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Update 87

उधर जंगल में गोमेस के 5 आदमी एक टाइगर का पीछा कर रहे थे.

टाइगर जो कई बार उनकी गोलियों का निशाना बनते-2 बचा था लेकिन उनके हाथ नही आरहा था, अचानक भागते-2 टाइगर कहीं झाड़ियों में घुस गया और गायब हो गया.

वो लोग बंदूकें लिए उसको चारों ओर खोजने लगे, अचानक दो आदमी जो एक दिशा में बढ़ गये थे, उन्हें अपने पीछे कुछ हलचल सी सुनाई दी.

इससे पहले की वो पलट पाते, टाइगर ने उनके उपर छलान्ग लगा दी और देखते ही देखते उन दोनो को उसने चीर फाड़ डाला.

अब जो वो तीन लोग बचे थे, उन्हें उनकी चीखे सुनाई पड़ी, जब वो उधर उन्हें देखने आए और और जैसे ही अपने साथियों की छत-विच्छित लाशें देखी,
उनकी रूह फ़ना हो गयी, डर के मारे उनकी टाँगें काँपने लगी.

अभी वो वहाँ से निकलने की सोच ही रहे थे कि ना जाने कहाँ से टाइगर दहाड़ता हुआ निकला और उन पर छलान्ग लगा दी.

उन तीनों को अपनी बंदूक सीधी करने का भी समय नही मिला कि टाइगर उनके सर के उपर आ पहुँचा…

लेकिन इससे पहले कि वो उन तक पहुँचता…एक सनसनाता हुया भाला एक तरफ से आया और टाइगर के पेट को चीरता हुया निकल गया.

वो टाइगर वहीं ढेर हो गया. वो लोग भोंचक्के से उस टाइगर को देख ही रहे थे कि तभी पेड़ों से निकल कर आदिवासी भेषभूषा में एक व्यक्ति उन्हें अपनी तरफ आता दिखाई दिया.
उसके कंधे पर एक धनुष था और उसकी पीठ पर कुछ तीर बँधे थे.

उन लोगों ने उसका शुक्रिया अदा किया और उसे टाइगर के साथ-2 अपने सरदार गोमेस के पास ले गये.

जब गोमेस ने सुना कि किस तरह से उसने उनकी जान बचाई थी और टाइगर को मारा था, वो उससे बहुत प्रभावित हुआ और उसे अपने साथ काम करने के लिए पुछा.

पहले तो वो मना करता रहा, लेकिन ज़्यादा कहने पर वो मान गया.

जब गोमेस ने उससे उसका नाम पुछा तो उसने अपना नाम अंगद बिसला बताया.
…………………..
इधर प्रताप के घर नीरा ने अपने स्वाभाव और कामों से अपनी मालकिन को बहुत प्रभावित किया था, वो अब उस पर आँख बंद करके विश्वास करने लगी थी.

जैसा कि पहले भी लिखा जा चुका है कि नीरा एक सामान्य कद और रंग रूप की एक सुंदर सी लड़की थी,

उसकी सादगी और व्यवहार से रॉकी भी प्रभावित हुए बिना नही रह सका, एक दो मुलाक़ातों से ही वो उसकी ओर खिंचने लगा.

अब वो जानबूझ कर ऐसे मौके ढूंढता रहता जिससे नीरा उसके करीब आ सके.

लेकिन नीरा उसकी मंशा जान चुकी थी और उससे दूर रहने की कोशिश करती रहती थी.

ऐसे ही एक दिन नीरा किचेन में कुछ काम कर रही थी, उसकी मालकिन ने उसको आवाज़ देकर अपने कमरे में बुलाया तो वो दौड़ी हुई उनके पास जा रही थी,

इधर रॉकी उपर से धड़ाधड़ाता सीढ़ियाँ उतरता हुआ जैसे ही हॉल में पहुँचा कि नीरा से टकरा गया.

दोनो को ही ज़ोर दार झटका लगा और दोनो ही एक दूसरे को बचाने के चक्कर में गुथम गुत्था हुए ज़मीन पर पलटियाँ खाते चले गये.

जब वो रुके तो रॉकी नीचे था और नीरा उसके सीने पर पड़ी थी, दोनो ही एक दूसरे को जकड़े हुए थे.

कुछ देर तक यौंही एक दूसरे की आँखों में देखते हुए पड़े रहे, जब नीरा को होश आया तो वो हड़बड़ा कर उठने को हुई, लेकिन रॉकी उसको जकड़े रहा.

आग फूंस एक साथ हो तो आग भड़कना लाजिमी है, नीरा के मादक बदन के स्पर्श से रॉकी का पप्पू अकड़ने लगा.

उसके अकडे हुए पप्पू को जैसे ही नीरा ने अपनी मुनिया के उपर फील किया, वो शर्म के मारे पानी-पानी हो गयी और अपना मुँह एक तरफ को करके फुसफुसाई…

रॉकी बाबू छोड़िए मुझे..!

