Sagar – An Erotic Incest Story – Update 8B

Sagar - An Erotic Incest Story
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Update 8 A.

अभी हम होटल जाने के रास्ते पर ही थे कि मुझे एक ख्याल आया और मैंने श्वेता दी से कहा –

” मुझे ये 2 nd class वाली होटल पे बहुत डाउट रहता है । तुम न यहां तो बाथरूम जाओ मत ।”

” क्यों ? ” वो रूकते हुए बोली ।

” ऐसे होटल में बाथरूम के अन्दर गुप्त कैमरा छिपे होते हैं जो औरतों को नहाते समय , टायलेट करते हुए , या पेशाब करने हुए रिकॉर्ड कर लेते हैं ।”

” क्या ?” वो चौंकते हुए बोली ।

” हां ”

” तो अब क्या करें ”

” यहां से चलते हैं आगे चलकर रास्ते में कहीं सुनसान जगह देखकर पेशाब कर लेना ।”

” ठीक है , जल्दी चलो ।”

उसने शायद पेशाब शब्द पर ज्यादा गौर नहीं किया था । हम वापस कार में सवार होकर वहां से निकल गये । अभी हम थोड़ी ही दूरी पर गये था तो वो कसमसाते हुए बोली – कहीं रूको न । मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है ।”

मैंने कार को मेन रोड से हटाकर साइड में एक कच्ची रोड पर रोक दिया । वहां अगल बगल जंगल तो नहीं था लेकिन पेड़ पौधे बहुत थी ।

” जाओ पेड़ के ओट में बैठ कर कर लो ।”

वो जल्दी से भागती हुए गई और एक पेड़ के पीछे जा कर बैठ गई । मगर ताज्जुब की बात ये है कि वो पेड़ कार से मात्र दसेक फुट दूर थी । जब की उस पेड़ के थोड़ी ही आगे बहुत सारे घने पेड़ थे । उसके सीटी की मनमोहनी आवाज मेरे कानों में अमृत घोल रही थी । मेरे नाभी के नीचे साढ़े सात बाई अढ़ाई का लिंग राज जोर से इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगाने लगा। मैं अभी उसको कन्ट्रोल करने में लगा ही था कि वो आई और कार के दरवाजे खोल कर बगल में बैठ गई ।

” चलें अब ? ” उसने मुझे देखते हुए कहा ।

” तुम्हे करते देख अब मुझे भी लग गई है । मैं अभी आ रहा हूं ।”

बोलकर मैंने अपनी ओर के दरवाजे से बाहर निकला और उसी पेड़ के पीछे चला गया जहां उसने पेशाब किया था । जहां उसने पेशाब की थी वहां की जमीन पर उसके पेशाब जमा हो गए थे । मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मेरे लिंग राज ने पेशाब करने से मना कर दिया । बड़ी मुश्किल से उसे तैयार कराया और उसके पेशाब के उपर ही पेशाब कर दिया ।

वहां से निवृत्त हो कर कार में सवार हुआ और वहां से निकल गया ।

ड्राइव करते हुए कहा – ” कल से बाथरूम नहीं की थी क्या ”

” सुबह निकलने के पहले फ्रेश हुईं थी । क्यों ?”

” वहां देख कर लगा जैसे कई लोगों ने पेशाब किया है ।”

उसने फिर मेरी तरफ मारने के लिए हाथ उठाया तो मैं जल्दी से बोला -” sorry sorry मैं अब कुछ नहीं बोलुंगा । तुम हाथ वाथ फिर मत उठा देना वो पहले से ही तुम्हारे मारने से दर्द कर रहा है ।”

” तुम्हारी हरकतें ही ऐसी है । अब अगर फिर तुमने कुछ उल्टा पुल्टा कहा तो शर्तिया मैं तुम्हें गाड़ी से ढकेल दुंगी ।” – उसनेे आंखें तरेरते हुए कहा ।

मैं चुप हो गया । पन्द्रह बीस मिनट तक हम ऐसे ही चुप रहे । आखिर में उसने अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा _

” उर्वशी के साथ तुम्हारा कोई अफेयर था ?”

मैं चुपचाप रहा और कार ड्राइव करता रहा । जब मैंने कुछ नहीं बोला तो वो दुबारा पुछी –

” बोलो ना । तुम दोनों रिलेशनशिप में थे ?”

