Update 85
मेरे मन में जो था, वो मैने आपको बोल दिया, मानना ना मानना आपके हाथ में है…
मे उसकी बात सुन कर सोच में पड़ गया, वो जो कह रही थी वो व्यवहारिक बातें थी, जो हमने कभी सोची ही नही.
अब जब तक कोई योग्य साथी इसको मिल नही जाता, इसके शरीर की ज़रूरतों का पूरा होना भी ज़रूरी है.
कहीं ऐसा ना हो कि अपने शरीर की इक्षाओं के बशिभूत इसके कदम बहक जाएँ और हम अपने मिसन में ही फैल हो जायें.
एक निर्णय करके मे उसके करीब आया और उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर उसकी कजरारी आँखों में झाँकते हुए कहा – मे तुम्हारे विश्वास को टूटने नही दूँगा नीरा, ये कह कर मैने उसके माथे को चूम लिया.
उसने अपने दोनो बाजू मेरे इर्द-गिर्द लपेट दिए और मेरे चौड़े सीने में समा गयी.
मे भी उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगा, जब मेरे हाथ उसके नितंबों पर कसे तो उसने अपना कसाव और बढ़ा दिया मानो वो मुझमें समा जाना चाहती हो.
उसके शरीर का स्पर्श पाकर मेरा हेर भी अंगड़ाई लेने लगा और उसकी नाभि के उपर ठोकर मारने लगा.
जब नीरा को इसका आभास हुआ तो वो सिसक पड़ी और बोली- भैया जी ! मेरा शरीर जल रहा है, भगवान के लिए इसकी आग भुझा दो ना..!
मैने उसके कंधे पकड़ कर अलग किया और उसके होठों को चूमते हुए कहा – एक शर्त पर..!
वो – इसके बाद मुझे आपकी हर शर्त मंजूर होगी..!
मे – मुझे कोई लड़का तुम्हारे योग्य मिल गया तो तुम्हें उसके साथ शादी करनी पड़ेगी… बोलो मंजूर है.
वो – मुझे आप पर पूरा विश्वास है, आप मेरा भला ही चाहेंगे, मुझे आपकी ये शर्त मंजूर है.
विक्रम और रणवीर दूसरे कमरे में सो रहे थे, मे नीरा को लेकर उसके कमरे में आ गया और उसको अपनी गोद में लेकर बैठ गया.
वो किसी छोटी बच्ची की तरह मेरी गोद में बैठी थी.
नीरा इस समय चोली घाघरा में थी, उसकी चुनरी उतार कर पलंग पर एक तरफ फेंक दी, और उसके 32” की गोल-गोल चुचियों को सहलाने लगा.
मेरा लंड उसकी कसी हुई गान्ड में ठोकर लगा रहा था, नीरा की आँखें बंद को चुकी थी और वो मेरे गाल से अपना गाल रगड़ रही थी.
आज उसका सांवला रूप मुझे अत्यंत ही कामुक लग रहा था, पिछले कुछ महीनो से हमारे साथ रहकर उसका रूप निखर गया था.
कसरत करने से उसके शरीर के अंगों में एक परफेक्ट कटाव बन गये थे, जहाँ भी हाथ लगाओ बस वहीं से मादकता छलक्ने लगती थी.
मेरे हाथ उसके शरीर का नाप निकाल रहे थे और नीरा उसके सुखद अहसास में खो चुकी थी.
अब मैने उसकी चोली खोल कर एक ओर फेंक दी, बिना ब्रा के उसके गोल-2 सुडौल बूब, एक दम इलाहाबादी अमरूद जैसे लग रहे थे,
मैने उन्हें सहला कर नीरा को अपने सामने खड़ा किया और फिर उसका घाघरा भी खींच दिया.
अपना कुर्ता और शॉर्ट निकाल कर में सिर्फ़ अंडरवेर मे आ गया.
नीरा भी अब मात्र पेंटी में ही थी. पलंग पर बैठ कर मैने उसे अपनी गोद में अपनी तरफ मुँह करके बिठा लिया और उसके होठों को चूसने लगा.
