“थैंक यू बेटा” सलोनी आगे बढ़कर राहुल को होंठो पर चूमा लेती है | मगर अगले ही पल उसे झटका सा लगता है | “हाए राम यह क्या!” वो झटके से पीछे हटती है | वो नज़र नीची करके राहुल की पेंट में बने टेंट की और देखती है और ऐसे मुँह बनाती है जैसे उसने दुनिया का आठवां अजूबा देख लिया हो |
“बेशरम कहीं का, यह क्या है, मम्मी की ब्रा कच्छी देखकर इसे फिर से खड़ा कर लिया” सलोनी झूठ मूठ का नाटक सा करती है | राहुल कुछ नही बोलता | अभी भी उसका एक हाथ सलोनी की काली ब्रा कच्छी थामे सामने को फैला हुआ था | सलोनी उसके हाथ से कच्छी और ब्रा लेकर बेड पर फेंक देती है |
“राहुल तू सच में बहुत बेशरम हो गया है”, स्लोनी इतना बोलकर अपने जिस्म से तौलिए की गाँठ खोल देती है | गिरते हुए तौलिए को वो पकड़ने की कोई कोशिश नही करती | तौलिया उसके पाँव में गिर जाता है |
“सच कहती हूँ राहुल, तुझे तो रत्ती भर भी शर्म नही है” सलोनी बेटे के सामने पूरी नंगी होकर कमर पर हाथ रखे बोलती है | राहुल कुछ नही बोलता | उसकी ज़ुबान तो बंद हो चुकी थी | उसकी नज़र सामने अपनी मम्मी के मोटे तने हुए मुम्मो पर ज़मी हुई थी,

उसके गुलाबी निपल अकड़े हुए थे जैसे चुसवाने के लिए तड़फ रहे हों |
उसकी पतली सी कमर और नीचे उसकी चूत और चूत के उपर छोटे छोटे बाल जो तिकोने आकार में कटे हुए थे |
राहुल की नज़र अपनी मम्मी के मुम्मो से उसकी चूत पर उपर नीचे होने लगती है |
कभी मुम्मो और और कभी चूत को देखता जब वो काफ़ी समय बाद अपनी नज़र उपर करता है तो सलोनी को अपनी और घूरते हुए देखता है | सलोनी कमर पर हाथ रखे अपने बेटे की आँखो में देखती सर हिलाती है |
“हे भगवान….. क्या होगा इसका……… क्या करू मैं ……. जब देखो अपना लौड़ा खड़ा कर लेता है…….. ना कोई जगह देखता है ना कोई मौका”, सलोनी राहुल की पेंट में उभार को देखते बोलती है | जिसके अंदर राहुल के लंड ने तूफान खड़ा किया हुआ था |
राहुल का चेहरा शर्म और उत्तेजना से तपा हुआ था | सलोनी बेड से ब्रा उठाती है और राहुल की और देखते उसे बाहों में डालती है और फिर कप्स को अपने मुम्मो पर रखकर राहुल की और पीठ करके खड़ी हो जाती है |
राहुल इशारा समझ अपने काँपते हाथों से उसकी पीठ पर उसकी ब्रा के हुक लगाता है | उसे दोनो हुक लगाने में कई कई बार कोशिश करनी पडती है | उसके काँपते हाथ उसके लिए मुश्किल का सबब बने हुए थे | ब्रा की हुक लगने के बाद स्लोनी फिर से राहुल की और मुँह कर लेती है और उसके सामने अपने मुम्मो के उपर ब्रा के कप्स को खींच खींच कर सेट करने लग जाती है | सलोनी को कम से कम पाँच मिनिट लगते है अपने मुम्मो पर अपनी ब्रा को सेट करने में और इस कोशिश में वो कई बार अपने मुम्मो को कप से बाहर निकाल लेती थी, कभी उन्हे दबाती थी, कभी ब्रा के उपर से अपने निप्पल को खींचती थी | आख़िरकार उसकी ब्रा उसके मुम्मो को उसकी पसंद के अनुसार ढँकने में कामयाब हो गयी थी |
“हूँ अब ठीक है…….अब ठीक है ना राहुल बेटा……” सलोनी अपने मुम्मो पर ब्रा के उपर से हाथ फेरते हुए बोली |
