My Life @Jindgi Ek Safar Begana – Update 129

My Life @Jindgi Ek Safar Begana - Incest Story
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Update 129

अपने तीन साथियों का ऐसा हश्र देख कर उस चौथे आदमी की गान्ड फट के हाथ में आ गयी और उसने अपने पास की झाड़ियों में छलान्ग लगा दी.

अब उसके और मेरे बीच में हमारी गाड़ी थी, मुझे डर था कि अगर उसकी नज़र रहीं चाचा पर पड़ गयी तो वो उनको नुकसान पहुँचा सकता है.

लिहाजा मे अपनी जान की परवाह ना करते हुए अंधेरे का लाभ उठाकर गाड़ी की तरफ रेंगता हुआ बढ़ने लगा.

वो बंदा शायद कुछ ज़्यादा ही डर गया था, और अब वो अपने आप को बस किसी तरह मुझसे बचना चाहता था,

सो गाड़ी की आड़ का सहारा लेते हुए पीछे की झाड़ियों की तरफ ही रेंगने लगा….

मे भी रेंगते हुए अब गाड़ी तक पहुँच गया था, झाड़ियों में उसके सरकने की आवाज़ मुझे सुनाई दे रही थी.

मैने अपना सर उठा कर देखने की कोशिश की तो मुझे सिर्फ़ झाड़ियाँ हिलती नज़र आ रही थी….!

मुझे अब फिर से डर सताने लगा, क्योंकि वो भी रहीम चाचा की तरफ ही जा रहा था,

जा क्या रहा था लगभग उनके पास तक पहुँच ही गया था, और अब कभी भी उसकी नज़र उनपर पड़ सकती थी ….

मे अब रिस्क लेकर बैठे-बैठे ही अपने पंजों पर मेढक की तरह चलने लगा और पेड़ के दूसरी ओर से घूमते हुए झाड़ियों के पीछे जा पहुँचा.

आड़ में होते ही मे पीछे की ओर लपका, इससे पहले कि वो उन तक पहुँचता मे वहाँ पहुँच गया..

और जैसे ही मैने वहाँ का सीन देखा….हैरत से मेरी आँखें चौड़ी हो गयी…..!!!

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी…! और मे दम साढ़े आने वाले पल का इंतजार करने लगा.

रहीम चाचा होश में आ चुके थे, उन्होने भी उस आदमी को रेंगते हुए अपनी ओर आते देख लिया था और अपनी गुप्ती निकाल कर उसका इंतजार कर रहे थे.

वो लुटेरा रेंगते हुए जैसे ही रहीम चाचा के पास पहुँचा सबसे पहले उसकी नज़र उनकी टाँगों पर पड़ी,

अपना सर उठा कर जब उसने उनकी ओर देखा तो फ़ौरन उठ खड़ा हुआ और इससे पहले कि वो उन पर अपनी गन तान कर उन्हें अपने कब्ज़े में लेने की कोई कोशिश करता.

रहीम चाचा का हाथ तेज़ी से आगे आया और खचाआक्कककक…. ! दो फीट लंबी गुप्ती उसका पेट फाड़ कर पीठ के पीछे से पार हो गयी,

वो अपनी आँखों में जमाने भर की हैरत लिए हुए इस दुनिया से रुखसत हो गया.

मे लपक कर चाचा के पास पहुँचा और उनको बोला- वाह चाचा ! आपने तो कमाल कर दिया..! धोती फाड़कर रुमाल कर दिया…

वो हंसते हुए बोले – तुम्हारी जाँबाज़ी देख कर मुझे भी जोश आ गया..

मे – वैसे आप होश में कब आए..?

वो बोले – जब तुमने उस तीसरे आदमी को गोली मारी थी, तभी गोली की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी लेकिन मे बाहर नही आया वरना ये मेरा सहारा लेकर तुम्हें सरेंडर करने पर मजबूर कर देता,

और फिर जब इसको अपनी तरफ आते देखा, तभी मैने मन बना लिया कि कम से कम इसको तो मे निपटा ही सकता हूँ.

मैने चाचा के बाजुओं को दबाकर उनकी हौसला अफजाई करते हुए कहा – वाह चाचा वाकाई में आप शेरदिल इंसान हो, कैसा चीर डाला है हरामी के पिल्ले को…

वो बोले – ऐसे लोगों का यही हश्र होना चाहिए बेटा…

फिर हम दोनो गाड़ी के पास आए, विंड स्क्रीन तो पूरी तरह से साफ ही हो चुकी थी, और एक हेडलाइट भी टूट चुकी थी.

मैने ड्राइवर की बॉडी को पीछे की सीट पर डाला और उसकी सीट पर बैठ कर जैसे ही सेल्फ़ लगाया, गाड़ी स्टार्ट हो गयी.

उसी टूटी-फूटी गाड़ी से धीरे-2 चलकर हम घर तक पहुँचे,

रातों रात गाड़ी को स्क्रॅप करवा दिया जिससे कोई सबूत ही ना बचे, क्योंकि हमें पता था कि इस देश में क़ानून नाम की तो कोई चीज़ है नही,

अगर कुछ कंप्लेंट वग़ैरह करते हैं तो हम ही फसेंगे.

दूसरे दिन की खबर से पता चला कि वो लोग किसी आतंकवादी संघठन से ही ताल्लुक रखते थे,

हुकूमत इस घटना को अंजाम देने वालों का पता लगाने में जुट गयी है…

दूसरे दिन शाम को शाकीना ने मुझे एक रिपोर्ट लाकर मेरे हाथ में थमा दी, मैने पुछा कि क्या है ये, तो वो बोली- आप खुद ही देख लो इंग्लीश मुझे कहाँ समझ आती है..

ये एक 5-6 पेज की कोई गुप्त मिसन की ड्राफ्ट रिपोर्ट की ज़ीरॉक्स कॉपी थी.

मैने उसे बाद में पढ़ने का सोचा और उसके हाथ से लेकर वही सेंटर टेबल पर रख दिया.

शाकीना आज कुछ ज़्यादा परेशान दिख रही थी, मैने उसका मूड बनाने का सोचा और उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया.

वो अभी तक बुर्क़े में ही थी तो अंदर का सब समान तो पॅक ही था, बस उसके रसीले होठ जो इस समय कुछ खुसक से हो रहे थे, उनपर एक चुंबन लेकर गीला कर दिया.

हमेशा ही मेरी बाहों में आते ही शाकीना अपने सारे गम, सारे गीले-शिकवे भूल जाती थी, आज भी वो मेरे किस करते ही खुश हो गयी और उसने भी मुझे बॅक किस किया,

मेरी गोद से उठ खड़ी हुई और अपना बुर्क़ा निकाल दिया.

उस काले लबादे के नीचे से जो कयामत उजागर हुई में पलक झपकाना ही भूल गया… कितनी ही देर मे उसे अपलक देखता ही रह गया.

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