Update 125
जम्मू का आरस पूरा सेक्टर, आज यहाँ बीएसएफ कॅंप जो की सीमा से कुछ दूरी पर ही है, में कुछ ज़्यादा ही हलचल नज़र आ रही थी.
इंटेलगेन्स की रिपोर्ट थी कि आज रात को पाकिस्तानी आर्मी की मदद से आतंकवादियों की एक बहुत बड़ी घुस्पेठ होने वाली है.
इसके कुछ क्लू भी पता चले हैं कि उनका प्लान किस तरह से बॉर्डर क्रॉस करके हिन्दुस्तान की सीमा में घुसना है…
नवरात्रि और दीवाली के त्यौहार पर पूरे देश में जगह-2 धमाके करके दहशत का माहौल पैदा करने का मंसूबा है इनका.
रिपोर्ट के निर्देसानुसार दिनभर यहाँ के बड़े-बड़े अधिकारी प्लान तैयार करने में लगे रहे.
फुल प्रूफ प्लान तैयार करके, रिपोर्ट एक बार इंटेलगेन्स को भेज दी, जो कुछ ही देर में थोड़े बहुत सजेशन्स के बाद वापस भी मिल गयी…
फाइनल रिपोर्ट आने के बाद उसके मुतविक सारी तैयारियाँ भी मुकम्मल कर ली गयी.
सारे काम इतने गुप्त तरीके से हुए की वहाँ के लोकल बाशिंदों को कानो-कान खबर नही लगने दी.
वैसे तो यहाँ का सारा बॉर्डर दोनो तरफ से घने तारों से लगभग 20-22 फीट की उँचाई तक कवर था, फिर भी ना जाने कैसे ये आतंकवादी घुस ही जाते थे.
पाकिस्तान के इस बार के प्लान में घाटी के कुछ लोग जो कश्मीर को भारत से अलग करवाना चाहते हैं, वो भी मदद करने वाले थे.
अभी शाम के 7 ही बजे थे, वातावरण में चारों तरफ अंधेरा घिरता जा रहा था, कि तभी बॉर्डर पार से पाक फौज की तरफ से भयंकर गोलीबारी शुरू हो गयी, इसका मतलब कि उनका आक्षन प्लान शुरू हो चुका था.
जबाब में बीएसएफ के जवान भी मोर्चे पर तैयार ही थे, सो उन्होने भी अपनी तरफ से मुँह तोड़ जबाब देना शुरू कर दिया….
दोनो ही तरफ से भारी गोलीबारी होने लगी, यहाँ तक कि बड़े-2 हथियार भी जैसे रॉकेट लॉंचर और सेल्स भी इस्तेमाल होने लगे.
प्लान के मुतविक सीमावर्ती इलाक़ों से वहाँ के लोगों को शिफ्ट करने का भी इंतेज़ाम कर लिया था जिससे किसी सिविलन की जान जोखिम में ना पड़े.
जहाँ भारी फाइरिंग हो रही थी, वहाँ से कुछ दूरी के फ़ासले पर एलओसी के दोनो तरफ तकरीबन 50-50 से भी ज़्यादा आतंकवादी, सुरंग खोदने वाले समान को लेकर अपने-2 काम में जुट गये.
इनका प्लान कम-से-कम 4 से 5 सुरंग बना कर कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को सीमा के अंदर घुसाने का था.
ये जगह जंगली झाड़ियों से घिरी हुई थी, तो प्लान के मुतविक अगर एक रात में काम पूरा ना भी हो पाए तो पाकिस्तानी फौज बीएसएफ को फाइरिंग में उलझाए रखेगी और ये अपना काम करते रहेंगे.
बीएसएफ ने बॉर्डर पर कुछ बोफोर्स तोपें भी लगा रखी थी, तो जहाँ से पाक आर्मी का रिटॅलीयेशन ज़्यादा दिखाई देता वही कुछ देर उन तोपों से कार्यवाही शुरू हो जाती जिससे पाक फौज को भारी नुकसान उठना पड़ रहा था.
