Update 123
दूसरे ही क्षण मेरा शेर उसकी मुनिया के मुँह तक पहुँच गया और आहिस्ता-आहिस्ता उसके बिल में सरकने लगा.
सीईइ….आहह… जैसे-2 वो अंदर सरकता जा रहा था, शाकीना की आँखें बंद होती चली गयी और उसके मुँह से मादक सिसकियाँ फूटने लगी.
मैने अपनी एक उंगली उसके मुँह में डाल दी और बोला – उससे ये तय कर लेना कि बिना तुम्हारी मर्ज़ी के कोई ज़ोर-जबदस्ती ना हो.
शाकीना धीरे-धीरे मेरे उपर आगे-पीछे होने लगी, जिससे दो काम एक साथ होने लगे,
एक तो मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा और दूसरा उसके कसे हुए उरोज जिसके निपल अब कड़क हो चुके थे,
मेरी छाती से रगड़ कर मेरे अंदर मस्ती भरने लगे और खुद भी मस्ती में डूबने लगी.
मैने अपनी उंगली उसके मुँह से बाहर निकाली जो अब उसकी लार से गीली हो गयी थी और उसकी गान्ड के छेद में डाल दी..
उईई….अम्मिईिइ….. क्या करते हूऊ…? वैसे ये मैने उसे पहले ही बोल दिया है.. और वो मान भी गया हाईईईई… उफफफ्फ़… नहिी…मत कारूव…वहाँ उंगलिइीइ…आईईई….
मे अपनी उंगली धीरे-2 उसकी गान्ड में अंदर बाहर करने लगा, वो और मस्ती से भर उठी और मेरे उपर बैठ कर ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड पर कूदने लगी, उसकी गान्ड मेरी जांघों पर थपकी दे रही थी… !
आज मैने चुदाई की कमान उसी के हाथ में दे रखी थी…
उसके बैठ जाने से मेरी उंगली गान्ड से निकल गयी,
उसके मेरे उपर कूदने से उसके ठोस उरोज भी उपर नीचे हो रहे थे, जिन्हें मैने अपनी हथेलियों में कस लिया और ज़ोर-2 से मसल्ते हुए बोला-
बस तो फिर उस कमिने को इतना तड़पाना कि वो तुम्हारे आगे-पीछे चक्कर लगाता रहे.
चुचियों के मसल्ने से शाकीना और ज़्यादा मस्ती में आ गयी वो मेरी छाती पर हाथ जमा कर और तेज़ी से कूदने लगी और ज़ोर-2 से सिसकी लेते हुए बोली-
उफफफ्फ़…हाईए….सीईईई…उऊहह….आप देखना मे कैसे उस हरामी को अपनी उंगलियों पर नचाती हूँ….सुउउ..आअहह…आआयईी…मईए.. गाइ..आईईइ…
और फिर ज़ोर की किल्कारी मारती हुई वो झड़ने लगी..!
जब उसका ऑरगसम ख्तम हो गया तो हाफ्ते हुए वो मेरे सीने पर लुढ़क गयी..और तेज-तेज साँसें लेने लगी…!
उसकी चूत से कामरस निकालकर मेरे लंड प्रदेश को गीला करने लगा…
मैने भी उसे नही उठाया और कुछ देर तक उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा..
जब उसकी साँसें कुछ थमी, तो मैने अपने दोनो हाथों से उसके कूल्हे मसल्ते हुए कहा…जान…!
वो मेरे सीने में मुँह गढ़ाए ही बोली- हमम्म…!
मैने पूछा – क्या हुया..? थक गयी..?
वो – नही ! बस थोड़ा आपसे चिपकने का मन कर रहा है….!
मैने उसकी गान्ड के छेद को उंगली से सहलाते हुए कहा – मेरी एक ख्वाहिश है.. पूरी करोगी..?
वो सर उठा कर मेरी ओर देख कर बोली – आपको इस तरह पुछने की ज़रूरत कब्से पड़ गयी..? हुकुम कर दिया होता, ये बंदी कभी मना कर सकती है भला..?
उसकी गान्ड में उंगली करते हुए मैने कहा – मेरा मन तुम्हारी गान्ड में अपना लंड डालने का हो रहा है..!
क्यों अब आगे से मज़ा नही आता आपको..? वो थोड़ा शिकायती लहजे में बोली.
नही ! ऐसी बात नही है, बस थोड़ा मन किया सो पुच्छ लिया, वैसे तुम्हारी मर्ज़ी है, और मे तुम्हारी मर्ज़ी के खिलाफ तो जा नही सकता.
वैसे युरोप और अमेरिका में ज़्यादातर लड़कियाँ गान्ड ही मराती हैं, सुना है उन्हें गान्ड मराने में ज़्यादा मज़ा आता है.
ये आज कल आप कितनी गंदी-2 बातें करने लगे हैं, कहाँ से सीख कर आते हैं..? हां..! ये कहकर मंद-2 मुस्कराने लगी.
मे – अरे इसमें सीखने की क्या ज़रूरत है, ये तो आम बात है, गान्ड को गान्ड, चूत को चूत और लंड को लंड नही कहेंगे तो और क्या कहेंगे, बोलो..!
वो हस्ती हुई बोली- रहने दीजिए आप..! और कितना बकेन्गे..? बोलकर मेरे सीने में प्यार से एक मुक्का मार दिया.
मे – तुमने मेरी बात का जबाब नही दिया..?
वो – कोन्सि बात..?
मे – वही.. इसमें लंड लेने वाली .. ये कह कर एक बार फिर मैने उसकी गान्ड में उंगली कर दी, मेरा लंड आकड़ा हुआ अभी भी उसकी चूत में ही था.
वो – कर लीजिए आपको जो करना है, लेकिन प्लीज़ आराम से … ज़यादा तकलीफ़ ना हो, कल मुझे खालिद के यहाँ भी जाना है..!
मे – अरे उसकी तुम बिल्कुल फिकर मत करो, तुम्हें पता भी नही चलेगा, बस अब तुम देखती जाओ मेरा कमाल,
कुछ देर बाद ही तुम अपनी गान्ड उच्छल-2 कर खुद से चुदने के लिए ना कहने लगो, तो मेरा नाम बदल देना…!
इतना कहकर मैने प्लांग से नीचे जंप लगा दी…….!!!!

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