Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani – Update 34

Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani - Long Incest Story
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सिमरन – सही कहा यार, जो लड़का अपने लंड से तेरी मोम जैसे मस्त घोड़ी की चूत शांत कर दे उसका लंड पक्का बड़ा ही तगड़ा होगा,

आरू – क्यूँ कमीनी, लगता है तेरा भी मन कर रहा है कुशल का लंड खाने का

सिमरन – हाँ यार, प्लीज़ कोई जुगाड़ कर ना

आरू – पहले मेरा तो होने दे, फिर तेरा भी करा दूंगी

सिमरन – चल फिर ठीक है, तू जल्द से जल्द तेरे पापा की तरह ही कुशल को अपने जाल में फंसा कर अपने हुस्न का दीदार करा दे, फिर मैं भी थोडा हाथ साफ कर ही लुंगी,…हा हा हा …

आरू भी सिमरन की बात सुनकर हंसने लगी….

कुछ देर और दोनों सहेलियाँ ऐसे ही बात करती रही… फिर सिमरन अपने घर चली गई… और आरू ये सोचने लगी कि अब कुशल को कैसे अपने जाल में फंसाया जाए….

………………………………………………………….

आरू – अरे हाँ, याद आया, तुझे पता है? आज रात कुशल प्रीती की मस्त वाली चुदाई करने वाला है,

सिमरन – तुझे कैसे पता???

आरू – अरे आज जब हम सब दोपहर को लंच कर रहे थे ना तो प्रीती और कुशल आपस में चैटिंग कर रहे थे मोबाइल पर, और उस टाइम प्रीती कुशल को बहुत ज्यादा चिड़ा रही थी, कुशल को भी बहुत गुस्सा आ गया था, और उसने मेसेज किया कि आज रात वो प्रीती की चूत बुरी तरह चोदेगा,

सिमरन – ओह माय गॉड, तब तो प्रीती की मौज है आज रात को…

आरू – हम्म्म्म यार….

सिमरन – काश मैं उन दोनों की चुदाई देख पाती

आरू – यार इच्छा तो मेरी भी है…..

सिमरन – चल कोई नही फिर कभी देखा जाएगा

आरू – वैसे एक तरीका है मेरे पास, जिससे हम दोनों कुशल और प्रीती की चुदाई देख सकते है…

सिमरन – सच्ची… बता ना जल्दी से क्या तरीका है..

आरू – देख पहले तो तू आज रात यहीं रुक जा, अपने भैया को फ़ोन कर देना कि आज रात हमारे यहाँ ही रुकेगी…

सिमरन – हम्म… वो तो कोई प्रॉब्लम नही…. आगे बता

आरू – देख, मेरा और प्रीती का रूम बिलकुल आजू बाजू है, यानी कि एक ही दिवार है, और हमारा बाथरूम भी कॉमन है, कुशल का रूम हमारे सामने है,

सिमरन – हाँ वो तो मुझे पता ही है, पर इससे क्या फायदा

आरू – सुन तो सही पूरी बात, हम चुपके से प्रीती के रूम की तरफ जो दरवाज़ा है ना बाथरूम का, उसमे छेद कर देते है…. और फिर रात को मजे से पूरा शो देख सकते है, क्यों क्या बोलती है…

सिमरन – वाह, आईडिया तो तेरा मस्त है, पर रात को हमे दिखेगा कैसा?

आरू – इसकी फ़िक्र तू ना कर, मैं प्रीती को बोल दूंगी कि रात को कमरे की लाइट बंद ना करे….

सिमरन – ह्म्म्म…. यार आईडिया तो तेरा एकदम धांसू है, चल फिर अभी से छेद के जुगाड़ में लग जाते है….

आरू – हाँ चल….

उसके बाद वो दोनों सहेलियाँ बाथरूम के अंदर गई, और किसी तरह प्रीती की तरफ वाले दरवाज़े में छेद करने लगी……..

खटपट की आवाज़ से दूसरी तरफ सोयी हुई प्रीती की नींद खुल गयी, वो उठकर बाथरूम की तरफ गयी और इससे पहले कि वो दरवाज़ा खोले, अंदर से आराधना ने पहले ही दरवाज़ा खोल दिया

प्रीती, आरू और सिमरन को एक साथ देखकर थोड़ी हैरान हुई, पर फिर बोली

प्रीती – आरू दीदी, ये आवाज़ कहाँ से आ रही थी, और आप दोनों बाथरूम के अंदर क्या कर रहे हो??

आरू – प्रीती, मैंने सिमरन को तेरे और मेरे बारे में सब कुछ बता दिया है, और कुशल के बारे में भी, अब हम तीनो एक दुसरे के राजदार है,

प्रीती – सच में ….” प्रीती को ये सुनकर बड़ी ख़ुशी हुई……

सिमरन – हाँ मेरी प्यारी गुड़िया….. अब हम तीनो के बिच कुछ नही छुपा… और हमे ये भी पता है कि आज रात तू कुशल के साथ मस्त सुहागरात मनाने वाली है

सिमरन की बात सुनकर प्रीती बिलकुल शरमा गई..

प्रीती – स्टॉप इट ना दीदी, कुछ भी बोलते हो आप,

सिमरन – देखो तो सही, कैसे सुहागरात के नाम से शर्मा गई बेचारी,,,

प्रीती को शर्माता देख आरू और सिमरन हंसने लगे

प्रीती – पर आप दोनों यहाँ बाथरूम में क्या कर रही हो???

आरू – एक्चुअली हम दोनों तेरी और कुशल की चुदाई देखना चाहते है आज रात, सिमरन भी आज रात मेरे साथ ही रुकेगी… इसीलिए हम इस दरवाजे में छोटा सा छेद कर रहे है…. ताकि तुम दोनों की चुदाई देख सके…..

प्रीती – ओह तो ये बात है…. बड़ी इच्छा हो रही है आपको मेरी चुदाई देखने की बात क्या है… कहीं कुशल का लंड लेने की इच्छा तो नही हो रही ना… हा हा हा

प्रीती की बात सुनकर तीनो हंसने लगी….

उसके बाद तीनो लोग दरवाजे में किसी तरह छेद करने में लग गये, और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने दो छोटे छोटे छेद बाथरूम के दरवाजे में कर दिए….. बाहर से वो छेद आसानी से नज़र नही आते,

अपनी मेहनत सफल होते देख तीनो सहेलियां बहुत खुश हो गयी…. इस बिच सिमरन ने फ़ोन करके अपने भाई को भी बता दिया कि आज रात वो आराधना के पास रुकेगी…..

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अब कहानी को वापस कुशल की तरफ ले आते है……और वहीं से शुरू करते है जहाँ छोड़ा था…….

कुशल और स्मृति स्विमिंग पूल में मस्त चुदाई करने के बाद वापस अपनी कार में बैठकर घर की तरफ रवाना हो गये, शाम का समय हो चूका था.. इसलिए थोडा अँधेरा भी हो चूका था……सडक थोड़ी सुनसान सी ही लग रही थी…. पर स्मृति के चेहरे पर पूर्ण संतुस्टी के भाव झलक रहे थे, और कुशल भी बहुत ही खुश नज़र आ रहा था

कुशल – मोम, आज तो सच में मजा आ गया, आपकी टाइट चूत मारकर

स्मृति – हाँ सच में यार, मुझे भी बहुत मजा आया आज तो, तेरे उसमे कोई जादू है,

कुशल – उसमे किसमे??

स्मृति – “अरे तेरे इसमें…” स्मृति ने एक हाथ कुशल के लंड पर पेंट के उपर से ही फेरते हुए कहा

कुशल – प्लीज़ नाम लेकर बोलो ना मोम

स्मृति – लगता है तू मुझे अपने जैसा ही बना कर रहेगा??

कुशल – प्लीज़ मोम बोलो ना एक बार… मेरे किसमे जादू है….

स्मृति – अच्छा बाबा बोलती हूँ…. तेरे लंड में जादू है… जब भी अंदर जाता है… रोम रोम रोमांचित हो उठता है मेरा तो….

कुशल – कसम से मोम, मैंने आज तक जितनी भी चूत मारी है, आपकी चूत बेस्ट है, और आपकी चुत मारने में सबसे ज्यादा मजा आता है,

कुशल का इतना बोलना था कि स्मृति ने जोर से ब्रेक मार दिया…और गाड़ी की स्टीअरिंग का बैलेंस थोडा बिगड़ गया…. कार सड़क से उतर गयी…. और सडक से थोडा दूर आकर रुकी…..अब सुनसान सी जगह पर कार में स्मृति और कुशल बैठे थे…..

स्मृति – क्या कहा तुमने…

कुशल – मैंने क्या कहा

स्मृति – अभी अभी जो कहा था,

कुशल – यही की आपकी चुत मारने में सबसे ज्यादा मजा आता है

स्मृति – नही उससे पहले

कुशल – “यहीं कि मैंने आज तक जितनी भी चुत मारी है, उसमे से आपकी चूत…..”

“ओह तेरी बहन दी….ये क्या बोल दिया मैंने” कुशल के दिमाग में आवाज आई……

स्मृति – इसका मतलब तूने किसी और की भी चूत मारी है… है ना

कुशल – न….न……वो…वो…मोम………मैं……

स्मृति – सच सच बता कुशल…. मेरे अलावा और किस किस की चूत मारी है तूने……….

कुशल – नही तो मोम… मैं तो बस……

स्मृति – “तुझे मेरी कसम, सच सच बता” स्मृति ने कुशल को बिच में टोक दिया

अब स्मृति ने अपनी कसम दे दी थी, अब बेचारा कुशल बुरी तरह फंस चूका था, झूट बोल नही सकता था, और सच वो बताना नही चाहता था…..

स्मृति – सोच क्या रहा है, जवाब दे मेरी बात का

कुशल – पर आप नाराज़ तो नही होगी ना मोम….

