Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani – Update 26

Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani - Long Incest Story
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“ तुम्हारी मोम को आते ही हम ने इतना डोज़ दिया कि उसका माइंड इधर उधर की बाते ही ना सोचे……. औरत का माइंड तभी शक करता है जब उसे पूरी खुराक नही मिलती. और वैसे भी शादी के बाद से मैने किसी भी पराई लेडी के साथ कोई रीलेशन नही बनाए….. हाँ आज……” पंकज इससे पहले की अपनी बात ख़तम करता तो आराधना बीच मे ही बोलने लगती है – “ मैं पराई नही हू…..अब आगे बताइए….” आराधना सीरियस्ली उसे आँखे दिखती हुई बोलती है

 

“ हाँ तो बस मैं यही कह रहा था कि तुम्हारी मोम को दिन रात प्यार किया हम ने….. किचन, बाथरूम, बेडरूम या छत… जहाँ भी मौका मिला वहीं पर ये खिला दिया उसे………” पंकज फिर से अपने लंड पर हाथ फिराता हुआ बोलता ..

 

“ तभी तो मोम बॅक साइड से……. हे हे हे हे हे” आराधना अपने दोनो हाथो को फेलाते हुए दिखती है क्यूंकी स्मृति की गान्ड काफ़ी ब्रॉड है.

 

“ ये नॉर्मल बात है….. कोई भी लेडी कैसे ठुकी है ये आइडिया आप उसकी बॅक को देख कर ही लगा सकते हो….. आदमियों की जान बस्ती ही एक सेक्सी बॅक मे. हर आदमी चाहता है कि उसकी वाइफ की बॅक ऐसी ही हो जैसे कि मेरी वाइफ की है……..” आराधना पंकज की ये बाते सुनकर थोड़ा जेलस फील करती है लेकिन कुच्छ बोलती नही है.

 

“ काफ़ी रोमॅंटिक रहे है आप भी….. मोम ईज़ सो लकी……” आराधना उसकी आँखो मे आँखे डालते हुए बोलती है.

 

“ हाँ ये तो है….. लेकिन तुम्हारे लिए कुच्छ ज़्यादा सही नही है नही तो देल्ही जाने पर कोई भी आइडिया लगा लेगा कि क्या हुआ है. लड़की की बॉडी मे रॅपिड चेंजस आते है जैसे ही उसके साथ सेक्स होता है……” पंकज आराधना को ये समझाना चाहता था कि ज़्यादा चुदाई से उसकी गान्ड ज़्यादा फेल सकती है और इससे लोगो को शक हो सकता है.

 

“ सॉफ सॉफ बोलिए ना कि……… आपका…आपका माइंड अभी भी कहीं और ही है….. या उनकी याद आ रही है जिन्हे आप शादी से पहले ही…….” आराधना उसकी बात से थोड़ा सा नाराज़ हो जाती है और अपना मूँह दूसरी साइड कर लेती है.

 

पंकज चेर से खड़ा होता है और आगे बढ़कर फिर से आराधना को हग करता है और उसके गालो पर किस करता है –“ तुमहरे जैसा तो कोई हो ही नही सकता…. लड़की होने के बाद भी तुम्हे ये अहसास नही है कि तुम क्या हो…….. आटम बॉम्ब से भी ज़्यादा डेंजर हो तुम…” पंकज की ये बात सुनकर आराधना की हँसी छूट जाती है.

 

“ ऐसे ही बातो से लड़किया पटाते थे आप शादी से पहले………..?” आराधना स्माइल करते हुए पंकज से पूछती है.

 

“ ये ब्लड मे ही होता है….. कुच्छ इंसानो मे खास. शायद मेरे फादर मे भी होगा…… जिनकी हर बात और हर आइटम स्ट्रॉंग होता है………….” पंकज फिर से आराधना का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख देता है लेकिन आराधना को पता नही उसकी ये बात सुन कर क्या होता है.

 

वो अचानक पंकज की इस बात के दूसरी ही दुनिया मे पहुँच जाती है. ये चीज़े ब्लड मे ही होती है……… इनके फादर मे भी ऐसा था…… यानी… यानी कुशल का भी………. ये बाते सोच कर आराधना का चेहरा पता नही क्यूँ लाल हो जाता है. लेकिन पंकज को लगता है कि वो शरम से लाल हो रहा है.

