Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani – Update 29

Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani - Long Incest Story
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कुशल का लंड ऐसे होंठो के बीच था कि जो चाहे कितनी भी बार इस लंड को चूसे ये लंड बोर नही होने वाला था. और आज की रात तो जैसे ख़तम ही नही होने वाली थी क्यूंकी स्मृति भी फुल मूड मे थी और कुशल तो हमेशा ही एवरग्रीन रहा है.

स्मृति ऐसे ही उसका लंड चूसे जा रही थी और कुशल के मूँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गयी थी.

“उफफफफफ्फ़………….. ओूऊऊऊऊओ…आआहहह……….. “ कुशल ऐसी ही सिसकारियो के साथ अपने हाथ स्मृति की पीठ की तरफ बढ़ाता है. स्मृति आधे से ज़्यादा लंड अपने मूँह मे ले चुकी थी. कुशल अपना हाथ पीठ से और नीचे ले जाना चाह रहा था जहाँ स्मृति की गान्ड थी लेकिन वो ऐसा कर नही पाया.

कुशल की हालत और भी खराब होती जा रही थी. जवान खून था और पूरी रात बाकी थी.

“ आअहह……… मेडम आज तो दिखा दो अपने उस छेद को…….. जिसके लिए मैं दीवाना हू……….. उफफफफफफफ्फ़ मेरी जाआअन्न्*नणणन्….. ओह…….” कुशल की हालत बहुत ही ज़्यादा खराब हो रही थी.

कुशल की ये बात सुन कर स्मृति अपने होंठ उसके लंड से हटा लेती है और बेड पे लेटने की तैयारी करने लगती है. कुशल को ये उम्मीद थी कि आज तो उसका सपना पूरा होने जा रहा है लेकिन स्मृति अपनी दोनो टांगे फैलाती है और अपनी चूत के छेद को खोल कर कुशल को दिखाती है. ये भी एक बेहद एरॉटिक सीन था लेकिन कुशल तो जैसे स्मृति की गान्ड का दीवाना था.

“ आज तो कुच्छ स्पेशल हो जाए………” कुशल का इशारा शायद उसकी गान्ड की तरफ ही था.

“ स्पेशल ही तो है ये…………..” स्मृति फिर से अपनी चूत पर हाथ लगाते हुए बोलती है.

“ लेकिन आपने तो प्रॉमिस किया था कि मैं अपनी हर इच्छा पूरी कर सकता हू……” कुशल थोड़ा सा रूखे स्वर मे बोलता है.

“ लाइयन….. चिंता क्यू करता है….. मैने तो उस रात भी पूरा मौका दिया था लेकिन तू ही नीचे नही आया. लेकिन आज फिर से वोही से सिचुयेशन है पहले मेरी टर्न और फिर तेरा टर्न………..” स्मृति फिर से उसे खुला मौका देती है.

कुशल ये सुनते ही आगे बढ़ता है और झुक कर स्मृति की चूत पर एक स्ट्रॉंग किस करता है. ऐसे लगता है कि जैसे वो उसकी चूत खा जाने के मूड मे था. स्मृति उसकी इस मर्दानगी भरी स्टाइल से और भी इंप्रेस हो जाती है लेकिन फिर भी अपनी सिसकी को नही रोक पाती……

“ उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…….. लाइयन………… कोई फॉर्मॅलेटीस नही…….. प्लीज़ बुझा दे इसकी प्याआसस्स्स्स्सस्स………….” स्मृति शायद उसका लंड अंदर जल्दी लेना चाहती थी.

कुशल भी वेट ना करते हुए लंड का मूँह चूत पर टिकाता है और धकककककक से अंदर घुसा देता है. स्मृति को तो जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल जाती है.

“ उफफफफ्फ़……….ओह….आआहहह………आहहहहहः……………” स्मृति अपनी चूत मे लगते हुए झटको के साथ और भी मस्त हो जा रही थी. जैसे जैसे झटके लग रहे थे वैसे वैसे स्मृति अपनी टांगे और फैलाती जा रही थी.

जब वो इतना बड़ा लंड बाहर आ रहा था और जिस स्पीड के साथ अंदर जा रहा था तो सीन देखने लायक था. जैसे कोई समुद्रा मंथन से खास चीज निकलना चाह रहा हो लेकिन यहाँ पर तो कुशल सिर्फ़ स्मृति की चूत से पानी ही पानी निकाल रहा था जिसे खुद कुशल भी देख कर पागल हो रहा था.

“उईईईईईईई….आआहहह….. येस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…………..फकक्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क………………………” स्मृति अपनी पूरी लाइफ जी रही थी. ऐसे स्ट्रॉंग स्ट्रोक्स जो कि किसी भी लड़की को स्वर्ग की सैर करा सकता था.

बेड रूम से फूच फुच्च के साउंड आने शुरू हो गये थे. कुशल की आँखे भी बंद हो गयी थी और वो मस्त होकर धक्के लगा रहा था. उसके मूँह से भी सिसकारियाँ निकल रही थी.

ऐसा करीबन कुच्छ मिनिट चला और तभी पता नही स्मृति को क्या सूझा कि वो डिफरेंट पोज़िशन मे आने की कोशिश करने लगी. कुशल को शुरू मे समझ नही आया लेकिन फिर वो समझ गया कि आख़िर स्मृति क्या चाहती है. अब स्मृति ऐसी पोज़िशन मे थी कि उसकी गान्ड का छेद भी कुशल को क्लियर दिखाई दे रहा था और लेकिन लंड अभी भी चूत मे ही था. स्मृति की गान्ड कुशल की बहुत बड़ी फॅंटेसी थी तो अब वो छेद उसके सामने था तो जैसे कुशल और भी पवरफुल सिचुयेशन मे था. कस कस के धक्के लगाने शुरू कर दिए थे और वहीं दूसरी तरफ स्मृति भी अपनी गान्ड अच्छे से उछाल रही थी. स्मृति एक एक्सपीरियेन्स्ड लेडी थी, किस मूव से कैसे लंड अंदर जाएगा उसको सब पता था और इसका वो पूरा फ़ायदा उठा रही थी.

कुशल पागल हुए जा रहा था और वहीं स्मृति भी पूरी मस्ती मे थी.

“उफफफफ्फ़…..हीईीईई………….एसस्स्स्स्स्सस्स……….फुक्कककककककक…………आआहहह…….म्ह” और कुच्छ ही देर मे स्मृति की गान्ड कुशल के लंड पर कसति चली गयी और वो मंज़िल तक पहुँच गयी थी. और इन नो टाइम कुशल भी अपनी पिचकारी उगल देता है. क्या मस्त सेक्स हुआ दोनो के बीच, दोनो उसी बेड पर लेट गये. और स्मृति कुशल के बालो मे हाथ फिराने लगी………. शायद उसे पूरा अहसास था कि ये मीटिंग पूरी रात चलेगी

सिमरन अपनी पास्ट स्टोरी प्रीति को सुना रही थी जिसमे सिमरन के भाई ने सिमरन को साड़ी मे देखा और वो रूम से बाहर चला गया क्यूंकी उसका लंड खड़ा हो गया था.

“ फिर क्या हुआ दीदी……. आगे बताओ ना…..” प्रीति फिर से पूछती है.

“उस दिन मैं बहुत खुस थी, आख़िर लड़की होने का अहसास मुझे उस दिन ही हुआ था. ये भी अहसास हो गया था कि लड़की का मीनिंग क्या है. लड़की का मीनिंग बस घर की चार दीवारी मे रह कर बस काम करना नही है बल्कि लड़की उनका मन बहलाने के लिए बनी है जो घर के लिए काम करते है – फॉर मेन. उपर वाले का तहे दिल से शुक्रिया अदा करा उस दिन, कि उसने मुझे किसी लायक बनाया. मैं इस लायक थी कि किसी के लंड को खड़ा कर पाऊ, और यही तो लड़की की सबे बड़ी इज़्ज़त है. मैने सोच लिया था कि अपने भैया के दिल मे उतर कर रहूंगी और अपनी शराफ़त से भी नही हटूँगी. मुझे पता था कि भैया के पास अब उनकी गर्ल फ्रेंड कभी नही आने वाली क्यूंकी चुदाई हुई ही इतने भयंकर तरीके से थी. और मुझे ये भी पता था कि अब भैया के मूँह खून लग चुका है. वो कहीं ना कहीं भटकेंगे ज़रूर तो क्यू ना मैं उन्हे अपने कदमो मे ही झुका लू.”

“वाउ दीदी ग्रेट….. क्या जबरदस्त एनकाउंटर रहा होगा….. आगे बताओ कि क्या हुआ……….” प्रीति और भी मज़े लेते हुए बोलती है.

“ अगले एक दिन भैया का मूड काफ़ी अपसेट रहा, सिर्फ़ अपने गर्ल फ्रेंड मॅटर की वजह से… मैं चाहती थी कि उनका मूड फ्रेश करू……. तो उस दिन उसके रूम मे पहुँच गयी……… और बात करनी शुरू करी –

“हेलो भैया….. कैसे हो….. क्या सोच रहे हो इतनी गौर से……….” वो अपने बेड पर उल्टे लेटे हुए थे और मैने उनके पास बैठते हुए पुछा. वो मेरी आवाज़ सुन कर चोंक गये थे. वो एक मॉर्निंग थी तो मैने अच्छे से अपने आप को रेफ्रेश किया था. हल्का सा मेक अप भी किया था जोकि भैया को दिखाई नही दे सकता था, बस लिप्स थोड़े ग्लॉसी नज़र आ रहे थे. एक लूस सी स्लीवेलेस्स टी-शर्ट पहनी थी और बेलून पयज़ामा पहना था.

“ बस मूड ऐसे ही ठीक नही है……” भैया ने थोड़ा अपसेट मन से जवाब दिया.

“ ऐसा क्या हो गया भैया जो इतने उदास हो…… आ जाओ चेस खेलते है………” मैने अपने भैया का हाथ पकड़ कर उन्हे उठाते हुए कहा.

“ सिम्मी मेरा मूड कुच्छ भी खेलने का नही है….. तू जा यहाँ से….” उन्होने फिर से रूखे से सुर मे जवाब दिया.

“ चेस नही तो क्या चेस्ट से खेलने का मन कर रहा है……….” मैं अपने मन ही मन बड़बड़ाई

“ क्या कहा तूने……?”

“ मैने कहा कि प्लीज़ चलो ना……….”

“ नही मुझे ऐसे लगा कि तूने कुच्छ और कहा……………” मेरे भैया को थोडा शक था कि मैने कुच्छ और कहा.

“ अब ये सोचना छोड़ो और चलो मेरे साथ खेलने…….” मैं भी भी उनका हाथ पकड़े ज़िद कर रही थी.

