Sagar – An Erotic Incest Story – Update 12B

Sagar - An Erotic Incest Story
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Update 12 B

” वैलकम ! वैलकम ! ” – कुलभूषण खन्ना अपनी चेयर पर बैठे हुए बोला ।

मैं उससे हाथ मिलाया और उसके सामने पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया ।

” और सब खैरियत है ।” वो अपने कान की लौ खिंचता हुआ बोला ।

” जी खन्ना साहब । सब खैरियत है ।”

उसने अपने स्टाफ को चाय लाने की आर्डर दी । मैं उसके बोलने की प्रतीक्षा करने लगा ।

” हम सोच रहे थे कि अमेरिका शिफ्ट हो जाएं ।”

” हम ?”

” मैं और अनुष्का ।”

” अमेरिका ?”

” मेरा छोटा भाई वहां रहता है । कयी साल से बुला रहा है ।”

” सैर कर आने को ?”

” वही सैटल हो जाने का ।”

” क्यों ? कोई खास वजह ?”

” वजह तुम जानते हो ” – भावावेश में उसकी आवाज कांपने लगी -” तुम्हें यह भी पता है कि उस दिन मैंने यहां तुम्हें क्यों रोक रखा था ।”

” क्यों ?”

” अपनी बीवी से तुम्हारा आमना सामना करवाने के लिए ।”

” जी !”

“” तुम्हारी विजिट से मेरा यह शक विश्वास में बदल गया था कि तुम्हारे जीजा राजीव सोलंकी के फ्लेट में तुम्हारा जिस कटे बालों वाली युवती से आमना-सामना हुआ था , वह मेरी बीवी अनुष्का थी । तुम्हारी शक्ल देखते ही उसके चेहरे का रंग उड़ता मैंने साफ देखा था । और वो समझती है कि बाद में क्लब के बाहर उसने तुमसे जो खुसुर फुसुर की थी , उसकी मुझे खबर नहीं ।”

मैं खामोश रहा । अपनी नर्वसनेस छुपाने के लिए मैंने सिगरेट सुलगा लिया ।

” दो कौड़ी की औकात नहीं थी मेरी बीवी की मेरे साथ शादी से पहले ” – वह जोर जोर से अपने कान को मसलता हुआ बोला -” कालेज की मामूली स्टूडेंट , टी. बी. सिरियल में काम पाने के लिए सारा सारा दिन मण्डी हाउस की खाक छाना करती थी । मैंने उससे शादी की , उसे रूतबा दिया , इज्जत दी , सुख-सुविधा और ऐश्वर्य दिया । जमीन से उठा कर आसमान पर बिठाया उसे । बदले में मुझे क्या मिला उस नाशुक्री और बेवफाई औरत से ? धोखा ! फरेब ! बेवफाई !”

वह ठिठका । मुझे यूं लगा जैसे वह रोने लगा हो । लेकिन ऐसा न हुआ । उसने अपने आप पर काबू पाया और अपेक्षा कृत सुसंयत स्वर में बोला -” मैं जिन्दगी का बड़े से बड़ा झटका बर्दाश्त कर सकता हूं लेकिन औरत की बेवफ़ाई नहीं बर्दाश्त कर सकता । मैं अपनी बीवी की कल्पना राजीव सोलंकी , तुम्हारे उस हरामजादे , कुत्ते के पिल्ले के पहलू में नहीं कर सकता । मैं खून कर दुंगा उसका ।”

” फांसी हो जाएगी ” – मैं धीरे से बोला ।

” मैं उसे तबाह कर दुंगा ” – वह यूं बोला जैसे उसने मेरी बात सुनी न हो -” मैं उसे कौड़ी कौड़ी का मोहताज कर दुंगा । मैं उसे गलियों में भीख मांगने वाला मंगता बना दुंगा ।”

मैं खामोश रहा । तभी स्टाफ चाय लेकर आया । स्टाफ के जाने के बाद फिर बोला -” मेरी बीवी बाद में तुमसे मिली थी ।”

मैंने उत्तर न दिया ।

” झुठ बोलने का कोई फायदा नहीं । मेरे आदमी को अनुष्का ने डाज दे दी थी । लेकिन फिर भी मुझे मालूम है कि वह तुम्हीं से मिली थी ।”

” फिर भी कैसे मालूम है ?”

