अपडेट 173
अब आगे
…………………
यह ऐसा छन था जब हम तीनो ही दर्द में थे। पर अलग कोई नहीं होना चाहता था।
मेरी दर्द इतनी बढ़ गई की धका लगाना ही मुश्किल था मेरे लिए मैं मंद परता चला गया।
और बड़ी भाबी की जान में जान आई साँस लेने के लिए वो अपना चेहरा छोटी भाभी के चेहरे से अलग हुई तो
उनका चेहरा भाभी के कामरस से पूरी तरह लिसरा था। भाभी के बूर से हो कर बहता पानी उनके चेहरे से लार की पतली तार जैसी चेहरे से लटक रही थी।
उनके सावले रंगत पे यह पानी तोह चार चाँद की तरह लगी मुझे।
मैं छोटी भाभी के कामरस को चूसने के लिए निचे झुका पर उनकी चुचियो को अब बी जकरे था।मेरी हालत उस बच्चे की तरह थी जो दोनों हाथो में लड्डू रखने की कामना रखता हो यु।
न ही उस कामरस को छोरने की इच्छा थी और न ही उनकी चूची को।
वो मेरे धक्के से पीठ के बल नीचे गिरी फिर भी मेरे पकर में वो चीज रह ही गई भाभी जी की चुचिया ।
मैं युही ही जकरे उनकी चुचियो को और बड़ी भाभी के चेहरे प झुकता चला गया।
बढ़ी भाभी तोह मेरी आँखों में ही देख रही थी।
क्या लग रहा था उनका चेहरा भाभी क खून और उनके पानी लाल और उजला रंग का समावेस उनके सावले रंगत प क्या खूब लग रही थी। मेरे होठ उनके चेहरे प लगा एक एक पानी को चूस रही थी।वहीँ भाभी सर ऊपर की ओर कर मुझे देख रही थी।
अपने चूत के पानी को अपने ही छोटे देवर के दवारा चाटते देख वो सुलग उठी।
उनकी चूत में तूफान सा उतनी लगा उनके लिए मंजर ही कुछ ऐसा था ।
उनके आँख क ठीक सामने उनके देवर के दोनों हथेली उनके चुचियो को जकरे महल की दुरग की तरह लग रही थी। उनके द्रिष्टि पटल के ठीक बिच में निचे उनकी पानी चोरती फूलती पिचक्ति बूर और उसके ठीक ऊपर दीखता संजू का चेहरा ।
ऐसा लगा भाभी को की मैं बड़ी भाभी का चेहरा न चूस उनकी चूत ही चाट रहा हूँ।
वह इस अहसास से गनगना उठी।उसपे जब मेरी और उनकी नजर एक हुई तो उन नजरो मेजैसे मौन आमंत्रण था।
मेरे आँखों के ठीक सामने छोटी भाभी की कमसिन बूर झकमि हालत में भी मुझे घूरते हुए पानी टपका रही थी।
मैं उठा जिससे मेरा लंड भी बाहर निकला पर बड़ी भाभी की बेताबी गजब थी वो झट लंड से टपकते अपने बुर के रस को चूसने के लिए मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले चूसने लगी मैं भी अब छोटी भाभी के निचे के होठो से उनके जाम को पिंने के लिए होठो से होठ मिलल दिए।
छोटी भाभी मस्ती में अपने होठो को भिचति अपने दातो तले मुझे यु देख रही थी मनो कह रही हो आयो और मुझमे समां जाओ।उनकी आँखों में एक मौन आमंत्रण था जिसमे मै बहता चला गया।

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.