“उन्होने इस बार अपना हाथ ऐसे खींचा जैसे मुझसे छुड़ाना चाह रहे हो लेकिन उनके हाथ के साथ मैं भी खींचती हुई चली गयी और धदमम्म्मममममम…….वही हुआ जिसका मुझे इंतेज़ार था. सीधा उनके सीने पर जाकर गिरी मैं……. किसी मर्द की छाती से मेरे अनटच बूब्स की पहली टक्कर थी वो. उफ्फ क्या बताऊ प्रीति कि बदन मे कैसी आग सी लग गयी थी लेकिन कुच्छ कर नही सकती थी. फ़ायदा इतना मिला कि भैया को भी अहसास हो गया की कुच्छ तो है मेरे सीने मे. उनकी आवाज़ नही निकली लेकिन उनका चेहरा बता रहा था कि मेरी उभरती जवानी को वो अपने पूरे मन से देख रहे है.”

“ डीडीिईईईईईई…… बस बताती जाओ……………” प्रीति अपने बूब्स अब खुद प्रेस करने लगी थी.

“ मैं धीरे से उठी…… मेरे भैया वापिस अपने होश मे आए और मुझे सॉरी बोलने लगे…… मुझे पता था कि इसमे उनकी कोई ग़लती नही तो मैने भी उन्हे सॉरी बोलने के लिए मना किया. उठ कर बहुत ही सावधानी से अपनी टीशर्ट को सही किया और दोनो हाथो को उपर करके अपने बालो को सही किया…. मेरा टारगेट अब उन्हे अपनी आर्म्पाइट पे आए थोड़े बालो को दिखाना था. उन्होने उन बालो को गौर से देखा लेकिन कुच्छ बोले नही. मैं फिर से उनके साइड मे बैठ गयी और फिर से एक कॉन्वर्सेशन स्टार्ट हुई और पहले शुरू करने वाले वो ही थे –

“ छोटी तुझे नही लगता कि तू बड़ी हो रही है………..”

“ आपको क्यूँ लग रहा है…………. ऐसा?” मैने बहुत ही शरमाते हुए कहा

“ नही बस ऐसे ही…. और बता…. स्कूल का क्या प्लान है…………”

“क्या प्लान होता…. अब तो कल जाना है….. ड्रेस धोने के लिए डाल दी है……..”

“ तू कब तक वो ड्रेस पहनती रहेगी……….. बाकी लड़कियो की तरह कपड़े क्यूँ नही पहनती है…….”

“ बाकी लड़कियो की तरह?उनमे और मेरे कपड़ो मे क्या फ़र्क है…….?” मैने भी अंजान बनते हुए कहा.

“ पागल आज की लाइफ मे तुझे थोड़ा मॉडर्न होना चाहिए…… देख आज कल की लड़किया स्कर्ट पहनती है और तू है कि पढ़ने लिखने के बावजूद इतने कपड़ो के तले दबे रहती है……..तुझे स्कर्ट पहन नी चाहिए और टीशर्ट……. ज़्यादा कपड़े पहन ने से तेरी हाइट कम रह जाएगी. समझ आ रहा है या नही?”

“भैया समझ तो आ रहा है लेकिन मेरे पास स्कर्ट नही है और मुझे पता भी नही कि मैं स्कर्ट मे कैसी लगूंगी…..?”

“पूरा स्कूल पागल हो जाएगा तुझे देख कर…………..” भैया के मूँह से ये बात एग्ज़ाइट्मेंट मे निकल गयी थी और ये सुनकर मैं शरमा गयी….

“ लेकिन मैं स्कर्ट लेने किसके साथ जाउ……………?” मैने नादान बनते हुए बोला

“ चल तो फिर तुझे शॉपिंग करा के आता हू…….. चल तैयार होकर आ जा मैं तेरा नीचे वेट करूँगा…….” एक ही दिन मे इतना सब हो रहा था तो यकीन नही हो रहा था. कल तक जो भाई घास भी नही डालता था, आज वो शॉपिंग करने ले जाने को तैयार था. यही होता है लड़की के हुश्न का जादू…..”

“फिर आप गयी शॉपिंग करने….?” प्रीति सिमरन से पूछती है.

“फिर शॉपिंग करने के लिए मैं तैयार हो गयी और आख़िर नीचे चली गयी, मेरे दिल मे काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट था कि पता नही आख़िर मेरे लिए क्या शॉपिंग होने जा रही है. जो कुच्छ भी हो लेकिन सबसे ज़्यादा खुश मे इस बात के लिए थी कि मेरा भाई मुझ पर ध्यान दे रहा था और यही हर लड़की चाहती है कि उसको इग्नोर ना किया जाए और उसको हमेशा लोगो की अटेन्षन मिले. अपने भाई के साथ बाइक पर बैठने का उस दिन अलग ही एक्सपीरियेन्स था, बाइक जितनी तेज़ी के साथ चल रही थी उतनी ही तेज़ी के साथ हम दोनो एक दूसरे के और करीब आते जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि जैसे लाइफ मे कोई भी टेन्षन नही है और सब कुच्छ बहुत अच्छा चल रहा है. जब लड़की ऐसा सोचती है तो उसके चेहरे पर और भी निखार आ जाता है और वैसे भी उस टाइम तो मैं एक पूरी टीन थी.”

“वाउ…… ग्रेट…… आगे बताओ………..” प्रीति का एग्ज़ाइट्मेंट भी कम नही हो रहा था.

“ फिर काफ़ी चलने के बाद हम एक माल मे पहुँचे…… मेरा कॉन्फिडेन्स इतना अच्छा नही था और माल मे बहुत घबरा कर चल रही थी मैं, पता नही क्यूँ एक अजीब सा डर लग रहा था. माल मे पता नही कितने सारे गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड के जोड़े बैठे थे. गर्ल्स ने बेहद टाइट टाइट क्लोदिंग पहनी हुई थी जिसे देख कर मुझे अपने भाई की एक्स गर्ल फ्रेंड की और भी याद आ रही थी और समझ भी आ रहा था कि जमाना आज कल उन्ही लड़कियो का है जिनमे अपनी बॉडी दिखाने का टॅलेंट है. नही तो खूबसूरती किसी भी काम की नही. खैर मेरे दिल मे अभी तक यही बात चल रही थी कि पता नही भैया आज मुझे कैसी शॉपिंग कराने जा रहे है. थोड़ी ही देर मे हम एक डिपार्ट्मेनल शोरुम मे घुस गये……. मुझे लगा कि भैया मेरी हेल्प करेंगे मेरी शॉपिंग मे क्यूंकी ये उन्ही का डिसिशन था कि मैं शॉपिंग करू…..” सिमरन बस बताती जा रही थी.

“ तो क्या उन्होने हेल्प नही की……..?” प्रीति क्वेस्चन मार्क वाली निगाहो से देखती है.

“सबसे पहले तो उन्होने पूरे शोरुम मे नज़रे फिरा कर देखी और फिर मेरे पास आकर बोले –

माइ ब्रदर- सिम्मी आज तेरी चाय्स देखता हू. तुझे एक मॉडर्न और टाइम के साथ चलने वाली लड़की बन ना है. ले ले जो मर्ज़ी लेना है.

मे – भैया सच मे मुझे कुच्छ आइडिया नही है. वैसे भी जैसे सूट सलवार मे पहनती हू तो वो तो मुझे यहाँ दिखाई भी नही दे रहे है……….

“और ये बात सच ही है कि मुझे आइडिया नही था कि मैं क्या लू….. मुझे उसे खुले आसमान मे ऐसे छोड़ दिया गया कि मुझे आइडिया लगाना मुश्किल था कि मैं क्या लू….. खैर फिर भैया आगे बोलते है….”

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा हा……… तुझे आइडिया नही है. अरे पगली तू कोई बच्ची थोड़े ही ना है. आज कल 80% शोरुम गर्ल्स के लिए होते है क्यूंकी उनके पास पहन ने के ऑप्षन ज़्यादा होते है. तेरे जैसी लड़की के लिए काउंटलेस ऑप्षन है पहन ने के लिए………..

“भैया बताते जा रहे थे और मैं सब सुन कर शरमा भी रही थी और खुश भी हो रही थी……. भैया खुल कर तो सब नही बोल सकते थे लेकिन मैं समझ रही थी कि वो बोलना चाहते थे कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की के पास तो बहुत सारे ऑप्षन्स है ट्राइ करने के लिए… लेकिन फिर भी मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा था तो मैने फिर से भैया से पुछा –

मे- भैया प्लीज़….. मैं इतनी बड़ी नही हुई हू. आप ही ने तो शॉपिंग के लिए कहा था तो मैं आ गयी अब आप ही हेल्प करिए मेरी. नही तो सच मे मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा है………

“भैया जैसे मेरी उस रिक्वेस्ट को सुन ने के लिए ही खड़े थे और मेरे मूँह से ऐसी बात सुनते ही वो शोरुम मे आ आगे की तरफ बढ़ते है. मैं उनके पीछे पीछे चल रही थी…. वो एक स्कर्ट सेक्षन मे पहुँचे…… प्रीति तुझे क्या बताऊ कि जो उन्होने स्कर्ट उठाई उसे देख कर मेरा दिल कैसे धक धक करने लगा था. वो स्कर्ट बहुत ही छोटी थी………..”

“वाउ….. युवर ब्रो ईज़ सो रोमॅंटिक…. वो आपको छोटे कपड़ो मे देखना चाहते थे…….. एनीवे फिर क्या हुआ……………” प्रीति भी मुस्कुराते हुए कहती है.

“ वो स्कर्ट उठा कर मेरी तरफ टर्न हुए…… और मुझसे बोले –

माइ ब्रदर – सिम्मी ट्राइ दिस……….

मे- भैया आर यू सीरीयस……….. ये बहुत ही छोटी है

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा हा हा…….

मे – आप हंस क्यू रहे है…… क्या मैने कोई जोक सुनाया है…….

माइ ब्रदर – मैं हंस….. इसलिए रहा हू कि पता नही मेरी बहन बड़ी कब होगी……… मेरी ऐसी भी दोस्त है जिनके लिए ये स्कर्ट भी लोंग है….. और मेरी बहन कहती है कि ये छोटी है…. हा हा हा हा हा

मे- वाह वाह……… ये किसी के लिए लोंग स्कर्ट भी है. ये बहाने ना बनाइए………

माइ ब्रदर – देख सिम्मी, ये मेरी शॉप नही है. यहाँ पर वोही रखा है जो यहाँ बिकता है. और देख स्कर्ट सेक्षन मे सबसे पहले यही स्कर्ट रखी है क्यूंकी लड़कियो की पहली डिमॅंड ही यही है…………. चल अब बाते बाद मे…. इसे पकड़ और फिटिंग रूम मे इसे ट्राइ कर के आ……..

मे- यू श्योर भैया?????

माइ ब्रदर – अरे मेरी मा और कैसे बताऊ कि हाँ श्योर. अब जल्दी जा और ट्राइ करके बाहर आ………..

“ मैने उस टाइम तक अपने पाँव किसी को भी नही दिखने दिए थे. घर मे और या स्कूल मे, हमेशा धकि रहती थी. अब हाथ मे एक छोटी सी स्कर्ट को पकड़ के चलना बड़ा भारी सा लग रहा था.” सिमरन सीरीयस भाव बनाते हुए बोलती है.

“ तो क्या आपने वो ट्राइ करी या नही करी……..” प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.

