मैं हलकान परेशान अपने रूम की सारी जगहें छान मारा लेकिन नाइटी वहां होती तो न मिलती । मुझे डर सिर्फ उन दो नाइटियो का था जो मैंने श्वेता दी के लिए खरीदी थी । और वो भी इसलिए कि वो कुछ हट कर थी । कौन ले गया ? माॅम ने या रीतु ने ? मेरे लिए दोनों में जो भी ले जाए प्रोब्लम ही थी । भले ही मेरी फेंटेसी की वो दोनों प्रथम अहम हिस्सा थी लेकिन रिश्तो के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत मेरे में नहीं थी । मेरे मे क्या किसी मे भी नहीं हो सकती । न जाने मेरे बारे में क्या सोचेगी । ख़ैर जो होना था वो तो हो गया । रात के ग्यारह बज गए थे मैं अब उन्हें उठा कर ये तो नहीं पुछ सकता था कि नाइटी किस ने ली है । यही टेंशन पाले मैं बिस्तर पर लेट गया और निंद के हवाले हो गया ।
सुबह जब मैं नौ बजे के आसपास नीचे हाल में पहुंचा तब रीतु को वहीं सोफे पर बैठे हुए पाया । शायद माॅम किचन में थी और डैड अपने कमरे में आफिस के लिए तैयार होते रहे होंगे । मैंने रीतु से पूछा क्या उसने मेरे कमरे में से कोई कपड़े का पैकेट उठाया है तो उसने ना में सर हिलाया । फिर मैंने पूछा क्या माॅम कल मेरे कमरे में गयी थी तो उसने कहा जब हम संजय जी और उनके फेमिली को बाहर बिदा करने निकले थे तब मम्मी उपर छत पर सुखने के लिए रखी हुई कपड़े उतारने गई थी ।
मैं समझ गया नाइटी माॅम के हाथ लग गयी है । मेरा दिल जोर से लरजा । न जाने वो क्या रियेक्ट करेंगी । कहीं सभी के सामने मेरी इज्जत का फलूदा तो नहीं बना देगी । या मेरी उम्र का लिहाज करके चुप रहेंगी । या……..
…..या मेरी सिक्रेट फेंटेसी हकीकत में बदलने की एक कदम और आगे अग्रसर होंगी ।
डैड के आफिस जाने का समय हो गया था । माॅम किचन से नाश्ता लेकर आई और टेबल पर रख दी । मैं चुपके से उनकी तरफ देख रहा था लेकिन उनका ध्यान मेरी तरफ नहीं था । डैड के आने के बाद सब ने नाश्ता किया । फिर डैड अपने आफिस चले गए । नाश्ते के दौरान कोई बात हुई नहीं इसलिए माॅम का रवैया समझ में नहीं आया । रीतु भी आम दिनों के वनस्पति कुछ शान्त ही थी । मैंने जल्दी से नाश्ता खत्म किया और अपने रूम में चला गया ।
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं । माॅम से बात तो करनी ही होगी । कोई दूसरा होता तो मुझे बात कर ने मे झिझक महसूस नहीं होती लेकिन यहां तो….। मुझे उन्हे न तो फोन से काॅल करके पुछने की हिम्मत हो रही थी ना ही ह्वाट्सएप के द्वारा मैसेज भेज कर की । मैंने घड़ी में टाईम देखा दस से उपर बज गए थे.. यानी रीतु कालेज चली गई होगी । मैंने कुछ सोचा और फिर माॅम से बात करने का निश्चय लिए हाॅल चला गया । माॅम हाॅल में नहीं थी । मैं उनके कमरे में गया , वो वहां भी नहीं थी । जरूर किचन में होंगी । मैं किचन के दरवाजे पर पहुंचा , माॅम दरवाजे की तरफ पीठ किए किचन की ग्रेनाइट पत्थर की बनी सेल्फ को साफ कर रही थी । वो ग्रे कलर की साड़ी पहनी हुई थी और ब्लाऊज़ भी फुल बांह वाली और साड़ी का मेचिंग था । साड़ी के पल्लू को अपने कमर में फंसा कर रखी थी । जिससे कमर का कुछ हिस्सा खुला हुआ था । वो काम करते हुए भी काफी अच्छी दिख रही थी । भले ही वो 43 साल की हो गई हो