“आ….. ह…..हन…हन मम्मी अब ठीक है” सलोनी के पुकारने पर राहुल जैसे नींद से जगा | उसका पूरा ध्यान अपनी मम्मी पर था | उसकी नज़र सलोनी को ब्रा में मुम्मे ठीक करने की एक एक हरकत को गौर से देख रही थी | जिस तरह वो बार बार कप से मुम्मे बाहर निकाल लेती थी और उन्हे दबाती थी जा फिर अपने निप्पल को खींची थी | राहुल बार बार अपने होंठों पर जीभ फेर रहा था | उसके होंठ उसकी जिभ उन अमृत के प्यालों को पीने के लिए तरस रहे थे | सलोनी बेड से कच्छी उठाती है और उसे राहुल को देती है | राहुल उसे कंपकँपाते हाथों से पकड़ अपनी मम्मी की और देखता है |
“चलो अब पहना भी दो कि ऐसे ही देखते रहोगे … तुम्हारे इस देखने के चक्कर में पहले ही बहुत लेट हो चुके हैं” | राहुल अपनी मम्मी के सामने घुटनो के बल बैठ जाता है | सलोनी थोड़ा सा झुक कर राहुल के कंधे पर हाथ रखकर एक टांग उपर उठाती है | राहुल कच्छी के एक हिस्से में उसका पाँव डालता है | पाँव उठाने के कारण सामने उसे अपनी आँखो के बिल्कुल पास अपनी मम्मी की सुगंधित चूत पूरी तरह दिखाई दे रही थी | सलोनी दूसरा पाँव उठाती है | राहुल वो पाँव भी पकड़ कर कच्छी में डालता है मगर उसकी नज़र अपनी मम्मी की चूत पर ज़मी हुई थी | सलोनी वापस सीधी हो जाती है मगर इस बार वो अपनी टाँगे थोड़ी सी चौड़ी कर लेती है | टाँगे खुलने से चूत हल्की सी खुल गयी थी और अंदर से हल्का सा गुलाबीपन झाँक रहा था | राहुल कच्छी को उपर चढ़ाता है | कच्छी उसकी जाँघों पर टाइट होने लगती है | गहरी साँस लेता राहुल कच्छी को उपर करता जाता है | धीरे धीरे कच्छी उसकी चूत को ढक देती है | राहुल एलास्टिक को थोड़ा सा उपर को ज़्यादा चढ़ा देता है इससे सलोनी जब वापस टाँगे बंद करती है तो सामने से उसकी चूत के होंटो की दरार में कच्छी का हल्का सा सिरा घुसा हुआ था |

“इसे सही तो करो, देखो ना मेरी चूत में घुसी पड़ी है” सलोनी बड़े ही नखरीले स्वर में बोलती है | राहुल का काँपता हुआ हाथ नीचे आता है और वो उसकी चूत पर हाथ रखकर कपड़े को पकड़ने की कोशिश करता है मगर इस कोशिश में कपड़े के साथ साथ उसकी चूत का मोटा होंठ भी उसके अंगूठे और उंगली में समा जाता है |

सलोनी अपने होंठ भींचकर अपनी सिसकी रोकती है | राहुल होंठ को मसलता हुआ धीरे से कपड़ा पकड़ लेता है और उसे खींच कर दरार से निकाल देता है | मगर इसके बाद भी उसकी चूत को कच्छी के उपर से दो तीन बार सहला देता है जो टाइट काली कच्छी से झाँक रही थी | वो उपर को अपनी मम्मी की और देखता है जो होंठ भींचे खुद को सिसकने से रोक रही थी | सलोनी राहुल को देखती है जो उसकी और देखता हुआ जैसे पूछ रहा था “अब क्या” |
सलोनी बिना कोई ज्वाब दिए घूम जाती है | “इधर भी देखो ना…. अच्छी तरह से ठीक कर दो नही तो मुझे बैठने उठने में बहुत असूबिधा होगी” स्लोनी फिर से नखरा करते हुए बोलती है |
राहुल की नज़र जब सलोनी के नितंबो पर जाती है ओह ‘उफफफफफफफ्फ़’ उसका लौड़ा और भी ज़ोर से झटके मारने लग जाता है | सलोनी की कच्छी बहुत टाइट थी | इतनी टाइट कि उसके दोनो नितंबो पर चमड़ी की तरह चिपकी हुई थी |