रॉकी ने उसे हड़बड़ा कर छोड़ दिया और वो दोनो एक दूसरे की ओर मुस्कराते हुए अपने-2 रास्ते चले गये.

बस्तर शहर का चेक नाका जो शहर से कांकेर जाने वाले रोड पर शहर से 1 किमी बाहर था, वहाँ एक सब इंस्पेक्टरर और 4 कोन्स्टेबल ड्यूटी पर मौजूद थे,

नाके से दक्षिण की तरफ एक कच्चा पथरीला रास्ता जंगल की ओर जाता है…

इसी रास्ते पर नाके से 1.5 किमी अंदर जंगल में इस समय 2 ट्रक खड़े हुए हैं जिनमें एक में चंदन की लकड़ी भरी हुई थी, जो तिरपाल से चारों ओर से पॅक था.

दूसरे ट्रक में जानवरों की खाल और दूसरी जंगल की दुर्लभ चीज़े जैसे हाथी दाँत, बारहसिंघा हिरण के सींग (हॉर्न) जो आमतौर पर अमीर लोगों के घरों की शोभायें बढ़ाती हैं.

दोनो ट्रको में 4-4 हथियार बंद आदमी बैठे हुए थे. खुद गोमेस इस डेलिवरी को देने के लिए साथ आया था.

ये उनकी अबतक की सबसे बड़ी डील थी…

कुच्छ देर में ही वहाँ प्रताप खांडेकर की गाड़ी आकर रुकती है,

उसके पीछे -2 एक मिनी ट्रक भी था, जिसमें आधुनिक राइफले और कयि ट्रंक (बक्से) कारतूसों से भरे हुए थे.

खांडेकर एक सूटकेस लेकर अपनी गाड़ी से नीचे उतारता है और उधर एक ट्रक में से गोमेस नीचे आता है और वो प्रताप की गाड़ी के पास पहुँचता है.

प्रताप गोमेस को वो सूटकेस पकड़ा देता है, और मिनी ट्रक की ओर इशारा करके बोलता है- लो गोमेस सौदे के मुताबिक अपना पैसा लो और ये ट्रक में तुमने जितना असलह माँगा था वो सब है.

गोमेस – तुम भी अपना समान चेक कर लियो. जो माँगा था वो सब लेके आया मे.

कुछ देर और इधर-उधर की बात करके गोमेस अपने आदमियों को ट्रक हॅंड ओवर करने को बोल देता है और वो प्रताप के आदमियों को ट्रक की चाबी पकड़ा कर सब लोग मिनी ट्रक में आकर बैठ जाते हैं.

गोमेस मिनी ट्रक लेकर अपने आदमियों के साथ जंगल की ओर बढ़ जाता है,

उधर प्रताप अपने आदमियों को ट्रक लेकर नाके की ओर बढ़ने का इशारा करके खुद गाड़ी लेकर नाके पर पहुँच जाता है.

अभी उसके वो ट्रक वहाँ नही पहुँचे थे कि तभी वहाँ रायगढ़ के एंपी साब पहुँचते हैं,

दोनो अपनी-2 गाड़ियों से उतर कर हाथ मिलाते हैं और आपस में बात-चीत करने लगते हैं.

तभी वो ट्रक भी वहाँ पहुँच जाते हैं और नाके को क्रॉस करने लगते हैं, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पोलीस वाले उनको रोकते हैं.

तभी वो एंपी महोदय अपना हाथ उठाकर उस सब इंस्पेक्टरर को इशारा करते हुए कहते हैं – जाने दो अपने ही ट्रक हैं.

पोलीस वाले बिना कोई चेकिंग किए ही उनको जाने देते हैं.
हथियारो से लदा वो मिनी ट्रक अभी वहाँ से कोई 2 किमी ही जंगल में गया होगा कि उसमें बैठा हुआ अंगद बिसला उसे रोकने का इशारा करता है.

ट्रक रोक कर गोमेस उससे पुछ्ता है, कि ट्रक क्यों रुकवाया तो बिसला बोलता है.

यहीं पास के जंगल मे मेरे कू कुछ काम है, वो निपटा के मे शाम तक तुम्हारे पास पहुँचता है.

ट्रक उसे उतर कर आगे बढ़ जाता है, अभी वो एक फरलॉंग ही पहुँच पाया होगा, कि एक जबरदस्त धमाके से जंगल दहल उठा, वो ट्रक हथियारों समेत उसमें मौजूद सभी लोगों की समाधि बन गया.

