Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani – Update 6

Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani - Long Incest Story
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स्मृति – हमारी पर्सनॅलिटी ही ऐसी है.

स्मृति ने इतराते हुए टाइप किया.

लाइयन – हाँ ये तो बात है.

स्मृति – और बताओ

लाइयन – पुछो जी, हम बता देंगे

स्मृति – क्या करते हो?

लाइयन – लड़कियो से चाटिंग, घूमना फिरना और एंजाय

स्मृति – काफ़ी खुश दिल लगते हो

लाइयन – लाइफ एक है, ये आप के उपर है कि शराफ़त का बोझ ढोते रहो या एंजाय करो

स्मृति – लड़कियो से चाटिंग करके तुम्हे क्या मिलता है?

लाइयन – हर कली को भंवरे की तलाश होती है और मे वो ही भँवरा हू.

स्मृति – ये कैसी फिलोसॉफिकल बाते करते हो. कलियाँ क्यू आएँगी इस भंवरे के पास, शादी तो हो ही जानी है उनकी.

लाइयन – स्मृति जी, आपकी नज़र मे तो हू ही बदनाम लेकिन फिर भी बता देता हू कि इस नाचीज़ के पास शादी शुदा कलियाँ ही ज़्यादा आती हैं अपना रस चुसवाने के लिए.

स्मृति – तो इस इंडिया मे अकेले मर्द हो तुम. हा हा हा हा हा

लाइयन – अकेला तो नही हाँ लेकिन मर्दो मे से एक हू.

स्मृति – हर मर्द यही कहता है.

लाइयन – सच बोलू तो आपसे कहना नही चाहता था लेकिन आपने मजबूर कर दिया कहने के लिए. आपको तो मे प्रॅक्टिकली बताता कि मर्द क्या होता है.

स्मृति – हा हा हा हा हा. ख्वाब बहुत देखते हो तुम. मुझे क्या ज़रूरत है जान ने कि तुम कितने बड़े मर्द हो, मेरे हज़्बेंड सबसे बड़े मर्द है इस दुनिया के.

लाइयन – हज़्बेंड चाहे कितना भी बड़ा मर्द क्यू ना हो, सेक्स ऐसी चीज़ है जो एक्सपेरिमेंट्स से ज़्यादा सॅटिस्फाइ करती है. रेग्युलर सेक्स से हज़्बेंड भी बोर हो जाता है और वाइफ भी, जिन हज़्बेंड को मौका नही मिल पाता वो हमेशा अपनी बीवी के ही पीछे लगे रहते है. ये एक ऐसी फॅंटसी है जिसे समझदार लोग जल्दी समझ लेते है और बेवकूफ़ लोग इसी सच के साथ जीते और मर जाते है. इंडिया मे ऐसी कितनी लॅडीस है जिन्हे आज तक सेक्स पोज़िशन्स तक के बारे मे नही पता, उनको बस इतना पता है कि हज़्बेंड आएगा, उपर लेटेगा और काम कर देगा.

स्मृति – गुरु जी बस. आप बस चुप ही रहो, और अपनी समझ अपने पास ही रखो.

तभी पंकज की एंट्री होती है रूम मे, स्मृति के तो जैसे होश ही उड़ जाते है और स्मार्ट्फोन उसके हाथ से छूट के गिर जाता है और बॅटरी बाहर. सिमरन अपने आप को बड़ी मुश्किल से संभालती है. पंकज अभी अंदर आकर गेट बंद करता है.

स्मृति – ” क्या गेट नॉक करके नही आ सकते हो, डरा दिया मुझे”. पंकज पीछे मूड कर देखता है जैसे स्मृति किसी और से कह रही है.

पंकज- ” क्या आप हम से कुच्छ कह रहीं है?”.

स्मृति – ” नही पड़ोसियो से कह रही हू”. और पंकज धीरे धीरे उसके पास आने लगता है, स्मृति उठ कर बेड के कोने मे खड़ी हो जाती है.

पंकज -” इतना ना तरसाओ मेरी जान, बस तुम ही तुम दिखाई दे रही हो चारो तरफ”.

स्मृति – ” ठीक है तो प्यार से बाते करते है”.

पंकज -” प्यार से कभी बाते होती है, प्यार से सिर्फ़ प्यार होता है और वही करने मे आया हू”. स्मृति के दिमाग़ मे लाइयन की बात घूमने लगती है कि हज़्बेंड्स को वाइफ से बस एक ही काम होता है, नही तो पास भी नही आते है.

