Haaye Mummy Meri Lulli – Update 18 | Family Sex Stories

Haaye Mummy Meri Lulli - Maa Ki Chudai Ki Kahani
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“बस अब चाय का ग्लास भरो और उपर जाकर अपनी पढ़ाई शुरू करो …. कम से कम पाँच घंटे पढ़ना है तुम्हे” सलोनी फर्श पर पड़ी अपनी नाइटी उठाती है और पहनने लगती है |

“मम्म्ममी” राहुल अपने खड़े लंड की और देखता है |

“मम्मी… मम्मी… कुछ नही…. ऊपर जाओ और पढ़ाई करो” सलोनी राहुल को उसके कपड़े पकडाती बोलती है |

“मम्मी….मम्मी…” राहुल बच्चे के स्वर में मिन्नत के अंदाज़ में बोलता है |

“मैने कहा ना जाकर पढ़ाई करो…..कम से कम पुरे पाँच घंटे……..जितना तुम माँग सकते थे उससे कहीं अधिक मिला है तुम्हे… इसलिए अब नखरे छोड़ो और ऊपर जाकर पढ़ाई करो…..और हाँ कल की तरह इंटरनेट पर सेक्स का ज्ञान ना हासिल करने लग जाना …. मैं बीच बीच में देखने आती रहूंगी… तुम क्या पढ़ रहे हो………..तुम्हे कहा था ना अगर मेरा कहना मानोगे तो सब कुछ मिलेगा………….आगे से भी दूँगी………और पीछे से भी दूँगी………….लेकिन अगर कहना मानोगे तो……………” सलोनी बेटे को चाय का कप भरकर देते बोलती है | राहुल के पास अब कोई चारा नही था अगर उसे अपनी माँ चोदनी थी तो उसका हुक्म मानना ही था | वो आगे होकर चाय का कप पकड़ लेता है और दूसरे हाथ में अपने कपड़े थामे रसोई के दरवाजे की और कदम बढ़ाता है |

“हाए कितनी सुंदर गांड है…… सेक्सी…….सेक्सी…………..” सलोनी राहुल के पीछे सीटी मारकर बोलती है | राहुल तेज़ कदमो से बाहर निकल जाता है | सलोनी की हँसी छूट जाती है |

राहुल कमरे में जाकर अपना पयज़ामा पहनता है | कंप्यूटर टेबल पर चेहरा हाथों में लिए बैठा वो कुछ समय तक सोचता रहता है | अंत में वो चेहरे से हाथ हटाता है और वो ठंडी आह भरकर अपनी बुक्स खोलने लग जाता है | राहुल को खड़े लंड के साथ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में बहुत परेशानी हो रही थी | आख़िरकार कोई पँद्रह मिनिट बाद उसका लंड नीचे बैठने लग जाता है और वो अपना ध्यान पढ़ाई पर लगा पता है |

सलोनी के लिए आज बहुत सारा काम था | घर में झाड़ू पोंछा करना था | कपड़े धोने थे और दोपहर का खाना भी बनाना था और उपर से किचन में खाना बनाने के समान की खरीदारी करने के लिए बाज़ार भी जाना था |

सलोनी ने जैसे राहुल से कहा था वो वाकई घर के काम करती हर आधे पौने घंटे बाद उसके कमरे में जाती थी | उसने राहुल को सख्ती से कहा था कि वो अपना दरवाजा खुला रखे ताकि वो कभी भी आकर चेक कर सके कि वो क्या कर रहा है | हर बार जब भी सलोनी राहुल के कमरे में आती तो उसके हाथ में कुछ ना कुछ होता | कभी दूध कभी चाय तो कभी जूस | सलोनी जब भी राहुल के कमरे में जाती तो उसे पाँच मिनिट का ब्रेक मिल जाता और वहाँ से आने से पहले वो राहुल को चेता देती कि वो कभी भी आकर उसे चेक कर सकती है और अगर उसने उसे पढ़ाई के इलावा कुछ और करते पाया तो वो उसे अपनी चूत नही मारने देगी | खैर राहुल के लिए मुश्किल ज़रूर था मगर वो पढ़ाई में मन लगा लेता है | उसे बाद में मिलने वाले बड़े इनाम का लालच था | अपनी माँ की चूत मारने से हाथ धो बैठना उसे कतई गंवारा नही था | लेकिन स्लोनी के हर आधे पोने घंटे के बाद चक्कर मारने के कारण उसके लिए वक़त काटना बहुत आसान हो गया | वो पढ़ाई करता वेट करता कि कब उसकी मम्मी आए और देखे कि उसने कितना काम कर लिया है | धीरे धीरे उसे इसमे भी मज़ा आने लगा था | आख़िरकार तीन बज गये थे | सलोनी अबकी बार पिछले एक घंटे से उसके कमरे में नही आई थी | किचन से आती आवाज़ से वो जान गया था कि उसकी मम्मी खाना बनाने में व्यस्त है | जिस तरह घड़ी की सूईयां तीन बजने के करीब होती जा रही थी उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी |

आख़िरकार घड़ी पर तीन बज गये | राहुल के होंठो पर मुस्कान दौड जाती है | अब उसकी सख्त मेहनत का फल मिलने का वक़्त आ गया था | अब कल सुबह तक उसे सिर्फ एक ही काम था, मौका मिलते ही मम्मी को चोद देना | उसकी पेंट में उसका लंड सुखद कल्पनायों से खड़ा होने लगा था | राहुल कमरे से बाहर निकल सीढ़ियां उतरने लगता है |

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उसकी उम्मीद के मुताबिक सलोनी उसे किचन में नही मिलती | किचन से ताज़ा खाने की महक आ रही थी | लगता था वो अभी अभी खाना तैयार करके किचन से निकली थी |

राहुल अपने पेरेंट्स के बेडरूम में जाता है | वो धीरे से हैंडल घुमा कर दरवाजा खोलता है | सामने स्लोनी तकिये पर सर रखे पेट के बल बेड पर उल्टी लेटी हुई थी |

 उसने सर दूसरी तरफ को मोड रखा था और उसके बदन पर एक पतली सी चादर थी जो उसके घुटनो से लेकर कंधो के नीचे तक उसके बदन को ढँके हुए थी | उसके कंधे पूरी तरह नंगे थे और उन्हे देखकर लगता था जैसे उसने नीचे कुछ भी नही पहना था | शायद उसने कुछ पहना हो मगर वो चादर के नीचे हो | मगर उसकी कोई ऐसी ड्रेस नही थी जिसमे उसके कंधे नंगे रहते थे | उसकी टांगों को देखकर भी ऐसा ही आभास हो रहा था | उसकी एक टांग सीधी थी और दूसरी उसने घुटने से मोडकर उपर को उठाई हुई थी | शायद उसने ब्रा और कच्छी पहनी हुई थी | मगर जिस तरह चादर उसके नितंबो पर चिपकी हुई थी और वो उनके अकार को सहजता से देख पा रहा था उसे नही लगता था कि उसने कोई कच्छी पहनी हुई थी | कच्छी की कोई भी बाहरी लाइन वो नही देख पा रहा था | इसी तरह उसकी पीठ पर चादर से कोई भी ब्रा का स्ट्रेप नज़र नही आ रहा था |

राहुल सोच में पड़ जाता है | उसे अपनी मम्मी को जगाना चाहिए जा नही | आख़िर वो अपने खड़े लंड की सुनता है और आगे बढ़ता है | वो धीमे से बेड पर चडता है | वो सलोनी की टांगों के पास बैठ धीरे से उसे छूता है | अपनी मम्मी की नग्न त्वचा को छूने पर से उसके अंदर सनसनी सी दौड़ जाती है | पयज़ामे में उसका लंड ज़ोरदार झटका मारता है | वो सलोनी की टांग पर कोमलता से हाथ फेरता उसे सहलाता है और उसके चेहरे पर नज़र डालता है | सलोनी आँखे खोले उसे ही देख रही थी |

राहुल वहीं जड़ हो जाता है | सलोनी की टांग पर उसका हाथ जहाँ का तहाँ ठहर जाता है | वो कुछ बोल नही पाता | बस अपनी मम्मी की आँखो में देखता है | सलोनी शांति से लेटी उसकी और देख रही थी | उसके चेहरे से थकान और नींद का एहसास होता था |