अंगद बिसला के चेहरे पर एक विषाक्त सी हसी तैर जाती है, और वो अपनी धुन में ही घने जंगल में विलुप्त हो जाता है…,

कुछ ही दूर चला होगा कि उसे उसका साथी दिखाई दिया, जिसके कंधे पर एक बॅग लटका हुआ था…

नज़दीक जाकर उसने उससे बॅग लेकर कुछ कपड़े निकाले और उन्हें पहन कर वो दोनो बहुत ही तेज़ी से रायगढ़ की तरफ जाने वाले रोड की तरफ लपके………

उधर नाके को पार कर वो दोनो ट्रक कांकेर होते हुए रायगढ़ की तरफ बढ़ चले, अभी वो 4-5 किमी ही पहुँचे होंगे कि रोड बड़े-2 पत्थरों से ब्लॉक हुआ मिला.

दोनो ट्रक खड़े हो गये और उनमें से एक-2 आदमी उतर कर उन पत्थरों को हटाने के लिए जैसे ही वहाँ पहुँचे और झुक कर पत्थर उठाने लगे,

कि तभी दो नकाब पॉश जिन्न की तरह वहाँ प्रगट हुए और उनकी खोपड़ी पर किसी बजनी चीज़ का प्रहार हुआ,

वो दोनो बेहोश होकर वहीं ढेर हो गये

जब उन ट्रक ड्राइवरों को जैसे ही ख़तरे का आभास हुआ वो ट्रक छोड़ कर सर पर पैर रख कर भाग खड़े हुए.

उन नकाब पोषों में से एक ने अपनी जेब से सेल फोन निकाला और किसी को फोन करने लगा.

आधे घंटे में ही वहाँ सिटी एसपी अपने दल बल के साथ आया और दोनो ट्रकों को अपने कब्ज़े में लेकर कोतवाली की तरफ हकवा दिए.

आनन फानन में ये खबर सुंदर चौधरी को मिल गयी, जब उसने सुना कि उसके माल के दोनो ट्रक पोलीस की हिरासत में हैं, तो वो बौखला उठा. सारा पैसा तो उसी का लगा हुआ था इस सब में.

नेता और अधिकारी तो सिर्फ़ अपना हिस्सा बाँटने आ जाते थे.

इस समय वो फोन पर खांडेकर को बुरी तरह लताड़ रहा था.

प्रताप खांडेकर पर अपना गुस्सा निकालने के बाद उसने एंपी को कॉल की और उसको किसी भी तरह अपने माल को पोलीस के चंगुल से निकाल कर लाने को बोला.

एंपी ने उसको आश्वासन दिया कि वो कुछ करता है.

अब एंपी का काफिला कोतवाली की तरफ बढ़ रहा था.
इधर एसपी ऑफीस में नाके की ड्यूटी पर तैनात उस सब इंस्पेक्टरर और कॉन्स्टेबल्स से पुछ ताछ चल रही थी.

जब उन्होने बताया कि हम लोग जैसे ही उन ट्रको को चेक करने वाले थे, कि एंपी साब वहाँ आ गये और हमें बिना चेकिंग के जाने देने के लिए बोला.

मामला एसपी की कुछ-2 समझ में आता जा रहा था, और वो सोच ही रहा था कि अभी तक कोई सिफारिशी फोन क्यों नही आया, कि तभी उसके फोन की घंटी बजने लगी.

एसपी ने लपक कर फोन उठाया, और हेलो बोलकर अपना परिचय दिया,

कॉलर – हेलो एसपी साब ! अभी कुछ देर पहले जो आपने ट्रक जप्त किए हैं उन्हें छुड़वाने की कार्यवाही तेज हो चुकी हैं.

ध्यान रहे ये मामला किसी भी सूरत में दबाना नही चाहिए.

एसपी- आप कॉन बोल रहे हो..?

कॉलर – मे वही हूँ जिसने ये ट्रक पकड़वाए हैं, और अब मे नही चाहूँगा कि हमारी मेहनत बेकार हो.

एंपी पहुँचने वाला ही होगा आपके पास.

एसपी – लेकिन अगर उपर से ज़्यादा प्रेशर आया तो मे कुछ नही कर पाउन्गा.

कॉलर – ये समझ लो एसपी! ये स्मगलिंग नकशालियों द्वारा हुई है, अब अगर जो भी कोई इसमें इन्वॉल्व है, उस पर सीधा देशद्रोह का केस डाला जा सकता है.

हमारे पास इस सब के पुख़्ता सबूत हैं. इस मामले को हम दबाने नही देंगे, और इतना बोलकर कॉल कट हो गयी.

अभी एसपी फोन रख कर चुका ही था की धड़ धड़ाते हुए एंपी महोदय उसके ऑफीस में घुसे.

एंपी – सुनो एसपी साब ! इन ट्रको में ऐसा कुछ ग़लत नही है, जब हमने इन्हें पास करवा दिया था तो फिर आपने क्यों पकड़ा..?

एसपी ने उसे समझाते हुए कहा- एंपी साब मे आपकी रिस्पेक्ट करता हूँ, इसलिए एक सलाह ज़रूर दूँगा, आप इस मामले से अपना हाथ खींच लीजिए वरना…!

