Update 138
मैने अपना पैर उसके गले पर रख कर दबा दिया, वो कुछ देर मेरे पैर को अपने हाथों से जकड कर हटाने की कोशिश करता रहा,
उसके गले की नसें फूल गयी, साँसें रुकने लगी…, मुँह से गून..गून..की आवाज़ें निकल रही थी….
फिर उसने अपनी पूरी चेतना समेट कर मेरे पैर को पकड़ कर मुझे पीछे की तरफ धकेल दिया…
मे थोड़ा लड़खड़ा कर पीछे को हटा, इतने में ही वो उठ खड़ा हुआ… और गुर्राते हुए मेरे उपर झपटा…!
मानना पड़ेगा, यौही उसे इतने बड़े ओहदे पर नही बिठाया गया था, बहुत ताक़त और फुर्ती थी खालिद के शरीर में…
हम दोनो किन्हीं दो भैंसॉं की तरह एक दूसरे से भिड़े हुए थे…
मुझे लगा कि समय बर्बाद होता जा रहा है, अब जल्दी ही कुछ करना होगा,
खालिद के वार मुझे कमजोर करते जा रहे थे…फिर मैने अपनी पूरी आंतरिक शक्ति को इकट्ठा किया, और उसे अपने से दूर उच्छाल दिया…
मैने कुछ देर अपने गले को सहलाते हुए साँसों को इकट्ठा किया, खालिद को लगने लगा कि मे अब उसके मुक़ाबले कमजोर पड़ता जा रहा हूँ…
हालाँकि, वो भी पस्त होता जा रहा था, लेकिन अपने को मेरे उपर हाबी दिखाने की जी तोड़ कोशिश कर रहा था…
खून से लथपथ उसका चेहरा किसी भयवह आदमख़ोर जैसा लग रहा था…
मैने जानबूझकर अपने को थोड़ा सा कमजोर दिखाने की कोशिश की, इसलिए उसने इस बार अपनी पूरी ताक़त से मेरे उपर झपट्टा मारा,
मे फुर्ती से थोड़ा अपनी जगह से हटा, और उसके पैरो में अड़ंगी लगा दी…,
वो औंधे मुँह फर्श पर जा गिरा, इतना समय मेरे लिए काफ़ी था…
सो उच्छल कर मे उसकी पीठ पर सवार हो गया, अपना एक घुटना उसकी पीठ पर जमाकर, मैने अपना बाजू उसके गले में लपेट दिया…
घुटने का भरपूर दबाब पीठ पर डालते हुए मैने अपनी पूरी शक्ति से उसके गले को दबाए हुए उसकी गर्दन को उपर उठाता ही चला गया…
मेरे उपर इस समय जुनून सवार था… मुझे ये भी जानने का होश नही था कि उसकी क्या हालत हो रही होगी..
मे उसकी गर्दन को पीछे की तरफ मोड़ता ही चला गया, अंततः एक कड़क की आवाज़ के साथ उसकी गर्दन की हड्डी टूट गयी..
उसके हाथ पैर ढीले पड़ने लगे…
मैने यहीं बस नही की, चीते की फुर्ती से भी तेज उसके उपर से उठा, दोनो टाँगों को पकड़ कर ज़ोर से कमरे में चारों तरफ घुमाया,
और पूरी ताक़त से उसका सर कमरे की दीवार से दे मारा…
भड़ाक्कक….किसी तरबूज की तरह खालिद की खोपड़ी खुल गयी…
मैने अच्छी तरह उसकी साँसों को चेक किया और जब कन्फर्म हो गया कि अब ये मर चुका है,
अपने खंजर से उसके लिंग को काट कर एक कोने में फेंक दिया…
अब मुझे यहाँ से जल्द से जल्द शाकीना को लेकर निकलना था सो उसके कपड़े जो इधर-उधर बिखरे पड़े थे, इकट्ठा किए,
जैसे-तैसे करके उसके बदन में डाले और उसके बेहोश शरीर को कंधे पर लाद कर गेट से बाहर लाया, फिर बाहर से गेट लॉक किया और तेज-तेज कदमों से गॅलरी में बढ़ गया…
गेट पर खड़े गार्ड ने सवाल किया – अरे जनाब इसे क्या हुआ ..??
मैने फ़ौरन से भी पेस्टर जबाब दिया, इसकी हालत ज़्यादा खराब है, अभी हॉस्पीटल ले जाना पड़ेगा…
फिर उसने आगे कोई सवाल नही किया और मे उसके बेहोश शरीर को अपने कंधे पर लादे जीप की तरफ बढ़ गया.
मुझे पता था चाबी अभी भी जीप में ही है, सो उसको आगे की सीट पर टिकाया, वो इधर से उधर लुढ़क रही थी…
मुझे लगा ये आगे नही बैठ पाएगी, तो फिर ले जाकर उसको पीछे की सीट पर लिटाया और जीप मेन गेट की तरफ जीप दौड़ा दी.
गेट पर खड़े गार्ड्स ने रोकने की कोशिश की तो मैने उन्हें समझा दिया कि इसकी हालत ज़्यादा सीरीयस है,
इसे अभी के अभी मेडिकल ट्रीटमेंट की ज़रूरत है…अपने चीफ की बात भला वो कैसे ना मानते…
फिर उन्होने बिना कोई और सवाल किए गेट खोल दिया और मैने जीप बाहर को दौड़ा दी.

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