स्मृति – ” मेरा प्यार करने का कोई मूड नही है”. और बेड के दूसरे कोने से उतर कर जल्दी से भाग जाती है. पंकज मन मार कर रह जाता है. अपने लंड पर हाथ लगाते हुए उपर देखता है और कहता है कि ” बीमारी दे दी इसके रूप मे, अब कम से कम दवाई का तो इंतज़ाम करा”. और हंसते हंसते रूम के बाहर चला जाता है.

इधर सिमरन और आराधना का कॉलेज ख़तम होने का टाइम हो जाता है. सिमरन कॅंटीन मे पहुँचती है आराधना से मिलने के लिए. आराधना के हाथ मे कॅरोट जूस का ग्लास था.

सिमरन – ” तो मेरी जान अकेले अकेले जूस पी रही है. “

आराधना -” सॉरी डियर, तुझे फोन करने ही वाली थी कि इतने मे तू आ ही गयी”. आराधना उसे जूस ऑफर करती है लेकिन सिमरन ये कह कर मना कर देती है उसका कुच्छ खाने का मन है पीने का नही.

सिमरन -” भैया 2 समोसे देना”. कॅंटीन वाले भैया से 2 समोसे मांगती है.

आराधना -” प्लीज़ मेरे लिए मत लेना”

सिमरन -” क्यू समोसे मे ऐसी क्या बुराई है”.

आराधना – ” यार कितना फॅट होता है और आयिली भी, वेस्ट भी 24 से 26 होने आ जा रही है”.

सिमरन -” मेरी जान मुझे समझ नही आता कि इतनी फिगर कोन्सियस क्यू है, जब तू किसी की लाइन आक्सेप्ट नही करती.”

आराधना – ” यार हर लड़की को फिगर कोन्सियस होना चाहिए, मे भी हू. इसमे बुरा क्या है”.

सिमरन-” कपड़ो मे अपनी बॉडी का हर पार्ट तू ढक कर रखती है, ऐसी फिगर का क्या फ़ायदा जिसे कोई देख ही ना सके”.

आराधना -” तू दिखाती फिर अपनी बॉडी, मे तो बस अपने हज़्बेंड को दिखाउन्गि”. आराधना ने इतराते हुए कहा.

सिमरन -” अगर मे शॉर्ट कपड़े पहनती हू तो मना करती और वैसे कहती है कि तू दिखाती फिर अपनी बॉडी”.

आराधना -” मेने तुझे कम कपड़े पहन ने से मना नही किया, तू नंगी घूम चाहे. बस मेरे घर अच्छे कपड़े पहन कर आया कर.”

सिमरन – ” अच्छे यानी कैसे कपड़े”.

आराधना -” सूट सलवार पहन लिया कर या सारी. दोनो ही कपड़ो मे लड़किया अच्छी लगती है”.

ये बात सुनकर एक शैतानी मुस्कान थी सिमरन के चेहरे पर.

आराधना -” ऐसे क्यू हंस रही है”.

सिमरन-” मेरी जान तेरी ये तमन्ना मे ज़रूर पूरा करूँगी”. और फिर वो दोनो घर के लिए रवाना हो जाते है.

थोड़े ही देर मे सिमरन आराधना को उसके घर ड्रॉप कर देती है. आराधना आते ही उपर जाती है और थक कर सो जाती है.

शाम के 6 बजे है, स्मृति बाहर लोकल मार्केट मे वेजिटेबल्स लेने गयी और तीनो बच्चे अपने रूम मे सो रहे है.

पंकज ग्राउंड फ्लोर पर ईव्निंग एक्सर्साइज़ कर रहा है. उसने एक बॉक्सर शॉर्ट पहना हुआ है और स्लीवेलेस्स टी- शर्ट.

” ट्रिंग, ट्रिंग”. डोर बेल बजती है और पंकज शॉक्ड हो जाता है. “मुसीबत अभी तो बाहर गयी थी आ गयी क्या”. वो मन मे सोचता हुआ डोर की तरफ बढ़ता है. वो स्मृति के बारे मे सोच रहा था कि वो मार्केट से जल्दी आ गयी है.

डोर खुला और जैसे पंकज को होश ही नही रहा. बाहर सिमरन खड़ी थी,

एक स्लीवेलेस्स सूट मे, वाइट कलर का स्लीवेलेस्स सूट आंड ग्रीन कलर की टाइट पयज़ामी. उसके उपर दुपट्टा ग्रीन और वाइट मिक्स कलर का था. हाइ हील सॅंडल्ज़, खुले हुए बाल और वो भी गीले ही थे जैसे अभी ही फ्रेश होकर आई हो वो. डार्क लिपस्टिक लगाई हुई थी उसने. सूट इतना टाइट था कि ऐसा लग रहा था कि बूब्स या आस पर से भी कभी भी फट सकता है और उसकी बॉडी आज़ाद हो सकती है. सेक्सी शब्द काफ़ी नही था उसकी बॉडी के लिए, वो उससे कहीं बढ़ कर लग रही थी. उसके हाथ मे एक ब्रॅंडेड पोलिबॅग था.