“ आख़िर मैं फिटिंग रूम मे घुस ही गयी….. बॉटम उतारा और स्कर्ट ट्राइ की……. प्रीति सच बता रही हू कि इतनी शरम आई कि बता नही सकती…….. वो मिनी स्कर्ट थी. बचपन से कोई लड़की पहने तो बात नही लेकिन जब जवानी मे कोई लड़की पहली बार इसे पहनती है तो बड़ा अजीब लगता है. मेरी गोरी और टाइट जांघे पूरी विज़िबल हो गयी थी….. स्कर्ट इतनी छोटी थी कि अगर थोड़ी भी हवा नीचे चली जाए तो बस सब कुच्छ दर्शन हो जाए…….. स्कर्ट पहन ने के 5 मिनिट बाद तक भी मैं सोचती रही कि बाहर जाउ या नही… कन्फ्यूज़ थी ही कि इतने मे फिटिंग रूम का डोर नॉक हो गया…….. मैं समझ गयी कि ये भैया ही है………. बहुत ही दबे पाँवो से…. बढ़ी हुई धड़कनो के साथ मैने फिटिंग रूम का डोर खोला और धीरे धीरे गेट के पीछे से मैं सामने आई………. मेरे भैया की निगाहे मुझ पर पड़ी…….. उपर से नीचे तक उनकी निगाहे पहुँची………… मेरी थाइस पर रूकी और फिर और भी नीचे चली गयी….. मैने क्लियर देखा कि उनका मूँह खुला का खुला रह गया था और और गले के अंदर अटका हुआ सब कुच्छ अंदर ले जा रहे थे…….”

“ तो आख़िर गिरा ही दी बिजली……… ग्रेट…………” प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.

“ कुच्छ सेकेंड्स तक भैया के मूँह से कोई शब्द नही निकले………… मुझे खुद भी टेन्षन हो रही थी कि कहीं उस स्कर्ट मे मैं जोकर तो नही लग रही थी… तभी भैया मे चुप्पी तोड़ी ……..

माइ ब्रदर – ओह माइ गॉड……. यू आर सो सो हॉट…………………

“ये बात बोलते हुए भैया की आइज़ मेरी थाइस पर थी…… और चेहरा बिल्कुल लाल पड़ चुका था…. वो आगे बोलते है………

माइ ब्रदर – यू आर नोट आ चाइल्ड अनीमोर………. इतनी गजब दिख सकती है कि मुझे आइडिया भी नही था…… ज़रा पीछे घूम कर दिखा……….

“अपने भाई के कहने पर मैं पीछे घूम गयी………… पीछे का हिस्सा तो मैं भी नही देखा था लेकिन मुझे इतना अहसास ज़रूर हो गया था कि पीछे से मेरे हिप्स पर वो स्कर्ट उठी हुई है………….. तभी मुझे कुच्छ गिरने की आवाज़ आती है…. मैं पीछे मूड कर देखती हू तो भैया नीचे झुक कर कुच्छ उठा रहे है…… मैने कोई रिएक्ट नही किया लेकिन जैसे ही मुझे याद आया कि आज मैने क्या पहना हुआ है तो ये सोचते ही मैं उच्छल पड़ी और फिटिंग रूम के अंदर की साइड हो गयी……”

माइ ब्रदर – वो… वो…. मोबाइल गिर गया था……..

“ अपने भाई की इस बात पर मुझे हँसी आ गयी लेकिन मुझे ये भी डर था कि आज तो मेरी पैंटी देख ही ली शायद भैया ने……… लेकिन मैं और कर भी क्या सकती थी……….”

“ हाई दीदी…….उस स्कर्ट को थोड़ा सा और उठा देती तो क्या हो जाता….. आपने तो भैया को तरसा ही दिया………….” प्रीति भी खुलती जा रही थी…. उसे सिमरन की ये स्टोरी काफ़ी एरॉटिक लग रही थी.

“ तू बाते ना बना और मेरी बात सुन……. मेरे भैया ने मुझसे वहीं रुकने के लिए बोला और कहा कि वो एक टॉप लेकर आते जो उस टीशर्ट के साथ अच्छा लगेगा……… मैने भी यही सोचा कि जब एक बात स्कर्ट पहन ही ली तो टॉप से क्या डरना…. मैने उन्हे हाँ बोल दिया और वो मेरे लिए टॉप लेने चले गये…… मैं बहुत हॅपी थी……. मिरर मे चारो और घूम कर देख रही थी…. जैसे ही मैं घूमती तो मेरी स्कर्ट हवा मे उड़ती और मेरी रेड पैंटी खुद भी मुझे दिख जाती…….” सिमरन रोमॅंटिक अंदाज़ मे सारी बात बताती जा रही थी.

“ हाई मैं मर जावा दीदी…. पैंट पहनी भी तो रेड……… अपने भैया को पूरा फ्लॅट करने की तैयारी कर रखी थी आपने तो………….. खैर आगे बताइए आप……….” प्रीति हर बार की तरह इस बार भी बहुत एग्ज़ाइटेड थी.

“ मैं खुश हो ही रही थी कि इतने मे भैया फिर एक टॉप लेकर आए…………. टॉप को देखते ही मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी. वो एक छोटा सा स्लीवेलेस्स टॉप था जोकि लेंग्थ मे काफ़ी चौड़ा था. गला इतना डीप कि क्या बताऊ……….. मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे भैया दुश्मनी निभा रहे हो………….

माइ ब्रदर – ले सिम्मी इसे ट्राइ कर…………..

मे- ये कैसा टॉप है……………किसी बच्चे का तो नही है…………….

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा…. तू भी काफ़ी नॉटी है. अगर देखना चाहती है तो वहाँ देख उस मॅनिकिन पर यही टॉप है……

“भैया के इशारा करते ही मैने फिटिंग रूम से मूँह बाहर निकाला और उस डाइरेक्षन मे देखा जहाँ भैया ने इशारा किया था. मॅनिकिन को देखते ही मुझे चक्कर आ गये…. वो टॉप बस मॅनिकिन के बूब्स से बस थोड़ा ही नीचे था, यानी कि आधा पेट नंगा ही रहता उसमे….. और यही नही…… इतना डीप नेक था कि मॅनिकिन के बूब्स जैसे बाहर आ जाने को तैयार थे…. मैं फिर से कन्फ्यूज़ थी कि क्या करू….इतने मे मेरे भैया ने फिर से मुझसे बात करनी शुरू की…….

माइ ब्रदर – कम ऑन सिम्मी……. इतना टाइम क्यू लगा रही हो……

मे- भैया ये टॉप तो……. कैसे….यानी……… ये तो……….

माइ ब्रदर – अरे मेरी प्यारी बहना….. ये मैं तुझे लड़को के टॉप थोड़े ही दे रहा हू…. तूने देखा ना कि मॅनिकिन पर भी यही टॉप है यानी कि यही फॅशन है…. अब टेन्षन ना ले और जल्दी जाकर ट्राइ करके आ…………….

मेरे भैया ने इतना बोलते ही मुझे टॉप दे दिया और फिटिंग रूम का डोर बंद कर दिया……… बहुत ही अजीब मन से वो टॉप मैने पहना………….. बॉडी के किसी भी पार्ट को वो टॉप सही से ढकने मे पासिबल नही था…….. मेरा पेट, शोल्डर्स, ब्रा, बूब्स सब कुच्छ थोड़ा थोड़ा विज़िबल था………….. शॉर्ट स्कर्ट और उपर से इतना शॉर्ट टॉप….. अब तो लगभग मे आधी नंगी थी…… मिरर मे अपने आप को देखा तो पेट क्लियर दिखाई दे रहा था……… पेट की नाभि भी क्लियर दिखाई दे रही थी….. यही नही मेरी रेड ब्रा भी क्लियर दिख रही थी. मुझे यकीन था कि भैया मुझे देखे बिना नही मानेंगे…. तो मैने उस टॉप मे अपनी ब्रा को छुपाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन नाकाम रही… इससे पहले की कुच्छ और सोचती कि डोर फिर से नॉक हुआ…… मैं समझ गयी कि टाइम ओवर…….” सिमरन के चेहरे के भाव अभी भी बता रहे थे कि उस दौरान क्या सिचुयेशन रही होगी……

“ क्या बात है दीदी………. आप को तो सूपर सेक्सी स्लट बनाने पे तुले हुए थे भैया……………” खैर फिर क्या हुआ….

“ मैने धीरे से दरवाजा खोला…………. पहले मेरी आइज़, फिर मेरे लिप्स, फिर शोल्डर्स, फिर ब्रा, ब्रा के अंदर बूब्स, बूब्स के नीचे सपाट पेट, पेट की नाभि, नाभि के नीचे स्कर्ट, स्कर्ट के नीचे नंगी थाइस…….. मेरे भाई ने अपनी आँखो से सब एक्सरे कर दिया……. और मैं शरम से गढ़ी जा रही थी………….”

सिमरन आगे बताती है…… “ मेरे भैया आगे बढ़ते है………… मेरे बालो मे लगे क्लट्चर को हटाते है… मैं एक स्टॅच्यू बन कर सब होने दे रही थी… बालो को खोलने के बाद धीरे धीरे शोल्डर्स पर लाते है……… उसके बाद जो उन्होने बोला उसे सुन कर तो मेरे पाँव काँप गये…………”

“ उफफफफफफफ्फ़…… ऐसा क्या बोल दिया आपके जालिम भाई ने……. जल्दी बताओ ना…………….” प्रीति एग्ज़ाइटेड होते हुए बोलती है.

“ उन्होने मेरे टॉप की स्ट्राइप को पकड़ कर सीधा करना शुरू किया…… उनकी फिंगर्स मेरे बूब्स पर भी अंजाने मे टच हो रही थी……… पूरी बॉडी काँप रही थी मेरी…. वो धीरे से मेरे कानो के पास आए बोले –

माइ ब्रदर – फिटिंग अच्छी है टॉप की…….. लेकिन इस टॉप को बिना ब्रा के पहना जाता है…………

“मेरी हालत ऐसी थी कि क्या बताऊ…….. एक जवान लड़के से अपनी ब्रा के बारे मे ऐसी बात सुन कर मैं हैरान भी थी और शरम भी आ रही थी. दिल मे 10 सवाल आ रहे थे कि बिना ब्रा के ये टॉप कैसे पहना जाएगा और पहना भी जाएगा तो बूब्स तो जैसे बाहर ही लटके रहेंगे…………… मैं सोच ही रही थी कि भैया ने अपने बोल्ड अंदाज़ मे फिर से बोलना शुरू किया……….”

माइ ब्रदर – “ सिम्मी……… थोड़ा बहुत चलता है…………….. तू टेन्षन ना ले……. सच मे तू सूपर लग रही है. अब जल्दी से इन्हे चेंज कर ले….ये आउटफिट तो फिक्स है….. अब तेरे लिए जीन्स देख लेते है…………..”

