Update 9 B.
” कपड़े तो चेंज कर लो ।” मैंने कहा ।
” नहीं । पहले बताओ राजीव से क्या बात हुई थी ।” श्वेता दी आराम से बिस्तर पर अपने को एडजस्ट करते हुए बोली ।
मैंने इमानदारी से पुरी बात बताई । वो राजीव के अनुष्का के साथ नाजायज संबंधों को सुनकर भड़क गई । मैंने बड़ी मुश्किल से उसे शान्त किया । मैंने उसे समझाया कि अनुष्का राजीव का पहला प्यार था और यदि वो राजी होती तो वो आज के तारीख में राजीव की पत्नी होती । और वैसे भी अनुष्का शादी शुदा है और वो अपने फिजूलखर्ची और लालची स्वभाव के कारण अपने पति को छोड़ने वाली नहीं है ।
वो आश्वस्त हुई । फिर बोली ” एक और बात है ।”
” क्या?”
उसने चिंतित स्वर में कहा -” मुझे उस घर में सोने से डर लगता है । बाथरूम में जाती हूं तो ऐसा लगता है जैसे अमर अभी उठ कर खड़ा हो जाएगा और मुझे….”
मुझे उसकी बात जायज़ लगी । अमर की मौत कोई स्वाभाविक मौत तो थी नहीं । उसका कत्ल हुआ था । तो डरना वाजिब ही था । सोचते हुए मुझे एक आइडिया आया ।
मैंने कहा -” तुम लोग क्यों नहीं वो फ्लेट बेच देते हो ? और गाजियाबाद छोड़ कर दिल्ली में ही शिफ्ट हो जाओ ।”
” तुम्हें इतना आसान लगता है ? फ्लेट खरीदना अमूमन आसान होता है । लेकिन बेचना बहुत मुश्किल होता है । और गरजु हो कर बेचने में फ्लेट की कीमत भी सही नहीं मिलती है ।”
” इसका एक रास्ता हो सकता है ।”
” क्या ?”
” तुम लोग अमर के घर शिफ्ट हो जाओ । अमर के घर में उसके मां के अलावा और कोई भी नहीं है । वो बेचारी अकेली घर में अमर के यादों में डुबी रहती है । तुम लोगों के आने से उनका अकेलापन दूर हो जाएगा और उनका दिमाग भी दुसरी चीजों की तरफ केन्द्रित होगा । और फ्लेट की जब सही कीमत मिले तब बेच देना ।”
” बोल तो तुम सही रहे हो लेकिन क्या वो हमे अपने घर में रहने देगी ।”
” उसकी चिंता मत करो । तुम राजीव जीजू से बात करो फिर अपनी राय मुझे बता देना । और उनके लिए भी तो ये डिसीजन अच्छा ही होगा , वहां से उनकी आफिस काफी नजदीक हो जाएगी ।
श्वेता दी को ये मशवरा काफी अच्छा लगा । वो खुश हो कर बोली – ओके । चलो अब ताश खेलते हैं ।”
मैंने ताश अपने पैंट से निकाल कर उस के सामने रखा ।
” याद रखना मेरे पास हजार बारह सौ से ज्यादा रूपए नहीं है । वैसे खेलना क्या है ?”
” स्ट्रीप पोकर ।” श्वेता दी ने कहा ।
मैं चौंक गया । स्ट्रीप पोकर एक इरोटिक गेम है जिसे अमेरिका और यूरोप में अधिकतर खेला जाता है । इस गेम में पैसों की बाजी नहीं लगती है । इसमें प्रत्येक बाजी में हारने वाला अपने शरीर से एक कपड़े उतारता है । और अन्त में हारने वाले के शरीर से जब सभी कपड़े उतर जाते हैं मतलब हारने वाला जब पुरी तरह से नंगा हो जाता है तब जाकर ये गेम खतम होता है । इसे कार्ड या स्पाइन दि बोटल के द्वारा खेला जाता है ।
“तुम्हें स्ट्रीप पोकर के बारे में पता है न ।” मैं आश्चर्यचकित हो बोला ।
” हां पता है ।”
” केसे भाई ”
” क्या सारी दुनिया का ज्ञान तुम्हारे ही पास है ? क्या इन्टरनेट तुम्हीं सर्च करते हो ।”
” तुम क्या जानती हो । ये तो बताओ ? ” मैं अभी भी आश्वस्त नहीं था ।
” यहीं कि अगर मैं जीती तब तुम्हें अपने शरीर से एक वस्त्र निकालना पड़ेगा और यदि तुम जीते तो मैं अपने शरीर से एक वस्त्र निकालूंगी ।”
” और गेम शेष कब होगा ?”