उसके दोनो नितंब उनकी गोलाई, मोटाई सब कुछ सामने से नज़र आ रहा था |
कच्छी पर कोई बल कोई सिलवट नही थी मगर राहुल इस मौके को हाथ से कैसे जाने देता |
वो सलोनी के दोनो नितंबो पर अपने हाथ रख उन्हे बड़े प्यार से सहलाता है |
वो कच्छी को ठीक करने के बहाने सलोनी के नितंबो को मसलता है उसकी गांड की गहराई में अपना हाथ घुसाता है |
“देखना एकदम सही हो जाए…. अच्छे से करना बेटा……” सलोनी मादक स्वर में धीमे से बोलती है |
राहुल को भी कोई जल्दबाजी नही थी | वो भी कच्छी की सिलवटे निकालने के बहाने उसके नितंबो को अपने अंगूठे और उंलगी में भर मसलता |
कई बार सलोनी ‘सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईई’ की आवाज़ के साथ तीखी सिसकी लेती |
आख़िरकार राहुल अपनी मम्मी की गांड को सहलाते उसकी मादक खुशबू लेते रुक गया |
उसे डर था कहीं इतना ज़्यादा समय लगाने पर सलोनी उसे फिर से छेड़ने ना लगे |
“हुं अब ठीक है” सलोनी अपने बेटे के सामने घूमती है |
वो फिर से आईने के सामने जाकर अपना शिंगार पूरा करने लग जाती है |
आईने में से राहुल को देखती जो अपना लौड़ा मसल रहा था वो मुस्करा रही थी |
“अब मैं कपड़े कोन से पहनू? साड़ी जा फिर चूड़ीदार?” सलोनी मेकअप के बाद सीट से उठती राहुल से पूछती है |
“जो आपको अच्छा लगे पहन लीजिए” राहुल को समझ नही आया वो क्या कहे |
“तो तुम्हारी कोई पसंद नही है? अपनी मम्मी की इतनी सी भी हेल्प नही कर सकते?” सलोनी झूठ मूठ की नाराज़गी जाहिर करती है |
“अब म्म्मी मैं क्या कहूँ……आप साड़ी पहन लीजिए”
“हुं साड़ी ठीक है… मगर बेटा सब्ज़ी मंडी जाना है बहुत भीड़ और गर्मी होगी, साड़ी में कैसे जाऊँगी?” सलोनी राहुल की पेंट में बने टेंट को देखते पूछती है |
“तो फिर चूड़ीदार पहन लीजिए…….अगर आपको गर्मी का डर है तो…….आप कुर्ता डाल लीजिए”
“हाँ ……. बिल्कुल ठीक कहा तुमने कुर्ता डाल लेती हूँ…. गर्मी में आराम रहेगा और अंदर हवा भी लगती रहेगी ….. अब तुमने इतनी टाइट ब्रा और कच्छी पहना दी है और कुछ डालूंगी तो गर्मी से मर ही जायूंगी” सलोनी कुर्ता और उसके साथ एक जीन्स निकालती है | उन्हे बेड पर फेंक वो अपनी बाहें सामने को फैला देती है | राहुल कुछ समझ नही पाता |
“अरे बुद्धू अब क्या हर बार बोलकर समझना पड़ेगा …….. पहनायो” सलोनी तीखे स्वर में बोलती है तो राहुल फटाफट उसका कुर्ता उठाकर उसे पहनाने लगता है |
आख़िरकार राहुल की इतनी मेहनत के बाद सलोनी अब कपड़े पहन ही चुकी थी | वो एक बार फिर से खुद को आईने में देखती है अपने बाल संवारती है और मेकअप ठीक करती है | फिर वो अपना पर्स उठाती है और टेबल से कार की कीज़ लेती है |
“हुं…… कैसी लग रही हूँ” सलोनी राहुल के सामने जाकर खड़ी हो जाती है |
“बहुत खूबसूरत …… मम्मी आप सच में बहुत सुंदर हो” | राहुल मन्त्रमुग्ध सा बोलता है |
“खूबसूरत….. सुंदर ……… यह क्या तारीफ हुई भला………. जैसे कोई बाप अपनी बेटी को बोलता है…. अरे थोड़ा सा खुलकर बता ना ……. कैसे लग रही हूँ?” सलोनी का स्वर इतना उत्तेजित और मादक था कि राहुल का लौड़ा पेंट फाड़ने पर तूल गया |
