभ से मेरी जीभ को लड़ाने लगी । एक-दूसरे के जीभ से कुछ देर खेलने के बाद वो मेरे जीभ को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी । थोड़ी देर बाद मैंने उसे पलट कर अपने नीचे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके चुत से लन्ड को रगड़ते हुए उसकी जीभ को अपने मुंह में लिया और उसे चुसने लगा । मन कर रहा था उसके जीभ को चुसता रहुं चुसता रहुं और चुसता ही रहुं । वो बेचैन हो कर अपने हाथोंको बीच में डाल कर मेरे लन्ड को पकड़ लिया और उसे जोर जोर से मरोड़ने लगी ।
हम दोनों एक दूसरे के चुमाई चटाई से थक ही नहीं रहे थे । मैं उसके दोनों चूचियों को अपने हथेलियों में भर कर दबाने लगा । उसकी चुची में कुंवारी लड़कियों जैसी कड़ापन था ।करीब आधे घंटे तक दोनों ने एक दूसरे के जीभ और होठों को चूमा । चूसा । फिर मैं धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा और उसके पुरे चुचियों को दबा दबा कर चूसने लगा काटने लगा ।
” लगता है ” वो दर्द से कराही ।
लेकिन मैं तो बावला हो गया था । मैंने उसकी चूचियों को हाथों से दबोचते हुए निप्पल को अपने मुंह में ले कर चूसने लगा ।
अब उसे मज़ा आने लगा ।
वो अपनी सीने को उठा कर निप्पल को मुंह में ठूंसते हुए कामुक हो कर बोली –
” मेरे भैया को भुख लगी है…दुधु पियेगा…. अपनी दीदी की चूची का दूध पियेगा….।”
” Ssrrrruuuupppp…..Ssssrrruuuuppp…qqquuuummm….. ssrrrruuuupppp.”- मैं उसके निप्पल को होंठों से दबोच दबोच कर चुसने लगा ।
” aaaahhhh….aaahhhhh…..ooohhhh.”- वो बस सिसकारियां भर रही थी और ” आह ‘ ‘ ओह’ कर रही थी । और मेरे लन्ड को पकड़ कर मुठ मारने लगी । और अपनी गांड़ उठा कर झटके पर झटके देते हुए झर गई ।
मैं बदल बदल कर उसके दोनों निप्पलों को चूसना शुरु कर दिया । काफी देर तक उनको चूसा । जब मैं उसके चुचियों पर से हटा तब देखा कि उसकी पुरी चुचिया लाल हो गई थी । मैं धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगा । उसके नंगे पेट को जीभ से चाटते हुए उसकी नाभि पर पहुंचा । मैंने अपने जीभ का नोक बना कर उसके नाभि में प्रवेश करा दिया । वो मेरे सर के बालों को सहलाये जा रही थी ।
उसके नाभि को गीला करने के बाद मैं उसके उसके चुत के ऊपरी हिस्से पर जीभ फिराने लगा ।
थोड़ी देर बाद मैं उठा और उसके दोनों पांवों के बीच बैठ गया । मैंने उसकी तरफ नजर फेराई । वो मुझे ही देख रही थी । मैं मुस्कराया तो वो भी मुस्कुरा दी । मैं झुक कर उसके मोटे मोटे जांघों पर अपने होंठ रख दिए । उसकी जांघें भी उसके चुत रस से भीगी हुई थी । मैंने उन्हें चाट लिया । अब मैं शीघ्र उसके चुत के पास जाना चाहता था ।
मैंने जांघों को चाटते चाटते उसके दोनों पैरों को पकड़ा और उसे विपरीत दिशा में फैला दिया । उसके डबल पावरोटी के समान फुली हुई चुत मेरे आंखों के समकक्ष आ गयी । उसकी चुत उसके कामरस से भीगी हुई थी । वो थोड़ी देर पहले झड़ी थी इसलिए उसके चुत के साथ साथ बिस्तर भी गीली हो गई थी । ताश के सारे पत्ते बिखरे पड़े थे । पत्ते मुड़ गई थी और बिस्तर के के चारों तरफ फैल गए थे। तभी मेरी नजर एक जगह रखें ताश के उन