वो भी मेरा भरपूर सहयोग दे रही थी, होंठ चूस्ते हुए, मे उसकी कठोर लेकिन मक्खन जैसी मुलायम चुचियों को मसलता जा रहा था.
उत्तेजना में वो मेरे लंड पर अपनी कमर हिला-हिला कर चूत को रगड़ने लगी.
उसकी पेंटी चूत रस से गीली हो चुकी थी, जो अब मेरे अंडरवेर को भी गीला करने लगी.
मैने उसके होंठों को छोड़ कर उसकी चुचियों को चूसने लगा और एक हाथ से मसलता भी जा रहा था, मटर के दाने के बराबर के उसके निपल कड़क होकर कंचे जैसे हो गये, जिनको अपने दाँतों में लेकर हल्के से काट लिया.
आआईयईई…. बाबू…काटो..नहिी… आअहह… चूसो…और जॉरीए सीईए..
उसकी कमर को साइड में पकड़ कर मैने उसे उपर को उठाया और उसके पेट को चाटने लगा,
फिर उसकी नाभि में अपनी जीभ डालकर जैसे ही घुमाई… वो पीछे को बेंड होती चली गयी और मेरे हाथों की पकड़ में झूल गयी…
नाभि के चारों तरह जीभ की छुअन से उसका बदन थर थराने लगा… और वो मेरे हाथों की गिरफ़्त में किसी नागिन की तरह लहराने लगी…
फिर मैने उसको नीचे उतार दिया और अपना अंडरवेर निकाल कर अलग किया,
अपने सख़्त कड़क लंड जो अब एक स्टील रोड की तरह एक दम सीधा खड़ा था, मसल्ते हुए मैने उसके मुँह के सामने लहरा दिया.
उसने मेरे चेहरे की तरफ सवालिया नज़रों से देखा…
इसको अपने मुँह में लेकर चूस नीरा, जब तू इसे प्यार देगी, तो ये भी तेरी मुनिया की अच्छे से सेवा करेगा ना… !
वो आश्चर्यचकित होकेर बोली – क्या इसको मुँह में भी लिया जाता है..?
मैने जब हां में अपना सर हिलाया, तो वो अपने पंजों पर बैठ गयी और मेरे हथियार को हाथ में लेकर सहलाने लगी,
उसकी स्किन को आगे-पीछे करके सुपाडे को खोल कर अजीब सी नज़रों से देखने लगी.
लाल-लाल सेब जैसा चमकदार सुपाडा जब उसने अपनी जीभ की नोक से छुआ, तो मेरी आँखें बंद हो गयी और ना चाहते हुए मेरे मुँह से एक आआहह… निकल गयी,
आअहह…. नीरा… मेरी जाअंन्न…. चुसले ईसीए.. और फिर मैने उसके सर को
पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया, वो सरसराता हुआ, उसके गले में जाकर फँस गया.
उसके मुँह से गूऊन…गूऊन की आवाज़ें आने लगी, जब उसकी आँखें उबलने लगी, तो मैने उसके सर को छोड़ दिया.
वो खों-खों करके खांसने लगी और मेरी ओर देख कर नाराज़गी वाले भाव से बोली- ऐसा क्यों किया आपने..? मेरी तो दम ही निकल गयी होती.
मे – सॉरी बेबी..! ग़लती हो गयी, अब आराम से चूसो इसे .. शाबास..!
फिर वो उसे आधा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मेरे हिलते हुए टट्टों को उसने अपने एक हाथ से सहलाया, तो मेरी उत्तेजना और ज़्यादा बढ़ने लगी…
अब मुझे लगने लगा कि अब और कंट्रोल नही हो पाएगा मुझसे, तो फिर से उसके मुँह को दबा दिया अपने लंड पर और उसके मुँह में ही अपनी पिचकारी छोड़ दी.
उसने इससे पहले कभी वीर्य का स्वाद नही लिया था, सो वो उसे बाहर निकालने लगी, तो मैने उसका मुँह दबा कर कहा- पी जा नीरा रानी इसे, टॉनिक है तेरे लिए.
