UPDATE – 64
मनीष ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

दीदी का बाँध टूट गया..
वो झड़ने लगी. कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई..
मगर मनीष का अभी बाकी था..
वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था.
दीदी अब शान्त लेट गई थी..
उनका सारा जोश ठंडा हो गया था.
तभी अचानक मनीष ने अचानक लंड तेजी से अन्दर बाहर करना शुरू किया
और दीदी की चूत में झड गया.
उसके बाद मनीष एक तरफ लुढ़क गया और
मैं घुटनों के बल बिस्तर पर खड़ा हो गया..
जिसे देख कर दीदी मुस्कुराई.
दीदी- क्या हुआ बहनचोद?
मोनू: रश्मि डार्लिंग तुम दोनों का तो हो गया
अब जरा मेरे लंड को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे..
उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा..
तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई..
अभी मेरा रस निकलना बाकी है.
दीदी हँसती हुई मेरे लंड को चूसने लगी..
अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह
उसको थूक से तर कर दिया.
मोनू: आह्ह.. आह्ह.. बस दीदी..
अब बन जा घोड़ी..
आज तेरी सवारी करूँगा..
आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह..
दीदी घुटनों के बल अच्छी तरह पर फैला कर घोड़ी बन गई..
वैसे तो रिशू ने उनको घोड़ी बना बना कर एक्सपर्ट कर दिया था
पर मेरे साथ तो पहली बार था..
जिस तरह वो घोड़ी बनी थी..
मुझको बहुत अच्छा लगा कि मेरी बहन एकदम पर्फेक्ट घोड़ी बनी है
मैंने कहा, वाह.. दीदी क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू..
अब ठुकाई का मज़ा आएगा..
तेरी चूत कैसे फूली हुई है..
उफ़फ्फ़ साली ऐसी चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है
मैंने लौड़े को चूत पर टिकाया
और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया
दीदी- आईईइ.. मोनू आराम से.. आह्ह..
एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह..
आज तो आराम से करो..
कल से जैसे चाहो चोद लेना..
मोनू: अरे सॉरी यार..
तेरी चूत देख कर बहक गया था..
अब ख्याल करूँगा
मैं अब दीदी की कमर पकड़ कर चोदने लगा..
मेरे हाथ दीदी की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे.
बीच-बीच में दीदी की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था.
थोड़ी देर की मस्ती के बाद दीदी भी गरम हो गई
और गाण्ड को पीछे धकेल कर मज़े को दुगुना बनाने लगी
दीदी- आह.. आह.. मोनू.. आह्ह..
आज की रात हर तरीके से मुझे चोदो..
आह.. आह.. फास्ट करो..
और तेज मोनू आह्ह.. मज़ा आ रहा है
मैं अब तेज़ी से चोदने लगा.
मेरा लौड़ा अब फूलने लगा था.
कितना सह पाता वो चूत की गर्मी को
आख़िर मेरे लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी.
उसका अहसास पाकर दीदी की चूत भी झड़ गई.
दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया.
अब हम दोनों भी शान्त पड़ गए..
दीदी की कमर में दर्द हो गया.
जैसे ही मैने लौड़ा बाहर निकाला..
वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और
लंबी साँसें लेने लगी. मनीष भी उसके पास ही लेट गया.
दीदी- उफ़फ्फ़ मोनू.. इस बार तो तुम दोनों ने लंबी चुदाई की..
आह्ह.. मेरी चूत की खुराक पूरी कर दी.
मोनू: अब तो तुमको चुदने की इतनी आदत हो गयी है
दीदी फिर बिना चुदे नींद कैसे आती है.

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