Update 14.
माॅम और चाची के आने के बाद अपने र्पाट टाइम जाॅब करने क्लब चला गया । वहां दो घंटे तक पसीना बहाया फिर काजल के घर रीतु को लाने चला गया । वहां रीतु के रहते काजल के साथ कुछ गरम गरम होने की संभावना कम ही थी लेकिन भले फिल्म न सही ट्रेलर की आस तो थी ही । मगर वो भी नहीं हुआ । काजल के हाव भाव पहले की ही तरह सामान्य थी । मैं रीतु को बाइक पर बैठा कर घर की ओर चल दिया ।
” आज कल काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती हैं ” रीतु ने अचानक कहा ।
” क्या मतलब ?” मैं चौंकते हुए बोला ।
” काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती है ।” वो बाइक पर थोड़ा आगे की ओर सरक कर बोली ।
” किसने कहा ? क्या काजल ने कहा ?” मैं घबराए हुए बोला ।
” हां ।”
” क्या कहा ?”…. मैंने सोचा कहीं उसने सारी बातें रीतु को कह तो नहीं दी । आखिर वो दोनों सहेलियां हैं । लेकिन नहीं हमने जिस तरह की गन्दी बातें की थी वो सब वो किसी को भी नहीं बोल सकती ।
” यही कि मैं सागर से बात कर रही थी ।”
” अरे ! पुरी बात बतायेगी ?”
” हम दोनों उसके बगीचे में थे तभी वो बाथरूम जाने को बोलकर निकल गई । और बाथरूम से पुरे आधे घंटे बाद निकली । तो मैंने पूछा इतनी देर क्या कर रही थी तो वो बोली कि तेरे भैया से बात कर रही थी ।’
” अच्छा ! ऐसा कहा उसने ।”
” हां ।”
” फिर तु क्या बोली ?”
” मैं क्या बोलती ? मैंने बस इतना ही कहा कि जरा संभल कर कहीं पंगा न हो जाए , और कहीं तेरे डैड को पता चल गया तो अपनी रिवॉल्वर लेकर मेरे घर ना पहूंच जाएं । और साथ में तेरी भी खैर खबर ना ले लें ।”
” क्या ? उसके डैड के पास रिवाल्वर है ?” मैं चौंक गया ।
” हां ।”
” कौन सी रिवाल्वर है ? तुने देखी है ?”
” हां । छोटी सी है ”
” अच्छा । फिर तेरे बोलने के बाद काजल ने क्या कहा ?”
” प्यार किया तो डरना क्या ।”
” क्या ?”
” बोली प्यार किया तो डरना क्या ।”
” मुझे तो लगता है कि या तो वो तुझे बेवकूफ बना रही है या तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।”
” यू नो.. मुझे कोई बेवकूफ नहीं बना सकता ।”
” इसका मतलब तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।”
” तुम्हें कौन बेवकूफ बना सकता है ?
