Update 80
अभी ये बातें हो ही रही थी कि तभी ऑफीस के फॅक्स पर स्टेट होम सीक्रेटरी के आदेश का फॅक्स आ गया,
जो सेंटर होम मिनिस्ट्री के आदेश को फॉलो करता था, ट्रिशा ने फॅक्स लेकर कमिशनर के हाथ में पकड़ा दिया और बोली- और कुछ सपोर्ट चाहिए सर.
कमिश्नर – बस करो ऑफीसर, इन मिसटर ने ही बहुत कुछ सुना दिया मुझे, अब आप तो कम-से-कम अपने सीनियर की खिचाई मत करो,
यू गो अहेड मे आपके साथ हूँ. और उसने एसपी के सिग्नेचर को वेरिफाइ करके भानु के उपर संबंधित धारा के तहत केस चलाने के आदेश दे दिए.
अब भानु को सज़ा से कोई नही बचा सकता था, वैसे ऐसे जालसाज़ और बाहुबली नेताओं से मिले रहने की सरकार की भी अपनी मजबूरी होती है लोक्तन्त्र में,
लेकिन जब ये फँस जाते हैं, तो वही तन्त्र अपने हाथ खींच भी लेता है.
यही भानु के साथ भी हुआ, जब सेंटर का दबाब पड़ा तो स्टेट ने हाथ खड़े कर दिए और भानु का साम्राज्य ख़तम हो गया.
लोगों ने भी चैन की साँस ली.
इधर जब कोतवाली से फारिग होकर हम घर लौटे तो अंधेरा घिर चुका था,
अभी हम घर के गेट पर ही थे कि चौधरी साब का फोन आ गया और उन्होने कन्फर्म कर दिया कि ट्रान्स्फर ऑर्डर दो दिन में पारित हो जाएगा,
चाहो तो यहाँ आकर कलेक्ट कर सकते हो और महीने के अंत तक कभी भी जाय्न कर सकती है.
मैने ट्रिशा को ये बात बताई तो उसने मेरे होठों का चुंबन करके थॅंक्स कहा.
अंदर आकर हमने दोहरी खुश खबरी जब सबको बताई तो सब खुशी से झूम उठे,
ट्रिशा के मम्मी पापा की आँखों में तो खुशी के मारे आंशु आ गये.
उपर से जब ट्रिशा ने बताया कि ये सब आपके दामाद की वजह से हुआ है, तो उन्होने बारी-2 मुझे गले से लगा लिया और बोले-
हम कितने ग़लत थे बेटी, तुझे कितना रोका था हमने जब तुमने अरुण से शादी के लिए बोला था तब, लेकिन अब हमें तुम्हारे चुनाव पर फक्र हो रहा है.
निशा को तो पता नही नकाब पोश वाले सीन से ना जाने क्या हो गया था, वो तो अपने प्यारे जीजू को बलिहारी वाली नज़रों से निहारे जा रही थी. आख़िर जब नही रहा गया, तो बोल ही पड़ी.
निशा – दीदी आज मुझे आपसे बड़ी जलन हो रही है..!
ट्रिशा ने उसे सवालिया नज़रों से घूरते हुए कहा – क्यों ?? मैने तेरा क्या छीन लिया जो तुझे मुझसे जलन हो रही है.
निशा – इतने प्यारे जीजू को जो हथिया लिया है आपने..!
उसकी बात सुन कर सभी ठहाका लगा कर हसने लगे और निशा झेंप कर रह गयी…!
ऐसे ही हसी-खुशी के वातावरण में हम सब लोगों ने अपना डिन्नर ख़तम किया, कुछ देर गप-सप की, और फिर सब अपने-2 रूम में सोने चले गये..!
आज हम दोनो पति-पत्नी अपने मन की जी भरकर भडास निकालने वाले थे,
सो बेड पर आते ही शुरू हो गये और ना जाने रात के कोन्से पहर थकान से चूर-चूर होकर हमें नींद ने अपने आगोश में समेट लिया !
तीसरे दिन हम सबने अपना ज़रूरी समान समेटा और देल्ही जाने वाली फ्लाइट पकड़ ली,
वाकी भारी समान को मवर्स & पॅकर्स को. के हवाले कर दिया जो बाद में पहुँचने वाला था..
देल्ही आकर उन तीनों को एर पोर्ट के रेस्ट रूम में रोका, मे और ट्रिशा सचिवालय की ओर चल पड़े.