एंपी भड़क कर बोला – वरना क्या एसपी..?

एसपी – वरना ! जिसने भी हमें खबर दी थी उसके पास इस बात के पुख़्ता सबूत हैं कि ये ट्रक नकशालियों के हैं,

अब अगर आपने इन्हें छुड़वाने की कोशिश की तो आपके उपर भी देशद्रोह का केस लग सकता है, अब आप खुद सोच लीजिए कि क्या करना चाहेंगे..?

एंपी – कॉन है वो..? किसने खबर दी आपको..?

एसपी – उसने अपना नाम नही बताया..! पर उसकी बातों से लग रहा था कि वो कोई छोटा-मोटा आदमी नही है, ये भी हो सकता है कि कोई ख़ुफ़िया विभाग का आदमी हो.

देशद्रोह का नाम सुनते ही एंपी की गान्ड फटकार हाथ में आ गयी .. और वो वहाँ से उल्टे पाँव लौट गया.

…………………

नीरा और रॉकी की प्रेम कहानी धीरे-2 आगे बढ़ रही थी, रॉकी को नीरा दुनिया की सबसे सुंदर लड़की लगने लगी थी.

अब वो हर संभव इस प्रयास में ही रहता था, कि किसी तरह नीरा उसके नज़दीक ही रहे.

लेकिन जैसे-2 वो उसके नज़दीक आने की कोशिश करता, नीरा उससे दूर चली जाती, उसे पता था कि रॉकी कैसे स्वभाव का लड़का है,

और वैसे भी अगर किसी को पता चला तो सब उसे ही दोष देंगे. ग़रीब की आज के जमाने में कॉन सुनता है.

ऐसे ही एक दिन जब सुबह वो उसको चाइ देने उसके रूम में गयी, छाई रख कर वो जाने के लिए पलटी ही थी कि रॉकी ने उसका हाथ पकड़ लिया.

उसने पलट कर रॉकी की तरफ देखा और उसके हाथ की कलाई को पकड़ कर अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली- रॉकी बाबू मेरा हाथ छोड़िए.

रॉकी – तुम मुझसे दूर क्यों भागना चाहती हो..? जबकि मे तुम्हारे नज़दीक आना चाहता हूँ.

नीरा – लेकिन क्यों..? क्यों आप मेरे नज़दीक आना चाहते हैं..,? आपको पता है कि मे एक ग़रीब बेसहारा लड़की आपकी नौकर हूँ फिर भी..?

रॉकी – क्योंकि तुम मुझे अच्छी लगती हो..!

नीरा – अच्छी लगती हूँ, तो क्या आप मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं..? मे कोई वस्तु तो नही कि आपको अच्छी लग गयी और आपकी हो गयी..?

रॉकी ने फ़ौरन उसका हाथ छोड़ दिया और बोला- मेरा कहने का मतलब था कि मे तुम्हें पसंद करने लगा हूँ, या शायद प्यार भी..!

तुम्हारी सादगी पर दिल आ गया है मेरा.

नीरा – शायद कल रात को ज़्यादा चढ़ा ली होगी आपने..! अभी तक उतरी नही है वरना इस तरह की बहकी-बहकी बातें ना करते.

रॉकी – तुम्हें मेरी बातों पर विश्वास नही है..? बोलो तुम क्या चाहती हो जिससे तुम्हें विश्वास हो..?

नीरा – देखिए ! मे एक ग़रीब, लाचार, बेसहारा लड़की हूँ, ये कभी भी संभव नही हो पाएगा.. और कॉन मानेगा इन बातों को..?

रॉकी – मे तुम्हें सहारा ही तो देना चाहता हूँ, और रही बात किसी के मानने ना मानने की तो मे किसी की परवाह नही करता.

नीरा – क्या अपने माता-पिता से बग़ावत करेंगे..?

रॉकी – मेरे मम्मी पापा मेरी कोई बात नही टालते, मुझे पता है, ये बात भी माननी ही पड़ेगी उनको.

तुम सिर्फ़ हां कहो ! क्या तुम्हें मेरा प्यार मंजूर है..?

नीरा – मेरे लिए आप क्या कर सकते हैं..?

रॉकी – तुम जो भी बोलो—

नीरा – ये शराब पीना और आवारागर्दि करना बंद कर दीजिए.. फिर मे आपको जबाब दूँगी, और इतना बोल कर वो उसके कमरे से चली गयी.

रॉकी बस उसे जाता हुआ देखता रहा…..

………….
इधर प्रताप & कंपनी इतनी बड़ी चपत लगने से तिलमिला उठे थे, यही नही उन्हें जैसे-तैसे करके अपने आप को बचाना भी भारी पड़ गया था.

