राहुल टीवी ओन करता है और रिमोट लेकर चैनल चेंज करने लगता है |
उसका एक हाथ अपने लंड को मसल रहा था |
अभी भी उसे अपने गाल पर अपनी माँ के होंठो की तपिश महसूस हो रही थी |
अभी भी वो अपने सीने पर अपनी माँ के मुम्मो का दवाब महसूस कर सकता था |
अभी भी वो उसके उत्तेजना से कड़े निप्पलों को अपनी छाती में चुभते महसूस कर सकता था |
उसका लंड अभी भी अपनी माँ के नर्म मुलायम पेट के स्पर्श को याद कर झटके मार रहा था |
उस समय उसकी तीव्र इच्छा हो रही थी कि वो बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारे | मगर उसकी माँ जल्द ही बर्तन साफ़ करके आने वाली थी |
उसे ज्यादा समय नहीं लगने वाला था |
इसीलिए वो किसी तरह हस्तमैथुन की अपनी ज़बरदस्त इच्छा को किसी प्रकार दबाने का प्रयत्न कर रहा था |
एक बात से उसे राहत महसूस हो रही थी और ख़ुशी भी कि जब उसने अपना लंड अपनी माँ के पेट पर दबाया था तो उसने गुस्सा ज़ाहिर नहीं किया था |
बल्कि उसने खुद अपना पेट उसके लंड पर दबाया था मतलब उसकी माँ उसे पूरी लाइन दे रही थी |
वो फिर से उसके पेट पर अपना लंड दबा सकता था, या फिर शायद उसे इससे बढ़कर कोशिश करनी चाहिए |
अगर मौका मिला तो वो उसकी चूत पर अपना लंड दबा कर देखेगा वो क्या प्रतिकिर्या करती है |
क्या वो भी पहले की तरह वापिस अपनी चूत उसके लंड पर दबाएगी? उसकी माँ उसके लंड पर अपनी चूत दबाएगी
इस सम्भावना मात्र से उसका लंड फिर से झटके मारने लगता है |
उधर सलोनी बर्तन साफ़ करती मुस्करा रही थी |
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आज नाजाने कितने दिनों, कितने महीनों बाद वो खुद को जिंदा महसूस कर रही थी |
आज कितने समय बाद वो अपने बदन में उठती आनंद की उन लहरों को महसूस कर रही थी,
अपने जिस्म में जोश और उत्तेजना के मिलन से पैदा होने वाली विघुत तरंगो का एहसास ले रही थी,
उसे अपने अंग अंग में मस्ती छाती महसूस हो रही थी |
उसे लग ही नहीं रहा था वो पहले वाली चिडचिडी ,उदास, हर वक़्त थकी रहने वाली सलोनी है |
नहीं यह सलोनी और थी, जो जोश से भरपूर थी जो ज़िन्दगी में छिपे उस असीम आनंद को महसूस करना चाहती थी |
जो अपनी ज़िन्दगी के हर पल को मज़ेदार बनाना चाहती थी |
यह सलोनी औरत को मर्द से मिलने वाले चरम सुख को हासिल करना चाहती थी,
हर दिन हर रात, और अगर उसका पति उसे वो सुख नहीं दे सकता था तो वो उसके लिए अपनी जवानी बर्बाद करने वाली नहीं थी,
उसके पास उसका बेटा था, जवान तगड़ा मर्द, हाँ तगड़ा मर्द जिसके पास एक तगड़ा लंड था
जो उसके बाप के लंड से लम्बा था, मोटा था, जो पत्थर की तरह अकड जाता था |
हाँ वो अपने बेटे पर अपनी जवानी लुटाएगी | वो उसे हर दिन उस स्वर्गिक आनंद का एहसास करवाएगी
जो इस दुनिया की कोई औरत नहीं करा सकती और उसका बेटा उसकी सारी इच्छायों की पूर्ती करेगा,
उसकी सारी ख्वाहिशों को पूरा करेगा उसे अपने पति का इंतज़ार करने की कोई आवशयकता नहीं है,
उसे अपना काम प्यारा है तो वो काम करे | उसके पास उसका बेटा है, उसका बेटा, मोटे तगड़े लंड वाला