अब मैने उसे पलंग पर लिटा दिया और उसकी कच्छि भी उतार कर एक ओर फेंक दी.
छोटे-2 बालों से भरी उसकी साँवली चूत देख कर मेरा हाल ही में झडा लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा.
मैने अपनी एक उंगली को मुँह में डाल कर उसको थूक से गीला किया और उसकी रस बहाती चूत में डाल दी…
वो ससिईईईई….कारीई…भरने लगी.. !
उसकी टाँगों को चौड़ा करके मे उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा, उसकी चूत रस का नमकीन सा स्वाद मुझे अच्छा लगा.
अब में उसकी चूत को जीभ की नोक से कुरेदने लगा और एक उंगली उसके छेद में डालकर अंदर बाहर करता रहा.
वो इस दोहरे हमले को ज़्यादा देर झेल ना सकी, और जैसे ही मेरी उंगली ने उसके जी पॉइंट को मसला, वो अपनी कमर को हवा में लहराते हुए झड़ने लगी.
हम दोनो फिर से एक दूसरे के होंठ चूसने लगे, और अपनी जीभ एक दूसरे से भिड़ा दी, उसकी चूत के रस का स्वाद और मेरे लंड के रस का स्वाद लार के माध्यम से एक दूसरे के मुँह में घुलने लगा.
उसको भी इस खेल में मज़ा आने लगा था…हम दोनो के शरीर कामोत्तेजना से दहकने लगे थे…
फिर मैने अपने से अलग करके, उसे पलग पर लिटा दिया और उसकी गान्ड के नीचे एक तकिया रख कर उसे उँचा किया,
फिर अपना लंड उसकी चूत जो अब बिल्कुल स्वस्थ हो चुकी थी और लंड लेने के लिए तड़प रही थी, उसके छेद पर रखा और एक करारा सा झटका अपनी कमर को दिया…
आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में सरक गया…
उसके मुँह से एक जोरदार कराह निकल पड़ी…
आआहह….. धीरे…बबुऊुज्जिि.. दर्द होता है… हआइई…माआ..
अब मैने साथ साथ उसकी चुचियों को भी मसला, और एक और धक्का लगा दिया, पूरा लंड उसकी चूत में समा गया…!
दर्द और उत्तेजना में उसकी आँखें बंद हो गयी.., ट्रीटमेंट से उसकी चूत एकदम फिर से कोरी जैसी हो गयी थी, जिससे मेरा लंड उसमें एकदम कस सा गया था…
मैने धीरे-2 लंड को अंदर – बाहर करना शुरू कर दिया, कुछ देर में ही उसकी कमर झोटे देने लगी और वो मेरे धक्कों का साथ अपनी कमर उचका-2 कर देने लगी.
ससिईइ…आआअहह…और जॉरीए…सी…भैईयजीीीइ….उफ़फ्फ़…बहुत..अच्छाअ..लग.. रहाआ.. हाईईइ…हाहह… उऊहह…
मेरे धक्कों की स्पीड तेज..और..तेज.. होती जा रही थी… इस बीच वो एक बार झड चुकी थी, लेकिन मुझे अभी समय लगाना था.
फिर मैने उसको उठा के घुटनों के बल निहुरा दिया, अब वो मोरनी की तरह मेरी ओर गान्ड करके निहुर गयी..
मैने अपने हाथ पर थूक लेके अपने लंड को चुपडा, और उसकी गीली चूत पर रख कर पीछे से उसके छेद में डाल दिया.
आअहह….ससुउुउउ…हहिईीईई…. जॉरीए सी नहिी…
लेकिन अब मेरे उपर उसकी आहों का कोई असर नही होने वाला था, अपनी उत्तेजना में अपना लंड उसकी चूत में पेलता ही गया और जड़ तक डाल कर धक्के मारने लगा.
ढप्प-धप्प, फूच-फूच का मधुर संगीत कमरे में गूँज रहा था, उसको भी फिर से मज़ा आने लगा था सो वो भी अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर पटकने लगी.
