Update 75
ज़फ़्फ़र ने गनी को इस हालत में पाए जाने की कतई उम्मीद नही की होगी, सो वो उसे देखते ही बुरी तरह चोन्क्ते हुए बोला –
कॉन हो तुम लोग..? और गनी भाई जान को इस तरह क्यों बाँध रखा है..?
मैने उसके ठीक सामने खड़े होकर उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा-
हम इस महान देश के अदना से सिपाही हैं, और रही बात इस देश के गद्दार को इस तरह बाँधने की…
तो तुझ जैसे चूहे को उसके बिल से निकालने के लिए रोटी का टुकड़ा पिजरे में रखना पड़ता है ज़फ़्फरुल्ला ख़ान,
ज़फर – ओह ! तो तू ही वो इंसान है, जिसने हमारे प्लान की धज्जियाँ उड़ाई हैं..
लेकिन तू ये भूल गया, कि जिस आदमी ने तेरे मुल्क में इस कदर तावही मचा रखी हो उसे तू चूहा समझ रहा है हरम्जादे..?
लगता है अभी तू वाकिफ़ नही है मुझसे, ज़फ़्फरुल्ला ख़ान नाम है मेरा.
वो तो मे पहले ही बोल चुका हूँ तेरा नाम ! तू मुझे बताने की जहमत मत कर – मैने उसे और खिजाते हुए कहा,
वैसे हमारे मुल्क में चूहों के ऐसे ही नाम रखे जाते हैं. तभी तो तू अपने बिल में बैठकर हमारे कपड़े कूतरता रहता है..
ज़फर- अभी तुम लोगों का वास्ता मुझ जैसे शेर से नही पड़ा.. हरामी के पिल.ले…..तड़क..तड़क..
वो अपना डाइलॉग पूरा बोल भी नही पाया था, कि दोनो के सर पर पीछे से रेवोल्वेर के हॅंडल की भारी भरकम चोट ने उन्हें फिर से सोफे पर ढेर होने पर मजबूर कर दिया.
रेवोल्वेर के दस्तों की चोट इतनी पवरफुल और सटीक जगह पर पड़ी, कि असलम तो पड़ते ही ढेर हो गया, और अपनी चेतना खो बैठा.
लेकिन ज़फ़्फरुल्ला बड़ा जीवट किस्म का इंसान था…वो उस चोट झेल गया, और साथ ही फुर्ती से घूमकर विक्रम के हाथ से रिवॉलव छीन ली.
ना केवल गन उसके हाथ से छीनी, वल्कि उसे अपने निशाने पर लेकर गुर्राया…
चल वे चूहे सामने आ, ऐसे खिलौनों से शेर का शिकार नही कर पाओगे तुम लोग…
क्षण भर के लिए ही सही, पासा उसके हाथ में आ गया था… लेकिन चूँकि उसका ध्यान विक्रम पर ही था…
विक्रम मेरी तरफ देखने लगा, मैने इशारे से उसको सामने आने को कहा…
वो जैसे – 2 मेरी तरफ बढ़ रहा था, साथ ही साथ ज़फ़्फ़र हम दोनो पर नज़र बनाए हुए उसे निशाने पर लेकर उसके साथ ही घूम रहा था…
वो जैसे ही मेरे 90 डिग्री पर आया, और उसका ध्यान रणवीर की तरफ गया, मेरी एक टाँग हरकत कर गयी…
पैर की किक सीधी उसके रेवोल्वेर पर पड़ी, नतीजा ! रेवोल्वेर उसके हाथ से छूट कर उपर हवा में उठती चली गयी…
इससे पहले कि वो ज़मीन पर गिरती, विक्रम ने हवा में जंप लगाकर उसे कॅच कर लिया..और उसे ज़फ़्फ़र की कनपटी पर फिर से दे मारा…
इस बार ज़फ़्फ़र अपनी चेतना खोने से नही बचा सका, अब वो दोनो ही हमारे सामने बेहोश पड़े हुए थे…,
फिर उन दोनो को भी बाँध कर डाल दिया गया, उसके बाद उनको होश में लाया गया, और फिर दौर शुरू हुआ उनको टॉर्क्चर करने का,
उन तीनो को दो दिन तक हम लोग टॉर्क्चर करते रहे, बड़ा ढीठ था साला जाफ़रुल्ला,
जब उसके हाथ और पैरों के कई अंग काट डाले, तब जा कर उसने बोलना शुरू किया.