और उसका मोटा तगड़ा लंड अब हर रोज़ उसकी चूत में जाएगा, उसकी अपनी माँ की चूत में जाएगा,
उसकी माँ खुद अपने हाथों से पकड़ कर उसका लंड अपनी चूत में लेगी |
सलोनी के सर पर फिर से काम चड़ा हुआ था मगर इस बार वो जानती थी
कि अब उसका अपने बेटे से चुदना तय हो चूका है | यह उसका नसीब है और वो यह भी जानती थी कि अ
गर वो एक बार अपने बेटे से चुद गई तो फिर वो हर दिन उससे चुदेगी, बार बार चुदेगी
और अब उसे गलत सही की कोई परवाह नहीं थी | वो उसकी माँ है और हर माँ का फ़र्ज़ होता है
वो अपने बेटे को दिल खोल कर प्यार करे ,उसकी हर जरूरत पूरी करे |
चाहे वो जरूरत कैसी भी क्यों ना हो | वो अपन बेटे की हर जरूरत पूरी करेगी, और
वो भी उसकी हर जरूरत पूरी करेगा | उन दोनों को अब तरसने की कोई जरूरत नही थी और बिलकुल भी नहीं थी |
सलोनी ड्राइंग रूम में आती है तो राहुल सोफे पर बैठे बैठे टीवी के चैनल चेंज कर रहा था |
उसकी माँ सोफे पर उसके पास धम्म से बैठ जाती है |
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“वोही पुरानी घिसी पीटी फिल्मे आ रही है सभी चैनल्स पर” राहुल चैनल चेंज करते बिना अपनी माँ की और देखते बोलता है |
“कोई कॉमेडी लगी है क्या? मेरा कॉमेडी देखने का मूड है,
प्लीज कोई एक्शन जा रोमांटिक मूवी मत लगाना” सलोनी बेटे से सटती हुई बोलती है |
“हुन्ह्ह्हह… जी सिनेमा पर ‘गोलमाल’ लगी है” |
राहुल को अपनी बगल में अपनी माँ के जिस्म से निकलती तपिश महसूस होती है |
पेंट में उसका थोडा सा नर्म पड चूका लंड एक ही झटके में फिर से अपने रूप में लौट आता है |
राहुल फिल्म लगाकर सोफे की पुश्त से सर टिका लेता है और
अपनी टाँगे उठाकर अपने पाँव सामने पड़े टेबल पर रख देता है |
शायद उसने पहले सोचा नहीं था मगर ऐसा करने से उसका अकड़ा हुआ लंड उभर कर सामने आ जाता है |
उसकी पेंट में बना हुआ तम्बू जिसमे कुछ हिल डुल रहा था, सलोनी की नज़रों के सामने था |
सलोनी थोडा सा घूम कर राहुल के कंधे पर सर रख देती है और अपनी टाँगे मोड़ कर अपना वजन राहुल के ऊपर डाल देती है |
वो अपना एक हाथ पीठ पीछे घुमाकर राहुल के कंधे पर और दूसरा सामने उसकी गोद में उसके खड़े लंड से हलकी सी दूरी पर रख देती है |
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राहुल का लंड अपनी मम्मी के हाथ को इतने नजदीक पाकर सांप की तरह फन उठा फुफकारने लगता है
जैसे किसी को डसने के लिए बिलकुल तैयार हो |
यहाँ राहुल का लंड डसने के लिए तैयार था वहीँ उसकी माँ डसवाने के लिए बिलकुल तैयार थी |
दोनों माँ बेटे टीवी देख रहे थे | यहाँ राहुल का रुख सीधा टीवी की और था वहीँ सलोनी का रुख राहुल की और था |
वो उसके कंधे पर सर टिकाए मुंह घुमाकर टीवी देख रही थी |
दोनों टीवी देख रहे थे या फिर टीवी देखने का नाटक कर रहे थे |
अगर टीवी देख भी रहे थे तो उनका ध्यान टीवी से ज्यादा एक दुसरे में था |
राहुल अपने कंधे में अपनी मम्मी के भारी मुम्मो को गड़ता हुआ महसूस कर रहा था |
