Update 118
हमारे यहाँ भी एक विभीषण था, जिसने हमारे बारे में एक फ़ौजी कॅंप में सारी इन्फर्मेशन दे दी….!
हमारी बस्ती से कोई 10 किमी पर एक दूसरी बस्ती थी, वहाँ के भी कुछ युवक हमारे ग्रूप में शामिल हो गये थे.
इनमें से ही एक जमाल नाम का 35-36 साल का आदमी जो कि शादी शुदा और 3-4 बच्चों का बाप था.
दरअसल वो दोहरे चरित्र का व्यक्ति था, अपने स्वार्थ के लिए वो किसी की भी जान का सौदा कर सकता था. ये बात उसके गाँव के दूसरे युवकों ने बताई भी थी,
लेकिन जब हमने उस गाँव के लोगों को ऐसी ही एक मुशिबत से बचाया था तो उनमें वो भी शामिल था और हुकूमत का सताया जानकर सबके साथ-2 वो भी हमारे ग्रूप में शामिल होने आ गया.
मे उसके चरित्र को समझ तो गया था, इसलिए मैने उस पर नज़र रखने के लिए उसी की बस्ती के कुछ लोगों को लगा दिया था जो आमतौर से हमारे ग्रूप में शामिल तो नही थे लेकिन मेरी बात का भरोसा करते थे.
अभी उस बस्ती से आए लोगों की ट्रैनिंग चल ही रही थी, एक दिन मुझे खबर मिली कि जमील फ़ौजी कॅंप में आते-जाते देखा गया है, साथ में उसकी बीबी भी थी.
दरअसल उसकी बीबी एक गस्ति थी जो कुछ फ़ौजियों की हवस मिटाने खुद और दूसरी लड़कियों को फँसा कर ले जाती थी, इसी से उसका घर चलता था.
फ़ौजियों ने उसी के साथ मिलकर ये जाल बिच्छाया था हम तक पहुँचने के लिए.
जब सारी बात साफ हुई तो मुझे लगा कि अब यहाँ ज़्यादा देर रुकना ख़तरे से खाली नही है, मेरा तो कुछ नही कैसे भी करके निकल सकता था,
लेकिन मेरे भरोसे इतने लोग अपनी जान की बाज़ी लगाकर साथ दे रहे थे उनको महफूज़ करना अब मेरी ज़िम्मेदारी थी.
मेरा अपना भी नेटवर्क कुछ कम नही था, जबसे जमील फ़ौजी कॅंप से मिलकर आया था, तभी से मैने अपने नेटवर्क को और सक्रिय कर दिया.
मुझे पता चला कि यहाँ के कॅंप में फौज की तादात कम ही है, तो उन्होने बाहर से और मिलिटरी बुलवाई है, हो सकता है रात के किसी पहर वो हमें घेरने की प्लॅनिंग कर सकते हैं.
मैने दोपहर बाद ही सब लोगों को इकट्ठा किया जिसमें जमील भी शामिल था और कहा- आज हम सभी 15 सीनियर मेंबर्ज़ को जिनमें हम 8 पुराने थे,
और 7 जो कि ऑलरेडी ट्रेंड हो चुके थे और हमारे साथ एक-दो बार मिसन में शामिल भी हो चुके थे.
इतने लोगों को अभी एक मिसन पर निकलना है, कल दोपहर तक ही लौटेंगे, तो वाकी के सब नये लोग ग्राउंड में जाके अपनी एक्सर्साइज़ करो, ट्रैनिंग कल दी जाएगी.
इतना बोलकर हमने मीटिंग ख़तम की और सभी नये मेंबर्ज़ को ग्राउंड पर भेज दिया, उनमें से एक विश्वसनीय युवक जो परवेज़ का खास दोस्त था, उसको सेक्रटेली बोल दिया कि जैसे ही जमील आप लोगों के पास से चला जाए, तुम सब लोग वापस यहाँ आ जाना.
जमील को तो कैसे भी करके जल्दी से जल्दी ये खबर कॅंप तक पहुँचानी थी, कि आज रात हम लोग नही मिलने वाले हैं, ख़ासकर मे, इसलिए आज की रात हमला करने का कोई फ़ायदा नही है.
वो पट्ठा ग्राउंड तक भी नही गया प्रॅक्टीस के लिए बल्कि हमारे पास से सीधा अपने घर गया और अपनी बीबी को लेकर फ़ौजी कॅंप पहुँच गया.
अब वो लौट कर आनेवाला नही था, तो वो लोग भी वापस हमारे पास आ गये.
मैने सबको पूरी बात बताई और कहा कि अब हमें ये जगह छोड़कर जाना ही पड़ेगा, अगर कोई नही जाना चाहता हो तो वो अभी बता दे.
सबको डर था कि अब उनमें से कोई अकेला रह गया तो फ़ौजी उसको नही छोड़ेंगे.
सो सबने हामी भर दी लेकिन उन सबके मन में कुछ सवाल थे जो वो जानना चाहते थे. आख़िरकार रहमत ने पुछ ही लिया.
भाई लेकिन अब हम लोग जाएँगे कहाँ और इतने सारे लोगों का रहने खाने का इंतेज़ाम कैसे होगा ..?
मे – उसकी आप लोग चिंता मत करो.. मैने सारा इंतेज़ाम कर दिया है, बस आप लोग तैयारी शुरू करो निकलने की.
अमीना – लेकिन बेटा ये घर..? इसका क्या करें..?
मे – इस घर में आपका है ही क्या जो छोड़ने में तकलीफ़ होगी..! कुछ जानवर ही तो हैं, तो उन्हें खुला छोड़ दो, कोई ना कोई तो पकड़ ही लेगा.
अकरम – लेकिन भाई जान हमारे घरवालों को फौज परेशान करेगी तो..?
मे – हां ये बड़ा सवाल है..! वैसे कुल मिलाकर कितने लोग हो जाएँगे सभी परिवारों के साथ..?
रॅंडमली हिसाब किया तो कोई 100 के आस-पास लोग होते हैं सभी बड़े छोटे मिलाकर.
हमारे पास 5 गाड़ियाँ हैं कुछ बाइक्स हैं, हो जाएगा, आप सभी लोग फ़ौरन अपने परिवार वालों को तैयार करो ज़्यादा समान लेने की ज़रूरत नही है बस अपने-2 कपड़े-लत्ते ले लो.
अंधेरा होते ही हमें यहाँ निकलना है, रात भर का सफ़र है.

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