” क्या बोलूं ? जब कुछ बोलने जाता हूं तब तब हाथ उठा देती हो । मैं अब कुछ नहीं बोलने वाला ।”- मैंने नकली नाराजगी जताते हुए कहा ।

” ओले ओले मेरा राजा भैया , अपनी ‌ श्वेता दी से नाराज हो गया । ” – मेरे पेट पर गुदगुदी करती हुई बोली – ” अच्छा , अब कुछ नहीं बोलुगी ।”

” नहीं नहीं मुझे तुम पर विश्वास नहीं है , तुम घड़ी घड़ी मुंह फुला लेती हो और हाथ पांव चलाने लगती हो । मैं अब तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला ।”

” नौटंकी बाज कहीं का । बोलता है या नहीं ।”

” नहीं ।” मैंने मुंह फुलाते हुए कहा ।

” अच्छा । तेरी कसम । अब कुछ नहीं करूंगी ।” उसने अपने बाहों का हार मेरे गले में डालते हुए कहा ।

उसके ऐसा करने से उसका दायां वक्ष मेरे बगल से सट गया और मेरे शरीर में उत्तेजना हिलोरें मारने लगा । और कार हल्के से लहरा गई ।

” अरे ! क्या कर रही हो । एक्सीडेंट करवाना है क्या ” मैंने स्टियरिंग सम्हालते हुए कहा ।

वो मुझे छोड़ कर जरा सी दुर होते हुए बोली – ” बताओ ना , तुम दोनों का अफेयर था क्या ।”

” मुझसे क्यों पुछती हो ? वो तो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड थी । उसने तुम्हें कुछ नहीं बताया ? “- मैंने उसे देखकर कहा ।

” बोलो ना यार । क्यों लड़कियों जैसी नखरे करते हो । और हां उसने मुझे कुछ नहीं बताया ।”

” ओके । “- मैंने ठंडी सांस भरी -” हमारा अफेयर था ।”

मैंने उसे देखा वो मुझे बिना पलक झुकाए देख रही थी ।

” क्यों ? क्या हुआ ? ऐसे मुझे एक टक क्यों देख रही हो ?”

” कुछ नहीं । साली ।कमीनी । इतना बड़ा राज मुझे तक नहीं बताया । “- वो गुस्से से बोली -” और तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ?”

” मैं … मुझे उसने अपनी कसम दिला कर किसी को भी बोलने से मना किया था इसलिए नहीं बोला ।”

” वाह । उसने तुम्हें बोला और तुमने मान लिया । मुझे अपनी बेस्ट फ्रेंड , नुरे नजर , हम प्याला , हम निवाला और ना जाने क्या क्या बोलते हो और सिक्रेट उर्वशी के साथ शेयर करते हो ।” – वो गुस्से से बोली ।

” देखो फिर गुस्सा हुई ना । इसीलिए नहीं बता रहा था । और कुछ बातें ऐसी होती हैं जो नहीं बताई जा सकती है अगर किसी लड़की के इज्जत का सवाल हो तो ।”

” ठीक है ठीक है ।” वो अभी भी मुंह फुलाए बैठी थी ।

” मेरी जानेमन तुम तो ऐसा रियेक्ट कर रही हो जैसे मैं तुम्हारा खसम हूं ।” मैंने उसके बांह पर चिकौटी काटते हुए कहा ।

” बकवास बंद करो ।” – वो पुर्ववत गुस्से से बोली ।

हम थोड़ी देर तक चुप रहे । वो शायद किसी सोच में डुबी हुई थी । फिर उसने खामोशी तोड़ी ।

” क्या तुम लोगों ने वो भी कर लिया है ?” वो धीरे से बोली ।

” वो ? वो क्या ? ”

” वो ! वही जो एक लड़का लड़की करते हैं ।”

” हां । खुब घुरा फिरा हमलोगो ने । पार्क , सिनेमा , लांग ड्राइव …”

” बेवकूफ मैं पार्क सिनेमा की बात नहीं कर रही हूं ।”

” फिर किसकी बात कर रही हो ?”