सिमरन ” मे आइ कम इन”. सिमरन ने पंकज की आँखो मे देखते हुए बोला. पंकज की हालत बेहद खराब थी, सिमरन का ये रूप उसका होश उड़ चुका था.

पंकज -” या सू.. सू.. श्योर”. सिमरन स्टाइल मे चलते हुए घर मे एंट्री लेती है. वो आज जान बुझ कर जान लेवा अंदाज़ मे चल रही थी, चलते चलते अचानक अपना चेहरा पीछे की ओर घुमाती है और पंकज को अपनी आस की ओर घूरता पाती है. उसकी हँसी छूट जाती है.

सिमरन-” अंकल आराधना कहाँ है”.

पंकज -” कभी हम से भी बात कर लिया करो”. पंकज उसकी नज़रो मे घूरता हुआ बोलता है. सिमरन हॉल मे रखे सोफे पर बैठ जाती है और स्टाइल मे एक टाँग के उपर दूसरी टाँग रखते हुए बोलती है.

सिमरन -” यू नो अंकल, मेन’स की ये प्राब्लम है कि वो ज़्यादा टाइम बात नही कर पाते. ज़्यादा से ज़्यादा 5 मिनिट और ख़तम.” उसकी डबल मीनिंग बात को पंकज अच्छे से समझ रहा था.

पंकज -” एक बार मौका तो दो बात करने का, तभी बताएँगे कि हम कितनी देर बात कर पाएँगे” ये बात बोलते हुए पंकज अपना हाथ लंड पर ले आता है और उसे उपर से सहलाने लगता है.

सिमरन – ” अंकल क्यू ना आप आराधना से बाते करे. वो भी समझदारी से समझेगी आपकी बात”. सिमरन ने आँख मारते हुए कहा. पंकज ने ये सुनते ही अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया.

पंकज-” आराधना मे वो बात कहाँ जो तुम मे है. आराधना तो अभी बच्ची है, लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि तुम मेरी पूरी बात हजम कर पाओगि”. पंकज सिमरन की पयज़ामी पे देखते हुए बोलता है.

सिमरन -” हा हा हा हा हा हा हा”.

पंकज -” हंस क्यूँ रही हो”

सिमरन – ” नही आपने कहा ना कि आराधना बच्ची है, आपको बता दू कि किसी भी मर्द की पूरी बात सुन ने के लिए वो पूरी तरह तैयार है”. सिमरन का मतलब था कि वो किसी भी मर्द का पूरा लेने के लिए जवान हो चुकी है.

पंकज -” वो अभी तुम्हारे जितनी परिपक्व नही हुई है”. पंकज सिमरन के बूब्स की तरफ देखते हुए बोलता है.

सिमरन -” अगर आप कहेंगे तो मे दिखा दूँगी कि वो कितनी परिपक्व हो चुकी है लेकिन आपको सपोर्ट करना पड़ेगा. बोलो तैयार हो?”

पंकज -” हाँ हाँ क्यू नही, बोलो क्या करना है”.

सिमरन -” तो सुनिए, मे उपर जाउन्गि आराधना के रूम मे. वो उपर से जो भी आपसे पुछेगि बस आपको हाँ हाँ मे जवाब देना है”.

पंकज -” मे तैयार हू लेकिन तुम्हारा ये रूप देख कर मुझसे बात किए बिना रहा नही जा रहा.

सिमरन ये सुन कर सोफे से खड़ी होती है. एक झटके से अपना दुपट्टा हटाती है,

टाइट सूट मे उसके बूब्स की लाइन और भी क्लियर दिखाई देने लगती है.

वो पंकज की तरफ कदम बढ़ाना शुरू करती है

, उसकी हाइ हील की ठक ठक पंकज के दिल पे बिजलिया गिरा रही थी.

वो आगे बढ़ती जाती है और ठीक पंकज के सामने आकर खड़ी हो जाती है

. दोनो अभी एक दूसरे के सामने खड़े है,

तभी सिमरन अपने घुटनो के बल बैठ जाती और अपनी बड़ी बड़ी आँखो से पंकज की निगाहो मे देखती है. उस

के तुरंत बाद अपने दोनो हाथ पंकज जी बॉक्सर रखती है और उसे नीचे खींच देती है.