उनके पैर उखड़ने लगे थे, जो ये मंसूबे लगाए बैठे थे कि एक-दो दिन बीएसएफ को अपने जाल में उलझाए रखेंगे, वहीं उनको आज की रात भी भारी पड़ती नज़र आने लगी.
उधर सुरंग का काम ये खबर मिलते ही कि अब ज़्यादा समय तक पाक आर्मी बीएसएफ के जबाब का सामना नही कर पाएगी, और तेज हो गया और जहाँ वो 4-5 सुरंग बनाने की सोच रहे थे, 3 जगह पर ही लग गये.
शाम 7 बजे से शुरू हुई फाइरिंग रात 3 बजे तक बदस्तूर जारी रही, फिर कुछ उस तरफ से कम होने लगी और अब रुक-2 कर हो रही थी, शायद पाकिस्तानी आर्मी का नुकसान कुछ ज़्यादा ही हो चुका था.
इधर तीनों सुरंग अब कुछ ही घंटों में आर-पार होने वाली थी, खोदने वालों को दूसरे तरफ की छतों की आवाज़ें आने लगी थी, तो वो और जोश के साथ खुदाई में जुट गये और करीब 5 बजते-2 दो सुरंग आर-पार हो गयी, तीसरी भी होने ही वाली थी.
अब दो सुरंगों पर काम करने वाले दोनो ही तरफ के लोग थोड़ा सुसताने के लिए रुके, पानी-वानी पी कर फ्रेश हुए, तब तक तीसरी भी पूरी हो गयी.
फिर उन्होने सीमा पार रखे हुए अपने हथियार और गोला बारूद सुरंगों के ज़रिए भारत की सीमा में लाना शुरू कर दिया और तकरीबन 150 पाकिस्तानी आतंकवादी पूरे साजो समान के साथ हिन्दुस्तान में प्रवेश कर गये.
अब ये लगभग 200 लोग जिनमें घाटी के भी 50-60 लोग शामिल थे, अपनी कामयाबी की खुशी में एक दूसरे के गले लग कर खुशी जाहिर कर रहे थे,
और हिन्दुस्तान की सरकार और अवाम को मिट्टी में मिलाने के ख्वाब देख रहे थे.
फिर इन लोगों ने वहाँ से निकलने का जिस तरह से प्लान सेट किया था कि किस तरह से अंधेरे और जंगल का लाभ लेकर रिहयशी इलाक़ों में शामिल हो जाना है,
उसके मुतविक सभी साजो समान कुछ खच्चरों पर लादा जिसे इधर के लोगों ने ही मुन्हाया कराया था, पर लाद कर वहाँ से निकलने लगे.
अभी ये लोग वहाँ से निकलने की सोच ही रहे थे कि वातावरण में गड़गड़ाहट सुनाई दी, और देखते-ही देखते 4-5 बीएसएफ के हेलिकॉप्टर उनके सर के उपर परवाज़ करते दिखाई दिए.
इन आतंकवादियों ने अपनी गनों से उन हेलिकॉप्टरों को उड़ाने का सोचा, लेकिन इससे पहले कि वो अपने हथियारों को हमले के लिए तैयार कर पाते की उपर से उन पर गोलियों की बारिश सी होने लगी और देखते ही देखते वहाँ लाशों के ढेर लग गये,
सारे आतंकवादी अपने रहनुमाओं समेत जन्नत की सैर पर चले गये जहाँ उनके स्वागत के लिए 72-72 हूरें उनका इंतेज़ार कर रही थी.
साले हरामी मादरचोद यही सब लालच देकर तो सीधे-साधे नौजवानों को इस दहशतगर्दी की राह पर चलने को विवश करते हैं.
खुद तो भोसड़ी वाले चूहों की तरह बिल में घुसे रहते हैं, और मरने के लिए सीधे-साढ़े नौजवानों को बहला फुसलाकर भेज देते हैं.
दूसरों की मौत की कामना करने वाले ये नर पिशाच, अपनी मौत से बहुत डरते हैं मादरचोद कुत्ते.

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