My Life @Jindgi Ek Safar Begana – Update 81

My Life @Jindgi Ek Safar Begana - Incest Story
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Update 81

उसकी बात सुन कर, कुछ देर तो मे सन्नाटे की स्थिति में चली गयी, लेकिन जब उसने फिर कहा – देखो दीदी, आप प्रॉमिस कर चुकी हो, प्लीज़ बस एक रात के लिए, फिर कभी नही कहूँगी…

मे चाहती हूँ, मेरी फर्स्ट नाइट जीजू जैसे शेरदिल मर्द के साथ में हो…

मे – तो फिर तुमने क्या कहा …?

ट्रिशा – मे क्या कहती, मैने उससे कह दिया कि उनकी वो जानें, मे इस बारे में कुछ नही कह सकती…

बस तभी से वो मायूस हो गयी, और गुम-सूम सी रहने लगी.. मैने उसे काफ़ी समझाने की कोशिश भी की, कि देख ये बात तेरे जीजू कतई नही मानेंगे, लेकिन उसने फिर कोई जबाब नही दिया..

बातों बातों में मैने उसके गाउन को उसकी टाँगों से भी हटा दिया था, गुलाबी रंग की पेंटी के उपर से उसकी मुनिया को सहलाते हुए मे बोला – तो तुमने फाइनली उसको क्या जबाब दिया..?

ट्रिशा भी मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को सहलाते हुए बोली – आपके बारे में मे उसको कैसे हां कर देती..? आप इसके लिए तैयार नही हुए तो..?

मे – तो क्या तुम अपने पति को, अपनी बेहन के प्यार के लिए बाँट सकती हो..?

ट्रिशा – मे कॉन होती हूँ आपके बारे में कुछ भी डिसाइड करने वाली..?

अब मेरे प्रयासों से उसकी पेंटी कमरस से गीली होने लगी थी, तो मैने उसे एक साइड में किया और उसकी गीली पुसी में एक उंगली डाल कर कहा –

अगर मे ये कहूँ कि तुम्हारी खुशी के लिए मे अपना प्यार उसे देने को तैयार हूँ तो..?

ट्रिशा सिसकी भरते हुए बोली – सस्सिईईईई….आअहह…सस्साच ! सच में आप उसको अपना प्यार दे सकते हैं..?

मे – तुम्हें कोई एतराज नही होगा इसमें..?

ट्रिशा अपनी कमर हिलाते हुए बोली – मुझे भला क्यों एतराज होगा..? ससिईई….

अगर आप अपनी खुशी से उसको प्यार दे रहे हैं तो, मेरी खुशी तो आप दोनो की खुशी में ही है.

वो फिर अपनी गान्ड उचकते हुए बोली – वैसे अगर वो खुश रहेगी तो मुझे अच्छा लगेगाआ….आआईयईई….सस्सिईइ…

मेरी भी एक्सिटमेंट बढ़ती जा रही थी, सो मैने अपनी दो उंगली उसकी रस से लबरेज़ पुसी में जड़ तक पेल दी.. और अंदर बाहर करके उसे हाथ से ही चोदने लगा…

कुछ ही देर में ट्रिशा की कमर हवा में लहरा उठी, और उसने अपना कामरस छोड़ दिया…

जब वो नॉर्मल हुई, तो उसने मेरे लबों को चूम लिया..

मे उसकी ओर देखता ही रह गया.. कितना त्याग भरा है इस लड़की में, अपनी बेहन की खुशी के लिए..,

जहाँ एक तरफ समाज में ना जाने ऐसे कितने केसस हैं, कि पति-पत्नी के संबंधों में मात्र शक़ के आधार पर ही खटास आ जाती है, यहाँ तक कि नौबत तलाक़ तक पहुँच जाती है.

वहीं ये लड़की, अपनी बेहन की खुशी के लिए, अपने पति को बाँटने तक को खुशी खुशी तैयार हो गयी…

जब मे कुछ देर उसकी ओर ताज्जुब से देखता रहा तो वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं जी..?

मे – देख रहा हूँ कि इतना त्याग भी कोई कर सकता है..! लेकिन जान ! उसकी तो कुछ महीनो बाद शादी है, फिर वो अपने पति को कैसे…??

मैने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया था.

ट्रिशा – वो उसकी प्राब्लम है, मुझे लगता है वो इस रिस्ते से ज़्यादा खुश नही है, बस भाई की खुशी और बात रखने के लिए राज़ी हुई है.

