Update 22.
श्वेता दी के फ्लेट के नीचे बने पार्किंग में कार खड़ी कर के लिफ्ट से थर्ड फ्लोर पर पहुंचा । उस वक्त ग्यारह से कुछ ही मिनट उपर हुए थे । जब मैं उनके फ्लेट में दाखिल हुआ तो उस वक्त पुरे फ्लेट में बेतरतीबी का बोलबाला था । चारों तरफ सामान का भंडार जो पैकिंग किया हुआ था , फैला हुआ था । जीजू अपने पड़ोसियों के साथ डाइनिंग रूम में खड़े होकर बातें कर रहे थे । जिनमें से दो आदमी को तो मैंने फौरन पहचान लिया । वो दोनों आदमी उसी फ्लोर पर बने दो अलग-अलग फ्लेटों के मालिक थे ।
श्वेता दी की शादी के इन दो सालों के दरमियान मैं यहां कई बार आ चुका था। तीन चार बार तो मेरा स्वर्गीय दोस्त अमर भी आ चुका था । अमर के मौत के बाद दुसरी बार यहां आया था । उसकी याद आते ही मेरा दिल लरजने लगा ।
मैंने अपने को सम्हाला और जीजू को देखा जो बड़े मग्न हो कर उन सभी से बातें कर रहे थे । कुल चार लोग थे जिनमें दो तो पड़ोसी थे और बाकी दो लोगों को मैं नहीं जानता था । दो पड़ोसियों में एक थे रमाकांत पाठक जो जीजू के फ्लेट के दांये वाले फ्लेट में रहते थे । वो लगभग ७० साल के लम्बे , ऊंचे , उम्रदराज लेकिन निहायत तंदरुस्त व्यक्ति थे और अपने सफेद बालों , हल्के दाढ़ी और मोटे फ्रेम के पावर वाले चस्मे में काफी प्रभावशाली लगते थे । उनकी अधेड़ पत्नी के अलावा परिवार के नाम पर और कोई नहीं था । मैने जीजू से सुना था कि वो हिमाचल प्रदेश के रहने वाले थे । उनकी पत्नी जानकी को सांस की कोई बिमारी थी इसलिए उन्होंने दिल्ली जैसे गर्म आबोहवा में बसने को सोचा । लेकिन बाद में उन्होंने गाजियाबाद में ही अपना आशियाना बना लिया ।
दुसरा पड़ोसी मनीष जैन जीजू के फ्लेट के ठीक ओपेजिट में रहता था । वो एक चालीस वर्षीय शरीर से काफी मोटा औसतन हाईट का व्यक्ति था जो पेशे से सरकारी वकील था । अपनी वकालत की दुकानदारी दिल्ली में ही चलाता था । एक नम्बर का धुर्त और कमीना इनसान था । उसके परिवार में भी उसकी निहायत खुबसूरत बीवी के अलावा और कोई नहीं था ।
जब मैं वहां पहुंचा तो पता चला कि बाकी के दो व्यक्ति उनके दोस्त रोहन और रजनीश थे जो उसी बिल्डिंग के अन्य फ्लेट के रहने वाले थे । उन दोनों का अपना अपना अलग बिजनेस था । सभी लोग जीजू को सी आफ करने के लिए जुटे थे । मैंने सभी को अभिवादन किया ।
” अभी तक गाड़ी नहीं आई है क्या “- मैंने जीजू से पूछा ।
” ये तो रमाकांत अंकल बताएंगे ” – जीजू ने रमाकांत जी को देखते हुए कहा -” गाड़ी और लेबर इन्होंने ही ठीक किया है ।”
” मेरी आधे घंटे पहले बात हुई है वो अब पहुंचते ही होंगे ” – रमाकांत जी ने अपनी रौबदार आवाज में कहा ।
” और बाकी सब पैकिंग वगैरह हो गई है ना ?”- मैंने कहा ।
” हां सब कुछ हो गया है , बस गाड़ी का ही इंतजार है ” – जीजू ने कहा -“मुझे मालूम हुआ कि तुम घर से जल्दी ही निकल गए थे , तुम्हें भुख लगी होगी । तुम रमाकांत जी अंकल के फ्लेट में चले जाओ , वहीं हम सभी का नाश्ता बना हुआ है… आंटी से बोलना वो नाश्ता दे देगी ।”
” अरे नहीं जीजू , मैंने नाश्ता कर लिया है । इसकी कोई जरूरत नहीं है ।”
” क्या बोला ? ” – रमाकांत जी ने आंख तरेरते हुए कहा -” चुपचाप आन्टी के पास जाओ और नाश्ता करो ।”
” ठीक है , थोड़ी देर में जाता हूं “- मैंने धीरे से कहा ।
कहकर मैं शयनकक्ष में चला गया । वहां श्वेता दी मनीष जैन की बीबी अनुपमा के साथ खड़े खड़े गप्पे लड़ाने में व्यस्त थी । अनुपमा भाभी से पहले भी दो बार मिल चुका था । अनुपमा एक पैंतीस , छतीस साल की भरे-पूरे शरीर की गोरी रंगत की युवती थी । कद काठी में वो अपने पति से भी लम्बी थी । बड़े बड़े मम्मे , हैवी नितम्ब , मोटे होंठ , लम्बे बाल बड़ी बड़ी आंखें… कुल मिलाकर वह काफी सेक्सी दिखती थी । इस वक्त श्वेता दी सलवार और अनामिका जी साड़ी पहनी हुई थी ।
मुझे देखते ही श्वेता दी ने कहा -” आओ सागर ? तुम्हारा काम हो गया ?”
” हां मेरा काम तो हो गया लेकिन यहां तो अभी भी लगता है देर ही होने वाली है । जल्दी करो भई ।”
” यहां का भी काम हो गया है बस गाड़ी वाले का वेट कर रहे हैं ।”
” अरे जल्दी करवाओ दी , वहां भी तो अरेंजमेंट करनी है ।
” तुम्हें बड़ी हड़बड़ लग रही है ” – अनुपमा ने कहा ।
मैंने देखा अनुपमा जी मुस्कराते हुए मेरी तरफ देख रही है ।
” मेरी कोई हड़बड़ नहीं है भाभी… ये तो मैं श्वेता दी के लिए कह रहा हूं … और आप जैसी खुबसूरत हसीनाओं की संगत में रहने के लिए भला कौन हड़बड़ी करना चाहेगा ” – मैंने मुस्कराते हुए कहा ।
” क्यों झुठ बोलते हो देवर जी , मैं और हसीना ?”
” क्यों आपको सन्देह है ?
” मैं छतीस की हूं ।”
” छतीस से रिश्ता तो आपका पति से होगा , मेरे लिए आप अभी भी अठरह की ही लगती है ।”
” अच्छा ! ऐसा क्या देख लिया मुझमें ।”
” ऐसा क्या नहीं है आपमें देखने के लिए ।”
मैंने उनकी बड़ी बड़ी संतरों को देखते हुए कहा ।
उन्होंने मेरी नज़रों को देखते हुए कहा
” देख रही है श्वेता ” – वो मुस्कुराती हुई श्वेता दी से बोली -” तेरा ये भाई मुझ पर लाईन मार रहा है ।”
” क्या करेगा बेचारा भाभी ” – श्वेता दी ने हंसते हुए कहा -” अभी तक किसी लड़की ने घांस तक नहीं डाली है तो हर जगह ट्राई करते फिरता है ।”
अपडेट अधूरा है…. बाकी रात में ।

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