वो मन ही मन में ख्वाइश कर रहा था कि उसकी माँ उसका लंड पकड़ ले |
सलोनी ने उसका लंड तो नहीं पकड़ा मगर उसका हाथ थोडा निचे को जरूर हो गया और अब खतरनाक हद तक लंड के करीब था |
राहुल को लगा जैसे उसकी माँ उसे तडपा रही है | उसका लंड और भी अकड़ रहा था
जैसे वो सलोनी के हाथों में जाने के लिए तड़प रहा था | सलोनी धीरे धीरे से राहुल का पेट सहला रही थी |
राहुल बैचेनी में धीरे धीरे जानबूझकर अपना कन्धा हिलाता तो वो सलोनी की छाती को दबाता, सहलाता |
राहुल का दिल कर रहा था वो उसकी छाती को अपने हाथ में पकड़ कर उन्हें खूब सहलाए, दबाए,चूमे ,उन्हें मसल मसलकर लाल कर दे |
मगर वो सीधे सीधे अपनी माँ पर हाथ डालने से डरता था |
कुछ देर यूँ ही बैठे रहने के बाद राहुल ने अपना हाथ अपनी माँ के पेट पर रखा और
टीशर्ट के छोटे होने के कारण उसका जो पेट नंगा था उसे धीरे से सहलाया |
सलोनी के जिस्म में हल्का सा कम्पन हुआ जिसे राहुल ने भी महसूस किया | मगर उसने हाथ नहीं हटाया |
वो अपनी माँ की नर्म मुलायम त्वचा को महसूस करता पहले की तरह सहलाता रहा |
उधर राहुल की शुरुआत से सलोनी ने भी आगे बढ़ने का फैसला किया |
उसका हाथ धीरे धीरे निचे जाने लगा | राहुल की धड़कने बढ़ने लगी |
कुछ ही पलों में सलोनी की हथेली का पिछला भाग राहुल के लंड के सुपाड़े को छू रहा था |
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जैसे ही सलोनी की हथेली से राहुल का लंड टच हुआ, राहुल अपनी ऊँगली से अपनी माँ की नाभि कुरेदने लगा |
दोनों की सांसें गहरी हो रही थी | यहाँ राहुल का लंड बुरी तरह से झटके खा रहा था
वहीँ सलोनी की चूत रस से सरोबर हो चुकी थी और उसकी कच्छी और झांगें भीगती जा रही थी |
उसके निप्पल अकड़ चुके थे और राहुल के कंधे पर चूभ रहे थे |
सलोनी थोडा सा ऊपर को उठती है तो राहुल को उसकी गर्म सांस अपनी गर्दन पर महसूस होती है |
दोनों माँ बेटे बुरी तरह से उत्तेजित थे | माँ अपने होंठ राहुल की गर्दन से सटा देती है | बेटा सिसक उठता है उसकी एक ऊँगली माँ के पायजामे की इलास्टिक में कमर के एक सिरे से दुसरे सिरे तक पेंटी को टच करती घुमती है | इस बार माँ कराह उठती है | अपनी टांग मोड़ कर बेटे के लंड को अपने घुटने से रगड़ने लगती है |
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बेटा कच्छी के उपर से अपनी माँ की चुत से थोडा ऊपर उंगल से गोल गोल घेरे बनाता है
और अपनी बाजु माँ की गर्दन के पीछे से घुमाकर उसके कंधे से उसके मुम्मे के बेहद करीब रख देता है |
माँ अपने मुम्मो और चूत के इतने करीब बेटे की उँगलियाँ पाकर मदहोश होने लगती है | वो एक तरफ घुटने को आगे बढाती है और दूसरी तरफ से अपनी हथेली को और बेटे के लंड को दोनों के बीच दबा देती है | बेटा कराह उठता है |
माँ बेटे की गर्दन को चूमती हुई उस पर अपनी जिव्हा रगडती है |