“ बचपन मे डेली लड़ाई झगड़े होते थे….. पता नही मैं कितनी कोशिश करती थी कि डेली मेरे लिए कपड़े लिए जाए…. लेकिन मेरा भाई सबसे पहले मेरा दुश्मन बन कर खड़ा होता था…. और आज मेरा भाई ही था जो मेरे जवानी मे कदम रखते ही पता नही मुझे क्या क्या दिलाने को तैयार हो रहा था…. यही कीमत होती है हर लड़की की जवानी की……. खैर मे फिटिंग रूम मे टॉप और स्कर्ट उतारने लगी और दूसरी तरफ भैया जीन्स लेने के लिए चले गये….”

“ मॉल से खरीददारी करने के बाद हम घर की तरफ निकल लिए . मॉल से निकलते ही बारिस शुरू हो गई . बारिश से बचने की कोशिश करते भी जब हम गाड़ी तक पहुचे तो हम दोनो पूरे भीग चुके थे गीले कपड़ो मे मुझे ठंड लग रही थी , भीगने से मेरे कपड़े बदन से चिपक गए थे. घर आ कर भैया मेरे शरीर के उभारों को आनंद ले कर देखने लगा. मैं शरमा गई. मेरे मुंह से निकल गया..” भैया, मत देखो न ऐसे…मुझे शर्म आती है…” भैया ने शरारत से आँख मार दी… और मैं शरमा कर मेरे रूम में अन्दर भाग गई.

हम दोनों नहा कर फ्रेश हो कर भैया के कमरे में बैठ गए. भैया अलमारी से व्हिस्की की बोतल निकाल लाया.

“यार ठण्ड लग रही है…एक पैग पी लेता हूँ…तुम भी थोडी सी ले लो..”

“नहीं..नहीं…” मैं उसकी हरकते नोट कर रही थी. मुझे लग रहा था आज भैया मूड में हैं. मैंने सोचा आज अच्छा मौका है, पटाने का…

उसने धीरे धीरे पीना चालू कर दिया. कह रहा था – “सिमरन तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है क्या…”

“हाँ…था..अब नहीं है..”

“अच्छा, भैया तुम्हारे साथ कुछ करता था..”

” धत्त…भैया… मुझे शर्म आती है…”

” मत बताओ…लो थोड़ा सा पी लो…अच्छा लगेगा…”

मैंने सोचा अच्छा मौका है… भैया समझेगा मैं नशे में हूँ… और नशे में ऐसा कर रही हूँ…

“अच्छा भैया…थोड़ा ही देना..”

“वाह ये हुई न बात…ये लो ” उसने एक पैग बना कर दिया.

मैंने पीने का नाटक किया. थोडी सी ड्रिंक पास में गिरा दी..और गिलास मुंह से लगा लिया..

कुछ ही देर में भैया को व्हिस्की चढने लगी. बोला- “यार सिमरन तू तो एकदम मस्त है…”

भैया कुछ आगे बोलता उसके पहले ही मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी… मैंने भी नशे में होने का नाटक किया..

“मस्त आप है..भैया…”

“नहीं…मस्त तो तू है… जरा देख अपने को..”

“क्या देखूं…मुझे तो तुम ही दिखाई दे रहे हो…”

अब भैया मस्ती में आ गया था… उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया… मैं जान करके उसकी गोदी में गिर गई. उसने मुझे बाँहों में कस लिया…

मैंने कहा- “भैया…ये नीचे क्या लग रहा है…”.

मैं थोड़ा कसमसाई… पर उसका लंड था की घुसता ही जा रहा था. मैं थोड़ा उठ गई… मैंने जान कर के ऐसे उठी की अपनी चूतड की गोल गोल फ़ांकें उसके सामने हो गई…

उसने मेरे दोनों चूतडों को दबा दिया…

मैं जैसे नशे में बोली- “हाय रे..भैया मर गई…क्या कर रहे हो…”

भैया ने कहा – ” सिमरन… मज़ा आया न..अब तुम बिस्तर पर लेट जाओ…”

“नहीं..नहीं…तुम कुछ गड़बड़ करोगे…”

ज्यादा नहीं…बस थोड़ा सा…”

“अच्छा.. ठीक है..”

मेरा मन तो खुशी के मरे उछल रहा था…मैं धीरे से जा कर बिस्तर पर लेट गई.

“ क्या बात है दीदी………. आप को तो चोदने पे तुले हुए थे भैया……………” खैर फिर क्या हुआ….

सिमरन आगे बताती है…… “ भैया ने कहा – “अब आँखे बंद कर लो…”.

“हटो भैया…जरूर तुम… देखो छेड़ना मत…”मैंने आँखें बंद कर ली… भैया पलंग पर पास आकर बैठ गए…और उनका हाथ हौले हौले से मेरे बदन को गुदगुदाने लगा. भैया मेरी दोनों टांगों को धीरे धीरे सहलाने लगे…और ऊपर की तरफ़ आने लगे. मेरे नितम्बों पर उनका हाथ घूमने लगा… मुझे सनसनी सी होने लगी… भैया जान करके अपना हाथ मेरी चूत पर भी टकरा देता था… तब जोर का करंट जैसा लग जाता था…

फिर धीरे धीरे उसने मेरी चूत पर कब्जा कर लिया… मैं सी सी कर सिस्कारियां भरने लगी. अब उसका हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था… एक हाथ चूत पर…और एक हाथ बूब्स पर… “सिमरन…कैसा लग रहा है…”

मेरे मुंह से अचानक निकल गया – ” भैया…तुम्हारे हाथो में तो कमाल है… अब कुछ कर दो न… कुछ भी करो..”

भैया ने मेरे बूब्स भींचने चालू कर दिए…दूसरा हाथ मेरी चूत की गहराई नापने लगा…उसकी बेताबी बढाने के लिए मैंने कहा – “भैया… बस अब नहीं… दूर हटो…”

मैं बिस्तर से नीचे उतर गई. भैया भी मेरे पीछे आ गया था…उसने पीछे से हाथ डाल कर मेरे बूब्स पकड़ लिए… “सिमरन… प्लीज़ करने दो… तुम्हे देख कर मेरा मन कब से कर रहा था की बस एक बार तुम्हे दबा दूँ. तुम्हारे ये उभार…गोलाईयां देख कर मुझसे रहा नहीं जाता है अब…”

भैया का लंड मेरे चूतड़ों में घुसा जा रहा था. मुझे उसके लंड का साइज़ तक चूतड़ों में महसूस हो रहा था.

मैंने मुस्करा कर भैया की तरफ़ देखा… और कहा ” पहले अपना ये मेरे हाथ में दो..”

“क्या…हाथ में क्या दूँ ?”

“भैया… अपना मोटा सारा लंड…”

लंड का नाम सुनते ही भैया तो जैसे पागल हो उठा.” मेरा लंड… वऊऊ… अरे पकड़ लो न… पूरा लंड तुम्हारा ही है

“ तो आख़िर गिरा ही दी बिजली……… ग्रेट…………” प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.

मेरी तमन्ना पूरी होने लगी थी. मेरा मन आनंद से भर उठा. मुझे लगा अब चुदाई में ज्यादा देर नहीं है… मैंने नशे में होने का नाटक करते हुए कहा – “हाय रे भैया…मत करो न…मुझे गुदगुदी होती है… देखो न तुम्हारा नीचे का डंडा…मेरी गांड में लग रहा है…”उसका लंड नीचे से गांड में घुसने के लिए जोर मार रहा था. उसके मोटे लंड का स्पर्श मुझे पूरा महसूस हो रहा था. मैंने अपने आप को उसके हवाले करते हुए कहा- “दूर हटो न…भैया… तुम्हारा लंड तो गांड में घुसा जा रहा है..”.

लंड और गांड का नाम सुनते ही भैया बेकाबू हो गया और जोश में भर कर बोला – “सिमरन..तुम्हारी गांड ही इतनी प्यारी है..की उसे देखते ही लंड को घुसा देने का मन करता है…”. भैया ने भी खुली भाषा का इस्तेमाल किया… देसी भाषा सुनते ही मैं तरंग में डूब गई.

अब उसने और कास के पकड़ लिया था. मेरे बूब्स मसलने लगा, चुन्चियों को खीचने लगा… और ऊपर से कमर हिला हिला कर लंड को गांड की दरारों में मारने लगा…

“भैया…बस भी करो…कोई आ जाएगा न…”

“सिमरन…कोई नहीं आएगा… “. उसने अपना पजामा उतार दिया और कहा…”देख ये कितना टन्ना रहा है..” फिर उसने अपना कुरता भी उतार दिया और पूरा नंगा हो गया…

मैंने कहा – “भैया…ये क्या करते हो… मुझे शर्म आ रही है…”

उसने मेरी एक नहीं सुनी. और मुझे उठा लिया…और बिस्तर पर प्यार से लेटा दिया. उसका लंड कड़क हो गया था. बहुत ही टन्ना कर फुफकार रहा था…

मेरा पजामा और कुरता खींच कर उतार दिया.मैं तो यही चाह रही थी. कहा – “अरे क्या कर रहे हो… मैं तो नंगी हो जाऊँगी न…”

बोला – “नंगे बदन आपस में रगड़ खायेंगे तो मज़ा भी तो आएगा “उसने मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया. मेरी चूत भी गीली हो गई थी. मैं बहुत खुश थी कि अब मैं चुद जाऊँगी. मैंने अपनी टांगे फैला दी और भैया को अपने ऊपर चढ़ने का न्योता दिया.

भैया मुस्करा कर पास आया और मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गया. उसने मेरी चूत सहलाई और चेहरा पास लाकर चूत को प्यार किया. मेरे चूत के दाने को जीभ से घुमा कर चाटना शुरू कर दिया. मैं झनझना उठी… मुंह से आह निकल गई. अब भैया मेरी चूत चाटने लगा. उसके हाथों ने मेरे बूब्स को मसलना चालू कर दिया. मुझे नशा सा आने लगा. कहने लगी – ” मज़ा आ रहा है…भैया…आ ह…हाय रे…और चूसो…निकाल दो मेरा पानी…आह्ह्ह्ह…”

“ तो दीदी आपकी चुदाई होने वाली थी……..” प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.

“ अरे कहाँ भैया तो पहले गान्ड मारना चाहता था ” सिमरन हँसते हुए कहती है

“ तो क्या दीदी आपकी चुदाई नही गान्ड मरने वाली थी……..” प्रीति जानने के लिए मरी जा रही थी.