” अच्छा !… पहली बार सही बोली ।”
” जी नहीं । जो पहले से ही बेवकूफ हो उसे भला बेवकूफ बनाने की क्या जरूरत है ।”
” मैं बेवकूफ हूं ?”- मैं भड़क कर बोला ।
” हां , काजल तो यही कहती हैं ।”
” काजल नहीं , तु बकती हैं ये सारी बकवास । ये सब तेरी हमेशा वाली फितरत है । वैसे काजल ने तुझे ये नहीं बताया कि वो मुझसे क्या क्या बातें कर रही थी ।”
” नहीं बताई कलमुंही ने । इसीलिए तो मैं तुम से पुछ रही थी ।”
” कोई बात हुई होगी तो न बताएगी । अब चुपचाप बैठ , हम घर पहुंचने वाले हैं ।”
थोड़ी देर बाद हम घर पहुंच गए । रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए फिर छत पर टहलते हुए सिगरेट पीने लगा । मुझे न जाने क्यों शुरू से लग रहा था कि अनुष्का और उसके पति कुलभूषण खन्ना के बारे में पुलिस को न बता कर बड़ी गलती कर दी है । अगर मैंने पहले ही पुलिस को उनके बारे में बता दिया होता तो वो उनके घर जाकर तहकीकात करती और हो सकता है कि मर्डर विपन भी बरामद हो जाता यदि वो क़ातिल हुए तो । पुलिस के पास जानकारी हासिल करने के लिए बहुत सारी चीज़ें होती हैं । वो इन मामलों में एक्सपर्ट होते हैं । उनके पास पावर होता है , टार्चर करके सच्चाई निकलवाने के हजारों तरीके होते हैं । और अगर कहीं दोनों मियां बीवी अमेरिका खसक लिए, और बाद में वो गुनाहगार पाए गए तो सांप निकलने के बाद लकीरें पिटने वाली बात रह जायेगी ।
मैंने डिसाइड कर लिया कि मैं पुलिस को उन के बारे में बताऊंगा । मगर मैं ये भी जानता था कि पुलिस मुझे उनके बारे में इतने दिनों तक जानकारी छुपाने पर मेरी बखिया उधेड़ देंगी । खैर अब पुलिस मेरे साथ जो भी करें मैंने उनके बारे में पुलिस को बताने का निर्णय कर लिया ।
…….
सुबह तैयार होकर नाश्ता किया फिर माॅम डैड को सारी बातें बताई । उन्होंने भी मुझे पुलिस के पास जाने की सलाह दी । मैं अपनी बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गया । थाने में इंस्पेक्टर विजय कोठारी अपने कक्ष में मिला । मैंने उसे सारी बातें बताई । सुनते ही वो भड़क उठा । भरे थाने में मेरी बुरी तरह फजीहत कर दी । फिर उसने कहा वो कुलभूषण खन्ना और अनुष्का के घर जा रहा है और वो जब तक वहां से वापस न आ जाए तब तक थाने में ही उसकी प्रतीक्षा करें । मैंने बड़ी मुश्किल से उसे मनाया कि मैं थाने में न रूककर अपने जीजा के घर चला जाता हूं और वो जब वहां से वापस आ जाए तब मैं थाने चला आऊंगा ।
इंस्पेक्टर अपने लाव लश्कर के साथ कुलभूषण खन्ना के घर चला गया और मैं जीजू के घर । अभी दिन के ग्यारह ही बजे थे । जब मैं जीजू के घर पहुंचा तब श्वेता दी किचन में थी और दोपहर के भोजन बनाने की तैयारी कर रही थी और जीजू अपने कमरे में टीवी चालू किए मोबाइल देख रहे थे ।
मुझे देखकर श्वेता दी बहुत खुश हुई । वो साड़ी पहनी हुई थी । मैंने श्वेता दी को हग किया और अपने हाथ को पीछे ले जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबोच लिया । वो चिहुंक कर मुझे देखी और फुसफुसाई – ” क्या करते हो , तुम्हारे जीजू घर में हैं , कहीं देख लिया तो ।”
” नहीं देखेंगे । कमरे से किचन थोड़ी ही दिखेगा । ” – कहकर मैंने अपने होंठ उनके होंठों से सटा दिया । और उनके शहद से भी मीठे लबों को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा ।