बेटे का हाथ सीने पर निचे होता है और मुम्मो की घाटी में उसकी उँगलियाँ दस्तक देने लगती है | माँ हथेली का दवाब देकर घुटने को धीरे धीरे ऊपर निचे करने लगती है | बेटा लगातार कराहने लगता है | वो पायजामे की इलास्टिक को हटाता है | उसकी उँगलियाँ अन्दर तक घुसती जाती हैं और वो अपनी माँ की जांघ को सहलाता है | दुसरे हाथ से मुम्मे के उपरी हिस्से पर उँगलियों से लकीरे खींचता है | माँ अपने होश गंवाने लगती है, ऊँचे ऊँचे सिसकते हुए अपने घुटने को तेज़ और तेज़ बेटे के लंड पर रगडती है | बेटा माँ के सीने उपर उँगलियाँ और नीचे लाता है | अब उसकी उँगलियाँ मुम्मो के गिर्द गुलाबी घेरे के पास तक पहुँच चुकी थी | कामौंध में डूबी माँ के निप्पल बेटे की उँगलियों को अपने इतने नज़दीक पाकर और भी अकड़ जाते हैं | इससे वो उसके हाथ में पहुँचने को बेताब हो बेटे का हाथ पायजामे के अन्दर जांघ के जोड़ से होता हुआ जांघ के मध्य तक जा रहा था और जब भी वो ऊपर आता तो हर बार उसका हाथ रस से भीगी कच्छी पर चूत के करीब और करीब होता जाता | माँ बेटे की गर्दन को हलके से दांतों से काटती है

| बेटा होशो हवास खो कर माँ के मुम्मे को अपनी हथेली से ढक देता है मगर उसे दबाता नहीं है |
माँ अपना सीना उभार अपने बेटे के हाथ में अपना मुम्मा धकेलती है जैसे उसे दबाने के लिए आमंत्रित कर रही हो |
बेटा हथेली को कस कर दबा देता है | माँ उछल पडती है और हथेली को सीधा करके लंड को पकड़ लेती है
और अपने हाथ को तेज़ी से आगे पीछे करने लगती है |
बेटा मुम्मे को मसलता हुआ माँ के पायजामे के अन्दर अपने हाथ को माँ की चूत की तरफ लाता है
जैसे ही बेटे का हाथ बुरी तरह भीगी हुई कच्छी के ऊपर से अपनी माँ की चूत को छूता है
तो माँ बेटे को लगता है जैसे वो नंगी चूत को छू रहा हो |
“आह्ह्हह्ह्ह्ह……” माँ के मुख से चीख निकलती है और उसका बदन जोर जोर से हिलने लगता है |
माँ सखलित हो रही थी वो चीखती हुई बेटे के लंड को जोर से पकड़ कर खींचती है, मसलती है,
तो बेटा भी माँ के मुम्मे को मुट्ठी में भींच पूरी चूत को कच्छी के ऊपर से हथेली में समेट लेता है |
माँ का बदन ऐंठने लगता है वो ऊपर को उठती है और
अपने नम होंठ अपने बेटे के होंठो पर रख देती है |
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“मम्मम्मम्ममम्मी…..” बेटा इस प्रहार को सहन नहीं कर पाता और पायजामे में उसका लंड वीर्य की फुहारे छोड़ने लगता है |
“बे…..टा…..” माँ बेटे के होंठो पर होंठ दबाती है, सिसकती है |
माँ बेटा दोनों एक दुसरे को आलिंगन में भर लेते हैं |
दोनों ने आज उस चरम सुख को प्राप्त किया था जिसके बारे में लोग सिर्फ सुनते हैं मगर उसे हासिल नहीं कर पाते |
सच में जैसा प्यार एक माँ अपने बेटे को दे सकती है वैसा प्यार एक बेटे को कोई और नहीं दे सकता
सलोनी और राहुल सख्लन के बाद शांत पड गए थे | दोनों में से कोई भी हिलडुल नहीं रहा था | सख्लन के पश्चात् थकान और संतुष्टि से दोनों कुछ ही देर में ऊँघने लगे |