“जबरदस्त……..आप बहुत……बहुत………..बहुत……अच्छी दिख रही हो….मुझे नही मालूम मम्मी” राहुल वहाँ से हटने की कोशिश करता है | मगर सलोनी उसके कंधो पर हाथ रखके उसे वहीं रोक लेती है |
“अरे बेवकूफ़ अगर तुझसे तेरी गर्लफ्रेंड पूछेगी तो ऐसा बोलेगा क्या ….. क्या बोलेगा तू! बहुत सुंदर हो! बहुत खूबसूरत हो! बहुत अच्छी दिखती हो! ……. वो यकीन ही नही करेगी और शायद उसे इन शब्दो की समझ ही नही लगेगी”
“मुझे नही मालूम क्या बोलना है …. मेरी कौनसी कोई गर्लफ्रेंड है?” राहुल खीझता हुआ बोलता है |
“इसीलिए तो तुझे बता रही हूँ……… अगर तुझसे तेरी गर्लफ्रेंड पूछेगी तो नही बोलेगा कि वो बहुत सेक्सी दिखती है …….. ऐसा कुछ नही बोलेगा?” राहुल हूँ में सर हिलाता है | “हुं …….. आजकल लड़कियों से औरतें सब तारीफ में यही सुनना चाहती हैं …. अब बोल क्या बोलेगा” सलोनी उसके कंधो को अपने हाथो में दबाकर बोलती है |
“मम्मी आप बहुत सेक्सी दिखती हो” राहुल धीमे से कहकर सर झुका लेता है | सलोनी ज़ोरों से हँसने लग जाती है | वो उसके कंधो से हाथ हटाकर अपना मुँह ढक लेती है | उसका पूरा बदन कांप रहा था | वो बेड पर बैठ जाती है | वो कई बार हँसी रोकती है मगर फिर से हँसने लगती है | राहुल को समझ नही आ रहा था वो क्या करे, आख़िर उसकी मम्मी उससे चाहती क्या थी | वो कुछ शर्मिंदा सा खड़ा था |
आख़िरकार सलोनी की हँसी बंद होती है और वो फिर से राहुल के सामने खड़ी हो जाती है | उसके झुके सर को अपने हाथ से उपर उठाती है | राहुल अपनी मम्मी की और देख रहा था | अभी भी सलोनी के चेहरे पर हँसी थी | उसका चेहरा हँसी से कुछ लाल हो गया था और आँखो में कुछ पानी आ गया था | एक तरफ़ तो राहुल कुछ खीझा हुआ था वहीं अपनी मम्मी के हंसते चेहरे को देख वो अंदर से मुस्करा उठा | कितनी सुंदर है वो, किसी परी की तरह वो सोच रहा था और हँसते हुए तो एकदम किसी मलिका के जैसे लगती थी |
“अरे भोले बुद्धू ….. वो तो मैने तुझे बताया था…..तुझे अपने पास से कुछ बोलना है……कैसे हो तुम राहुल मेरी थोड़ी सी तारीफ भी नही कर सकते ……… कल को लड़कियाँ कैसे पटाओगे ……….. चलो अब बोलो जल्दी से, देखो कितनी देर हो गयी है ……….. जल्दी करो” सलोनी राहुल को उकसाती है | राहुल सोच में पड़ जाता है | वो सोचने लगता है मगर उस समय उसके दिमाग़ में कुछ भी नही आ रहा था | वो याद करने की कोशिश करता है कि उसके फ्रेंड्स लड़कियों के बारे में कैसे बोलते हैं मगर फिर भी वो कोई ऐसा लफ्ज़ सोच नही पा रहा था |
“ओफफफफफफफह ….. राहुल इतना टाइम……..जल्दी करो ना……..” सलोनी उसकी मुश्किलों को और बढ़ा रही थी | राहुल की नज़र अचानक अपनी मम्मी के मुम्मो पर जाती है और नाज़ाने क्यों अचानक उसे अपनी मौसी पायल का ध्यान आ जाता है | उसके मुम्मे भी सलोनी की ही तरह मोटे मोटे थे | ‘साली वो भी पूरी पटाखा है’ राहुल अपनी मौसी को याद करता है | ‘पटाखा … पटाखा’ अचानक राहुल का चेहरा खिल उठता है |