लेकिन कहते हैं ना कि शेर को अगर इंसानी खून का चस्का लग जाए तो वो नरभक्षी हो जाता है, ऐसा ही कुछ हाल इन लोगों का हो चुका था.

अब हर संभव वो इस प्रयास में थे कि फिर से अपने इस कारोबार को कैसे खड़ा किया जाए.

गोमेस जैसा मोहरा ख़तम हो चुका था, इसी धुन की कड़ी में आज प्रताप एक छोटे से कस्बे में स्थित एक चर्च की सीढ़ियाँ चढ़ रहा था.

यहाँ का पादरी नकशालियों को हर संभव मदद करता था. कई विदेशी एनजीओ,स इनको आर्थिक मदद करते थे, साथ ही साथ ट्राइबल वेलफेर के नाम पर इनका पक्ष भी मजबूती से रखते थे.

चर्च में पहुँच कर प्रताप ने पादरी से मुलाकात की, अब वो दोनो आमने सामने बैठ कर बातें कर रहे थे.

प्रताप – फादर आपका वो मोहरा गोमेस तो पिट गया, अब क्या करें अपना तो साला धंधा ही चौपट होता जा रहा है.

पादरी – कोई बात नही मिस्टर. प्रताप, मोहरे तो होते ही पिटने के लिए हैं. हम आपको और भी अच्छा आदमी देगा, तुम उससे कुछ भी काम ले सकता है.

प्रताप – इसलिए तो मे आपके पास आया हूँ फादर, अब आप जल्दी से उसको मिलवाए.

पाद्री – वो थोड़ा टेडा आदमी है, आंड्रा के जंगलों से भाग कर इधर आया है कुछ दिन पहले ही, नेटवर्क बहुत अच्छा है उसका,

ख़तरनाक से ख़तरनाक काम को अंजाम दे सकता है, ऐसा आदमी है वो.

प्रताप – हम भी इस बार कुछ बड़ी दहशत पैदा करना चाहते हैं इलाक़े में जिससे कोई हमारे सामने खड़ा होने की जुर्रत ही ना कर सके.

पादरी – मे उसको तुम्हारे पास भेजेगा, उसका नाम रघुनाथ कुट्टी है, वो तुमसे तुम्हारे घर आके मिल लेगा, अभी वो यहाँ नही आ पाएगा. ओके अभी तुम बेफकर होकर जाओ.

प्रताप वहाँ से खुशी-2 लौट आया, और रास्ते में ही उसने चौधरी को खुशख़बरी भी दे डाली………………..

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कुछ दिनो से रॉकी के व्यवहार और रहन-सहन में काफ़ी तब्दीली आ चुकी थी, उसके माँ-बाप भी अपने बेटे में आए परिवर्तन से काफ़ी खुश थे.

अब वो समय पर घर आता जाता, रेग्युलर कॉलेज जाना, कभी शाम को लेट भी हुआ तो बड़े अच्छे मूड में होता.

आज एक महीने से उसने शराब को हाथ भी नही लगाया था.

उसमें आए परिवर्तन से नीरा बहुत प्रभावित हुई, उसे अब लगने लगा था कि रॉकी वाकई में उससे सच्चा प्यार करता है जो उसके कहने पर अपनी सारी ग़लत आदतें छोड़ रहा है.

उसी के चलते आज उसने रॉकी के लिए स्पेशल डिशस बनाई और रॉकी के कॉलेज जाने से पहले ही उसके रूम में लेकर पहुँची.

नाश्ते की खुश्बू से ही रॉकी का मूड बन गया था. नाश्ता टेबल पर रख कर नीरा ने रॉकी से कहा-

लीजिए रॉकी बाबू नाश्ता कर लीजिए.

रॉकी – आज तो बड़ी अच्छी सुगन्ध आ रही है नाश्ते से, कोई खास बात है आज..? लगता है कुछ स्पेशल बनाया है तुमने..?
नीरा – हां ! आज मे बहुत खुश हूँ, और उसी के चलते आज मैने आपके लिए स्पेशल नाश्ता बनाया है.

रॉकी – क्या हुआ..आज इतनी खुश क्यों हो..?

नीरा – आप तो मुझे प्यार करते हैं ना ! तो पता लगा लीजिए मेरी खुशी का राज..

रॉकी – कुछ देर सोच में पड़ गया, फिर जैसे ही उसके दिमाग़ में क्लिक हुआ, झट से उसने नीरा के हाथों को अपने हाथ में लिया और बोला-

सच नीरा तुमने मेरे प्यार को स्वीकार कर लिया.. बोलो यही बात है ना..!

नीरा ने अपनी नज़रें झुका कर सिर्फ़ हां में अपनी गर्दन हिला दी.

रॉकी ने झट से उसके हाथ चूम लिए, शर्म से नीरा का चेहरा दूसरी ओर घूम गया और वो मंद-2 मुस्कराने लगी.