मे – ठीक है, अगर तुम खुश हो तो मे तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

ट्रिशा – ओह जानू ! आप कितने अच्छे हैं.. ? आइ लव यू ! तो मे उसे भेज दूं आपके पास..?

मे – अभी..?

ट्रिशा – हां..! फिर उसको और ज़्यादा क्यों सताया जाए..?

मैने उसके होठ चूमते हुए कहा – लेकिन इस समय तुम तो अपने हिस्से का प्यार ले लो पहले…

वो मेरे गाल को किस करके बोली – वो तो मे कभी भी ले लूँगी, पहले आप उसको देदो…

मैने उसको अपने सीने से सटा कर कहा – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..!

ये सुनते ही वो लपक कर पालग से उतरी और खुशी में डूबी हुई निशा के रूम की ओर चली गयी, मेरे चेहरे पर एक रहश्यमयि मुस्कान तैर गयी.

कुछ देर बाद ही दोनो बहनें मेरे पास आई, और पलग पर बैठ गयी,

निशा की आँखें शर्म से नीचे झुकी हुई थी. उसे बिठा कर ट्रिशा वहाँ से जाने लगी, तो मैने उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा-

अरे तुम कहाँ चली जानेमन..?

वो बोली – मे जीजा-साली के बीच कबाब में हड्डी क्यों बनू..? लो सम्भालो अपनी प्यारी साली को और खिल खिला कर हस्ती हुई रूम से बाहर भाग गयी.

निशा अभी भी अपनी नज़रें नीची किए बेड के एक सिरे पर बैठी थी, इस समय वो एक वन पीस झीनी सी गाउन पहने हुए थी जिसके आर-पार उसके अधोवस्त्र भी सॉफ-2 दिखाई दे रहे थे.

उसके मादक अंगों को गाउन के अंदर से ही तौल कर मेरा पप्पू अंगड़ाई लेने लगा.

मे – निशा ! अब भी नाराज़ हो मुझसे..?

निशा – नही तो ! भला मे आपसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..?

मे – तो फिर अभी तक इतनी दूर क्यों बैठी हो..? या फिर सिर्फ़ ऐसे ही बैठने के लिए आई हो मेरे पास..?

निशा – ओह जीजू, आपने मुझे जिस तरह से समझाया था ना, तो उस वजह से मुझे अब आपसे शर्म आ रही है.

मे – ओह ! देखो निशा मे नही चाहता था कि हम दोनो को लेकर हम पति-पत्नी के बीच कोई ग़लत फेहमी पैदा हो इसलिए मैने तुम्हें समझाया था,

अब जब पत्नी ही अपनी बेहन के प्यार में अपने पति को शेयर करने को तैयार है तो मे तो कब्से तुम्हें लपेटने के चक्कर में था.

निशा – सच..! आप सच कह रहे हैं जीजू..!

मे – बिल्कुल सच..! तुम्हारी जैसी हॉट और सेक्सी लड़की को कॉन नही भोगना चाहेगा..?

निशा – ओह जीजू..! थॅंक यू वेरी मच ! आइ लव यू ! और सारे शर्मो हया बंधन तोड़-ताड़ के वो मेरे उपर चढ़, मेरी गोद में आ बैठी.

उसके उभार मेरे सीने में दबे हुए थे, और वो मेरी आँखों में झाँक रही थी,

मैने प्यार से उसके रसीले होठों पर अपना अंगूठा फिराया और बोला – ऐसा क्या पसंद आया तुम्हें मेरे अंदर जो इतनी बाबली हो रही हो..?

निशा – क्या नही है आपके अंदर जिसे देख कर कोई भी लड़की फिदा ना हो..?

सबसे बड़ी आपकी ख़ासियत जो मुझे भा गयी है, वो है आपका मर्दाना अंदाज जो हर लड़की को चाहिए, डेरिंग जो किसी की भी केयर कर सके.

मे – लेकिन ये सब तो तुम्हारे लिए टेम्परेरी ही है ना ! तुम्हारा केरिंग गाइ तो कोई दूसरा ही है ये जानते हुए भी तुम मेरे दो पल के प्यार के लिए मरी जा रही हो. ये पागल पन क्यों निशा..?

निशा – जीजू प्लीज़ ! कैसे-2 करके मैने दीदी को पटाया है, और आप फिर से मुझे बहला रहे हो.. ! मुझे प्यार करो ना! प्लीज़ जीजू.. मेरे प्यारे जीजू.

मैने उसका मुँह बंद करने की गरज से अपने होठ उसके होठों पर रख दिए और उन्हें चूमने-चूसने लगा,

वो तो थी ही इसी ताक में बस फिर क्या था ! जुट गये एक लंबी स्मूच में.

