अब हम कहानी को वापस कुशल के घर की तरफ मोड़ते है, सिचुएशन काफी बदल चुकी है पर हम वहीं से स्टार्ट करते है जहाँ छोड़ा था, यानि कि जब कुशल अपनी मोम से विदा लेके करण के घर की तरफ निकल चूका था,
स्मृति किचन के कामों में लग चुकी थी, इधर पंकज भी थोडा फ्रेश होने के बाद रेस्ट कर रहा था
आराधना अपने कमरे में कपड़े बदलकर बेड पर जाकर लेटी हुई थी, उसके दिलो दिमाग में सिर्फ और सिर्फ पंकज का चेहरा और लंड घूम रहा था, वो बार बार उन लम्हों को याद कर रही थी जब वो और उसके पापा दो दिल एक जान हो गये थे, और उसके पापा का प्यारा सा लंड उसकी चुत में जाकर बड़ी ही तबियत से उसकी चुदाई कर रहा था, आराधना तो ये सोचकर बड़ी ही चुदासी होने लगी, उसके रोम रोम में चिंगारी सी फूटने लगी, बदन में अंगड़ाईयां आने लगी और वो बेड पर करवटें लेने लगी, उसका मन तो कर रहा था कि वो बस अभी जाकर अपने पापा के लंड को अपनी चुत में घुसा ले और फिर जमकर चुदाई का दौर चले पर वो भी जानती थी कि ये सम्भव नही है
काफी देर ऐसे ही सोचने के बाद उसने सोचा क्यूँ ना थोड़ी देर नहा लिया जाये, ताकि थोडा अच्छा फील हो
वो टॉवल लेकर बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी कि तभी उसे याद आया कि उसके चुत और टांगो पर अब हल्के हल्के बाल उग आये है, और आराधन अपनी चुत का अब बहुत ज्यादा ख्याल रखती थी, और उसे बिलकुल चिकनी रखना चाहती थी,
उसने अपने बैग से वीट की क्रीम निकाली और बाथरूम में आ गई, उसने अपनी नाइटी को घुटनों तक उठाया और धीरे धीरे अपनी टांगों पर वीट क्रीम लगाने लगी, उसकी गोरी चिकनी टांगो पर हल्के रेशम जैसे छोटे छोटे बाल उग आए थे,
थोड़ी देर वीट लगाए रखने के बाद उसने धीरे धीरे सारे बाल हटा दिए, ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में उसकी गोरी सूंदर टांगे और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,
टांगो की सफाई के बाद अब बारी थी उसकी अनछुई गुलाबी चुत की, आराधना ने धीरे धीरे अपनी नाइटी को अपने पैरों की गिरफ्त से आज़ाद कर दिया, अब वो सिर्फ अपनी खूबसूरत छोटी सी गुलाबी पैंटी में थी, उसके सुडौल नितम्ब उस छोटी सी पैंटी में उभरकर सामने आ रहे थे, जिन्हें देखकर आराधना ने शर्म के मारे अपनी आंखें ही बन्द कर ली,
धीरे धीरे उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी, उसका शरीर गर्म होने लगा और उसकी अंगुलिया उसकी पैंटी में से रास्ता बनाते हुए उसकी चुत के दाने को मसलने लगी,
” उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस”
ओह्हहहहहह पा्ह्ह्ह्हपा फ़क मी पापाआआआ,, अब आप मेरी इस प्यारी सी चुत को मत रुलाओ पापाआआआ,
उन्ह्ह्ह्ह देखिए कैसे मेरी ये गुलाबी चुत आपके उस लम्बे लन्ड को याद करके टेसुए बहा रही है,ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़ इसे और मत तड़पाओ …….. इस निगोड़ी चुत को अपने लंड से भर दीजिये पापाआआआ…….बुझा दीजिये इसकी प्यास, उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस , मैं आपके उस काले लम्बे लंड को अपनी चुत में लेकर रहूंगी…..ओह्हहहहह ….पापाआआआ आपके लिए मैं कुछ भी करूंगी पापाआआआ…..आइए अपनी आराधना के पास, बुझा दीजिये मेरी चुत की आग को पापाआआआ”
आराधना के हाथ अब तेज़ी से अपनी चुत के दाने को मसल रहे थे, वो पहली बार खुल कर चुत और लंड जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही थी, अब उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंचने वाली थी, उसकी अंगुलिया सरपट उसकी चुत की सड़क पर दौड़ी जा रही थी
“उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस”
ओह्हहहहहह पा्ह्ह्ह्हपा मैं गईईईई आहहहहहहहह पापाआआआ”
कहते हुए आराधना के बदन ने एक जोर की अँगड़ाई ली और उसकी चुत से फवारा फुट पड़ा, उसका पानी उसकी चुत से निकलकर उसकी सुडौल जांघो को गीला कर रहा था, उसकी अंगुलिया अभी भी उसकी चुत में फंसी थी, उसने धीरे से अपनी चुत के पानी को अपनी अंगुलियो पर लपेटा और फिर स्लो मोशन में अपने मुंह के अंदर लेकर जीभ से चाटने लगी,
“उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह पापाआआआ कब दोबारा इन अंगुलियो की जगह आपका वो प्यार लंड होगा, मैं आपके प्यारे लन्ड को अपने मुंह मे लेकर दोबारा खूब चुसुंगी, उसे खूब प्यार करूंगी, उसे जन्नत के दर्शन करवाउंगी, आ जाइए न पापाआआआ”
झड़ने के बाद आराधना की उत्तेजना थोड़ी शांत हुई, पर अपने पापा को पाने की हवस अब और भी ज्यादा उग्र हो चुकी थी,
अब उसे याद आया कि उसे तो अपनी प्यारी सी मुनिया को सजाना भी है, अपनी फुलकुंवारी के बालों की सफाई कर उसे बिल्कुल चिकनी चमेली बनाना है, उसने वीट क्रीम उठाई और अपनी मुनिया के बालों की सफाई करने में मशगूल हो गई,
सफाई करने के बाद उसने बाथ लिया,
कुछ देर बाद जब आराधना नहा चुकी थी, तो उसने पास रखे तौलिए की तरफ हाथ बढाया और अपना तरोताजा हुआ जिस्म पोंछने लगी. तौलिया बेहद नरम था और आराधना का बदन वैसे ही नहाने के बाद थोड़ा सेंसिटिव हो गया था, सो तौलिये के नर्म रोंओं के स्पर्श से उसके बदन के रोंगटे खड़े हो गए व उसकी जवान छाती के गुलाबी निप्पल तन कर खड़े हो गए. आराधना को वो एहसास बहुत भा रहा था और वह कुछ देर तक वैसे ही उस नर्म तौलिए से अपने बदन को सहलाती खड़ी रही.
फिर उसने तौलिया एक ओर रखा और अपने अन्तवस्त्रों की तरफ हाथ बढ़ाया, आज उसने एक बिल्कुल महीन पारदर्शी कपड़े की ब्लू पैंटी पहनी और हल्के आसमानी कलर की सी ब्रा…
उसने आज नाइटी की बजाय ब्लैक लिंगरी पहन ली, उसकी लिंगरी उसकी सुडौल झांगो से ऐसे कसकर चिपकी हुई थी, कि मानो उसके झुकते ही लिंगरी का कपड़ा तार तार हो जाएगा, ध्यान से देखने पर उसकी लिंगरी के अंदर से उसकी ब्लू पेंटी की लाइन साफ देखी जा सकती थी,
वो अभी बस तैयार ही हुई थी कि तभी उसके कमरे के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी, आराधना ने कमरा खोला तो सामने प्रीती अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ खड़ी थी,
आराधना –“अरे प्रीती, ऐसे खड़ी खड़ी मुस्कुरा क्यूँ रही है, चल अंदर आजा, बहुत सी बाते करनी है तेरे साथ”
प्रीती और आराधना कमरे में आ गयी, और आकर बेड पर बैठ गयी, इससे पहले कि आराधना कुछ कहती,प्रीती बिच में ही बोल पड़ी
प्रीती –“दीदी, आप दिल्ली क्या गई आपके तो तेवर ही बदल गये है” प्रीती तीखी मुस्कान के साथ बोली
आराधना –“तेवर…कैसे तेवर?” आराधना थोड़ी सी घबरा गयी थी, उसे लगा कि कहीं इसे शक तो नही हो गया
प्रीती –“और नही तो क्या दीदी, जब गयी थी तब कैसी पुराने जमाने की मधु बाला की तरह गयी थी, बिलकुल ढके और पुराने फैशन के कपड़ो में, और अब जब आई हो तो मल्लिका शेरावत बनकर आई हो…हा हा हा” प्रीती हँसते हुए बोली
आराधना –“हट पागल, मैं कहाँ चेंज हुई हूँ, वैसी ही तो हूँ जैसे गयी थी”
प्रीती –“कहाँ दीदी, झूट क्यूँ बोलती हो, अब तो आप पूरी माल लग रही हो कसम से, मन करता है कि…”
आराधना –“छुटकी तू बड़ी बदमाश हो गयी है आजकल, बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगी है………वैसे..अम्मम्म….क्या….क्या मन करता है तेरा”
प्रीती –“रहने दो दीदी, अगर मैंने कुछ बोल दिया तो आप तो नाराज़ हो जाओगी मुझसे….”