ओह्ह्ह्ह… नीरा मे बता नही सकता कि, आज कितना खुश हूँ मे. सच में कब से इस बात का इंतेज़ार कर रहा था कि तुम कब मेरे प्यार को आक्सेप्ट करोगी.
आइ लव यू नीरा !

आइ लव यू टू रॉकी ब..बा..बुऊउ.. !

रॉकी बाबू नही जान… सिर्फ़ रॉकी..! सिर्फ़ तुम्हारा रॉकी, और उसने उसे अपने अंक में भर लिया, वो भी किसी छोटी बच्ची की तरह उसके सीने में समा गयी.

कितनी ही देर वो ऐसे एक दूसरे से चिपके खड़े रहे… जब रॉकी की माँ ने आवाज़ दी तब जाके उनकी तंद्रा टूटी.

हड़बड़ा कर नीरा नीचे की ओर भागी और रॉकी नाश्ते में जुट गया… आज वो बहुत खुश था, और इसी खुशी में गाता गुनगुनाता कॉलेज चला गया.

आज कॉलेज से लौटते समय वो एक ज्वेल्लरी शॉप से नीरा के लिए एक गिफ्ट लेना नही भुला और घर में घुसते ही उसकी आँखें उसे तलाश करने लगी.

नीरा उस समय उसकी माँ के पास बैठी थी, उसकी माँ रॉकी में आए बदलाव के बारे में ही चर्चा कर रही थी.

नीरा सब चुप-चाप सुनती जा रही थी, और मन ही मन सोच रही थी, कैसे उसके माँ बाप बेटे के सुधरने से खुश हैं, वो भी अब रॉकी से दूर रहना नही चाहती थी.

रॉकी जब नीरा को ढूंढता हुआ अपनी माँ के कमरे में पहुँचा तो वहाँ उसने नीरा को अपनी माँ से बातें करते हुए देखा, उसने दरवाजे से ही अपनी माँ को पुकारा तो उन्होने उसे अंदर बुला लिया-

आजा बेटा थोड़ा अपनी माँ के पास भी बैठ लिया कर, तो रॉकी आकर अपनी माँ के पास बैठ गया, माँ ने प्यार से अपने बेटे के माथे को चूमा और नीरा को संबोधित करके बोली-

नीरा तूने गौर किया है, आजकल रॉकी कितना बदल गया है, मैने जो सपना अपने बेटे को लेकर देखा था, अब वो पूरा होता नज़र आ रहा है.

नीरा – हां मालकिन ! आप सही कह रही हैं, रॉकी बाबू वाकई में बदल रहे हैं, और तिर्छि नज़र उसने रॉकी पर डाली जो अपनी माँ से नज़र बचा कर उसी को देख रहा था.

कुछ देर अपनी माँ के साथ बैठ कर वो बोला- माँ अब में चलता हूँ, चेंज करके मुझे अपना कोर्स रिविषन करना है, नीरा तुम मेरा खाना मेरे रूम में ही ले आना.

माँ – ठीक है, तू जा तब तक चेंज कर, नीरा तू भी जा और रॉकी को खाना खिला दे.

दोनो वहाँ से उठकर बाहर आ गये…..!

रॉकी अभी चेंज करके अपना बॅग अनपॅक कर ही रहा था कि नीरा उसका खाना लेकर उसके रूम में आ गयी, और उसने उसका खाना टेबल पर रख दिया. रॉकी ने तब तक गेट बंद कर दिया.

नीरा – अरे ! आपने गेट क्यों बंद किया..?

रॉकी – ताकि अपनी डार्लिंग को जी भरके देख सकूँ, ये मन बाबला कितने दिनों से तरस रहा था तुम्हारे समीप आने को.

फिर वो नीरा को घुमा कर उसके पीछे खड़ा हो गया और अपनी जेब से एक सोने की चैन निकाल कर उसने नीरा के गले में पहना दी.

नीरा – ये क्या है..? और उसको हाथ में लेकर देखने लगी.

रॉकी – ये हमारे प्यार की निशानी है, इसे स्वीकार करके मेरे प्यार को अपना लो नीरा.

नीरा – ये मे कैसे ले सकती हूँ आपसे ? किसी की नज़र पड़ गयी और किसी ने पुछा तो क्या जबाब दूँगी..?

रॉकी – कोई भी बहाना बना देना..! छोड़ो वो सब चिंता.. ये बताओ तुम्हें पसंद आया या नही.

नीरा – है तो बहुत अच्छा पर……

अभी वो कुछ और बोलती उससे पहले रॉकी ने उसके पतले-2 शुर्ख होठों पर अपने प्यासे होठ रख दिए और बड़े प्यार से उन्हें चूसने लगा.

नीरा ने कुछ देर तो कोई रिस्पोन्स नही किया, पर थी तो वो भी नव यौवना, कहाँ तक सबर कर पाती, वासना ने उसको भी अपने लपेटे में ले लिया और वो भी रॉकी का साथ देने लगी.

