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Update 12 C

मैं बाइक लिए दरवाजे के बाहर खड़ा था जब रीतु और काजल वहां आई ‌। काजल से रीतु की दोस्ती स्कूल के समय से ही थी । दोनों में काफी गहरी दोस्ती थी । इन दोनों का एक-दूसरे के घर जाना और कभी कभी एक-दूसरे के घर रुक जाना आम बात थी । वैसे मैं भी कभी कभी काजल से मजाक कर लिया करता था । उसके घर में उसके मां बाप के अलावा एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी गुड़गांव में ही हुई थी ।

काजल डीप ब्लू कलर की शर्ट और लेगिंग्स पहनी हुई थी जो उसके गोरे गोरे रंग पर काफी फब रहा था । उसके बड़े-बड़े वक्ष शर्ट पर काफी कसे हुए थे । उसकी मोटी मोटी जांघें लेगिंग्स में बहुत ही सेक्सी लग रही थी । होंठों पर लाली , आंखों में हल्का सुरमा , घुंघराले कमर तक आये हुए बाल उसकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे थे । रीतु सलवार सूट में भी हमेशा की तरह जगमग जगमग कर रही थी ।

काजल रीतु को बाय बोल कर बाईक पर मेरे पिछे अपने दोनों पैर दोनों साइड करके बैठ गई ।

” सुन ! अच्छी तरह से भाई को पकड़ कर बैठ जा ।” – रीतु बोली ।

पिछे थोड़ा हिल डोल कर काजल अपने को एडजस्ट करने लगी ।

‘ अरे ! क्या कर रही है ? ठीक से भाई को पकड़ कर बैठ । कहीं गिरा , पड़ा तो लेने को देने पड़ जायेंगे ।”

” हां काजल । अच्छी तरह से पकड़ ले नहीं तो गिर पड़ेगी ” – मैंने भी काजल को समझाया ।

काजल आगे की ओर घसक गई और मुझसे सटकर बैठ गई ।

” मैं काजल को गिरने के चलते तुम्हें पकड़ कर बैठने के लिए नहीं बोल रही हूं ।”- रीतु बोली ।

” तो किसलिए बोल रही हो ?”

” तुम्हे गिरने से बचाने के लिए । अगर रास्ते में किसी से भिड़ गए तो काजल तुम्हें बचा ले ।”

” मुझे गिरने से बचाने के लिए “- मैं हैरान हुआ ।

” हां । क्योंकी काजल तो बाईक पर से गिर ही नहीं सकती । वो तो चुम्बक की तरह बाईक से चिपक जाती है । उसे कोई गिरा ही नहीं सकता ।”

” क्या बकवास करती है ।” मैं भड़क कर बोला ।

” सच बोल रही हूं । तुम काजल से ही पुछ लो । अभी कुछ दिन पहले जब ये मामा के यहां गयी थी तो ये एक दिन अपने मामा के साथ उनके बाईक पर बैठे मार्केट जा रही थी । रास्ते में एक कुत्ता आ गया और इसका मामा एक्सीडेंट कर बैठा । मामा तो उछल कर दुर कहीं गिरा मगर ये बाईक से चिपकी हुई ही रही ।”

” क्या ?”- मैं आश्चर्यचकित मुंह बाये देखता रहा ।

” हां । ” – रीतु काजल को बोली -” चल अब कस के भाई को पकड़ ले ।”

काजल अब पुरा आगे आ गयी और मुझसे सटकर बैठते हुए अपनी दोनों बांहों को आगे कर मेरे बाहों को पकड़ ली ।

” अरे ! क्या कर रही है काजल । मेरी बांह तो छोड़ , मैं बाईक कैसे चलाऊंगा ।”

काजल ने तुरंत अपनी बाहें हटायी और इस बार मेरे पेट के उपर बाहों का हार बना कर पकड़ ली । उसकी दोनों बड़े बड़े मम्मे मेरे पीठ पर धंस गये ।

” हां । अब ठीक है । “- रीतु सन्तुष्ट हो कर बोली ।

” अब मैं जाऊं ?” मैंने कहा ।

” हां जाओ ‌।”

” चलें काजल ?” मैंने काजल से पूछा ।

‘ हां भैया चलिए ।” काजल बोली ।

मैं बाईक स्टार्ट करने ही वाला था कि रीतु जोर से बोली -” अरे काजल , तेरी बुक्स कहां है ? और तेरा पेठा वाला बैग ?”