आराधना –“अरे बोल ना, मैं नही होउंगी नाराज़”
प्रीती –“दीदी…आपको अभी देखकर मेरा मन कर रहा है कि अभी आपको बेड पर पटक कर जोरदार किस कर दूँ….और फिर….”
आराधना –“फिर….फिर,,,क्या” आराधना भी सुबह से ही काफी गरम थी, उसे प्रीती की ये बाते बहुत ही ज्यादा गरम किये जा रही थी, इसलिए उसे भी इन सब बातो में बड़ा मजा आ रहा था
प्रीती –“फिर ….दीदी…फिर्र्र्र….वो…….” प्रीती हकलाते हुए बोली
आराधना –“अरे बोल ना फिर क्या…..” आराधना उतावली होते हुए बोली
प्रीती –“फिर बस मुझें नही पता …..आप नाराज़ हो जाओगी ” प्रीती मुंह फेरते हुए बोली हुए बोली
आराधना –“अरे बोल ना मैं पक्का तुझसे नाराज़ नही होउंगी”
प्रीती –“ठीक है, अगर आप नाराज़ नही होने का वादा करती हो तो मैं बोलती हूँ, सबसे पहले मैं आपको जमके किस करूंगी और फिर….फिर…..आपके वहां पर भी किस करूंगी”
आराधना –“वहाँ ….कहाँ…साफ साफ बोल ना…क्या पहेलियाँ बुझा रही है….”
प्रीती –“आपकी चु….मतलब…पुसी पर…” प्रीती ने आखिर हिम्मत करके बोल ही दिया था, दरअसल जब से सिमरन के साथ उसने लेस्बियन सेक्स का मजा चखा था, उसका दिमाग उसे आराधना के साथ भी ऐसा ही करने के लिए उकसा रहा था,
आराधना –“हय्य…रामम…….तुझे शर्म नही आती …कुछ भी बोलती है…..लगता है बहुत बड़ी हो गयी है तू…अभी तुझे बताती हूँ….” ये कहकर आराधना खड़ी हुई
आराधना को इस तरह कहते देख प्रीती भी खड़ी होकर खिलखिलाते हुए बेड के चारो और भागने लगी, आराधना उसके पीछे पीछे उसे पकड़ने के लिए भागने लगी,
और तभी आराधना ने अचानक प्रीती को पकड़ लिया और झट से बेड पर गिरा कर खुद उसके उपर आ गयी
आराधना –”अब बोल प्रीती की बच्ची …करेगी मेरे साथ ऐसा मज़ाक….बोल…’
वो झुककर उसके काफ़ी करीब आ चुकी थी…और इसी बीच अपने को छुड़वाने के लिए प्रीती ने अपनी गांड वाला हिस्सा हवा में उठा दिया..
आराधना को ऐसा लगा जैसे नीचे से कोई उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा है…क्योंकि दोनो की चूत इस वक़्त एक दूसरे बिलकुल ऊपर थी .
और अपनी चूत पर वो नमकीन सा दबाव महसूस करते ही उसकी चूत को पसीना आ गया…सेल्फ़ लुब्रीकेशन स्टार्ट हो गया अचानक उसमें से..और उसने भी प्रीती की लचीली कमर को पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ा और उसे ऊपर से ऐसे धक्के मारने लगी जैसे वो उसकी चुदाई कर रही हो.
प्रीती जो अभी तक हंस रही थी, आराधना के ऐसे झटकों को समझकर वो भी हँसना भूल गयी और सीरियस सी होकर उसने अपनी बहन से पूछा : “दी….दीदी ….ये…ये …क्या कर रहे हो…..ऐसा तो….ऐसा तो लड़का और लड़की करते है…”
पर आराधना ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया…और अपने हाथ धीरे-2 उसने प्रीती की टी शर्ट में डाल दिए और ऊपर की तरफ खिसकाने शुरू कर दिए….
जैसे-2 आराधना की उंगलियाँ सरककर उपर की तरफ आ रही थी…वैसे-2 प्रीती के माथे पर पसीना बढ़ने लगा था…वो चाहकर भी उसके हाथों को रोक नहीं रही थी , आज से पहले उसने ऐसा कभी भी महसूस नही किया था…एक अजीब सा सेंसेशन हो रहा था उसे अपनी चूत पर…आराधना की घिसाई से…और अब उसकी उंगलियों की थिरकन से भी उसे गुदगुदी महसूस होने लगी थी..
उसने ब्रा नही पहनी हुई थी…और जल्द ही आराधना की दोनो हथेलियां उसके नन्हे उरोजों से आ टकराई और उसने बड़े ही प्यार से उसके नन्हे चूजों को अपने हाथों में भर लिया..
प्रीती की तो आँखे बंद हो गयी उस एहसास से जब आराधना ने होले से अपने हाथ के दबाव से उसकी ब्रेस्ट को दबाया..
”सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….आआआआहह….दीदी……ये क्या कर रहे ……..उम्म्म्ममममममममम….”
वो शिकायत थी या प्रश्न …ये तो नही पता चल सका…पर प्रीती के हाथों ने अगले ही पल उपर की तरफ आते हुए टी शर्ट के उपर से ही आराधना के हाथों को पकड़ लिया..आराधना को लगा की वो हटाने के लिए कह रही है…पर वो धीरे से बुदबुदाई..
”दीदी…..प्लीज़ …….ज़ोर से दबाओ ना……ऐसे….”
और उसने अपने हाथों से आराधना के हाथों को जोर से दबा दिया…और आराधना के हाथों के नीचे उसकी नन्ही गोल गोल टमाटर भी उस दबाव में आकर नीचुड़कर रह गयी.
आराधना तो भभक उठी उसके बाद….उसने प्रीती की ब्रेस्ट को इतनी बेदर्दी से दबाना शुरू कर दिया की उसपर लाल निशान बनते चले गये…पर वो रुकी नही..
प्रीती के नुकीले निप्पल भी आराधना के जालिम हाथों को रोकने में असमर्थ थे..भले ही वो काँटों की तरह उभरकर ब्रेस्ट की रक्षा कर रहे थे पर ऐसे काँटों से शायद इस वक़्त आराधना को कोई असर ही नही पड़ रहा था…वो तो उन काँटों को भी बीच-2 में ऐसे मसल रही थी जैसे उनमे से दूध निकलने वाला हो..
दूध तो नही निकला..पर उसकी हर उमेठन से प्रीती की सिसकारियाँ ज़रूर निकल रही थी.
अब तो साफ़ हो चुका था की आज ये दोनो बहने अपनी सारी सीमाएँ लाँघने की तैयारी कर रही है..
आराधना तो अभी तक जैसे किसी नशे मे ये सब कर रही थी…ऐसा नशा जो उसके शरीर को अपने बस में करने में असमर्थ था…वो ये भी भूल चुकी थी की ये उसकी छोटी बहन है …प्रीती तो अपनी जवानी के उस पड़ाव पर थी जहाँ उसे ऐसी बातों में मज़ा मिलता था जो सैक्स से जुड़ी हो…जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बाद प्रीती में काफ़ी खुलापन आ चुका था. और अब उसे रोकने वाला कोई नही था.
जैसे ही आराधना के हाथों ने उसकी नन्ही ब्रेस्ट को छुआ…वो अपने हाथों के दबाव को उनपर डालकर और ज़ोर से दबाने की गुज़ारिश करने लगी आराधना से..
उसकी ब्रेस्ट ही उसके शरीर का सबसे सेंसेटिव हिस्सा थी..
इसलिए उसपर हाथ लगते ही वो भी अपनी सुधबुध खो बैठी और फिर शुरू हुआ उस छोटे से कमरे में दो बहनो के जिस्म के बीच उत्तेजना और सेक्स का वो सिलसिला जो शायद अब थमने वाला नही था.
प्रीती ने एक मादक सी अंगड़ाई लेते हुए अपनी टी शर्ट उतार कर दीवार पर दे मारी..
और उसकी साँवली और नन्ही छातियाँ देखकर आराधना के मुँह में पानी भर आया.
उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे…और उसके निप्पल के घेरे पर भी महीन से दाने उगे हुए थे..आराधना तो उसके निप्पलों की कारीगरी देखकर अचंभित रह गई…क्योंकि उसके दानों पर भी इतनी महीन कारीगरी नही की थी ऊपर वाले ने…वो बिल्कुल सादे से थे…पर उसकी ब्रेस्ट प्रीती के मुक़ाबले काफ़ी बड़ी थी..प्रीती की तो अभी -2 आनी शुरू हुई थी..पर एक बार जब ये भर जाएगी तो कयामत ढाएगी ये लड़की..
और ये तभी भरेंगी जब इनके उपर मेहनत की जाएगी…ये सोचते हुए आराधना का सिर उसकी छातियों पर झुकता चला गया..और अपने होंठ,दाँत और जीभ रूपी ओजरों से उसने प्रीती के बूब्स पर मेहनत करनी शुरू कर दी..
सबसे पहले अपनी गर्म जीभ से उसने प्रीती के निप्पल्स को छुआ….जो प्रीती के शरीर पर पहला स्पर्श था किसी लड़की का…ज़्यादातर लड़कियों के शरीर पर पहला स्पर्श किसी लड़के का होता है..पर लड़की के स्पर्श में भी कोई बुराई नही थी इस वक़्त…प्रीती ने एक तड़प भरी किलकारी मारते हुए अपनी दीदी के सिर को पकड़कर ज़ोर से दबा लिया अपनी छातियो पर…और चीख पड़ी वो..
”सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…….आआआआआअहह दीदी…………. …उफफफफफफफफफफफफ फफफ्फ़………क्या फीलिंग है ……माय गॉड ….. आआआआआआआअहह……..ज़ोर से सक्क करो ना….दीदी…………प्लीईईईईस……काट लो इन्हे……जोरों से……………दांतो से………………आआआआआआहह उूुुुउउफ़फ्फ़ एसस्स ऐसे ही…………….. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम आआआआआआआहह दीदी……….यार …..कहाँ थी आप ……पहले क्यों नही किया ये सब………………उम्म्म्मममममममममममममम…….”
प्रीती तो भाव विभोर सी हुई जा रही थी अपने शरीर को मिल रहे इतने उत्तेजक मज़े को महसूस करते हुए…उसे पता था कि ऐसा ही कुछ होगा क्यूंकि वो तो पहले भी सिमरन के साथ ये मजा ले चुकी थी ..पर अभी जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ वो उसे शब्दों मे व्यक्त कर ही नही सकती थी…ऐसा मज़ा …इतना आनद….उत्तेजना का इतना संचार…ऐसी तड़प…उसने आज तक सोचा भी नही था कि अपनी ही दीदी के साथ सेक्स के खेल में इतना ज्यादा मज़ा आता है.
आराधना के सिर को कभी एक पर तो कभी दूसरी ब्रेस्ट पर वो लट्टू की तरह घुमा रही थी…उसकी लार से उसने अपनी छातियों की पुताई करवा ली…उसके लंबे और नुकीले निप्पल अपने पुर शबाब पर आ चुके थे…
वो बेड पर पड़ी हुई किसी मछली की तरह तड़प रही थी.
उसने अपनी नशीली आँखो से आराधना की तरफ देखा..और फिर अपने हाथ उपर करते हुए उसने आराधना की ब्रैस्ट को पकड़ लिया…
आराधना को तो ऐसा लगा जैसे उसके दिल की धड़कन रुक जाएगी..जब प्रीती ने उन्हे टी शर्ट के उपर से ही मसलना शुरू किया..
”उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उऊहह ……………आआआआआआअहह प्रीती ………………उम्म्म्ममममममममम…… .एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……”
और फिर धीरे-2 प्रीती ने उसकी टी शर्ट को उपर खिसकाना शुरू कर दिया…और अंत में आते-2 उसे उतार कर अपनी ही टी शर्ट के उपर फेंक दिया..आराधना ने तो ब्रा पहनी हुई थी…जिसे उसने खुद ही अपने हाथ पीछे करते हुए खोल दिया..
और जैसे ही उसके बूब्स प्रीती की नज़रों के सामने आए, अपने आप ही उसका मुँह उनकी तरफ खींचता चला गया..और उसने एक जोरदार झटके के साथ उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया..
किसी बच्चे की तरह वो उसके लम्बे निप्पल का दूध पीने लगी..
और अपनी नन्ही बहन को अपनी छाती से चिपका कर आराधना ने एक रस भरी सिसकारी मारकर उसे और अंदर घुसा लिया..
”आआआआआआआआआअहह ओह्ह्ह्ह माय बैबी ……………… सकक्क मी……सक्क…..इट ……बैबी…..”
बैबी तो पहले से ही उत्तेजना के शिखर पर थी…अपनी बहन की दर्द भरी पुकार सुनकर वो और ज़ोर से उसके दानों को अपने पैने दांतो से कुतरने लगी…किसी चुहिया की तरह…और हर बार काटने पर आराधना के शरीर से एक अजीब सी तरंग उठ जाती..जिसे प्रीती सॉफ महसूस कर पा रही थी..
जब अच्छी तरह से उसने आराधना की ब्रेस्ट का जूस पी लिया तो वो तुरंत खड़ी हुई और उसने अपनी केप्री भी उतार कर फेंक दी…और अब वो आराधना के सामने बेशर्मों की तरह पूरी तरह से नंगी होकर बैठी थी..
प्रीती की देखा देखी आराधना ने भी अपना पायज़ामा उतार दिया…और अब वो दोनो नंगी बैठी थी एक दूसरे के सामने..
आराधना की नंगी ब्रैस्ट देखने में काफी यम्मी लग रही थी , वो प्रीती के मुकाबले काफी बड़ी भी थी,इसलिए आराधना उनको हाथों में लेकर खुद ही दबाने लगी, और अपनी मोटी छातियों में और उभार ले आई
अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनकर दोनो ने एक दूसरे की ब्रेस्ट को अच्छी तरह से चूस डाला था..पर अब क्या करे ,शायद यही सोचे जा रही थी वो दोनो…
उत्तेजना के नशे में प्रीती को सिर्फ़ वही याद आ रहा था की कैसे वो खुद,जब सिमरन दीदी उसकी चुत चूस रही थी तो ज़ोर-2 से आहे भरकर मज़े ले रही थी..
बस,प्रीती ने भी वही ठान लिया..
उसने धीरे से धक्का देकर आराधना को बेड पर लिटा दिया..
पहले तो अपनी उँगलियों को आराधना की चूत में डालकर प्रीती ने अंदर के टेंप्रेचर और चिकनाई का अंदाजा लिया
और फिर धीरे -२ नीचे झुककर वो अपना चेहरा चूत के करीब ले गयी
आराधना का शरीर भी काँप उठा,ये सोचकर की उसके साथ क्या होने वाला है अब…उसके होंठ थरथरा कर रह गये, पर उनमे से ना नही निकल पाया…और उसने अपने आप को अपनी छोटी बहन के सुपुर्द करते हुए अपनी आँखे बंद कर ली.
और फिर प्रीती नीचे झुकी और उसने अपने होंठों से उसकी गुलाब जैसी चूत की फेली हुई पंखुड़ियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
पहला नीवाला मुँह में लेते ही उसका स्वाद पता चल गया प्रीती को…जो उसे काफ़ी मजेदार लगा..
और आराधना तो बिफर गयी अपनी चूत की चुसाई से…
”ऊऊऊऊऊऊऊहह प्रीती ………….मेरी ज़ाआाआन्न…………….सस्स्स्स्स्स्सस्स….. ये क्या कर दिया…………आआआआहह …..बहुत मज़ा आ रहा है …………उम्म्म्ममममममममम….. एसस्स्स्स्सस्स…… अहह…..”
और फिर तो वो बावली कुतिया की तरह उसकी चूत के उपर लगे अखरोट के दाने पर और संतरे की फाँक जैसी चूत को खाने में लग गयी…
अपनी लंबी और गर्म जीभ को उसने अंदर भी धकेला..उसकी मलाई को चाटा …चूसा…और अंत में पी गयी.