होत जब अपने काम में लगे हों, तो हाथ कैसे पीछे रहते, कस लिए उसके अनारों को, और जो मसल दिया, निशा किस तोड़ कर सीसीयाने लगी…..

सस्स्सिईईई… आअहह…गंदीए… जिजुउुउ… धीरे… जोरे से नही प्लेआस्ीई… दर्द्द्द…नहियिइ.. ह…उफ़फ्फ़…माआ…

अरे मेरी जान मेरी कबुतरि, तेरे ये अनार हैं ही इतने मस्त की बस मसल्ने को ही जी करता है…! मे बोला.

तो आराम से करो ना..! दर्द क्यों देते हो…?

मे – अरे मेरी रानी, इस दर्द में भी अपना अलग ही मज़ा है…और कपड़े के उपर से ही उसके निपल्स को मरोड़ दिया..

नहियिइ…. जीजू.. आप बहुत गंदे हैं… बहुत सताते हो…!

फिर मैने उसकी गान्ड को सहलते हुए उसके गाउन को खोल दिया.

अब उसके गोरे- 2 गोल-मटोल इलाहाबादी अमरूद ब्रा में कसे हुए मेरी आँखों के सामने थे.

उनकी शेप और सुंदरता देख कर मेरी आँखों की चुमक बढ़ गयी और मैने उसकी घाटी के दाएँ बाए अपने दाँत गढ़ा दिए..

ओह जीजू काटो मत.., निशान बन जाएँगे. वो बोली तो मैने कहा- बनने दे ना, इनको ही तो लव बाइट्स कहते हैं मेरी जान,

जब भी तुम इन निशानों को देखोगी तो मेरी याद आएगी.

वो बोली – आपको तो मे वैसे भी कभी भूलने वाली नही हूँ.

पेंटी और ब्रा में कसा उसका सुडौल गोरा बदन जो ट्रिशा से ज़्यादा भरा हुआ था. उसके चुचे तो कसम से मेरी जान ही निकाले दे रहे थे,

मैने ब्रा के उपर से ही उन्हें अपने मुँह में भर लिया और बुरी तरह चब चबा डाला.

आआईयईई…. नहियीई…जिजुउू… ज़ोर्से नही… प्लीज़…!

मेरे हाथ उसकी गदराई गान्ड का नाप ले रहे थे, और मे उन्हें ज़ोर-2 मसले जा रहा था.

एक भीनी सी मादकता से भरी उसके बदन की महक मेरे नथुनो में समाती जा रही थी, जो मुझे और ज़यादा उत्तेजित कर रही थी.

मैने मदहोशी के आलम में उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा.

निशा के हाथ भी हरकत में आए और उसने मेरे अंडरवेर को निकाल बाहर किया. और फिर वो मेरे घुटनों के बीच बैठ कर मेरे पप्पू को हाथ में लेकर सहलाने लगी, एक बार चूम कर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया.

जो काम ट्रिशा इतने समझाने बुझाने के बाद भी ठीक से नही कर पाई थी वो ये लंड की दीवानी लौंडिया बिना कुछ कहे कर रही थी, इसी से साबित होता था कि वो मेरे लंड के लिए किस कदर ब्याकुल है.

जल्दी ही मेरा लंड स्टील के रोड की तरह शख्त हो गया…, लगता था कि अब वो किसी दीवार में भी छेद कर्दे…!

मैने निशा को पकड़ के बेड पर लिटा दिया, और उसकी ब्रा और पेंटी को भी उसके बदन से अलग कर दिया..! अब वो मेरे सामने अजंता की कोई मूरत पड़ी हो ऐसा लग रहा था.

निशा ने अपनी दोनो टाँगों को विपरीत दिशाओं में फैला लिया और अपनी अन्चुदि परी को मेरे सामने खोल कर रख दिया.

मैने बड़ी प्यारी नज़रों से उसके मदमस्त बदन को बिस्तर पर मचलते हुए देखा और अपने मूसल जैसे लंड पर थूक लगा कर उसके उपर झुक गया.

मैने लंड को उसकी मुनिया की फांकों के बीच रख कर उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा- आर यू रेडी डियर..?

निशा ने जबाब में अपनी टाँगों को मेरी गान्ड के उपर रखा और अपनी ओर खींचने लगी, और फिर बड़े ही शोख अंदाज में बोली- यस माइ डियर जीजू… आइ आम रेडी फॉर युवर हार्डशिप्स.