स्मृति – वो बाद की बात है, पहले तू मुझे सच सच बता कि तूने मेरे अलावा और किस किस की चूत मारी है… और सच सच बताना बिलकुल….

कुशल – मोम….. वो मैंने…… आपके अलावा…दो… दो और लडकियों की चुत मारी है

कुशल की बात सुनकर स्मृति के चेहरे पर नाराजगी के भाव साफ देखे जा सकते थे, शायद उसके मन में जलन की भावना थी,

स्मृति – कौन है वो दो लड़कियां

कुशल – मोम, एक तो वो …..वो..

स्मृति – वो वो क्या लगा रखा है…. साफ साफ बोल ना

कुशल – मोम, एक तो वो मेरी टीचर है ना, प्रिया मेम…. करण की माँ

स्मृति – क्या, तूने अपनी टीचर के साथ ही चुदाई कर ली….

कुशल – मोम वो सब कुछ इतने जल्दी में हो गया कि मुझे पता ही नही चला

स्मृति – तो तू मना भी तो कर सकता था ना

कुशल – मैं सच में नही करना चाहता था मोम, पर …

स्मृति – “पर यही ना, कि तुझसे कण्ट्रोल नही हुआ, शायद तेरा मुझसे जी भर गया है तभी बाहर मुंह मारता है….” स्मृति सच में कुशल की बात से थोड़ी दुखी हो गयी थी, उसे बहुत जलन हो रही थी……. वो कुशल को सिर्फ अपने लिए चाहती थी ..और शायद इसी वजह से उसे इतना बुरा फील हो रहा था…

कुशल – नही मोम, ये आप क्या बोल रही हो, आप बिलकुल गलत सोच रही हो, मैं तो आपको सब से ज्यादा प्यार करता हूँ, आप ये सोच भी कैसे सकती हैं कि मेरा आपसे जी भर गया है, मैं तो आपके बिना रहने का सोच भी नही सकता

स्मृति – तू ये सब मुझे बहलाने के लिए बोल रहा है, सच तो ये है कि तू मुझसे प्यार ही नही करता, तुझे सिर्फ और सिर्फ चुत चाहिए, जहाँ भी तुझे चुत मिलेगी तू वहीं लार टपकाते हुए चल…………

इससे पहले कि स्मृति कुछ भी और बोलती उसके गा्ल पर एक जोरदार तमाचा आकर पड़ा, वो तो वहीं सुन्न हो गयी….

कुशल – खबरदार जो ऐसा फिर कहा…. आपको पाने के लिए मैंने ना जाने क्या क्या किया है, और आप कह रही हो कि मैं आपसे प्यार नही करता… मैंने आपसे ज्यादा प्यार आज तक किसी से नही किया …. आपके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ…. आपके बिना तो मैं एक पल भी नही रह सकता……… पर अगर आपको अब मुझसे प्यार नही है तो मैं आपकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाऊंगा….

कुशल अभी बोल ही रहा था कि उसके गा्ल पर भी एक जोरदार चांटा आकर पड़ा…

स्मृति – ख़बरदार जो मुझसे दूर जाने की बात भी की तो…. बड़ी मुस्किल से जिंदगी में कुछ खुशियाँ आई हैं और तू चाहता है कि वो भी मुझसे छीन जाए….

स्मृति और कुशल दोनों की आँखों से आंसू बहने लगे… अब कुशल से रहा नही गया और उसने झट से आगे बढ़कर स्मृति के होठों को अपने होठों की कैद में ले लिया…… और जोर जोर से उसके होठों को चूसने लगा… स्मृति भी अब कुशल का पूरा साथ दे रही थी……. कुशल ने एक झटके में स्मृति के बूब्स को अपने हाथों की कैद में ले लिया….. और जोर जोर से दबाने लगा…. स्मृति ने भी अपना एक हाथ बढ़ाकर कुशल के लोअर में घुसा दिया और उसके लंड को मसलने लगी…. कुशल का लंड अपने आकार में आने लगा… दोनों के चेहरे पर हवस पूरी तरह से हावी हो चुकी थी….

स्मृति ने झट से कार में एक बटन दबाया जिससे आगे वाली दोनों सीटें अनफोल्ड होकर बिलकुल निचे हो गयी…. अब ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ी में कोई छोटा सा बेड बन गया हो…

इधर कुशल जोर जोर से स्मृति के बूब्स दबाये जा रहा था…. स्मृति से अब बर्दास्त नही हो रहा था …उसने खुद ही अपनी साडी का पल्लू गिरा दिया…. और फटाफट अपनी साडी खोलने लगी…..कुशल भी जल्दी से अपने कपडे उतारने लगा…. कुछ ही पलो में स्मृति और कुशल बिलकुल नंगे हो चुके थे………

कुशल ने स्मृति को उस सीट पर लेटाया और उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली पेल दी……

स्मृति – हाऽऽऽऽऽऽय्यय ऽऽऽऽऽ डाल…इइइइइइइइ, उइओओओओओओ,

कुशल की उँगलियाँ अब अपनी मोम की बुर के अंदर बाहर हो रही थी,

स्मृति- आऽऽहहह अब रुका नहीं जा रहा कुशल , चल फाड़ दे मेरी बुर अभी के अभी ,

कुशल- मोम, आज तो पूरी तरह आपकी बुर फाड़ूँगा

स्मृति- हाय्य्य्य्य जो करना है कर ले, मगर अब और ना तरसा,

अब कुशल ने अपनी भरे बदन की मोम को सीट पर लेटाया…और अपने होठों को स्मृति की गर्दन पर घुमाने लगा…

अब कुशल ने स्मृति को उलटा करके पेट के बल लिटा दिया, और उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूमते हुए नीचे पीठ को चूमने लगा, फिर नीचे आकर उसने बड़े बड़े चूतरों को चाटने लगा….फिर नीचे जाकर उसकी जाँघों और पिंडलियों को चूमते हुए उसके पैर के पंजे को चूमने और चाटने लगा, स्मृति की आऽऽहहह निकलने लगी,

स्मृति- आऽऽह क्या कर रहा है? ह्म्म्म्म्म्म…. डाल ना… क्यों तडपा रहा है……

पर कुशल तो फिर से उसके पावों को चाटते हुए ऊपर आया और उसकी चूतरों की दरार को खोल कर उसने अपना मुँह डालकर वहाँ भी चाटने लगा,

स्मृति- आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ उइइओइइइइइ

कुशल अब उसकी गाँड़ के छेद पर जीभ फिराने लगा,

स्मृति- उइइइइओओओ

कुशल- मोम, थोड़ा चूतर ऊपर उठाओ ना,

स्मृति ने अपना पिछवाड़ा उठा लिया….

कुशल थोड़ी देर तक तो उसके पिछवाड़े की सुंदरता को निहारता रहा

“हाय….क्या गोरे गोल मांसल चूतड हैं मोम आपके… भूरी सिकुड़ी सी गाँड़ तो बिलकुल मक्खन जैसी चिकनी लग रही है….और ये रेशम जैसी मुलायम बुर तो पूछो ही मत… जितना चुसो उतना और चूसने की इच्छा होती है….. अब कुशल स्मृति की बुर भी चाटने लगा,

स्मृति- हाऽऽऽय्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽज माऽऽऽर डाऽऽऽऽऽऽलेगा क्याआऽऽऽऽ,

कुशल फिर अपना लौड़ा उसकी बुर में रखा और उसने कहा- मोम, डालूँ?

स्मृति- आऽऽहहह क्या पंडित बुलाऊँ और मुहूर्त निकलवाऊँ, अरे नालायक डाऽऽऽऽऽऽल नाआऽऽऽऽऽऽ,

कुशल- पर पहले आप मुझसे मेरे लंड की भीख मांगो तभी डालूँगा…

स्मृति- आऽऽऽहहह क्यों तंग कर रहा है? डाल दे ना, वह अपनी कमर को पीछे की ओर हिलाकर बोली,

कुशल- पहले बोलो तब डालूँगा, ये कहते हुए उसने उसकी बुर में अपना सुपाड़ा रगड़ा ,

स्मृति- आऽऽऽऽहहह डाऽऽऽऽल्लल्ल कमीने साले मादरचोद ,

कुशल हँसते हुए बोला- क्या डालूँ मोम , बोल ना,

स्मृति- मादरचोद, अपना मोटा लौड़ा और क्या डालेगा, हाय्य्य्य्य्य अब ड़ाऽऽऽऽल दे ना मेरा राजा बेटा,

कुशल ने अपना लौड़ा उसकी बुर में ठेला और बोला- लो मेरा लौड़ा अपनी बुर में , और उसने ज़ोर से धक्का मार कर अपना लौड़ा पूरा पेल दिया, जड़ तक, उसके बड़े बॉल्ज़ उसकी गाँड़ के छेद से रगड़ने लगे,

अब उसने चुदायी चालू की और धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया, अब वह स्मृति की चूचियाँ भी दबाने लगा और उसके अंगूर जैसे बड़े निपल्ज़ को भी मसलने लगा,

स्मृति – आऽऽऽऽहहहह बहुत अच्छाआऽऽऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ, और जोओओओओओओओओओर्रर्र से चोओओओओओओओओदो आऽऽऽहहह फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ , उइइइइइओइइइइइइइ मैं तो गयी , कहते हुए वह ज़ोर ज़ोर से पीछे को धक्का लगाने लगी और उसके लौड़े को अपनी बुर में ज़ोर से भींच लिया,

कुशल भी स्वर्गिक सूख का आनंद लेते हुए बोला- ले और ले , ह्म्म्म्म्म्म ले, आऽऽहहहह और ले साऽऽऽऽली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽऽऽ,

स्मृति उसके मुँह से ये शब्द सुनकर थोड़ी देर के लिए हैरान हुई पर फिर अपनी वासना की आँधी में बहते हुए मजा लेने लगी,

स्मृति – और जोर से चोद साले मादरचोद…फाड़ दे मेरी बुर को आज…

कुशल – साली कुतिया…आज तो तुझे ऐसा चोदुंगा कि कई दिनों तक लंगड़ा कर चलेगी लोडी साली…..