आधे घंटे तक दोनों बहनों ने एक दुसरे एक हर एक अंग को जी भर के चूमा चूसा और आखिर में थक कर बेड पर लेट गयी
दोनों बहने मस्त होकर बेड पर लेटी हुई थी, उनके चेहरे पर इस समय पूर्ण संतुष्टि के भाव झलक रहे थे, पर साथ ही साथ एक अजीब सा कोतुहल भी था,
प्रीती –“वाह दीदी, आप तो सच में बहुत ही मस्त लडकी हो, कितनी प्यारी और नमकीन चुत है आपकी, मुझे तो ऐसा मजा पहले कभी नही आया सच्ची” प्रीती चहकती हुई बोली
आराधना –“हाँ मेरी छुटकी, तू भी बड़ी मस्त है रे, मैं नही जानती थी कि मेरी छोटी सी प्यारी बहन अब इतनी बड़ी हो चुकी है, सच में बड़ा मजा आया मुझे” आराधना अपनी सांसो को अभी भी सम्भालने की कोशिश कर रही थी
प्रीती –“दीदी, पर आप पहले तो बिलकुल ही दबी दबी सी मेरा मतलब अलग अलग कटी सी रहती थी, दिल्ली जाते ही इतना बड़ा चेंज कैसे आ गया आप में” प्रीती ने पूछा
आराधना –“ दिल्ली शहर ही ऐसा है मेरी जान, सब कुछ सिखा देता है” आराधना ने कहा, वो प्रीती को ये नही बताना चाहती थी कि ये सब उनके पापा का किया धरा है जिन्होंने कुछ ही दिनों में उस जैसी सीधी साधी लडकी को अपने मोटे लंड का गुलाम बना लिया है
प्रीती –“दीदी, वैसे अब हम एक दुसरे से इतना खुल चुके है, तो मैं….क्या…..अम्म्म्मम्म……” प्रीती थोडा हिचकिचा रही थी ये सवाल पूछने के लिए
आराधना –“अरे बोल ना छुटकी, अब कैसा शर्माना, अब तो हम एक दुसरे की पक्की सहेलियाँ भी बन गयी है” आराधना ने प्रीती के गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा
प्रीती –“वो तो है दीदी, पर अभी भी मुझे थोडा डर लग रहा है कि कहीं आप मेरे सवाल से नाराज़ तो नही हो जाओगी”
आराधना –“अरे नही मेरी प्यारी गुडिया, अब मैं तुझसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ, तूने तो आज मुझे सुख का एक नया संसार दिखाया है, बोल क्या पूछना है तुझे, खुल के पूछ”
प्रीती –“दीदी, वो मैं पूछ रही थी कि क्या आपने पहले, मेरा मतलब है कि आज से पहले भी…..वो…..वो….सेक्स किया है ना?????” प्रीती ने तो सीधा एटम बम दाग दिया
आराधना को ऐसे सीधे सवाल की जरा भी उम्मीद नही थी, पर उसे लगा कि कहीं प्रीती को शक तो नही हो गया,
आराधना –“अम्म्म……ये…ये ….क्या बोल रही है…तू प्रीती…..मैं…..मैं…नही …किसी से…नही…….तू कुछ भी बोल रही है……….” आराधना घबराते हुए बोली
प्रीती –“आप घबराओ मत दीदी, अगर आपने सेक्स किया भी है तो कोई बात नही, आपका राज़ मेरे साथ सेफ है, मैं कभी भी किसी को नही बताउंगी……आप टेंशन मत लो..बस आप मुझे सच बता दो न प्लीज़…आपने सच्ची किसी के साथ सेक्स किया हुआ है ना”
आराधना को लगा कि अब सच छुपाने से कोई फायदा नही
आराधना –“हाँ……प्रीती…मैं सेक्स कर चुकी हूँ…पर प्लीज़ उसका नाम मत पूछना…तुझे मेरी कसम”
प्रीती –“ओके दीदी, अब आप बोल ही रही है तो मैं नही पूछूंगी”
आराधना –“वैसे तुझे पता कैसे चला???”
प्रीती –“क्या पता चला????” प्रीती अब आराधना के मजे लेना चाहती थी……
आराधना –“तू जानती है क्या??”
प्रीती –“अरे मैं सच में नही जानती, प्लीज़ बताओ ना क्या पता चला” प्रीती ने खिलखिलाते हुए पूछा
आराधना –“अच्छा बच्चू, बड़ी बहन से ही मस्करी”
प्रीती –“नही दीदी, मुझे सच में नही पता कि आप क्या पूछ रही हो, प्लीज़ बताओ ना क्या पता चला”
आराधना –“लगता है तू ऐसे नही मानेगी, तो सुन, मैं ये पूछ रही हूँ कि तुझे कैसे पता चला कि मैंने किसी के साथ चुदाई की हुई है, अब खुश”
प्रीती –“हाँ, अब खुश” प्रीती मुस्कुराते हुए बोली
आराधना –“बता ना यार,कैसे पता चला” आराधना ने कोतुहल वश पूछा
प्रीती –“वो दीदी आपकी चुत देखकर पता चला”
आराधना –“चुत देखकर, पर कैसे”
प्रीती –“दीदी, वो आपकी चुत की सिल टूटी हुई है ना, इसलिए”
आराधना को अब समझ आ गया कि प्रीती वाकई सेक्स के मामले में उससे भी ज्यादा एक्सपर्ट हो चुकी है
आराधना –“पर तुझे ये सब किसने सिखाया”
प्रीती –“दीदी वो वो मैं…” अब घबराने की बारी प्रीती की थी
आराधना –“बता ना किसने सिखाया”
प्रीती –“मैं बताती हूँ दीदी, पर प्लीज़ आप प्रॉमिस करो कि आप उसके साथ झगड़ा नही करोगी”
आराधना –“ओके, नही करूंगी, अब बता”
प्रीती –“दीदी, वो मुझे ये सब…..वो सिमरन दीदी….ने सिखाया “
आराधना –“क्या…..सिमरन ने…..पर कब……कैसे…….तू कब मिली उससे…वो तो तुझसे ज्यादा बाते भी नही की कभी” आराधना को बड़ा आश्चर्य हो रहा था
प्रीती –“दीदी वो जब आप दिल्ली गयी थी न तब मैं एक बार आपके कॉलेज गयी थी….और फिर…..” प्रीती ने आराधना को सब बता दिया कि कैसे उसके और सिमरन के लेस्बियन सम्बन्ध बने पर उसने कई बाते छुपा ली जैसे कि सिमरन अपने भाई के साथ ही चुदाई करवाती है, और वो खुद भी कुशल से चुद्वाती है,
आराधना –“ये सिमरन तो बड़ी ही रंडी निकली, मेरी छोटी बहन को भी नही छोड़ा”
प्रीती –“दीदी आपने कहा था कि आप गुस्सा नही होगी”
आराधना –“अच्छा सोरी, वैसे उसने तुझे ये सब सिखाकर अच्छा ही किया”
प्रीती –“कैसे दीदी”
आराधना –“अरे उसकी वजह से आज तू और मैं भी तो ये सब कर पाए ना, इसलिए”
प्रीती –“हाँ वो तो है दीदी”
आराधना –“वैसे प्रीती, मुझे जहाँ तक पता है, उसका एक बॉयफ्रेंड भी है और वो अक्सर उससे चुदवाती भी है, तो फिर उसने तेरे साथ ऐसे कैसे किया, मेरा मतलब कि उसकी खुराक तो उसका बॉयफ्रेंड ही पूरी कर देता होगा ना”
प्रीती –“दीदी लड़का लडकी की चुदाई में तो मजा आता ही है, पर कभी कभी दो लडकियां भी आपस में मजे लेती है, जैसे कि मैंने और सिमरन दीदी ने लिया, और आज आपने और मैंने लिया”
आराधना –“हाँ वो तो है, अच्छा प्रीती तुझे एक बात बताऊ क्या सिमरन की”
प्रीती –“हाँ बताइए ना”
आराधना –“पता है, वो ना अपने बॉयफ्रेंड के साथ अपने घर में भी चुदाई कर चुकी है एक बार”
प्रीती –“अपने घर में……कब………” प्रीती ने चोंकने का नाटक किया, क्यूंकि उसे तो सिमरन ने पहले ही बता दिया था कि वो अपने भाई के साथ उनके घर में चुदाई कर चुकी है, पर फिर भी वो आराधना को और ज्यादा गरम कर देना चाहती थी
आराधना –“अरे जब लास्ट टाइम अपन सब शौपिंग के लिए गये था ना तब”
प्रीती –“अरे वाह, सिमरन दीदी तो फुल मजे लेती है मतलब”
आराधना –“हाँ वो तो है”
प्रीती –“ वैसे दीदी आपसे एक बात पूछूँ”
आराधना –“हाँ पूछ ना”
प्रीती –“ये सिमरन दीदी के बॉयफ्रेंड को आप जानती हो क्या”
आराधना –“नही यार, उसने आज तक मुझे नही बताया अपने बॉयफ्रेंड के बारे में, जब भी पूछती हूँ बस किसी तरह टाल देती है”
प्रीती –“वैसे दीदी, मैं जानती हूँ उनके बॉयफ्रेंड को”
आराधना –“क्या, पर कैस……ओह समझ गयी जब तुम दोनों मजे कर रहे थे तब उसने तुझे बताया होगा ना….. अच्छा मुझे बता ना कौन है उसका बॉयफ्रेंड जिसके साथ वो इतने मजे लेती है”
प्रीती –“दीदी वैसे तो मैंने सिमरन दीदी को प्रॉमिस किया था कि मैं किसी को उनके बॉयफ्रेंड के बारे में नही बताउंगी, पर आप तो उनकी बेस्ट फ्रेंड है, तो आपको तो बता ही सकती हूँ, पर आप प्लीज़ और किसी को मत बताना”
आराधना –“अरे तुझे ये कहने की जरूरत नही थी, मैं वैसे भी किसी को नही बताती, अब बता ना जल्दी, कौन है वो खुसनसीब जो सिमरन जैसी गरम लडकी की चुत मारता है” आराधना अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और अब वो खुलकर ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रही थी
प्रीती –“दीदी, उनका बॉयफ्रेंड कोई और नही बल्कि……………..” प्रीती ने थोड़ी सी लम्बी सांस ली
आराधना –“अरे बता ना जल्दी, क्या कर रही है यार…..”आराधना की उत्तेजना अब सांतवे आसमान पर थी
प्रीती –“दीदी, उनके बॉयफ्रेंड का नाम ……अभिनव …..है….”