लेकिन उनके शरीर के रख रखाव , शरीर का मेनटेनेंस और शारीरिक श्रम उन्हें 34.35 से ज्यादा शो नहीं दिखाता था। परफेक्ट हाईट , माशल गदराया हुआ शरीर , भारी नितम्ब , हल्की मोटी भुजाएं , मोटी जांघें , पेट पर थोड़ी चर्बी ( जो मेच्योर औरतों को और भी नाकाबिले तारीख सेक्सी बनाते हैं ) , बड़े बड़े गिरिवर की चोटियों की तरह वक्ष , तीखे नैन-नक्श , गुलाबी रंगत लिए रसीले होंठ , कमर से भी नीचे आते स्याह काले बाल किसी भी मर्द को हाइपनोटाइजम कर सकते थे । पता नहीं कैसे डैड के किस्मत में वो मिल गयी जबकि डैड उनके मुकाबले कहीं पर भी नहीं थे । पुराने जमाने में शादियां ज्यादातर अरेंज मैरिज और लड़की और लड़के देखे होती थी । डैड सच में बहुत खुशनसीब थे ।
मैं किचन में दाखिल हुआ और पीछे से माॅम के गले में बाहें का हार डाल अपने चेहरे को उनकी कन्धों पर रख दिया ।
” क्या कर रही हो माॅम ।” मैंने चापलूसी भरे स्वर में कहा ।
” दिख नहीं रहा है क्या कर रही हूं ।” माॅम बिना मुड़े स्लैब को साफ करते हुए बोली ।
” सच में आप को बहुत काम करना पड़ता है , उपर से इतनी गर्मी क्यों नहीं एक दाई रख लेती हो ।”
” दाई से तो अच्छा है कि क्यों न बहु ही ले आऊं ।”
” बहु ! मतलब मेरी आजादी छीनना चाहती हो.. मेरे पैरों में बेड़ियां डालना चाहती हो ।”
” बहु आने से तेरी आजादी छीन जाएगी ।”
” और नहीं तो क्या । अभी तो मेरे हंसने खाने , मौज मस्ती के दिन हैं । अभी थोड़ी न किसी बंधन में बंधना है ।”
” तेरे डैड की शादी तुम से भी कम उम्र में हो गई थी ।”
” वो जमाना अलग था माॅम । इस जमाने में जब तक लड़का अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता है तब तक वो इस लफड़े से दूर ही रहता है ।”
” मैं क्या कहूं , आज के जमाने में शादी ब्याह जबरदस्ती भी तो नहीं की जा सकती । वैसे तो मैं भी ये मानती हूं कि जब तक लड़का और लड़की अपने पैरों पर खड़े न हो जाए और अपने खर्चों का बोझ उठाने लायक़ न हो जाए तब तक शादी नहीं करनी चाहिए । भले ही लड़का जिन्दगी भर कुंवारा रहे ।”
” क्या बोल रही हो माॅम ? चार पांच साल की बात अलग है जिन्दगी भर मैं कुंवारा नहीं रहने वाला , भले ही मैं कमाऊं या न कमाऊं । मैं कहे देता हूं ।” – मैंने मजाक करते हुए कहा ।
” इसीलिए तो बोल रही थी कि शादी कर ले ।”- माॅम ने हंसते हुए कहा ।
” कर लेंगे माॅम… सही समय पर वो भी कर लेंगे ।”
मैं माॅम से नाईटी वाली बात कहना चाहता था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे कहूं । अभी थोड़ा मुड ठीक है तो पुछ ही लेता हुं । थोड़ा झिझकते हुए मैं माॅम की कन्धों पर अपने चेहरे की हल्के से दबाते हुए कहा –
” माॅम व..वो.. वो नाइटी….”
” अच्छी है ।”- माॅम वैसे ही काम करती हुई बोली ।
मैं चौंका । अच्छी है का मतलब क्या हुआ । उनके कहने का तात्पर्य क्या है कि वो दो अधनंगी और उनमें भी एक लगभग लगभग नंगी दिखने वाली नाइटी भी अच्छी है ।
” आपने देखी ।”- मैंने बड़ी मुश्किल से अपने स्वर को संतुलित रखते हुए कहा ।
” हां ।”
मैं उनसे अलग हो कर उनके बगल में खड़ा हो गया । मैं क्या बोलूं कुछ समझ नहीं आ रहा था ।
” माॅम ।” मैंने धीरे से कहा ।
” हूं !”