कुशल और स्मृति दोनों ही इस जंगली चुदाई का मजा ले रहे थे…..गाली गलोच ने तो माहोल को और भी ज्यादा गरमा दिया था, और अब दोनों को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था……

अब कुशल ने उसकी कमर को पकड़कर एक ज़बरदस्त धक्का दिया और स्मृति की चीख़ निकल गयी- हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय माआऽऽऽऽऽऽऽर्रर्र डाआऽऽऽऽऽऽऽऽला रेएएएएएएएएए,

कुशल- मोम बस पूरा चला गया, अब नहीं दुखेगा,

स्मृति- आऽऽहहह फट गयी मेरीइइइइइइइ, आह्ह्ह्ह्ह अब चूचि दबा बेटा और बुर भी मसल दे बेटा,

अब कुशल उसकी चूचि दबाकर उसकी बुर के दाने को भी सहलाने लगा, जल्दी ही वह गरम हो गयी और बोली- आऽऽहहहह अब मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽय्यय्या ना, हाय्यय्यूय चल अब चोद मेरा राजा बेटा अपनी मोम की चूत को, हाय्य्य्य्य्य्य्य्य,

अब स्मृति की चुदायी सही माने में चालू हुई, कुशल के धक्कों से पूरा कार ठप ठप और चूँ चूँ की आवाज़ कर रहा था, कुशल की मर्दाना जाँघें स्मृति के चूतरों से टकराकर मस्ती वाली ठप ठप की आवाज़ निकाल रही थी,

स्मृति भी हाऽऽऽयय्यय बेएएएएएएएएएटा कहते हुए अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर चुदायी का पूरा मज़ा ले रही थी,

कुशल के जवान जिस्म की पूरी ताक़त का अन्दाज़ अब स्मृति को हो रहा था और हर धक्के के साथ वह सुख के गहरे सागर में गोते लगा रही थी, कुशल के हाथ उसकी चूत और चूचि पर थे

वह चिल्लायी- आऽऽऽऽहहह बेटा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरीइइइइइइइइ गाँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ ,

कुशल भी आह्ह्ह्भ्ह्ह्ह्ह्ह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चिकनी चूत है मोमआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ, हाऽऽऽयय्यय ,

लगभग 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद कुशल को लगा मानो उसका पानी निकलने वाला है….

कुशल – हाय…..मोम…. मेरा पानी निकलने वाला है कहाँ निकलूं….

स्मृति – हाययय…बेटा…. अंदर ही निकाल दे……मैं तेरे पानी को अपनी चुत में महसूस करना चाहती हूँ….निकाल दे अंदर ही….

और तभी कुशल को ऐसा लगा मानो उसकी सारी सख्ती उसके लंड की नसों में इकठ्ठा हो गयी और जोर जोर से उसके लंड से उसके वीर्य की बड़ी बड़ी पिचकारियाँ स्मृति की गरम चूत में जाने लगी… स्मृति इन पिचकारियों को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके मानो मदहोश सी हो गयी और उसका लावा भी साथ साथ फुट पड़ा……

कुशल और स्मृति दोनों ही आज बुरी तरह झड़े थे….इतना पानी आज तक दोनों का ही नही निकला था,,,, शायद गाली गलोच की वजह से दोनों ही कुछ ज्यादा ही गरम हो गये थे….

थोड़ी देर बाद दोनों ने अपनी सांसो को दुरुस्त किया, और अपने कपडे पहने …

स्मृति और कुशल ने दोबारा एक बार किस किया और फिर स्मृति ने सीट को सही करके कार स्टार्ट की….और कार को घर की तरफ मोड़ दिया…..

स्मृति – वाह… आज तो सच में मजा आ गया बेटा….

कुशल – मोम, सोरी मैंने आप पर हाथ उठाया और आपको गाली दी…

स्मृति – नही बेटा, तेरा मुझे थप्पड़ मारना मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगा, बल्कि ये तो इस बात का सबूत था कि तू मुझसे प्यार करता है…. थैंक्यू कुशल…

कुशल – थँक्स मोम…..

स्मृति – पर हाँ तूने ये तो बताया ही नही कि तूने दूसरी किस लडकी की चूत मारी….

कुशल – नही मोम, अगर मैंने आपको बताया तो आप मुझसे दोबारा गुस्सा हो जाओगी…

स्मृति – मैं प्रॉमिस करती हूँ कि गुस्सा नही करूंगी… तू बता…

कुशल – मोम.. वो वो दूसरी लडकी….

स्मृति – बोल ना कौन है वो दूसरी लडकी…

कुशल – मोम वो दूसरी लडकी प्रीती है…..

स्मृति पर तो जैसे बम फूटा…….उसने दोबारा जोर से ब्रेक लगाया..

स्मृति – क्या… तूने प्रीती को भी चोद दिया….कब हुआ ये…

कुशल – मोम… आपने प्रॉमिस किया था कि आप गुस्सा नही होगी….

स्मृति – पर तूने ऐसा क्यूँ किया….

कुशल – मोम.. मुझसे गलती हो गयी… पर मैं आपसे वादा करता हूँ कि आज के बाद आपके सिवा मैं किसी भी लडकी की तरफ देखूंगा भी नही… मुझे बस आप और आपकी ये प्यारी सी चूत चाहिए…..मैं आज के बाद किसी भी और लडकी को नही चोदुंगा……प्रॉमिस…

स्मृति – ठीक है तो…. अगर तू मुझसे प्यार करता है ना… तो मेरे से छुप कर कभी किसी दूसरी लड़की को नही चोदेगा…ठीक है ना..

कुशल – ठीक है मोम…….

अब स्मृति के चेहरे पर मुस्कान दोबारा आ चुकी थी…. उसे भरोसा हो चूका था कि उसका बेटा अब सिर्फ और सिर्फ उसे ही चोदेगा….भले ही स्मृति प्रीति की मोम थी पर थी तो ओरत ही.. और ओरत के मन में जलन की भावना आ ही जाती है… यहाँ भी स्मृति प्रीती और प्रिया मेम से जल रही थी…. उसे डर था कि उसका बेटा उसे छोड़ ना दे… पर अब उसका डर दूर हो चूका था…..

अब स्मृति और कुशल वापस घर की तरफ चल पड़े…..

………………

दोस्तों आपको क्या लगता है अब क्या होगा… एक तरफ तो प्रीति, आराधना और सिमरन बड़ी बेसब्री से रात को होने वाली चुदाई का इंतज़ार कर रहे है और इधर दूसरी तरफ कुशल ने अपनी मोम से वादा कर लिया है कि वो उसके अलावा और किसी को नही चोदेगा….. मामला बड़ा गड़बड़ होता जा रहा है……..

कुशल अब सच में एक अजीब सी स्तिथि में फंस चूका था, एक तरफ वो अपनी मोम को वादा कर चूका था कि अब वो उनकी मर्ज़ी के बिना किसी और लडकी की चूत की तरफ देखेगा भी नही और दूसरी तरफ उसकी इच्छा थी कि उसे प्रीती की कोरी मलाईदार चूत से हाथ भी ना धोना पड़े, अजीब उहापोह में फंस चूका था बेचारा, पर अब तो वो अपनी मोम की कसम भी खा चूका था तो वादा तो उसे निभाना ही पड़ेगा, यही सब सोचते सोचते ना जाने कब स्मृति और कुशल वापस घर पहुंच चुके थे,

आरू, प्रीती और सिमरन अपने रूम में बैठी बाते कर रही थी, जब उन्होंने निचे गाडी की आवाज़ सुनी तो उन सबके चेहरे पर एक शातिर मुस्कान आ गयी…

सिमरन – ये ले आरू, आ गया बकरा अपनी अम्मा को चोदकर, हे हे हे

आरू – आने दो, आज तो प्रीती इसका पूरा मजा ले लेगी, क्यों प्रीती

प्रीती – हाँ दीदी, आज तो मैं कुशल को वो जन्नत दिखाउंगी कि आज के बाद ये मोम की चूत को भूलकर सिर्फ मेरी चूत के पीछे ही पड़ा रहेगा देखना….

सिमरन – अरे देखना प्रीती, कहीं हम दोनों को ना भूल जाना,

प्रीती –अरे नही दीदी, एक बार मैं जम कर चुदवा लूँ, फिर तो आप दोनों को भी जल्द ही कुशल के लंड के निचे लेटाने की जिम्मेदारी मेरी, क्यूँ आरू दीदी,, चुदोगी ना कुशल से या सिर्फ आपकी इस चूत पर सिर्फ पापा का ही नाम लिखा है..

आरू – अब भला चूत पर भी किसी का नाम लिखा होता है क्या, हे हे हे

आरू की बात सुनकर प्रीती और सिमरन हंसने लगे……..

सिमरन – लगता है मेरी बिल्लो रानी को कुशल का लंड लेने की बड़ी खुजली हो रही है, क्यों आरू.. हो रही है ना तुझे खुजली

आरू – यार तू भी ना, अब एक तो इस प्रीती ने कुशल के लंड के बारे में जब से बताया है, वैसे ही मेरा मन बार बार उसका लंड देखने को हो रहा है अब ऐसे में चूत तो बेचारी टेसुए बहाएगी ही ना… वैसे तुझे इच्छा नही हो रही क्या कुशल का लंड लेने की कमीनी

सिमरन – अरे यार मुझे तो सबसे ज्यादा इच्छा हो रही है, देख मेरे भाई का लंड उतना ज्यादा बड़ा नही और प्रीती की बात अगर सही है तो कुशल का लंड तो मेरे भाई से दुगुना लम्बा और ढाई गुना मोटा है, अब ऐसे लंड को भला मैं अपनी बुर से कैसे दूर रख सकती हूँ, तू ही बता, हे हे हे………..