आराधना –“अभिनव….ये अभिनव कौन …….ओह माय गॉड……अभिनव तो उसके बड़े भाई का नाम है…कहीं तू ये तो नही कह रही कि सिमरन अपने बड़ी भाई से ही….” आराधना का मुंह आश्चर्य के मारे खुला सा रह गया था
प्रीती –“हाँ…दीदी….आपने सही समझा…..सिमरन दीदी….अपने बड़े भाई के साथ ही रोज़ चुदाई करती है…….”
आराधना –“पर उसने आज तक मुझे क्यों नही बताया…..” आराधना को अब भी यकीन नही हो रहा था कि सिमरन उससे इतनी बड़ी बात छुपा सकती है, वो भी खासकर तब जब उसने सिमरन को अपने और अपने पापा के बारे में इतना कुछ बता दिया था, तभी आराधना की आँखे चमक गयी
“कहीं सिमरन ने प्रीती को मेरे और पापा के बारे में कुछ…….”आराधना को ये सोचते ही एक जोर का झटका लगा
प्रीती –“दीदी, आप कहाँ खो गयी……”
आराधना –“नही नही प्रीती….मैं बस ये सोच रही थी कि इतनी बड़ी बात उसने मुझे क्यूँ नही बताई……”
प्रीती –“वैसे दीदी….इसमें उनकी गलती नही है….अगर मैं अगर उनकी जगह होती तो मैं भी आपको ये बात नही बता पाती…”
आराधना –“पर क्यूँ……क्या तुझे मुझपर विश्वास नही है…”
प्रीती –“नही दीदी…बात विश्वास की नही है…अब देखो ना…आप दिल्ली जाने से पहले कितनी बोरिंग हुआ करती थी…हमेशा बस संस्कार के नाम पर लेक्चर दिया करती थी…..सेक्स से तो शायद आपका दूर दूर तक नाता नही था…ऐसे में आप क्या ये बात हज़म कर पाती कि सिमरन दीदी अपने भाई से ही चुदती है…..नही ना….”
आराधना –“वैसे….बात तो तेरी सही है……पर अब तो मैं बदल गयी हूँ……ना…”
प्रीती –“हाँ दीदी…अब तो आप बिलकुल झक्कास हो गयी हो….और मुझे जहाँ तक लगता है…अब तो शायद सिमरन दीदी आपसे खुद इस बारे में बात करेगी…” प्रीती ने कहा
आराधना –“हा..मुझे भी यही लगता है…वैसे प्रीती उनके बिच ये सब कैसे हुआ….तुझे तो उसने बताया होगा ना…मुझे भी बता ना…” आराधना ने उत्सुकता पूर्वक पूछा
प्रीती –“क्या हुआ दीदी…” प्रीती दोबारा मजे लेने के मूड में आ गयी
आराधना –“तू नही सुधरेगी…चल मैं ही बोलती हूँ….मुझे बता कि सिमरन और उसके भाई के बिच चुदाई कैसे और किन हालातो में शुरू हुई…..”
प्रीती –“चलो ठीक है दीदी…मैं आपको बता ही देती हूँ..पर आपको एक वादा करना पड़ेगा…..”
आराधना –“वो क्या…”
प्रीती –“यही कि कहानी पूरी होने के बाद आप भी मुझे बताओगी कि वो खुशनसीब कौन है जिसका लंड आपकी चुत की सवारी कर चुका…बोलो…मंजूर….”
आराधना तो अब बुरी फंस गयी…वो प्रीती को अपने और अपने पापा के बारे में नही बताना चाहती थी….पर वो सिमरन और उसके भाई की स्टोरी जानने के लिए मरी जा रही थी…ऐसे में अब वो करे क्या……
आराधना –“पर प्रीती मैंने तुझे बोला था ना कि यार प्लीज़ मुझसे उसका नाम मत पूछो…..”
प्रीती –“क्या यार दीदी…अब तो हम इतने क्लोज हो चुके है…अब कैसा शर्मना…..प्लीज़ बताओ ना…”
आराधना –“यार मैं…अब कैसे…………..”
प्रीती –“ अच्छा चलो एक डील करते है…..”
आराधना –“कैसी डील” आराधना ने आश्चर्य से पूछा
प्रीती –“अगर आप मुझे ये बताओगी कि आपकी चुत की सिल किसने तोड़ी, तो मैं भी आपको ये बताउंगी…..कि….मेरी फुद्दी सबसे पहले किसने मारी……” प्रीती ने नशीली आँखों से आराधना की तरफ देखते हुए कहा…..
आराधना –“क्या……तू भी…..” आराधना के आश्चर्य का ठिकाना ही नही था…..उसे तो लग रहा था कि प्रीती की बुर तो सिल पैक है पर शायद वो अभी इन मामलो में इतनी उस्ताद नही हुई थी कि सिर्फ 2-3 बार चुदी हुई चुत को पहचान सके
प्रीती –“हाँ दीदी…मैं…भी….” प्रीती ने खिलखिलाते हुए कहा
आराधना –“तू तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली यार…मैं तो तुझे बड़ी ही भोली भली समझती थी….पर तू तो कसम से एक नंबर की चुदक्कड निकली…….अपनी चुदाई के बारे में मुझे शक भी नही होने दिया…और मुझे लग रहा था कि मैं तो अब चुदाई में एक्सपर्ट हो गयी…पर तू तो मेरी भी उस्ताद निकली…” आराधना ने मुस्कुराते हुए कहा
प्रीती –“अब दीदी, ये जवानी की आग होती ही ऐसी ही है…रात रात भर बस करवटे ही बदलते रहते है जब तक इसकी आग को बुझाया ना जाये…….पर आप चिंता मत करो …मैं आपको पूरा ज्ञान दे दूंगी…..हा हा हा…” प्रीती ने आराधना के निप्पल पे चिकोटी काटते हुए कहा
आराधना –“उईइ….माँ….क्या करती है यार….अच्छा बता ना प्लीज़….कि कोन है वो किस्मतवाला….जिसे मेरी प्यारी बहन की ये सुंदर सी गुलाबी चुत नसीब हुई….बोल ना….”
प्रीती –“नही दीदी….पहले आप वादा करो कि आप भी मुझे बताओगी कि आपकी चुदाई करने वाला खुसनसीब कौन है…तभी मैं आपको अपने वाले के बारे में बताउंगी…”
आराधना अब सच में दुविधा में फंस चुकी थी…..उसकी उत्सुकता चरम पर थी…वो सच में जानना चाहती थी कि प्रीती ने किससे चुदवाया है…पर अपने और पापा के बारे में उसे कैसे बताये यही नही सोच पा रही थी
प्रीती –“दीदी बोलिए ना……आप बताओगी ना….” प्रीती ने बड़ी ही मासूम सी शक्ल बनाते हुए कहा….
क्या मस्त नजारा था ये दोस्तों…..दो बहने बिलकुल नंगी बेड पर लेटी एक दुसरे से ये जानने की कोशिश कर थी कि उनकी पहली चुदाई किसने की ………..
आराधना ने काफी देर विचार किया और फिर आखिर उसने अपनी उत्सुकता के आगे हार मान ही ली
आराधना –“अच्छा ठीक है…मैं तुझे बताउंगी…..पर पहले तू मुझे बताएगी उसके बाद मैं बताउंगी…..ओके”
प्रीती –“ओके ठीक है…”
आराधना –“चल तो बता कौन है वो बन्दा…..” आराधना ने खुद ही अपने हाथ से अपने मम्मे को मसलते हुए पूछा
प्रीती –“दीदी….उसका नाम है…….कु…अम्मम्म….कुशल…..”