“मम्मी आप तो पूरी पटाखा लग रही हो” राहुल जोश में बोल जाता है | उसे लगा शायद उसने अपनी मम्मी की शर्त पूरी कर दी है | सलोनी एक पल के लिए आँखे गोल करती है फिर उसके होंठ काँपते हैं | राहुल घबरा जाता है | लगता था वो फिर से हँसने वाली है | मगर इस बार सलोनी हँसती नही |
“हुं ….. यह हुई ना बात……पटाखा ……. बात पूरी बनी नही ……….. मगर चलेगा ……… तूने कुछ बोला तो सही वरना मुझे तो लगने लगा था कि आज रात तक तेरे कुछ बोलने का इंतज़ार करना पड़ेगा ………… वैसे भी तेरी पेंट का तंबू देखकर लगता तो ऐसा ही है कि मैं सचमुच में पटाखा लग रही हूँ” सलोनी राहुल की पेंट का उभार गौर से देखते हुए बोलती है | फिर वो अपनी आँखे राहुल की आँखो में डाल देती है |
“चलें मम्मी ……….. देर ….. देर हो रही है” राहुल थूक गटकता है |
सलोनी आगे बढ़ती है | अब उसके और राहुल के बीच एक फीट से भी कम का फासला था | वो अपनी बाहें राहुल के गले में डाल देती है मगर उन्हे मोड़ती नही है बल्कि उसके गले में बाहें डाल वो उन्हे पीछे को फैला अपने हाथ बाँध लेती है |
“मर्ज़ी है तुम्हारी …………. “सलोनी इठलाते हुए नखरा दिखाते हुए मादक स्वर में बोलती है |
“क्या मतलब ….. मम्मी ….” राहुल फिर से थूक गटकता है |
“मैने सोचा शायद तुम्हारा दिल ….. कुछ और करने का है तो ……. ” सलोनी आवाज़ में मादकता भरते हुए चूदने को तत्पर किसी उत्तेजित नारी की तरह सिसकते स्वर में बोलती है | राहुल की धड़कने बढ़ जाती हैं | उसे अचानक से आस की किरण दिखाई देती है | उसे लगता है जैसे उसका काम बन जाएगा | उसका लौड़ा खुशी में ज़ोरदार झटका ख़ाता है |
“नही ……… सच में देर हो रही है ………………. उफ़फ्फ़ देख तो कितना टाइम हो गया है……चल जल्दी से” सलोनी चाभी और पारस लेकर दरवाजे की और बढ़ती है. राहुल के सारे सपने फिर से चकनाचूर हो गये थे | दोपहर से दो बार ऐसा हो चुका था कि उसे आस बँधी हो और वो टूट गयी हो |
“साली………” राहुल अपने मन में अपनी भड़ास निकालता दरवाजे की और बढ़ता है |
राहुल कार में साइड सीट पर बैठा बाहर की और घूर रहा था जबकि सलोनी कार चला रही थी | सलोनी के होंठो पर हल्की सी मुस्कान बनी हुई थी और वो ड्राइव करती बार बार राहुल की और देख रही थी |
“नाराज़ हो?” सलोनी के पूछने पर राहुल कोई ज्वाब नही देता |
“इतनी नाराज़गी कि बात भी नही करोगे अपनी मम्मी से?” जब राहुल कोई ज्वाब नही देता तो सलोनी उसे फिर से बुलाती है मगर राहुल पहले की तरह बाहर देखता रहता है और अपनी मम्मी को कोई ज्वाब नही देता | सलोनी के होंठो की मुस्कराहट और भी बढ़ जाती है |
“अच्छा बताओ तुम्हे क्या चाहिए? किस चीज़ से तुम्हारी नाराज़गी दूर होगी?” सलोनी बेटे को मनाने का प्रयास करती बोलती है |
“मुझे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं नाराज़ हूँ … आपको जो चाहिए था वो आपको मिल गया, आप खुश हैं ना बस……….. आप मेरी चिंता मत कीजिए” राहुल गुस्से से तीखे स्वर में ज्वाब देता है |