सिमरन की बाते सुनकर तीनो हंसने लगी….

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इधर कुशल और स्मृति अब कार पार्क करने के बाद घर के अंदर आ गये, उन्हें देखकर कोई नही बता सकता था कि अभी अभी ये गाड़ी में रासलीला मना कर आ रहे है,

स्मृति – कुशल बेटा, तू उपर जाकर हाथ मुंह धो ले, मैं भी थोडा फ्रेश हो जाती हूँ, फिर जल्दी से खाना बना देती हूँ, ओके

कुशल – ओके मोम

और कुशल उपर की और जाने लगता है…..तभी अचानक स्मृति ने दोबारा से उसे टोका

स्मृति – कुशल सुन,

कुशल – हाँ मोम

स्मृति – अपना वादा याद रखना…..

कुशल – पक्का मोम…

कुशल ने बोल तो दिया था पर उसे भी पता था कि उसे अपने वादा निभाने में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, प्रीती की जवानी से बचने के लिए उसे ना जाने अब क्या क्या करना पड़ेगा…..यही सब सोचते हुए कुशल अपने रूम में चला गया….

इधर स्मृति भी अपने रूम के अंदर आ गयी…. पर जैसे ही वो अंदर आई… उसने देखा पंकज तैयार अपना बैग पैक कर रहा था जैसे कहीं जाना हो उसे….

स्मृति – अरे आप कहीं जा रहे हो क्या….

पंकज – हाँ यार, अभी अभी गुप्ता का फ़ोन आया था, कल दिल्ली में एक बहुत बड़ा कस्टमर के साथ मीटिंग फिक्स हुई है, इसलिए अभी रात को ही निकलना पड़ेगा….

स्मृति – पर इतनी रात को….

पंकज – क्या करूं यार बिज़नस के लिए जाना ही पड़ेगा….अपना मेनेजर गुप्ता है ना वो भी जाएगा मेरे साथ, अभी रस्ते में उसे भी पिक करना है मुझे

स्मृति – वापस कब आओगे…

पंकज – कुछ कह नही सकता….अगर कल की मीटिंग कामयाब रही तो कम से कम एक हफ्ता वहीं रुकना पड़ेगा….पर अगर ये डील मिल गयी तो हमारे पो बारह हो जायेगे….

स्मृति – पर आप… चलो ठीक है आप तैयार हो जाओ, मैं अभी आपके लिए फटाफट खाना बना देती हूँ… खाना खाकर ही जाना…

पंकज – ठीक है, पर जल्दी करो…..

फिर स्मृति ने जल्दी से कपडे चेंज किये और हाथ मुंह धोकर फटाफट किचन में घुस गयी…. लगभग आधे पोंन घंटे में उसने खाना बना दिया…..इधर पंकज की भी पैकिंग पूरी हो चुकी थी…..

स्मृति ने बच्चो को भी आवाज़ देकर बुला लिया…. कुशल, आरू प्रीती और सिमरन सब निचे आ चुके थे…. आरू ने जब पापा को इस तरह तैयार देखा तो बोली

आरू – अरे पापा, आप इस टाइम ऐसे सूट बूट में कैसे???

पंकज – बेटा, क्या है न कि मुझे वापस दिल्ली जाना है अर्जेंट काम से, १ हफ्ते के लिए…..इसीलिए…..

पंकज की बात सुनकर आरू थोड़ी सी उदास हो गयी, पर वो भी जानती थी कि बिज़नस भी बहुत जरूरी है… इसलिए कुछ नही बोली…..

सभी ने जल्दी से खाना खा लिया और फिर पंकज को कार में विदा किया……

…………………………………………………………………………………………………………………

आरू – मोम, आज सिमरन मेरे साथ ही रुकेगी, आज इनके घर पर कोई नही है ना इसलिए

स्मृति – कोई बात नही बेटी, जैसे तुम्हारी मर्ज़ी, वैसे भी सिमरन तो मेरी बेटी जैसी ही है….

आरू – थैंक यू मोम….

अब सब लोग अपने अपने कमरे में जा चुके थे………

सब लोग अपनी अपनी जगह खुश थे सिवाय एक इन्सान के, वो था कुशल

क्यूंकि कुशल को पता था कि आज दोपहर को ही लंच के वक्त उसने प्रीती को बोला था कि वो आज रात उसकी चूत की सारी गर्मी निकाल देगा, पर अब वो प्रीती को कैसे मना करेगा, और अगर उसने आज भी उसे मना कर दिया तो वो पक्का उसका मजाक उड़ाएगी…… अजीब हालत हो गयी बेचारे कुशल की…. लंड कह रहा था कि जा जाकर मारले प्रीती की मक्खन चूत… और दिमाग कह रहा था कि नही, मोम से किया वादा नही तोड़ सकते…

अब बेचारा कुशल करे तो क्या करे….

इधर स्मृति आराम से अपने कमरे में आकर सो गई क्यूंकि उसे पता था कि आज रात उसे अकेले ही सोना पड़ेगा क्यूंकि आज तो सिमरन भी यही रुकी है, ऐसे में वो कोई भी रिस्क नही ले सकती थी…..

आरू और सिमरन टकटकी लगाये घडी की तरफ देखकर समय काटने की कोशिश कर रही थी, एक एक पल उन्हें एक एक दिन जितना लम्बा लग रहा था, वो तो बस चाह रही थी थी कि कब कुशल जल्दी से प्रीती के रूम में आये, और उन दोनों की चुदाई शुरू हो, ताकि उन्हें भी कुशल का लंड देखने का मौका मिल सके

प्रीती भी अपने रूम में जीरो वाट का बल्ब जलाये अपने बिस्टर पर करवटे बदल रही थी, पर वक्त तो उसका भी बड़ी मुश्किल से कट रहा था, वो तो बस उस पल का इंतज़ार कर रही थी कि कब उसके गेट का दरवाज़ा खटखटाये और कब कुशल आकर उसकी गरम फुद्दी को अपने लंड के गरमा गरम पानी से लबालब कर दे….

पर वक्त बीतता गया और रात के लगभग 11 बजने वाले थे, पर ना तो उसके दरवाज़े पर कोई दस्तक हुई ना ही कुशल का कोई मेसेज उसके फ़ोन पर आया… अब उससे और इन्तेजार नही हो पा रहा था,

“कहीं वो कुशल भूल तो नही गया दोपहर वाली बात, या फिर कही वो सो तो नही गया है, तभी शायद नही आया होगा, पर अगर वो सो गया तो मुझे चोदेगा कौन, नही नही, मैं उसे नही सोने दे सकती, मुझे उसके पास जाना ही होगा, अगर वो नही आता तो मुझे ही उसके पास जाना होगा, पर फिर आरू और सिमरन दीदी कैसे देख पायेगी, पर……….एक काम करती हूँ, कुशल को मेसेज कर देती हूँ, शायद फिर वो आ जाये….” प्रीती ने मन में सोचा

प्रीती ने कुशल को मेसेज टाइप किया – हाय, प्रीती हियर, सो गये क्या

इधर कुशल के फ़ोन पर मेसेज टोन आते ही कुशल समझ गया कि हो ना हो ये पक्का प्रीती का मेसेज है, पर अब वो क्या करे, वो प्रीती को चोद तो सकता नही था, तो फिर मेसेज पढकर क्या फायदा, उसने कुछ देर इग्नोर किया पर दोबारा प्रीती ने एक और मेसेज भेज दिया….इस बार कुशल से बर्दास्त नही हुआ और उसने फ़ोन उठा कर मेसेज चेक किये

प्रीती – क्या हुआ सो गये क्या…

कुशल – नही….

प्रीती – तो क्या कर रहे हो…

कुशल – कुछ नही बस सोने की कोशिश कर रहा हूँ…

प्रीती – क्यों इतनी जल्दी….

कुशल – इतनी जल्दी कहाँ है, 11 बज चुके है…

प्रीती – पर तुमने तो मुझसे कुछ प्रोमिस किया था ना….

कुशल – प्रोमिस कैसा प्रोमिस

प्रीती – इतनी जल्दी भूल गए या भूलने का नाटक कर रहे हो

कुशल – नही मुझे याद नही तुम कौनसे प्रॉमिस की बात कर रही हो, मैंने तो तुमसे कोई प्रॉमिस नही किया…..

प्रीती – क्यों याद नही, आज दोपहर में लंच के टाइम पर तुमने मुझे मेसेज किया था कि आज रात…” प्रीती को अब सच में गुस्सा आ रहा था…..

कुशल – आज रात क्या..

प्रीती – तू ऐसे नही मानेगा… तूने मुझसे वादा किया था कि आज रात मेरी चूत मारेगा तू, क्यों याद आया या भूल गया….

कुशल प्रीती की इस तरह की भाषा से एक बार चोंक गया पर फिर मेसेज किया

कुशल – सोरी प्रीती, वो तो बस मैंने यूँ ही मजाक में कर दिया था….

प्रीती को अब बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था, और आये भी क्यों ना, उसने तो आज रात के लिए ना जाने क्या क्या सपने सजाये थे और कुशल उसके सपनों पर पानी फेरने वाला था……

प्रीती – मजाक, कैसा मजाक….