प्रीती ने जैसे ही कुशल का नाम लिया आराधना की तो आश्चर्य के मारे आँखे ही इतनी बड़ी हो गई जैसे अभी बाहर आ जाएगी…
आराधना –“क्या………कुशल……पर कैसे…और कब…..तू सच तो कह रही है ना…..या ”
प्रीती –“दीदी…सच में……कुशल ही वो लड़का है जिसने मेरी चुत की सिल तोड़ी थी…और उसके बाद भी २-३ बार वो मेरी चुदाई कर चूका है…..” प्रीती तो आराधना पर जैसे आज कहर ढहाने को तैयार बैठी थी
आराधना –“पर कब….मेरा मतलब ये कैसे हो गया……तुम दोनों तो हमेशा लड़ते रहते हो ना…फिर ये सब कैसे…..” आराधना को तो अब ही यकीन नही हो रहा था कि कुशल और प्रीती आपस में सेक्स करते है
प्रीती –“दीदी….एक्चुअली लड़ाई लड़ाई में हम लोग इतना आगे बढ़ गये कि कब मुझे कुशल से प्यार हो गया पता ही नही चला… मैं तो बस शुरू में उसे चिड़ाने के लिए अपने बदन का इस्तेमाल करती थी..जैसे कभी कभी उसको अपनी बॉडी का दर्शन करा दिया..वैगरह वैगरह ….पर धीरे धीरे मुझे भी इन सब में मजा आने लगा और फिर हम धीरे धीरे एक दुसरे को ओरल देने लगे..और फाइनली एक दिन उसने मुझे मोका देखकर चोद ही दिया…” प्रीती आराधना को अपने और कुशल के बिच हुए सेक्स एनकाउंटर्स की जानकारी दे रही थी…और आराधना भी बड़े ही गौर से उसकी बाते सुन रही थी…..
जब प्रिती ने अपनी बात खत्म की तब तक तो आराधना पूरी तरह गरम हो चुकी थी…उसने अपनी चूत को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया था.. उसकी आँखे नशे में अधखुली सी लग रही थी…
प्रीती ने जब आराधना को इस हालत में देखा तो उसके चेहरे पर एक कुटील मुस्कान आ गयी…..उसने बिना देरी किये धीरे से अपने होठों को आराधना की रस टपकती चूत से सटा दिया ….आराधना तो मजे के मारे दोहरी हो गयी….अब प्रीती ने जोर जोर से आराधना की चूत को चुसना शुरू कर दिया…..और तब तक मजे से चुस्ती रही जब तक कि आराधना की चुत ने दोबारा पानी की बोछार ना कर दी जिसे प्रीती ने बड़े ही मजे से चाटकर साफ कर दिया
प्रीती –“वाह…दीदी…आपकी चूत का पानी तो सच में बड़ा लाजवाब है…..” प्रीती ने अपने होठों पर जीभ फिराते हुए कहा
आराधना –“सच में तू बड़ी ही गरम लडकी निकली यार…..घर वालो के सामने तो कुशल को मारती है…और पीछे से खुद उससे मरवाती है….ह्म्म्म्मम्म…”
प्रीती –“अच्छा दीदी अब आप बताओ ना…आपकी सील पैक चुत का उद्घाटन किसने किया…”
आराधना –“मेरी बिल्लो रानी ..शायद हम दोनों बहने बिलकुल एक जैसी ही ही,,,जैसे तूने घर के घर में ही अपनी बुर का उद्घाटन करवाया वैसे ही मैंने भी घर के मर्द से ही अपनी चूत फडवाई….”
अब चोंकने की बारी प्रीती की थी….
प्रीती –“क्या….घर के मर्द से…..आपका मतलब है आपने भी कुशल से अपनी चूत मरवाई…..” प्रीती हैरानी से देखि जा रही थी
आराधना –“अरे पागल…क्या अपने घर में एक ही मर्द है क्या….”
प्रीती –“पर दूसरा मर्द तो……ओह…माय…गॉड….तो आपने क्या……..पापा से……”प्रीती के तो अब होश ही उड़ चुके थे…
आराधना –“हाँ…तू सही समझी…..पापा ने ही मेरी चूत का शिलान्यास किया है मेरी बिल्लो ….” आराधना ने मुस्कुरा कर कहा
प्रीती –“पर ये सब कैसे हुआ……”
आराधना –“एक्चुअली…सिमरन ने मेरे दिल में पापा के लिए प्यार जगा दिया था…या कहूँ कि मुझे उससे जलन सी हो गयी थी क्यूंकि मैंने पापा को उसके करीब जाते हुए देख लिया था जबकि मैं खुद पापा को पाना चाहती थी….और फिर ……………” आराधना ने प्रीती को अपने और अपने पापा के बिच हुए एक एक वाकये को विस्तार से बताना शुरू कर दिया
इधर प्रीती इतनी गरम बाते सुनकर एक हाथ से अपनी चूत के दाने को मसल रही थी और दुसरे हाथ से अपने मम्मे को…..
प्रीती –“इसका मतलब आप दोनों ने दिल्ली में जम कर मजे लिए…….”
आराधना –“हाँ यार…हमारा तो और भी प्लान था पर किसी वजह से जल्दी आना पड़ा…पर अब तो मैं उनके बगैर नही रह सकती सच में….”
प्रीती –“वैसे दीदी…घर पर तो मोम है न फिर आप दोनों कैसे कर पाओगे”
आराधना –“अरे यार…अपनी मोम भी कुछ कम नही है…तुझे पता है..एक दिन जब पापा ऑफिस में थे.. तब मैंने मोम को किसी आदमी से चुदवाते हुए छुपकर देख लिया था…बिलकुल किसी रंडी की तरह अपनी चूत में वो मोटा सा लंड ले रही थी…….मैं उसकी शक्ल तो नही देख पाई पर उस बन्दे का लंड तो वाकई बहुत बड़ा था…पापा से भी बड़ा…..”
प्रीती आराधना की ये बात सुनकर धीरे धीरे मुस्कुराने लगी….
आराधना –“अरे मैं तुझे मोम की इतनी बड़ी बात बता रही हूँ और तू हँसे जा रही थी….”
प्रीती –“मैं इसलिए हंस रही हूँ दीदी क्यूंकि मैं ये बात पहले से जानती हूँ कि मोम किसी और से चुदवाती है…और मैं तो ये भी जानती हूँ कि वो कौन है….”
आराधना –“क्या सच में….बता ना यार कौन है वो जिससे मोम छुप छुप कर चुदवाती हैं”
प्रीती –“दीदी…वो कोई और नही बल्कि कुशल ही है जिसके साथ मोम रंगरेलियां मनाती है….”
आराधना –“क्या…………………………..” आराधना को विश्वास ही नही हो रहा था ये सुनकर….
प्रीती –“हाँ..दीदी…और पता है…कल रात मैं इसीलिए जानबुझकर सिमरन दीदी के घर रहने के लिए गयी थी ताकि इन दोनों को थोड़ी प्राइवेसी मिल जाये…………और पक्का इन लोगो ने कल रात तो जमकर चुदाई का दौर खेला है”
आराधना –“यार पता नही और कितने राज़ छुपे पड़े है……मुझे तो बिलीव ही नही हो रहा ये सब सुनकर”
प्रीती –“पर दीदी है तो ये सब सच…..अब देखो ना….आप पापा से चुदती हो….मोम कुशल से चुदती है…मैं भी कुशल से चुदाई करती हूँ…..”
आराधना –“हाँ…वो तो है…”
प्रीती –“वैसे दीदी एक बात कहूँ…अगर बुरा ना मानो तो”
आराधना –“अरे बोल ना…अब तो इतना कुछ शेयर कर चुके है..अब काहे का बुरा मानना…”
प्रीती –“दीदी…आपको ना…एक बार कुशल से भी चुदना चाहिए…सच में बड़ा ही मस्त लंड है उसका…इतना लम्बा और मोटा…..आपको सच में मजा आ जायेगा…..”
आराधना –“अब मैं तुझे कैसे बताऊ….दिल्ली में होटल में पापा के साथ चुदाई करते समय एक बार मुझे अचानक कुशल का चेहरा दिमाग में आ गया था और मुझे तब भी बड़ा अच्छा लगा था”
प्रीती –“तब तो फिर ठीक है….अब तो आपको कुशल से चुदवाना ही होगा, देखना आपको बड़ा मजा आएगा” प्रीती चहकते हुए बोली
आराधना –“चल ठीक है…पर तुझे भी फिर पापा से चुदाई करनी पड़ेगी”
प्रीती –“ओके डन”
आराधना –“सच में अब तो बड़ा मजा आने वाला है”
प्रीती –“वैसे दीदी…आप इमेजिन करो करो कि…..हमारी पूरी फैमिली एक साथ मिलकर चुदाई करे…मेरा मतलब है कि……मैं आप और मम्मी बिलकुल नंगे लेटे हो यहाँ और कुशल और पापा मिलकर हमारी चुदाई करे….”
