UPDATE – 59
मनीष मुझे आश्चर्यचकित करते हुए पूरी तरह से
स्थिति को काबू में कर, बहुत मंझे हुए खिलाड़ी
की तरह अपनी मौसेरी बहन की नर्म-गुलाबी
चूत को चोदे जा रहा था. उसका ६ इंच लम्बा
किसी कलाई जैसा मोटा लंड मस्ती के साथ
रश्मि दीदी की चिपचिपी हो चुकी चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.

दीदी आनन्द में डूबकर छटपटा रही थी और
किसी जानवर जैसी आवाजें निकाल रही थी
और मनीष के साथ चुम्बन में व्यस्त थी- आआ..
जरा और जोर से चोदो मुझे..
हाय कितना मजा आ रहा है
. थोड़ा रगड़ कर चोदो जरा..
फाड़ दो मेरी चूत को… ..ओए मस्त.. मस्त.
हाय कितना मोटा लंड है तुम्हारा.
बिलकुल गधे के लंड जैसा..
हाय कितना चिपचिपा हो गया है अन्दर तो.
. लेकिन कितना मस्त..’ वासना में दीदी डूब उतरा रही थी.
कुछ मिनटों बाद अचानक मनीष ने अपना लंड
दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया और
दोनों अलग हो गए. चुदासी दीदी ने
अब मेरे लंड की तरफ देखा. उन्होंने अपनी नर्म-
गुलाबी जीभ से मेरे लंड को चुभलाना शुरू
कर दिया और मैं जन्नत में पहुच गया…
उधर मनीष जो अपना मूसल लंड दीदी की
गोरी गांड के छेद से भिड़ाने में लगा हुआ था
उसने अचानक एक झटका मार कर लंड
का सुपाडा दीदी की गांड के अन्दर सरका दिया.

‘आआआह… आआ.. ओए. हाय कितना दर्द हो गया.
निकाल ले.. उई माँ. बेहनचोद तूने तो मेरी गांड
भी फाड़ डाली..’ रश्मि दीदी अचानक मनीष
का सुपाडा गांड में जाने से हुए दर्द से चिल्लाने लगी-
ऊऊऊ.. निकाल ले बाहर. मैं कह रही हूँ कुत्ते.
लेकिन इस बार मनीष ने लंड पूरा बाहर न निकाल कर
सुपाड़ा अन्दर रखा और उसे अन्दर बाहर करता रहा.
थोड़ी देर में रश्मि दीदी नार्मल हो गई और
धक्कों में मनीष का साथ देते हुए कहने लगी-
आ.. हे भगवान कितना दर्द हुआ था..
बोलना तो चाहिए पहले… तूने तो जैसे जलती
हुई रॉड ही मेरी गांड में घुसेड़ दी.
भयानक दर्द हुआ ..उफ्फ कितना डरावना लंड है तुम्हारा.
मुझे तो ऐसा लगा मानो मेरी गांड ही चीर दी हो…
जा मोनू जरा तेल या क्रीम ले आ जल्दी से.
मैं जल्दी से तेल आ गया. दीदी ने डिब्बे से थोडा
तेल निकाल कर मनीष के लंड को तर कर दिया
और थोडा तेल उसने अपनी गांड पर मल दिया
और बोली हां भैया अब लगाओ धक्का..
इस बार जब मनीष के गांड पर हल्का सा
दबाव लगाते ही उसका मूसल लंड फिसलता हुआ
रश्मि दीदी कि गांड में सरक गया और
आसानी के साथ अन्दर बाहर होने लगा.

अब रश्मि दीदी के चेहरे कि मुस्कराहट भी लौट चुकी थी,
वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही ले ली थी..
लेकिन अब ठीक है.. मजा आ रहा है..
हाँ ऐसे ही चोदो मेरी गांड. हाय.. आऊ.. हाँ ऐसे. थोडा धीमे प्ली
ज.. हाँ ऐसे. हाँ हाँ.. चलो चोदते रहो अपनी बहन की गांड..
कितना मस्ती आती है जब तुम धीमे-2
मेरी गांड में घुसाते हो और तेजी से बाहर निकालते हो..
हाय मेरे मोनू तू भी आजा..
मैं चाहती हूँ कि तू मेरी चूत चोदे और मनीष मेरी गांड मारे.

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.