” माॅम ! वो नाइटी…म..मेरा मतलब…”
” क्या हुआ बोलो ना ।”
मैंने हिम्मत करके कहा -” माॅम उनमें से दो नाइटी दुसरे की है ।”
” वो तो मैं भी समझ रही हूं.. वो नाइटी तु मेरे लिए तो नहीं लाया हो सकता है… कौन है ?”
” क्या मतलब ?”
” कौन है वो जिसके लिए वो लाया है ।”
मैं क्या बोलूं । श्वेता दी का नाम तो हरगिज नहीं ले सकता था । किसका नाम लूं ।
” माॅम वो मेरा नहीं है । मेरे एक दोस्त का है ।”- मैंने झुठ बोला ।
” दोस्त मतलब गर्लफ्रेंड ।”
” नो माॅम । मेरे कालेज के एक मेल फ्रेंड का है । उसने अपनी गर्लफ्रेंड को गिफ्ट देने के लिए मुझे लाने को कहा था ।”
” झुठ मत बोलो । तुम्हारा अमर के अलावा कोई दूसरा जिगरी मेल दोस्त था ही नहीं , ये मुझे अच्छी तरह से पता है । हां अगर तुम नहीं बताना चाहते तो बात अलग है ।”
मैं कुछ देर असमंजस की स्थिति में खड़ा रहा । सोच रहा था क्या बोलूं क्या न बोलूं । फिर मैंने कुछ डिसाइड किया ।
” साॅरी साॅरी माॅम । वो मैं आपको क्या बोलूं एक्चुअल में वो.. वो मेरी एक ग.. गर्लफ्रेंड का है ।” मैंने हिम्मत करके कहा ।
” कौन है वो । क्या मैं जानती हूं उसे ।”
माॅम ने ना तो नाइटी पर कोई नाराजगी जताई और ना ही गर्लफ्रेंड पर । इसलिए मेरी हिम्मत बढ़ी ।
” हां ।” – मैंने कहा ।
” मैं जानती हूं ?” – माॅम इस बार मेरी तरफ पलटते हुए आश्चर्य से बोली ।
” हां ।”- मैंने थोड़ा शरमाते हुए कहा ।
” कौन है ।”
” नहीं । मैं नहीं बता सकता ।”
” क्यों नहीं बता सकते । ”
” क्या बताऊं ? वो.. वो फ्रेंडशिप बस सिर्फ टाइम पास है ।”
” ओह ! मतलब कोई लव शव का चक्कर नहीं है । बस सिर्फ दिलजोई है ।”
” हूं ।”
उन्होंने मुझे कुछ देर तक एक टक देखा फिर कहा -” वो जो तुम्हारी गर्लफ्रेंड है क्या वो भी ये जानती है कि ये सब कोई लव शव का मैटर नहीं बल्कि मौज मस्ती का मामला है ।”
” हूं ।”
माॅम ने इस बार कुछ नहीं बोला । वो किचन में बनी वास वेसिन चली गई और अपनी हाथों को धोने लगी । हाथ धोने के बाद दरवाजे पर टंगी एक तौलिये से अपने हाथ को पोंछने लगी । वो अपने हाथ पोछते हुए बोली -” कौन है वो लड़की ।”
” आप जान कर क्या करोगी ? और अगर मैंने आप को उसके बारे में बता दिया और उसे पता चला कि मैंने आपको उसके बारे में बता दिया है तो आपके साथ साथ वो भी नाराज होगी ।”
” उसे कैसे पता चलेगा ? हां यदि तुम खुद ही उसे बता दोगे तो बात अलग है ।”
” मैं नहीं बताऊंगा । लेकिन आप उस का नाम सुनकर भड़क उठी तो ?”