पंकज की तो जैसे लॉटरी लग गयी. बॉक्सर उतरते ही

सिमरन पंकज के मोटे और तगड़े लंड को अपने डार्क लिपस्टिक वाले लिप्स से चूसने लगती है.

वाउ क्या नज़ारा था, सिमरन जैसी सेक्सी गॉडेस पंकज का लंड चूस रही है.

सिमरन उसे थोड़ा और मूँह के अंदर ले जाती है

और फिर बाहर निकाल कर पंकज की आँखो मे देखती हुई बोलती है कि “

यू लाइक दट?”. पंकज आज सातवे आसमान पर था,

स्मृति ने कभी उसका लंड नही चूसा था

. ये उसके लिए पहला अनुभव था.

सिमरन अपने दोनो हाथों की फिंगर से पंकज के लंड को पकड़ कर चूस रही थी.

उसकी सेक्सी नेल पैंट वाली फिंगर्स के बीच पंकज का काला और भयानक लंड,

ये देख कर पंकज बेहद ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होता जा रहा था.

लंड चूस्ते टाइम सिमरन की आँखे पंकज की तरफ ही थी,

पंकज क्या कोई भी इंडियन मर्द यही चाहता है कि

जब उसे प्यार मिले तो खुल कर मिले उसमे शरम नाम की कोई चीज़ ना हो.

आज पंकज के साथ यही हो रहा था.

सिमरन ने लंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी थी

और अब उसने पूरे लंड को मूँह मे लेना शुरू कर दिया था.

वो उसके गले मे भी अटक रहा था

लेकिन वो खुद भी चाहती थी कि पंकज को पूरा प्लेषर दे.

सिमरन की लिप स्टिक भी अब हट कर लंड पर लगने लगी थी,

लेकिन सिमरन हिम्मत हारने वाली नही थी.

इतने मोटे लंड के बार बार गले मे टकराने से उसकी आँखो मे पानी भी आ गया था

और ठीक उसके कुच्छ मिनिट बाद हॉल पंकज की आआअहह से गूँज गया

और सिमरन का मूँह उसके वीर्य से भर गया.

सिमरन अभी हार नही मान रही थी और उसने लंड को जब तक नही छोड़ा जब तक कि उसके लंड से आख़िरी बूँद ना निकल गयी हो. और फाइनली सिमरन खड़ी हो जाती है, पंकज के चेहरे पर सॅटिस्फॅक्षन के भाव थे.

पंकज -” आज तुमने मुझे वो गिफ्ट दिया है जो आज तक मुझे अपनी आधी लाइफ मे नही मिला. आइ आम सो हॅपी”. और सिमरन के लिप्स को किस करने के लिए आगे बढ़ता है. लेकिन सिमरन उसके छूट कर पीछे भाग जाती है. अपना दुपट्टा उठाती है और उपर वाले फ्लोर की तरफ भागने लगती है.

पंकज -” स्वीटी अभी काम पूरा नही हुआ.”.

सिमरन -” मे जितना आपके लिए कर सकती थी मेने कर दिया इसके आगे कुच्छ नही”. और उसे चुटकी बजा कर उंगली दिखाती है. और फिर वो उपर भाग जाती है. आराधना अपने रूम मे जाग चुकी थी. जैसे ही आराधना सिमरन को देखती है उसके होश उड़ जाते है.

आराधना -” तू और यहाँ, और ये कैसे कपड़े पहन रखे है तूने”.

सिमरन-” क्यू ये भी अच्छे नही है क्या. तूने ही तो कहा था कि पूरे कपड़े पहन कर मेरे घर आया कर सो पूरे कपड़े पहन कर ही आई हू”.

आराधना -” चल छोड़ इन बातो को, और सुना क्या हो रहा है”.

सिमरन -” कुच्छ नही मे उपर आ रही थी तो तेरे डॅडी ने ये पोलिबॅग दिया और कहा कि ये मे आराधना के लिए लाया हू”. सिमरन ने उसे वो पोलिबॅग दिया जिसे वो अपने घर से लाई थी.