तीन पत्तों पर पड़ी जो शायद मेरे थे और जीतने का कारण बने थे । वे पत्ते उस के गांड़ के नीचे दबे हुए थे । मैंने उन पत्तों को उसके गांड़ के नीचे से निकाला तो देखा उन पत्तों में एक स्प्रेड का छः , एक डायमंड का गुलाम और एक हार्ट का सात आया था । मैं आश्चर्यचकित हो गया । लास्ट गेम मैं नहीं श्वेता दी जीती थी और उसने कहा था कि मैं जीता हूं । उसने मुझे झुठ बोला था । वो मेरे सामने नंगी होना चाहती थी ।
मैंने उन पत्तों को उठाया और श्वेता दी को वहीं से दिखाया । श्वेता दी उन पत्तों को देख कर मुस्कराई । मेरे दिल में उसके लिए बहुत प्यार आया । मैंने झुक कर उनके होंठों को चुम लिया। मैं वापस उनके पैरों के बीच बैठा और उनके पांवों को उठा कर उनके सीने पर कर दिया जिससे उनकी चुत फैल गई । मैंने उनकी चुत को जी भर के देखा फिर अपने होंठों को चुत से सटा दिया ।
मैंने सबसे पहले चुत के मोटे ओंठ पर अपनी जीभ फिराई फिर उन को अपने होंठों से भर कर चूसने लगा । वो दुबारा गरम हो गई थी ।चुत रस से भींगने लगा था । वो अपना काम रस छोड़ने लगी थी जिसे मैं चुस चुस कर पी रहा था । मैंने अपनी ऊंगली चुत के छेद में डाल दिया और भगनासे को होंठों से दबा कर चुसने लगा । वो हाय हाय कर उठी । अपने कमर उठा कर मेरे मुंह पर फेंकने लगी । उसकी चुत में पानी का सैलाब आ गया । मैं उस पानी का एक कतरा भी जाया नहीं होने देना चाहता था । मैंने अपने होंठ को उसके चुत से चिपका कर उसके छेद में अपनी जीभ डाल दिया । वो मलाई छोडती रही और मैं उसे चाट चाट कर गले से निगलता रहा ।
श्वेता दी की उत्तेजना चरम पर थी । वो मेरे बालों को कस कर पकड़ ली और अपनी चुत की तरफ खिंचने लगी । ऐसी प्रतित हो रहा था जैसे वो मुझे अपने चूत में ही घुसेड़ लेगी । और मैं तैयार था उनके चुत में घुसने के लिए । मुझे उनके चुत की महक ने पागल सा कर दिया था । अपने नाक से चुत की महक को सुंघते हुए तेजी से छेद के अंदर जीभ को डालने लगा और निकालने लगा । वो अपने गांड़ को उपर की तरफ धकेलती हुई बोली –
” म…मेरा निकलने वाला है ।”
मैं चुत को चाटते चाटते ही बोला – ” निकलने दो लेकिन सब मेरे मुंह के अंदर ही छोड़ना । सारी मलाई पीनी है मुझे ।”
वो पूर्ववत अपने गांड़ उछालते हुए बोली -” मुझे भी पीना है ।”
मैंने उसके चुत से मुंह उपर करते हुए बोला -” तुम कैसे पियोगी ।”
वो मुझे धकेलते हुए बोली -” बेवकूफ मैं इसकी बात कर रही हूं “- बोलकर मेरे लन्ड को पकड़ लिया ।
वो मेरा लन्ड के पानी के लिए बोल रही थी । मैं उसके ऊपर से उठा और बिस्तर पर लेट गया और उसे मेरे उपर आने का इशारा किया । वो मेरे सिर की तरफ अपनी पांव करके मेरे उपर लेट गई । हम 69 पोजीशन में आ गये थे ।
वो मेरे लन्ड को हाथों से पकड़ते हुए बोली -” कितना लम्बा है । मोटा भी बहुत है ।”
” क्यों जीजू का नहीं है ?”