” जब तक हारने वाले के शरीर से पुरी तरह कपड़े उतर नहीं जायेंगे ।”
” मतलब जब तक कोई एक पुरी तरह नंगा नहीं हो जाएगा ।” मैंने कहा ।
” हां ।”
मैंने उसे सर से पांव तक निहारा । वो अभी भी वहीं ब्लू कलर की साड़ी और ब्लाऊज़ पहने हुए थी । ब्लाउज में कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष गर्व से सीना तान कर खड़ी थी । शरीर का कोई भी भाग खुला तो नहीं था लेकिन उसके गदराए हुए का प्रत्यक्ष प्रमाण पेश कर रही थी ।मेरा दिल तो बल्लियों उछलने लगा । उसके नंगे होने की कल्पना से ही मेरा लिंग उत्तेजित हो गया । मुझे सालों की मेहनत साकार होते हुए नजर आने लगी ।
” सपने देखना बंद करो । और मेरे सामने नंगे होने के लिए तैयार हो जाओ ।” उसने मेरे चेहरे के हाव-भाव को पढ़ते हुए कहा ।
मैं मुस्कराते हुए बोला -” जब मैं टेंथ स्टैंडर्ड में और तुम हायर सेकंडरी में थी तभी से तुम को नंगा देखने की लालसा जगी हुई थी । लगता है आज उपर वाले को दया आ ही गई ।”
” बड़ी शौक है ना अपनी बहन को नंगी देखने की । मगर अफसोस तुम्हारी इच्छा अधूरी ही रह जाएगी । वैसे भी आज तक ताश में मुझसे हारते ही आए हो ।”
” देखते है आज तुम्हें हारने से तुम्हारी किस्मत कितना बचाती है ।”- मैंने मुस्कराते हुए ताश को फेंटते हुए कहा -” अब जरा कपड़ों के बारे में बात कर ले । हम दोनों के वस्त्र भी तो बराबर बराबर होनी चाहिए न । मेरे शरीर पर इस वक्त चार कपड़े है पैंट , शर्ट , गंजी और जांघिया । अब तुम अपने बताओ ।”
” मेरे पांच हैं ।”
” कौन कौन सा ?”