“मैं अभी अभी आई थी…. सोचा तुम्हे आने में कुछ वक़्त लगेगा तब तक मैं थोडा सा आराम कर लेती हूँ” सलोनी सुस्त स्वर में बोलती है, “उउउफफफफफ्फ़ पूरा बदन दर्द कर रहा है…. मगर मेरी टाँगे कुछ ज्यादा ही दर्द कर रही हैं…. सुबह से आठ दस बार सीडियाँ चढ़ कर उपर तुम्हारे रूम में गयी, पुरे घर की सफाई और फिर खाना बनाया….. बहुत थक गयी हूँ बेटा…. तुम जब मेरी टाँगे सहला रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था….. सच में” |

“तुम्हे किसने कहा था, बार बार सीढ़ियाँ चढ़कर मेरे कमरे में आने के लिए…. मैं पढ़ तो रहा था…. अब भुगतो” राहुल अपनी मम्मी को सख्त स्वर में बोलता है मगर उसका हाथ फिर से बहुत कोमलता से अपनी मम्मी की टांगों पर घूमने लग जाता है

“आती नही तो क्या करती? तुम्हारा क्या भरोसा, तुम उपर कामसूत्र पर अध्याय करने लग जाते और फिर अपने ज्ञान को मेरे उपर ही इस्तेमाल करते……कल शाम को भी तुम्हे पढ़ने के लिए भेजा था ना और तुमने क्या किया? जाकर चूत कैसे मारनी है वो सीखने लगे”

सलोनी की बात से राहुल लाल हो गया था. उसे समझ नही आ रहा था वो क्या ज्वाब दे | वो चुपचाप अपनी उसकी टांग को एक हाथ से कोमलता से सहलाता रहता है | उसका हाथ स्लोनी के घुटने से लेकर उसके पाँव तक फिर रहा था |

“म्‍म्म्मममम्म्मी……..उउउम्म्म्मममम” सलोनी को बेटे का स्पर्श बहुत आरामदायक लग रहा था | उसके उस स्पर्श से जैसे उसके तन मन में सकुन फैलता जा रहा था | “उउउम्म…. दोनो को सहलायो ना” सलोनी बेटे को बहुत ही प्यार भरे स्वर में बोलती है |

राहुल सलोनी की बात से खुश हो जाता है | वो उठकर पीछे को होता है और सलोनी की टांगों के बीच उसके घुटनो के पास में बैठ जाता है | वो अपने हाथ और भी कोमलता से स्लोनी की नरम मुलायम टांगों पर रख उन्हे सहलाना शुरू कर देता है | राहुल के हाथों का स्पर्श अपनी टांगों पर पाकर सलोनी अपने बदन को ढीला छोड देती है और वो उस आनंदायक एहसास को महसूस करने लगती है |

“उउउम्म्म्म……म्‍म्म्ममम्म्मम….” स्लोनी के उपर मदहोशी सी छाती जा रही थी | वो धीरे से राहुल की आँखो में देखती अपनी आँखे बंद कर लेती है | राहुल अपनी माँ की प्रतिकिरिया से और भी खुश हो जाता है | पयज़ामे में उसका लंड तंबू बना चुका था | राहुल टांगों को सहलाता धीरे धीरे उपर को बढ़ने लगता है | मगर घुटनो से उपर चादर थी | हर बार जब राहुल के हाथ सलोनी के घुटनो से उपर जाते चादर से टकराते और वो वहाँ से फिर अपने हाथ नीचे को लाने लगता | मगर हर बार जब उसके हाथ उपर जाते थे तो वो चादर को थोड़ा सा उपर को कर देते थे | राहुल बड़े धर्य से धीरे धीरे चादर को घुटनो तक ले गया था |

“नीचे ही सहलाते रहोगे क्या… उपर भी करो ना… असली दर्द तो मेरी जाँघो में है….” अचानक स्लोनी राहुल को आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दिखाती है | राहुल के हाथ चादर के नीचे अब अपनी मम्मी की जाँघो के उपरी हिस्से तक पहुँचने लगे थे |

