UPDATE – 4
जब तक दीदी का नंबर आ गया था तो काउंटर पर बैठा आदमी बोला मैडम लंच टाइम है.
दीदी ने कहा मैं बहुत देर से लाइन में लगी हूँ.
उसने कहा वैसे तो अब काउंटर बंद होने का टाइम है
पर १० मिनट वेट कीजिये, मैं खाना खाकर आता हूँ
और वो विंडो बंद करके चला गया
अब लाइन में केवल दीदी और वो गन्दा आदमी ही बचे थे.
तभी उसने दीदी के कान में फिर से कुछ कहा
और दीदी ने झिझकते हुए अपनी टांगो को थोडा खोल दिया.
अब वो थोड़ी तेज़ी से दीदी के उभरे हुए चूतरों को ठोकने लगा.
हवस का ऐसा नज़ारा देख कर मैं पागल हो गया की दीदी उसको सपोर्ट कर रही थी
और उनको इस बात का भी डर नहीं था की अगर बैंक में कोई उनको ऐसे देख लेता
तो कितनी बदनामी होती. मैं और देखना चाहता था की वो आदमी अब क्या करेगा.
तभी उसने दीदी से फिर कुछ कहा
इस बार दीदी ने भी उसको कुछ जवाब दिया
तो वो कुछ पीछे होकर खड़ा हो गया
और दीदी ने मुझे आवाज़ लगाई मोनू जरा इधर तो आ.
मैं उधर गया और अंजान बनकर दीदी से बोला क्या हुआ दीदी.
सुन यहाँ तो खाने का टाइम हो गया है
अगर मैं हटी तो कोई और लाइन में लग जायेगा तो मैं यही लाइन में हूँ
तू तब तक जाकर १० रेवेनु स्टाम्प ले आ.
पापा ने मंगवाए थे और उन्होंने मुझे २० रुपये दिए. जा जल्दी से ले आ.
मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर क्या करता जाना तो पड़ेगा ही
तो मैं पैसे लेकर जल्दी से पोस्ट ऑफिस की तरफ भगा.
बाहर जाकर मैंने मुडकर देखा की वो आदमी फिर दीदी से कुछ कह रहा था.
अब दीदी उसकी तरफ देख रही थी और उनका चेहरा अभी भी लाल था.
मैं जल्दी से स्टाम्प लेने के लिए दौड़ने लगा
और सोचने लगा की अब वो आदमी दीदी के साथ क्या कर रहा होगा.
मेरी दीदी तो बहुत भोली है फिर दीदी ने मुझसे जाने के लिए क्यों कहा.
क्या जो हो रहा था उसमे दीदी की मर्ज़ी थी.
नहीं नहीं मेरी दीदी ऐसी लड़की नहीं है. वो शायद डर के कारण कुछ नहीं बोली थी.
वो आदमी इसी का फायदा उठा रहा था. क्या अब वो रुक जायेगा.
क्या दीदी उसको मना करेंगी. मैं येही सब सोच रहा था
और स्टाम्प ले कर आने में मुझे 3० मिनट लग गए थे.
मैं जल्दी से बैंक पहुच कर ड्राफ्ट की लाइन की तरफ बढ़ा पर वहां तो कोई भी नहीं था. और काउंटर बंद हो गया था.
बैंक में भीड़ भी नहीं थी ज्यादातर लोग चले गए थे.
तभी मैंने देखा की वो टूटे फुर्निचर वाले रूम से वोही आदमी निकला
और मैंने ध्यान से देखा की उसके पेंट की ज़िप खुली हुई थी.
मुझे लगा दीदी शायद घर वापस चली गयी होंगी पर तभी
उसी कमरे से दीदी भी अपने बाल ठीक करती हुई निकली.
मेरी दिल की धड़कने एकदम से तेज़ हो गयी.
दीदी उस कमरे में उस आदमी के साथ अकेले. जब वो खुले में इतना कुछ कर रहा था
तो अकेले में क्या किया होगा? इस सवाल ने मेरे लंड में खून का दौरा बढ़ा दिया.
आप कहा चली गयी थी. मैं आपको ढूँढ रहा था. मैंने दीदी से कहा
दीदी हल्का सा घबरा गयी फिर मुस्कुरा कर बोली तू स्टाम्प ले आया.