मेरे धक्कों की रफ़्तार इतनी तेज और तीव्र हो गयी, कि नीरा जैसी कम उमरा और सख़्त जान लड़की भी हाए-हाए करने लगी, उसका शरीर इतनी तेज़ी से हिल रहा था कि उसको भान ही नही हो रहा था कि वो कब आगे को गयी और कब पीछे को आई.
20-25 मिनट की धुनाई के बाद मे भरभरा कर उसकी चूत में झड गया, और उसकी पीठ पर लड़ कर लेट गया,
मेरे वीर्य की गर्मी पाकर उसकी झड़ी हुई मुनिया फिर एक बार पानी छोड़ने पर मजबूर हो गयी…,
वो बहुत देर तक अपना सर हवा में उठा कर झड़ती रही.
जब उससे मेरा भार सहना मुश्किल हो गया तो वो भी बिस्तर पर पेट के बल पसर गयी.
कुछ देर ऐसे पड़े रहने के बाद में उसके साइड में पलट गया, वो ऐसे ही पड़ी रही और मे उसकी पीठ पर हाथ रखकर लेट गया.
तूफान गुजर गया था, और उसके बाद की पूर्ण शांति व्याप्त हो गयी थी.
सुबह जब आँख खुली तो हम एक दूसरे की बाहों में थे.
वो अभी तक सो रही थी, सोती हुई बड़ी मासूम सी परी सी मुझे लगी, जिसे देख कर मेरे अंदर से उसके लिए प्रेम उमड़ पड़ा और मैने उसके होठों को चूम लिया.
चुंबन के अहसास से उसकी नींद टूट गयी, और मेरे गले से लिपट कर सूबकने लगी.
मे – क्या हुआ नीरा, रो क्यों रही हो, कुछ ग़लत हो गया क्या हमसे.
वो – नही भैया जी खुशी में मैं अपने आपको रोक नही पाई और रुलाई फुट पड़ी.
कल रात मैने जाना कि सच्चा सुख क्या होता है. आप सच में अपने साथी का बहुत ख्याल करते हो.
अब मे आपसे कभी कुछ नही माँगूंगी, अगर आप अपनी इच्छा से मुझे ये सुख फिर से देंगे तो मे समझूंगी कि आप मेरी इक्षाओं का ध्यान रखते हैं.
मैने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा – अरे ये क्या बात हुई..? जब तेरा मन करे आ जाना मेरे पास, हिच-किचाना नही.
इतना सुन कर वो खुश हो गयी, और मेरे गाल पर किस कर लिया.
फिर हम दोनो उठ गये और नित्य करम में जुट गये.
फ्रेश होकर उसने किचन संभाला, और हमारे लिए नाश्ता तैयार करने लगी…
हम तीनों को चाय नाश्ता करवा कर और खुद करके नीरा अपने मिसन की पर जाने के लिए तैयार हो गयी…
मैने उसके माथे को चूमकर उसका हौसला अफजाई किया, और कहा – तू फिकर मत करना, जब भी तुझे कुछ लगे कि कोई प्राब्लम हो सकती है, बस एक मिस्कल्ल कर देना…
वैसे हम तेरे आस-पास ही रहेंगे… उसने अपनी चमकती आँखों से हामी भरी और चल दी प्रताप के घर की ओर…
उसकी आँखों की चमक देखकर में पूर्ण अस्वस्त हो गया था, कि हमारा ये मिसन भी जल्दी ही पूरा होगा…… !
प्रताप खांडेकर के घर में और भी कई नौकर, नौकरानिया थीं.
लेकिन नीरा के द्वारा निस्वार्थ भाव से की गयी रॉकी की मदद की वजह से उनकी पत्नी राम दुलारी देवी ने उसको अपनी खास नौकरानी बना लिया.
नीरा अपनी बगल में एक पोटली दबाए जैसे ही उनके घर पहुँची, राम दुलारी लपक कर उसके पास आई और बड़े अप्नत्व के साथ बोली- आ गयी बेटी..!
नीरा – जी ! आपने इतने अधिकार से बोला था तो मुझे तो आना ही था.