” मैं तुम्हें जोर तो दे सकती नहीं । आखिर तुम एक जवान और मेच्योर लड़के हो । और हमारे यहां कहा जाता है कि जब लड़के का कद बाप के कन्धे तक और बाप का जुता बेटे को आने लगे तो बेटा अपने बाप का दोस्त और मां का सहारा की तरह का हो जाता है । यदि तुम्हें लगता है कि तुम मुझसे शेयर कर सकते हो तो मुझे कोई आपत्ती नही है ।”
” ओके । मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा । लेकिन सबसे पहले तो आप प्रोमिस करो कि ये बात डैड को नहीं बताएगी । और दूसरी आप नाराज़ नहीं होंगी ।”
” नहीं बताऊंगी तुम्हारे डैड को । अब बताओ ।”
” आप नाराज़ भी नहीं होगी ।”
” ओके । नाराज नहीं हूंगी ।”
” ये मैं आपको रूबरू नहीं बल्कि आपके ह्वाट्सएप नम्बर पर बताऊंगा । आप के ह्वाट्सएप नम्बर पर उस का नाम भेज दुंगा ।”
माॅम कुछ नहीं बोली । वो मुझे अपलक देखती रही ।
” ओके ।”- मैंने माॅम से कहा ।
” ओके ।”- माॅम सहमति में अपनी सर हिलाई ।
मैंने अपने पैंट के पाकेट से पन्द्रह हजार रुपए निकाल कर माॅम को दे दिया फिर बोला -” माॅम कल मुझे पहली सेलरी मिली थी । संजय जी और उनके परिवार के आने से कल मैं दे नहीं पाया था ।”
” तेरा भी तो खर्चा है ना , अपने पास रख अपनी खर्चा पानी निकालना इन पैसों से.. मेरे पास तो तेरे डैड के दिए हुए पैसे रहते ही हैं ।”
” मेरा इतना भी खर्चा नहीं है माॅम । वैसे भी शुरू से खर्चों का पैसा तो आप ही देती हो.. मुझे जब जरूरत होगी तब मांग लुंगा । और वैसे भी बेटे के हर चीज पर मां का अधिकार सबसे अधिक होता है। रूपया पैसा आप से बड़ी चीज थोड़ी न है ।”
” कभी कभी तो बड़ी सयानी सयानी बातें करता है , काफी अच्छी अच्छी और कभी कुछ विचित्र तरह की हरकतें करता है । मुझे तो तु एक पहेली जैसा लगता है जिसे मैं भी समझ ना पाऊं ।”
” मैं तो एक खुली किताब हूं जिसे हर कोई आसानी से पढ़ सकता है । एक दम सिम्पल ।”
” हां हां वो तो नाइटी देख कर ही समझ में आ रहा है ।” माॅम ने मुस्कुराते हुए कहा ।
” देखो अगर छेड़ोगी तो अपून तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला ।”- मै झुठ मुठ का गुस्सा करते हुए बोला ।
” अच्छा अच्छा अब कुछ नहीं बोलूंगी ।” वो पूर्ववत मुस्कराते हुए बोली ।
” आज कालेज नहीं जाना है क्या ?”
” जाना है न । ओके मैं निकलता हूं माॅम ।” कहकर मैंने माॅम को हग किया । वो भी अपनी बाहों से मुझे थोड़ी कसती हुई लिपट गई ।
फिर वहां से मैं कालेज के लिए निकल गया । कालेज पहुंचने पर मालूम हुआ कि आज कुछ खास पढ़ई नहीं है तो मैं वापस घर लौट पड़ा । मैं घर पहुंचने ही वाला था कि याद आया और मैंने बाइक रोक दी ।
घर में अभी कोई भी नहीं होगा , अगर माॅम ने फिर वही सवाल दुहराया कि वो लड़की कौन थी तो मैं क्या कहूंगा.. मैंने मैसेज भी तो नहीं किया था। मैं सोचने लगा किसका नाम लिखूं जिसे वो भी जानती है । ऐसी भी बात नहीं थी कि उनके जान पहचान युवतियों में से किसी के साथ सेक्स नहीं किया था , उनकी जान पहचान की औरतों में मैं दो के साथ सेक्स कर चुका था । कुछ देर तक माथापच्ची के बाद और कुछ सोचकर एक नाम मैंने माॅम को ह्वाट्सएप कर दिया ।
मैं माॅम को ह्वाट्सएप कर रहा था कि मेरी नज़र चाची पर पड़ी । वो अपने दरवाजे के बाजू में कचरे के डिब्बे में कुड़ा फेक रही थी । उन्होंने मुझे देखा और वहीं से जरा जोर से बोली ।
” तु यहां क्या कर रहा है… कालेज नहीं गया ?”
