Update 104
मेरा सुपाडा उसकी गान्ड में फिट हो गया, उसके मुँह से हल्की सी कराह निकल गयी, मैने एक हाथ से उसके मोटे-2 चुचे मसल दिए, और एक और झटका दे दिया अपनी कमर में.
मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में समा गया.
उसकी कराह कुछ ज़यादा बढ़ गयी, लेकिन कोई विरोध नही किया.
कुछ देर उतने ही लंड को उसकी गान्ड में अंदर बाहर किया, साथ-साथ उसकी चुचियों को भी मसलता रहा,
फिर मैने एक बार पूरा लंड बाहर खींच लिया और फिर से उस पर ढेर सारा थूक लगाया और फिर एक सुलेमानी धक्का लगा दिया.
अब मेरा पूरा 8” लंड उसकी पहली बार चुद रही एक अधेड़ गान्ड में फिट हो गया, उसके गले से एक दबी-दबी सी चीख निकल गयी,
मैने वहीं रुक कर उसकी चूत में दो उंगलियाँ पेल दी और उन्हें अंदर बाहर करने लगा, अब उसकी चूत रस छोड़ने लगी थी और उसकी गान्ड भी हिलने लगी.
मैने धक्के देना शुरू कर दिया, वो हाए-2 करके गान्ड हिलाने लगी, कुछ देर बाद मैने उसको घोड़ी बना दिया,
और उसकी सवारी करके उसके बालों को जकड कर जो दौड़ाया वो हाए-तौबा करने लगी और गान्ड मटकाते हुए खूब मस्त होकर चुदने लगी.
15 मिनट की गान्ड चुदाई के बाद मैने अपना माल उसकी गान्ड में भर दिया और उसके बगल में लेट कर हाँफने लगा.
कुछ देर बाद उसने अपने कपड़े पहने और थोड़ा टाँगें चौड़ाती हुई अंदर चली गयी.
दूसरे दिन सुबह, मैने रहमत अली के हाल-चाल पुछे, उसको रेहाना ने मेरे बारे में सब कुछ बता दिया था,
जब मे उससे मिला तो उसकी आँखों में मेरे लिए कृताग्यता के भाव थे. उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहा-
शुक्रिया दोस्त, आपका ये क़र्ज़ मेरे उपर उधार रहा, जिंदगी में कभी भी मेरी ज़रूरत हो बस हुकुम कर देना. अपनी जान की बाज़ी लगा दूँगा.
मैने कहा – शुक्रिया मेरे भाई, आपने इतना कह दिया मेरे लिए इतना ही बहुत है, अब आप जल्दी से दुरुस्त हो जाओ, और एक पुराने फ़ौजी की तरह फिट लगो.
वैसे आपकी बेगम भी अब किसी से कम नही है, चाहो तो आजमा कर देख लेना कभी समय निकाल कर.
मेरी बात सुन कर वो रेहाना की ओर देखने लगा, तो वो मुँह फेर कर मुस्कराने लगी.
मैने कहा- अरे भाई मे मज़ाक नही कर रहा हूँ, अब ये दोनो बहनें भी किसी कमॅंडो से कम नही है.
इसी तरह की बातें कुछ देर और चलती रही हमारे बीच, इस दौरान शाकीना हमारे बीच नही दिखाई दी.
जब मैने रेहाना से इस बाबत पुछा तो वो भी कुछ माकूल जबाब नही दे पाई.
अमीना बी ने कहा कि पता नही वो जबसे उठी है, कुछ अन्मनि सी लग रही है,
मे समझ चुका था, कि वो क्यों रूठी हुई है, फिर सोचा एक दो दिन में उसका मूड ठीक हो जाएगा समय के साथ,
कुछ देर बाद मे अपने काम का बहाना करके घर से निकल गया.
अपने गुप्त अड्डे पर आया और शांति से बैठ कर ट्रांसमीटर से पहले अपने घर फोन लगाया, बच्चों की खैर खबर ली.
उसके बाद बॉस को कॉल लगा दी और अब तक का अपडेट उनको दे दिया, फिर कुछ आगे की रण-नीति तय की….!
ट्रांसमीटर ऑफ करके मैने वहीं च्छुपाया, और अपनी बाइक लेकर चल दिया अपने मिसन को मूव्मेंट देने…
मेरी बाइक जंगलो के बीच से होती हुई एक पतली और उबड़-खाबड़ सी नाम मात्र की सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी, चूँकि ये एक स्पोर्ट बाइक थी तो खराब रास्तों पर भी आसानी से दौड़ सकती थी.
मेरा रुख़ इस समय सरहद की तरफ चल रहे आतंकवादी कंपों की तरफ था, मे वहाँ की पूरी जानकारी निकालने चल पड़ा था,
सारी ज़रूरत की चीज़ें मेरे बॅग में मौजूद थी जो इस समय मेरे पीठ पर लटका हुया था.
तकरीबन ढाई घंटे बाइक कुदाने के बाद मे उस इलाक़े में पहुँच गया, अब आगे मुझे बेहद सतर्क रहना था,
अगर ग़लती से भी किसी की नज़र में आ गया और किसी को शक़ हो गया कि मे इलाक़े की रॅकी कर रहा हूँ तो जान भी जा सकती थी.
मे एक ऐसी जगह खोज रहा था जहाँ अपनी बाइक को छुपाया जेया सके, और वो जगह मुझे जल्दी ही मिल गयी,
सड़क से हटके घनी सी झाड़ियों के बीच मैने उसे छुपा दिया.
मे पैदल ही जंगली रास्ते से होता हुआ एक कॅंप के नज़दीक तक पहुँचा और उसके पिच्छले साइड से एक उँचे से पेड़ पर चढ़ गया.
पेड़ के पत्तों के बीच अपने को छुपकर दूरबीन से अंदर का जायज़ा लिया.
ओ माइगॉड ! वहाँ पर खुले मैदान में खुले आम आतंकवादियों की ट्रैनिंग हो रही थी, ऐसा लगा रहा था कि कोई मिलिटरी ट्रेनिंग सेंटर हो,
ज़्यादा तर युवा, 18-24 साल के बीच, उनको कुछ उम्र दराज लोग ट्रैनिंग करवा रहे थे.
एक दो पाकिस्तानी फौज की यूनिफॉर्म में भी खड़े उन्हें देख रहे थे, मतलब आइएसआई ही नही, पाकिस्तानी आर्मी भी इन केंपो को सपोर्ट कर रही थी.
इसी तरह दो दिन में मैने 5-6 कंपों का निरीक्षण किया, लगभग सब में इसी तरह की ट्रैनिंग चल रही थी,