आराधना -” ओह माइ गॉड, डॅडी मेरे लिए गिफ्ट लाए है, दिखा तो ज़रा”. वो छीन लेती है पोलिबॅग सिमरन के हाथ से. उस बॅग को खोल कर देखती है, उसमे एक ब्लू कलर की ट्रॅन्स्परेंट साड़ी, एक स्लीवेलेस्स ब्लाउस, एक ब्लॅक ब्रा आंड एक ब्लॅक पैंटी थी. आराधना शॉक्ड मे थी कि क्या उसके डॅडी ही लाए है ये उसके लिए. वो भाग कर रेलिंग पे जाती है और आवाज़ लगा कर डॅडी से पूछती है कि डॅडी क्या जो आराधना ने मुझे दिया वो आप ही लाए है. पंकज के साथ ये डील पहले ही सिमरन कर चुकी थी. तो पंकज भी हाँ हाँ जवाब दे देता है. और आराधना भाग कर वापिस अपने रूम मे आ जाती है. वो आज बहुत हॅपी थी. ब्रा उठाती है और उसमे साइज़ देखती है 36सी.

आराधना -” लेकिन डॅडी को कैसे पता चला कि मेरा साइज़ क्या है”.

सिमरन- ” यार इस साइज़ मे बड़ी बात क्या है, तीन तीन बच्चे पैदा कर दिए उन्होने स्मृति आंटी के साथ खेलते खेलते. आइडिया तो रहता ही है फादर्स को.”

आराधना -” तो तेरे फादर को भी पता है कि तेरा साइज़ क्या है”

सिमरन -” मेरी जान तू सवाल बहुत करती है. हाँ मेरे फादर को भी मेरा साइज़ पता है, यहाँ तक कि मेरी पैंटी का भी.” सिमरन उसके गालो पे चिकोटी काट के बोलती है.

सिमरन -” चल अब देर मत कर, अंकल ने बोला है कि आराधना से बोलो कि वो इन कपड़ो को पहन कर मुझे दिखाए”.

आराधना -” सच मे डॅडी ने ऐसे बोला है”.

सिमरन -” तुझे यकीन नही है तो पुच्छ ले”. इस बार आराधना पुच्छने नही जाती है, और भाग कर बाथरूम मे उन कपड़ो को लेकर घुस जाती है. करीबन 10 मिनिट तक वो अंदर ही कपड़े पहनती रहती है.

फिर उसकी आवाज़ आती है.

आराधना-” यार सिमरन, कपड़े तो अच्छे है लेकिन साड़ी कुच्छ ज़्यादा ही ट्रॅन्स्परेंट है, ब्लाउस कुच्छ ज़्यादा ही टाइट है”.

सिमरन -” मेरी जान तूने कभी साड़ी और ब्लाउस नही पहना है ना तो तुझे ऐसा लग रहा है.

ब्लाउस पहन कर एक बार अंगड़ाई लेगी ना तो सब अड्जस्ट हो जाएग.”

आराधना -” तू सच कह रही है ना”.

सिमरन -” अब जल्दी बाहर आ जा, मे झूठ नही बोल रही हू”. 10 मिनिट के बाद आराधना बाहर आ जाती है और खुद सिमरन उसे देख कर शॉक्ड रह जाती है. ब्लू कलर की ट्रॅन्स्परेंट साड़ी,

स्लीवेलेस्स ब्लाउस वो भी इतना टाइट, पेटिकोट भी फिटिंग का था. ब्लाउस के अंदर से बूब्स जैसे बाहर आने को तैयार थे, इतना टाइट था वो. पेटिकोट की लेंग्थ कम थी तो एक दम लो वेस्ट आ रहा था, जिससे कि आराधना की नाभि क्लियर विज़िबल थी. सिमरन को खुद भी आशा नही थी कि वो इतनी सेक्सी लगेगी.

सिमरन -” ओये मे मर जावां. क्या कयामत लग रही है. अंकल ने सही कपड़े चुने अपनी जवान और सेक्सी बेटी के लिए”.

आराधना -” तू फिर शुरू हो गयी, चल अब नीचे चल डॅडी के पास”.

सिमरन -” मेरी जान रुक तो सही, अभी थोड़ा मेक अप तो कर दू तेरा.” सिमरन उसके बाल खोल देती है, उसके लिप्स पर सेक्सी लिपस्टिक लगाती है, गोरे हाथों मे चूड़ीयाँ देती है पहन ने के लिए. और उसके बाद दोनो नीचे आने लगते है.

आराधना -” यार मुझे ब्लाउस बहुत टाइट लग रहा है”. नीचे उतरते हुए आराधना सिमरन के कानो मे कहती है.

सिमरन -” एक अंगड़ाई लेगी सब सही हो जाएगा”. और दोनो नीचे आ जाते है. ” देखो डॅडी मे कैसी लग रही हू”. आराधना अपने डॅडी से पूछती है, पंकज ये देख कर सोफे से आश्चर्यचकित होकर खड़ा हो जाता है.