” है पर इतना ज्यादा नहीं ।”
” तुम्हे कैसा लगा ।”
” वो तो तुमसे पहले ही बोल चुकी हूं । बहुत सुंदर ।”
” क्यों नहीं होगा । आखिर है किसका ।” मैंने मजाक किया ।
” मेरे छोटे भाई का जो अब मेरा भतार बन गया है ।” बोलकर मेरे लन्ड के सूपाडे पर अपनी जीभ लड़ाने लगी । मैंने भी उसके पांवों को अलग कर के उसके चुत पर अपना मुंह रख दिया । धीरे धीरे उसने लन्ड को अपने मुंह में डालने का प्रयास किया । थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन अंततः उसे अपने मुंह में ले ही ली और चुसने लगी । कभी सुपाड़ा के छिद्र पर जीभ रगडती कभी मुंह उपर नीचे करके पुरे लन्ड को चूसने लगती ।
मैं उत्तेजित तो पहले से ही था अब ऐसा लग रहा था कि मैं एक दो मिनट में ही झड़ जाऊंगा । मैं अपने कमर उठा उठा कर लन्ड को उसके मुंह में पेलने लगा । साथ ही उसके चुत के भी चूमता चाटता रहा । बड़ी मुश्किल से पांच मिनट तक कन्ट्रोल किया ।
” मेरा होने वाला है “- मैंने चुत से मुंह हटा कर बोला ।
” मेरा भी “- वो जोर जोर से लन्ड चूसती हुई बोली ।
मैं वापस अपने मुंह उसके चुत से सटा दिया । तभी मेरे लन्ड ने जोर की पिचकारी मारी और उसके मुंह में झड़ने लगा । उसी वक्त उसने भी अपने चुत से अमृत रस की बौछार शुरू कर दी । उसके चुत की मलाई मेरे गले से होते हुए पेट में जाने लगी । वो झड़ती रही और मैं पीता रहा उसी तरह मैं झड़ता रहा और वो पीती रहीं । दोनों का जबरदस्त इजेकुलेशन हुआ था । झड़ने के बाद काफी देर तक हम वैसे ही पड़े रहे ।
कुछ देर बाद वो उठी और बाथरूम चली गई । उसके आने के बाद मैं बाथरूम गया और फ्रेश होकर बाहर आया। वो नंगे बदन बिस्तर पर लेटी थी । रूम की लाइट पहले की ही तरह जल रही थी । मैं जा कर उसके बगल में लेट गया । फिर मैंने करवट ली और उसे अपने बाहों में भर लिया । वो मुझ से लिपट गई ।
मेरे होंठों पर एक चुम्बन दे कर बोली -” इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया था ।”
” जीजू के साथ भी नहीं ।” मैंने उसकी चूची को सहलाते हुए कहा ।
” नहीं । ” कहकर उसने थोड़ी जगह बनाई जिससे मैं उसके चुचियों को प्यार कर पाता ।
” इसकी वजह बताऊं ।”
” हमम ।”
” हम दोनों भाई बहन हैं ना इसलिए । सगे संबंधियों में सेक्स करने से उत्तेजना अधिक आती है ।”
” हम्मम…सच में मैं इतनी उत्तेजित कभी नहीं हुई थी और अपनी जिंदगी में इतने गन्दे शब्द कभी नहीं बोले हैं । लेकिन तुम्हारे साथ न जाने कैसे ये सब बोलती गयी । उनके साथ तो कभी भी नहीं बोली ।”
” ऐसा ही होता है गुल बदन । अपने भाई से चोदवाओगी तो इससे भी ज्यादा गन्दे शब्द निकलेंगें “- बोलकर मैंने उसकी चुत को हथेलियों से मसल दिया ।
वो मेरे लन्ड को पकड़ कर सहलाने लगी और बोली -“लेकिन तुम्हें मेरी कसम जो इसके बारे में किसी को कहा तो ।”
” पागल हूं जो ये सब किसी से कहुंगा । और कहुंगा भी क्या कि मैं अपनी दीदी को चोदता हूं । क्या तुम किसी से कहोगी मेरा भाई मुझे रोज पुरी नंगी कर के मेरी बुर में अपना मोटा लौड़ा डाल कर चोदता है ।”
वो लन्ड को जोर जोर से मुठ मारते हुए उत्तेजित हो कर बोली -” कितनी गंदी बात करते हैं ना हम ।”
मैंने उसके चुत के दरारों में ऊंगली डालते हुए कहा -” मैं नहीं तुम ।”
” गन्दे भाई की गन्दी बहन ।” वो मेरे शरीर पर चढ़ गयी ।
उसके पुरे शरीर को सहलाते हुए कहा -” गन्दे भाई की सबसे प्यारी चहेती बहन ।”
हम दोनों उत्तेजित हो गये थे । एक दुसरे के शरीर को सहलाते दबाते गुत्थम गुत्थी हुए ऊपर नीचे होने लगे । मैंने उसे पेट के बल लिटा दिया और उसके पांवों को पकड़ कर उसकी कमर उपर उठा दी । वो चौपाया जानवर की तरह अपनी गांड़ को उठा दी । उसके गांड़ को चूमता चाटता हुआ मैंने अपनी जीभ उसके गांड़ के छेद में डाल दी और उसे जीभ से चाटने लगा । वो सिहर गई और अपनी गांड़ मेरे मुंह पर पटकने लगी । गांड़ को चाटते चाटते उसकी चुत को मुंह में भर लिया और उससे टपकते रसों को पीने लगा । वो बेचैन हो कर बोली –
