मोनू को पता था की मनीष मोनिका को आज वापस ले जायेगा तो वो इस चुदाई को यादगार बनाना चाहता था. उसने पोजीशन बदलते हुए मोनिका की एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रख ली जिससे उसकी चूत थोड़ी और खुल गयी और एक जोर का झटका मार कर अपना लंड फिर से मोनिका की चूत में डाल दिया. उधर रिशू अब आगे आकर मोनिका के मुह में अपनी जीभ डाल कर किस करने लगा और मनीष के लंड ने रिशू के लंड की जगह ले ली और मोनिका की गांड में हलचल मचाने लगा.
करीब आधे घंटे बाद जब रश्मि वापस कमरे में आई तब तक उस तीनो ने मोनिका का कचूमर निकाल दिया था. बेड पर मोनिका बेसुध पड़ी थी और उसका बदन तीनो के वीर्य से लथपथ था और वो तीनो भी बेड पर पड़े हाफ रहे थे. रश्मि ने मोनिका को सहारा देकर उठाया और बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे खड़ा कर दिया. शावर का ठंडा पानी पड़ने से मोनिका की जान में जान आई.
वो रश्मि से बोली: सुबह सुबह तीनो ने मिलकर जान ही निकाल दी पर सच मजा भी बहुत आया. ये चुदाई तो जिंदगी भर नहीं भूलेगी. रश्मि बोली ठीक है तुम फ्रेश हो लो तब तक मैं नाश्ता बनाती हूँ. बहुत भूख लगी है.
रश्मि ने जब तक नाश्ता बनाया तब तक हम सब तैयार हो गए. फिर हम सबने साथ में नाश्ता किया और रिशू वापस अपने घर चल दिया. रश्मि ने उससे जाने से पहले वादा लिया की वो रिक्की को मौका मिलने पर भी अकेले नहीं चोदेगा. रिशू के जाने के बाद मनीष ने रश्मि को फिर से एक बार चोदा और थोड़ी देर आराम करके दोपहर के वो भी मोनिका को ले कर वापस चला गया.
इन दो तीन दिनों ने मुझे और दीदी को भी काफी थका दिया था तो हम लोग भी जाकर सो गए. रात को रिशू फिर से मेरे घर आ गया और बोला
रिशू: मम्मी ने बोला है की इसी सन्डे को हमें रिक्की को चोदना है. सुबह तुम मेरे घर आ जाना.
मैं ये सुन कर बहुत खुश हुआ और फिर हम दोनों ने मिल कर दीदी की चूत और गांड फिर से मारी. अगले दिन शाम को मम्मी पापा वापस आ गए और मैं और दीदी वापस अपने रूटीन पर आ गए. यानि दिन भर दीदी और रात में बीवी.
दो दिन बाद जब हम लोग डिनर कर रहे थे तो पापा ने मेरे सर पर एक बम फोड़ दिया. वो दीदी से बोले
पापा: रश्मि बेटा, शादी में हमें एक बहुत अच्छा लड़का मिला था. वो दिल्ली में नौकरी करता है पर वो लोग इसी शहर के रहने वाले है और हमें बहुत पसंद आये. अब मुझे और तुम्हारी मम्मी को लगता है की तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए. बेटा अगर तुम्हारी नज़र में कोई लड़का हो तो हमें अभी बता दो वरना हम दोनों सन्डे को उनसे तुम्हारे रिश्ते की बात करने जायेंगे.
मुझे लगा की ये क्या हुआ. दीदी की शादी वो भी दिल्ली में. अभी तो लाइफ में मज़ा आना शुरू हुआ था अगर दीदी दिल्ली चली गयी तो मैं अपनी प्यारी दीदी की चूत कैसे मारूंगा. पर तभी मुझ पर दूसरा बम दीदी ने फोड़ दिया.
दीदी शरमाते हुए पापा से बोली: जी पापा वो आप मयंक को तो जानते ही है वो मेरी फ्रेंड टीना का बड़ा भाई.
पापा: हाँ हाँ. एक दो बार मिला हूँ उससे.
दीदी: जी वो मुझे बहुत पसंद करते है.
पापा: अच्छा और तुम बेटा.
दीदी: जी मैं भी उन्हें पसंद करती हूँ.
पापा: क्या कर रहा है मयंक आज कल. उसने तो शायद बी टेक किया था न.
दीदी: जी, उसके बाद उन्होंने mba भी किया है और आज कल बंगलोर में नौकरी कर रहे है.
पापा: ठीक है बेटा. जैसी तुम्हारी इच्छा. मयंक के पापा से मैं बात करूंगा.