सिमरन -” अंकल देख लीजिए अपनी बच्ची…… को”. सिमरन पीछे खड़े होकर एक आँख मारते हुए पंकज से कहती है. बच्ची शब्द पे आज सिमरन ने कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर दिया क्यूंकी उसे भी पता था कि आज आराधना बेहद गदराई हुई बॉडी वाली लड़की लग रही है.

 पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया. आराधना उसके सामने एक चुटकी बजाती है

आराधना -” डॅडी, डॅडी…

पंकज -” ये… ये… यस बेटा”. पंकज होश मे वापिस आता है.

आराधना -” बताइए तो मे कैसी लग रही हू?”. इससे पहले कि पंकज कुच्छ जवाब देता, आराधना को ब्लाउस मे कुच्छ प्राब्लम लगती है और वो इशारे मे सिमरन से पूछती है कि क्या करू. सिमरन उसे इशारे मे बताती है कि एक छोटी सी अंगड़ाई ले.

वो अपनी गोरी गोरी बाँहे उपर करके एक अंगड़ाई लेती है, उसकी बिना बालो वाली गोरी गोरी अंडरआर्म्स पंकज के सामने थी. उसके अंगड़ाई लेते ही कटक कटक की दो आवाज़े आती है और ब्लाउस के बटन बाहर.

सोचो दोस्तो ये क्या हो गया…..आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

सिचुयेशन ऐसी है कि आराधना के ठीक सामने उसके डॅडी यानी पंकज खड़ा है और आराधना के ठीक पीछे सिमरन खड़ी है. ब्लाउस के बटन टूटने से आराधना के बूब्स बस ब्लॅक ब्रा मे रह जाते है.

एक जवान लड़की जो अपने गले से नीचे भी कभी किसी को नही देखने देती, एक जवान लड़की जो पूरी कोशिश करती है कि फुल स्लीव कपड़े पहने, एक जवान लड़की जिसने अपने हुस्न को सब की नज़रो से बचा कर रखा हुआ था, आज वो ओपन हो गया वो भी अपने डॅडी के सामने. साड़ी का पल्लू अभी भी उपर था लेकिन ब्लाउस खुल चुका था, ब्लॅक ब्रा मे उसके वाइट हार्ड बूब्स बेहद ही ज़्यादा खूबसूरत दिख रहे थे. उसके बटन टूटने से हॉल मे एकदम सन्नाटा हो जाता है जैसे पिन ड्रॉप साइलेन्स. बड़ी मुश्किल से और शरमाते हुए आराधना अपने दोनो हाथ अपने बूब्स पे रख कर उन्हे कवर करती है पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया. उसको ज़रा सा भी आइडिया नही था कि मासूम सी कपड़ो मे धकि रहने वाली काली एक सेक्स बॉम्ब बन चुकी है.

आराधना को कुच्छ समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे, वो शरम के मारे ज़मीन मे गढ़े जा रही थी. दूसरी तरफ उसने राहत की साँस भी ली क्यूंकी ब्लाउस कुच्छ ज़्यादा ही टाइट था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसे आज आज़ादी मिल गयी हो.

जैसे ही सब होश मे आते है, आराधना घूम जाती है और उसकी पीठ अब पंकज की तरफ है

आंड फेस सिमरन की तरफ. पंकज को अब उसके ब्लाउस की बस स्ट्रिप नज़र आ रही है

और उसकी नंगी पीठ. उसका पेटिकोट उसके हिप्स से बस थोड़ा ही उपर बँधा हुआ था

तो उसके ब्लाउस और पेटिकोट मे बीच की खाली नंगी जगह का पंकज दीदार बखूबी कर रहा था

. जैसे ही आराधना घूमती है, वो इशारे मे सिमरन से पूछती है कि वो क्या करे.

सिमरन उसे इशारा करती है कि सिचुयेशन सही नही है और तू उपर भाग जा.

आराधना शरमा के उपर जाने लगती है, वो ज़्यादा तेज नही चल सकती है

क्यूंकी उसे ये डर है कि कहीं पेटिकोट मे भी कुच्छ ना हो जाए.

पंकज की निगाहे बस उसके मटकते हुए चुतडो पर ही जमी हुई है,

जाते जाते आराधना पीछे मुड़कर देखती है और पंकज को अपने चुतडो को घूरते हुए पाती है.

लेकिन पंकज मस्त है और उसे अहसास नही है कि उसकी जवान बेटी उसको देख रही है.

थोड़ी ही देर मे उपर अपने रूम मे पहुँच जाती है. सिमरन इस सन्नाटे को तोड़ती है.