अमित चौधरी के ऑफीस पहुँच कर मैने उनसे ट्रिशा को इंट्रोड्यूस कराया और कहा,
ट्रिशा ये तुम्हारे ससुर जी हैं इनके पैर छुकर इयांका आशीर्वाद लो, इनकी वजह से हम दोनो एक हुए हैं.
ट्रिशा ने पूरी श्रद्धा से उनके पैर छुये तो उन्होने भी स्नेह पूर्वक उसको सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया और कहा- बेटी इस हीरे का हमेशा ख्याल रखना,
वैसे तो ये इतना मजबूत है कि कोई चट्टान भी इससे टकराए तो वो भी चकनाचूर हो जाएगी, लेकिन जिंदगी का कोई भरोसा नही होता है कब क्या मोड़ ले ले.
ऐसे ही किसी मोड़ पर अगर ये टूटने लगे तो तुम हमेशा इसके साथ खड़ी रहना, इसे सहारा दे देना बस, ये फिर उठ खड़ा होगा.
ट्रिशा भावुक होते हुए बोली – आप चिंता ना करें सर, आपकी अमानत का में जी जान से ख्याल रखूँगी, जब तक मेरी जान में जान है, इन्हें टूटने नही दूँगी.
मेरी वजह से ये कभी कमजोर नही पड़ेंगे ये मेरा वचन है आपको.
चौधरी – जीती रहो मेरी बच्ची, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी, और इसी उम्मीद के चलते मैने इस नलायक को तुमसे शादी करने के लिए हां कहा था.
फिर उन्होने अपनी सीक्रेटरी को हमारे साथ होम सीक्रेटरी के पास भेजा वहाँ से ऑर्डर कलेक्ट किए और हम वापस एर पोर्ट पहुँच गये.
शाम होते-2 हम अपने 3 बीएचके वाले फ्लॅट में आ गये, खाना होटेल से बुक कर दिया था.
ट्रिशा के ऑफीस जाय्न करने तक इसी फ्लॅट में गुज़ारा करना था, उसके बाद तो उसको एसीपी की रंक के हिसाब से आवास मिलना था, जो शायद किसी बंगले से तो कम नही होना चाहिए.
4-5 दिन हमारे साथ रह कर ट्रिशा के मम्मी पापा गाँव वापस लौटने लगे, जब हमने उन्हें और रुकने को कहा तो वो बोले-
बेटा अब थोड़ा बहुत अपनी ज़मीन जायदाद की देखभाल भी तो करनी पड़ेगी. फिर कोई मौका पड़ेगा तो ज़रूर कुछ दिन रुकेंगे.
ट्रिशा की मम्मी ने उसके चिन पर हाथ रख कर कहा- अब तो बस नवासे का इंतजार है, तभी आएँगे तुम्हारे पास,
अब ये तुम लोगों पर निर्भर करता है कि कितनी जल्दी बुलाते हो हमें..? क्यों जी..! उन्होने अपने पति को संबोधित करके कहा.
पापा- बिल्कुल ! अब तो जितना जल्दी हो सके अपने नवासे का मुँह देखना है.
ट्रिशा उनकी बात सुन कर शर्मा गयी, तभी निशा चुटकी लेते हुए बोली- इसमें कॉन सी बड़ी बात है मम्मी, जीजू चाहें तो साल के अंदर-2 मे अपने भेनौत को अपनी गोद में लेकर खिला सकती हूँ..! क्यों जीजू..? सही कह रही हूँ ना !
मे – भाई ये सब अपनी बेहन से पुछो, मुझसे क्यों पुछति हो..? फिर थोड़ा सीरीयस होते हुए मैने कहा –
इसमें अभी वक़्त लगेगा मम्मी जी, ट्रिशा की नयी पोस्टिंग है, कम-से-कम 2-3 साल हम लोग इस बारे में सोच भी नही सकते.
क्यों ट्रिशा..! सही कह रहा हूँ ना मे..?
ट्रिशा ने भी मेरी बात पर मुन्हर लगाड़ी, तो वो लोग कुछ मायूस से हो होगये..!
मैने कहा- अरे आप लोग मायूस क्यों होते हो, पहले पोते का तो जुगाड़ करो..!
पापा बोले – ये बात भी सही है तुम्हारी..! पहले तो पोता आना चाहिए, वैसे भी ऋषभ की शादी को तो एक साल से ज़्यादा हो गया है.
ऐसी ही बातें चलती रही, फिर उन्होने निशा को कहा- बेटा तुम भी अपना सामान पॅक कर्लो, तुम्हारा एमसीए का फाइनल है, तुम्हें भी तो उसकी तैयारी करनी है तो वो बोली-
मे तो अभी दीदी-जीजू के पास ही रहूंगी, यही रह कर तैयारी कर लूँगी, वैसे भी अब मुझे खाली एग्ज़ॅम ही तो देने हैं, क्यों दीदी आपको तो कोई परेशानी नही है ना..?