वो मुझे परे धकेलते हुए बोली -” क्या कर रहे हो मरवाओगे क्या ? चुपचाप रूम में जाकर जीजू के पास बैठो । ”
” क्या यार , इतनी दूर से आया था कि अपनी बहन को प्यार करूंगा , उसके गले लगूंगा , लेकिन तुम तो मेरा दिल ही तोड़े देती हो ।” मैंने मायूसी शक्ल बनाते हुए कहा ।
” नाटक मत करो । जाओ , मैं चाय लेकर आती हूं ।” – उन्होंने बर्तन उठाते हुए कहा ।
” लेकिन मुझे चाय नहीं पिनी है ।”
” तो क्या पिनी है , खाना बना दूं ..वैसे चावल और दाल बना दिया है , सब्जी बनानी बाकी है । सलाद काट देती हूं और पापड़ तल देती हूं , क्यों ठीक रहेगा ना ।”
” लेकिन फिलहाल तो मुझे दुध पिनी है और वो भी तुम्हारी चोली के अंदर वाली ।” – कहकर मैंने उनके एक मम्मा दबा दिया ।
” कमीना कहीं का । अभी कुछ नहीं मिलने वाला है । और इस वक्त तो हरगिज नहीं ।”
” चलो ठीक है । जैसी आप की इच्छा ।” – मैं निराश होकर बोला ।
और मैं जीजू के पास जाने लगा तभी उसने मेरी बांह पकड़ी और किचन के कोने में ले गयी । फिर उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए । धीरे धीरे चुम्बन विल्ड होने लगी । दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुसने लगे । वो अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी । मैं उसके जीभ को चूसने लगा । उसकी लार थूक को मैं गले के अन्दर लेने लगा । वो उत्तेजित होकर पैंट के ऊपर से ही मेरे लन्ड को दबाने लगी । मैं उसकी भारी चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर दबोचने लगा । फिर मैंने अपनी हाथ को उसके पेटीकोट के अन्दर प्रवेश कराने लगा तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझसे अलग हो गई ।
” आज नहीं ” – वो हांफते हुए बोली -” मैं वहां तो आ ही रही हूं चार पांच दिन के अंदर फिर कर लेना ।”
” क्या कर लेना ?” मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की ।
” प्लीज़ भाई , जाओ ना ” श्वेता दी ने अनुरोध किया ।
” ओके । तुम खाना बनाओ मैं जीजू के पास बैठता हूं ।” – मैंने प्यार से कहा ।
उसने सहमति में सिर हिलाया । मैं जीजू के पास चला गया और पलंग के बगल में दिवाल से लगी हुई बड़े सोफे पर एक किनारे बैठ गया । थोड़ी बहुत औपचारिक बातों के पश्चात उन्होंने मेरे आने का कारण पूछा तो मैंने बहाना बनाया कि मेरे एक दोस्त का यहां के कालेज में कोई काम है इसलिए उसके साथ चला आया । तभी श्वेता दी आई और हमें चाय सर्व किया फिर सोफे के दुसरे कोने में बैठ गई । तीनों चाय पीते पीते बात करने लगे । मैंने जीजू से पूछा कि काम कब से ज्वाइन करने वाले हैं तो उन्होंने कहा अब दिल्ली आकर वहीं से काम ज्वाइन करेंगे । फिर थोड़ी देर बाद वो एक टीबी सीरियल देखने में बिजी हो गये । शायद वो उनकी फेवरेट सीरियल थी जो दुबारा दिन में दिखाई जा रही थी ।
मैं चाय पीते हुए श्वेता दी की तरफ देखा । वो चाय पीते हुए मुझे ही देख रही थी । मैंने अपना मोबाइल बाहर निकाला और श्वेता दी के ह्वाट्सएप पर मैसेज किया । श्वेता दी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने इशारे से उनको अपना मोबाइल देखने को कहा । वो अपनी मोबाइल उठाई जो उनके बगल में सोफे पर पड़ी हुई थी ।
मेरा मैसेज – वहां सन्डे को आ रही हो ना ।
श्वेता दी का मैसेज – हां , क्यों ?
मैं – जीजू काम कब से ज्वाइन करेंगे ?