सिमरन -” उन्ह, उन्ह” वो जैसे गले मे खराश हो ऐसा रिएक्ट करती है. इससे पंकज का ध्यान वापिस सिमरन की ओर आता है.

पंकज -” काफ़ी अच्छी लग रही थी”. पंकज ने ऐसा रिएक्ट किया जैसे सब नॉर्मल है

सिमरन-” इसे अच्छी नही, डॅम सेक्सी कहते है अंकल. अब भी आप कहोगे कि वो बच्ची है. उसकी बॉडी मे अब कुच्छ ऐसा नही जो बच्चो की मे होता है.”

पंकज -” वो तो तुम सही कह रही हो लेकिन अभी भी मेरा ध्यान तुम्हारी ही तरफ है”. ये कहते हुए पंकज सिमरन की तरफ बढ़ने लगता है, सिमरन उसे अंगूठा दिखाते हुए घर से बाहर भाग जाती है. पंकज का हैडेक बहुत बढ़ चुका है, उसे कुच्छ समझ नही आ रहा है.

आराधना उपर अपने रूम मे पहुँचती है और अंदर आते ही अपना गेट लॉक करती है. वो अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से हटा कर नीचे गिराती है, अपने हॉट आंड सेक्सी बूब्स का क्लीवेज़ देख कर वो खुद सन्न है. मिरर मे अपने आप को देखते हुए वो शरमा रही है. मिरर मे देखते देखते हुए अपना ब्लाउस उतारती है, अभी नीचे सारी और पेटिकोट ही था लेकिन उपर बस ब्रा.

वो धीरे धीरे साड़ी को खोलना शुरू करती है. इसके बाद वो पेटिकोट की निट खोलने के लिए अपने हाथ नीचे ले जाती है,

अपनी नाभि पर अपने हाथ लगने से ही वो मदहोश सी हो रही है.

पेटिकोट की नाट खोलने के बाद भी उसे नीचे उतारने मे बहुत मेहनत लगी

वो भी हिप्स पर से, पेटिकोट ऐसे उतर रहा था जैसे कोई फिटिंग की जीन्स हो.

अब आराधना बस पैंटी और ब्रा मे है.

आज पहली बार ऐसा हुआ है कि बाथरूम से बाहर आराधना ब्रा और पैंटी मे है.

वो घूम घूम कर अपने आप को मिरर मे देख रही है,

साइड पोज़ मे अपने बाहर निकले स्लॉपी हिप्स को देखती है.

उसके चेहरे से मुस्कान जाने का नाम नही ले रही है.

लेकिन सिमरन अपने मकसद मे कामयाब हो चुकी थी

वो बस पंकज को असली आराधना दिखाना चाहती थी

बल्कि वो आराधना नही जो कपड़ो मे धकि रहती है.

पंकज पागलो की तरह खोया हुआ है, सिमरन उसकी अंतर आत्मा को भड़का चुकी थी,

वो अभी भी बॉक्सर शॉर्ट मे ही था उसके उपर टी-शर्ट पहन लेता है.

सोफे पे बैठ कर वो सोचने लगता है कि कैसे सिमरन उसकी तरफ बढ़ी थी

और उसकी सकिंग करनी स्टार्ट कर दी थी. ये सोचते ही उसके अंग अंग मे एनर्जी आ गयी,

लंड सूपर हार्ड हो गया और उसके शॉर्ट मे से बाहर निकलने को तैयार हो रहा था.

आदमी की भूख जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे बढ़ती जाती है. वो भी इस सोच मे पड़ गया था कि ये क्या हो रहा है लाइफ मे, स्मृति उसको कुच्छ करने नही देती है और वो है कि चूत के बिना नही रहा जा रहा है. थोड़ा स्ट्रेस को मिटाने के लिए सोफे पे पड़ा सिगरेट बॉक्स उठाता है और एक सिगेरेट सुलगा लेता है. स्मोकिंग करते करते और धुँआ हवा मे उड़ाते उड़ाते उसे फिर से सिमरन का ख्याल आता है. ” क्यू ना आराधना से सिमरन का मोबाइल नंबर लिया जाए” पंकज के माइंड मे ये ख्याल आता है. और उसके कदम उपर की तरफ बढ़ने लगते है.

उपर पहुँच कर वो आराधना के रूम का डोर नॉक करता है.

आराधना रूम के अंदर ये सोचती है

कि शायद प्रीति आई होगी और टवल लपेट कर गेट खोलती है.

 सामने उसके डॅडी खड़े थे, शॉर्ट और टी-शर्ट पहने हुए.

