My Life @Jindgi Ek Safar Begana – Update 101

My Life @Jindgi Ek Safar Begana - Incest Story
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Update 101

एक दूसरे का हाथ पकड़े हम टहलते हुए उधर को निकल पड़े, किसी का ध्यान भी अगर हमारी तरफ जाए तो यही लगे कि कोई जोड़ा घूम रहा है.

पेड़ों के नीचे पहुँच कर मैने एक घना और बड़ा सा पेड़ चुना और रहना को आड़ में खड़ा करके मे उस पेड़ पर चढ़ गया.

उपर जाकर मैने अंदर का जायज़ा लिया, अंदर लाइन से बहुत सारे बेरक जैसे बने हुए थे, जो इस समय ज़्यादातर खाली थे,

हो सकता है इस समय कैदियों को कहीं काम करने ले जाते होंगे और शाम तक लाते होंगे.

सुरक्षा की दृष्टि से कुछ ज़्यादा चौकसी नज़र नही आई, हो सकता है, सुरक्षा गार्ड कैदियों के साथ ही गये होंगे.

मे नीचे आ गया और रहना को अंदर का माहौल बता दिया, जो फिलहाल हमारे ज्यदा काम आने वाला नही था.

फिर मैने उसको एक योजना समझाई, और उस पर हमने अमल भी शुरू कर दिया.

रहना इस समय काले रंग के सूट में ग़ज़ब लग रही थी, अपने गाँव के ट्रडीशन से हटके मैने उसे थोड़ा टाइट सूट पहनने को कहा था जिसमें से उसके अंग भी दिखें, उपर से वो यहाँ तक बुर्क़ा डाल के आई थी.

मैने उसको बुर्क़ा निकाल देने को कहा, जो उसने फटाफट निकाल दिया और एक दुपट्टा सर पर डाल लिया, अब हम झाड़ियों ही झाड़ियों में गेट से दूरी बना कर सामने को जैल की तरफ लौटे.

जैल के गेट से कोई 100 मीटर दूर पर एक छोटा सा चाय नाश्ते का टपरा था, मे उस ढाबे पर बैठ गया और एक चाय का ऑर्डर दे दिया.

रहना अकेली जैल के गेट की तरफ बढ़ गयी.

मे यहाँ ये क्लियर कर देना चाहता हूँ, कि अब ये दोनो बहनें पहले वाली नही थी, जो किसी की नज़रों का भी सामना ना कर पायें, अब इनमें बहुत डेरिंग आ चुकी थी.

वो गेट के एन सामने जाके ऐसे खड़ी हो गयी मानो किसी का इंतजार कर रही हो, दुपट्टा सर पर ज़रूर था पर सीने पर नही, सिर्फ़ गले में लपेटा हुया था, टाइट सूट में उसके क्लीवेज साफ-2 दिखाई दे रहा था.

वो दोनो संतरी उसको गंदी नज़र से देखने लगे, जब उसने उनकी तरफ धान नही दिया और वहीं वैसे ही खड़ी रही मानो किसी का इंतजार कर रही हो,

बीच-2 में वो अपनी कलाई पर बँधी घड़ी में टाइम देखने का भी नाटक कर रही थी.

जब 15-20 मिनट गुजर गये, तो अब वो संतरी मुँह से कुछ गंदे-2 कॉमेंट्स जैसे आमतौर पर आवारा लड़के लड़कियों को छेड़ते हैं, पास करने लगे और उसको अपनी ओर देखने के लिए उकसाने लगे,

एक दो बार उसने उनकी ओर देखा भी तो वो उसे इशारे से अपनी ओर बुलाने लगे.

वो वहीं जमी रही, जब कुछ देर वो उनके पास नही गयी, तो उनमें से एक संतरी उठके उसके पास आया और बोला- ख़ातून किसी का इंतजार हो रहा है.

रहना ने उसे उपर से नीचे तक ऐसे घूरा जैसे उसे उसका ये पुछ्ना नागवार गुज़रा हो और वोलि- आपसे मतलब..!

संतरी- यहाँ बिना काम के खड़े होना मना है..!

रहना- हां मे यहाँ अपनी दोस्त का इंतजार कर रही हूँ.