“ओह तो यह बात है……..तो तुम सोचते हो कि मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिल गया इसीलिए मैं खुश हूँ और जो तुम्हे चाहिए था वो तुम्हे नही मिला और शायद इसीलिए तुम नाराज़ हो? है ना?” सलोनी एक हाथ से आराम से ड्राइव करती राहुल की जाँघ को सहला रही थी |
“नही आप ग़लत सोचती हैं, मैने आपसे कहा ना मुझे आपसे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं आपसे नाराज़ हूँ” इस बार राहुल का स्वर और भी तीखा था |
“मैं अच्छी तरह से जानती हूँ तुम क्यों नाराज़ हो, मगर तुमने कौनसा कहा था कि तुम मेरी लेना चाहते हो? तुमने कहा एक बार भी? नही कहा…. मैने सोचा जितना मज़ा मुझे आया होगा तुम्हारे चाटने से उतना ही तुम्हे भी आया होगा इसीलिए मैने सोचा कि बाकी का मज़ा अब रात को कर लेंगे…. अगर मुझे मालूम होता कि तुम इस तरह नाराज़ हो जाओगे तो मैं तुम्हे देती ना!……पहले भी तो दी है ना………तुमने मारी है ना मेरी…….” सलोनी का हाथ राहुल की जाँघ पर उसके लौड़े की तरफ धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था |
“अच्छा अब मान भी जाओ …….” सलोनी के स्वर में मादकता भरती जा रही थी | “घर चल कर खूब मज़े से दूँगी……..टाँगे उठाकर……..उउउंम्म चाहो तो अपनी टाँगे तुम्हारे कंधे पर रखकर दूँगी………” सलोनी बात नही कर रही थी बल्कि बड़े ही मादक और कामुक स्वर में फुसफुसा रही थी और उसके हाथ की उंगलियाँ बार बार लंड से टकरा रही थी | राहुल चाहे अपनी मम्मी से बहुत नाराज़ था मगर उसकी अशलील भड़कायु बातों और हरकतों के कारण अपने तेज़ी से सखत हो रहे लौड़े को नही रोक सकता था | उसकी पेंट में टेंट बनाना शुरू हो चुका था |
“और अगर चाहो तो……..तो मुझे घोड़ी बना लेना……. आज रात अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर फिर मेरी …… मेरी………. हाइईए ….. पीछे से ……… पीछे से…….” सलोनी राहुल के लंड को पेंट के उपर से मुठ्ठी में भर कर उसे मसलते हुए बोलती है |
अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए जितनी कामुक आवाज़ में वो बोल रही थी उससे कहीं ज़्यादा कामुक उसके चेहरे के भाव थे | राहुल के दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी | उसकी साँसे उखड़ी हुई थी | पेंट में उसका लौड़ा पूरा तन कर झटके खा रहा था |
“पीछे से……पीछे से क्या मम्मी?” राहुल बिल्कुल धीमे से स्वर में बोलता है | वो भूल भी चुका था कि वो अपनी मम्मी से नाराज़ भी था |
“पीछे से….पीछे से……वो तू अपना मेरी मेरी उसमे……डाल कर…..और फिर……हाए अंदर-बाहर…..अंदर-बाहर…..ज़ोर से…….कस्स कस्स कर…..हाए मैं नही बोल सकती मुझे शरम आती है” सलोनी सचमुच ऐसे शरमाती है जैसे उसे बहुत शरम आ रही हो | उसका हाथ अभी भी राहुल के लंड को मसल रहा था |
“बताओ ना मम्मी……प्लीज़ मम्मी बताओ ना……” राहुल फुसफुसा कर बोलता है | उसके कान अपनी माँ के मुँह से वो अल्फ़ाज़ सुनने को तरस रहे थे |
“वो……वो….तू अपना अपना वो…..मेरी….मेरी इसमें डाल कर……हुमच हुमच कर…..हाए जब कस कस कर…………अंदर बाहर…..अंदर बाहर……..” अचानक सलोनी राहुल के लंड से हाथ हटा लेती है | वो सब्ज़ी मंड़ी के पास पहुँच गये थे |