कोई एक घंटा बीत जाने के बाद सलोनी की आँख खुली | राहुल कुछ देर पहले ही जागा था | सलोनी अधमुंदी आँखें ऊपर उठाती है और राहुल की आँखों में देखती है | हालाँकि नींद के बाद वो थोडा सा सुस्त पड गया था मगर सलोनी उसकी आँखों में अपने लिए असीम प्यार के साथ साथ संतुष्टी की भावना को साफ़ साफ़ देख सकती थी | सलोनी उठने की कोशिश करती है तो उसे एहसास होता है उसके बेटे का हाथ अभी भी वहीँ हैं यहाँ वो उसके सख्लन के समय थे | सलोनी बेटे की आँखों में देखकर मुस्कराती है और धीमे से उसका हाथ जो उसके मुम्मे पर था
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उसको हटाती है और फिर अपने पायजामे में हाथ डाल राहुल के हाथ को जो उसकी चूत को भीगी कच्छी के ऊपर से दबाए हुए था, बाहर निकालती है |
“सॉरी मम्मी….” राहुल को लगा शायद उसे अपना हाथ वहां से पहले हटा लेना चाहिए था | मगर सलोनी उसकी बात की और कोई धयान नहीं देती | वो राहुल की उँगलियों को देखती है जो उसकी चूत के रस से भीगी हुई थीं | उसकी चूत ने कितना रस बहाया होगा उसका अंदाज़ा उसे अपने बेटे की उँगलियाँ देखकर हो रहा था जो कच्छी के ऊपर से इतनी बुरी तरह भीगी हुई थी जैसे उसकी चूत के भीतर समाई हुई हों | वो राहुल की और देखती है, राहुल उसे ही देख रहा था | सलोनी राहुल के हाथ पर अपने चेहरे को झुकाती है और गहरी सांस लेती है जैसे उसकी खुशबू को सूंघ रही हो फिर वो राहुल की और देखती है तो उसके होंठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है | वो राहुल की आँखों में देखते हुए अपनी जिव्हा बाहर निकालती है और उसकी उँगलियों को चाटने लगती है |
राहुल अपनी माँ को हैरत से देख रहा था और उधर उसके पयजामे में फिर से हलचल होने लगी थी | सलोनी की जिव्हा एक एक ऊँगली को चाटती जा रही थी वो तभी रूकती है जब राहुल का पूरा हाथ साफ़ हो चूका था मगर अब उसका लंड खड़ा हो चूका था | सलोनी की नज़र बेटे के तने लंड पर पडती है तो एक शरारती सी मुस्कान उसके होंठो पर फ़ैल जाती है | वो अपना एक हाथ लंड पर रखकर
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उसपे अपना वजन डालती ऊपर को उठती है और गहरी साँसे लेते राहुल के होंठो को चूमती है | राहुल भी अपने होंठ सलोनी के होंठो पर दबाकर उसके चुम्बन का जवाब देता है | सलोनी हल्के से चुम्बन के बाद अपने होंठ हटा लेती है और हँसते हुए राहुल की और देखती है जो अपने होंठो पर जीभ घुमाते हुए अपनी माँ की चूत के रस को चाटता है जो सलोनी के होंठो ने उसके होंठो पर छोड़ा था |
राहुल सलोनी की हंसी की आवाज़ सुनता है तो आँखें खोल देता है |
सलोनी का चेहरा उसके चेहरे के सामने था, वो शर्मा जाता है |
“ओए होए, देखो तो साहब को अभी शर्म आ रही है” राहुल के गाल लाल होने लगते हैं |
सलोनी और भी जोर से हंसती है “अभी उठो और जाकर थोडा समय पढाई कर लो,
बाद में रात के खाने की तैयारी करनी है, मैं अभी कपडे धोने जा रही हूँ,
तुम भी अपना अंडरवियर और पेंट उतार कर दे देना और कुछ न्यु पहन लेना” |
इतना कह कर सलोनी उठती है और उठने के साथ राहुल के लंड को अपनी मुट्ठी में भर लेती है
और कस कर मसल देती है |
“आह्ह्ह्ह…” राहुल सिसक उठता है | उसका लंड इस समय पूरे जोश में था,