मैंने माॅम को ह्वाट्सएप कर के अपनी बाइक उनके घर के सामने खड़ा कर दिया और नीचे उतर कर बोला – ” गया था चाची लेकिन मुझे लगा कि शायद मेरी रूपसी रूपाली चाची को मेरी जरूरत है इसलिए वापस आ गया ।”
” नौटंकी बाज… मैं सब जानती हूं तेरी तिकड़म फितरत को… जरूर किसी चक्कर में होगा …ये बता यहां क्या कर रहा है..किसको मैसेज कर रहा है ।”
” ऐसे न बोलो चाची जान… मैं तिकड़म करता हूं ?… और करता भी हुंगा तो वनली एंड वनली अपनी रूप की रानी रूपाली चाची को… अब आप ही बताओ क्या मैं अपने प्यारी सी चाची को भी..न करूं तो भला किसे करूं ।”- मैंने चाची को छेड़ते हुए कहा -” वैसे ये मेरी प्यारी..किसी सियासत की महारानी जैसी चाची इस भरी दोपहरी में ये कौन सा काम लेकर बैठ गई है… अपने इस ग़ुलाम को कहती , में नतमस्तक आपकी सेवा में हाजिर हो गया होता ।”
चाची हंसते हुए बोली – बक-बक बंद कर..चल अन्दर चल ।”
मैंने चाची को मुस्कराते हुए देखा फिर अपनी बाइक उनके घर के सामने खड़ी कर दी। मैं चाची के साथ उनके घर में चला गया । घर में प्रवेश करते ही चाची ने मेन दरवाजा बंद कर दिया । घर में चाची के अलावा कोई नहीं था । चाचा ड्यूटी पर गए थे और राहुल अपने स्कूल ।
चाची के बारे में जैसा कि पहले मैंने कहा था वो बिल्कुल विद्या बालन की यादें ताजा करा देती हैं… हूबहू वैसा शरीर और वैसा ही उनका चेहरा… वैसा ही होंठ… वैसा ही हाईट । मेरा मरहूम दोस्त अजय का कहना था कि यदि मैं कभी शादी करूंगा तो वो बिल्कुल विद्या बालन जैसी होनी चाहिए… और अगर कहीं उन्नीस बीस हो भी तो वो कम से कम चाची की तरह तो बिल्कुल ही होनी चाहिए ।
चाची उस वक्त एक फुल गहरे ब्लू रंग की नाइटी पहन रखी थी । नाइटी के अन्दर उनका सफेद रंग का ब्रा स्पष्ट दिखाई दे रहा था जिससे ये स्पष्ट समझ में आ रहा था कि उनके उरोज कितने बड़े बड़े हैं । नीचे पैन्टी पहनी थी या नहीं , ये नहीं दिख रहा था । नाइटी में भी वो गजब की सेक्सी लग रही थी ।
” क्या खाएगा ?… पास्ता खाएगा या हलवा बनाऊ ?”- ड्राइंगरुम में सोफे पर बैठते हुए चाची ने कहा ।
” सुजी का हलवा ।” – मैं चाची के बगल में बैठते हुए बोला ।
” ठीक है…तु बैठ मैं दो मिनट में नहा कर आ रही हूं ।” – चाची उठते हुए बोली ।
” दो मिनट में… दो मिनट तो आपको कपड़े उतारने में ही लग जाएंगे ।”
” अच्छा पांच मिनट में ।”- चाची ने हंसते हुए कहा ।
” वैसे तो पांच मिनट में भी नहीं होने वाला है… फिर भी जाओ , मैं यहीं बैठे बैठे सेकेंड , मिनट , घंटा मिला रहा हूं ।”
” तुझे क्या लगता है मैं घंटों नहा रही हुंगी ।”
” मुझे तो लगता है कि औरतों को नहाने में काफी समय लगता है ।”
” बड़ एक्सपिरियंस है तुझे लड़कियों के नहाने को लेकर ।”
” थोड़ा बहुत तो है ।”- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।
” जरूर कोई छोकरी पटा रखी होगी…ये तो मुझे शुरू से ही शक था ।”
” चाची नहाने वाली बात को लेकर छोकरी पटाने की जरूरत क्यों पड़ेगी ?.. लड़कियों को नहाने में देर लगती ही है ये तो तुम भी जानती होगी… जानती हो न ?”
” तेरे चक्कर में रहूंगी तो दिन भर बिना नहाए रह जाऊंगी…तु बैठ मैं एक घंटे में आ रही हूं ।”- बोलकर चाची बाथरूम जाने के लिए आगे बड़ी ।
” क्या एक घंटे में ?”- मैंने चिल्लाते हुए कहा ।
” हां । एक घंटे में । तु ही तो बोल रहा था… मैं चली ।” – चाची हंसते हुए बोली और बाथरूम में घुस गई ।
चाची के बाथरूम जाने के बाद मैंने काजल को ह्वाट्सएप किया

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