” ओह ! भुल गयी यार । लेते आ न ।” काजल ने कहा ।

” तु भी चल ना , दो मिनट में आ जाएंगे ।”

फिर दोनों अन्दर चली गई । और करीब पन्द्रह मिनट बाद आई । मैं बाइक पर बैठे बैठे भुनभुनाता रहा । काजल ने अपनी किताबें और पेठा वाला बैग मुझे दिया । मैंने उसे बाइक की डिकी में रख दिया । फिर मेरे बाइक पर बैठते ही काजल उसी तरह मेरे पेट को अपने हाथों से पकड़ कर चिपक कर बैठ गई ।

ज्योंहि उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरी पीठ पर दबे तो मुझे कुछ अलग सा फिल हुआ । मैं उसके मम्मे को स्पष्ट रूप से महसूस कर रहा था । शर्तिया उसने अन्दर जा कर अपनी ब्रा उतार दी थी । मेरी दिल की धड़कन तेज हो गई । ये क्या खेल खेलना चाहती है ।

” चलें काजल “- मैंने प्यार से कहा ।

” हां भैया ।”

काजल ने रीतु को बाय बोला और हम वहां से रवाना हो गए । वो मुझसे इस तरह चिपकी हुई थी कि बीच में से हवा भी पार न होने पाए । उसकी छाती मेरी पीठ से धंसी हुई थी । उसके बड़े-बड़े मुलायम स्पंज की तरह मम्मे की रगड़ मुझे काफी उत्तेजित कर रही थी । जांघिया में कैद मेरे छोटे सिपाही ने जैसे बाहर निकलने के लिए बगावत शुरू कर दी थी ।

काजल का घर पीतमपुरा में था जो हमारे यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर है । इनका मकान दो मंजिला था । मकान के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बगीचा था जहां हमलोगो की तरह ही फलों के पेड़ लगे हुए थे और कुछ सब्जियां भी बोई गई थी ।

” काजल कोई परेशानी तो नहीं हो रही है न ।” मैं बाइक चलाते हुए कहा ।

” नहीं भैया ।”

” तुमने पेठा खाया ?”

” हां । बहुत टेस्टी है और थैंक यू भैया ।”

” तुझे अच्छा लगा यही मेरे लिए काफी है ।”

बाइक चलाते हुए सामने एक बमपर आया तो बाइक हल्के से उछल गई और काजल भी थोड़ी उछली और फिर मेरे पीठ पर अपने मम्मे को रगड़ते हुए बैठ गई । मैं ‘ आह ‘ करके रह गया ‌। मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन क्या कहूं समझ में नहीं आ रहा था । तभी कुछ याद आया ।

” काजल तुझे याद है तुम मुझे अपने आम खिलाने वाली थी ।” मैं बोला ।

” हां भैया याद है । घर चलिए आप को खिलाती हूं ।”

” अभी तो घर पर सभी होंगे । कभी फुर्सत में खा लेंगे ।”

अपने मम्मे को मेरे पीठ पर कसते हुए बोली -” उससे क्या फर्क पड़ेगा । आप पिछे की तरफ से गार्डेन में चलियेगा । अभी इस वक्त वहां कोई नहीं होगा , आप आराम से खा लिजिएगा ।”

” कहीं तेरी मम्मी डैड ने देख लिया तो ।”

” क्या देख लिया तो ?”