 

“ आरू…… तुम्हारे और मेरे रीलेशन के बारे मे कहीं तुमने कोई हिंट सिमरन को तो नही दिया ना…………………” पंकज आराधना से पूछता है.

 

“ नही…. नही तो….. मैं भला क्यूँ बताउन्गि…….. मुझे तो खुद नही पता था…… कि हमारे बीच ऐसा हो जाएगा…….” आराधना बात को छुपाना चाहती थी.

 

“ क्या तुमने कभी मेरे बारे मे ऐसा नही सोचा………?” पंकज आराधना से पुछ्ता है

 

आराधना उसकी इस बात से थोड़ा घबरा जाती है और उससे मूँह फिराते हुए बोलती है –“ मुझे….. मुझे नही पता……………” आराधना की जैसे साँसे लड़खड़ा रही थी तो उसका सीना भी उपर नीचे हो रहा था. अब आराधना की गान्ड पंकज की तरफ थी.

 

“ क्या मैं कभी तुम्हारे सपनो मे नही आया…… क्या मुझे सोच कर कभी तुमने मास्टरबेशन नही किया…….. क्या तुम्हारी पुसी मेरे बारे मे सोच कर गीली नही होती………………” पंकज ये बात बोलते बोलते अपने हाथ को नीचे ले जाते हुए उसके टॉप के अंदर ले जाता है. और सीधा उसकी चूत पर रख देता है.

 

आराधना की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी. पंकज उसकी पैंटी को साइड करके अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसा देता है. स्रर्र्ररर से उंगली उसकी चूत मे घुस जाती है.

 

“ आआहह……….” और पता नही क्यू इन लस्टी और सेक्सी साउंड के साथ वो वहाँ से हट कर वॉर्डरोब पर अपनी पीठ टिका कर खड़ी हो जाती हो है. उसके बूब्स उपर नीचे हो रहे थे और साँसे तेज तेज चल रही थी.

 

वो पंकज की तरफ देखती है और एक स्माइल के साथ भाग कर बाथरूम मे घुस जाती है. उसकी इस अदा का गहरा असर होता है पंकज पर.

 

पंकज भी धीरे धीरे बाथरूम की तरफ चल देता है और आकर बाथरूम के गेट पर खड़ा हो जाता है. वो कुच्छ बोलता नही है और बस गेट पर खड़ा रहता है. अंदर फिर पानी चलने की आवाज़ आती है जैसे पानी किसी चीज़ के अंदर गिर रहा हो.

 

पंकज कुच्छ मिनिट ऐसे ही खड़ा रहता है और पानी की आवाज़ रेग्युलर आती जा रही थी. जब वेट करते करते कुच्छ ज़्यादा ही मिनिट हो जाते हो पंकज गेट को नॉक करता है.

“ गेट ईज़ ओपन…. कम इन डॅड……..” आराधना के ये बोलते ही पंकज को ये अहसास हो जाता है कि गेट सिर्फ़ बंद था लेकिन लॉक नही था. वो धीरे से गेट को ओपन करता है और फिर अनएक्सपेक्टेड सिचुयेशन….. आराधना बाथ टब मे लेट चुकी थी और उसने कुच्छ नही पहना था. नीचे की बॉडी तो पानी मे कवर थी लेकिन उपर से विज़िबिलिटी थी. आराधना उस टाइम पर कुच्छ ऐसी दिख रही थी –

 

आराधना इन बाथ टब

 

पंकज उसे ऐसी हालत मे देख कर और पागल हो जाता है लेकिन अपने जज्बातो पर कंट्रोल रखता है. आराधना पंकज के अंदर आ जाने के बाद भी अपने आप को ऐसे ही रखती है, उसकी बोल्डनेस धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी.

 

“ आपने ये क्यू पुछा था कि सिमरन को कुच्छ पता है या नही……….?” आराधना बाथ टब मे लेते हुए पंकज से ये सवाल करती है.

 

“ मैने….मैने ये सवाल क्यू किया……….. हाँ…..गुड क्वेस्चन….. आक्चुयल मे सिमरन इन मॅटर्स मे ज़्यादा इंटेलिजेंट लगती है मीन ये लगता है कि उसे सेक्स की अच्छी नालेज है. और फिर वो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड भी है………” पंकज भी अपनी साइड को एक्सप्लेन करता है.