देशभर में उसके कितने नेटवर्क काम कर रहे हैं, कॉन-कॉन कहाँ कहाँ इन्वॉल्व है उसके साथ,
हमारे देश के खिलाफ उसका क्या-2 मिसन था, और कॉन-कॉन से संगठन थे पाकिस्तान में जो भारत के खिलाफ काम कर रहे है, सारी इन्फर्मेशन उससे निकाल ली.
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गनी और रुखसाना को पोलीस के हवाले कर दिया गया, ये सारा काम बिना हमारे सामने आए होम मिनिस्ट्री की स्पेशल सेल के नाम पर हुआ था.
गनी के बच्चे को बाल सुधार घर भेज दिया गया, और उसकी सारी चल-अचल संपत्ति को जप्त कर सरकारी खजाने में जमा कर दिया गया.
उसे मोहरा बना कर इंटरनॅशनल लेवेल पर पाक के नापाक इरादों को नंगा करने के लिए इस्तेमाल करना था.
इस तरह से एक बहुत बड़ा आतंकवादी संघटन दुनिया से मिटा दिया गया था, साथ ही ना जाने कितनी जानें जाने से बच गयी.
मेरा ये एनएसएसआइ के अंडर कवर एजेंट के तौर पर पहला अफीशियल मिसन था, जो कामयाब रहा,
जिसकी पीएम ने अपने सामने बिठा कर भूरी-भूरी प्रशंसा की और कुछ विशेष अधिकार भी दिए जो भविश्य में काम आने वाले थे.
पीएम आगे बोले..! बेटे ऐसे ही देश की सेवा करते रहो, तुम्हारे जैसे देश के सच्चे सिपाहियों की कमी है इस देश में.
हम अब रहें या ना रहें, हो सकता है कि अब ज़्यादा दिन इस देश की सेवा कर नही पाएँगे क्योंकि हमें तो 5 साल के लिए ही चुना गया है,
अगले 6 महीनों में चुनाव हैं, हमें लग रहा है कि आने वाली सरकार में हमारा कोई रोल नही रहने वाला.
लेकिन हमें खुशी इस बात की रहेगी, कि तुम्हारे जैसे सपूत इस देश में मौजूद रहेंगे..! सो विश यू ऑल दा बेस्ट आंड टेक केर फॉर युवरसेल्फ टू.
हो सकता है अब हमारी मुलाकात पीएम के पद पर रहते हुए ना हो.
रणवीर और विक्रम को स्पेशल ड्यूटी पर मेरा साथ देने के लिए भेजा था, जो उन्होने बखूबी निभाया था.
इसके लिए उन दोनो को भी पुरशकृत किया गया….!
देखते -2 मेरी शादी का वक़्त नज़दीक आ पहुँचा, अगले हफ्ते मेरी और ट्रिशा की शादी थी,
वो यूपी पूर्वांचल के एक छोटे से शहर में एसपी नियुक्त हो चुकी थी.
हम दोनो ने एक हफ्ते की लीव ले ली. दोनो तरफ के मुख्य-2 रिस्तेदारो को मैने अपने पास ही बुला लिया,
उनमें मेरे कॉलेज फ्रेंड्स भी थे, एक गेस्ट हाउस और शादी के लिए पार्टी प्लॉट बुक कर दिया.
बड़े सादे तरीक़े से हम दोनो शादी के बंधन में बँध गये. दोनो ही ओर खुशी का माहौल था.
मेरी माँ भी किसी तरह से शादी में शामिल हुई और अपने अंतिम वर-बधू को आशीर्वाद दिया.
शादी के बाद ज़्यादातर लोग दूसरे दिन ही विदा हो गये, ट्रिशा के माता-पिता अभी ठहरे हुए थे, जो उसके साथ ही जाने वाले थे.