कुशल – सॉरी यार पर मैं वो सब नही कर सकता

प्रीती – क्या मतलब नही कर सकता

कुशल – मतलब मैं तुझे नही चोद सकता

प्रीती ने जब उसका ये रिप्लाई पढ़ा तो उसके गुस्से का पारा बिलकुल चढ़ गया…. उसने झट से पहले आरू को मेसेज किया कि – दीदी, मैं अभी कुशल के रूम में जा रही हूँ….वो पता नही क्यूँ मुझे चोदने से मना कर रहा है…. मैं अभी उसके पास जाकर उसे मनाती हूँ… और हाँ मैं आपको कॉल करके फ़ोन चालू रख रही हूँ ताकि आप दोनों हमारी बाते सुन सको….हो सका तो मैं थोड़ी देर में उसे लेकर इस रूम में आ जाउंगी… तब तक आप वेट करो… और ये मेसेज करके प्रीती गुस्से में खड़ी हुई और सीधा कुशल के रूम की तरफ बढ़ गयी….

कुशल की आज किस्मत ख़राब थी कि उसने रूम भी अंदर से लॉक नही कर रखा था, इसलिए प्रीती ने जोर से दरवाजे को धकेला और झल्लाती हुई अंदर आकर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया, कुशल उसे अचानक अपने कमरे में देखकर सकपका गया, गुस्सा उसके चेहरे पर साफ नज़र आ रहा था,

कुशल – प्रीती….तू,,,,तू यहाँ क्यों आई है…

प्रीती – मैं यहाँ क्यों आई हूँ… साले कुत्ते अगर तेरे लंड में दम नही तो मुझे पहले ही बता देता…. कम से कम मैं तेरा इंतज़ार तो नही करती…….

कुशल – देख प्रीती… आराम से बात कर… ऐसे गाली गलोच करना मुझे पसंद नही…

पर प्रीती तो अब जैसे गुस्से से लाल हो चुकी थी….

प्रीती – आराम से…. माय फूट……साले अगर तू मुझे नही चोद सकता तो बता दे..मैं किसी और लंड का इन्तेजाम कर लुंगी….

प्रीती की बात कुशल के साथ साथ फ़ोन पर आरू और सिमरन भी सुन रहे थे, उन्हें भी यकीं नही हो रहा था कि प्रीती ऐसी बाते भी कर सकती हैं

कुशल – देख प्रीती ….यार मैंने सॉरी तो बोल दिया…अब क्यों गुस्सा हो रही है….प्लीज़ सॉरी

प्रीती – मुझे तेरा सॉरी नही चाहिए..

कुशल – तो क्या चाहिए

प्रीती – तेरा ये लंड चाहिए मुझे

और ये कहकर प्रीती कुशल के बिलकुल नजदीक आ गयी और उसके पजामे पर से ही उसके लंड को मुट्ठी में भर लिया… प्रीती की हथेली में आते ही लंड तो अपनी ओकात में आना शुरू हो गया…

प्रीती – ये देख तेरा लंड भी कैसे मेरी फुद्दी में घुसने के लिए तड़प रहा है, अब मुझे और मत तडपा… और जल्दी से अपना ये मुसल लंड मेरी चूत में पेल दे…

कुशल – नही प्रीती..मैं ये नही कर सकता..

प्रीती ( उसके लंड को जोर से दबाते हुए ) – पर क्यों नही कर सकता…

कुशल – अब तुझे कैसे समझाऊ कि क्यों मैं तुझे चाहते हुए भी नही चोद सकता..

प्रीती – नही, लगता है तुझमे दम ही नही जो मेरे जैसी मस्त फुद्दी को चोद सके, क्यूंकि इतनी गर्म चूत को चोदने की हिम्मत सिर्फ एक मर्द में ही हो सकती है, और तू तो नामर्द है कुत्ते…

प्रीती का इतना कहना था कि कुशल ने जोर से खिंच कर एक थप्पड़ प्रीती के गाल पर लगा दिया..

कुशल – क्या बोली साली कुतिया, मुझे नामर्द बोलती है, अगर मेरा बस चलता ना तो अभी तुझे नंगा करके तेरी चूत को फाड़ देता अपने लंड से, और इतनी बुरी तरह चोदता कि तू जिंदगी भर मुझसे चुदवाने के लिए तडपती….साली रंडी…

प्रीती – हाँ तो मैं भी तो यही चाहती हूँ… चोद क्यों नही देता मुझे, दिखा दे मुझे कितनी मर्दानगी है तुझमे…

कुशल – नही मैं तुझे नही चोद सकता…

अब प्रीती के सब्र का बाँध टूटता जा रहा था, क्यूंकि कुशल तो पिघलने के लिए तैयार ही नही था….इधर आरू और सिमरन जो फ़ोन पर उनकी बाते सुन रहे थे, उन्हें भी समझ नही आ रहा था कि आखिर कुशल प्रीती को चोद क्यूँ नही रहा,

कुशल अब चुप हो गया, पर प्रीती इतनी जल्दी हार मानने वाली नही थी… उसने अपना सबसे खतरनाक दांव चल दिया…

और पलक झपकते ही प्रीती ने अपना नाईट गाउन उतारकर फ़ेंक दिया… प्रीती ने अंदर कुछ नही पहन रखा था…

अब प्रीती बिलकुल मादरजाद नंगी खड़ी थी, कुशल की आंखे तो ऐसे खूबसूरत हुस्न को देखकर चुन्धियाँ ही गयी….. और उसका लंड अब उसके पजामे में बिलकुल तनकर खड़ा हो गया…

प्रीती – देख कुशल देख, इस खूबसूरत बदन को चोदने के लिए तो लोग खून करने को भी तैयार हो जाए, और तू है कि ….

कुशल – नह…..न…नही प्रीती…मुझे मजबूर मत कर…

अब तो प्रीती का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ चूका था, और उसने वो बोल दिया जो शायद वो बोलना भी नही चाहती थी….

प्रीती – क्यों नही चोदना चाहता तू मुझे…. क्या कमी है मुझमे…. और क्या खास बात है मोम में जो तू मुझ जैसी जवान लड़की को छोडकर उसके पीछे पागल हुआ पड़ा है…बोल..

प्रीती की बात सुनकर कुशल बुरी तरह चोंक गया, साथ ही आरू और सिमरन भी अपने माथा पीट बैठे कि इस लडकी ने गुस्से में ये क्या बक दिया…

बड़ी अजीब सी स्तिथि हो गयी दोस्तों… प्रीती नंगे बदन अपने भाई के कमरे में खड़े होकर ये पुच्छ रही थी कि आखिर वो उसे छोडकर उनकी मोम को क्यों चोदता है….सिचुएशन गरमा गयी है…

आपको क्या लगता है अब क्या होगा……

प्रीती – देख कुशल देख, इस खूबसूरत बदन को चोदने के लिए तो लोग खून करने को भी तैयार हो जाए, और तू है कि ….

कुशल – नह…..न…नही प्रीती…मुझे मजबूर मत कर…

अब तो प्रीती का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ चूका था, और उसने वो बोल दिया जो शायद वो बोलना भी नही चाहती थी….

प्रीती – क्यों नही चोदना चाहता तू मुझे…. क्या कमी है मुझमे…. और क्या खास बात है मोम में जो तू मुझ जैसी जवान लड़की को छोडकर उसके पीछे पागल हुआ पड़ा है…बोल..

प्रीती की बात सुनकर कुशल बुरी तरह चोंक गया, साथ ही आरू और सिमरन भी अपने माथा पीट बैठे कि इस लडकी ने गुस्से में ये क्या बक दिया…

कुशल को समझ ही नही आ रहा था कि उसकी बहन को उसका ये राज़ कैसे पता चल गया, अब क्या होगा, सोच सोचकर उसका दिमाग भन्ना गया था,

कुशल – ये…..ये… क्या बकवास कर रही है….तू…..

प्रीती – मैं कोई बकवास नही कर रही…. तू मोम को चोदता है ये बात मुझे पता है….

कुशल – क…क….क्या…नही ऐसा कुछ नही है…तू ये सोच भी कैसे सकती है….

प्रीती – ज्यादा नाटक करने की जरूरत नही है….मुझे सब पता है…

कुशल – क्या पता है तुझे

प्रीती – यही कि तू मोम को कई दिनों से चोद रहा है….

कुशल – नही ये सब झूट है…तेरे पास क्या सबूत है…….कि…

प्रीती – कमीने तुझे सबूत चाहिए ना….तो ठीक है, मैं अभी तेरी उस गस्ती मोम के पास जाकर उसी से पूछ लेती हूँ……और फिर पापा को भी बता दूंगी सब….” ये सब बोलकर प्रीती नंगे बदन ही बाहर जाने के लिए बढ़ी…..

आरू और सिमरन को भी समझ नही आ रहा था कि आखिर ये लडकी कर क्या रही है…

पर इससे पहले कि प्रीती दरवाज़ा खोल पाती, कुशल जल्दी से बेड से खड़ा हुआ और भागकर प्रीती को पकड़ लिया….

प्रीती – छोड़ मेरा हाथ, तुझे सबूत चाहिए ना….मैं लाकर देती हूँ तुझे सबूत…

कुशल – ओके..ओके… मैं मानता हूँ मैंने मोम के साथ सेक्स किया है… तुझे उनके पास जाने की जरुरत नहीं है…..प्लीज़ प्रीती पापा को ये सब मत बताना..वरना वो मुझे घर से निकाल देंगे

प्रीती – ठीक है मैं उन्हें नही बताउंगी, पर एक शर्त पर…

कुशल – क्या

प्रीती – तुझे अभी इसी वक्त मुझे चोदना होगा….

कुशल – नही यार मैं ये नही कर सकता….प्लीज़ मेरी मजबूरी समझ

प्रीती – ठीक है तो फिर मैं जा रही हूँ…

पर इससे पहले की प्रीती मुड पाती कुशल ने उसे एक झटके में खिंच कर अपनी बाँहों में लिया और झट से उसके होटों को अपने होटों की कैद में ले लिया… दोनों एक प्रगाढ़ चुम्बन में लीन हो गये…..कुशल जोर लगाकर प्रीती के गुलाबी होठों का रसपान कर रहा था…लगभग 2 मिनट तक दोनों एक दुसरे के होठो को चूसते रहे….

