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Update 83

ट्रिशा को बेड पर लिटाकर मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और बेड पर छलान्ग लगा दी…

ट्रिशा अभी भी वाइट कलर की ब्रा और पेंटी में थी, मैने उसे अपने उपर लेलिया…

वैसे भी शुरू से ही उसे मेरी सवारी करने में ज़्यादा मज़ा आता था, ट्रिशा के एक्सप्रेशन बता रहे थे, कि वो सेक्स के लिए कितनी उतावली हो रही थी…

इधर मे भी तो कई महीनों से रुका पड़ा था…

मैने उसे खुली छूट दे दी, जो उसके जी में आए वैसे करे…

तो कुछ देर तक वो अपनी मुनिया को पेंटी के उपर से ही मेरे लंड पर रगड़ती रही,

मैने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा को खोल दिया, और उसके कसे हुए अनारों को अपनी मुट्ठी में कसकर मसल दिया…

आअहह………ससिईईईईईईईईईईईई….जानुउऊउउ….और ज़ॉर्सीईए…मसालूओ…इन्हीन्णन्न्..बहुत तंग करते हैं… आपकी याद में…

उसने झुक कर मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया… मैं उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसके मस्त कसे हुए नितंबों को मसल्ने लगा…

ट्रिशा की पेंटी अब गीली होने लगी थी, सो उसने उसे निकाल फेंका, और अपनी कसी हुई मुनिया के होठों को फैलाकर मेरे लंड पर बैठती चली गयी…

ट्रिशा ने अपने होठों को कसकर बंद कर लिया, वो मीठे-2 दर्द को पीते हुए धीरे-2 करके मेरे पूरे साडे 8 इंच के सोट को निगल गयी…

कुछ देर वो उसे अपनी बच्चे दानी के मुँह तक फील करके बैठी रही, फिर मैने उसके कुल्हों पर थपकी दी, तो मानो वो नींद से जागी हो,

और मुस्करा कर अपनी कमर को जुम्बिश देते हुए बोली – आअहह… जानू, बहुत बड़ा है आपका, मेरे अंदर तक पहुँच रहा है…

सस्सिईईई….. मेरे बलम मुझे जल्दी से माँ बना दो…और सिसकते हुए वो अपनी गान्ड को उपर नीचे करने लगी…

मेरा लंड उसकी चूत में एकदम फूल चुका था, जो ट्रिशा की कसी हुई मुनिया को जबदस्ती चौड़ा किए हुए था…

मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, अब मेरे लंड का काम ट्रिशा के हल्के-फुल्के धक्कों से चलने वाला नही था,

सो उसकी कमर में अपने हाथों का सहारा देकर नीचे लिया, और उसकी टाँगों को पेट से सटा कर जबरदस्त धक्कों से उसकी चुदाई करने लगा…

ट्रिशा जल्दी ही पानी छोड़ गयी, लेकिन मेरा अभी आधा सफ़र ही तय हुआ था…

कुछ देर उसे मेरे धक्कों से परेशानी हुई, लेकिन जल्दी ही वो फिर से लय में आ गई…

और अंत में मैने एक हेलिकॉप्टर शॉट लगाकर अपनी पिचकारी उसकी बच्चेदानी में छोड़ दी, जिसकी गर्मी पाकर वो फिर से एक बार भल्भलाकर झड़ने लगी…

कितनी ही देर तक में उसके अंदर फाइरिंग करता रहा फिर उसके बगल में आकर उसे सीधे करवट लिटा दिया…

एक घंटे तक वो यौंही पड़ी रही, थकान से चूर…

कुछ देर बाद फ्रेश होकर एक बार फिर एक दूसरे में खो गये…!

शाम ढले तक हम दोनो ही अपने मनमाने ढंग से अपनी प्यास बुझाते रहे, ट्रिशा इस खेल में जल्दी पस्त हो जाती थी…

दिन ढले हम फ्रेश होकर बाहर हॉल में आ गये, वो किचेन में चाय बनाने चली गयी, मैने टीवी ऑन कर लिया…

हम दोनो अभी टीवी देखते हुए चाय की चुस्कियाँ ले ही रहे थे, कि तभी डोर बेल बजने लगी..

ट्रिशा ने उठकर गेट खोला, और जैसे ही उसकी नज़र आनेवाले पर पड़ी… तुउुउउ………चीखते हुए वो उसके गले से लिपट गयी….