किस तोड़ते हुए नीरा ने कहा- अरे आपका खाना ठंडा हो रहा है, पहले इसको ख़तम करिए…

रॉकी ने उसकी कमर को अपने बाहों में लपेट कर उसको अपने से चिपकाते हुए कहा –

जब सामने ऐसे स्वादिष्ट पकवान हैं तो उनको छोड़ कर कॉन साला उस सदेले से खाने को खाना चाहेगा… मेरी जान.. और उसने फिर से उसके होठों को अपने मुँह में क़ैद कर लिया.

उसके दोनो हाथ उसकी गोल-2 गान्ड को मसल रहे थे, रॉकी का लंड अकड़ कर नीरा की नाभि में घुसा जा रहा था.

अब उसने नीरा को पलटा दिया और उसकी पीठ से चिपक कर अपने लंड को थोड़ा झुक कर उसकी मुलायम गान्ड की दरार में सेट कर दिया और उसके गोल-2 कच्चे अमरूदो को मसल्ने लगा.

नीरा भी आँखें बंद करके उसकी हरकतों का मज़ा ले रही थी.

रॉकी कभी उसकी गर्दन को चूमता, तो कभी उसके कान की लौ को मुँह में लेकर चाटने लगता जिससे नीरा अपनी सुध-बुध खोती जा रही थी.

अब रॉकी के सब्र का पैमाना छलकने लगा था, उसको अब हर हाल में उसको चोदना था सो उसने उसकी चोली के बटनों पर हाथ रख कर जैसे ही खोलना शुरू किया…

नीरा ने उसके हाथ पकड़ लिए और बोली- नही रॉकी इसके आगे नही.

रॉकी उसके प्रतिरोध को महज़ एक लड़की का दिखावा समझ रहा था, सो उसने उसके हाथों को अलग करके फिर खोलना शुरू किया..

अभी वो उपर का एक बटन ही खोल पाया था कि, नीरा झट से पलट गयी और रॉकी के दोनो हाथों को पकड़ कर रोक दिया.
रॉकी अवाक सा खड़ा नीरा के चेहरे की ओर देख रहा था, फिर कुछ देर बाद बोला- लेकिन क्यों नीरा..?

तुम्हें अभी भी मेरे प्यार पर भरोसा नही है..? तुम्हारे कहने से मैने अपने आप को बदल लिया, इससे बड़ा और कोई सबूत चाहिए तुम्हें मेरे प्यार का.

नीरा – प्यार में ज़रूरी नही कि ये सब ही हो तभी प्यार सच्चा माना जाए…

प्यार को प्यार ही रहने दो रॉकी बाबू, वासना में बहने मत दो. आप जो चाहते हैं वो वासना है.

रॉकी – लेकिन नीरा ! अब हम दोनो प्रेमी हैं, और प्रेमी अपने प्रेम में तन-मन न्योछावर कर देते हैं एक दूसरे पर..

नीरा – सच्चा प्रेम मन का होता है, तन जब एक हो जाते हैं तब मिलते हैं. इसलिए ये सब अब हम एक होंगे तभी संभव होगा.

इतना बोल कर वो उसके रूम से बाहर चली गयी और रॉकी अपना खड़ा लंड पकड़े, चूतिया की तरह गेट की ओर देखता ही रह गया.

रॉकी के दिमाग़ में विचारों का बवांडर सा चल रहा था. वो समझ नही पा रहा था कि उसने नीरा का कहा मान कर अपने को बदलने के लिए कितनी जद्दो जहद अपने दिमाग़ में झेली थी.

क्योंकि शराब और शबाब की लत इतनी आसानी से नही छूटती वो भी उसने छोड़ दी एक लड़की का प्यार पाने के लिए, और वो ही आज उसे खड़े लंड पर लात मार कर चली गयी.

वो अपने आप को मामू बनता महसूस कर रहा था.

वो मन ही मन नीरा को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगा.

साली अपने आप को हेमा मालिनी समझती है भोसड़ी की दो टके की नौकरानी.

अभी वो रॉकी को जानती नही है, सारा शहर जिससे डरता है उस रॉकी को ये दो टके की लौंडिया चूतिया बना के चली गयी.

रॉकी चाहता तो अपनी माँ को बोलकर नीरा को अभी घर से बाहर फिकवा सकता था, लेकिन उसने ऐसा नही किया, अब वो उसे इसी घर में रख कर नौकर और मालिक का फ़र्क महसूस कराना चाहता था.

उसने फ़ौरन आवाज़ देकर बहाने से नीरा को उपर आने को कहा, जैसे ही वो उसकी आवाज़ सुन कर उपर आई,

रॉकी ने रूम का गेट बंद कर दिया और नीरा की ओर बढ़ते हुए बोला-

साली दो टके की नौकर अपने आप को समझती क्या है तू, तेरी जैसी ना जाने कितनी इस लंड के नीचे से निकल चुकी हैं और तू मुझे ही लैला मजनू का पाठ पढ़ा रही थी, अब देख कैसे मे तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाता हूँ.