उसके अपनी ओर खींचने और मेरी गान्ड के दबाब से लंड उसकी चिकनी चूमेली के अंदर सरकता चला गया…

एक पल के लिए तो वो साँस लेना ही भूल गयी मानो…उसे लगा जैसे कोई गरम रोड उसकी चूत में डाल दी हो…

उसे दर्द तो ज़्यादा नही हुआ क्योंकि चूत सिल्परी हो रही थी.., लेकिन उसे ऐसा कुछ लगा मानो कोई गरम चीज़ उसकी चूत में डालकर, अंदर रेंगती हुई चींतियो को भून रही हो.

पहले जो सुरसूराहट हो रही थी उसकी परी के अंदर अब वो हल्के से दर्द में बदल चुकी थी.

अब उसे ये समझ नही आ रहा था कि चूत चुदने में जब इतना दर्द होता है, तो हर लड़की इस दर्द के लिए मरी क्यों जाती है.

इसका जबाब उसको जल्दी ही मिल जाने वाला था…

अगले ही दो तगड़े धक्कों में मैने अपना पूरा मूसल जैसा लंड उसकी सन्करि गली में उतार दिया…

उसकी गली हर बार ककड़ी की तरह चीरती जा रही थी और अपने अतिथि के लिए रास्ता देती जा रही थी…

अब उसे दर्द की अधिकता महसूस हुई.. और वो चीख पड़ी…

आअहह…. जीजू…. मरररर…गायईयीई…आयईयीई… दर्द हो रहा हाीइ…उफ़फ्फ़.. जीजू निकालो अपने मूसल को…

मैने धीरे-2 लंड को बाहर खींचा, हम दोनो की नज़र उसी पर थी, जब लंड पूरा बाहर निकला तो उसके टोपे पर खून लगा हुआ था.

मैने उसको मुस्करा कर देखा और बोला- कंग्रॅजुलेशन्स डार्लिंग अब तुम लड़की से औरत बन गयी..!

निशा के मुँह से बस एक दर्द युक्त मुस्कान निकली…

अभी वो ठीक से मुस्करा भी नही पाई थी कि फिर चीख पड़ी…क्योंकि एक बार फिर मेरा शेर उसकी गुफा में घुस गया.

आआआहह…..गंदे जीजू……. उफफफ्फ़… निर्दयी कहीं के… मार डाला.., आई…अब ज़यादा मत हिलाओ… प्लीज़….रूको थोड़ा…!

पर मैने उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया… बस 10 सेकेंड के बाद फिर अपनी कमर को जुम्बिश दी और बाहर खींचा.. और फिर पेल दिया..

2-4 धक्कों के बाद निशा का दर्द कुछ कम हुआ और उसकी जगह उसकी चूत में सुरसूराहट होने लगी…,

अब उसके पैर एक बार फिर मेरी गान्ड के उपर कस गये और अपनी ओर करने लगे.

मैने अपने धक्कों को स्पीड देना शुरू कर दिया…

कुछ देर में ही निशा को मज़ा आने लगा, जो कुछ देर पहले ये सोच रही थी कि दर्द के बबजूद लड़कियाँ क्यों चुदने को मरी जाती हैं, अब जाके उसकी समझ में आया वो राज, और उसके मुँह से मादक सिसकिया फूटने लगी.

कुछ देर बाद मैने निशा को अपने उपर ले लिया, वो अपनी गदराई हुई, गोल गान्ड लेके मेरे लंड पर बैठ गयी, और अपने घुटने मोड़ कर बेड पर रख लिए…उसके बूब मेरे सीने को रगड़ दे रहे थे……..

आह्ह्ह्ह… जीजू…उउम्म्म्म…उऊहह… मज़ा आरहाआ हाइईइ.. बहुत… आहह… चोदो मुझे… और जोरे सी…आयईयी…उउफ़फ्फ़.. हाईए.. अंदर जाकर तो ये और ज़्यादा मज़ा देता है.. चोदो … और जोरे से… चोदो… अपनी … राणििइ.. को…अपनी साली..आधी..घरवाली को..,

अब वो खुलकर चुद रही थी, और पूरा मज़ा लेने की कोशिश कर रही थी…

मैने झुक कर उसके निपल को मुँह में भर लिया और चूसने लगा..

नयी टाइट चूत का एक नुकसान भी होता है, लंड ज़्यादा देर झेल नही पाता और जल्दी पानी छोड़ देता है, यही मेरे साथ भी हुआ…

उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड को इतना जोरे से जकड रखा था कि उसकी रगड़ से झड़ने के करीब पहुँच गया…

लेकिन एन मौके पर मैने अपने लंड को बाहर खींच लिया.