सड़क पर रश बढ़ता जा रहा था | “तुम अच्छे से सीधे होकर बैठो…. हम लोग अब मंडी में हैं” सलोनी राहुल को सीधे होकर बैठने के लिए कहती है और खुद भी सीधी होकर सामने देखती ध्यान से गाड़ी चलाने लगती है |
“माद्रचोद ……अपनी साली किस्मत ही खराब है” राहुल अपनी किस्मत को कोसता है | कार मंडी के सामने पहुँच चुकी थी और सलोनी उसे बिल्कुल कम स्पीड पर चलाती किसी सेफ पार्किंग को तलाश रही थी | कार पार्क करने के पशचात सलोनी अपना पर्स बाहर निकालती है और अपना दुपट्टा कार में ही छोड़ देती है | राहुल भी अपनी मम्मी के पीछे निकल पड़ता है | वो जैसे ही सलोनी के पीछे जाने लगता है, सलोनी उसे रोक देती है और उसे कार की कीस देती कहती है,
“इस तरह जाओगे मंडी में, हालत देखी है अपनी” राहुल अपनी मम्मी की बात समझ नही पाता और उसे स्वालिया नज़रों से देखता है | “अपनी पेंट में बने तंबू को तो देखो ……. लोग हँसेंगे तुम पर” राहुल मायूस सा होकर अपनी मम्मी के हाथ से चाभी ले लेता है और कार की तरफ मुड़ जाता है | वो खुद जानता था इस हालत में वो मंडी नही जा सकता |
“अब यह चेहरा मत लटकाओ …. जब यह शैतान बैठ जायेगा तो आ जाना” सलोनी की बात से राहुल को थोड़ी हिम्मत बंधती है | असल में सलोनी के दुपट्टा ना पहनने से वो थोड़ा सा परेशान हो उठा था | हालांकि सलोनी ने दुपट्टा नही पहना था और उसका कुर्ता भी थोड़ा ढीला सा था मगर सलोनी के मुम्मे इतने मोटे और तने हुए थे कि कुर्ते में से उनका रूप छलक रहा था | उसकी गोरी रंगत शाम की हल्की धूप में चमक रही थी और उपर से उसने बाल भी खुले रख छोड़े थे |
राहुल का परेशान होना बिल्कुल वाजिब था | जिसकी भी नज़र सलोनी पर पडती वो पहले उसके चेहरे और फिर उसके सिने को घूर कर देखता | सलोनी अपनी और घूरती निगाहों से बाखूवी वाकिफ़ थी, उसे इन निगाहों की कॉलेज के दिनों से आदत थी | वो एक एक दुकान पर जाकर सब्जियाँ खरीदने लगी | दुकान वाले सलोनी के रूप पर मोहित उसकी कामुक काया को अपनी आँखो से नंगी करके चोद रहे थे | जब भी वो झुकती उसकी गांड पर उसका कुर्ता उँचा हो जाता और टाइट जीन्स से छलक कर बाहर आने को बेताब उसके गोल मटोल नितंब देख लोगो की साँस रुक जाती | ऊपर से उसके दमकते चेहरे पर उसकी नाक की बाली उसकी देह की कामुकता को कई गुना बढ़ा रही थी | सलोनी के पास आठ दस बैग भर चुके थे, तभी उसे राहुल अपनी और आता दिखाई दिया | वो अपनी मम्मी पर पड़नी वाली नज़रों को देख रहा था | सलोनी अपने पर्स से पैसे निकाल रही थी और दुकान वाला उसे घूर रहा था | जब राहुल सलोनी के पास आ गया तो पहले तो दुकान वाले ने उसकी और कोई ध्यान नही दिया मगर जब सलोनी ने राहुल को “आ गये बेटा” कहकर बोला तो दुकान वाले ने उसकी और देखा | राहुल के गुस्से से जलती लाल आँखे देख कर दुकान वाले ने तुरन्त अपनी नज़रें फेर ली और फिर दोबारा सलोनी को घूर कर नही देखा | वो राहुल की आँखो से बरसते अंगारों से बाखूबी अंदाज़ा लगा सकता था कि वो छोकरा उसे क्यों घूर रहा था |

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