सिमरन आगे बताती है—भैया ने मेरी टांगे और ऊपर कर दी अब मेरी गांड उसके सामने थी. टांगे थोडी और फ़ैलाकर उसने अपना मुह मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और जीभ निकर कर छेद को चाटने लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. उसने अपनी जीभ मेरी गांड के छेद में घुसा दी. मैं आनंद के मारे मैंने आंखे बंद कर ली. मैं समझ गई थी कि भैया मेरी गांड मारने कि तय्यारी कर रहा है. भैया ने कहा – “तुमने तो पहले से ही गांड में चिकनाई लगा रखी है ”

“हाँ भैया…मुझे आज लग रहा था कि तुम आज कुछ न कुछ ऐसा ही करने वाले हो…इसलिए मैंने तो पूरी तय्यारी कर ली थी… आह भैया… मज़ा आ रहा है…और करो…मैंने खुशबू वाली क्रीम लगाई है… आह रे…पूरी जीभ अन्दर डाल दो…”

भैया उठा और तकिया मेरी कमर के नीचे रख दिया. मेरी गांड अब थोडी ऊपर हो गई थी… उसने अपना लंड छेद पर रख दिया…

“सिमरन… मेरी प्यारी सिमरन… गांड मराने को तैयार हो जाओ…”

“हाँ मेरे राजा… घुसा दो अन्दर… मार लो गांड मेरी…”… तो लो मेरी जान… ” उसके लंड की सुपारी गांड में घुस गई… मेरी गांड की चुदाई शुरू हो गई थी… मैं मन ही मन झूम उठी…

“..हाय… घुस गया रे… राजा…लगाओ…जोर लगाओ भैया…”

” येस…येस… ये लो… आह… आया…आह…”

भैया का लंड अन्दर घुसा जा रहा था…मुझे अन्दर जाता हुआ महसूस हो रहा था…फिर उसने बाहर निकाला और जोर लगा कर एक ही झटके में पूरा ही घुसेड दिया…

“हाय भैया… मज़ा आ गया… धक्के लगाओ…हाँ…हाँ… थोड़ा जोर से… और जोर से…”

“मेरी जान… तुम्हारी गांड तो बिल्कुल मक्खन मलाई है… इतनी चिकनी कि बहुत मज़ा आ रहा है… देखो लंड कैसे फटाफट चल रहा है…”

गांड में लगाई हुयी चिकने से दर्द बिल्कुल नहीं हो रहा था. और अब तो मीठा मीठा मज़ा भी आ रहा था. मुझे लग रहा था भैया लम्बी रेस का घोड़ा है… भैया जोर जोर से धक्के मारने लगा…मैं तकिये के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी. पर उसके धक्को का पूरा मज़ा ले रही थी…

अचानक भैया रुक गया और धीरे से अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया. मुझे छेद के अंदर ठंडी सी हवा लगी…जैसे कुछ खाली हो गया हो… उसने नीचे से तकिया हटा दिया.

अब भैया मेरे ऊपर आकर धीरे से लेट गया और अपना बदन का पूरा भर मेरे पर डाल दिया. मेरे होटों को अपने होटों में दबा लिया… और चूसने लगा… उधर नीचे भी लंड अपना रास्ता दूंढ रहा था. मैं भी कसमसा कर लंड को निशाने पर लेने की कोशिश कर रही थी. मेरी चूत पानी से चिकनी हो गई थी. आखिर लंड ने रास्ता दूंढ ही लिया. उसके लंड की मोटी सुपारी मेरी चूत में सरक गई. मेरी आह निकाल गई.. मैंने नीचे से जोर लगाया तो लंड और अन्दर सरक गया. मैं तड़प गई. कहा – ” भैया…आह…धक्का मरो ना… क्या कर रहे हो…हाय रे…चोदना शुरू करो ना..”

भैया ने अपना बॉडी अपनी दोनों कोहनियों पर उठा लिया. मेरा बदन अब फ्री हो गया था. उसने लंड को बाहर खींचा और जोर से अन्दर धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड भीतर तक बैठ गया. मेरे मुंह से चीख निकल गई. चूत गीली होने से धक्के मारने पर फच फच की आवाजें गूंजने लगी…

” राजा और जोर से…लगाओ…हाय रे…पूरा घुसा दो…जड़ तक… घुसेड दो… हाँ…हाँ… चोद दो..राजा…जोर से.. चोद दो…”

“हाँ मेरी रानी… तुम्हे देख कर ये लंड कब से तड़प रहा था… चोदूंगा रे… कस के चोदूंगा… ले… ले…और ले… फाड़ ही दूँगा..आज तो…”

“आह रे.. मेरे भैया…सुच में..फाड़ मेरी चूत…लगा..जोर से…दे…दे…जोर दे दे..हाय…सी..सी…सी…चुद गई रे… मेरी माँ…”

“हाँ..हाँ… मेरी जान…आज तो फाड़ डालूँगा…तेरी चूत को…ये ले…पूरा लंड..ले..ले..ये ले..और ले… मेरी जान… क्या चीज़ हो तुम…”

उसके धक्के तेज होने लगे लगे. फच फच की आवाजे भी तेज होने लगी. मैं भी नीचे से चूत उछाल उछाल कर जोर से चुदवा रही थी. मेरी कमर भी तेजी के साथ चल रही थी. मुझे बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा था. मेरी सिसकियाँ भी बढ़ने लगी… मेरे मुंह से अपने आप निकलता जा रहा था – “मेरी चूचियां मसल डालो भैया… हाँ…जरा जोर से मसलो… मज़ा आ रहा है… हाय…मसलो डालो… झटके दे दे..के चोदो राजा..हाँ..हा…ऐसे ही…चोद डालो मेरे राजा…”

मेरी सिस्कारियां बढती जा रही थी. मेरे चूतड अब तो अपने आप ही नीचे से उछल उछल कर उसके लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे. भैया के धक्के भी जोरदार पड़ रहे थे… उसके मुंह से सिस्करिआं तेज होने लगी… अचानक ही उसके मुंह से निकला – “सिमरन… सिमरन… मैं तो गया… हाय..मैं गया…मुझे कस के पकड़ ले ना…अरे..रे..रे..गया…हा आया… हा आया. ”

मैं भैया से जोर से चिपक गई मेरा भी निकलने ही वाला था… भैया अपना लंड जोर से चूत में दबाने लगा ने…और मैं… मैंने अपने दोनों टंगे ऊँची करके चूत को लंड पर गडा दिया… और पूरा जोर लंड पर लगा दिया…

ऊऊईई ए…हाय राम…मर गई ए… पानी निकल गया या…अरे…निकला रे…हाय…चोद दे…चोद दे..हाय रे आह…आह…आआह्ह्… गई ..गऽऽई…अआः…चुद गई…चुद गई…आह…आःह्छ ” सिसकारी भर कर मैंने पानी छोड़ दिया… उधर भैया ने अपना लंड निकला और मेरे बूब्स पर अपना लावा उगलने लगा… रुक रुक कर उसका लंड रस उछाल रहा था…

मैंने तुंरत उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. और उसका चिकना चिकना रस चाटने लगी. लंड को पूरा साफ़ करके मैं आराम से लेट गई. भैया भी मेरी बगल में लेट गया… भैया हाँफ रहा था. मैं करवट लेकर उस से लिपट गई… हम वैसे ही नंगे पड़े रहें और हम दोनों कब सो गए हमें पता भी नहीं चला…

“वाउ….. युवर ब्रो ईज़ सो रोमॅंटिक…. दीदी आपने तो सिक्शर मार दिया एनीवे फिर क्या हुआ……………” प्रीति भी मुस्कुराते हुए कहती है.

“उस दिन मैं बहुत खुस थी, आख़िर लड़की होने का अहसास मुझे उस दिन ही हुआ था. ये भी अहसास हो गया था कि लड़की का मीनिंग क्या है. लड़की का मीनिंग बस घर की चार दीवारी मे रह कर बस काम करना नही है बल्कि लड़की उनका मन बहलाने के लिए बनी है जो घर के लिए काम करते है – फॉर मेन. उपर वाले का तहे दिल से शुक्रिया अदा करा उस दिन, कि उसने मुझे किसी लायक बनाया. मैं इस लायक थी कि किसी के लंड को खड़ा कर पाऊ, और यही तो लड़की की सबे बड़ी इज़्ज़त है.

भैया मेरे ऊपर ही पसर गए और हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़ लिया। कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से लिपटे हुए किस कर रहे थे। थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और स्नानघर में जाने लगे तो देखा बिस्तर खून से भरा हुआ था। मैं घबरा गई और बोली,“ ये क्या …… अब क्या होगा?”

भैया बोले,“ इसमें डर कुछ नहीं, पहले पहले यही होता है”

मेरी कमर में दर्द होने लगा था। हम दोनों बाथरूम में एक साथ नहाने गए तो एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। मेरी चूत अब कुँवारी नहीं रही थी। भैया ने रगड़ कर मेरी चूत को धोया और मैंने उनके लण्ड को, जिससे हम दोनों गर्म हो गए। मैं थोड़ा शरमाई पर काफ़ी झिझक निकल चुकी थी। हम दोनों फ़व्वारे के नीचे खड़े थे। भैया नीचे बैठे तो मैंने कहा,“ये क्या करने जा रहे हो भैया !”

“मैं तो अपने होठों की मुहर लगाने जा रहा हूँ …… और अब तुम भी लगाना”

वो मेरी चूत में उँगली करने लगे थे और जीभ भी फ़िराने लगे। मैं पागल हो उठी। मैं अपने एक स्तन को मसलने लगी और भैया हाथ बढ़ा कर दूसरे को। भैया मेरी हालत समझ गए और फ़र्श पर ही लिटा लिया। मेरी चूत में उनकी जीभ तैर रही थी और मेरे हाथ उनके सर को पकड़ कर मेरी चूत को दबा रहे थे। मैं अपने होठों को काट रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी टांगें उनकी गरदन में लिपट गई थी।

“वाउ दीदी ग्रेट…..बाथरूम मे चुदाई क्या जबरदस्त एनकाउंटर रहा होगा….. आगे बताओ कि क्या हुआ……….” प्रीति और भी मज़े लेते हुए बोलती है.

सिमरन ने प्रीति की चुचि मसल्ते हुए —-क्या तूने कुशल के साथ बाथरूम मे नही किया

दीदी आप कहानी की लय को मत बिगाड़ो मुझे जल्दी से सारी बातें बताओ

छोटी अब तो मानती है कि तू बड़ी हो गई है………..”

“ आपको क्यूँ लग रहा है…………. ऐसा?” मैने बहुत ही शरमाते हुए कहा

“ नही बस ऐसे ही…. अब जब तूने मुझे अपने दोनो छेदों मे अंदर ले लिया है…………”

ओह्ह भैया….. मुझे शरम आती है……..”

फ़िर वो मेरे ऊपर आ गए और मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पे लपेट ली। मेरे दोनों हाथ उनकी गरदन में लिपट गए। उन्होंने फ़िर जोर का झटका मारा तो आऽऽऽह्हऽऽआ …॥अ…अह्…… जैसे मेरी जान ही निकल गई। फ़िर भैया मेरे बूब्स को दबाते और झटके मारते जाते। वो वहशी होते चले गए, मेरे बूब्स को निर्दयता से मसल रहे थे और दांतों से काट रहे थे, मेरी गरदन पर भी प्यार से काटा। वो जहाँ जहाँ अपने दाँत गड़ाते वहाँ खून सा जम जाता। मैं भी पागल हो जाती तो बदले में अपने नाखून उनकी पीठ में गड़ा देती और उनकी गरदन पर काट लेती। जंगलीपने से बाथरूम में मेरी प्यार भरी चीखें गूंज रही थी, जिससे भैया का जोश बढ़ता ही जा रहा था। यह सिलसिला आधे घण्टे तक चला और उतनी देर में मैं दो बार झड़ चुकी थी और भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फ़िर जब हम शांत हुए तो मैं तीसरी बार झड़ी थी। हम फ़्रेश हो कर कमरे में चले गए और थोड़ा आराम करके खाना खाया। फ़िर हम नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर बातें करने लगे।

मैंने कहा,“भैया … ओह सोरी … जान, अब मेरा क्या होगा, मैं क्या करूँ और अब आगे का क्या प्लान है, मेरा मतलब भविष्य का, क्योंकि अब मुझे घबराहट हो रही है, मैं आपके बिना नहीं रह सकती।”

वो बोले “चिंता मत करो मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ,

मैंने कहा “ठीक है , चलिए अब सो जाते हैं क्योंकि कल हमें कॉलेज भी जाना है”

वो बोले “चिंता क्यों करती हो जान, मैं तुम्हें तड़पता नहीं छोड़ सकता। आज ही हम एक हुए और क्या तुम मुझे तड़पता छोड़ दोगी गुड़िया?”

