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UPDATE 94

उसकी नसीली आँखों में एक अजीब सी चाहत तैर रही थी, मानो कह रही हो कि आ जाओ और समा जाओ मुझमें अब और सब्र नही होता.

उसकी झील सी आँखों के पलकों पर चुंबन लेकर में बोला- तुम्हारा अंग-2 कितना हसीन है रेहाना, क्या इसे अपनी खुशी से मुझे सौंपना चाहोगी..?

आहह… मेरे दिलवर… ये तो कब्से आप में सामने को बेकरार है, अब और ना तरसाओ, समेट लो इसे अपनी बाहों में..!

फिर मैने देर नही की और उसके हसीन बदन को उपर से नीचे तक चूमता चला गया,

जब मैने उसकी चूत को उसकी सलवार के उपर से चूमा तो वो बैठ कर दोहरी हो गयी और मुझे खींच कर मेरे होठों पर टूट पड़ी.

होठ चूसने के साथ-2 मैने उसकी सलवार भी उतार दी, बिना पेंटी की उसकी छोटे-2 बालों वाली गुलाबी चूत देख कर मेरा लंड ठुमके लगाने लगा.

मैने अपने कपड़े भी उतार दिए और मात्र अंडरवेर में उसके दोनो टॅंगो के बीच आकर जम गया.

वो मेरी चौड़ी छाती देख कर एक बार फिर उठकर बैठ गयी और कस कर मेरे सीने से लिपट गयी. उसका उतावला पन देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी.

उसकी रसीली चूत को हाथ से सहला कर उसकी जांघों के नीचे हाथ ले जाकर उसकी कमर को उपर उठाया और अपनी जीभ को जैसे ही उसकी चूत के उपर फिराया, उसकी सिसकी फुट पड़ी, ना चाहते हुए उसके मुँह से एक आहह.. निकल गयी…!

आअहह…आशफ़ाक़…. ससिईइ…उफफफफ्फ़…प्लस्सस्स…उऊहह…हाईए…चतूऊ..ईससीई…

उसकी पवरोटी जैसी चूत को अपनी मुट्ठी में लेकर भींच दिया… उसकी कमर हवा में लहरा उठी और उसने पानी छोड़ दिया..

हाँफती हुई वो मेरे सीने से एक बार फिर लिपट गयी और मेरे लंड को मुट्ठी में लेकर ज़ोर से मसल दिया…!

आअहह… क्या करती हो… नाराज़ हो जाएगा ईए…!

होने दो मना लूँगी उस्सीए…!

मे – कैसे…, तो उसने फ़ौरन मेरा अंडरवेर उतार फेंका और मेरे लंड को मुँह में भरके चूसने लगी, और मेरी आँखों में देख कर इशारा किया मानो कह रही हो ऐसे…!

कुछ देर लंड चूसने से वो इतना कड़क हो गया मानो कोई स्टील की रोड हो, अब वो किसी कठोर से कठोर चीज़ में भी पार हो सकता था.

मैने रेहाना को लिटा दिया और उसकी चूत पर थूक लगा कर अपने मूसल को एक बार हाथ से सहलाया और उसकी चूत के छेद पर रख कर हल्का सा पुश किया.

रस से लबरेज़ चूत मेरे लंड के सुपाडे को गडप्प से निगल गयी. रेहाना की आँखें मज़े से बंद हो गयी, मैने कस कर एक धक्का लगाया.

उसके मुँह से एक कराह निकल पड़ी, मेरा तीन चौथाई लंड उसकी डेढ़ साल से भूखी चूत में समा गया. उसको दर्द होने लगा और कराह कर बोली-

प्लीज़ अशफ़ाक़ ! धीरीए… आअहह… दर्द हो रहा है.. थोड़ा आराम सीई….

मैने उसके होठ चूमते हुए एक और धक्का दे दिया और मेरा पूरा 8” लंबा लंड उसकी सन्करि चूत में फिट हो गया,

मज़े और दर्द के मिले जुले भाव उसके चेहरे पर साफ-साफ दिखाई दे रहे थे.