रोकी की माँ – अच्छा किया, अब आज से तुम मेरी और रॉकी के पापा की खास सेवा में ही रहना, ठीक है, वाकी के कामों के लिए दूसरे नौकर हैं.
नीरा- जी ! मालकिन जैसी आपकी आग्या.
रोकी की माँ – अब तुम जाओ और एक नौकरानी को बुला कर कहा, इसको अपने बगल वाले कमरे में पहुँचा दो, अपना समान उसमें रख लेना, आज से वहीं रहना.
नीरा उस नौकरानी के साथ उसके पीछे-2 चल दी.
रॉकी का नशा 10 बजे जाके ठंडा हुआ, जब उसकी आँख खुली तो उसे अपने पूरे बदन में दर्द की एक लहर सी उठी, और उसके मुँह से कराह निकल गयी.
जैसे-तैसे वो अपने पलंग पर से उठ कर बैठ गया, उसका सर दर्द से फटा जा रहा था. अपने सर को हाथों में थाम कर बैठ गया.
जब उसको रात हुई घटना याद आई तो उसके दिमाग़ में पूरी रील घाम गयी.
याद करके उसके शरीर में उत्तेजना और लाचारी के मिले-जुले भाव पैदा होने लगे जिसके कारण उसके सर में और तेज दर्द होने लगा और ना चाहते हुए उसके मुँह से एक चीख उबल पड़ी…माआ…!
उसकी ये चीख हॉल में बैठी उसकी माँ और नीरा को भी सुनाई दी, और वो दोनो उसके कमरे की ओर लपकी.
दरवाजे में घुसते ही उसकी माँ बोली- क्या हुआ बेटा..?
रॉकी – मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है, ऐसा लग रहा है कि ये फटेगा क्या.
रोकी की माँ – नीरा से बेटी जा जाके बॉम तो ले आ.
नीरा दौड़ी-2 नीचे गयी और 5 मिनट बाद बॉम के साथ एक ग्लास नीबू पानी का ले आई.
नीरा – लीजिए पहले रॉकी बाबू ये नीबू पानी पी लीजिए फिर बॉम लगा देती हूँ आपके.
वो पहले उसे देखता रहा, फिर उसके हाथ से नीबू पानी का ग्लास लेकर एक ही साँस में खाली कर दिया.
पानी पीते ही उसे कुछ राहत महसूस हुई, तो उसने अपनी माँ से नीरा के बारे में पुछा,
जब उसने बताया कि कैसे वो उसे अर्ध बेहोसी की हालत में घर लेके आई तो उसकी नेक नीयती को देख कर हमने इसे काम पर रख लिया है.
नीरा उसके सर पर बॉम से मालिश कर रही थी, नीबू पानी का असर और बॉम की मालिश से उसका दर्द गायब हो गया.
रॉकी – थॅंक्स नीरा ! तुम्हारे हाथों में तो जादू है, मेरा दर्द गायब हो गया.
नीरा – बाबूजी ! ये नीबू पानी का जादू है, अक्सर रात को शराब ज़्यादा पीने से सर पर चढ़ जाती है, तो इसको पीने से अच्छा होता है.
वैसे आप इतनी बुरी चीज़ को पीते ही क्यों हैं..?
उसके इस तरह से पुछने से रॉकी खामोश रह गया, और उसकी माँ नीरा को प्रशन्शा भरी नज़रों से देखते हुए बोली – बेटा ये बच्ची ठीक ही कह रही है, क्यों तू ऐसी वैसी हरकतें करता रहता है.
पता है तेरी इन आदतों की वजह से तेरे पापा कितने दुखी होते हैं..? छोड़ क्यों नही देता ये सब..?
रॉकी – वो..वो.. माँ… मे कोशिश करूँगा..!
नीरा थोड़ी देर उसके सर की मालिश करती रही और फिर चली गयी.
रॉकी अब नीरा के बारे में सोच रहा था, क्यों इस लड़की ने उसकी मदद की और अभी जो उसने उसकी सेवा की ये सब बातें सोचते-2 उसके मन में नीरा के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर सा बनने लगा.
फिर वो अपने विचारों को झटक कर उठा और फ्रेश होने चला गया….!