प्रीती – वाह, ये हुई ना बात, अब बाकी का काम भी कर ही डालो…

कुशल – यार प्रीती मेरी मजबूरी है कि मैं चाहते हुए भी तुझे नही चोद सकता….

प्रीती – ऐसी क्या मजबूरी है जो तू मुझे नही चोद रहा है…

कुशल – वैसे भी तुझे मेरे और मोम के बारे में पता चल ही चूका है तो तुझे बताने में कोई हर्ज़ नही… तो सुन क्यों मैं तुझे चाहते हुए भी नही चोद सकता….

प्रीती – हाँ बता…….. इधर आरू और सिमरन भी फ़ोन पर चिपके उनकी बाते सुन रही थी….

कुशल – असल में आज जब मैं और मोम स्विमिंग क्लास से वापस घर की तरफ आ रहे थे तो मेरे मुंह से गलती से निकल गया था कि मैं तुझे चोद चूका हूँ….

प्रीती – क्या….इसका मतलब मोम को पता है कि तू मेरे साथ सेक्स करता है…

कुशल – हाँ…पर इस बात से मोम बहुत ही ज्यादा सेड हो गयी थी…और नाराज़ भी…. और उन्होंने मुझे कसम दी कि मैं उनकी मर्ज़ी के बिना उनके अलावा किसी भी और लड़की को नही चोद सकता…..

प्रीती – ओह तो इस वजह से तू मुझे नही चोद रहा…

कुशल – हाँ, मेरी इच्छा तो बहुत ज्यादा है कि मैं तुझे अभी यहीं पटक कर चोद दूँ, पर यार मोम की कसम जो रखी है है……….

प्रीती – ह्म्म्म…..ये तो बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है.

कुशल – अब तू ही बता मैं कैसे मोम की कसम तोड़ दूँ…

प्रीती काफी देर सोच विचार करके बोली..

प्रीती – हाँ वैसे एक आईडिया है मेरे पास

कुशल – वो क्या

प्रीती – देख मोम ने तुझे बाकि लडकियों के साथ सेक्स करने के लिए मना किया है पर उनके खुद के साथ तो मना नही किया ना…..

कुशल – ऑफ़ कोर्स नोट

प्रीती – तो तू एक काम कर, तू अभी मोम के कमरे में जा और उनकी फुद्दी में अपना लंड घुसा कर उन्हें चोद दे

कुशल – पर इससे तुझे क्या फायदा होगा…

प्रीती – सुन तू जब मोम के कमरे में जाये तो दरवाज़ा हलका सा खुला छोड़ देना, और तू जब मोम की बुर में अपना लंड घुसाकर उन्हें पेल रहा होगा तो चुपके से कमरे के अंदर आ जाउंगी और तुम दोनों को रंगे हाथ पकड़ने का नाटक करूंगी…

कुशल – फिर

प्रीती – फिर मैं पहले मोम को थोडा सा डरा दूंगी पापा के नाम से, और फिर मैं उन्हें मजबूर कर ही दूंगी कि वो तुझे मुझे चोदने की परमिशन दे ही दे

कुशल – ह्म्म्म, आईडिया तो तेरा ठीक है पर थोडा सा मुश्किल लग रहा है…

प्रीती – कुछ मुश्किल नही है, अब तू नीचे जा और मोम पूछे तो बोल देना कि हम तीनो लडकियां सो चुकी है, और फिर तू अपना काम शुरू कर देना…ठीक है ना..

कुशल – ह्म्म्म, ठीक है मैं जाता हूँ…

कुशल अब धीरे से गेट खोल कर निचे की तरफ चल दिया….और प्रीती भी अपने कपडे पहनने लगी…..

……………………………………………..

कुशल जब निचे जा चूका तो प्रीती झट से आरू के कमरे में चली गई…

प्रीती – दीदी, मैं कुशल को निचे ले जा रही हूँ…मैं…

आरू – हाँ हमने सब सुन लिया.. पर देखना कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये..और लेने के देने ना पड जाये..

सिमरन – अरे आरू हम तो देने के लिए ही तो तैयार बैठी है…..हे हे हे..

सिमरन की बात सुनकर सबके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई..

प्रीती – अच्छा दीदी अब मैं जाती हूँ…शायद निचे कार्यक्रम शुरू हो गया होगा….

……………………

इधर अब कुशल स्मृति के रूम में पहुंच चूका था, स्मृति ने जब कुशल को अपने रूम में देखा तो वो चोंक गयी

स्मृति – अरे कुशल, तू इतने रात गये यहाँ क्या कर रहा है……..तुझे पता हैं ना कि आज रात हम कुछ भी नही कर सकते , जा जाकर अपने रूम में सोजा

कुशल – मोम, मुझे बिलकुल भी नींद नही आ रही है…प्लीज़ थोड़ी देर अपने पास सोने दो ना….प्लीज़…

स्मृति – नही कुशल, समझा कर यार, उपर तीन तीन लडकियाँ सो रही है, अगर कोई निचे आ गई तो,

कुशल – नही मोम, मैं अभी उन्हें देखकर आया हूँ, वो तो गहरी नींद में सो रही है सब…

स्मृति – नही मुझे ये ठीक नही लग रहा

कुशल – अच्छा ठीक है, माँ, मैं आपको चोदुंगा नही, बस थोड़ी देर आपके पास सोकर वापस चला जाऊंगा…

स्मृति – नही तू कुछ ऐसी वैसी हरकत करेगा जरुर

कुशल – नही मोम, पक्का प्रॉमिस, मैं कुछ नही करूँगा…

सच तो ये था कि स्मृति भी कुशल को देखकर अब गरम हो चुकी थी

स्मृति – चल ठीक है फिर आजा, पर जल्दी ही वापस उपर चले जाना…

कुशल – ठीक है मोम…

ये कहकर स्मृति वापस बेड की तरफ चल दी, कुशल ने बड़ी ही होशियारी से गेट को इस तरफ बंद किया कि उसमे थोड़ी सी जगह रह जाये, ताकि प्रीती आराम से उन दोनों की रासलीला देख सके….

स्मृति – चल अब चुपचाप सोजा

कुशल – नही मोम, हम दोनों एक ही कम्बल में सोयेंगे

स्मृति – पर….चल ठीक है आजा सोजा…

स्मृति भी कुशल के साथ एक ही कम्बल में ही लेट गयी, पर आज की रात क्या होने वाला था इसकी भनक उसको बिलकुल भी नही थी

स्मृति और कुशल एक साथ सो तो गये पर वो दोनों एक दुसरे के बिलकुल करीब लेटे हुए थे, और उपर से स्मृति के जिस्म से बार बार रगड खाने से कुशल के शरीर में एक अजीब सी लहर उठ रही थी जिसकी वजह से उसके सोये लंड में अब थोड़ी थोड़ी हरकत भी होने लगी थी,

कुशल – मोम, क्या आप मेरे उपर आकर सों सकती हो, प्लीज़

स्मृति – नही नही, अगर मैं तेरे और करीब आई तो फिर तो तू मुझे चोदे बिना नही मानेगा

कुशल – प्लीज़ मोम, मैं प्रॉमिस करता हूँ कि आपकी मर्ज़ी के बिना आपको नही चोदुंगा…

स्मृति – पर मैं कितनी भारी हूँ ना….

कुशल – नही आप कोई भारी वारी नही हो, मेरे लिए तो आप फुल की तरफ हल्की हो बिलकुल

स्मृति – चल चल रहने दे, ज्यादा मक्खन ना लगा अब मुझे, सोती हूँ मैं अभी, तभी तुझे पता चलेगा मैं कितनी भरी हूँ….

स्मृति ने कह तो दिया पर उसे भी नही पता था कि उसके इस तरह कहने का कुशल पर क्या असर पड़ेगा खासकर कुशल के लंड पर, क्यूंकि अब कुशल का लंड एक झटके में पूरी तरह तनकर उसकी पेंट फाड़ने को तैयार खड़ा था, कुशल की सिट्टी पिट्टी गुल हो चुकी थी ये सुनकर

अब स्मृति भी धीरे धीरे मुड में आ चुकी थी और वो अब अपने कुशल के सामीप्य का सुख लेना चाहती थी , अब स्मृति धीरे से कुशल के शरीर के उपर आकर लेट गयी, पर जैसे ही वो कुशल के जिस्म के उपर पेट के बल लेटी अगले ही पल उसकी आँखे आश्चर्य के मारे फ़ैल गयी, क्यूंकि उसकी सलवार के उपर कुशल का खड़ा हुआ लंड बुरी तरह से धंसने की कोशिश कर रहा था,

स्मृति के जिस्म में तो एक तेज़ सरसराहट दौड़ गयी, और साथ ही कुशल भी अजीब से सुख की अनुभूति कर रहा था, तभी अचानक ना जाने स्मृति को क्या सुझा और उसने एक झटके में कुशल के होटो पर अपने होठ सटा दिए पर अगले ही पल वापस भी पीछे खीच लिए,

कुशल तो समझ ही नही पाया कि क्या हुआ, पर इतना साफ था कि उसे ये बहुत ही ज्यादा पसंद आया, इधर स्मृति को लगा कि शायद उसने जल्दबाजी कर दी, उसने तो खुद कुशल को मना किया था आज की रात कुछ भी करने के लिए,

इसीलिए स्मृति ने अपना मुंह घुमाया और कुशल के बदन से निचे उतरने लगी कि तभी अचानक कुशल ने उसे पकड़कर वापस अपने शारीर पर खीच लिया और अगले ही पल उसने ज़ोरदार तरीके से स्मृति के होठों को अपने होटों के कब्ज़े में ले लिए और उन फूलों का रसपान करने लगा,

थोड़ी देर बाद जब वो अलग हुए तो स्मृति बोली – कुशल बेटा, अब नही रहा जाता, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, तू भी मुझे अपना प्यार दिखा ना

कुशल – मैं भी आपसे बहुत बहुत प्यार करता हूँ मोम

ये कहकर कुशल ने स्मृति को पलट कर खुद उसके उपर लेट गया

स्मृति अब कोई बात करके समय नही गवाना चाहती थी….वो फिर से कुशल के होंठो को चूसने लगी. इस बार उसने कुछ देर कुशल होंठो को चूसने के बाद, अपने होंठो को अलग कर दिया….और कुशल के सर को अपनी गर्दन पर झुकाते हुए बोली.