मैने उसकी चुचियों को मसलना शुरू कर दिया, उसकी मादक सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी लेकिन धीमे से, ताकि बाजू वाले रूम में सोई हुई उसकी अम्मी और छोटी बेहन ना सुन पाए…

जैसे-2 मेरे धक्के स्पीड पकड़ते जा रहे थे, उसकी सिसकियों की मात्रा भी बढ़ती जा रही थी,

अब वो भी नीचे से अपनी कमर उचका-2 कर पूरे मज़े लेकर चुद रही थी.

थोड़ी देर में ही उसकी रसभरी गागर छलक गयी, दो मिनट उसकी चूत में लंड डाले रहने के बाद मैने उसको अपने उपर बिठा लिया,

उसके गोल-मटोल चुचियाँ मेरी नज़रों के सामने थी उनको अपने दोनो हाथों में जो एक दम माप की थी लेकर मीजने लगा.

उसकी कमर उपर-नीचे हो रही थी, वो पूरी लंबाई के शॉट ले रही थी, पूरे लंड को सुपाडे तक बाहर लाती, फिर पूरा ले जाती…

कुछ देर तक ये चला, लेकिन उसकी ये कोशिश मेरे लौडूराम को रास नही आई, उसे तो कुछ बिस्फोटक चाहिए था,

सो उसको घोड़ी बना कर मैने लगाम अपने हाथ में ले ली और जो एक बार सरपट दौड़ाया,

वो घोड़ी की तरह हिन-हिनाने लगी, और अपनी गान्ड को मेरे मूसल पर पटक-2 कर चुदने लगी.

मेरी जांघे थप्प-2 उसके गोल सुडौल गान्ड पर थपकी देते हुए मधुर ताल दे रही थी.

आधे घंटे की धुआँधार चुदाई के बाद हम दोनो ही भरभरा कर जो बरसे, मानो बाढ़ ही आ गई थी,

उसकी जांघों से बहता हुआ रस बूँद-बूँद करके बिस्तर को गीला करने लगा, पूरे दो मिनट तक झड़ने के बाद वो पेट के बल बिस्तर पर पसर गयी, और में उसके उपर ही पड़ गया.

10 मिनट के बाद मैने अपना मूसल उसकी चूत से बाहर खींचा, एक पुच की आवाज़ आई और मे उसकी बगल में लेट गया,

उसकी गोल-2 सुंदर सी गान्ड को सहलाते हुए मैने उसे पुछा- रहना ! मज़ा आया…?

वो – बहुत..! इतना मज़ा तो मेरे शौहर के साथ भी कभी नही आया था, सच में. आप पता नही क्या हो..?

फिर उसने मुझे पुछा – आपको कैसा लगा मेरे साथ…?

मैने उसकी चुचि सहला कर कहा – तुम वाकाई में एक शानदार और खूबसूरत औरत हो, तुम्हारे साथ चुदाई में मुझे बहुत मज़ा आया…
कुछ देर ऐसी ही बातें करते रहे और एक दूसरे को गरम करते रहे,
धीरे-धीरे एक बार फिर वासना की खुमारी चढ़ने लगी, रहना इस लम्हे को खुलके जी लेना चाहती थी,

सो अपने बीते दिनों के गमों को बिस्तर के नीचे दबाकर मेरे साथ एक बार फिर खुलकर चुदाई का आनंद लूटने लगी….

उसको दो बार पूरी तरह संतुष्ट करने के बाद में अपने बिस्तेर पर आकर सो गया…!

अगली दिन मैने अमीना बी से कहा – बीबी मे चाहता हूँ, आपकी दोनो बेटियों को इस काबिल बनाया जाए कि वो अपनी हिफ़ाज़त खुद कर सकें.

अमीना- ये क्या बात हुई भला..? ये कैसे मुमकिन है कि कोई लड़की इतनी ताक़तवर हो जाए कि वो मर्दों से मुकाबला कर सके..?

मे – रज़िया सुल्तान का नाम सुना है आपने..?

अमीना – हां सुना तो है, पर वो तो एक सल्तनत की मल्लिका थी.

मे – तो क्या हुआ..? थी तो लड़की ही ना..! फिर कैसे उसने मर्दों पर हुकूमत की ? और भी बहुत से नाम हैं हिंदुओं के इतिहास में जहाँ औरतों ने वो काम किए, जिन्हें कोई मर्द कभी करने की सोच भी नही पाया.

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