आराधना –“उफ्फ्फ्फ़….यार फिर तो मजा ही आ जायेगा…पर ये पॉसिबल कैसे हो पायेगा यार”
प्रीती –“दीदी आप चिंता मत करो ..अब हम दोनों बहने मिलकर जल्द ही इस सपने को सच करके रहेंगे.. देखना”
फिर प्रीती और आराधना ने फिर एक बार एक दुसरे की चूतों को चूसकर ठंडा किया और फिर कपडे पहनकर निचे आ गयीं…….
दोस्तों आपको क्या लगता है..अब क्या होने वाला है इस घर में……
आराधना और प्रीती पूरी तरह संतुस्ट होने के बाद अपने कपड़े पहन कर निचे आ गयी और सीधा किचन में घुस गयी , नीचे किचन में स्मृति दोपहर का खाना तैयार कर चुकी थी,
आराधना –“मोम, आपने खाना तैयार कर लिया क्या, मुझे बहुत भूख लगी है सच में”
स्मृति –“बस 5 मिनट और रुक जाओ आरू बेटा, तब तक तुम दोनों हॉल में बैठ जाओ, मैं खाना तैयार करके टेबल पर लगा देती हूँ, और हाँ अपने पापा को भी बुला लो, वो जब से आये है, बस सो रहे है”
आराधना –“वो मोम, पापा कल पूरी रात ड्राइविंग करते रहे ना, इसलिए शायद थक गये होंगे”
स्मृति –“हम्म….पर फिर भी अब तो काफी टाइम हो गया उन्हें सोते हुए, जाओ और जाकर उठा दो उन्हें, फ्रेश होकर खाना खा लेंगे”
आराधना –“वैसे मोम, कुशल कहाँ गया, दिखाई नही दे रहा” आराधना स्मृति के चेहरे पर कुशल के नाम से आने वाले भाव देखना चाहती थी पर स्मृति एक मंझी हुई खिलाडी थी, उसने बिलकुल भी अपने चेहरे पर कोई भाव नही आने दिए और बड़े ही नार्मल तरीके से बोली
स्मृति –“वो तो अपने किसी फ्रेंड से मिलने चला गया था सुबह ही, शायद भी थोड़ी देर में आ जायेगा”
आराधना –“ओके मोम, मैं जाकर पापा को उठा देती हूँ, प्रीती तब तक तू खाना टेबल पर लगाने में मोम की हेल्प कर दे” आराधना ने प्रीती की तरफ आँख मारते हुए कहा, प्रीती को भी समझ आ गया कि शायद आरू दीदी पापा के साथ थोडा सा मजा लेना चाहती है
प्रीती –“आप चिंता मत करो दीदी, आप पापा का आराम से जगाइए…..ओह मेरा मतलब पापा को आराम से जगाइए” प्रीती ने एक टेढ़ी मुस्कान हंस दी
आराधना ने आँखे दिखाकर प्रीती को डराने की कोशिश की कि कम से कम मोम के सामने तो ऐसी बाते मत कर पर प्रीती कहाँ मानने वाली थी
आराधना भी मुस्कुराती हुई अपने पापा के कमरे की तरफ चल पड़ी
अंदर जाकर उसने देखा कि पंकज तो मस्त बेड पर सोया हुआ है, उसने एक पजामा और टीशर्ट डाली हुई थी, जिसमे ध्यान से देखने पर उसके लोडे का मस्त उभार महसूस किया जा सकता था, आराधना धीरे धीरे चलकर पंकज के बिलकुल पास आई और फिर अपने पापा के माथे पर हल्का सा किस करते हुए कहा
आराधना –“पापा….उठ जाइये……लंच का टाइम हो गया है…मम्मी बुला रही है….”
पंकज ने आवाज़ सुनकर जब अपनी आँखे खोली तो उसके सामने उसके सपनों की रानी उसकी प्यारी बेटी आराधना खड़ी थी, जो बड़े प्यार से उसे उठाने की कोशिश कर रही थी, पंकज ने भी धीरे से अपनी आँखे खोली, और इससे पहले कि आरू उसे कुछ और कह पाती, उसने झट से आराधना के दोनों हाथो को पकड़ा और अपने उपर गिराते हुए फटाक से उसके कोमल होटों को अपने होठों की कैद में ले लिया,
आराधना बहुत ही सेक्सी लग रही थी, उसने अभी एक मस्त झीना सा सलवार सूट पहना हुआ था, जिसमे वो बहुत ही हॉट और गदराई सी लग रही थी, उसका डार्क ग्रीन कलर की कुर्ती उसके बदन से पूरी तरह चिपकी हुई थी, और निचे उसने डार्क मेहरून कलर की चूड़ीदार सलवार पहनी हुई थी
आराधना की सलवार का कपडा सच में काफी पतला था, और उसकी सलवार उसकी टांगों से बेतहाशा चिपकी हुई थी, कुर्ते के ऊपर उसने मेहरून कलर की ही चुन्नी डाल रखी थी और सामने से अपने कुर्ते के गले और बोबो को अच्छी तरह से ढक रखा था, उसकी चुन्नी में से निकलते उसके गोरे चमकते हुए हाथ, एक हाथ में ब्रेसलेट, एक हाथ में वाच, उसके काले घने बाल, जिन्हें उसने क्लचेर से बाँध रखा था, उसके बालों में से निकली दो लटे जो उसके खूबसूरत फेस पर आ रही थी, उसकी काली बड़ी आँखें होंठो पर लिप ग्लॉस, गले में एक पतली सी चेन, उसके परफ्यूम और उसके बदन की कामुक खुशबु, ये सब एक साथ देखकर तो पंकज का दिल जैसे बाहर ही आने को हो गया, उसका लोडा एकदम से सख्त हो गया, और पंकज आरू को घूरता ही रहा, मानो उसके सामने कोई अजन्ता की मूरत ही हो
पंकज को इस तरह घूरता देख आराधना भी मुस्कुराने लगी और बोली “कहाँ खो गये पापा, मोम आपको लंच के लिए बुला रही है”
पंकज “यार आरू, आज तो तू सच में बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही है इस सूट में, जी करता है कि तुझे कच्चा ही खा जाऊ”
आराधना थोड़ी सरमाते हुए –“मुझे बाद में खा लीजियेगा पर पहले लंच खा लीजिये” आराधना हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली
पंकज -“मेरा लंच तो तू ही है” पंकज ने भी आरू की गदराई जांघों को दबाते हुए कहा
आराधना –“अच्छा जी, ये बात है” आरू ने भी मुस्कुराकर ही जवाब दिया
पंकज –“हम्मम्मम्म……..अच्छा आरू एक बात पूछता हूँ, पर गुस्सा मत करना”
आराधना –“अच्छा पूछिए” आरू को भी पता था कि कोई सीधा साधा सवाल तो नही पूछा जायेगा, पर वो भी अब मजे के मूड में थी, और अभी अभी वो प्रीती के साथ रंगरेलिया मना कर आ रही थी, पर उसका दिल तो अभी तक नही भरा था,
पंकज –“अच्छा ये बता ना कि, तूने अंदर क्या परहेन रखा है” पंकज ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा
आराधना –“चुप करो, आप तो बस हमेशा ये सब ही सोचते रहते हो” आराधना ने कहा, पर उसके मन में भी यही सब घूमता रहता था अब तो
पंकज “आरू, प्लीज़ बताओ ना, इस प्यारे सूट के नीचे क्या पहेन रखा है तुमने”
उसने मुस्कुराते हुए कहा -“क्या पापा, वही पहेन रखा है जो सब पहनते है, ब्रा और पेंटी”
पंकज –”कौन सी वाली “
आराधना –“क्या करोगे जानकार” आराधना कुटिल मुस्कान अपने चेहरे पर बिखरते हुए बोली
पंकज –“बता ना प्लीज़ आरू” पंकज एक छोटे बच्चे की तरह बेसब्रा हुआ जा रहा था
आराधना –“अच्छा बाबा बताती हूँ, ब्लैक कलर की ब्रा है नेट वाली और पिंक और ग्रे पेंटी”
पंकज -“वाह आरू, तब तो बड़ी ही मस्त लग रही होगी अंदर तू तो आज”
आराधना –“चुप करो पापा,आपको तो बस हमेशा यही सब सूझता है, वो तो इस कुर्ते का कपडा थोडा सा पतला है ना तो नार्मल ब्रा की स्ट्रेप्स दिखती है और सामने से ब्रा का शेप भी दिखता है, इसलिए नेट वाली ब्रा पहनी आज,क्यूंकि वो चिपकी हुई रहती है तो दिखती नहीं है”