” म..म… मैं उसकी बात कर रही हूं जो लवर अकेले में करते हैं । जो पति-पत्नी बन्द कमरे में करते हैं ।” वो झिझकते हुए बोली ।

” अच्छा वो ।” – मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे अब बात समझ में आयी हो -” ऐसे बोलो ना चो.. मतलब सेक्स किया है या नहीं ।”

” हां वही ।” वो गुस्से से मुझे घुरते हुए बोली ।

” ज्यादा तो नहीं लेकिन सात आठ बार किया है ।” – मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे काफी शर्म आ रही हो ।

जब मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे लगा कि जैसे अब वह मुझ पर रासन पानी लेकर झपटने ही वाली है । मैंने तुरंत कार खड़ी कर दी और उससे कहा –

” देखो ! अभी तुमने मेरी कसम खाई है ।”

वो थोड़ी देर में शान्त हो गई । फिर मैंने कार आगे बढ़ा दी । मैंने थोड़ी देर बाद कहा – ” वैसे तो मैं पटाना चाहता था उसके सहेली को लेकिन उसने तो मुझे घांस तक नहीं डाला बल्कि शादी करके फुर्र हो गई तो मैंने सोचा वो नहीं तो उसकी सहेली ही सही ।”

वो कुछ बोली नहीं , चुपचाप सुनती रही । उसे सब समझ में आ रहा था कि मैं किसके बारे में कह रहा हूं । वो एक बार मेरी तरफ देखी फिर सामने सीसे की तरफ देखने लगी ।

” तुमसे कभी झुठ नहीं बोलता ये बात तुम भी जानती हो । अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो sorry .” – मैंने उसे मनाते हुए कहा ।

वो चुप बैठी रही ।

” मुझे एक जबरदस्त शायरी याद आ रही है , बोलूं ?” – मैंने कहा ।

वो मेरी तरफ पलटी और अपनी चौबीस कैरेट के मुस्कराहट से माहौल को तनावमुक्त कर दी ।

ये औरतें न , पल में तोला पल में माशा ।

” नहीं नहीं कोई जरूरत नहीं है । जैसे तुम वैसे ही तुम्हारी शायरी ।”- वो बोली ।

रास्ते में एक ढाबे में हल्का फुल्का नाश्ता किया और चाय सिगरेट पीने के बाद आगरा की ओर निकल पड़े । आगरा थोड़ी देर बाद पहुंचने ही वाले थे । रास्ते में मैंने श्वेता दी को मेरे और उर्वशी के रिश्तों के बारे में पुछताछ करने से मना किया ।

उर्वशी का पति संजय चोपड़ा एक बेहद ही रईस और दिल्ली शहर का जाना माना व्यापारी था । उसके दिल्ली में ही नहीं वल्कि आगरा , मुम्बई , हैदराबाद और जयपुर में भी होटल का बिजनेस था । मैंने तो यहां तक सुना था कि वो अगले इलेक्शन में रूलिंग पार्टी के तरह से m.p. के लिए खड़ा होने वाला है । पता नहीं सच है या झूठ ।

उर्वशी भी कोई साधारण घराने से नहीं थी । उसके पिता का गुड़गांव में आटोमोबाइल हार्डवेयर का इंपोर्ट एक्स्पोर्ट का काम था । उर्वशी अपने मां बाप की एकलौती लड़की थी । बहुत बहुत ही सुन्दर बिल्कुल उर्वशी ढोलकिया की तरह ।

उर्वशी की दोस्ती श्वेता दी से कालेज में हुई थी और जल्दी ही वे दोनों बेस्ट फ्रेंड बन गई थी । श्वेता दी ने ही उर्वशी से मेरी परीचय कराई थी जो बाद में चलकर उसके बिस्तर तक पहुंच गई ।

उन्होंने अपने शादी की रिसेप्शन आगरा के अपने ही होटल में रखी थी । जब हम होटल पहुंचे तब दोपहर के दो बज रहे थे । हम होटल के रिसेप्शन हाल में पहुंचे । वहां मेहमानों का जमघट लगा हुआ था । रिसेप्शन को बहुत ही अच्छी तरह से सजाया गया था । खाने में कई तरह की Verity थी । वेज और नान वेज दोनों ही तरह का व्यवस्था था । शराब का साईड में अलग काउंटर बना था जहां पर मेहमानों की भीड़ ज्यादा थी । वर्दी धारी वेटर हाल के चारों ओर मेहमानों के खातिरदारी में जुटे हुए थे । नये नये शादी के बंधन में बंधे हुए जोड़े के लिए एक शानदार मंच बना हुआ था जो अभी खाली पड़ा था । हाल के अन्दर जगह जगह मर्द और औरतें ग्रुप बनाकर स्नैक्स और तरल पेय का आनंद लेते हुए बातों में व्यस्त थे ।