 

“ हर लड़की की अपनी खुद की लाइफ होती है…… ना मैं उससे कुच्छ पूछती और ना उसे कुच्छ बताती…. हाँ वो खुद ही बताती रहती है कि आज उसके साथ ये हुआ और ये हुआ………..” आराधना धीरे धीरे अपनी बॉडी पे पानी गिराते हुए बोलती है.

 

“ अच्छा चलो छोड़ो……. ये बताओ कि कल का क्या प्लान है… कॉलेज कितने बजे जाना है?” पंकज आराधना से वॉश बेसिन के सहारे खड़े रहते हुए पुछ्ता है.

 

“ मुझे…… ह्म्*म्म्ममम…. कल तो कॉलेज नही जाना. कल ईव्निंग मे फोन करके पता करना है कि नेक्स्ट डे कितने बजे जाना है” आराधना को कुच्छ समझ नही आया तो वो यही बोल देती है.

 

“ तो कल तुम क्या करोगी….. ऐसे तो होटेल रूम मे बोर हो जाओगी……?” पंकज आराधना को इनफॉर्म करता है.

 

“ आपके साथ चलूंगी ना……….” आराधना स्माइल करते हुए बोलती है

 

“ मेरे साथ कहाँ जाओगी बेटा….. मैं तो वैसे ही इस बिज़्नेस डील के चक्कर मे परेशान हू…….” पंकज अपने आप की परेशानी बताते हुए बोलता है.

 

“ बिज़्नेस डील मे परेशानी???? बात क्या है सब सही तो है ना……………?” आराधना भी सीरीयस होते हुए बोलती है.

 

“ कुच्छ भी सही नही है…… साला एक और कॉंट्रॅक्टर आया हुआ है. वो किसी नेगोशियेशन के लिए तैयार ही नही है. डेली सोचता हू कि कांट्रॅक्ट साइन हो जाएगा लेकिन उसके चक्कर मे नही होता. एक मन तो करता है कि इस कांट्रॅक्ट को भूल कर सीध घर चलु……. लेकिन फिर ख्याल आता है कि इतना बड़ा कांट्रॅक्ट ऐसे ही नही मिल जाता ” पंकज अपने दिल की सारी बाते बता देता है.

 

आराधना अपने डॅड को परेशान हालत मे देखती है तो बाथ टब से खड़ी होती है. जैसे ही वो पानी से बाहर आती है तो जैसे उस बाथरूम का टेंपरेचर और बढ़ जाता है, उसने कुच्छ नही पहना था और बॉडी पूरी पानी मे भीगी हुई थी. आराधना आगे बढ़ती है और पंकज को हग कर लेती है.

 

“ सब सही हो जाएगा….. आप टेन्षन ना ले…….” आराधना का भीगा और गथीला बदन, उसके बदन की खुसबु, उसके टाइट बूब्स की पंकज के सीने मे चुभन और इस रोमॅंटिक माहौल मे पंकज एक बार फिर से पिघल जाता है.

 

वो आराधना के बाल पकड़ कर खींचता है जिससे कि आराधना का चेहरा आगे की तरफ आ जाता है. पंकज अपने होंठ फिर से उसके होंठो पर रख देता है.

 

आराधना भी अपने आप को नही रोक पाती और पंकज का साथ देने लगती है. बाथरूम मे तो जैसे दोनो लिप्स एक दूसरे को खाने को तैयार हो रहे थे. दोनो लिप्स एक सेकेंड के लिए एक दूसरे से अलग होते है और दोनो एक दूसरे को देखते है और फिर से एक दूसरे से मिल जाते है.

 

पंकज अपना हाथ नीचे आराधना की चूत पर ले जाता है और और उसके उपर से ही हाथ फिराने लगता है. आराधना भी अपने हाथो को पंकज के सीने पर फिरा रही थी. आराधना के होठ पंकज को और भी ज़्यादा रसीले लग रहे थे.

 

लिप्स जैसे ही अलग होते है, पंकज फोरप्ले स्टार्ट करता है और आराधना की गर्दन पर किस करना शुरू कर देता है.

 

“ ओह……लव मी डॅड……… मुझे बहुत प्यार चाहिए…….ह्म्*म्म्मममममममममम” आराधना फिर से एक बार गरमा रही थी.