सामने दरवाजे पर निशा अपने पति के साथ खड़ी थी, राहुल उसका पति, जो ऋषभ के साथ ही जॉब करता था, और उसी ने ये रिश्ता करवाया था…

राहुल एक मध्यम कद काठी का व्यक्ति था, चाल ढाल से ही थोड़ा दब्बु किस्म का लगता था…

ट्रिशा दोनो को लेकर अंदर आई, राहुल के साथ मे पहली बार मिल रहा था, उसने हाथ जोड़कर मुझसे नमस्ते किया, जबाब मे मैने उसे अपने गले से लगा लिया…

निशा मुझसे लिपटने के लिए लपकी, लेकिन मैने इशारे से उसे रोक दिया…

एक दूसरे के हाल चाल जाने, फिर उन दोनों को एक अलग कमरे में पहुँचा कर ट्रिश मेरे पास आकर बैठ गयी…

मैने ट्रिशा को ऐसे ही बोल दिया – मुझे लगता है, राहुल कुछ दब्बु टाइप का लड़का है… निशा इसे अपनी उंगलियों पर नचाती होगी..

वो मेरी तरफ गौर से देखते हुए बोली – आपको कैसे लगा कि वो उसे नचाती होगी…

मे – बस उसकी बॉडी लॅंग्वेज से लगा मुझे, विश्वास ना हो तो निशा को पुच्छ के देख लेना… वैसे तुम किस तरह की पोलीस ऑफीसर हो, आदमी को देख कर उसका नेचर नही जान सकती..

ट्रिशा – सच कहूँ तो मुझे भी ऐसा लगा, लेकिन मैने इस बात पर ज़्यादा विचार नही किया…

अभी हम ये सब बातें कर ही रहे थे, कि वो दोनो चेंज करके हॉल में आ गये,

मे राहुल से उसके काम धंधे के बारे में पुच्छने लगा, उधर वो दोनो बहनें आपस में बातें करती रही,

रात का खाना हमने बाहर किसी अच्छे से होटेल में खाया….!

उस रात हम दोनो पति पत्नी, एक राउंड गरमा गरम चुदाई करके एक दूसरे की बाहों में लिपटे पड़े थे,

अभी कोई 12 बजे का वक़्त हुआ होगा, कि हमारे रूम के गेट पर हल्की सी दस्तक हुई…

हम दोनो की नज़रें आपस में टकराई, फिर मैने अपना अंडरवेर पहना, और गाउन डालकर उसकी डोरी बाँधते हुए डोर की तरफ बढ़ गया…

ट्रिशा ने अपने नंगे बदन पर बेडशीट डाल ली…

मैने जैसे ही अपने बेडरूम का गेट खोला… सामने का नज़ारा देख कर हम दोनो का ही मुँह भाड़ सा खुला रहा गया…!

निशा इस समय एक बहुत ही झीना सा शॉर्ट गाउन डाले हुए दरवाजे पर खड़ी थी, जिसमे से उसके बदन की छटा साफ-साफ दिखाई दे रही थी,

उसके दशहरी आम, उनके सिरे पर लगे किस्मिष के दाने जैसे उसके निपल, एक दम साफ दृष्टिगोचर हो रहे थे,

नीचे वो एक बहुत सेक्सी सी लिंगरी पहने हुए थी,
सामने निशा को इस रूप में देखकर ट्रिशा भी बेडशीट को अपने उपर खींचते हुए बैठने पर मजबूर हो गयी…!

निशा के इस जान मारु रूप को देख कर मेरे लंड ने एक जबरदस्त ठोकर अंडरवेर के अंदर मारी…!

निशा मेरी आँखों में झाँकते हुए मंद-मंद मुस्करा रही थी…

मेरे सीने पर एक हाथ रख कर उसने मुझे अंदर को धकेला और दूसरा हाथ पीछे ले जाकर रूम का गेट भेड़ दिया…

ट्रिशा से रहा नही गया, और थोड़ा नागवारी भरे लहजे में उसने निशा को लताड़ते हुए कहा –

ये क्या हिमाकत है निशा, तू इस तरह से हमारे कमरे में चली आई, बड़ी बेहन और जीजू का कोई शर्म लिहाज नही है तुझे…

और अगर तेरे पति को पता चला तो वो क्या सोचेगा… थोड़ा सा तो परदा रख.

ट्रिशा की बात का उसके उपर जैसे कोई असर ही नही हुआ… और वो मुझे अपनी बाहों में लपेटे, लगभग घसीटते हुए पलंग तक ले आई…

फिर अपने घुटनों पर बेड के उपर बैठती हुई बोली – ओह कम ऑन दिद… मानती हूँ, आप जीजू की पूरी घरवाली हो, तो आपको पूरा हक़ है उनके साथ कैसे भी रहने का…

लेकिन साली भी तो आधी घरवाली होती है, तो थोड़ा सा हक़ तो मेरा भी बनता है ना…

और रही बात राहुल को पता लगने की, तो उसे तो मैने दूध के साथ इतना बड़ा डोज दे दिया है, कि अब वो सुबह 8 बजे से पहले उठने वाला नही है…!