आराधना का बस इतना कहना ही था कि पंकज ने उसे झट से पकड़ कर अपने उपर गिरा लिया और फिर बड़ी ही बेसब्री से किस करने लगा, वो छट पटाने और अपने हाथों से पंकज को अलग करने की नाकाम सी कोशिश करने लगी, पर पंकज अब कहाँ मानने वाला था, उसने पकड़ कर उसके दोनों हाथो को पीछे किया और लगातार आरू को किस करने लगा
थोड़ी देर बाद आराधना ने छट पटाना बंद कर दिया, पंकज ने भी अब उसके हाथ छोड़ दिए, अब आरू भी अपने पापा का साथ दे रही थी और वो भी जमकर किस करने लगी,उसने अपने दोनों हाथ पंकज के सर पर रखे और फिर अपने कोमल रसीले होठों को अपने पापा के होठो से सटा दिया
आरू को किस करते हुए ही पंकज धीरे धीरे चुन्नी पर से उसके खूबसूरत मम्मो को दबाने लगा, फिर उसने चुन्नी हटानी चाही पर 2 -3 बार कोशिश करने के बाद भी आराधना की चुन्नी हट नही पा रही थी, पंकज को इस तरह कोशिश करते देख आरू को अपने पापा पर बड़ा प्यार आया , उसने किस तोड़ते हुए कहा –
आराधना –“रुको पापा, पंकजने सेफ्टी पिन लगा रखी है, पहले पंकज उसे हटा लूँ” ये कहकर आराधना ने अपनी सेफ्टी पिन को हटाने लगी और पंकज उसकी गर्दन पर स्मूच करने लगा, फिर उसने सेफ्टी पिन हटा दी और उसकी चुन्नी साइड में गिर गयी, पंकज उसे वापस किस करने लगा, आराधना भी दोबारा पंकज को किस करने लगी, पंकज किस करते हुए उसके ग्रीन कुर्ते पर से उसके बोबे दबाने लगा, उन्हें सहलाने लगा
फिर पंकज ने आराधना का हाथ पकड़ के अपनी पेंट पर से ही अपने लंड पर रख दिया, आराधना अब अपनी आँखें बंद किये बस अपने पापा के होठ चूस रही थी और साथ ही अब धीरे धीरे अपने पापा के लंड को भी सहलाते जा रही थी, फिर पंकज आराधना की कमर पर हाथ फेरने लगा और अचानक उसने आराधना के कुरते को पीछे से उपर कर दिया और अपना एक हाथ उसके अंदर डाल कर उसकी पतली सी सलवार के उपर से ही उसकी भरी हुई गांड को मस्ती से दबाने और सहलाने लगा,
इस अचानक हमले के असर से आराधना ने पंकज के होठो को छोड़ दिया और अपनी आँखे बंद करके सिसकियाँ भरने लगी, फिर पंकज आराधना के गले पर स्मूच करने लगा और उसके कुर्ते पर से उनके बोबो पर किस करने लगा, अब पंकज उस की पतली सलवार पर से उसकी चूत पर भी हाथ फेर रहा था उसे सहला रहा था, आराधना की उत्तेजना अब चरम पर थी,
आराधना को पता था कि उसके पास ज्यादा वक्त नही है, इसलिए जो भी करना है जल्द से जल्द करना होगा, यही सोच कर आराधना ने झट से अपने पापा की पेंट के बटन खोलने शुरू कर दिए, और पलक झपकते ही पंकज की पेंट उसके शरीर से अलग होकर जमीन पर गिरी पड़ी थी
अब आराधना ने जैसे ही अपने पापा की अंडरवियर पर से उनके लंड के उभार को देखा, उसके पुरे बदन में एक मस्त सी टिस उठ गयी, उसने चड्डी के उपर से लंड को अपने हाथो में भरने की कोशिश की और उसे सहलाने लगी, पंकज भी उसकी सलवार पर से उसकी चूत को सहला रहा था, फिर पंकज ने अपने होंठो से उसके कुर्ते पर से उसके बोबो पर स्मूच करने लगा, और जैसे ही पंकज ने उसका कुर्ता उतारना चाहा, आराधना ने पंकज का हाथ रोक लिया और बोली -“नहीं पापा, चुदाई नही, मोम लंच के लिए बुला रही है, कभी भी अंदर आ सकती है”
पंकज –“ठीक है बेटी, पर मेरे इस लंड को अब मैं कैसे शांत करूं जो तेरे करीब आने से ही पूरा तन कर खड़ा हो गया है”
आराधना –“ये नटखट तो जब देखो खड़ा हो जाता है” आराधना ने अंडर वियर के उपर से ही अपने पापा के लंड को अपनी मुट्ठी में भरते हुए कहा
तभी अचानक पंकज ने नीचे से उनके कुर्ते के अंदर हाथ डाला और उसकी नेट वाली ब्रा पर से उसके कोमल कोमल गदराये बोबे दबाने लगा, आराधना के मुंह से अब सिसकियाँ छुट रही थी, फिर पंकज ने उसके कुर्ते को ऊपर किया और उसकी नेट वाली ब्रा पर से ही उसके मम्मो को चूमना शुरू कर दिया, और फिर पलक झपकते ही उसने आराधना की वो ब्रा भी खिसका कर उपर कर दी
आराधना को पता था कि इसमें बहुत रिस्क है पर फिर भी वो अपने पापा को अब रोक नही पा रही थी, आराधना के दोनों निप्पल अब तनकर खड़े हुए थे, पंकज ने झट से उसके एक बोबे को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दिया, अपने मम्मे पर अपने पापा के होठो के एहसास मात्र से ही आराधना की सिस्कारिया अब थोड़ी तेज़ हो गयी, उसके पुरे बदन में उत्तेजना की एक तेज़ लहर दोड गयी,
और उसने झट से अपने पापा के सर पर अपने हाथ रख दिए , वो अब पंकज के बालो में हाथ फेर रही थी, थोड़ी देर उसके बोबे चूसने के बाद पंकज ने आराधना को बेड पर पूरा लेटा दिया और खुद उसके उपर आ गया, अब पंकज धीरे धीरे आराधना को किस करते हुए उसकी सलवार का नाडा खोलने लगा, इधर आराधना ने भी अपने पापा की अंडर वियर अब पूरी निचे कर दी,
वाह क्या सिन था, एक बाप अपनी बेटी को लिटाकर उसे चुमते हुए उसके सलवार का नाडा खोल रहा है, और बेटी अपने बाप की चड्डी उतारकर उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ी हुई है,
पंकज का लंड हाथ में आते ही आराधना का पारा और गरम हो गया, सच पूछो तो अब तो उसे परवाह ही नही थी कि उसकी मोम अंदर आ सकती है, वो तो अब बस अपने पापा के साथ सारी हदों को पार कर देना चाहती थी
इधर अब पंकज ने भी आराधना की सलवार उतार दी और उसकी पेंटी पर से उसकी चूत को सहलाने लगा, आराधना की पेंटी उसकी चूत से निकले पानी से पूरी तरह गीली थी, पंकज समझ गया कि इस छोटे से एनकाउंटर से ही उसकी बेटी पूरी तरह गरम हो चुकी है, उसने धीरे से आरू की पेंटी के इलास्टिक को उपर उठाया और बड़े ही प्यार से अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर डालकर उसकी कोमल चूत के होठों को सहलाने लगा,
अपनी चूत पर अपने पापा के हाथ को महसूस कर तो आराधना की आग और भी ज्यादा भड़क उठी, उसका रोम रोम जैसे सेक्स की आग में ताप रहा था, उसके बदन ने अंगडाईयां लेनी शुरू कर दी, दोनों को अब बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति हो रही थी, और फिर तभी अचानक आराधना ने पंकज के साथ किस तोडा और झट से अपने घुटनों के बल बैठ गयी, और पलक झपकते ही अपने पापा के लंड को अपने मुंह में भर लिया
वो अपने होंठो और जीभ से पंकज के लंड को अच्छे से चूसने चाटने लगी, पंकज आराधना के बालो में अपने हाथ फेरने लगा,पंकज ने धीरे से आराधना के बालो में से उसका क्लेचर निकाल दिया जिससे आराधना के घने बाल अब खुल गये,पंकज ने तुरंत आरू के बालो को अपने हाथो से पकड़ा और फिर उन्हें उपर निचे करने लगा, आरू भी अपने बालो की ताल से ताल मिलाते हुए अपने मुंह में लंड को अंदर बाहर करने लगी,