श्वेता दी – सोमवार से ।
मैं – ड्यूटी पर निकलेंगे किते बजे ।
श्वेता दी – दस बजे । और वापस लौटेंगे सात बजे ।
मैं – तब तो तुम नौ घंटे अकेले रहोगी । कैसे समय काटोगी ।
श्वेता दी – क्यों ? मां को या राहुल को बुला लुंगी ।
मैं – राहुल का स्कूल रहेगा और चाची रोज रोज थोड़ी न आयेगी ।
श्वेता दी – तो उर्वशी को बुला लुंगी । वो नहीं मिली तो रीतु या तुम्हारी मम्मी को बुला लुंगी ।
मैं – सारी दुनिया को बुला लेना लेकिन मेरे बारे में ख्याल तक मत करना ।
श्वेता दी – क्यों नहीं ख्याल करूंगी , जब मेरे कपड़े धोने हो तब खयाल करूंगी , जब घर की साफ-सफाई करनी होगी तब खयाल करूंगी , जब बाजार से राशन सब्जी मंगवानी हो तब खयाल करूंगी ।
मैं – इतना सारा काम करवाओगी ।
श्वेता दी – हां ।
मैं – और बदले में मजदुरी में क्या दोगी ।
श्वेता दी – तुम्हारे जीजू से बोलकर पांच सौ रुपए और दिवाली होली के दिन कपड़े ।
तभी जीजू ने श्वेता दी को टोका -” किससे चैट कर रही हो श्वेता ।”
श्वेता दी ने संभलते हुए कहा – ” उर्वशी है ।”
” अच्छा ।” कहकर उन्होंने फिर अपना ध्यान टीवी पर केन्द्रित कर दिया ।
मैं – वैसे तुम पैसे कपड़े ना भी देती तो मैं तुम्हारे सारे काम कर देता ।
श्वेता दी – फ्री में ।
मैं – बिल्कुल फ्री में ।
श्वेता दी – कुछ भी नहीं लेते ।
मैं – लेता न ..बस तीनों टाइम…. ब्रेकफास्ट , लंच और डिनर करा देती ।
श्वेता दी – वाह ! ये भी कोई कहने की बात है । मैं पक्का ब्रेकफास्ट , लंच , डिनर करा दुंगी ।
मैं – लेकिन ये तो पुछ लो कि मैं ब्रेकफास्ट लंच और डिनर में क्या लुंगा ।
श्वेता दी – क्या लोगे ।
मैं – ब्रेकफास्ट में तुम्हारे होठों और जीभ का मधु रस , लंच में तुम्हारे थानों का दुध और डिनर में तुम्हारे जांघों के बीच जो गहरी सी छेद है न , वहां से निकलने वाली मलाई ।
श्वेता दी ने कामुक नज़रों से मुझे देखा फिर जीजू की तरफ देखा जो टीबी देखने में व्यस्त थे , फिर अपने मोबाइल पर मैसेज लिखने लगी ।
श्वेता दी – सिर्फ इतने में पेट भर जाएगा ।
मैं – हां… भर तो जाना चाहिए । खास तौर पर तुम्हारी मलाई से तो पक्का ही भर जाएगा । बोलो पिलाओगी न अपने चिकनी छेद से निकलने वाली गाढ़ी मलाई को ।
श्वेता दी ने फिर एक नज़र जीजू को देखा फिर मैसेज टाइप की – जरूर पिलाऊंगी अपने डार्लिंग भाई को…. अपनी गाढ़ी मलाई ।
मैंने उनकी तरफ देखा वो कामुक नज़रों से मुझे देख रही थी फिर उन्होंने अपने जीभ को होंठों पर फिराने लगी ।
मैं – हाय दीदी… मैं तो मरा जा रहा हूं तेरी सुरंग की लसदार गाढ़ी मलाई को पीने के लिए …चल ना बाथरूम में..अपनी पेटीकोट को पकड़ कर अपने जांघों से ऊपर कर खड़ी हो जाना और मैं नीचे बैठ कर तेरी जांघों के बीच में जो सुरंग है उस पर अपना मुंह रख कर जीभ से सारी मलाई चुस चुस कर पी लुंगा ।
श्वेता दी – मेरी भी बहुत इच्छा कर रही है तुझे पिलाने में । मेरी तो अभी से पैन्टी भीग गई है… अगर तुने अभी चुस लिया न तो मेरी इतनी मलाई निकलेगी कि तेरा पेट क्या गला तक भर जाएगा ।
तभी जीजू ने बोला -” क्या बोल रही है उर्वशी ।”
श्वेता दी ने संभलते हुए कहा – ” वही सब लड़कियों वाली बातें.. गर्ल्स टाक । उसे मेरी बनाई हुई मलाई बहुत पसंद है , वही खिलाने को बोल रही है ।”
” ओह ! ठीक है उसे दिल्ली , घर बुलाना वहीं उसे मलाई खिला देना ।” – जीजू ने कहा ।
” हां वही तो उसे बता रही हूं दिल्ली में जितना इच्छा हो खा लेना ।” श्वेता दी ने मुझे घुरते हुए कहा ।
फिर जीजू ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा -” तुम कहां बीजी हो गये हो , कोई गर्लफ्रेंड है क्या ?”