ट्रिशा – कैसी बात करती है पगली..! मुझे तेरे यहाँ रहने से क्या परेशानी होगी भला..! जब तक तेरा मन करे यहाँ रह, वैसे भी तेरे एग्ज़ॅम के बाद ही तो शादी हो जानी है.
मम्मी-पापा – जैसी तुम लोगों की इक्षा..! अब हमें तो इज़ाज़त दो भाई.
और उसी दिन वो दोनो निकल गये अपने गाँव, सीधा साधन ट्रेन ही था, रिज़र्वेशन मिल गया तो शाम की ट्रेन में उनको बिठा दिया.
ट्रिशा ने अपना ऑफीस जाय्न कर लिया, उसको डिपार्टमेंट की तरफ से एक अच्छा सा बांग्ला रहने के लिए मिल गया था. मैने सोचा चलो मेरी आब्सेन्स में इन लोगों को भी सेफ्टी रहेगी.
अब ट्रिशा सुबह-2 अपने ऑफीस निकल जाती थी, मेरा कोई इंपॉर्टेन्स नही था, कभी-2 शकल दिखाने चला जाता था कंपनी के ऑफीस.
ऐसे ही एक दिन ट्रिशा ओफिस गयी थी, मे और निशा घर पर अकेले थे, मे एक स्पोर्ट्स टीशर्ट और शॉर्ट पहन कर सोफे पर बैठ कर न्यूज़ सुन रहा था, सुबह की योगा और दूसरी एक्सर्साइज़ करने के बाद चेंज नही किया था.
कुछ देर बाद निशा भी हाथ में बुक लिए मेरे बाजू में आकर बैठ गयी.
मेरा ध्यान टीवी में था, लेकिन वो लगातार मेरी ओर ही देख रही थी, टीशर्ट थोड़ी फिट थी, सो मेरे कशरति बदन के कट साफ दिख रहे थे.
जब काफ़ी देर तक मैने उसकी ओर ध्यान नही दिया, तो उससे रहा नही गया और बोली-
जीजू ! ज़रा टीवी से ध्यान हटा कर मेरी ओर देख कर बताएँगे, क्या मे अट्रॅक्टिव नही लग रही..?
उसके अचानक इस तरह के सवाल पर मैने चोंक कर उसकी ओर देखा, वो एक लाल सुर्ख रंग की लोंग स्कर्ट और ब्राउन शर्ट पहने थी, जिसमें से उसके 34डी बूब्स निकलने को उतावले हो रहे थे,
वो अपनी टाँगों को एक के उपर एक रख कर बैठी थी. मेरा उसको अटेन्षन ना देने का कारण ही उसकी मदमस्त जवानी थी जो ट्रिशा की तुलना में ज़्यादा भारी-भारी थी, जिसे देख कर कोई भी अपना मानसिक संतुलन खो दे.
मैने थोड़ी देर उसके हुश्न का दीदार किया और फिर बोला- अचानक इस तरह का सवाल क्यों किया तुमने..?
निशा – पहले आप मेरे सवाल का जबाब दीजिए.. प्लीज़.
मे थोड़ा मुस्करा उठा उसके सवाल की मंशा जान कर, और बोला – सच कहूँ या झूठ.
निशा – जीजू..! प्लीज़ सच बताओ ना ! क्या मे अटेक्टिव नही लगती ?
मे – सच तो ये है साली साहिबा ! कि कभी-2 मुझे भी डर लगता है, कहीं मे अपना आपा खो कर तुम्हारे उपर झपट ना पडू..!
इसलिए तुम्हारी तरफ ध्यान देने से बचता रहता हूँ, और शायद इसीलिए तुमने भी ये सवाल जान बूझकर किया है, है ना!
वो अवाक सी मेरे मुँह को ताकती रह गयी..! और फिर बोली – आप कोई तन्त्र मंतरा तो नही जानते..?
मे – क्यों ? ऐसा क्यों लगा तुम्हें..?
निशा – वो आप मेरे मन की बात जान गये इसलिए..!
मे ठहाका लगा कर हंस पड़ा…हाहहाहा…! नही मेरी ब्यूटिफुल साली जी मे कोई तांत्रिक वन्त्रिक नही हूँ,
जब मैने तुम्हारी ओर ध्यान नही दिया तो नारी स्वाभाव बस तुमसे रहा नही गया और तुमने ये सवाल कर दिया..! क्यों सही है ना..!