हां ले आया और अपने ड्राफ्ट बनवा लिया.
नहीं यार वो क्लर्क बोला की आपका अकाउंट यहाँ होना चाहिए ड्राफ्ट बनाने के लिए दीदी बोली.
दीदी का कुरता कई जगह से पसीने से तर बतर था मतलब दीदी उस कमरे में काफी देर रही थी .
दीदी मेरे सामने खड़ी थी मैंने ध्यान से देखा की उनके सूट पर बहुत झुर्रिया पड़ी हुई हैं
खास करके उनकी छातियो पर पर जब हम घर से चले थे
तो दीदी ने प्रेस किया हुआ कुरता पहना था,
मैंने दीदी से सीधे पूँछ लिया की आप उस कमरे में क्या कर रही थी.
दीदी मुस्करा कर बोली अरे उधर वाशरूम है न.
पर मुझे लगता था ये काम उस गंदे आदमी के हाथों का है.
मुझे अब बहुत जलन सी हो रही थी उस गंदे आदमी से
और ऊपर से दीदी मुझसे झूट बोल रही थी
मुझे लगा वो मेरे जाते ही काउंटर से हट कर उस टूटे फर्नीचर वाले अँधेरे कमरे में चली गयी थी तभी ड्राफ्ट नहीं बना.
मेरा ये सब सोच कर बुरा हाल था मेरा लंड भी बहुत अकड़ रहा था
और मुझे बाथरूम जाना था. मैंने सोचा की मैं भी वाशरूम जाने को बोलता हूँ
तो ये पता चल जायेगा की दीदी सच बोल रही है या नहीं.
तो मैंने दीदी को वेट करने को बोला और उधर कमरे में चला गया.
उस कमरे के एक कोने में लेडीज और दुसरे कोने में जेंट्स वाशरूम थे
मतलब दीदी सच बोल रही थी और वो आदमी भी हो सकता है
की बाथरूम से निकल कर आ रहा था जब मैंने उसे देखा.
मैंने जल्दी से बाथरूम जाकर पेशाब की और
बाहर आकर देखा की दीदी अभी भी अपना सूट ठीक कर रही थी.
मैं अब ध्यान से कमरे को देखने लगा टूटा पुराना फर्नीचर सीलन से भरा हुआ कमरा था
ऊपर रोशनदान से हलकी रौशनी आ रही थी
फर्श पर धुल की मोती परत जमी थी जिन पर लोगो के पैरो के निशान बने थे
तब मैंने देखा की सब निशान तो बाथरूम की तरफ जा रहे हैं
पर सिर्फ चार पैरों के निशान कमरे के दुसरे कोने की तरफ जा रहे थे
जहाँ कुछ टेबल्स एक के ऊपर एक रखी थी और
उनके पीछे जाकर वो पैरों के निशान आपस में ऐसे मिल रहे थे
जैसे काफी खीचतान हुई हो. मैंने सोचा क्या ये दीदी और उस आदमी के निशान है.
फिर मैं जल्दी से रूम से निकल आया.
फिर हम घर की तरफ चल पड़े. मैं यही सब सोच रहा था
तो दीदी से थोडा पीछे हो गया. मैंने देखा की उनकी चोटी से भी काफी बाल बहार आ गए थे
और उनकी गर्दन पर एक पिंक निशान भी था जैसे किसी ने काटा हो.
रिशू के साथ वो सब गन्दी फिल्मे देखने से मेरे मन में गंदे ख्याल आने लगे
की पक्का दीदी और उस आदमी के बीच कुछ हुआ है पर खड़े खड़े १५-२० मिनट में चुदाई तो नहीं हो सकती.
हमारे घर पहुँचने तक हममे कोई बात नहीं हुई.
रात को भी मुझे नींद नहीं आ रही थी और
रह रह कर बैंक की बातें मेरे दिमाग में घूम रही थी और
सबसे ज्यादा ये की दीदी ने उस आदमी को रोका क्यों नहीं.
ये सब सोचते सोचते मैंने सामने सोती हुई दीदी को देखा
और मेरा हाथ अपने खड़े हुए लंड पर चला गया.

और मैं जोर जोर से अपना लंड हिलाने लगा और थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल गया
और मैं नींद के आगोश में डूब गया.

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