” अरे नहीं जीजू , मेरी ऐसी किस्मत कहां । मेरे एक स्टुडेंट का फोन है । ” मैंने मुस्करा कर जबाव दिया ।
वो फिर टीवी देखने में व्यस्त हो गए । मैंने फिर श्वेता दी को मैसेज किया ।
मैं – श्वेता दी , चलो न बाथरूम में ।
तुरंत श्वेता दी का मैसेज आया – किसलिए ।
मैं – तुम्हारी मलाई चाटने ।
श्वेता दी – हाय तुम से ज्यादा इच्छा मेरी हो रही है लेकिन अभी रिस्क ज्यादा है…. दिल्ली में तुम्हें भरपेट मलाई चटाऊगी । जब कहोगे तब । बोलो चाटोगे न अपनी बहन की मलाई ।
मैं – हां दीदी चाटूंगा… वहां तो तुम्हें पुरी नंगी करके तुम्हारे दोनों पैरों को फैला कर तुम्हारे सीने के उपर रख कर अपनी जीभ अंदर बाहर कर कर के चाटूंगा । ( मैंने श्वेता दी को जीजू के नजरों से छुपा कर अपने लन्ड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए दिखाया )
श्वेता दी भी पुरी गरम हो गई थी । उन्होंने मैसेज भेज कर मुझे देखा ।
श्वेता दी – हां , मेरे बेडरूम में मेरी बिस्तर पर जहां तुम्हारे जीजू और मैं सोते हैं उसी पर मुझे नंगी कर के मेरी जांघों के बीच के छेद में अपनी जीभ डाल डाल कर चाटना ।
मैं – हां दीदी…तेरा भाई तेरी छेद के अंदर मुंह और जीभ घुसा घुसा कर चाटेगा । तेरी आगे वाली और पिछे वाली दोनों छेदों में जीभ पेलूंगा ।
श्वेता दी – खाली जीभ ही पेलेगा और कुछ नहीं पेलेगा ।
मैं – तु बता न और क्या पेलूंगा ।
श्वेता दी – अपना मोटा लौड़ा नहीं पेलेगा ।
मैं – हाय मेरी दीदी…मेरा मोटा लौड़ा से पेलवाएगी.. मेरे मोटे लन्ड से क्या पेलवाएगी ।
श्वेता दी – अपनी चुत पेलवाऊगी… अपने छोटे भाई से अपनी चुत चोदवाऊगी… अपनी गांड़ चोदवाऊगी ।
जीजू वहीं बैठा टीवी देख रहा था और हम दोनों भाई बहन उसी के साथ बैठे एक दूसरे को गन्दे गन्दे मैसेज कर रहे थे । मेरा लन्ड तो बहुत पहले से ही उफ़ान पर था और अब वो किसी भी समय बरसात करने के लिए तैयार था । और जो मुझे समझ आ रहा था कि श्वेता दी भी या तो चरम पर पहुंच चुकी थी या पहुंचने वाली थी । मैं श्वेता दी को मैसेज भेजता कि जीजू ने उन्हें लंच सर्व करने को बोल दिया । बहुत मुश्किल से हम दोनों अपने को कन्ट्रोल किए ।
खाना पीना होते-होते दो बज गए । फिर हम तीनों उसी बेड पर लेट गए । जीजू बीच में था इसलिए और कुछ होने की संभावना नहीं ही थी । हमें आराम करते हुए एक घंटा बीता था कि इंस्पेक्टर कोठारी का फोन मेरे मोबाइल पर आया ।

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