Reading Mode

UPDATE – 67

उसके बाद हम दोनों चूमा-चाटी में लग गए.

दोनों 69 के पोज़ में आ गए और

एक-दूसरे के चूत और लण्ड को चूसकर मज़ा लेने लगे.

 मैंने दीदी के मुँह पर लौड़ा लगा दिया

और हाथ से उसके बाल पकड़ कर

लौड़ा उसके गालों पर घुमाने लगा.

दीदी- उफ्फ.. मोनू क्या कर रहे हो..

बाल क्यों पकड़े हो मेरे.. दु:खता है ना…

 पता नहीं आज मेरी गाण्ड का क्या हाल करोगे..

मोनू- डर मत मेरी प्यारी रंडी..

 जब रिशू का इतना बड़ा ले चुकी हो,

 दो एक साथ ले चुकी हो फिर भी मेरे से क्यों डरती हो.

 वैसे गाण्ड इतनी प्यारी है..

 इससे तो बड़े प्यार से खेलूंगा मैं..

चल अब देर मत कर बन जा मेरी घोड़ी..

ताकि मेरे लौड़े को भी सुकून आ जाए..

दीदी- मोनू.. वो दर्द याद करके ही तो हिम्मत नहीं होती

 और तुम्हारा लंड भी अब पहले से बड़ा हो गया है

और मोटा तो पहले से ही है तो प्लीज़.

आराम से डालना और प्लीज़ ऐसे सूखा मत डालो..

कुछ लगा लो.. ताकि दर्द कम हो..

मैं खड़ा हुआ और तेल की बोतल ले आया..

तब तक दीदी भी दोनों पैर फैला कर ज़बरदस्त घोड़ी बन गई थी..

उसको देख के मैं खुश हो गया.

मोनू- वाह्ह.. मेरी रंडी क्या पोज़ में आई हो..

पैर भी फैला दिए..

ताकि गाण्ड थोड़ी और खुल जाए..

तू डर मत..

अभी बस थोड़ी देर की बात है..

इतना कहकर मैं बिस्तर पर आ गया

और दीदी की गाण्ड को सहलाने लगा.

दीदी- उफ्फ.. मोनू तुम्हारे हाथ लगाते ही अजीब सा महसूस हो रहा है.

मैंने थोडा तेल दीदी की गाण्ड के छेद पर डाला

 और उंगली से उसके छेद में लगाने लगा.

 कुछ तेल अपने लंड पर भी लगा लिया

ताकि आराम से दीदी की गांड में घुस जाए.

मैं उंगली को गाण्ड के अन्दर घुसा कर तेल लगाने लगा..

 तो दीदी को थोड़ा दर्द हुआ..

 मगर वो दाँत भींच कर चुप रही.

 मैं बड़े प्यार से उंगली थोड़ी अन्दर डालकर

गाण्ड में तेल लगा रहा था और

दीदी बस आने वाले पल के बारे में सोच कर डर रही थी.

मोनू- मेरी रानी अब तेरी गाण्ड को चिकना बना दिया है.

. अब बस लौड़ा पेल रहा हूँ..

आज से रोज गाण्ड मारूंगा दीदी याद रखना

दीदी- मोनू प्लीज़ आराम से डालना..

 वरना कल से छूने भी नहीं दूँगी .

तू ये बात भूलना मत..

मैंने लौड़े को दीदी की गाण्ड पर टिकाया

और प्यार से छेद पर लौड़ा रगड़ने लगा.

मोनू- अरे दीदी.. डर मत..

जानता हूँ तू मेरी बहन है..

तुझे दर्द होगा तो मुझे भी तकलीफ़ होगी..

तू बस देखती जा.. बड़े प्यार से करूँगा.

मैंने दोनों हाथों से दीदी की गाण्ड को फैलाया

 और टोपे को छेद में फँसा कर हल्का सा झटका मारा..

तो लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया.

 दीदी ने गांड मरवाना बंद की कर दिया था

 इसीलिए वो फिर से बहुत कस गयी थी.

मैंने फिर से कोशिश की..

 मगर लौड़ा अन्दर नहीं गया..

तो मैंने एक हाथ से लौड़े को पकड़ा और

 छेद पर रख कर दबाव बनाया..

अबकी बार लौड़ा गाण्ड में घुस गया

और एक दर्द की लहर दीदी की गाण्ड में होने लगी.

दीदी- ऐइ.. आईईइ.. आह…

मोनू.. बहुत दर्द हो रहा है..

 आह्ह.. आराम से करना..

 नहीं मेरी चीख निकल जाएगी और

बाहर कोई सुन लेगा.. उई.. माँ आज नहीं बचूँगी..

मोनू- मेरी जान.. अभी तो टोपी घुसी है..

थोड़ा सा बर्दास्त कर ले..

बस उसके बाद दर्द नहीं होगा.

दीदी- आह्ह.. कर तो रही हूँ..

 तू बस झटके से मत देना..

 धीरे-धीरे अन्दर डालो..

मैं दाँत भींच लेती हूँ.. आह्ह.. आह..

मैं हाथ से दबाव बनाता गया.

 एक इंच और अन्दर गया और रुक गया..

 फिर दबाया तो और अन्दर गया..

 वैसे मैं बड़े प्यार से लौड़ा अन्दर पेल रहा था..

 मगर दीदी की गाण्ड ने बहुत दिनों से लंड लिया नहीं था

 तो उनकी तो जान निकल रही थी..

 वो बस धीरे-धीरे कराह रही थी.

Please complete the required fields.