जंग लड़ने के लिए बिलकुल तैयार मगर अभी उसे इंतज़ार करना पड़ेगा |
अपनी माँ को जाते हुए राहुल देखता है तो अपने लंड को बड़े प्यार से सहलाता है
“बस थोडा सा सब्र कर जल्द ही तेरी मन की मुराद पूरे होने वाली है |
लंड ने एक जोर का झटका मारा जैसे राहुल की बात से उसे अत्यंत ख़ुशी मिली हो |
राहुल अपनी पेंट और अंडरवियर उतारता है और एक इलास्टिक का पायजामा पहन लेता है |
उसे बहुत शर्म आ रही थी अपनी माँ को अपने वीर्य से खराब कपडे देने में,
इसीलिए वो उन्हें गोल करके इकठ्ठा कर देता है और अपनी माँ के कमरे में जाता है
यहाँ सलोनी अपने कमरे से अटैच्ड बाथरूम में कपडे धो रही थी |
राहुल जैसे ही बाथरूम में पाँव रखता है सामने का नज़ारा देखकर उसके होश गुम हो जाते हैं |
सामने सलोनी राहुल की तरफ पीठ करके खड़ी थी |
उसके बदन पर कपडे के नाम पर एक काली कच्छी थी |
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उसका पायजामा , टीशर्ट उसके पाँव के पास फर्श पर पड़े हुए थे |
वो नल चलाकर बाल्टी में पानी भर रही थी |
राहुल का ध्यान अपनी माँ की गर्दन से होता हुआ नीचे की और आता है |
उसने अभी भी अपने बालों में रबड़ डाली हुई थी |
उसकी माँ की पीठ पर बाल आसमान में बादल की तरह मंडरा रहे थे |
‘उफफ्फ्फ्फ़’ कितनी गोरी थी, एकदम दूध के जैसे , कहीं पर एक निशान तक नहीं था |
राहुल पहली बार अपनी माँ को इस हालत में देख रहा था |
उसके बाल उसकी कमर पर उसके नितम्बो से थोडा सा ऊपर तक आ रहे थे |
कंधो से निचे को आते हुए उसकी कमर अन्दर को बल खाकर पतली हो रही थी और
फिर थोडा निचे जाकर बाहर को बल खाते हुए उसके नितम्बो के रूप में फ़ैल जाती थी |
कच्छी के अन्दर से झांकती उसकी उभरी गोल मटोल गांड राहुल को पुकार रही थी |
उसके नितम्बो को चुमते हुए उसकी कच्छी नितम्बो पर खूब कसी हुई थी और
नितम्बो की घाटी में थोडा सा अन्दर की और समाई हुई थी |
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राहुल का गला खुशक हो गया | उसके गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी |
उधर बाल्टी आधी पानी से भर जाती है | सलोनी निचे झुक जाती है,
टांगों के बीच में से उसे कच्छी पर एक बहुत बड़ा गीला धब्बा दिखाई देता है |
यहाँ उसकी कच्छी भीगी होने के कारण इस तरह चूत से चिपकी हुई थी कि
राहुल चूत के होंठो को और उनके बीच हलकी सी दरार तक को देख सकता था |
मगर जिस चीज़ ने सबसे जयादा उसका धयान अपनी और खींचा वो था सलोनी का मुम्मा जो कि झुकने
और एक तरफ को मुडने के कारण निचे को झूलता हुआ
राहुल की आँखों के सामने था, पूरा तरह से बेपर्दा |
“उन्न्नग्गग्ग्ग्गह्ह्ह्ह” ना चाहते हुए भी राहुल के होंठो से तेज़ सिसकी निकल जाती है |
“ओह्ह्ह्हह…. बेटा तुम हो, मुझे मालूम ही नहीं चला, इधर अपने कपडे डाल दो,
मैं धो देती हूँ” सलोनी अनजान बनते हुए बोलती है जैसे राहुल के आने का पता ही ना चला हो | वो उठकर खड़ी हो जाती है |

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