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UPDATE 93

वो नज़रें झुकाए बैठी रही मे उसकी ओर देखता रहा फिर पहल करते हुए मैने कहा- तुम्हारे शौहर इस समय कहाँ हैं..?

मेरी बात सुनकर उसने झटके से मेरी तरफ देखा, और बोली – स्यालकोट की जैल में हैं..!

मे – कभी मिलने नही जाती हो उनसे..?

वो – गये थे एक दो बार, लेकिन वो मर्दुद मिलने ही नही देते..!

मे – तुम्हें अपने शौहर की याद तो आती होगी..!
मेरी बात सुन कर उसकी आँखें भर आई, और ना चाहते हुए उसकी रुलाई फुट पड़ी और रोते हुए बोली –

बहुत आती है, वो बहुत अच्छे और नेक इंसान थे, मुझे बहुत प्यार करते थे.

मैने उसे चुप कराते हुए उसे अपने कंधे से सटा लिया और उसकी पीठ पर प्यार से सहलाते हुए कहा- क्या अब भी तुम उनका इंतजार कर रही हो..?

वो – साँस हैं तब तक आस तो रहेगी. लेकिन अब लगता है कि हम कभी नही मिल पाएँगे, और सूबकती हुई मेरे सीने से लग कर रोने लगी.

उसकी बाहें मेरे इर्द-गिर्द कसने लगी थी.

मे – चुप हो जाओ रेहाना ! खुदा ने चाहा तो तुम दोनो ज़रूर एक होगे, और मे उसकी पीठ को सहलाते हुए उसकी कमर तक हाथ ले आया.

वो मेरे साथ और चिपक गयी और मेरे चेहरे की ओर देख कर बोली – खुदा अगर यही चाहता होता तो ऐसा होता ही क्यों..?

अपनी जान बचाना कोई गुनाह तो नही था, तो क्यों हुकूमत ने उन्हें जैल में डाला.

खुदा हर सच्चे इंसान का इम्तेहान लेता है, मैने उसे अपने से और सटाते हुए कहा –

अब उसकी कड़क, लेकिन मुलायम चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगी थी,

मेरा एक हाथ उसकी कमर के निचले हिस्से को सहला रहा था और दूसरा उसकी जांघों पर.

फिर मैने उसकी चिन को अपने हाथ से उपर उठा कर उसकी झील सी नीली आँखों में झाँकते हुए कहा- अगर मे ये कहूँ कि तुम दोनो ज़रूर एक होगे तो..?

वो – क्या ये मुमकिन हो सकता है..?

मे – तुम्हें यकीन है मुझ पर…?

पता नही उसको क्या हुआ..कि उसने मेरे होठों को चूम लिया और बोली- सच कहूँ तो कल की घटना के बाद से ही ना जाने क्यों ऐसा लगने लगा है, कि खुदा ने हमारी कुरबत दूर करने के लिए ही इस फरिस्ते को हमारे पास भेजा है.

मे – नही ! मे कोई फरिस्ता-वरिस्ता नही हूँ, और ना ही मैने कभी इन बातों पर यकीन किया है,

लेकिन हां ये हो सकता है कि शायद खुदा की यही मेर्जी रही हो कि मे तुम्हारी जैसी नेक और खूबसूरत औरत के कुछ काम आ सकूँ.

वो मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली- क्या मे खूबसूरत हूँ..?

मे – बहुत..! ये कहकर मैने उसके पतले रसीले होठों को चूम लिया.

वो भी यही चाहती थी, सो मेरा साथ चुंबन से देने लगी.

कुछ ही देर में चुंबन चुसाई में बदल गया, मेरा एक हाथ उसकी एक चुचि पर चला गया और उसे सहलाने लगा.

अभी और कुछ आगे हो पता कि तभी उसकी अम्मी ने आवाज़ दी, खाना तैयार है खा लो.

हम दोनो अलग हुए वासना की खुमारी उसकी आँखों में उतर आई थी, अनमने मन से हम उठकर खाना खाने के लिए अंदर चले गये….!

आधी रात को मुझे लगा कि कोई मेरे पास बैठा है, मैने आँखें खोल कर देखा तो रेहाना मेरे गाल पर हाथ रख कर सहला रही रही थी,

मुझे जागते देख उसने मुझे चुप रहने का इशारा किया और मेरा हाथ पकड़ कर उठने का इशारा किया.

वो मुझे अपने कमरे में ले आई, और गेट बंद करके मुझे पलग पर बिठा दिया और खुद मेरी गोद में बैठ गयी,

मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोली- अशफ़ाक़ साब ! आप किस तरह मेरे शौहर को जैल से निकालेंगे..?

मैने अपने दूसरे हाथ को उसकी कमर में लपेटते हुए कहा – अभी मे इस बाबत कुछ नही बता सकता, मुझे उस जैल का मुआयना करना होगा तभी कुछ कह पाउन्गा.

वैसे तुम्हारे शौहर का नाम क्या है..?

रहमत अली.. उसने बताया, फिर मैने उसके माल पुआ जैसे गाल पर किस करते हुए पुछा- उनकी कोई तस्वीर है तुम्हारे पास..?

हां है तो सही, हमारे निकाह की एक तस्वीर है मेरे पास उसने कहा.

मे – वो मुझे दे देना, पर मे कोई ये वादा नही कर सकता कि ये काम कब तक होगा..! लेकिन होगा ज़रूर ये मेरा वादा है तुमसे, चाहे इसके लिए मेरी जान ही क्यों ना चली जाए…!

उसने तुरंत मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिया.. और दबदबाई आँखों के साथ बोली – इस कीमत पर कतई नही..!

चाहे हम दुबारा ना मिलें लेकिन खुदा के लिए ऐसा मत करना, आपको खुदा का वास्ता.

मैने उसके होठों को अपने मुँह में लेकर चूस लिए और उसकी कठोर चुचियों को मसल्ते हुए कहा- ये नौबत नही आएगी रेहाना तुम बेफ़िक्रा रहो.

उसकी आहह.. निकल गयी और सिसकते हुए बोली – सीईइ.. आहह… वादा करो मुझसे… कि आप ऐसा कोई कदम नही उठाएँगे जिसमें आपकी जान जोखिम का ख़तरा हो.

मैने उसके कुर्ता को उतार कर एक ओर डाल दिया और उसके बिना ब्रा के गुलाबी रंगत लिए अनारों को चूमते हुए कहा- वादा मेरी जान ! आहह… सच में तुम कितनी हसीन हो, लेकिन तुम्हें भी मेरा साथ देना होगा..!

आहह.. सीयी…हहूउकुम्म्म.. करो मेरे दिलवर..! आपका हर हुकुम सर आँखों पर..!

उसकी गर्दन को चूमते हुए मैने कहा… तो फिर तुम्हें अपने आपको हर ख़तरे का मुकाबला करने के लिए अपने आपको तैयार करना होगा.

आहह… उफ़फ्फ़.. ये कैसे होगा..??

मे तैयार करूँगा तुम्हें, और उसको अपनी बाहों में लिटा कर उसके पेट को चूम लिया..!

तुम्हारा ये नाज़ुक बदन एक महीने में ही ऐसा हो जाएगा कि तुम किसी भी मर्द का सामना बड़ी आसानी से कर सकोगी..

ससिईइ…उउउहह… आअहह… क्या सच में ऐसा हो सकता है..?

अब मैने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी नाभि के चारों ओर अपनी उंगली को घुमाते हुए कहा- बिल्कुल ऐसा ही होगा..!

मेरे ऐसा करने से उसका पतला सा पेट थरथराने लगा…,

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