निशा – बिल्कुल सही..! लेकिन अब तो सही से जबाब देदो मेरे हॉट..हॉट.. जीजू..!
मे और हॉट..?? हाहहाहा… क्यों मज़ाक करती हो यार !!? वैसे सच कहूँ तो देशी भाषा में तुम एक दम पटाखा लगती हो, जो किसी भी महा पुरुष का भी ईमान डॅग-मगा दे, इसलिए मे तुमसे बचता रहता हूँ.
उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख लिया और अपने बाजू मेरे इर्द-गिर्द लपेट कर बोली – मुझसे क्यों बच रहे हो..? क्या मे कटखनी हूँ..?
मे – कटखनी तुम नही मे हूँ, कहीं मन मचल गया और तुम्हें काट लिया तो तुम्हारी दीदी क्या कहेगी..?
वो मुझे अपनी बाहों में कस्ति हुई बोली – ओह जीजू..! काटो ना मुझे..! दीदी की क्यों परवाह करते हो, वो मुझसे बहुत प्यार करती है, मेरे लिए वो कुछ नही कहेगी..
उसके बदन की मादक खुश्बू ने मेरे अंदर हलचल पैदा करदी…
प्लीज़ जीजू मुझे भी एक बार अपनी बाहों में भरके प्यार दो ना.. प्लीज़्ज़ज..!
मे – निशा ! अपने आप को कंट्रोल करो प्लीज़.. तुम दूसरे की अमानत हो, उसको क्या जबाब दोगि, और फिर मे तुम्हारी दीदी के साथ विश्वासघात नही कर सकता..! समझो बात को.
निशा – तो फिर ठीक है, अब दीदी ही आपको मेरे पास लेके आएँगी.. और ये कह कर वो मेरे से अलग होकर अपने रूम में चली गयी.
मे कितनी ही देर बैठा सोचता रहा उसके द्वारा कहे गये शब्दों के बारे में.
ऐसे ही 2 दिन और निकल गये, अब निशा मेरे साथ ज़्यादा फ्लर्ट नही करती थी, लेकिन कुछ उदास सी रहने लगी.
एक रात ट्रिशा जब मेरी बाहों में थी, मैने उसकी गोलाईयों को सहलाते हुए पुछा-
जान ! तुमने एक बात नोटीस की है, निशा आज कल कुछ अन्मनि सी रहती है, तुमने पता नही किया क्यों रहती है..?
ट्रिशा मेरे सीने को सहलाते हुए बोली – वो पागल लड़की कुछ ऐसा चाहती है, जो मे उसके लिए हां नही कह सकती..!
मे – क्या..? ऐसा क्या चाहती है वो तुमसे, जो तुम दे नही सकती उसे..?
हालाँकि मुझे पता था कि वो क्या चाहती है, और शायद उसने अपनी बेहन को बोल ही दिया है..! फिर भी मैने ये सवाल किया.
ट्रिशा मेरी चिन को चूमते हुए बोली – वो अपने प्यारे जीजू के प्यार से थोड़ा सा हिस्सा चाहती है..! जिसके लिए मे अपनी तरफ से कैसे हां कह दूं..?
मैने चोन्क्ने की आक्टिंग करते हुए कहा.. क्या..? क्या ऐसा उसने तुमसे कहा..?
ट्रिशा – हां ! क्योंकि हम दोनो बहनें एक दूसरे से बहुत प्यार करती हैं, और कोई भी बात नही छिपाति.
मैने उसके गाउन की डोरी खोल दी, और उसके दोनो पल्लों को अलग करके उसके अनारों पर गोल-2 उंगली घुमाते हुए पुछा – वैसे उसने तुमसे क्या कहा था..?
ट्रिशा अपनी चुचि को मेरे बाजू पर दबाते हुए बोली – पहले तो उसने मुझसे प्रॉमिस लिया, कि क्या वो जो माँगे वो उसे मिलेगा,
मैने सोचा की वैसे ही किसी चीज़ की डिमॅंड करेगी, सो मैने उसे प्रॉमिस कर दिया…लेकिन जो उसने कहा, उसे सुनकर मे सन्न रह गयी..
मे – ऐसा क्या कहा उसने ?
ट्रिशा – वो कुछ देर तो चुप रही, फिर सकुचाते हुए बोली, दीदी मे अपनी वर्जिनिटी जीजू को देना चाहती, प्लीज़ क्या आप बस एक रात के लिए उनका प्यार मेरे साथ शेयर कर सकती हैं…?

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