” क..करो । बर्दाश्त नहीं हो रहा है ।”
मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया और उसके उपर चढ़ गया । मैंने लन्ड को उसके चुत से रगड़ते हुए कहा -” क्या करूं ।”
” साले कमीने अपनी दीदी के बुर के छेद में लन्ड लगा के बोलता है क्या करूं । चोद मुझे बहन चोद ।”
मैंने उत्तेजित हो कर धक्का दिया । लन्ड का सुपारा उसके चुत में घुस गया । वो दर्द से कराही ।
” धीरे से कर ना ।”
” अब धीरे से नही तेरी बुर को जोर जोर से चोदूंगा मेरी जान ।” कहकर मैंने जोर का धक्का दिया और आधा लन्ड उसके चुत में समा गया ।
वो जोर से चिल्लाई ।
” धीरे से नही कर सकता है ।” वो कराहती हुई बोली ।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख कर एक और प्रहार किया । लन्ड उसकी चुत में पुरी तरह से घुस गया । उसके आंख के कोने से आंसू छलक पड़े । मैं थोड़ी देर वैसे ही पड़ा रहा। फिर कुछ देर बाद उसके चुचियों को प्यार से दबाया फिर उसके निप्पल को मुंह में ले कर चूसने लगा । थोड़ी देर में वो नोर्मल हुई । मैंने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिया । उसकी दर्द अब कम हो गयी थी । उसकी चुत अब गीली होने लगी थी । थोड़ी देर में ही उसने अपने कुल्हे उठाने लगी ।
मैंने धक्के तेज कर दिए । वो भी नीचे से ऊपर की ओर अपनी चुत को ढकेलने लगी । मेरा लन्ड उसके चुत में तेजी से घुसने और निकलने लगा । चोदाई फुल स्पीड में चालु हो गई थी । हम दोनों ताल से ताल मिला कर कमर उपर नीचे कर रहे थे । उसकी चुत काफी गीली हो गई थी । जिससे ‘ फच ‘ ‘ फच ‘ की आवाज आने लगी । मैं उसके होंठों को चूसने लगा। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी । मैं उसके जीभ को चुसते हुए कमर उठा उठा कर धक्के मारने लगा । वो अपने पांवों को मेरे कमर से लिपटा कर मेरे गांड़ को अपने हाथों से दबाने लगी ।
दोनों सेक्सी भरी आवाज निकालते हुए घमासान चुदाई में लगे हुए थे । उसकी चुत की गर्मी से मुझे लगता नहीं था कि अब मैं ज्यादा देर तक टिक पाऊंगा ।
चोदाई के दौरान उसने मुझे नीचे पलट दिया और वो मेरे उपर आ गयी । अब मैं नीचे था और वो उपर । वो उछल उछल कर मुझे चोदने लगी और मैं नीचे से ऊपर की तरफ धक्का मारने लगा । उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां जोरों से हील रही थी ।
” हाय…. कितना मज़ा आ रहा है बहन को चोदते हुए ।”
” कुछ बोलो मत ” – वो अपनी गांड़ जोर जोर से पटकते हुए बोली – ” अब हम नहीं सिर्फ उन्हें बात करने दो ।”
मैंने उसे पलट कर अपने नीचे किया और उसकी चुत में तेजी से धक्का देते हुए कहा -” किन्हें बात करने दो ।”
” उन्हें ” – वो नीचे की तरफ इशारा करते हुए बोली -” फच फच की आवाज नहीं सुन रहे हो ।”
हम दोनों के घमासान चुदाई से जो ‘ फच ‘ ‘ फच ‘ की आवाज आ रही थी वो उसकी बात कर रही थी ।
” सही कह रही हो । अब सिर्फ तुम्हारी बुर और मेरी लन्ड को बात करने दो ।”
करीब पौन घंटे की चुदाई के बाद वो हांफते हुए बोली -” मैं झडने वाली हूं ।”
” मैं भी … दोनों एक साथ झडते है ।”
अचानक उसका शरीर अकड़ा और वो झटके दे दे कर अपनी गरम पानी मेरे लन्ड पर छोड़ने लगी । उसकी गर्मी से मैं भी बच ना सका । मैं भी अपना वीर्य उसके चुत में तेजी से छोड़ने लगा । ज्योंहि मेरे विर्य को उसने अपने अन्दर महसूस किया वो मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगी । दोनों ने काफी पानी फेंका था । हम एक-दूसरे से जोंक की तरह लिपटें हुए काफी देर तक पड़े रहे ।
हमारा चोदन पर्व अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच कर शेष हुआ ।

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