UPDATE – 60
दीदी की इच्छा सुन कर मैं सातवे आसमान पर पहुच गया
और एक आज्ञाकारी भाई की तरह दीदी के नीचे लेट गया
और रिशू के लंड से भोसड़ा बन चुकी दीदी की
प्यारी चूत को चोदने लगा और
मनीष मेरी प्यारी सी दीदी की गुलाबी गांड का कचूमर निकालने लगा.

‘आआह.. गज़ब.. मजा मजा मजा…’
दीदी सुध-बुध खोकर चिल्ला रही थी, जबकि मैं स्वयं भी
ऐसा शानदार नजारा देख कर उत्तेजना से फटा जा रहा था.
आज मेरा दूसरा सपना भी पूरा हो रहा था..
पहला दीदी को चोदना और दूसरा 2इन1..
मैं हमेशा से रश्मि दीदी के साथ डबल पेनेट्रेशन करना चाहता था,
और आज मेरी इच्छा पूरी ही रही थी.
पहले तो मनीष धीरे-2 धक्के लगाता हुआ
मेरी दीदी की गांड को रवां करता रहा और
थोड़ी देर बाद उसने अपने धक्कों में तेजी लाते हुए
धुआंधार रफ़्तार से मेरी कमसिन बहन की गांड कुटाई चालू कर दी.
इस समय मेरे लंड को रश्मि दीदी की चूत के अन्दर
भी मनीष के लंड का साफ़ एहसास हो रहा था
और उसके लंड के भरपूर धक्कों की चोट
मेरे लंड को भी खूब महसूस हो रही थी..
फिर मनीष लगातार अपने धक्कों की रफ़्तार
बढ़ता जा रहा था और रश्मि दीदी की चूत में
स्थित मेरे लंड को उसकी गांड में होने वाली
कुटाई साफ़ महसूस हो रही थी.. वास्तव में तो
मनीष का लंड रश्मि दीदी की गांड मार रहा था
लेकिन चूत में घुसे मेरे लंड को भी उसके भयानक घिस्से महसूस हो रहे थे.
रश्मि दीदी तो मस्ती में सातवें असमान पर थी..
मुझे तो यकीं ही नहीं हो रहा था.. मनीष का मोटा
लंड बिना किसी परेशानी के मेरी प्यारी बहन
की कमसिन गांड में अन्दर-बाहर हो रहा था…
‘आआआआ.. ओईईईईई.. और और और और तेज.
.आ ऊऊ.. जोर से धक्के मारो.. आआआआ..
आईई.. ऐसे.. ऊऊऊऊऊ.. आआआ. रगड़
के मारो मनीष.. आआईईई.. आह कैसी मस्ती आ गई..
जैसे मर्जी चोदो मुझे मनीष, और तुम भी मोनू..’
रश्मि दीदी आंख मार कर मुस्कुराते हुए बोली- .
.आज से तुम दोनों मेरे भाई नहीं पति हो…
दोनों इकट्ठे घुसेड़ो.. मेरी चूत और गांड एक झटके में ही भरा
करो अपने धक्कों से.. हाआआआन..
ये तो असली जन्नत है..
गजब. जरा रुकना मेरे प्यारे पतियों..
काफी देर से मैंने आपके लंडों का स्वाद नहीं चखा..
इस बार मैं दोनों को इकट्ठे ही अपने मुंह में लेना चाहती हूँ..
हम दोनों भाइयों ने अपने औजार रश्मि दीदी की
भट्टियों से बाहर निकाले और हमारी रानी
बेहना ने बिना देर किये उन्हें अपने दोनों हाथों की
मुट्ठी में पकड़ कर सहलाते हुए अपनी जीभ
से उनकी मसाज करने लगी.

हमारे लंड पूरे तनाव के साथ खड़े हुए थे
और उत्तेजना में झटके मार रहे थे.
हमारी बहन ने पहले बारी-2 से दोनों लंडों को चूसना
आरंभ किया, और फिर इकट्ठे ही मुंह में डालने की
कोशिश करने लगी और वो इसमें कामयाब भी होने लगी थी.
‘वाह जानेमन. तुम तो गजब ढा रही हो..
दोनों ले लिए अपने छोटे से मुंह में?’ मैंने
अपनी बहन की प्रशंसा की तो वो शर्मा कर अपनी आँखें छुपाने लगी..
‘मुझे लगता है कि हमारी प्यारी दीदी हमारे लौडों
को एक साथ अपने सबसे छोटे छेद में भी ले सकती है…’
मेरे इतना कहते ही एक पल को तो सन्नाटा छा गया,
लेकिन अगले ही पल मेरी बहन ने इस चैलेंज को
स्वीकार करते हुए मुस्कराहट के साथ
अपना सर हिला कर सहमति जताई.