 

उसका बदन बहुत ज़्यादा गरम हो चुका था और पंकज भी एक अनिमल की तरह उसे चट रहा था. उस होटेल के एक रूम मे ये टाइम थमने का नाम ही नही ले रहा था. लाइफ मे पता नही कितने ही राज ऐसे होते है जिनका कभी किसी को कुच्छ पता नही चलता और ये उन्ही मे से एक है जहाँ एक जवान और बेहद गरम लड़की अपने ही डॅड की बाँहो मे मचल रही थी.

 

पंकज उसे प्यार करते करते नीचे पहुँच चुका था. वो उसकी पतली कमर को थामते हुए उसकी गोरी और गहरी नाभि पर किस करता है और धीरे धीरे नीचे उसकी चूत तक पहुँचता है. वो आराधना की थाइस को पकड़ कर उन्हे थोड़ा सा फेलाने का इशारा करता है. पूरी तरह से गरमाई हुई आराधना उसके इशारो पर बंद आँखो से अपनी टांगे फेला लेती है.

 

पंकज अपना मूँह फिर से उसकी चूत पर लगा देता है. “ह्म्*म्म्मममम……………उफफफफफफफफफ्फ़…………क्या…..आग लगती है इसमे……………” आराधना का इशारा अपनी चूत की तरफ था. पंकज भी अपने घुटनो के बल बैठा हुआ था और उसकी चूत चाट रहा था. एक बार चुदने से चूत बेहद ही मस्त हो चुकी थी. रंग और भी ज़्यादा गुलाबी हो चुका था, उसकी चूत के लिप्स के बीच की दूरी थोड़ी और बढ़ गयी थी जिससे कि वो और भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी.

 

“ह्म्*म्म्मम………….ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…….इस्शहस्शसशसशहस्शसशससश्” खुले हुए माहौल मे जहाँ उन्हे कोई जानता भी नही था तो दोनो बहुत अच्छे से मज़े ले रहे थे.

 

करीबन ऐसे ही बहुत डेट तक पंकज उसकी चूत को चाटने मे लगा रहा…..” नही रहा जा रहा है……. प्लीज़ इसकी आग बुझा दो………………..उफफफफफफफफफफफ्फ़……….” आराधना का अपना एक हाथ भी अपनी चूत पर पहुँच चुका था.

 

“ तुम……….. दूसरी बार ले पाओगि ना……………??” पंकज अपना मूँह उसकी चूत से हटा कर पुछ्ता है, वो धीरे धीरे अपने शॉर्ट को भी उतार रहा था. लेकिन आराधना तो जैसे होश मे ही नही थी.

 

“ प्लीज़………. मैं दूसरी बार क्या………..मैं पूरी रात ले पाउन्गि………………….” आराधना की आवाज़ और भी सेक्सी होती जा रही थी. पंकज खड़ा होता है और उसे अपनी गोद मे उठाता है. आराधना पंकज की गोद मे आते ही अपनी दोनो बाँहे पंकज की गर्दन मे डाल देती है और अपने होंठ उसके होंठ पर लगा देती है. पंकज अनएक्सपेक्टेड उसे फिर से बाथ टब मे ले जाता है और फिर से वहाँ ले जाकर खड़ा कर देता है. एक ही झटके मे फिर अपनी टीशर्ट उतार देता है. अब फिर से दोनो बदन पूरी तरीके से नंगे थे.

 

आराधना को समझ नही आ रहा था कि आख़िर पंकज का प्लान क्या है और वो बेड पर जाने की बजाय फिर से बाथटब मे आ गया था. लेकिन बाथ टब मे काफ़ी जगह थी और पंकज के पूरे पाँव उसमे आ रहे थे. उसमे लेटने के बाद और अपने सारे कपड़े उतारने के बाद वो आराधना का हाथ पकड़ कर खींचता है. आराधना को इतना तो समझ आ जाता है कि पंकज उसे अपने उपर चढ़ाता है. ठीक वैसे ही आराधना पंकज के उपर बैठ जाती है, बैठते ही आराधना को उसके खड़े लंड का अहसास हो जाता है जो कि काफ़ी विकराल हो चुका था.

पंकज आराधना को थोड़ी सी गान्ड उपर उठाने के लिए बोलता है और ठीक उसी के कहने से आराधना अपनी गान्ड को उठाती है. आराधना की चूत अभी भी पानी के अंदर ही थी, पंकज अपना हाथ ले जाकर ठीक अपने लंड को पकड़ता है और सीधा उसकी चूत पर लगाता है. आराधना एग्ज़ाइटेड थी इस बाथटब सेक्स के लिए…….. पंकज उसके सोचने से पहले ही पानी मे छप से उसे नीचे करता है और लंड आधा अंदर.