आज हमारी सुहागरात थी, ट्रिशा कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड थी इस क्षण को लेकर, ना जाने कितने सालों से इस रात का उसने इंतजार किया था.
अपनी सुहाग सेज को उसने खुद अपने तरीक़े से सजाया था.
आज फूलों से सजे एक मास्टर बेड पर हम सिर्फ़ दोनो ही थे, जो आज एका-कार होने के लिए वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे,
ख़ासकर ट्रिश जो आज मेरी अर्धांगिनी बनी, सिकुड़ी सिमिटी सी लाल सुर्ख जोड़े में पलंग पर बैठी थी थोड़ा घूँघट निकाल कर अपने प्रियतम के इंतेज़ार में, कि कब वो आए और उसका घूँघट खोले.
मैने कमरे में प्रवेश किया और उसको अंदर से बोल्ट करके धीरे-2 कदमों से चल कर बेड पर आकर बैठ गया.
ट्रिशा के मेहदी भरे हाथों को अपने कठोर हाथों में लेकर मैने कहा- ट्रिशा.. ! अब ये घूँघट किसके लिए है..? इसे उतारो जान ! मे अपने चाँद के दर्शन करना चाहता हूँ.
उसने ना में गर्दन हिला कर इशारा किया और वो ज़्यादा सिमट कर बैठ गयी.
मैने थोड़ा सा उसे सताने के उद्देश्य से कहा- तुम तो पहले दिन से ही मेरी बात की अवहेलना करने लगी, भाई ये नाचीज़ अब आपका पति है, आइपीएस का अरदली नही,
ये कहकर मैने अपने हाथ उसके घुटनों पर रख दिए, तो उसने अपने घुटने और अंदर को समेट लिए.
मे उठकर खड़ा हो गया और बोला- ठीक है कोई बात नही, वैसे भी एक आइपीएस और इंजिनियर का कोई मुकवला नही है. मे चलता हूँ टेक केर, ये कहकर मे वहाँ से जाने लगा.
उसने मेरा हाथ थाम लिया और बोली- और कितना सताओगे प्राणनाथ..? एक नव विवाहित लड़की के अरमानों की तो कद्र करो, जो काम आपको करने चाहिए वो तो आपको ही करने होंगे ना..!
मे फिर से उसके बगल में बैठ गया और उसके घूँघट को अपने हाथों में लेकर उलट दिया.
जैसे कोई चाँद निकल आया हो उस कमरे में, ट्रिशा सचमुच किसी चाँद से कम नही लग रही थी, नज़रें पलंग की चादर को देख रही थी, होंठ थर थरा रहे थे उसके.
मैने अपनी शेरवानी की जेब से एक नेकक्लेशस निकाला और उसे ट्रिशा के गले में पहना दिया, और बोला- ये आपकी मुँह दिखाई का तोहफा है, अगर पसंद हो तो कबूल कर लीजिए.
मुझे आपका हर तोहफा कबूल है स्वामी..! -वो नज़रें नीची किए हुए ही बोली.
फिर भी एक बार देख तो लो जान ! कैसा है..? मैने कहा तो उसने उसे अपने हाथ में लेके देखा और बोली- सच में बहुत खूबसूरत है..
मैने उसका चाँद सा मुखड़ा अपने हाथों में लेकर कहा – लेकिन तुमसे ज़्यादा खूबसूरत नही,
सच कहूँ तो आज में अपने आपको बहुत शौभागयशाली महसूस कर रहा हूँ कि तुम मेरी पत्नी हो.
वादा करो कि हमारा पेशा, हमारे फ़र्ज़ कभी हम दोनो के बीच नही आएँगे.
ट्रिशा- वादा मेरे स्वामी, मे अपने काम, अपने फ़र्ज़ को हम दोनो के बीच नही आने दूँगी . लेकिन फ़र्ज़ से कभी गद्दारी नही कर पाउन्गि उस बात का ख्याल आपको रखना होगा.
मे – बेशक ! मे अपनी पत्नी के उत्तरदयुक्तों को भली- भाँति समझता हूँ.