” कि मैं तेरे आम खा रहा हूं ।”

वो अपने हाथों को मेरे पेट से हटा कर मेरे जांघों पर लिंग के करीब ले गयी और उंगलियों से जांघ को सहलाते हुए बोली -” डैड अभी दुकान पर होगें और मम्मी अपनी फेवरेट सीरियल देख रही होगी ।”

लिंग के खड़े होने के कारण पैंट पर काफी उभार आ गया था । और उसकी ऊंगली उभारों से करीब करीब सट कर ही थी । उसके उंगलियों द्वारा वहां सहलाने से मेरा लिंग फुल कर कुप्पा हो गया था

” अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात बताई । अब तो मैं पक्का तेरी आम चुसुगा ।”

वो अपने मुंह मेरे कानों से सटा कर बोली -” भैया आपको कैसे आम पसंद है मतलब बड़े बड़े या छोटे ।”

” मुझे सभी पसंद है । वैसे तेरी आम कैसी है ?”

वो कान में अपनी होंठ को सटा कर फुसफुसाई -” भैया मेरे बड़े बड़े हैं ।”

मुझे तो ऐसा लगा कि सच में ही कहीं मैं एक्सीडेंट ना कर बैठूं । मैं अपने आप को संभालते हुए बोला -” वाह । बड़े बड़े । मुझे बड़े बड़े बहुत ज्यादा पसंद है । काजल सच में अपने आम मुझसे चुसवाएगी…मेरा मतलब चुसने देगी न ।”

” हां भैया सच में दुंगी । आप से नहीं चुसवाउगी….माने आप को चूसने नहीं दुंगी तो भला किसे दुंगी ।” – फुसफुसा कर बोली और अपनी मध्यम उंगली को मेरे लिंग के साइड में हल्का हल्का सहलाने लगी ।

उसके उंगलियों के वहां स्पर्श से मुझे लगा कि अब मैं झडने ही वाला हूं । मैं काफी उत्तेजित हो गया था । मैंने हिम्मत करके बाइक के हैंडल पर से अपना एक हाथ हटाया और उसकी उंगलियां जो मेरे जांघों के मध्य से जरा ही दुर था उसे अपने उंगलियों से फसा कर बीच में ठीक लिंग के उपर रख दिया । उसने जरा भी प्रतिवाद नहीं किया ।

” मैं जरूर चुसुगा । दबा दबा कर चुसुगा । ”

” हां भैया जरूर चुसीएगा । दबा दबा कर चुसीएगा ।” – वो अपने उंगलियों को हल्के से पैंट के ऊपर से लिंग के उपर दबाई ।

” हां अपने दोनों हथेलियों से पकड़ कर खुब दबा दबा कर चुसुगा , पिऊंगा ।”

” चुस लेना भैया । अपने हाथों से दबोच दबोच कर पी लेना । ” कहते हुए वह अपने हथेलियों को मेरे लन्ड को पैंट के ऊपर से दबाई ।

” हाय काजल … मुझे तो तु अपनी आम चुसाएगी और तुझे क्या पसंद है …. तुझे क्या चाहिए ?”

” हाय भैया मुझे केला पसंद है । आप मुझे खिलाओगे न ” – मेरे कानों में धीरे से बोली और उसे अपनी जीभ की नोक से स्पर्श कर दिया ।

” जरूर खिलाऊंगा काजल । मैं तो कब से चाहता था कि तुझे अपना केला खिलाऊं ।”

” तो ये आपकी गलती है न भैया । आप को पहले बोलना चाहिए था ।”

” हां मेरी गलती है । मगर अब गलती नहीं करूंगा । ”

वो कुछ कहती उससे पहले ही उसका घर आ गया । उसके घर के सामने ही उसके डैड खड़े मिले । मैं समझ गया अब कुछ नहीं हो सकता है । KLPD हो गया । मैंने काजल की तरफ देखा। उसकी आंखें गुलाबी सी हो गई थी । मुझे अपनी ओर देखता पाकर धीरे से मुस्कुराई । मैंने उसके डैड को प्रणाम किया । उनके साथ उनके घर में प्रवेश किया । उसके मम्मी और डैड से गप शप किया । चाय नाश्ता किया और फिर अपने घर चला आया ।

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