स्मृति: कुशल मुझे प्यार करो ना…मुझे किस करो. मेरे बदन के हर हिस्से को चुमो, चाटो….खा जाओ मुझे….

कुशल जैसे ही स्मृति के ऊपर आया…स्मृति ने अपनी टाँगे खोल ली, जिससे कुशल की टाँगें उसकी जाँघो के दरमियाँ आ गई…और उसका तना हुआ लंड उसके पेंट में से स्मृति की सलवार के ऊपर से उसकी चूत से जा टकराया..

“आह कुशलआआआ उंह “ स्मृति अपनी सलवार के ऊपर से ही कुशल के लंड को अपनी चूत पर महसूस करते हुए सिसक उठी….

उसने अपनी टाँगो को कैंची की तरह कुशल की कमर पर लपेट लिया…कुशल ने भी उसके मम्मो को मसलते हुए अपने होंठो को उसकी सुरहीदार गर्दन पर लगा दिया….और उसके गर्दन को चाटने लगा…..स्मृति मस्ती में फिर से सिसक उठी, उसने कुशल के सर के इर्द गिर्द घेरा बना कर उससे अपने से और चिपका लिया….

स्मृति- ओह्ह्ह कुशल हां खा जा मुझे आज पूरा का पूरा आहह…सीईइ कुशल आज मेरी आग को बुझा दो कुशलआआआ….

इधर प्रीती उनका ये मस्त नज़ारा देखकर खुद भी गरम हुई जा रही थी, उसने सोचा कि अभी जाकर उन दोनों को रंगे हाथो पकड ले, पर फिर सोचा कि क्यों ना थोड़ी देर और मस्ती करने दे उन्हें….

इधर कुशल भी अब पूरी तरह मस्त होकर अपनी मोम की चुचियों को मसलते हुए, उसके गर्दन को चूम रहा था….और स्मृति उसके सर को सहला रही थी…और बार बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा कर अपनी चूत को सलवार के ऊपर से ही, कुशल के लंड पर दबा रही थी….

“ओह्ह्ह कुशल आहह और ज़ोर से दबाओ ना मेरे मम्मे अह्ह्ह अह्ह्ह्ह…” स्मृति सिसकी

फिर कुशल उसकी गर्दन को चूमता हुआ नीचे की ओर आने लगा….और उसके कुरती से बाहर झाँक रहे मम्मो के ऊपरी हिस्से को अपने होंठो में भर कर चूसने के कोशिश करने लगा…

“आह हां चुस्ससो अह्ह्ह्ह कुशल आह” ये कहते हुए, स्मृति ने अपने हाथो को कुशल के सर से हटाया, और फिर अपने दोनो हाथों को नीचे ले जाकार अपनी कुरती को पकड़ कर ऊपर करने लगी….ये देख कुशल जो कि अपना सारा वजन स्मृति के ऊपर डाले लेटा हुआ था, वो अपने घुटनो के बल स्मृति के जाँघो के बीच में बैठ गया….

स्मृति ने अपनी कुरती को पकड़ कर ऊपर करते हुए उतार दिया….और फिर चारपाई पर बैठते हुए अपनी फैशन वाली ब्रा के हुक्स खोल कर उसे भी जिस्म से अलग कर दिया….ब्रा को अपने बदन से अलग करने के बाद, उसने कुशल की ओर देखा, जो उसकी बड़ी बड़ी पकी हुई चुचियों को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था.

” ये आपको बहुत पसन्द है ना, लायन जी… ?” स्मृति ने मुस्कुराते हुए कुशल की ओर देखकर कहा, कुशल ने भी हां में सर हिला दिया

कुशल का लंड अब पूरी तरह तन गया था…जो अब सीधा स्मृति की चूत की फांको के ठीक ऊपर था…..कुशल ने भी तुंरत अपने लंड को अपनी पेंट की कैद से आजाद कर दिया

स्मृति ने फिर से कुशल को बाहों में भरते हुए, उसके सर को अपनी चुचियों पर दबा दिया…

“आह कुशल चूसो ईससी अहह” कुशल भी पागलो की तरह स्मृति की चुचियों पर टूट पड़ा….और उसकी एक चुचि को मुँह में भर कर उसके अंगूर के दाने के साइज़ के निप्पल को अपनी ज़ुबान से दबा -2 कर चूसने लगा…. स्मृति ने उसके सर को फिर से सहलाना शुरू कर दिया…..

स्मृति: आह चुस्स्स्स लो आह कुशल खा जा मेरे मम्मो को अहह उंह सीईईईई आह हाईए मा ओह हां चुस्स्स्स्स कुशल और ज़ोर ज़ोर सी से चूसो

स्मृति की आवाज़ में अब मदहोशी साफ झलक रही थी….उसका पूरा बदन उतेजना के कारण काँप रहा था…उसके गाल लाल होकर दिखने लगे…फिर स्मृति को अपनी चूत की फांको पर कुशल के लंड का गरम सुपडा रगड़ ख़ाता हुआ महसूस हुआ. स्मृति एक दम से सिसक उठी, उसने कुशल के सर को दोनो हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया, उसका निपल खींचता हुआ कुशल के मुँह से पक की आवाज़ से बाहर आ गया….

स्मृति: (मस्ती में सिसकते हुए) हाय कितने जालिम हो तुम….

स्मृति की आँखें अब वासना के नशे में डूबती हुई बंद हुई जा रही थी, उसने अपनी नशीली अध खुली आँखों से एक बार कुशल की तरफ देखा, फिर उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए, कुशल ने भी स्मृति के नीचे वाले होंठ को अपने होंठो में दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया….

उंह अहह उंघह” स्मृति घुटि आवाज़ में सिसक रही थी….

उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाकार कुशल के लंड पर रखा, और उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया, कुशल के बदन में तेज सरसराहट दौड़ गई, स्मृति ने अपने होंठो को कुशल के होंठो से अलग किया और अपनी टाँगो को फेला कर घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा लिया, कुशल तो जैसे इस पल का इंतजार में था….वो अपने घुटनो के बल स्मृति की जाँघो के बीच में आ गया, और एक झटके में उसकी वो सलवार निकल कर फ़ेंक दी और फिर जैसे ही उसकी नज़र स्मृति की फूली हुई चूत पर पड़ी, उसका लंड फिर से झटके खाने लगा, जो उस वक़्त स्मृति के हाथ में था, स्मृति कुशल के लंड की फुलति नसों को अपने हाथ में सॉफ महसूस कर रही थी…..

उसने कुशल के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर दबाया, तो कुशल के लंड का सुपडा उसकी चूत की फांको को फेलाता हुआ, छेद पर जा लगा, स्मृति की चूत की फाँकें कुशल के लंड के सुपाडे के चारो तरफ फैलाते हुए कस गई, अपनी चूत के छेद पर कुशल के लंड का गरम सुपडा महसूस करते ही उसके बदन में मानो हज़ारो वॉट की बिजली कोंध गई हो, उसका पूरा बदन थरथरा गया….

स्मृति की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी, स्मृति ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर कुशल की तरफ देखा, और फिर काँपती आवाज़ में बोली…

स्मृति: कुशल अब पेल दे जोर से, अब और इंतज़ार नही होता

अब कुशल ने धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को स्मृति की चूत के छेद पर दोबारा दबाना शुरू किया, जैसे ही उसके लंड का सुपडा स्मृति की गीली चूत के छेद में थोड़ा सा घुसा, स्मृति एक दम सिसक उठी,

स्मृति – हाय…कुशल बस ज़ोर से घस्सा मारो….और एक ही बार मे मेरी फुद्दी की जड़ तक अपने इस मुसल लंड को पेल दो

कुशल: अगर आपको दर्द हुआ तो ?

स्मृति: मैं सह लूँगी…तुम मारो न धक्का

कुशल ने अपनी पूरी ताक़त अपनी गान्ड में जमा की, और अपने आप को अगला शाट मारने के लिए तैयार करने लगा, स्मृति ने अपने दोनो हाथों से कुशल के बाजुओं को कस के पकड़ लिया, और अपनी टाँगों को पूरा फैला लिया..

स्मृति – कुशल…कुशल फाड़ दो अब…..