” साड़ी , ब्लाउज , पेटिकोट , ब्रा और पैंटी ।”
” ये तो गलत है । मेरी तरह तुम भी चार कपड़ों में हो जाओ ।”
” नहीं । तुम्हारे कलाई की घड़ी को पांचवां वस्त्र मान लेंगे ।”
” ओके ।” – मैं राजी हो गया ।
मैंने ताश फेटी और उसने ताश को बीच से काटा । असल में कार्ड फ्लश की तरह ही बांटे जाते हैं । तीन तीन करके । फ्लश की तरह जिसका कार्ड बड़ा होगा वो ही जीतेगा ।वो अपने कार्ड उठाई ।
मैंने अपना कार्ड देखा । मेरे पास हार्ट का 7 और स्प्रेड का 10 और किंग आया था । मैंने उसे अपने कार्ड देखाने को बोला ।
उसके पास डायमंड का क्विन , स्प्रेड का गुलाम और क्लब्स का 9 आया था । उसके कार्ड मेरे से बड़े थे । मैं पहला गेम हार गया था । मैंने अपनी घड़ी निकाल कर पलंग के बगल में रखे मेज पर रख दिया ।
वो जीती थी इस बार कार्ड उसने बांटे । मैंने अपनी कार्ड देखी । इस बार डायमंड का तीन , क्लब्स का छः और स्प्रेड का नौ आया था । मैं निराश हो गया । जब उसने अपने कार्ड दिखाया तो उसके पास हार्ट के आठ और क्लब्स के दो और स्प्रेड के आठ निकले । उसके पास आठ का पेयर था । मैं फिर हार गया ।
मैंने अपना शर्ट निकाल कर मेज पर रख दिया । उसने मेरे बदन पर एक सरसरी निगाह डाली ।
वो मुस्कुराती हुई कार्ड बांटी । वो फिर जीत गयी । उसने कलर से मुझे बीट कर दिया जबकि इस बार मेरे पास भी अच्छे पते आये थे । मेरे पास किंग का पेयर था ।
मैंने अपनी गंजी उतार दी और उसे भी बगल में रख दिया । अब मैं उपर से नंगा हो गया था । मेरे शरीर पर सिर्फ पैंट और जांघिया ही बचा था ।
नेक्स्ट राउंड में मेरी तकदीर खुली । उसके पास दो का पेयर आया था जबकि मेरे पास छः का पेयर आया था ।
श्वेता दी ने पलंग पर खड़े होकर अपनी सारी उतारी और उसे उसी मेज पर रख दिया जिस पर मेरा वस्त्र था । साड़ी उतरने के बाद उसकी कमर नंगी हो गई थी । ब्लाउज में कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष प्रत्यक्ष रूप से सामने आ गये ।
अगला राउंड भी मैं ही जीता । उसके पास सबसे बड़ा कार्ड गुलाम था जबकि मेरे पास दो तीन , चार का सिक्वेंस आया था ।
उसनेे बैठे बैठे ही अपने ब्लाउज को निकाला और बगल मेज पर रख दिया ।
उसकी ब्रा उसके बड़े-बड़े गोलाईयों को ढकने में पुरी तरह से नाकाम थी । वो उसके पुरे वक्ष का चालीस प्रतिशत ही ढक पाई थी । साठ प्रतिशत वक्ष नंगे हो गए थे । गोरी त्वचा अधनंगी गोलाईया नंगा कमर और गहरी नाभि देखकर मैं होशो-हवास खो बैठा । मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी ।
” कार्ड बांटो ” – उसकी आवाज से मेरी तनदरा भंग हुई ।
अभी भी वो तीन वस्त्र पहने हुए थी जब की मैं दो । मैंने कार्ड बांटी । इस बार उसने मुझे हरा दिया । उसके पास तीन दहला आया था और मेरे पास तो सबसे बड़ा कार्ड ही नौ था ।
मैंने अपना पैंट निकाल कर रख दिया । अब मैं सिर्फ जांघिया पहने हुए था । मैंने महसूस किया कि वो मेरे बदन को चोरी छिपे निहार रही है । कभी उनकी नजर मेरे चौड़ी सीने पर जाती तो कभी मेरे माशल जांघों पर और कभी मेरे जांघिया में कैद उठे हुए उभारों पर । मैंने अपने शरीर पर काफी मेहनत की थी । मैंने जिन लड़कियों से संभोग क्रिया था वो सभी मेरे गठिले शरीर की कदरदान थी ।