और ये सुनिश्चित करूँगा कि मेरी पत्नी की मेरी वजह से कभी नज़र नीची ना हो.
अब मैने उसके मेहदी भरे हाथों को फिर से अपने हाथों में लिया जिन पर मेरे नाम की मेहदी थी और उनको चूम लिया, उसके बाद उसके माथे को गालों को गर्दन को चूमने लगा.
वो आँखें बंद किए मादक उमंगों में खोती जा रही थी.
जब मैने उसके होठों को हल्के से अपने हाथ के अंगूठे से सहलाया… आह..कितने मुलायम, पतले सुर्ख होंठ..
मन अपने आप खींचा चला गया और मेरे तपते होंठ उसके लिपीसटिक लगे सुर्ख पतले रस्सीले होठों पर टिक गये और उनपर मैने बस एक हल्का सा किस कर दिया.
उसका रोया-2 काँप गया मेरे होठों के स्पर्श मात्र से ही, और शरमा कर अपना मुँह दोनो हाथों से ढांप लिया.
मैने उसके दोनो हाथ अपने हाथों से पकड़ कर उसके शर्मो-हया में डूबे चेहरे से हटाए और उसके कान में फुसफुसा कर कहा.. क्या हुआ जान.. चेहरा क्यों छुपा रही हो मुझसे..?
वो- शर्म आ रही है मुझे आपसे..!
मे – अब मुझसे कैसी शर्म मेरी जान.. अब तो हम एक होने जा रहे हैं, ऐसे ही शरमाती रहोगी तो ये हसीन रात जो वर्षों के बाद आई है,
जिसको तुमने ना जाने कितनी बार ख्वाबों ख़यालों में देखा होगा वो यौंही बीत जाएगी.
वो – उउन्नहु… मुझे कुछ नही पता..? आपको जो करना है करिए..!
मे – ये ठीक बात नही है, ये रात तो हम दोनो की है ना..! तो फिर हम दोनो को ही मिलकर मनानी होगी..!
चलो ये गहने और ये भारी-भरकम कपड़े अलग करो, ये आज की रात हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं, इतना कहकर मे उसके गहने एक-2 करके उतारने लगा.
अब उसके माथे का टीका और नाक की नथ ही शेष थे जो मैने जान बूझकर नही उतारे.
फिर उसकी साड़ी को भी उसके बदन से अलग कर दिया, ब्लाउस और पेटिकोट में वो स्वर्ग से उतरी किसी अप्सरा जैसी लग रही थी,
मैने उसको धीरे से पलंग पर लिटा दिया और उसके अतुल्यनीय रूप को अपनी आँखों से पीने लगा.
उसके काले घने बालों के बीच हल्की लालिमा लिए उसका गोरा चिटा गोल चेहरा मानो बादलों के बीच चाँद निकल आया हो,
माथे पर छोटी सी बिंदिया, कमान जैसी उसकी भवें (आइ ब्रो) हल्के काजल से भरी उसकी हिरनी जैसी चंचल आँखें मानो कुछ कहना चाहती हों,
मैने अपने तपते होंठो से उसकी बंद आँखों की पलकों को चूम लिया.
सुराई दार गर्दन, जिसके नीचे पतली सी एक रेखा नीचे को जाती हुई, जो आगे जाते-2 चौड़ाई में बदल रही थी.
सुर्ख कपड़े के ब्लाउस में क़ैद उसके सुडौल वक्ष जो अभी 24” के भी नही हुए थे.
ट्रैनिंग में किए गये अथक मेहनत की वजह से एकदम ठोस टेनिस की बॉल की तरह गोल-गोल संतरे जैसे उसके उरोज.
उसके नीचे उसका एक दम पतला सा सपाट पेट, जिसके मध्य में एक चबन्नी के साइज़ की नाभि, जो कभी-2 हिलने लगती थी.
कमर इतनी पतली हो गयी थी उसकी कि दोनो हाथों के बीच में समा जाए.
