UPDATE – 91
मैं आधे घंटे के अन्दर कामिनी आंटी के घर के सामने खड़ा था. आज रिशू की माँ चोदने का मेरा सपना पूरा होने वाला था. घंटी बजाते ही आंटी ने दरवाजा खोला. आंटी अभी भी सिर्फ गाउन में ही थी. मेरा लंड पहले ही इस ख्याल में अकड़ा था की शायद आज आंटी की फुद्दी मिल जाये और सामने उनका गदराया बदन देख के मेरा लंड एकदम सख्त हो गया.
कामिनी: अन्दर आओ मोनू.
जी आंटी, क्या जरूरी काम था जिसके लिए आपने मुझे बुलाया था. मैंने मुस्कुराते हुए पुछा.
कामिनी: वो ही कामं था जिसके लिए कल रात तुम मुझको बुलवा रहे थे. चुदाई… करोगे न मेरी चुदाई.
उनकी बात सुनते ही मैंने उत्तेजना से अपना हाथ आंटी की दाई चूची पर रख कर उसे कस कर दबा दिया. आंटी के मुह से एक सीत्कार निकल गयी और मैंने आंटी को अपने आगोश में लेकर उनके होठो पर अपने होठ रख दिए. मुझे बहुत अचम्भा हुआ क्योंकि आंटी के मुह से शराब
की महक आ रही थी. मैंने देखा सामने टेबल पर एक स्कॉच की बोतल सोडा और ग्लास रखा था.
मैंने पुछा आंटी अपने शराब पी है क्या.
कामिनी: तूने आने में इतनी देर लगा दी और जब अन्दर की आग जब बर्दाश्त नहीं हुई तो उसे बुझाने के लिए एक पेग मार ही लिया पर इसने आग और भड़का दी, अब जल्दी से मुझे ठंडा करदे मेरे राजा. जल्दी…
मैंने अपनी पेंट खोल कर सोफे पर बैठ गया और बोला: क्यों नहीं आंटी, इस दिन के लिए तो मैं भी बेक़रार था. आओ… चूस लो मेरा लण्ड… ये कब से बेताब है… और आंटी मेरे सोफे के सामने अपने घुटने पर बैठ कर मेरी कमर पकड़ कर मेरा लण्ड चूसने लगी.
थोड़ी देर चूसने के बाद आंटी ने लण्ड मुंह से निकाला.
आंटी: मैं तुम्हारे लण्ड की भूखी हूँ मोनू. मुझे अब जल्दी से चोद दो ना मोनू…

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