” वो छोड़ो और बोलो मेरी बीवी तुमसे मिली थी । जबाव यह सोचकर देना कि इनकार भी करोगे तो मुझे विश्वास नहीं होगा ।”

” हां । मिली थी ।”

” क्या चाहती थी ?”

” खास कुछ नहीं ।”

” फिर भी ।”

” मेरा शुक्रगुजार होना चाहती थी कि मैंने उस दिन आपके सामने उसकी पोल नहीं खोली थी और आगे भी वह राज रखने का वादा लेना चाहती थी ।”

” यह वादा हासिल करने के लिए और क्या क्या किया उसने ?”

” क्या मतलब ?”

” तुम पर डोरे डालने की कोशिश नहीं की उसने ?”

” नहीं ” – मैं बड़े सब्र से बोला ।

” क्यों झुठ बोल रहे हो । इसलिए इनकार कर रहे हो क्योंकि समझते हो कि मैं बुरा मान जाऊंगा । तुम खुबसूरत हो , नौजवान हो , मार्डन हो , उपर से…..”

” खन्ना साहब ” – मैं सख्ती से बोला -” ऐसा कहकर , ऐसा सोचकर आप अपने आप को टार्चर कर रहे हैं । ईशया की भावना ‌ने आपकी मति भ्रष्ट कर दी मालूम होती है । यूं तो जो मर्द एक सेकेंड के लिए आपकी बीवी के पास खड़ा होगा , आप उसी पर शक करने लगेंगे । ऐसा कहीं होता है ? इससे तो बेहतर है तो आप तलाक दे दें ऐसी बीवी को ।”

” उसने…. उसने तलाक का कोई जिक्र किया था ?”

” नहीं । कतई नहीं ।”

” हूं । “- वह बोला । उसने कान की लौ को खींचने मसलने की जगह सहलाना आरम्भ कर दिया -” अच्छा , यह बताओ तुम्हारे ख्याल से मेरी बीवी का उस आदमी के कत्ल से कोई रिश्ता हो सकता है जो राजीव के फ्लेट में मरा पाया गया था । क्या नाम था उसका ?”

” अमर । अमर गुप्ता ।”

” हां । अमर गुप्ता । उसके कत्ल से मेरी बीवी का कोई रिश्ता हो सकता है ?”

” मुझे नहीं मालूम ।”

” भई । मैंने तुम्हारा ख्याल पुछा है ।”

” मेरा इमानदराना ख्याल जानना चाहते हैं आप ?”

” हां ।”

” फिर तो हो सकता है । आप की बीबी के पास राजीव जी के फ्लैट की चाबी थी । और मौका-ए-वारदात पर वो पाई गई है । और हालात ऐसे पैदा हो गये हो सकते हैं कि आपकी बीवी को गोली चलानी पड़ गई हो ।”

” हूं । अगर ऐसा हुआ , वह पकड़ी गई और उसे सजा हो गई तो मुझे बहुत अफसोस होगा ।”

” अच्छा !”

” मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता ।”

” जी ।”

मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि ये शख्स किस टाइप का आदमी है । घड़ी में तोला , घड़ी में माशा ।

” मैं सच कह रहा हूं ।’

” अच्छा , मुझे आज्ञा दिजिए ।” मैंने उठने का उपक्रम किया ।

” जरा एक मिनट सुनो ।”- वो बोला -” तुम्हारा जीजा भी तो क़ातिल हो सकता है ?”