कुशल ने कुछ पलो के लिए स्मृति के चेहरे की तरफ देखा, जो अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी हुई थी, उसने अपने होंठो को दांतो में दबा रखा था. जैसे वो अपने आप को उस दर्द के लिए तैयार कर रही हो, उसके माथे पर पसीने के बूंदे उभर आई थी, कुशल ने एक गहरी साँस ली, और फिर अपनी पूरी ताक़त के साथ एक ज़ोर दार धक्का मारा

कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, कुशल का आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार मे अंदर जा चुका था…

कुशल ने अपने लंड की तरफ देखा, जो स्मृति की टाइट चूत के छेद में घुस कर फँसा हुआ था, और फिर उसने एक बार फिर से पूरी ताक़त के साथ झटका मारा, इस बार उसके लंड का सुपाडा उसकी चूत की दीवारो को फैलाता हुआ पूरा का पूरा अंदर जा घुसा

“उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस”

ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह कुशलऽऽऽऽऽऽऽ…..कुशलऽऽऽऽऽऽऽ… कुशल…स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ…कुशल……..” स्मृति ने दर्द से छटपटाते हुए अपने हाथों से कुशल के बाजुओ को इतनी कस के पकड़ा कि उसके नाख़ून कुशल के बाजुओ में गढ़ने लगे, कुशल को अपने लंड के इर्द गिर्द स्मृति की टाइट चूत की दीवारे कसी हुई महसूस हो रही थी, उसके लंड में तेज गुदगुदी सी होने लगी,

दोनो थोड़ी देर वैसे ही लेटे रहे, कुशल अब धक्के लगाने को उतावला हो रहा था, पर स्मृति ने उसकी कमर में अपनी टाँगो को लपेट रखा था, जिसकी वजह से कुशल हिल भी नही पा रहा था, कुछ लम्हे दोनो यूँ ही लेटे रहे, अब स्मृति को अपनी चूत में अजीब सी सरसराहट होने लगी, अब उसे मज़ा आने लगा था, और उसने अपनी टाँगो को जो कि उसने कुशल की कमर पर कस रखी थी, को ढीला कर दिया, जैसे ही कुशल की कमर पर स्मृति की टाँगों की पकड़ ढीली हुई, कुशल ने अपना आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार में स्मृति की चूत से बाहर खींचा, और फिर से एक झटके के साथ स्मृति की चूत में पेल दिया,

धक्का इतना जबरदस्त था कि स्मृति का पूरा बदन हिल गया

“आह शीईइ कुशल उंह धीरे उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह हँ ओहहहहहहह हमममम”

ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह कुशलऽऽऽऽऽऽऽ…..कुशलऽऽऽ” स्मृति ने फिर से अपने पैरो को कुशल के चुतड़ों के ऊपर रख कर उसे अपनी तरफ दबा लिया

जब उसे अपनी चूत की दीवार पर कुशल के लंड के सुपाडे की रगड़ महसूस हुई तो वो एक दम से मस्त हो गई, फिर थोड़ी देर रुकने के बाद स्मृति ने कुशल को धीरे से कहा

“कुशल अब धीरे से बाहर निकालो…मुझे कुछ देखना है” ये कहते हुए उसने फिर से अपने पैरो की पकड़ ढीली की और कुशल ने घुटनो के बल बैठते हुए धीरे-2 अपने लंड को बाहर निकालना शुरू किया, फिर से वही मज़े की लहर स्मृति के रोम-रोम में दौड़ गई, उसे कुशल के लंड का सुपाडा अपनी चूत के दीवारो पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस हो रहा था

“ओह्ह कुशल मेरी फुद्दि आह आह बहुत मज़ा आ रहा है..ओह्ह उम्ह्ह.” स्मृति बोली

कुशल ने जैसे ही अपना लंड स्मृति की चूत से बाहर निकाला, तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई, उसका लंड स्मृति के चूत से निकल रहे कामरस से सना हुआ था

फिर स्मृति ने अपनी बाहों को खोल कर कुशल को आने का इशारा किया

कुशल उसके ऊपर झुक गया, स्मृति ने उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसके आँखो में झाँकते हुए बोली “मैं तुझसे बहुत प्यार करने लगी हूँ कुशल,मुझे छोड़कर मत जाना कभी” और फिर दोनो के होंठ फिर से आपस में गुथम गुत्था हो गए, फिर से वही उम्ह्ह आहह उन्घ्ह की आवाज़े उनके मुँह से आने लगी

प्रीती भी इस कामुक रासलीला को देखकर बुरी तरह गरमा चुकी थी,,,,,

कुशल का लंड अब अपनि मोम की चूत की फांको पर रगड़ खा रहा था, कुशल भी मस्ती में उसके होंठो को चूस्ता हुआ उसके निपल्स को अपनी उंगलियों से भिचते हुए उसकी चुचियों को दबा रहा था, स्मृति की चूत में कुलबुली सी होने लगी, वो नीचे से अपनी गान्ड को हिलाते हुए कुशल के लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट करने की कोशिश कर रही थी

थोड़ी देर के बाद अचानक से कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत के छेद पर अपने आप जा लगा, स्मृति का पूरा बदन एक दम से थरथरा गया, उसने अपने होंठो को कुशल के होंठो से अलग किया और फिर कुशल की आँखो में देखते हुए मुस्कुराने लगी,फिर उसने अपने आँखे शरमा कर बंद कर ली, उसके होंठो पर मुस्कान फेली हुई थी….

कुशल ने भी बिना देर किए, धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को स्मृति की चूत के छेद पर दबाना शुरू कर दिया….

“उंह कुशल सीईईईई अहह बहुत माजा आ रहा है…..” स्मृति बोली

कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत के छेद और दीवारो को फेलाकर रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बढ़ने लगा, स्मृति के बदन में मस्ती के लहरे उमड़ रही थी, उसका पूरा बदन उतेजना के कारण काँप रहा था, उसकी चूत की दीवारे कुशल के लंड को अपने अंदर कस कर निचोड़ रही थी

धीरे-2 कुशल का पूरा लंड स्मृति की चूत में समा गया, स्मृति ने सिसकते हुए कुशल को अपनी बाहों में कस लिया और उसकी टी-शर्ट ऊपर उठा कर उसकी पीठ को अपने हाथो से सहलाने लगी

“आह कुशल करो ना उंह आ सीईईई आह कुशल मुझे बहुत मज़ा आ रहा है….”

कुशल ने स्मृति के फेस को अपनी तरफ घुमाया, और फिर अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया, स्मृति ने अपने होंठो को खोल दिया, कुशल ने थोड़ी देर स्मृति के होंठो को चूसा, और फिर अपने होंठो को हटाते हुए, उसकी जाँघो के बीच में घुटनो के बल बैठते हुए, अपनी पोज़िशन सेट की, और अपने लंड को धीरे-2 आगे पीछे करने लगा

कुशल के लंड के सुपाडे को स्मृति अपनी चूत की दीवारो पर महसूस करके एक दम मस्त हो गई, और अपनी आँखें बंद किए हुए अपनी चुदाई का मज़ा लेने लगी

“अह्ह्ह्ह कुशल हाईए मेरे फुद्दि आह मारो और ज़ोर से मार आह फाड़ दो अह्ह्ह्ह ऑश”

धीरे-2 कुशल अपने धक्कों की रफतार को बढ़ाने लगा, पूरे रूम में स्मृति की सिसकारियो और बेड के हिलने से चर-2 की आवाज़ गूंजने लगी, स्मृति पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, स्मृति की चूत उसके काम रस से भीग चुकी थी, जिससे कुशल का लंड चिकना होकर स्मृति की चूत के अंदर बाहर होने लगा था, स्मृति भी अपनी गान्ड को धीरे-2 ऊपर की ओर उछाल कर चुदवा रही थी….

“हाई ओईए अहह मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह कुशल बहुत मज़ा आ रहा है.आह चोदो मुझे अह्ह्ह्ह और तेज करो सही…मैं झड़ने वाली हूँ आह उहह उहह उंघह ह कुशल ममैं गाईए अहह….” स्मृति धीरे धीरे आहे भर रही थी

कुशल के जबरदस्त धक्को ने कुछ ही मिनट में स्मृति की चूत को पानी -2 कर दिया था, उसका पूरा बदन रह-2 कर झटके खा रहा था, कुशल अभी भी लगातार अपने लंड को बाहर निकाल-2 कर स्मृति की चूत में पेल रहा था, स्मृति झड़ने के बाद एक दम मस्त हो गई थी, उसकी चूत से इतना पानी निकाला था कि, कुशल का लंड पूरा गीला हो गया था

अब स्मृति अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी थी,और लंबी -2 साँसे ले रही थी, स्मृति ने अपनी आँखें खोल कर कुशल की तरफ देखा, जो पसीने से तरबतर हो चुका था, और अभी भी तेज़ी से धक्के लगा रहा था,अब रूम में सिर्फ़ बेड के चर्मार्ने से चू-2 की आवाज़ आ रही थी….जैसे -2 कुशल झटके मारता, बेड हिलता हुआ हल्की हल्की चू-2 की आवाज़ करता, स्मृति बेड के हिलने की आवाज़ सुन कर शरमा गई, और अपने फेस को साइड में घुमा कर मुस्कराने लगी…

कुशल: (अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए) क्या हुआ…?

स्मृति: (मुस्कुराते हुए) कुछ नही…..

कुशल: फिर मेरी तरफ देखो ना…

स्मृति: नही मुझे शरम आती है…..

कुशल ने अपने दोनो हाथों से स्मृति के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया, पर स्मृति ने पहले ही अपनी आँखे बंद कर ली, उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान फेली हुई थी, कुशल ने स्मृति के होंठो को अपने होंठो में लेकर चुसते हुए अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी और फिर कुछ ही पलो में उसके लड में तेज सुरसुरी हुई, उसका लंड स्मृति की चूत में झटके खाने लगा, और फिर वो स्मृति के ऊपर निढाल हो कर गिर पडा, स्मृति और कुशल दोनों एक साथ झड़ कर शांत हो चुके थे,

स्मृति – आई लव यू कुशल

कुशल – ई लव यू टू मोम

स्मृति – मोम नही स्मृति कहो मुझे

कुशल – आई लव यू टू माय स्मृति

स्मृति और कुशल अभी लेटे लेटे लम्बी लम्बी सांसे ले रहे थे कि तभी अचानक प्रीती ने जोर से कमरे को दरवाज़ा खोल दिया और अंदर आ गई

प्रीती को अंदर देखकर स्मृति की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई

क्या गज़ब का सिन था, स्मृति और कुशल बिलकुल नंगे बदन बेड पर लेटे थे, स्मृति की चूत से उसका और कुशल का मिला जुला पानी निकलकर बेड को गिला कर रहा था, और प्रीती साइड में खड़ी स्मृति को घुर रही थी…

सिन गरमा गया है दोस्तों, आपको क्या लगता है अब क्या होगा…..

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