” अब अपने आखिरी वस्त्र को निकालने और हारने के लिए तैयार हो जाओ ।” श्वेता दी ने मुस्कुराते हुए कहा ।
” देखते है । जब तक सांस तब तक आस ।”
उसने कार्ड बांटे । इस बार मैं जीता । मेरे कार्ड तो बहुत छोटे थे लेकिन उसके कार्ड मुझसे भी छोटे थे । मेरे पास छः , नौ और ग़ुलाम था जबकि उसके पास छः , आठ और दस था । अबकी बारी श्वेता दी को कपड़े उतारने की थी ।
” क्या उतारोगी ?” मैं तो चाहता था कि वो अपने ब्रा निकाल दे ताकि मैं उसके नंगे चुचियों का दिदार कर सकूं ।
लेकिन उसने अपना पेटीकोट उतारा । उसकी मोटी मोटी जांघें जो दुध के समान गोरी थी मेरे आंखों के सामने साक्षात थी । वो अब पैन्टी में थी । पैन्टी उसकी चुत से चिपका हुआ था और वो उसके चुत के रस से भीगी हुई थी ।
मैं ‘आह ‘ भर कर रह गया ।
” पत्ते बांटो । इस बार तो बच गए । लेकिन इस बार नहीं छोडूंगी ।”
मैं इतना भी अहमक नहीं था । कुछ कुछ समझ में आ रहा था लेकिन सगे संबंधियों के सामने मती काम करना भुल जाती है । मैंने पत्ते बांटे । धड़कते दिल से पत्ते उठाया और जैसे ही मैंने पत्तों पर नजर डाली मैं खुश हो गया । मेरे पास ग़ुलाम , बेगम , बादशाह का स्टेट सिक्वेंस था ।
श्वेता दी के पास स्प्रेड का कलर था । वो ये गेम हार गयी थी । मैं सोच रहा था अब वो क्या करेंगी । अपनी ब्रा उतारेगी या अपनी पैंटी । जो भी उतारें मुझे तो मजा ही आयेगा ।
श्वेता दी ने मुझे अपने नशीली आंखों से देखा और अपने जीभ को अपने होंठों पर फिराया । मैं उसके गुलाबी होंठ और रसीली जीभ को देख कर आहें भरता रह गया । कितना मज़ा आएगा इन को चुसने में । एक बार चुसने को मिल जाए तो फिर कयामत तक चुसता रहुं ।
वो मेरी आंखों में देखते हुए अपनी हाथ पिछे की तरफ ले गई और ब्रा को खोल कर नजाकत से मेरी गोद में फेंक दिया । और अपने सीने को अपने हाथों से ढक लिया ।
” ये ग़लत है । वहां से अपने हाथ हटाओ ।” मैंने कहा ।
” कपड़े उतारने की शर्त थी वो तो की ना मैंने ।”
” नहीं । अपने बदन को ढकना गेम के रूल में नहीं है ।”
” नहीं । मैं नहीं हटाउगी ।”
” ठीक है तब गेम बंद करते हैं ।”
” तुम एक नम्बर के बदमाश हो । नखरे करते हुए उसने अपने हाथ अपने वक्ष पर से हटा लिये ।
उसकी दुधिया कलर की बड़ी बड़ी चुचिया नग्न हो गई । उसकी चुची के निप्पल मध्यम आकार के थे । निप्पल का areola सांवला रंग का था । उसकी चुची गोलाकार और ठोस थी । शायद 38 D होगी ।
मेरी नजर चुचियों पर से हटती ही नहीं थी । थोड़ी देर बाद मेरी नज़र चुचियों से निचे की तरफ गई तो उसके नंगे कमर और गहरी नाभि पर फ्रिज हो गई । अगर वो नहीं टोकती तो मैं घंटों उसके सुंदर और सेक्सी बदन को देखते ही रहता ।
” कार्ड बांटो ।” इस बार उसके आवाज में कामुकता और थोड़ी शरमाहटपन थी ।
मैंने मन ही मन उपर वाले को धन्यवाद दिया और कार्ड बांटी ।
अब हम दोनों के बदन पर सिर्फ़ एक एक ही वस्त्र था । वो सिर्फ पैंटी में थी और मैं सिर्फ जांघिया में । हम दोनों बिस्तर पर थोड़ी सी ही फासले पर बैठे थे।