 

“आआअहह….. पेन होता है………….आराम से………….” आराधना पानी के अंदर ही एक मुक्का पंकज के सीने मे जमा देती है.

 

दोनो का बस उपरी हिस्सा पानी से बाहर था. आराधना की चूत मे लंड घुस भी चुका था लेकिन ठंडा पानी उसकी चूत की सर्फेस पे रहते हुए आराम भी दे रहा था. नही तो अगर ये झटका उसे बेड पर लगता तो शायद उसे संभालना बड़ा मुश्किल होता आराधना के लिए.

 

करीब दो मिनिट पंकज कोई मूव्मेंट नही करता और उस ठंडे पानी मे ऐसे ही आराधना को अपने सीने से चिपका कर रखता है. फिर धीरे धीरे से नीचे हाथ ले जाकर आराधना की गान्ड को उठाता है जिससे कि लंड बाहर आ जाता है और फिर से नीचे टिका देता है. पानी मे भी छप्प की आवाज़ आती है.

 

धीरे धीरे पंकज स्ट्रोक लगाने शुरू कर देता है. पानी भी ऐसे हिल रहा था जैसे की पता नही कौन सा तूफान आ रहा था पानी मे. थोड़ा थोड़ा पानी हर झटके के साथ नीचे भी गिर जाता था.

 

“हमम्म्मममममममम……………… लव……..यू…………….प्लीज़ फकक्क्क्क्क मी……….”आराधना की मोनिंग शुरू हो चुकी थी, अपने आप को लकी भी समझ रही थी कि पहले सेक्स बेड पर और दूसरा बाथटब मे हो रहा है तो पता नही तीसरा कहाँ होगा.

 

बाथ टब के अंदर ही पंकज के दोनो हाथ आराधना की गान्ड पर थे जोकि हर धक्के के दौरान उन्हे उपर उठाते और फिर नीचे लाते. आराधना की आँखे बस मस्ती मे बंद थी.

 

“आआहहहहहहहः………….म्*म्म्मममह…………………..एसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……….सस्शसशह………” आराधना की ये आवाज़े शुक्र है कि होटेल मे आ रही थी नही तो किसी घर मे ये आवाज़े किसी के भी कानो मे जा सकती थी.

 

धक्को की स्पीड धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी…… पानी मे भी छप छप ज़्यादा तेज होने लगी थी..

 

“ कितना………………अछ्ह्ह्ह्ह्ह्हाआअ……लगता……..हाईईीजज़ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज……………..फक मी……प्लीज़………………” पंकज के सामने जब भी आराधना उपर नीचे होकर धक्के लगा रही थी तो उसके बूब्स बेहद ज़्यादा हील रहे थे, ये सिचुयेशन पंकज को और भी ज़्यादा एग्ज़ाइटेड कर रही थी. उसका मोटा लंड आराधना की स्वीट सी चूत मे बार बार अंदर जा रहा था और बार बार बाहर आ रहा था.

 

“ आआअहह…..आअहह…….आअहह…………..” आराधना अपने लिप्स से और भी सेक्सी वाय्स निकाल रही थी और शायद वो नॅचुरल ही थी.

 

करीबन 3 मिनिट और बाद आराधना की बॉडी अकड़ने लगती है और उसके नेल्स खुद बे खुद पंकज की छाती को नोच देते है. आराधना को इस ऑर्गॅज़म का अहसास भी नही था, उसे सेक्स का रियल टेस्ट अभी पता चला था. “आआअहह……..आहहहहहहाहा…..आइ………एम्म्म……कमम्मिंग्ज्ज………………” उसकी चूत बार बार खुलने और बंद होने लगी थी, एक अलग ही सेक्सी नज़ारा था ये.

 

आराधना की चूत अपना सारा रस छोड़ चुकी थी और पंकज अभी भी उस बाथटब के पानी को छेड़ते हुए धक्के लगा रहा था.

 

आराधना की सिचुयेशन अभी ऐसी ही थी क्यूंकी पंकज के धक्को से अभी भी उसके बूब्स उपर नीचे हो रहे थे. क्यूंकी आराधना अभी नयी लड़की थी तो पंकज उसकी चूत की केर भी कर रहा था और यही सोच कर उसने अपने एक्सपीरियेन्स को यूज़ करते हुए अपने को भी फाइनल अंजाम तक पहुँचाता है.