दोनो बहनों के बीच के वार्तालाप में मैं केवल एक तमाशबीन की तरह ही था, कि तभी ट्रिशा बोली –

आप इसे कुछ कहते क्यों नही हो, इतना बेशर्म होना अच्छी बात नही है..

मैने कहा – भाई ये तुम दोनो बहनों के बीच की बात है, मे कॉन होता हूँ बीच में बोलने वाला,

और वैसे भी… तुम एक बार उसको ये मौका दे ही चुकी हो तो अब वो क्यों शरमाने लगी…!

इतने में निशा ने मेरा हाथ पकड़ कर बेड पर खींच लिया, और लपक कर मेरी गोद में आ बैठी,

अंडरवेर में फुदकते मेरे लंड को जब नंगी गान्ड की गर्मी लगी तो वो और ज़्यादा कड़ा हो गया…

मैने पारदर्शी गाउन से चमकते निशा के आमों को अपनी मुट्ठी में कस लिया…,

वो मेरे होठों को चूसने में लगी हुई थी…

ट्रिशा बगल में बैठी किसी उल्लू की तरह आँखें झपका कर हम दोनो की रासलीला को देख रही थी, कि तभी मैने उसे भी अपने पास खींच लिया…

निशा ने मौका लगते ही अपना एक मात्र गाउन भी निकाल दिया, और मेरे अंडरवेर को उतारने के लिए मुझे बेड पर धक्का दे दिया…

अब ट्रिशा भी सारी झिझक छोड़कर खेल में शामिल हो गयी…

निशा अपनी मदमस्त गान्ड लेकर मेरी जाँघो पर बैठकर हिचकोले खाने लगी, मेरा लॉडा आगे की तरफ फन निकाले उसकी गीली चूत के होठों के बीच फँस कर उसके कामरस से तर हो रहा था…

मैने ट्रिश को कहा – डार्लिंग, मेरे पप्पू को सुरंग का रास्ता तो दिखाओ…

उसने मुस्कराते हुए, मेरे लंड को अपने हाथ में लिया, और उसका सुपाडा, निशा की चूत के छेद पर टिका दिया…

निशा ने जैसे ही अपनी कमर को मूव्मेंट दिया, सरसराता हुआ वो उसकी रस से लबालब चूत में सरक गया…

आआअहह………जिजुउुउ….सस्सिईईई…..क्या मस्त लंड है आपका… हाईए…माआ…मज़ा आ गायाअ…….

कुछ देर वो मेरे उपर कूद-कूद कर लंड को लेती रही, फिर मैने उसे नीचे पलटा दिया, और उसकी टाँगों को चौड़ा करके सुपर फास्ट ट्रेन की तरह धक्के लगाने लगा…

निशा मस्ती में बड़बड़ाते हुए नीचे से अपनी कमर उचका-2 कर ज़्यादा से ज़्यादा मेरे लंड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी…

हाईए…जिजुउू..चोदो मुझे और ज़ोर्से… फाड़ दो मेरी चूत मेरे राजाजी…
मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो…..

अंत में मैने उसकी बच्चेदानी को अपने वीर्य रस से भरकर उसे अपने सीने से चिपका लिया… वो मेरे सीने से लगकर सुबकने लगी…

लंड अंदर डाले हुए ही, मैने उसे अपनी गोद में लेकर उसकी पीठ सहलाते हुए कहा –

क्या हुआ निशा… ? रो क्यों रही हो… मैने कुछ ज़्यादा ज़ोर्से कर दिया क्या..?

निशा ने मेरे गले को चूमते हुए कहा – मेरी इच्छा थी कि मे आपके बच्चे की माँ बनूँ, सच कहूँ तो मे इसलिए ही यहाँ आई हूँ..

आज आपने मेरी ये इक्षा पूरी करके मुझे बिन मोल खरीद लिया जीजू… मेरे प्यारे जीजू…आइ लव यू…

उसकी ये बात सुनकर हम दोनो ही शॉक्ड रह गये… फिर ट्रिशा ने उसकी गान्ड पर थप्पड़ जड़ते हुए कहा…

ये तू कैसे कह सकती है, कि आज तू माँ बन ही जाएगी..?

निशा मादक सिसकी भरते हुए बोली – ओह्ह्ह…दीदी, देखो, अभी भी जीजू की पिचकारी सीधी मेरी बच्चेदानी में जा रही हैं.. थोड़ी बहुत कसर रह गयी होगी, तो अब पूरी हो जाएगी..

इतना कह कर वो और ज़ोर्से मेरे बदन से चिपक गयी….!

कुछ देर बाद हम फिर से थ्रीसम करने में लग गये, इस बार मैने अपना आधा-आधा माल दोनो की चुतो को पिलाया…

इस तरह से हमारी रासलीला, सुबह तक बदस्तूर जारी रही…

चार दिन रहकर निशा खुशी-खुशी अपने पति के साथ वापस पूना लौट गयी…..!