” होने को तो क़ातिल आप भी हो सकते हैं । ”

” क्या बकवास कर रहे हो ।”

” मैं भी आप ही की तरह सम्भावना व्यक्त कर रहा हूं । आप को अपनी बीवी पर शक था । आपने अपनी बीवी का पिछा किया । वहां आपने अपनी बीवी को अपने दुसरे यार अमर की बाहों में देखा । आपका खून खौलने लगा । और आपने अमर का खून कर दिया । ”

” क्या बे-सिर-पैर की बातें कर रहे हो । उसकी दोस्ती तो राजीव से थी । मुझे मारना होता तो मैं राजीव को मारता । और ये अमर नाम का लड़का कहां से फिट हो गया । उसे तो न मैं जानता हूं और न ही अनुष्का । उसे भला मैं क्यों मारूंगा ।”

” आप को अमर के मर्डर केस की सारी कहानी पता है । क्या आप बता सकते हैं कि मर्डर वाले दिन सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक कहां थे ?”

” घर में हुंगा और कहां होऊंगा । ”

” अच्छी तरह से याद करके बताईए । शायद भविष्य में इससे आप को फायदा ही हो ।”

” मैं ‌घर में ही था ।”

” आप घर में थे , इसका कोई सबूत , या कोई गवाह ।”

” नहीं कोई भी नहीं था । एक मेड आती है रोज लेकिन ‌शायद उस दिन वो आई नहीं थी । और अनुष्का किसी सहेली के पास जाने के लिए कहकर चली गई थी ।”

” तब तो आपके पास भी उस वक्त की कोई पुख्ता एलीवाई नहीं है । अच्छा अब इजाजत दिजिए । क्लास के लिए लेट हो रहा है ।”

” ठीक है । जाते जाते ये तो बता जाओ कि पुलिस को अनुष्का के बारे में कोई खबर है ?”

” जी नहीं ।”

मैं वहां से क्लास चला गया । थोड़ी देर में ही मन उचट गया । और खन्ना साहब से बिदा ले कर घर चला गया । दरवाजा रीतु ने खोला । वो सलवार सूट पहने हुए थी । मैं अभी हाल में पहुंचा ही था कि रीतु पीछे से आकर बोली ।

” भाई । काजल को उसके घर छोड़ दोगे क्या ?”

” क्या ” – मैं चौंकते हुए कहा -” वो अभी तक यहीं है ।”

” हां ।”

” ठीक है छोड़ दुंगा । कब तक निकलेगी ?”

” आधे घंटे में ।”

” माॅम कहां है ?

” किचन में ।” बोल कर वो अपने रूम में चली गई ।

मैं किचन में गया । माॅम हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहने खड़ी हो कर किचन स्लैब के उपर सब्जी काट रही थी । गर्मी के कारण पसीने से उनका ब्लाउज भीग गया था । साड़ी पेट से हट गयी थी जिससे उनकी गोरी गोरी थोड़े फुले हुए पेट दिखाई दे रही थी । साड़ी नाभि के थोड़ा नीचे से बंधा हुआ था । पसीने की बूंदें सरक कर नाभि से होते हुए साड़ी पर जमा हो रही थी । ये सब देखकर मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया । मैं उनके पास गया और पीछे से उनसे लिपट गया ।

” इतनी गर्मी में इतना हैवी साड़ी क्यों पहनती हो । पुरा पसीना पसीना हो गई हो । तुम्हारी नाइटी कहां गयी ?”

” बड़ा जल्दी आ गया ।” – माॅम पलट कर मेरे बालों को सहलाते हुए बोली ।

” हां । आज मन नहीं लगा इसलिए जल्दी चला आया । तुमने बताया नहीं तुम्हारी नाइटी क्या हुईं ?”

” पुरानी हो गई थी इसलिए फट गई ।”

” तो दुसरी ले लेती ।”

” मैंने रीतु को बोला था लेकिन वो बार बार भुल जाती है ।”

” अरे ! तो मैं हूं ना । मुझसे कहती मैं ले आता ।’

” अच्छा तो तु ही ले आना ।”

मैं माॅम के कन्धों के पसीने को हाथों से पोछता हुआ बोला -” कौन सी ले आऊंगा ?”