स्मोकिंग करने के अंदाज़ से ही लग रहा था कि वो काफ़ी टेन्स है,

लेकिन फिर भी वो एक सेक्सी पर्सनॅलिटी का मालिक था दोनो की नज़रे मिलती है,

पंकज पहले बार अपनी जवान बेटी के नंगे शोल्डर्स,

और नंगी टांगे देखता है क्यूंकी टवल बस उसको थाइस तक कवर कर रहा था.

बिना कुच्छ बोले आराधना घूमती है और धीरे धीरे रूम के अंदर जाने लगती है,

जैसे पंकज को अपने पीछे इन्वाइट कर रही हो.

उसके सिल्की हेर उसके हिप्स तक आ रहे थे,

उन्ही को देखता देखता पंकज उसके रूम मे एंटर हो जाता है.

चलते चलते आराधना पीछे देखती है

और पंकज की तरफ एक स्माइल देती है.

थोड़ा आगे बढ़ कर आराधना बेड के कोने पे बैठ जाती है,

उसके बहुत ही करीब पंकज बेत जाता है.

आराधना( नज़रे झुकाए हुए और शरमाते हुए). – ” तो कैसी लगी आज मे आपको”. उसकी आवाज़ मे कंपन थी.

पंकज -” मुझे सच मे पता नही था कि मेरी बेटी इतनी बड़ी हो चुकी है.” पंकज ने एक झटके मे बोल दिया.

आराधना- “धात”. शरमाते हुए एक हाथ अपने डॅड के पाँव पे मारती है. आराधना फिर से बोलती है.

आराधना -” लेकिन अचानक ये सर्प्राइज़ कैसे दिया और इसमे सिमरन को क्यू शामिल किया.”

पंकज -” ऐसे ही बेटी, आज तक मेने अपने बच्ची को कभी कोई गिफ्ट नही दिया तो सोचा अब की बार दे दू.”. ये बात पंकज ने बहुत रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिगेरेट का कश लेते हुई कही, और सारा स्मोक ठीक आराधना के चेहरे पर गया. स्मोकिंग से इतनी नफ़रत करने वाली आराधना आज इस स्मोक से भी नही घबराई बल्कि पंकज के इस मर्दाना स्टाइल से वो थोड़ी और इंप्रेस सी लगी. स्ट्रेट हेअर, डार्क लिपस्टिक और बॉडी पे बस टवल, आराधना आज कुच्छ अलग ही बिजली गिरा रही थी.

आराधना -” मुझे आपका गिफ्ट बड़ा पसंद आया लेकिन आपको मेरे बारे मे इतना कैसे पता चला.” आराधना ने शरमाते हुए कहा.

पंकज -” तुम्हारे बारे मे क्या पता चला”.

आराधना -“यही कि कैसे कपड़े मुझे फिट आएँगे”.

पंकज -“मे समझ नही पा रहा कि क्या बोलना चाहती हो”.

आराधना -” आपको मेरा साइज़ कैसे पता चला”. आराधना ने क्लियर शब्दो मे पंकज की आँखो मे आँखे डालते हुए कहा.

पंकज – ” साइज़ कौन सा साइज़”. पंकज ने अंजान बनते हुए कहा.

आराधना -” डॅडी यू आर सो नॉटी, आपको सब पता है मे कौन से साइज़ की बात कर रही हू”.

पंकज -” नही मुझे सच मे नही पता”. पंकज ने भी अंजान बनते हुए कहा.

आराधना -” आप बताते है या नही”. आराधना ने उसे फिंगर दिखाते हुए कहा.

पंकज -” मे बताऊ क्या जब मुझे पता ही नही कि तुम कौन से साइज़ की बात कर रही हो”. तभी आराधना गुस्से मे खड़ी होती है और बेड से थोड़ा डिस्टेन्स बनाती है, टवल पे दोनो हाथ लगाती है और एक झटके से…… उसे खोल देती है.

आराधना -” ये साइज़ कैसे पता चले?”आराधना का इशारा अपनी ब्रा से बाहर आते हुए बूब्स की तरफ था. पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया, आराधना ने उसे अपना टवल ओपन करके अपनी बॉडी ब्रा और पैंटी मे दिखा दी. पंकज को तो जैसे काटो तो खून नही. बाहर निकले हुए बूब्स, सपाट पेट, गहरी नाभि, चिकनी टांगे- जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है. आराधना ये सब दिखाने के बाद टवल को वापिस लपेट लेती है. पंकज वापिस होश मे आते हुए –

पंकज – “तुम्हारा साइज़ तो कोई भी देख कर ही पता कर ले”. पंकज ने फिर से रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिगेरेट के कश लगाते हुए कहा.

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