जब हम हाल में प्रवेश किये तो हमारी नजरें मेजबान को ढूंढने लगी । हमने चारों तरफ देखा तो संजय को कुछ लोगों में घिरा हुआ पाया वहीं उर्वशी कुछ औरतों के बीच में । उर्वशी उन औरतों से हंस हंस कर बातें कर रही थी ।

” देखो ! उर्वशी वहां है । उन औरतों के बीच में । हंस हंस के बातें करते हुए ।” श्वेता दी ने उर्वशी की तरफ इशारा किया ।

” हां ।” मैंने देखा इस वक्त वो लाल साड़ी , लाल ब्लाउज , लाल सैंडल माने सर से पांव तक लाल ही लाल गेट अप में थी । गले में सोने का बड़ा हार , जुल्फें खुली हुई , होंठों पर लाली… कयामत लग रही थी ।

” देख कर कौन बोल सकता है कि ये साली इतनी चालु निकलेगी ।” उसने मेरी आंखों के आगे अपनी हथेली हिलाते हुए कहा ।

” तुम्हे एक बात कहूं ।” मैंने श्वेता दी को थोड़ा साईड में ले जाकर बोला ।

” क्या ?”

” A bad man is better than a bad name .”

” मतलब ?”

” बद बदनाम होने से अच्छा है ।”

” मैं समझी नहीं ।” उन्होंने मुझे प्रश्न भरी निगाहों से देखा ।

” मैं समझाता हूं ….मान लो ..एक लड़का राम , जिसने कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया हो, कभी शराब पी ना हो उसे यदि कोई शराब दुकान में या शराब दुकान के पास या पब में कोई देख ले तो वो यही समझेगा कि वो लड़का राम शराबी है । और एक लड़का जिसका नाम मोहन है वो डेली ड्रींकर है रोज शराब पीता है लेकिन उसे शराब पीते हुए कभी किसी ने भी नहीं देखा तो लोग उसके बारे में यही कहेंगे कि मोहन कितना अच्छा लड़का है , शराब को हाथ तक नहीं लगाता ।…. यहां राम बदनाम है लेकिन एक्चुअली बद आदमी मोहन है ।……समझी ।”

वो कुछ बोली तो नहीं लेकिन समझने का प्रयत्न कर रही थी ।

मैंने फिर कहा -” मान लो …. मैं कहता हूं मान लो कि मैं एक अय्याश छोकरी बाज लड़का हूं , मेरी कई लड़कियों से नाजायज ताल्लुकात है मगर किसी ने भी… किसी ने भी मुझे वो सब गन्दी हरकतें करते हुए नहीं देखा है, और ना ही सुना है इसका मतलब मै एक शरीफ बन्दा हूं । दुसरी तरफ वो उर्वशी का हसबैंड संजय एक बहुत ही शरीफ और पराई औरतों से दूर रहने वाला लड़का है लेकिन भुले भटके किसी कोठा या वैश्या के साथ दिख गया तो लोग यही समझेंगे कि वो एक रंडीबाज और चरित्रहीन लड़का है ।….. तुम गलत करो लेकिन पकड़े मत जाओ तो सब ठीक ठीक लेकिन अगर पकड़े जाओ तो सब खराब खराब ।…. इसीलिए कहते हैं कि बद आदमी बद नाम होने से अच्छा है ।”

” ठीक है ठीक है । समझ गई । तुम्हारी विद्या तुम्हे ही मुबारक । चलो उर्वशी के पास चलते हैं ।” उसने मेरी बांह पकड़ कर ले जाते हुए कहा ।

चलते-चलते वो अचानक रूकी और मुझसे पूछा ” तुम भी कुछ gift लाए हो ?”

“हां । तुम क्या लाई हो ?”

” एक सोने की अंगूठी , चांदी का पायल और कपड़े का सेट । और तुम ?”

” मैं ” -मैं उसके कान में फुसफुसाया -” Manforce Condoms ”

उसने मेरे पेट एक जोर का मुक्का मारा और मुस्कराते हुए मेरी बांह पकड़ उर्वशी की तरफ चल पड़ी ।

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