वो अपनी दोनो टाँगें जोड़े हुए लेटी थी, पेटिकोट में धकि उसकी गोल लेकिन सख़्त जांघे, थोड़ी मोटाई लिए, जांघों के बीच जहाँ उसके पेटिकोट का कपड़ा थोड़ा चारों तरफ से सिकुड गया था,
ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी नदी में तेज बहाव के कारण भवर पड़ गये हों.
उसके रूप सौन्दर्य में खोया हुआ मे उसके पैरों तक चला गया, और उसके महाबर से रंगी मुलायम पैरों की उंगलियों को मुँह में लेकर चूसने लगा.
ट्रिशा ने चोंक कर अपनी गर्दन उठाई.. और झट से अपना पैर खींचते हुए बोली..
नाथ ! ये क्या अनर्थ कर रहे है आप..? मेरे पैरों को तो आपको छुना भी नही चाहिए और आपने तो..मुँह.. क्यों पाप चढ़ा रहे हैं मुझ पर.
मैने उसका चाँद सा मुखड़ा अपने हाथों में लेकर कहा – क्या तुम सच में आइपीएस ऑफीसर हो..?
मेरी बात सुनकर वो बोली – क्या मतलब..? इसका इस बात से क्या लेना देना..?
मैने कह – तुम्हारे ये पैर शरीर से अलग हैं क्या..? नही ना.. तो जब मुझे तुम्हारे शरीर का जो अंग अच्छा लगेगा उसको में मन मर्ज़ी प्यार कर सकता हूँ, फिर पैरों को क्यों नही.
वो तुनकते हुए बोली – वो सब मुझे कुछ नही पता, माँ कहती है, पत्नी को हमेशा पति के चरणों में रहना चाहिए.
ग़लती से भी पति, पत्नी के पैर छु भी ले तो वो पाप की भागीदार होती है.
मे – अरे यार तुम तो उपदेश देने लगी, चुप करो ये बाबा आदम के जमाने के दकियानूसी उपदेश और मुझे प्यार करने दो तुम्हें.
वो मेरी बात सुन कर चुप हो गयी…
अब मे उसको पैरों से चूमता हुआ धीरे-2 उपर को बढ़ने लगा, जहाँ मेरे होंठ लगते ही ट्रिशा का वही अंग कंपकंपाने लगता.
चूमते-2 मे उसके पेट पर आ गया और जब मैने उसकी नाभि के उपर चूमा, तो वो खिल-खिला कर उठ कर बैठ गयी.. और बोली..
अरुण प्लीज़ यहाँ नही…हहहे.. नही..नही.. प्लीज़.. हहहे…हहुउ.. मुझे गुदगुदी होती है,
मैने और जान बूझकर उसके पेट को सहला दिया, गुदगुदी के मारे उसके आँसू निकल आए..! अब कुछ ज़्यादा ना हो जाए इसलिए मे उपर को बढ़ने लगा.
मैने उसके गोल सुडौल वक्षों को ब्लाउस के उपर से ही चूमता हुआ उसकी घाटी की दरार पर से गर्दन पर पहुँच गया.
वो अबतक हल्की-2 सिसकियाँ लेने लगी थी, आँखें बंद हो रही थी उसकी, अंत में मैने उसके होठों को चूमा और देर तक चूस्ता रहा, उसको भी बोला तो वो भी मेरी तरह कोशिश करती रही और फिर हम लंबी स्मूच में डूब गये.
मैने उसके ब्लाउस के बटन खोलने शुरू कर दिए, और उसको उतार कर पलंग के नीचे फेंक दिया, ब्रा में कसे उसके उन्नत सुडौल वक्ष इलाहाबादी अमरूद के साइज़ के बड़े आकर्षक लग रहे थे,
जब मैने उनको अपनी मुत्ठियों में कस्के मसला तो ट्रिशा सिसक पड़ी…
आहह… सस्सिईइ… जोरे से नहियीई…प्लस्ससस्स… आहह…दर्द होता है..उईई.. माआ… ऊहह….जानणन्न्… मारीइ..
अब मेरा एक हाथ उसकी चुनमुनिया पर पहुँच चुका था जो उसको प्यार से सहला रहा था..