उसने झपट कर नीरा का हाथ पकड़ लिया और अपनी ओर झटका देकर उसे अपनी बाहों में कस लिया.

नीरा को ऐसी कुछ संभावना नही थी कि रॉकी उसके साथ ज़बरदस्ती भी कर सकता है, वो उससे छूटने का भरसक प्रयास करने लगी, लेकिन रॉकी के हाथों की मजबूत पकड़ से वो असफल होती जा रही थी.

वो चाहती तो चीख कर लोगों को इकट्ठा भी कर सकती थी, लेकिन उस सूरत में अगर रॉकी ने उल्टा उसी पर इल्ज़ाम लगा दिया तो शायद कोई भी उसकी बात पर विश्वास नही करता और उसे और ज़िल्लत उठानी पड़ती.

अपनी ग़रीबी के कारण ये सबक उसने अच्छे से सीख लिए थे.

अब उसके सामने रॉकी को सबक सिखाने के अलावा और कोई रास्ता नही बचा था, अब अरुण की दी हुई शिक्षा को काम में लाने का समय आ गया था.

नीरा ने अपनी दोनो हथेलियों को रॉकी की छाती से सटा कर पूरी ताक़त से उसके बंधन से अपने को मुक्त किया और दो कदम पीछे हट के खड़ी हो गयी.

रॉकी गुस्से से भुन्भुनाता हुआ उसको फिर से पकड़ने के लिए आगे बढ़ा कि तभी उसके गाल पर तडाक से नीरा का एक भरपूर थप्पड़ पड़ा,

एक बार को तो उसे अपना कान सुन्न पड़ता लगा, उसके कान में सीटियाँ सी बजने लगी.

गुस्से और ज़िल्लत के कारण उसका चेहरा कनों तक लाल हो गया और वो गुर्राते हुए नीरा की ओर झपटा- साली मदर्चोद अपने आप को सती सावित्री समझती है, अब में तेरे को कैसा सबक सिखाता हूँ देख.

अभी वो नीरा तक पहुँच भी नही पाया था, कि एक और जबरदस्त घूँसा उसकी कनपटी पर पड़ा,

उसको दिन में ही चाँद तारे नज़र आने लगे, फिर तो नीरा ने बस नही की और लात घूँसों से उसकी वो धुनाई की, कि उसके फरिश्ते कून्च कर गये.

जब रॉकी की विरोधक शक्ति भी जबाब दे गयी तो वो फुंफ़कार्ते हुए बोली- मुझे पता था रॉकी, साँप का संपोला ही हो सकता है,

उसको कितना ही प्यार से दूध पिलाओ वो काटता ही है. राक्षस के घर प्रहलाद पैदा कभी-2 ही हो सकते हैं, देशद्रोही बाप की नीच औलाद.

इतना बोलकर उसने रॉकी की दी हुई चैन को उतारकर उसके मुँह पर मारकर वो कमरे का गेट खोल कर बाहर चली गयी..

और पीछे छोड़ गयी एक गहन सन्नाटा जो अब रॉकी के मनो मस्तिस्क में व्याप्त हो चुका था.

वो अब उसके द्वारा कहे गये शब्दों के बारे में सोच रहा था.. बार-2 उसके वो शब्द किसी हथौड़े की तरह उसके दिमाग़ में पड़ रहे थे…

देशद्रोही….देशद्रोही…!!!

तो क्या उसका बाप एक देशद्रोही है..? नही..नही.. ये नही हो सकता… ये साली झूठ बोल रही है…

अभी वो आगे कुछ और सोच पाता, कि नीरा के शब्द किसी भाले की नोक की तरह फिर से उसके दिमाग़ में चुभने लगे…

एक साँप के संपोले को कितना ही दूध पिलाओ, वो काटता ही है, देशद्रोही बाप की नीच औलाद…. देशद्रोही…देशद्रोही…

रॉकी अपना सर पकड़ कर वहीं बैठ गया…उसके दिमाग़ में साय…साय करके विचारों की बवंडर सा चलने लगा…

अब वो नीरा से अपनी मार को तो भूल गया, और उसकी बातों में उलझ सा गया, फिर उसने एक निर्णय लिया कि अब वो इस बात की सच्चाई जानकार ही रहेगा….

इधर नीरा रॉकी को सबक सिखा कर धड़ धड़ाती हुई नीचे आई और अपनी मालकिन से बोली- मालकिन एक ज़रूरी काम आ गया है,

मे अपने घर जा रही हूँ कल तक वापस आ जाउन्गी, और उसकी पेर्मिशन लेकर वो उसके घर से निकल गयी….
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