मैंने कहा “नहीं भाई …….. प्लीज़ ऐसा मत बोलो। आज हम नहीं सोयेंगे। आज हम एक दूसरे को पूरा सुख देंगे। आप मेरे साथ जी भर कर और जम कर करो और अपनी बहन को रौंद डालो भैया.”

फिर भइया ने मुझे रात में तीन बार और जम कर चोदा और वो भी आधे आधे घंटे तक। और तब तक मैं बेहोशी की हालत में आ चुकी थी। हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए। सुबह जब मैं उठी तो भइया कॉलेज चले गए थे मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर। मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया औरफिर सो गई। मैं सीधे ३ बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी और देखा कि भइया मेरे सर को अपनी गोद में लिए हुए थे

सिमरन – “सुबह जब मैं उठी तो भइया कॉलेज चले गए थे मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर। मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया और फिर सो गई। मैं सीधे ३ बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी” सिमरन अपनी आप बीती प्रीती को सुना रही थी

सिमरन – “तो प्रीती, इस तरह से मेरे और मेरे भाई के बिच में फिजिकल रिलेशन बन गये और तब से लेकर आज तक हर रात हमारी सुहाग रात होती है, अब तो मैं और मेरा भाई मम्मी पापा के सोने के बाद एक ही रूम मे सो जाते है, मेरा भाई मेरी चूत और गांड रोज़ बुरी तरह चोदता है और मैं भी उससे मजे लेकर अपनी चुत चुदवाती हूँ”

प्रीती – “ वाह दीदी, आप तो कमाल हो, अपने ही भाई के साथ सुहाग रात मनाती हो, कसम से आपकी तो घर में ही चांदी हो रखी है दीदी, सच में आपकी कहानी ने तो मेरे रोम रोम में हवस की आग लगा दी है, अब प्लीज़ आप ही इस आग को शांत कर दीजिये ना”

सिमरन – “तू चिंता क्यों करती है प्रीती, आज रात हम दोनों ही एक दुसरे की जरूरतों को पूरा कर लेंगे, पर अब तू भी तो बता कि आखिर तूने कुशल को कैसे पटा लिया और कैसे उसने तेरी इस चुत की ताबड़तोड़ चुदाई कर दी” सिमरन प्रीती की चुत को मुट्ठी में बंद करते हुए बोली

प्रीती –“हयय्य ……दीदी…..वो सब मैं आपको बाद में बताउंगी ….पर अभी तो आप मेरी इस चुत को ठंडी कर दो प्लीज़….निगोड़ी देखो कैसे टेसुए बहा रही है” प्रीती ने अपनी गीली चुत से निकलती पानी की बूंदों को देखकर कहा

अब सिमरन ने देखा कि प्रीती बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और अब अपनी बुर को खुजा रही थ, वो अपना हाथ उसके हाथ पर रखी और बोली: क्या हुआ प्रीती ,बहुत खुजा रही है?

प्रीती: आह दीदी, आपकी कहानी है ही इतनी सेक्सी, कोई भी पागल हो जाए,

सिमरन: थोड़ा आराम दे दूँ क्या इसको? वो उसकी बुर की तरफ़ इशारा करके बोली,

प्रीती हँसी और बोली – “हाँ दीदी अब और सब्र नही होता, काश इस वक्त कुशल यहाँ होता तो उसके हथियार से ही अपनी प्यास बुझा लेती

सिमरन: अरे हथियार नही तो क्या,ये तो है , ये कहकर उसने अपनी जीभ और एक ऊँगली दिखाई,

प्रीती – हाँ ये भी चलेगा इस वक्त तो

सिमरन – मैं बहुत अच्छा चाटती हूँ , और आज देखना सच में मैं बहुत अच्छा चूसूँगी तुम्हारी बुर, कुशल से भी अच्छा,

ये कहकर वो प्रीती की नंगी हो चुकी चुत पर अपनी कोमल उंगलिया घुमाने लगी,

सिमरन ने उसकी बुर को सहलाया और बोली: उफफफ ये तो बिलकुल गीली हो गयी है,

प्रीती शर्म से लाल होकर बोली: आपकी कहानी थी ही इतनी सेक्सी,

अब सिमरन बैठ कर उसकी पैंटी जो पैरो में फंसी थी वो भी निकाल दी, प्रीती ने शर्मा कर अपनी जाँघें भींच ली,

सिमरन उसकी जाँघों को सहलाकर बोली: दिखाओ ना अपनी मस्तानी बुर, अब हम दोनों में कैसी शर्म और वो उनको फैलाई, अब प्रीती की पनियायी हुई बुर उसकी आँखों के सामने थी, उसने वहाँ हाथ फेरा और फिर उसने उसको हल्के से मसला, प्रीती उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी ,

अब सिमरन ने अपना मुँह उसकी जाँघों के बीच डाला और उसकी बुर को चूमने और फिर चूसने लगी,

प्रीती: आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ ,

सिमरन ने अब अपनी जीभ उसकी बुर में डाली और उसकी क्लिट को भी छेड़ने लगी, अब प्रीती अपनी गाँड़ उछालकर और उसका सिर अपनी बुर में दबाकर मस्ती से चिल्लाने लगी: आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं मरीइइइइइइइइइइ, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ,

सिमरन : बोलो कुशल की जीभ से ज़्यादा मज़ा आता है या मेरी जीभ से ?

प्रीती: आऽऽहहह आपकी जीभ तो पागल कर देगी हाय्य्य्य्य्य,

अब सिमरन ने फिर से पूछा: अच्छा बताओ कुशल के लंड से ज़्यादा मज़ा आता यां मेरी जीभ से चुदाई में?

अब सिमरन का मुँह उसकी पानी से पूरा गीला हो चला था , वह अब तीन ऊँगली उसकी बुर में अंदर बाहर करने लगी और जीभ से उसके क्लिट को सहलाने लगी,

अब प्रीती: आऽऽऽह क्या कह रही हो, उफफफफ,

सिमरन अब जल्दी जल्दी ऊँगलियों से प्रीती चोद रही थी और उसकी क्लिट के साथ जीभ भी उसकी बुर में चला रही थी,

प्रीती: आऽऽऽह सच में मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽऽ है,

सिमरन: कुशल से भी ज़्यादा ?

प्रीती: आऽऽऽह उइइइइइइ है कुशल से भी ज्याआऽऽऽऽऽऽऽऽदा ,

सिमरन मुस्कुराई और अपनी स्पीड बढ़ा दी और प्रीती: आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह हाऽऽऽऽय्य मैं गयीइइइइइइइइ कहकर अपना पानी सिमरन के मुँह में छोड़ दी और वो पूरा पानी पी गयी,

प्रीती –“दीदी बहुत मजा आया, लाओ अब मैं भी आपकी बुर चूस देती हूँ,

सिमरन –“हाँ मेरी बिल्लो, वैसे तेरी चुत सच में रस का खजाना है मुझे तो मजा ही आ गया एसी मस्त चुत का रसीला पानी पीकर

प्रीती – दीदी आप सच में बहुत अच्छा चुस्ती हो कुशल से भी अच्छा, पर दीदी लंड की कमी तो आप पूरी नही कर सकती ना

सिमरन – “अरे मेरी प्यारी गुडिया, तू कहे तो अभी तुझे एक दमदार लंड से चोद सकती हूँ, बोल चुदेगी लंड से”

प्रीती – “हाययय दीदी, इच्छा तो बहुत है पर आपके पास लंड थोड़े ही है, और अभी मैं आपके भाई से चुदने के लिए खुद को तैयार नही कर पाई हूँ, तो आप आज रात तो अपनी ऊँगली को ही लंड समझकर मेरी प्यास बुझा दीजिये

सिमरन-” अरे तू चिंता क्यूँ करती है, आज रात मैं एक लंड से ही तेरी प्यास बुझाउंगी ,ऊँगली से नहीं, मेरे पास लंड है,रुक तुझे अभी दिखाती हूँ”

सिमरन झट से खड़ी हुई और पास रखी आलमारी में से कुछ निकालने लगी, प्रीती को समझ नही आ रहा था कि वो क्या ढूंढ रही है, पर अगले ही पल प्रीती को उसके सवाल का जवाब मिल गया, क्यूंकि सिमरन के हाथो में एक लम्बा सा डिल्डो था,

प्रीती-“ओह माय गॉड दीदी यह तो लडको के लंड जैसा है, आप तो वाकई में बहुत कामुक रंडी हो दीदी”

सिमरन-” प्रीती क्या करू इस चूत में बड़ी आग है जिसे शांत करने के लिए रंडी बनना पड़ता है, देख इसे डिल्डो बोलते है, ये बायब्रेट करता है” सिमरन ने डिल्डो को चालु करके अपनी चूत में घुसा लिया, सिमरन के मुख से सिसकारी फूटने लगी, प्रीती यह नज़ारा देख कर कामुक सी हो गई थी, उसका भी मन कर रहा था की एक बार इसे अपनी चूत में घुसा कर देखे, ,

इधर सिमरन अपनी चूत में डिल्डो डालकर अंदर बाहर कर रही थी ,

सिमरन-” प्रीती देख क्या रही है , आजा आज तेरी चूत की भी प्यास बुझा देती हूँ, सिमरन प्रीती की जांघ पर हाँथ फेरते हुए बोली,

सिमरन ने प्रीती की चूत को मसल दिया, जो प्रीती को आग भड़काने के लिए इतना ही काफी था ,

प्रीती-” ओह्ह्ह्ह्ह दीदी आपने ये कैसी आग लगा दी है मेरे जिस्म में, “ सीमरन प्रीती की चूत को जीभ से रगड़ती है , प्रीती भी सिमरन की चूत में तेजी से ऊँगली डालकर अंदर बहार करने लगती है, सिमरन की आग भड़क जाती है, सिमरन डिल्डो लेकर प्रीती की चूत में घुसाने लगती है, सिमरन प्रीती की चूत में थूक लगाती है ताकि गीलापन रहे ,

जैसे ही डिल्डो का अग्रभाग प्रीती की चूत में घुसता है प्रीती तड़पने लगती है ,

प्रीती-” आआह्ह्ह्ह्ह्ह् दीदी दर्द हो रहा है आराम से घुसाओ” सिमरन डिल्डो को निकाल कर पुनः तेजी के साथ चूत में घुसेड़ देती है, प्रीती की चीख निकलती है ,