मैने आपने सारे कपड़े निकाल फेंके सिवाय अंडरवेर के, मुझे रुखसाना वाला अपना एनकाउंटर याद आया और ट्रिशा की ब्रा खोल कर बिस्तर पर लेट गया.
मे- जान तुम मेरे उपर बैठ जाओ, तो वो मेरे पेट पर बैठ गयी, मैने कहा तोड़ा और नीचे तो वो समझ गयी,
तब तक मैने अपने मूसल महाराज को अंडरवेर में हाथ डालकर उपर को करके अपने पेट से लगा लिया.
अब वो मोटी ककड़ी जैसा अंडरवेर में मेरी नाभि की ओर मुँह करके अंडरवेर को फ़ाडे दे रहा था. ट्रिशा अपनी परी की अनखूली फांकों को उसके उपर रख कर बैठ गयी.
मैने उसको अपने उपेर झुका लिया और उसकी कमर को दोनो तरफ से पकड़ कर आगे-पीछे करने लगा, जब उसको तरीक़ा समझ में आ गया,
अब वो खुद से ही अपनी कमर चलाने लगी और अपनी अन्छुइ मुनिया को मेरे लंड के उपेर घिसने लगी, उसके अमरूद मेरी हथेलियों में थे.
हम दोनो मज़े में डूबते चले गये, मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था, जब वो पीछे को कमर ले जाती मेरा सुपाडा खुल जाता और अंडरवेअर के कपड़े के रगड़ से सुरसूराहट और बढ़ जाती.
कमर हिलाते-2 ट्रिशा ने अपना मुँह उपर को उठाया और एक लंबी सी सिसकी भरी कराह मुँह से निकाल कर लंबी-2 साँसें लेने लगी.
उसकी पेंटी कामरस से एक दम तर हो गयी थी, मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था, अगर वो एक दो रगड़े और कस कर लगा देती तो शायद मेरा पानी भी निकल जाता.
ट्रिशा मेरे उपर लेटी हुई थी उसके कड़क हो चुके कंचे जैसे निप्पल मेरे सीने में मीठी-2 चुभन दे रहे थे, मैने ट्रिशा के गले पर किस करके कहा.
मे – जान मज़ा आया…? तो उसने मेरे कंधे में मुँह छिपा कर हुउंम.. करके हामी भरी.
बेबी थोड़ा मेरे साब बहादुर की सेवा करोगी..? तो वो समझ नही पाई और आश्चर्य से मेरी ओर देखा..?
मैने अपने मूसल को रगड़ते हुए कहा, इसको थोड़ा किसी-वीसी दो प्यार करो जिससे ये तुम्हारी परी को जीवन भर अच्छे से प्यार करता रहे.
वो शरमा गयी और ना में मुन्डी हिलाने लगी..!
मे – क्या बेबी, मेरे लिए इतना भी नही कर सकती..?
तो उसने झिझकते हुए मेरे अंडरवेर को उतार दिया और मेरे 8” लंबे और सोट जैसे मोटे लंड को अपने मुट्ठी में लेकर सहलाने लगी,
उसके हाथों में पहुँच कर साहिब बहादुर और अकड़ गये, और एक दम रोड की तरह कड़क हो गये.
वो आगे पीछे करके उसके सुपाडे को खोलने और बंद करके देखने लगी.
मैने कहा क्या देख रही हो जान..? तो वो बोली- आपका ये सिपाही तो बहुत तगड़ा है, मेरी उस छोटी सी परी में कैसे जाएगा..?
कोशिश करने से तो भगवान भी मिल जाते हैं, तुम भी कोशिश करो और इसको अपने मुँह में लेके इसको लूब्रिकेट कर दो.
उसने मेरे सुपाडे को खोल कर अपनी उंगली उसके छेद पर घुमाई, मेरी सिसकारी निकल गयी और एक बूँद अमृत की उसके मुँह पर आ गयी,
ट्रिशा उसको अपनी उंगली के पोर पर रख कर देखने लगी, मैने कहा इसको टेस्ट करके देखो बहुत टेस्टी होता है ये.