मैने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, निशा की नयी फटी चूत जो अभी तक भरी-2 सी लग रही थी, एकदम एकदम खाली खाली सी हो गयी..…

निशा को ये पसंद नही आया और उसने गीले लंड को अपनी मुट्ठी में भरके फिर से अपनी चूत के मुँह पर रखा और अपनी गान्ड को उपर की ओर उचका दिया.

लेकिन मैने कमर उपर करके उसके बार को खाली जाने दिया और उसके होठों को चूसने लगा….

कुछ देर उसके होठ चूसने के बाद, निशा की कमर पकड़ कर अपने उपर बिठा लिया और खुद बिस्तर पर लेट गया.

वो अपने दोनो पैरों को मेरे कमर के साइड में करके अपने चूत को मेरे लंड पर रख कर उसके उपर बैठती चली गयी…!

उम्म्म्म…कितना मज़ा है इसमें… अब तक मे इस मज़े से अंजान क्यों रही…?

अब मुझे रोज चुदना है जीजू आपसे… चोदोगे ना..! आहह… हाईए.. कितना मज़ा है आपके इस लंड में…

प्लीज़ ज़ोर से घुसाओ इसे.. मेरी चुचि को चूसो…जीजू… खा जाओ इन्हें आअहह..ऊहह..जीजू… मे गाइ….हहूओ…उउउहह… और वो भरभरा कर पानी छोड़ने लगी..

इधर मेरा भी लंड मुंहाने पर ही था.. सो वो भी फुट पड़ा.. और अपनी सारी मलाई उसकी कुप्पी में उडेल दी.

निशा का ये लंड से पहला एनकाउंटर था, अब तक वो शायद अपनी चूत को मसल मसल कर ही मज़ा लेती रही हो.

वो तृप्त हो कर मेरे सीने पर पड़ गई और लंबी-2 साँसें भर कर सीने से चिपकी रही.

कुच्छ देर के बाद वो मेरे उपर से उठी, तब जाकर लंड उसकी चूत से बाहर आया, साथ ही ढेर सारा दोनो का रस भी.

निशा ने तौलिया लेकर अपनी चूत और मेरे लंड को सॉफ किया और फिर उसको हाथ में लेकर उसे चूम लिया और बोली- मेरा राजा बेटा…उूउउम्म्मचह….

फिर हम दोनो नंगे एक दूसरे से लिपटे ही सो गये.

उधर उसकी त्यागमयी बेहन अपने पति के होते हुए, अपनी चूत को हाथ से मसल मसल कर अपना पानी निकाल कर सो गयी ..…

मे जिस डर से बचता आ रहा था वही अब सामने था,

निशा को एक बार लंड का चस्का क्या लगा, अब तो वो मौके ही ढूदती रहती थी, लेकिन मैने उसको कंट्रोल मे रहने के लिए प्यार से समझा बुझा दिया था,

जो कुछ-2 उसकी समझ में आ गया, लेकिन फिर भी नयी-2 चुदास, तो समय निकाल कर जब तब करनी पड़ती उसकी भी सर्विस.
ट्रिशा की ड्यूटी शांति पूर्वक चल रही थी, वैसे भी गुजरात में यूपी जैसी अशांति नही थी. तो उसको कोई प्राब्लम नही होनी थी.

कुछ दिन बाद निशा अपने एग्ज़ॅम देने चली गयी, उसके बाद ही उसकी शादी भी हो जानी थी.

इसी दौरान लोक सभा के एलेक्षन हुए, और कोलिशन की सरकार सेंटर में बन गयी, किसी पार्टी को क्लियर मॅनडेट नही मिला था, तो बहुत सारे देश भर के दल मिलकर एक सरकार बना दी गयी.

ये तो जग जाहिर है, कि नेता लोग अपने मन मुतविक अधिकारियों को नियुक्त करते हैं, अब सरकार गयी तो अधिकारियों के काम भी गये.

पर्फॉर्मेन्स नाम की कोई चिड़िया भी होती है, नेताओं को पता ही नही होता है, अजीब सी डेमॉक्रेसी है अपने देश की.

जिनको अपने घर संभालना नही आता वो देश को संभालते हैं. खैर जो होना होता है वही होके रहता है.

चौधरी साब को भी एनएसए पद से हटा कर किसी दूसरी बेकार सी जगह डाल दिया गया.

अब देखना होगा कि नये एनएसए महोदय कैसे मॅनेज करते हैं या डॅमेज करते हैं.

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