 चादर के अंदर से उसके हाथ सलोनी के घुटनो से उसके नितंबो के हल्का सा नीचे तक सहला रहे थे | बस थोड़ा सा और उपर जाते ही वो उसके नितंबो को उसकी गांड को छू सकता था | मगर वो उसे देखना चाहता था | अपनी आँखो से अपनी मम्मी के गोल गोल नितंबो को सहलाना चाहता था | चादर के अंदर से अपनी मम्मी की जांघें सहलाता वो उसके नितंबो को घूर रहा था | सलोनी की पीठ पर उसकी कमर के पास से एक बेहद्द नाज़ुक सी कर्व के रूप में उसके नितंबो का उभार शुरू होता था जो उपर को और होता हुआ बिल्कुल गोलाई में बाद में नीचे को ढालाव की कर्व में बदल जाता था | चादर उसके नितंबो के उठान, उनकी ढलान, बाहर से उनकी उपर को गोलाई और दोनो नितंबो के बीच की घाटी को चूमती सी उसे आलिंगन करती हुई उनका पूरा रूप दिखा रही थी | चादर दोनो नितंबो के बीच हल्की सी अंदर को बैठी हुई थी |

“उउउम्म्म्मम……म्‍म्म्मममममम……म्‍म्म्ममम्म……और उपर करो ना” सलोनी मदहोश से स्वर में बोली | राहुल का दिल धम्म धम्म धड़क रहा था जब उसने अपने हाथ चादर के अंदर से उन मुलायम नरम गोल मटोल उभरे हुए नितंबो पर रख दिए थे | उसका शक बिल्कुल सही था | सलोनी ने कच्छी नही पहनी थी | वो चादर के अंदर पूरी नंगी थी | सलोनी के भी रोंगटे खड़े हो गये थे | उसकी मदहोशी में और भी बढ़ोतरी हो गयी थी |

“म्‍म्म्ममममम……..म्‍म्म्मममममम……..चादर निकाल दो बेटा” सलोनी के थरथराते बोल राहुल के कानो में शहद घोल गये थे | सलोनी टांगों को थोड़ा सा खोल देती है और तकिये पर दोनो बाहें रखकर उनपर अपना सर रख लेती है | अब वो पाँव से लेकर सर तक उल्टी थी |

राहुल अपनी मम्मी की खुली टांगों के बीच आगे को होकर उसकी जाँघो के पास बैठ जाता है और काँपते हाथों से चादर को थाम अपनी मम्मी को नंगी करने लग जाता है |

जैसे जैसे राहुल चादर को खींच रहा था वो स्लोनी की पीठ से सरकती जाती थी | उसकी पीठ हर पल के साथ नुमाया और नुमाया होती जा रही थी | चादर जब सलोनी के कंधो से खिसक कर उसकी कमर के निचले हिस्से की और जाने लगी तो राहुल ने देखा कि वाकई उसकी पीठ पर ब्रा के स्ट्रेप्स नही थे, उसका अंदाज़ा सही था | वो नंगी थी, पूरी नंगी | वो चादर खींचता गया | उसके दिल की धड़कने और भी तेज़ होती जा रही थी | चादर कमर के बिल्कुल निचले हिस्से तक पहुँच गई थी जहाँ से सलोनी के नितंबो का उभार शुरू होता था | राहुल अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरता चादर को खींचता है | सलोनी की कमर पर वो बाहर की और उभरती कर्व दिखाई देने लगी थी | फिर वो कर्व धीरे धीरे एक बड़ी सीधी उठान में परिवर्तित होने लगी | वो उठान अब सलोनी के कुल्हों के रूप में दिखाई दे रही थी | दोनो नितंबो के बीच की घाटी की और राहुल का खास ध्यान था | चादर नितंबो के उठान को चूमती सहलाती उन्हे विदा कह रही थी | अब चादर नितंबो के बिल्कुल उभरे सिरे पर उनकी चोटी पर थी जहाँ से आगे उनकी ढलान शुरू हो जाती थी | राहुल घाटी में नज़र दौड़ता चादर को खींचने की रफ़्तार और भी कम कर देता है | सलोनी के मोटे कसे हुए नितंब आपस में भिड़े हुए थे हालांकि उसने थोड़ी टाँगे भी खोली हुई थी | राहुल कोशिश करने के बावजूद भी अपनी माँ की गांड का छेद नही देख पाता |

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