वो बोली-छि ये भी कोई टेस्ट करने की चीज़ है, तो मैने थोड़ा नाराज़गी वाले स्वर में कहा.
तुम्हें मेरी किसी बात का विश्वास क्यों नही होता, जाओ अब तुम्हें जो ठीक लगे वो करो..
तो उसने अन्मने भाव से उसको अपनी जीभ की नोक पर ऐसे रखा मानो वो कोई बॉम्ब हो और टच करते ही फट ना जाए.
जीभ पर रख कर कुछ देर उसका टेस्ट समझने की कोशिश करती रही तो मैने पुछा कैसा लगा.
वो बोली – अच्छा है, थोड़ा सा तेज है लेकिन मिठास के साथ, तो मैने कहा फिर चूस्लो इसे, और ज़्यादा मिठास मिलेगी.
फिर उसने अपनी सारी झिझक छोड़ कर मेरे सुपाडे को अपने लाल-2 होठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगी,
बीच-2 में अपनी जीभ की नोक से मेरे छेद को कुरेद देती. मेरा मज़े के मारे लंड फटा जा रहा था. वैसे भी इतनी देर से अकडा हुआ था.
मैने कहा- आअहह मेरी जान.. थोड़ा और अंदर ले ना,, ससिईई.. तेज़ी से मुँह चला .. आहह.. आयईयी.. सीईइ.. और फिर मेरा नल खुल गया..
उसको जैसे ही ये आभास हुआ कि मेरा वीर्य छूट गया है, उसने अपना मुँह हटा लिया.. हटते-2 भी एक दो पिचकारी तो उसके मुँह में ही छूट गयी और फिर होली के पिचकरे की तरह से उसके मुँह को अपने ताज़े मक्खन से रंग दिया.
वो तुरंत वॉश रूम की ओर भागी और अपना मुँह सॉफ किया. वापस आकर मेरे बगल में लेट गयी.
और क्या-2 कराओगे मुझसे.. वो बोली,
तो मैने कहा- तुम्हें ये सब अच्छा नही लगा..?
वो बोली- नही..नही..! ऐसी बात नही है, मे तो बस ऐसे ही पुच्छ रही थी.
कुछ देर हम एक दूसरे की बाहों मे लिपटे ऐसे ही पड़े रहे, मेरे हाथ उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके कूल्हे पर चले गये,
उसकी मुलायम गोल-मटोल गान्ड को सहलाते-2 उसकी दरार में उंगली घुमाने लगा, तो उसने मुझे और ज़ोर से कस लिया.
अब मैने उसको सीधा करके लिटा दिया और उसकी टाँगों के बीच आकर बैठ गया, उसने अपनी टांगे भींच ली तो मैने पुश करके एक दूसरे से अलग किया. और उसकी पेंटी को उतार फेंका.
उसकी अन्छुइ परी पहली बार मेरी आँखों के सामने थी, मैने नज़ाकत से उस पर हाथ फिराया और फिर उसकी फांकों को अलग करके उसके अन्द्रुनि गुलाबी भाग को अपने जीभ से चाट लिया..
उसके मुँह से सिसकी निकल गयी और कमर हिलाने लगी, दो-तीन बार जीभ उपर से नीचे फिराने के बाद मैने अपने मूसल को उसकी परी के होठों पर रख कर उसको उसकी खुश्बू सूँघाई,
वो मस्ती में झूम उठा, अब वो बिफरे सांड़ की तरह उसमें घुसने के लिए व्याकुल हो उठा.
मैने भी उसकी मनसा जान, ट्रिशा की परी के होठों को खोल्कर उसके लिए रास्ता बनाया और उसके छोटे से छेद पर अपना कड़क सोट जैसा लंड रख कर पुश करने ही वाला था कि मेरे फोन की बेल घनघना उठी…..!
इस वक़्त किस भेन्चोद की गान्ड में खुजली हुई है यार..! साला खड़े लंड पर हथौड़ा मारने जैसी हालत हो गयी मेरी तो.
फिर सोचा शायद कोई दोस्त मज़ाक करने के मूड में होगा तो उसको एक-आध गाली सुनाकर चुप करा दूं पहले.

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