सिमरन डिल्डो को अंदर बहार चलाने लगती है,

थोड़ी देर बाद प्रीती को मजा आने लगता है,

सिमरन-“अह्ह्ह्ह्ह प्रीती में अगर लड़का होती तो अपने लंड से तुझे रौज चोदती,तेरा जिस्म बहुत ही नसीला और कामुक है, तेरी गांड तो मेरी गांड से भी गठीली है,

प्रीती-” आप भी कुछ कम नहीं है दीदी,आपको तो देख कर ही लड़को का लंड खड़ा हो जाता होगा, काश आप लड़का ही होती तो आज तो में आपसे जी भर के चुदती दीदी”

प्रीती की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी, सिमरन भी उसकी चूत से बराबर खेल रही थी तभी प्रीती का जिस्म एक दम अकड़ गया और एक तेज पिचकारी के साथ झड़ गई, प्रीती भी सिमरन की चूत में तेजी से दो ऊँगली करने लगती है और दोनों सहेलियां एक साथ झड़ जाती हैं ,

दीदी और प्रीती दोनों एक दूसरे का पानी चाट कर पी जाती हैं ,

प्रीती का जिस्म एक दम शांत पड जाता है ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पहली बार उसकी चुदाई हुई थी ,प्रीती की साँसे तेजी से चल रही थी ,कुछ ही देर में प्रीती और सिमरन को आराम सा मिल गया था और दोनों सखियाँ नंगी ही सो गई ,

अब कहानी को सबसे डिमांडिंग करैक्टर की तरफ मोड़ते है यानि कि आराधना की तरफ

जब आराधना , पंकज, दीप्ती और शेट्टी , ये सब सिनेमा देखने के लिए गाडी में बैठे, तभी अचानक शेट्टी ने हल्के से आराधना की गांड पर हाथ फिरा दिया, आराधना को शेट्टी की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया, वो सोचने लगी कि उसकी बाप की उमर का एक आदमी आखिर कैसे उसके पिछवाड़े पर अपना हाथ फिरा सकता है, परन्तु गुस्सा होने के बाद भी आराधना कुछ नही कर सकती थी,

क्यूंकि एक तो वो उन लोगो के सामने पंकज की वाइफ होने की एक्टिंग कर रही थी, और दूसरा उसे डर था कि कहीं उसने कुछ रियेक्ट कर दिया तो शेट्टी उसके पापा का प्रोजेक्ट ना रोक दे

इसलीये आराधना ना चाहते हुए भी बिलकुल चुप रही और चुपचाप गाड़ी में पीछे दीप्ती के साथ जाकर बैठ गयी, शेट्टी और पंकज गाडी में आगे की तरफ बैठे थे और गप्पे हांक रहे थे, और पीछे दीप्ती और आराधना बाते कर रही थी

तभी दीप्ती ने आराधना के बिलकुल करीब आकर हल्की आवाज़ में कहा

दीप्ती –“अच्छा आराधना, एक बात बताओ , आप दोनों की शादी कब हुई थी, मेरा मतलब है कि कितना टाइम हो चूका”

आराधना – “जी….जी….लगभग 6 महीने होने को आये”

दीप्ती – “एक बात कहूँ, बुरा तो नहीं मानोगी?”

आराधना – “जी, पूछिए……..” आरधना थोड़ी घबरा भी रही थी कि कहीं दीप्ती कोई ऐसी बात ना पूछ ले जिससे कि उसका भांडा फूट जाये

दीप्ती – “आप दोनों की लव मैरिज हुई है न”

आराधना – “जी ….जी हाँ, पर आपको कैसे पता चला” आराधना झूट मूट ही बोली

दीप्ती – “दरअसल आप दोनों की उम्र में भी थोडा गैप है, और जब हम आपके कमरे में आये थे तब आपने जो सेक्सी सी नाईटी पहन रखी थी वो तो कोई लवर ही अपने आशिक को खुश करने के लिए पहनता है”

आराधना (शर्माते हुए )– “जी….. वो तो बस यूँ ही……… दरअसल मुझे बिल्कुल अंदाजा नही था कि आप लोग आने वाले हो वरना मैं वो ड्रेस नही पहनती”

दीप्ती – “अरे शर्माती क्यूँ हो तुम, हाययय ….कितनी सुंदर लग रही थी तुम, बला की खुबसूरत……तुम्हे देखकर तो मुझे मेरी जवानी याद आ गयी, मैं भी जवानी में तुम्हारे जैसी ही सुंदर थी”

आराधना – “अरे आप तो अभी भी बहुत सुंदर है, आपको देखकर कोई भी आप पर फ़िदा हो जायेगा, अच्छा मेन्टेन किया है आपने अपनी फिगर को”

दीप्ती –“कहाँ मेन्टेन कियां है ….ये देखो कैसे मेरा पिछवाडा फ़ैल गया है बुरी तरह से…..”

दीप्ती की बात सुनकर आराधना थोड़ी झिझकी, पर फिर भी थोडा सम्भलते हुए बोली

आराधना –“नही नही, आपकी गलत वहमी है ये, आप तो अभी भी काफी ग्लैमरस दिखती है”

दीप्ती –“ नही यार अब वो पहले जैसी बात नही रही, अब तो mr. शेट्टी भी ज्यादा ध्यान नही देते, जब देखो इधर उधर मुंह मरते रहते है, अब देखो न तुमको भी कैसे खा जाने वाली नजरो से देख रहे थे”

आराधना को समझ नही आ रहा था कि वो इस बात का क्या जवाब दे, बस उसने बेमन से थोडा सा मुस्कुरा दिया

दीप्ती –“तुम जानती हो जब उन्होंने तुम्हे उस सेक्सी नाईटी में देखा था ना तो कमरे में आते ही मेरी जमकर ली थी, बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गये थे तुम्हे देखकर…हा हा हा हा”

आराधना –“पर..आपको बुरा नही लगता कि आपके पति ऐसे दुसरो की बीवियों की तरफ देखते है?” आरधना ने कोतुहल से ये सवाल पूछा

दीप्ती –“अरे इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नही, दरअसल इनकी सेक्स ड्राइव कुछ ज्यादा ही है, और जिन लोगो की सेक्स ड्राइव ज्यादा होती है न उनका एक से मन नही भरता, बुरा तो तब मानती जब ये मुझे संतुस्ट न करते पर ये हमेशा मुझे जरुर खुश कर देते है अपने मोटे तगड़े लंड से” अब दीप्ती पुरे खुलेपन पर उतर आई थी,

आराधना को ये सुनकर बड़ा ही आश्चर्य हुआ, पर तभी उसे ध्यान आया कि उसके पापा की सेक्स ड्राइव भी कितनी तगड़ी है, कैसे घंटे भर तक वो जमकर उसको चोदते है, और फिर भी दोबारा चोदने के लिए तैयार रहते है, उन्होंने तो सिमरन को भी पटाने की कोशिस की थी

दीप्ती –“अरे मेरी रानी कहाँ खो गयी?” दीप्ती ने आराधना को झटकते हुए कहा

आराधना –“जी…कुछ नही वो तो बस ऐसे ही………….”

दीप्ती –“वैसे तुम्हे एक बात बताऊ, बुरा तो नही मानोगी?”

आराधना –“जी…बताइए” दरअसल अब आराधना को भी धीरे धीरे मजा आने लगा था दीप्ती की बातो में

दीप्ती – “वो …वो ….मैंने भी कई बार इनके अलावा दुसरे मर्दों से चुदाई की है”

आराधना को ये सुनकर झटका सा लगा कि ये औरत जो उसे सिर्फ कुछ ही घंटो पहले मिली है वो उसे क्यों बता रही है कि वो अपने पति के अलावा भी किसी से चुदती है,

आराधना –“ओह माय गॉड ….क्या आपके पति जानते है?”

दीप्ती –“अरे जानते क्या, वो खुद ही कई बार अपने दोस्तों से मुझे चुदवाते है, और खुद अपने दोस्तों की बीवियों को चोदते है, इसे वाइफ स्वैपिंग कहते है, शुरू शुरू में तो मुझे बड़ा अजीब लगा था पर अब कसम से बड़ा मजा आता है चुदने में, कई बार तो मैं एक साथ दो दो लंडो से भी चुदी हूँ एकसाथ”

आराधना की आँखे तो दीप्ती की बाते सुनकर बिलकुल खुल सी गयी थी, वो तो आश्चर्य से उसकी बाते सूनी जा रही थी जैसे वो उसे कोई भारी ज्ञान दे रही हो

आराधना –“हे भगवान , कैसे कैसे काम होते है दुनिया में”

दीप्ती –“अरे मेरी बिल्लो रानी, ये तो कुछ भी नही है, आजकल तो भाई बहन, माँ बेटे, बाप बेटी भी आपस में चुदाई कर लेते है….”

दीप्ती की बात सुनकर एक बार तो आराधना थोड़ी सकपकाई, पर अगले ही पल उसने खुद को सम्भालते हुए कहा

आराधना- “नही ये आप कैसी बाते कर रही है, ऐसा थोड़े ही होता है?”

दीप्ती –“अरे होता है मेरी रानी,अच्छा अब मैं तुम्हे ऐसी बात बताती हूँ जो इनको भी नही पता”

आराधना –“जी बोलिए….” आराधना ने उत्सुकता वश पूछा

दीप्ती –“दरअसल जब मेरे पति और मैं वाइफ स्वैपिंग करने लगे तो धीरे धीरे मुझे चुदाई का नशा सा होने लगा था, और मुझे बस रोज़ ही चुदाई चाहिए होती थी, जब तक मैं दो मस्त लंडो से न चुद लेती मुझे चैन नही मिलता था, पर एक दिन मुझे अपने मायके जाना पड़ा,क्यूंकि मेरी मम्मी थोड़ी बीमार पड गयी थी, …..एक दो दिन तो किसी तरह गुजर गये पर फिर मुझे लंड की याद सताने लगी ….और उसी दोरान…..उसी दोरान….”

आराधना –“उसी दोरान क्या …..”

