Update 141
पहले तो वो शाकीना की वजह से भड़क गये, लेकिन फिर ज़्यादा मिन्नतें करने के बाद बोले-
देखो अरुण मे अपने बिहाफ पर तुम्हें उसे लाने की पर्मीशन दे सकता हूँ,
लेकिन यहाँ उसे कैसे और किस तरह से रखना है, वो तुम्हारा पर्सनल मॅटर होगा,
और हां ! किसी भी तरह ये बात पब्लिकली नही होनी चाहिए..
मैने उन्हें आश्वस्त किया और बीएसफ से बात करने की रिक्वेस्ट की,
उनके हां बोलते ही मैने कॉल कट की, शाकीना के पास आकर उसका हाथ पकड़ा और अपना बॅग लेकर नदी के ठंडे पानी में उतर गये…….
नदी के पानी में पैर रखते ही हम दोनो की कंपकंपी छूट गयी, होठ ठंड से थर-थर काँपने लगे,
लेकिन हम पानी के अंदर और अंदर चलते चले गये, कुछ देर में हमारे शरीर एकदम सुन्न पड़ गये, और ठंड का असर कम होने लगा.
हम कोशिश में थे कि ज़्यादा से ज़्यादा किनारे की तरफ ही रहें जिससे हमें तैरने में अपनी एनर्जी वेस्ट ना करनी पड़े,
क्योंकि नदी का बहाब पाकिस्तान की तरफ था, और बहाब के विपरीत तैरना हर किसी के वश की बात नही….
लेकिन जैसे ही अपनी सीमा पर पहुँचे, यहाँ पानी के अंदर तक स्टील की वाइयर जाली से बाउंड्री जैसी थी, जिस लेवेल पर हम खड़े थे वहाँ तक तो वो जाली ज़मीन में अंदर तक गढ़ी हुई थी.
थोड़ा और अंदर गये, अब पानी हमारे गले से उपर तक था, पैरों से चेक किया तो जाली में यहाँ भी गॅप नही मिला,
फिर मैने उसको वहीं खड़ा रहने को कहा और मैने पानी के अंदर डुबकी लगा दी.
थोड़ी दूर तक जाली के सहारे-2 पानी के अंदर तैरने के बाद कुछ गॅप मिला जहाँ से एक आदमी सावधानी से ज़मीन से चिपक कर पार हो सकता था.
मे वापस आया और शाकीना को सब डीटेल में समझाया..
वो भी बड़ी जीवट वाली लड़की थी, तैरना तो उसे अच्छे से आता ही था, सो थोड़ी सी कोशिश के बाद हम सीमा पार कर गये…
आख़िरकार अपने प्यारे वतन की सीमा में आज 5 सालों के बाद मैने कदम रखा था.
भोर का उजाला अब जल्दी ही होने को था, धीरे-2 एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए हम दोनो किनारे तक पहुँचे और नदी की ठंडी रेत में थोड़ा सुसताने के लिए बैठ गये,
सुबह के धुंधले उजाले में नदी के झक्क नीले पानी में कल-कल करती लहरों का आनंद लेने लगे.
अभी हमें कोई 10 मिनट भी नही हुए थे वहाँ बैठे, की हमारे पीछे से एक कड़क आवाज़ कानों में पड़ी… हॅंड्ज़ अप…..!
हमने पीछे मुड़कर देखा, हमसे कुछ ही फ़ासले पर 4 बीएसफ के जवान हाथों में गन लिए जिनका निशाना हमारी ओर ही था खड़े थे,
उनमें से वही पहले वाले ने फिर से कड़कदार आवाज़ में कहा….
हाथ उपर, कोई हरकत की तो भून दिए जाओगे…
हम दोनो ने अपने-अपने हाथ उपर कर लिए, शाकीना डर के मारे थर-थर काँप रही थी…
मैने इशारे से उसे रिलॅक्स रहने को कहा…
वो जवान निशाना लगाए हुए हमारे नज़दीक तक आए और कोई 10 कदम दूर पर आकर खड़े हो गये..
उनमें से फिर वहीं जवान बोला – कॉन हो तुम लोग..? और यहाँ कैसे बैठे हो..?
मैने उन्हें सच बताना ही बेहतर समझा, इसलिए तुरंत कहा – हम पाकिस्तान की सीमा क्रॉस करके अभी-अभी आए हैं..
वो चोन्कते हुए बोला – क्या..?? तुम लोग पाकिस्तानी हो..??
मे – नही ! हम हिन्दुस्तानी हैं, क्या आप लोगों को अपने ऑफीसर की तरफ से कोई इन्फर्मेशन नही मिली.?
वो – नही अभी तक तो नही, वैसे कॉन हो तुम लोग..? क्या नाम है तुम्हारा..?
मे थोड़ा आगे की ओर बढ़ा तो उसने मुझे फिर से वॉर्न किया, फिर मैने उसको थोड़ा साइड में आने का इशारा किया,
कुछ सोचकर वो साइड को हुआ मे भी उसकी तरफ हाथ उपर किए हुए ही बढ़ा.
वो अभी भी उतनी ही दूरी बनाए हुए था, जब लगा कि अब मेरी बात शाकीना तक नही सुनाई देगी तो मे उससे कहा –
आप अपने ऑफीसर से कॉंटॅक्ट करो और उनको बोलो एजेंट 928 भारत लौट आया है..
उसने वहीं खड़े-2 ट्रांसमीटर से अपने कॉंमांडेंट को कॉंटॅक्ट किया और जो मैने बोला था वही सब उसने कहा.

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