Update 130
वो एक सिंगल पीस एकदम कसे हुए गुलाबी सूट में जो बमुश्किल से उसकी मोटी-मोटी चिकनी मोटी जांघों को ढक पा रहा था
और डीप गला होने के कारण उसके गुलाबी रंगत लिए दूधिया उभर काफ़ी हद तक उजागर हो रहे थे….
बेपमहा हश की मालिका शाकीना उपर से इतने भड़काऊ कपड़े, किसी का भी ईमान डॅग मगा दे.
मुझे अपनी तरफ यूँ देखते पा कर वो मेरे सामने खड़ी स्माइल देते हुए बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं जनाब..?
मैने उसे फिर से अपनी गोद में खींच लिए और उसके सेब जैसे गुलाबी गाल को अपने मुँह में भरके चूस्ते हुए बोला – बेचारा खालिद मियाँ … कैसे कंट्रोल कर पता होगा अपने उपर..?
ये कपड़े उसी ने कल गिफ्ट किए थे, और खास हिदायत से आज पहनने के लिए बोला था, आज तो मुए ने मेरा जीना मुँहाल ही कर दिया था – वो थोड़ा संजीदा स्वर में बोली.
मुझे ही पता है कैसे-2 करके आज का दिन निकाला है मैने, कितनी ही बार मेरी पेंटी गीली कर दी थी उसकी हरकतों ने.
मैने उसकी जांघों को सहलाते हुए उसकी मिडी को और थोड़ा उपर सरकाते हुए कहा- दिखाना किस कदर गीली हुई है, और अपना हाथ उसकी पेंटी के उपर से ही उसकी चूत को सहला दिया.
उसने मेरे हाथ पर प्यार से थप्पड़ मारा और हंसते हुए बोली- आपको शरारत सूझी है, यहाँ मेरी जान मुशिबत में फँसी है…
कैसे-2 मे अपने आप को संभाले हुए हूँ, मे ही जानती हूँ.
वो मेरी आँखों में झाँक रही थी, जिनमें कुछ परेशानी के साथ-साथ कुछ पाने की चाहत साफ-साफ दिखाई दे रही थी,
जो प्यास एक बाहरी इंसान ने उसकी भावनाओं को भड़का कर बढ़ा दी थी उसे बुझाने की चाह, जिसे बुझाना मेरा फ़र्ज़ भी था.
मैने उसके होठों को चूमते हुए कहा- जानेमन अभी तुम अपनी अम्मी के पास जाओ, फ्रेश होकर खाना खाकर यहीं आ जाना आज.. ठीक है.
उसने भी एक स्वीट किस दिया और मुस्कुराती आँखों से मेरी ओर देखते हुए मेरी गोद से उठ कर अपनी अम्मी के पास चली गयी…
उसके जाने के बाद मैने वो पेपर उठाए और जैसे-2 उस ड्राफ्ट रिपोर्ट को पढ़ता गया, मेरा शरीर उत्तेजना और भय से काँपने लगा.
फ़ौरन मैने वो रिपोर्ट स्कॅन की और उसे अपने हेड ऑफीस भेज दी, उसके बाद उसकी कॉपी मैने ट्रिशा के ईमेल अड्रेस पर मैल कर दी.
30 मिनट में ही उसकी तरफ से कन्फर्मेशन के साथ कुछ सवाल भी थे, मैने उसे वीडियो चॅट पर आने को कहा, और जब वो मेरे रूबरू हुई.
सबसे पहले मैने उसे बच्चों के बारे में पुछा तो उसने बताया कि वो अपने रूम में पढ़ रहे हैं,
जब उसने उनसे बात करने के लिए पुछा तो मैने मना कर दिया कि खम्खा मुझे देख कर बच्चे कुछ उल्टा सीधा सवाल करने लगेंगे.
फिर बहुत देर तक में उसे योजना समझाता रहा कि किस तरह उसे ये प्राब्लम सॉल्व करनी है.
अभी हम बात करके चुके ही थे कि डोर बेल बजने लगी, मैने सिस्टम ऑफ किया और जाकर डोर खोला, सामने शाकीना अपने हुश्न के जलवे बिखेरती हुई खड़ी थी,
मैने उसको अंदर खींचा और डोर बंद करके गोद में लिए-2 ही सोफे तक लाया.
आज मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था, क्योंकि अपनी जान जोखिम में डाल कर आज वो जो रिपोर्ट निकाल कर लाई थी, वो मेरे लिए कितनी अहम् थी,
उस बेचारी को इसका कोई गुमान ही नही था…..
शाकीना एक लूज सा सिल्क का पाजामा पहने थी, उपर उसने शॉल डाल रखी थी, मेरे गेट खोलते उसने खिल-खिलाते हुए अपनी शॉल आयेज से हठाडि,
जैसे ही मेरी नज़र उसके टॉप पर पड़ी, मेरी आँखे चौड़ी हो गयी.
उपर उसने एक बहुत ही हल्के कॉटन का सफेद रंग का शॉर्ट कुर्ता डाल रखा था, जिस पर लखनबी कढ़ाई सी हो रही थी,
कुर्ते का कपड़ा इतना झीना था कि उसकी बिना लेश की ब्रा एकदम साफ-2 दिख रही थी, यहाँ तक कि उसके शरीर का गोरापन ज्यों का त्यों नुमाया हो रहा था.
मैने उसे गोद में उठाया और सोफे की तरफ चल दिया, मेरे होठ उसके होठों का रस्पान कर रहे थे.