8-10 दिन और ट्रिशा के साथ फुल मस्ती में निकले, क्योंकि शादी को काफ़ी समय हो चुका था, तो अब घर में और मेंबर भी तो आने चाहिए, ऐसी हम दोनो की ही अब इच्छा थी.

इस बार ये ट्रिशा को भी लग रहा था कि इस बार प्रेग्नेन्सी के पूरे-2 चान्स हैं.

11वे दिन मे फिर अपने फील्ड वर्क को निकल पड़ा. विक्रम और रणवीर को फोन किया तो वो अगले दिन निकलने वाले थे.

देर रात में बस्तर पहुँच गया. घर में घुसते ही सब कुछ बदला-2 सा लगा, हर चीज़ अपनी जगह पर व्यवस्थित दिखी,

सॉफ सफाई, किचेन का सामान एक दम फिट फट, अब लग रहा था कि ये भी घर है, यहाँ भी लोग रहते हैं.

नीरा अपने अच्छे से कपड़ों में बड़ी प्यारी सी लग रही थी, जब मे उसकी ओर देख रहा था तो वो मुझे देख कर मंद-2 मुस्करा रही थी.

मैने उसे घूम फिर कर देखा वो वाकई में सुंदर थी, साँवले रंग की गाँव की अल्हड़ कली जो उन शैतानों ने बेरहमी से मसल कर उसे फूल बना डाला था.

लेकिन अब वो कुछ सम्भल गयी थी और अच्छे व्यवस्थित कपड़ों में वो फिर से चहकने लगी थी.

कमसिन जवानी का यही तो कसूर होता है, जब भी मौका मिले वो उभर कर सामने आ ही जाती है, और हवस के अंधे कामी कीड़े उसका रस निचोड़ने से बाज़ नही आते.

जब मे उसे काफ़ी देर तक देखता रहा, तो वो शर्मा गयी और नज़रें नीची करके बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं बाबूजी.

मे- देख रहा हूँ, ये हमारी वही डरी सहमी सी नीरा है या कोई और आ गई है घर में.

वो- आपकी वही नीरा है बाबूजी, कैसी लग रही हूँ इन नये कपड़ों में..?

मे – बहुत प्यारी..! एक दम चंचल हिरनी जैसी., बस हमेशा ऐसे ही चहकति रहना.

खैर , अच्छा ये बताओ कि अब तुम्हारी तबीयत कैसी है..?

वो – अब में बिल्कुल ठीक हूँ, सारे जख्म ठीक हो गये हैं, बस कभी-2 पेडू में दर्द की लहर सी उठती है.

मे – कोई बात नही मे तुम्हारे लिए और दवा ले आउन्गा वो भी चला जाएगा. वैसे और कोई परेशानी तो नही है..?

वो – नही और कोई परेशानी नही है, वो दर्द भी कभी-2 होता है.

मे – अब तुम ध्यान से सुनो ! अब तुम्हें अच्छा-2 खाना ख़ाके अपनी शक्ति बढ़ानी है, कल सुबह से ही तुम्हें कसरत शुरू करवानी है,

उसके लिए आज ही मे तुम्हारे लिए कुछ कपड़े ले आउन्गा, तुम्हें अपना माप तो पता होगा ?

वो- कैसा माप..? कैसे कपड़े ? ये कपड़े हैं तो मेरे पास.

मे – छोड़ो, मेरे साथ चलना, वहीं माप करके कपड़े ले लेंगे. ये कुछ अलग तरह के कपड़े होते हैं जो कशरत करने के लिए ही होते हैं.

शाम को उसे बाज़ार ले जाकर अच्छी सी दुकान से उसके लिए दो लेडी स्पोर्ट सूट खरीदे, डॉक्टर से कन्सल्ट करके दवा ली और कुछ घर की ज़रूरत का समान लेकर घर लौट आए.

घर आ कर मैने नीरा को उसके कपों का पॅकेट दे कर कहा, जाओ ये पहन कर आओ, मुझे देखना है तुम्हारी फिटिंग,

फिर उसको ब्रा-पेंटी वाला पॅकेट देकर कहा- इन कपड़ों को पहले पहनना है और इनके उपर ये सूट.

वो दूसरे कमरे में चली गयी और मे दूसरे काम में लग गया, कुछ देर बाद जब उसके आने की आहट सुनाई, मे उसकी तरफ पलटा, और उसको देखता ही रह गया.

टाइट टू पीस स्पोर्ट सूट में वो ग़ज़ब लग रही थी, वैसे भी उसका बदन गाँव की मेहनत कस जिंदगी में एक दम कसा हुआ ही था, लेकिन इस फिटिंग सूट में तो उसके शरीर का हर कटाव साफ दिख रहा था.

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