” कोई भी ले आना ।”

” कोई भी ?”

” हां । ”

” तुम्हे पता है न नाइटी कयी तरह की आती है । एक पुरे एंडी तक आने वाली , एक घुटने से थोड़ी नीचे तक आने वाली और एक घुटने से थोड़ी उपर वाली ।”

वो फिर मेरी तरफ पलटी और मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बोली -” बड़ा ज्ञान है तुझे नाइटी का ।”

” मुझे तो सभी चीजों के बारे में थोड़ा थोड़ा ज्ञान है । तुम जानती ही हो ।”

” हां जानती हूं लेकिन थोड़ा थोड़ा नहीं बल्कि ज्यादा ज्यादा ज्ञान है ।”

” बोलो ना ।”

” क्या ?”

” कौन सी ले आऊं ?”

” घुटनों से ऊपर वाली अपनी बीवी को पहनाना । मुझे एंडी तक आने वाली ही ले आना ।”

” घुटनों तक वाली पहनोगी तो हवा अच्छी तरह से आयेगी और इतना पसीना पसीना नहीं रहोगी ।”

” जरूरत नहीं है । मुझे वही ले आना ।”

” ओके वही ले आऊंगा । अब ये बताओ कि किस टाइप का ले आऊं ?”

” अब ये ‘ किस टाइप ‘ क्या है ?”

” मतलब मोटे कपड़े वाली , पतले कपड़े वाली , सेमी ट्रांसपेरेंट या …”

उसने मेरे पेट पर कस कर मुक्का मारा । ” बहुत ज्यादा बदमाश हो गया है । तुम रहने ही दो मैं रीतु से मंगवा लुंगी ।”

मैं माॅम के गाल पर पप्पी लेते हुए बोला -” ऐसे कैसे रहने दो । मैं ही ‌ले आऊंगा और ‌अब से नाइटी ही नहीं बल्कि तुम्हारी हर चीजें मैं ही ले आऊंगा ।”

” बड़ा आया ले ‌आने वाला । पहले कमाना तब बातें करना ।”

” इतना तो कमा ही लेता हूं कि तुम्हारी जरूरत के चीजों को खरीद सकूं और रही बात ज्यादा कमाने की तो कुछ दिनों तक वेट करो । सोने की पलंग बनवा दुंगा ।”

” किसके लिए । अपनी बीवी के लिए ।” – माॅम मुस्कराते हुए बोली ।

” तुम्हारे लिए । ”

” मैं क्या करूंगी सोने की पलंग ले कर । मेरे लिए मेरा टुटा फुटा लकड़ी का खटिया ही काफी है ।”

अभी मैं कुछ कहता तभी रीतु और काजल आ गयी । काजल घर जाने के लिए तैयार हो गई थी । मैं वहां से निकला और काजल को अपनी बाइक पर बैठा कर उसके घर की ओर रवाना हो गया ।

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Comments

3 responses to “Sagar – An Erotic Incest Story – Update 12B

  1. Rohan Avatar
    Rohan

    घुटने तक वाली पहनोगी तो हवा अच्छे से आयेगी

    omg चूत में हवा लगने की बात करके गया बेटा अपनी माँ से erotic अपडेट ब्रो

  2. Rohan Avatar
    Rohan

    सोने का पलंग

    तुम्हें चोदने के लिये माँ बोलने के पहले ही ऋतु अगायी, इस तरह के कामुक वाक्य पढ़ कर मज़ा अता है, ऐसे वाक्य चुदाई से भी ज़्यादा कामुक होती है

  3. Rohan Avatar
    Rohan

    शाद हीरो को पता चल गया है की उसकी माँ ही मैगज़ीन पढ़ती थी सेक्स वाली, इसीलिए वो इतने बड़े बड़े स्टेप्स ले फाहा है माँ को लेकर

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