मैंने सहुलियत के लिए अपने पांव थोड़ा फैला लिया था । मैं अपने पत्ते उठाते हुए उसकी तरफ देखा तो उसे मैंने अपने दोनों जांघों के बीच देखते हुए पाया । मैंने देखा मेरा लन्ड जांघिया को फाड़ कर बाहर निकलने के लिए फड़फड़ा रहा था ।
उसने अपनी पलकें उपर की ओर की । हमारी नजरें मिली । दोनों की आंखों में वासना चरम पर थी । उसने मेरी आंखों में देखते हुए बड़े ही इरोटिक ढंग से कार्ड को अपने पैन्टी के अन्दर किया और उसे अपने चुत से रगड़ कर बाहर निकाला फिर सेक्सी आवाज़ में बोली –
” इस बार मैं ही जीतूंगी । अपने पत्ते दिखाओ ।”
मेरा कलेजा मुंह पर आ गया । मुझे तो लगता था कि बिना कुछ किए मेरा लन्ड पानी फेंक देगा ।मैंने भी अपने लन्ड को जांघिया के उपर से मसलते हुए कहा – ” दिखा रहा हूं जाने मन । पहले अपनी तो दिखाओ ।”
उसने अपने पत्ते दिखाए । मेरी आंखें उन पत्तों को देख कर फटी की फटी रह गई । उसके पत्ते उसके चुत के रस से भीगी हुई थी । मैं तो पागल सा हो गया ।
मैंने उसके पत्ते उठाये और उसकी आंखों में देखते हुए पत्तों को जीभ से चाटने लगा । वो ये देखकर काफी उत्तेजित हो गई । मैं उसके नमकीन पानी को चाट कर पत्ते से पुरी तरह साफ कर दिया । फिर उसके पत्तों पर देखा ।
उसके पास बहुत ही अच्छा कार्ड आया था । उसके पास तीन बेगम आई थी । मैं गेम हारने वाला था । मुझे उसकी चुत को देख ने की लालसा धूमिल होते हुए दिखाई देने लगी ।
” तुम्हारे कार्ड में देखूंगी ।” बोलकर उसने मेरे कार्ड उठा लिए ।
मैं धड़कते दिल से उसे देखा कि शायद मेरे पास उससे भी अच्छा कार्ड आ जाय और मैं उसकी चुत को देख सकूं ।
उसने मुझे देखा और निराशा भरे स्वर में कहा – ” तुम्हारी किस्मत आज अच्छी है । तुम जीत गए ।”
मैं आश्चर्य और खुशी से मन ही मन झुम गया । मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने करोड़ों रुपए की लाटरी की बमपर प्राइज जीत ली हो । मैं मछली के आंख की तरह उसके पैन्टी पर नजर टिका दी ।
श्वेता दी ने बड़ी ही कामुकता पूर्वक अपनी उंगलियों को अपने पैन्टी पर रखा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसकाने लगी । पैन्टी को उतार कर मेरे मुंह पर फेंक दिया । मैंने जल्दी से उसे लपका और उसकी नंगी चुत को देखने का प्रयास करने लगा ।
श्वेता दी फिर से अपने सुखे होंठों पर जीभ फिराई और मेरी नज़रों में देखते हुए आंखों से नीचे की तरफ देखने की इशारा करते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दी ।
मेरी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच पर गयी ।
मेरी आंखों के सामने उसकी चुत थी ।
एक दम चिकनी , डबल पावरोटी के समान फुली फुली , चुत के बीचों-बीच लम्बी दरार और मोटे मोटे ओंठ । उसके दरारों से रिसता हुआ पानी जो उसके जांघों तक आ पहुंचा था ।
” कैसी है ?”
मेरा ध्यान उसके बोलने से टुटा । मैं वासना से लथपथ उसकी तरफ प्रश्न भरी नजरों से देखते हुए कहा -” क.. क्या ?”
” ये .” – उसने अपनी चुत की तरफ इशारा करते हुए कहा ।
” क्या ये ?” – मैंने उसे दिखा कर अपना लौड़ा मसलते हुए कहा ।
वो थोड़ी सी मेरे तरफ़ घिसकी और मेरे जांघों के उपर अपने पांव रखते हुए फुसफुसा कर बोली – ” तुम्हारी बहन की बुर ।”

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.