संतरी – दोस्त नही आता है तब तक हमारे साथ ही बैठ लो, अल्लाह कसम जन्नत की सैर करवा देंगे.

रहना – शक्ल देखी है आईने में कभी, जाओ जाकर अपना काम करो.

वो संतरी तैश में आ गया और उसने रहना की कलाई पकड़ ली, और गेट की ओर खींचते हुए बोला –

साली बड़े नखरे दिखा रही है, सीधी तरह आजा वरना ज़ोर ज़बरदस्ती भी आती है हमें.

रहना ने ज़ोर लगाकर उसके हाथ को झटक कर अपना हाथ छुड़ा लिया, और एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके कान पर रसीद कर दिया और वहाँ से तेज-2 कदमों से एक ओर को बढ़ गयी.

वो अपना गाल सहलाता ही रह गया, और देखते-ही देखते वो उसकी आँखों से ओझल हो गयी.

मे तब तक अपनी चाय ख़तम कर चुका था, दुकान वाले को चाय के पैसे देकर उस संतरी की ओर बढ़ गया, जो अभी भी वहीं खड़ा अपना गाल सहला रहा था.

पास जाकर मे उससे बोला- क्यों संतरी साब मज़ा आया ? आग है वो ऐसे ही हाथ डाल दिया तो जल जाओगे.

वो संतरी तो जला भूना बैठा ही था, सो मेरे उपर भड़क गया, जब मैने उसको इशारा किया, कि अगर चाहो तो मे आपका काम बनवा सकता हूँ,

तो वो लपक कर बोला- क्या सच में तुम उसे दिलवा सकते हो, साली बड़ी नमकीन माल है.

मे – देखलो हर माल की कुछ कीमत होती है..!

वो – क्या कीमत है इसकी.

मे – पहले वादा करो कीमत चुका पाओगे या नही.

वो – अरे भाई ! अपनी तनख़्वाह तो तुम जानते ही हो, ज़्यादा पैसे नही है हमारे पास देने को.

मे – पैसे कों माँगता है, बस एक छोटा सा काम करना होगा हमारा.

वो – क्या करना होगा, उसके बदले मे तुम्हारा कोई भी काम करूँगा.

मे – सोचलो..!,

वो बोला- सोच लिया, तो मैने कहा कि चलो फिर मेरे साथ,

वो बोला- कहाँ ..?

मैने कहा- उसी के पास.

उसने अपने साथी के पास जाकर कुछ बात चीत की और फिर चल पड़ा वो मेरे साथ अपनी वासना की आग बुझाने.

रास्ते में मैने उसको पुछा- तुमने अपने दोस्त को क्या बताया..? उसने पुछा नही कहाँ जा रहे हो..?

वो – मैने उसको बोल दिया है, पर्सनल काम से जा रहा हूँ, 1 घंटे में आता हूँ.

बड़े चालू हो तुम तो.. ऐसे ही बात करते हुए मे उसे एक अच्छे से रेस्टोरेंट में ले आया, उसने कहा यहाँ क्यों आए हैं हम लोग, वो कहाँ है..?

मे – इतमीनान रखो दोस्त ! वो भी मिल जाएगी, पहले मेरा काम तो करदो..! और एक वेटर को बुला कर दो चाइ के लिए बोल दिया.

वो – क्या काम है तुम्हारा..? जल्दी बताओ..!

मैने कहा – देखो मे सीधी बात पर आता हूँ. इस औरत का शौहर तुम्हारी इस जैल में बंद है,

अब अगर तुम इसको उससे मिलवा सको तो वो तुम्हारे साथ आने को तैयार हो सकती है.

वो – लेकिन इस वक़्त तो कोई क़ैदी यहाँ नही हैं, उन सब को तो इस समय काम पर लेकर गये हैं.

मे – क़ैदियों को बाहर काम पर ? किसके..? और कब लौटेंगे..?

वो – आज कल इसी दहशतगर्दो से मिलकर दुश्मन मुल्क में प्रॉक्सी वॉर छेड़ने की तैयारी में है, तो उनके लिए ट्रैनिंग कॅंप्स बनबाए जा रहे हैं, अब ये फ्री फंड के क़ैदी काम में लगा दिए हैं उन कंपों में.

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