मुझे लगा की दीदी ने मुझे इतना बड़ा धोखा दिया. दीदी का बोयफ्रेंड था और उन्होंने मुझे बताया भी नहीं. कहाँ तो मैं सोच रहा था की दीदी दिल्ली चली गयी तो मेरा क्या होगा पर वो तो बंगलौर जाने का प्लान बना कर बैठी थी. दिल्ली तो फिर भी पास था, साल में तीन चार बार तो हम मिल ही सकते थे पर बंगलौर जाने के लिए तो मेरे शहर से सीधी ट्रेन भी नहीं थी.
मैंने बड़े बेमन से खाना खाया और अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद दीदी भी कमरे में आ गयी और दरवाजा बंद करके मेरे बगल में आकर लेट गयी पर मैंने गुस्से से करवट बदल ली.
रश्मि: अरे अब तुझे क्या हुआ.
मोनू: तुमसे क्या मतलब. तुम तो शादी करके बंगलौर जाओ.
रश्मि: अच्छा तो ये बात है. पर शादी तो मुझे करनी ही एक न एक दिन तो इसमें नाराज़ होने वाली क्या बात है.
दीदी ने मेरा लंड सहलाते हुए कहा. लंड पर दीदी का हाथ लगते ही मैं पिघल गया.
मोनू: अरे मैं इसलिए थोड़ी ही नाराज़ हूँ. मैं तो इसलिए गुस्सा हूँ क्योंकि तुमने मुझे बताया नहीं की तुम्हारा कोई बोयफ्रेंड भी है.
रश्मि: तुमने कभी पुछा ही नहीं.
मोनू: तुम बंगलोर चली जाओगी दीदी तो मेरा क्या होगा. तुम इसी शहर में शादी करो न.
रश्मि: पागल है क्या. इस शहर में किस से शादी कर लूं. तेरे उस कंजर दोस्त रिशू से ताकि तुम दोनों मुझे चोद सको. अपना फ्यूचर न देखूं.
मोनू: पर तुम तो रिशू के लंड की दीवानी हो.
रश्मि: हाँ हूँ. तो क्या हुआ. सेक्स अपनी जगह और प्यार अपनी जगह. अरे पता है मयंक की महीने की जितनी इनकम है न उतना लोग साल भर में नहीं कमाते और रही लंड की बात तो उसका लंड रिशू से इक्कीस ही है उन्नीस नहीं. समझा.
मोनू: तो क्या तुम उससे भी चुदवा चुकी हो.
रश्मि: अरे नहीं यार, उसको किस के आगे नहीं बढ़ने दिया कभी. वो चाहता तो बहुत था पर मैंने उससे साफ़ कह दिया की ये सब शादी के बाद. उसे मेरी शराफत पर पूरा भरोसा है. वैसे भी जहाँ शादी करनी हो वहां शरीफ बने रहना चाहिए. टीना ने एक बार बताया था उसका साइज़.
कहते हुए दीदी ने मेरा लंड बाहर निकाल कर मुह में ले लिया.
मोनू: आःह्ह दीदी. ऐसे ही चूसो. तो क्या टीना भी अपने भाई से चुद्वाती है जो उसे मयंक का साइज़ पता है.
रश्मि: ओफ्फो. अरे उसने एक बार उसे नहाते हुए देख लिया था. मूड ख़राब कर दिया तूने तो क्या तो क्या. अरे चोदना है तो बोल वरना मैं जा रही हूँ अपने बेड पर.
मैंने रश्मि दीदी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनकी चूंची दबाते हुए बोला, कहा जा रही हो दीदी. जब तक तुम्हारी शादी नहीं हो जाती रोज चोदुंगा पर जब तुम चली जाओगी तब पता नहीं मैं क्या करूंगा.
दीदी ने हँसते हुए मेरा लंड पकड़ लिया और बोली, अरे तब के लिए रिक्की है न. अभी ५-६ साल उसकी शादी नहीं होने वाली. तू उससे काम चला लेना. अब जल्दी स मुझे चोद फिर सन्डे जाकर रिक्की की चूत फाड़ देना. समझा. और दीदी अपने कपडे उतारने लगी. मैंने भी अपने कपडे उतारे और दीदी के ऊपर टूट पड़ा
मैं बिस्तर पर आकर घुटनों के बल बैठ गया और दीदी के बालों को पकड़ते हुए अपना लण्ड उनके मुंह में दे दिया..
दीदी ने भी लण्ड को हाथ से रगड़ते हुए चूसना शुरू कर दिया..
आअहह अहह अहह अहह अहह और ज़ोर से दीदी. आ आ आ आ आ पूरा अंदर लो.. . उफ़फ्फ़.. कहते हुए मैं दीदी के मुंह मे अपना लण्ड आगे पीछे करने लगा और बीच बीच में अपना हाथ पीछे करते हुए दीदी की पीठ सहलाने लगा.
फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर कर दिया.. लण्ड पर दीदी का पूरा थूक लगा हुआ था और चमक रहा था.. मैंने दीदी को घुटनों के बल बैठा दिया और दीदी के पीछे खुद घुटनों के बल बैठ गये और दीदी की चूत में लण्ड रगड़ने लगे..
दीदी आ आ आहह आह आह आ ह ह आ ह ह ह आअ ह ह आ आ आ आ आ आ आ की आवाजे करने लगीं..
मैंने एकदम से दीदी की कमर पकड़ते हुए एक ज़ोर का धक्का दिया..
दीदी के मुह से सिस्कारिया निकलने लगी आ आ ह ह आ ह आह आअ माह ह ह ह ह ह.. . मर र र र र र गई स स स स स स स स.. . नही ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई.. . आइया आ ह आहह आह आ.. .
मेरा पूरा लण्ड एक ही बार में मेरी दीदी की चूत के अंदर चला गया था.. मैंने लण्ड को बाहर निकाला और फिर से धक्का मारा.. फिर मैं धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करने लगे और अपने लण्ड को मेरी दीदी की चूत में पेलने लगा..
दीदी: आ अहह आ अहह अ ह अहह औह मोनू आह ह ओई ई ईई ई ई ह माआ अ ए या या माआ आ औहह ओफफ फफ फफ्फ़ ओफ फफ फफ्फ़ मा आआ..
मैंने धक्का मारते हुए दीदी से पुछा: क्यों दीदी मज़ा आ रहा है ना.. .
दीदी ने कहा: हाँ स स स स.. . बहुत मज़ाआआ आ रहा है स स स… आ ह हह आ आ.. और जोर से कर न
मैंने कहा: दीदी तुम इतना चुद चुकी हो फिर भी तुम्हारी चूत बहुत टाइट है… मज़ा आ जाता है जब भी तुम्हारी लेता हूँ. मेरी जान अब जब तक तेरी शादी नहीं होती तेरी हर रात को मैं तेरी सुहागरात बना दूंगा…
फिर मैं रफ़्तार बड़ा कर दीदी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. बीच बीच में मैं एक दो थप्पड़ मेरी दीदी के चूतड़ पर मारता जा रहा था.. उनके चूतड़ पर मेरे हाथ का निशान छप गया था.. दीदी की गाण्ड एक दम लाल हो चुकी थी..
मेरे हर धक्के से दीदी की चून्चिया आगे पीछे हो रही थी…
मैंने लगभग १५ मिनट तक दीदी को ऐसे ही चोदा और उसके बाद दीदी के चूत से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया फिर मैं दीदी की गाण्ड के पास आ गया और उनके छेद को फैला दिया और अपना लण्ड दीदी की गाण्ड के छेद पर रख दिया..
दीदी एक काम करो. हाथ पीछे करके अपने चूतड़ को फैला लो. मैंने दीदी को बोला
दीदी ने अपने दोनों हाथ पीछे कर दिए और चूतड़ को फैला लिया..
उनकी गाण्ड का छेद पूरा खुल गया..
अब मैंने बोला: छेद को ढीला छोड़ दो दीदी
फिर मैं ने दीदी के गाण्ड के छेद पर लण्ड सेट करके, हल्का झटका दिया और उनका टोपा दीदी की गाण्ड के छेद में “भच” से चला गया..
दीदी: इश्ह्ह स स स स स स स स स स.. . इयाः ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह.. . आ आ आआ आहह.. . प्लीज़ नही स स स स स स स स स..
और मैंने फिर से एक और धक्का मारा..
दीदी के मुँह से निकला: अआह बहन आह्ह चोद स स स आराम से इश्श स स स स स स स.. .
मैं हंस पड़ा और बोला: दीदी चुदती हुई औरत के मुँह से गालियाँ खाने में भी कितना मज़ा आता है.
मैंने कस के एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड दीदी की गाण्ड में चला गया..
मैंने अब दीदी से कहा: आह दीदी…अभी भी एक दम फ्रेश माल हो तुम अआह साला लग ही नहीं रहा की इतने लंड ले चुकी हो आह्ह्ह
दीदी: अहह माँह ह ह ह ह ह ह ह ह ह मार डाला तूने… हरामी…आराम से कर अब आअक आःह्ह
ठप ठप ठप ठप ठप.. . पट पट पट पट पट पट.. . से पूरा कमरा गूँज रहा था..
मैं ज़ोर ज़ोर से बड़ी बेरहमी से दीदी की गाण्ड मार रहा था.
कुछ आधे घंटे के बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और आ आ आ आ आ आ आ अहह… करते हुए दीदी की गाण्ड के अंदर ही अपना सारा माल निकाल दिया..

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