दीप्ती –“ उसी दोरान मेरे और मेरे भाई के जिस्मानी ताल्लुकात बन गये, और मेरा भाई मुझे चोदने लगा, हमारी चुदाई बड़े मजे से चल रही थी कि तभी एक दिन मेरे पापा ने मुझे देख लिया…..मैं और मेरा भाई बुरी तरह से घबरा गये पर फिर जो हुआ वो मैंने सपने में भी नही सोचा था…”

आराधना –“क्या हुआ दीदी….बताओ ना” आरधना अब उत्तेजित होने लगी थी

दीप्ती –“मेरे पापा ने अपनी पेंट और अंडर वियर उतारी और अपना ६ इंच का खड़ा हुआ लंड सीधा लाकर मेरी चुत में पेल दिया, पहले तो मुझे कुछ समझ नही आया पर बाद में मुझे मजा आने लगा, तब से मैं जब भी अपने मायके जाती हूँ मेरे भाई और मेरे पापा जमकर मेरी चुत और गांड बजाते है, और मैं भी खुलकर मजे लेती हूँ”

आराधना का हाल तो अब बुरा हो चूका था, वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी, और बस अब वो किसी तरह अपने पापा का हलब्बी लंड अपनी चुत में लेना चाहती थी, पर वो अभी मुमकिन नही था इसलिए वो खुद को किसी तरह शांत करने में लगी थी कि तभी अचानक उसकी आँखों के सामने एक दृश्य आ गया कि उसके पापा और उसका भाई कुशल दोनों मिलकर उसकी चूत और गांड मार रहे है,आराधना बुरी तरह से गनगना गयी,

पर उसने तुरंत अपने माथे को झटका और फिर वो दोबारा दीप्ती से बाते करने में मशगुल हो गयी,

कुछ देर बाद वो लोग सिनेमा हॉल पहुंच गये, जब वो लोग उतरे तो शेट्टी ने दोबारा नजर बचाकर आराधना की गांड पर हाथ फेर दिया, और इस बार तो उसने पीछे से अपना हाथ ले जाकर हल्के से साडी के ऊपर से आराधना की चूत दबा दी, आराधना भले ही बहुत उत्तेजित थी परन्तु उसे शेट्टी की ये हरकत बिलकुल पसंद नही आई, उपर से शेट्टी दिखने में भी साउथ की मूवी का गुंडा सा लगता था,

“कहीं दीप्ती और शेट्टी हम लोगो के साथ वाइफ स्वैपिंग ……” आराधना के दिमाग की बत्ती सी जली शेट्टी की इस हरकत की वजह से

“नही नही मैं इस काले कलूटे आदमी के साथ………..नही नही ये बिलकुल नही हो सकता ………मैं अभी पापा को यहाँ से ले जाती हूँ………” आराधना ने मन में सोचा,

दीप्ती ने भले ही आराधना को गरम कर दिया था और उसके दिमाग में जाने अनजाने में कुशल के प्रति थोडा आकर्षण पैदा कर दिया था पर अभी भी उसके दिलो दिमाग में सिर्फ और सिर्फ उसके पापा ही बसे थे, वो किसी गैर मर्द के साथ चुदाई करने के बारे में सोच भी नही सकती थी,

शेट्टी –“आप सब लोग बैठिये, मैं अभी टिकेट लेने जाता हूँ” ये कहकर शेट्टी चला गया

दीप्ती –“आरधना, मुझे वाशरूम जाना है तुम भी चलोगी क्या?”

आराधना –“नही दीदी आप हो आइये मैं यहीं बैठूंगी”

दीप्ती भी वहां से चली गयी, आराधना को लगा की यही सही मोका है पंकज से बात करने का

आराधना –“पापा…….मुझे आपसे एक बात कहनी है ”

पंकज – “हा आरू बोलो….”

आराधना –“पापा मुझे अभी इसी वक्त वापस होटल जाना है, मुझे इन लोगो के साथ पिक्चर नही देखनी”

पंकज –“पर बेटी, अचानक क्या हुआ”

आराधना –“वो सब मैं आपको बाद में बता दूंगी, पर आप बस किसी भी तरह बहाना बनाकर यहाँ से चलिए”

पंकज –“पर बेटी ऐसे तो वो लोग बुरा मान जायेंगे, और फिर हो सकता है वो शेट्टी मेरे प्रोजेक्ट को बिलकुल भी पास ना करे”

आराधना –“पापा आपको प्रोजेक्ट ज्यादा प्यारा है या मैं”

पंकज –“ऑफ़ कोर्स बेटी …तुम ही मुझे सबसे ज्यादा प्यारी हो इस दुनिया में, तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ”

आराधना –“तो आप चलिए यहाँ से …….”

पंकज –“ठीक है आरू, अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ये ही सही”

थोड़ी देर बाद दीप्ती आ जाती है और उसके तुरंत बाद शेट्टी भी हवा में टिकट्स लहराता हुआ उनकी और आ रहा था

पंकज –“शेट्टी जी, माफ़ कीजियेगा पर हम आप लोगो के साथ मूवी नही देख पाएंगे, हमे जाना होगा अभी”

शेट्टी –“अरे पर ग्रोवर साहब अचानक क्या हुआ” शेट्टी को अपने इरादों पर पानी फिरता हुआ दिखाई दिया, दरअसल उसने सोचा था कि किसी तरह वो उन दोनों को भी अपने वाइफ स्वैपिंग वाले ग्रुप में शामिल कर लेगा प्रोजेक्ट का दबाव बनाकर पर उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फिरता सा नजर आ रहा था उसे

पंकज –“दरअसल मुझे अभी घर से फ़ोन आया है कि हमारे रिश्ते दारी में किसी की डेथ हो गयी है और हमे तुरंत घर के लिए निकलना पड़ेगा, वैसे भी 6 -7 घंटे से ज्यादा लग जाते है पहुंचते पहुंचते तो हमे जल्द से जल्द निकलना होगा”

आराधना भी पंकज के सोच की दाद देने लगी कि क्या बेहतरीन बहाना ढूँढा है पापा ने अब तो शेट्टी उसे रोक ही नही सकता

शेट्टी –“पर ग्रोवर साहब आपके प्रोजेक्ट का क्या..” शेट्टी ने अपना आखिरी हथियार चलाते हुए कहा, इसी हथियार के दम पर ही वो पंकज को मजबूर करके आराधना की चुदाई करना चाहता था, पर पंकज ने जो जवाब दिया उससे शेट्टी के सारे अरमान धरे के धरे रह गये

पंकज – “शेट्टी जी, प्रोजेक्ट तो आते जाते रहते है, पर रिश्तेदारी निभानी ज्यादा जरूरी है………और वैसे भी पैसे लेकर जाना कहाँ है, सब यही तो छुट जाना है”

आराधना तो पंकज का जवाब सुनकर उसे और भी ज्यादा चाहने लगी, उसे लगा कि उसके सिर्फ एक बार कहने पर ही उसके पापा ने उसके लिए करोडो के प्रोजेक्ट को भी ठुकरा दिया, आराधना के दिल में अपने पापा के लिए प्यार और भी ज्यादा गहरा हो गया था,

और इधर पंकज के जवाब ने शेट्टी की रही सही हिम्मत भी तोड़ दी, उसे समझ आ गया कि ये चिड़िया उसके हाथो से निकल चुकी है, और अब वो कुछ कर भी नही सकता था, इसलिए हताश होकर बोला

शेट्टी –“आप चिंता मत कीजिये ग्रोवर साहब, आपका प्रोजेक्ट का कम समझो हो गया, मैं आपके कॉन्ट्रैक्ट को साईंन कर दूंगा, आप मुझे ई मेल कर दीजियेगा” शेट्टी ने सोचा कि शायद भविष्य में कोई चांस बन जाये इसलिए ये कॉन्ट्रैक्ट देना भी जरूरी है

पंकज –“ बहुत बहुत सुक्रिया शेट्टी जी, अच्छा अब हम दोनों निकलते है, आप लोग मूवी एन्जॉय कीजिय, मैं होटल जाकर मनेजमेंट से कहकर यहाँ एक गाड़ी भिजवा दूंगा, अच्छा बाय”

ये कहकर पंकज और आराधना पार्किंग की तरफ चल दिए और शेट्टी और दीप्ती हॉल के अंदर चले गये

“आई लव यू पापा…….उम्म्म्मम्म हाआआ” ये कहकर आराधना ने पंकज के गालो पर एक किस कर दी

पंकज भी आराधना को खुश देखकर खुश था, उसने गाड़ी स्टार्ट की और होटल की तरफ निकल पड़ा, रस्ते में पंकज बोला

पंकज –“अच्छा आरू, अब मुझे बताओ की आखिर तुमने पिक्चर देखने से क्यों मना किया?”

फिर आराधना अपने पापा को बताने लगी कि कैसे शेट्टी ने उसके पिछवाड़े पर दो बार हाथ फेरा था, और कैसे उसकी बीवी ने उसे वाइफ स्वैपिंग के बारे में बताया था, हालाँकि आराधना ने वो भाई और बाप वाली बात छुपा ली

पंकज-“ ओह तो वो हरामी मेरी बेटी पर ही गन्दी नजरे जमाये हुए था, अगर तुम मुझे वहीँ बता देती तो उस कमीने का मुंह तोड़ देता”

आराधना –“ पर पापा अब हमे होटल चेंज करना होगा”

पंकज-“ पर आरू मेरा कॉन्ट्रैक्ट वाला काम तो हो गया, इसलिए मुझे घर जाना होगा, और वैसे भी ये शेट्टी शहर में दिन भर काम काज के सिलसिले में कई होटलों में घूमता रहता है, इसलिए अगर उसने कही मुझे देख लिया तो कॉन्ट्रैक्ट वापस ले लेगा, हालाँकि मुझे कॉन्ट्रैक्ट की कोई प्रवाह नही”

आराधना –“तो पापा अब क्या करे?”

पंकज –“अच्छा तुम्हारा वो कम्पटीशन कब से शुरू है, मैं तुम्हे वहां हॉस्टल में छोड़ दूंगा और फिर मैं घर निकल लूंगा, जब तुम्हारा कम्पटीशन 5 दिन बाद खत्म हो जाये तो मुझे कॉल कर लेना मैं तुम्हे लेने आ जाऊंग”

आराधना ये सुनकर घबरा गयी , क्यूंकि उसे तो पता ही था कि कोई कम्पटीशन नही है वो तो घर से बहाना बनाकर अपने पापा से मिलने यहाँ आई है, अब आराधना को भी लगा कि उसे अपने पापा को सब सच बता देना चाहिए

आराधना –“पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है, आप गुस्सा तो नही करोगे ना?”

पंकज –“अरे पगली तू तो मेरी जान बन चुकी है अब, तुझपे तो मैं कभी भी गुस्सा नही कर सकता, बोल जो भी कहना है”

आराधना –“ पापा वो ….वो मेरा …कोई कम्पटीशन नही है यहाँ , मैं घर पर झूट बोल कर आई थी, दरअसल मैं आपसे मिलने आई थी यहाँ, क्यूंकि आपके बिना मेरा पल पल कटना भी मुश्किल हो गया था, इसलिए मैं यहाँ आ गयी” आराधना ने एक साँस में सब सच बता दिया

पंकज –“तुम मुझसे इतना प्यार करती हो मुझे तो पता ही नही था, ठीक है आरू , एक काम करते है हम दोनों घर ही चलते है, क्या कहती हो, घर पर बोल देंगे कि तुम्हारा कम्पटीशन कैंसिल हो गया, ठीक है ना”

आराधना –“ठीक है पापा…थंक्स.. आई रियली लव यू पापा….”

ये कहकर आराधना पंकज के गले लग गयी, कुछ ही देर में वो लोग होटल पहुंच गये, पंकज ने होटल वालो से कहकर एक गाड़ी सिनेमा हॉल में भिजवा दी, और फिर वो और आराधना अपने सामान की पैकिंग करने लगे, जल्द ही उन्होंने अपनी पैकिंग पूरी कर ली, और फिर रात को ही वो दोनों घर के लिए निकल गये, वो लगभग 7-8 बजे के आसपास घर पहुंचने वाले थे

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