 

“ आअहह…….आअहह” और ये होते हुए पंकज आराधना को नीचे झुकाता है और अपने होठ उसके होंठो से लगा देता है.

 

बाथ टब मे पानी का मूव्मेंट अब थम गया था, ऐसा माहौल हो गया था जैसे कोई तूफान आकर थम गया हो. आराधना की आँखे जैसे ही मिलती है पंकज से वो शरमा जाती है और धीरे से उठ कर बाथटब से बाहर आ जाती है. पंकज के सामने अब उसकी गान्ड थी. आराधना बिना पीछे मुड़े टवल उठाती है और अपने आपको ढक कर बाहर चली जाती है.

 

कुच्छ ही मिनिट्स के बाद पंकज भी एक टवल लपेट कर बाहर आ जाता है. आराधना बेड पर उस टवल को लपेट कर ही बैठी थी, लेकिन उसकी निगाहे नीचे की तरफ थी. उस रूम मे अभी शांति का माहौल था.

 

पंकज आगे बढ़ कर अपने बालो को टवल से पुच्छने लगता है. टवल जैसे ही उसकी बॉडी से हट जाता है तो फिर से उसकी नंगी बॉडी पंकज के सामने थी.

 

“ मॉर्निंग मे आप कितने बजे बाहर जाओगे………….?” आराधना साइलेन्स को तोड़ते हुए पंकज से पूछती है.

 

“ करीबन 10 बजे…..” पंकज मिरर मे ही देखते हुए रिप्लाइ करता है.

 

“ और आओगे कितने बजे………..?”

 

“ डिपेंड करता है कि सिचुयेशन क्या है. अगर सेकेंड कॉंट्रॅक्टर मान जाए तो शायद ज़्यादा जल्दी आ जाउ नही तो ईव्निंग भी हो सकती है…….” पंकज अब तक अपने बाल पोन्छ कर बेड पर आ जाता है और आराधना के साइड मे बैठ जाता है.

 

“ तो दूसरा कॉंट्रॅक्टर कहाँ देल्ही का ही है…………?” आराधना पंकज से पूछती है

 

“ ये तो पता नही कहाँ से है लेकिन इसी होटेल मे रूका हुआ है. अब तक ये डील मेरी हो चुकी होती अगर वो ना होता लेकिन किस्मेत ही साथ नही दे रही……” पंकज फिर से सीरीयस हो चुका था.

 

“ आप टेन्षन ना लीजिए….. मुझे पूरा यकीन है कि सब सही हो जाएगा. अब आप आराम कर लीजिए……….” आराधना पंकज के सर मे हाथ फिराते हुए बोलती है.

 

पंकज बेड पर बिना कपड़ो के ही लेट जाता है और नींद के आगोश मे थोड़ी देर मे ही चला जाता है. क्यूंकी वो ड्रिंक भी कर चुका था और आराधना ने अच्छे से सॅटिस्फाइड भी कर दिया था. आराधना आज पंकज को देख कर बहुत हॅपी थी और वो भी पंकज के बराबर मे ही लेट जाती है.

 

दूसरी तरफ

 

सिचुयेशन काफ़ी बदल चुकी थी लेकिन वहीं से शुरू करते है जहाँ से छोड़ा था.

 

कुशल स्मृति को अच्छे से फक कर चुका था और तभी उपर प्रीति जाग जाती है.

 

“कुशल……..कुशल….कुशल…..कुशल………” उपर से प्रीति की चिल्लाने की आवाज़ आती है. शायद वो जाग गयी थी. एक तरफ आज स्मृति ने कुशल को अपपना दीवाना बना लिया था और वो अब उसको बॅक साइड से फक करने का वेट कर रहा था लेकिन प्रीति के इस रिक्षन से वो डर जाता है.

 

“ प्रीति ऐसे क्यूँ चिल्ला रही है…. ? जा उपर जाकर देख………..” स्मृति कुशल को समझाती है. कुशल अपने कपड़े पहन कर उपर की तरफ भागने लगता है. अभी उसका लंड सही से बैठा भी नही था और वीर्य की बूंदे अभी भी उसमे थी.

प्रीति शॉक्ड थी कि कुशल उसे खुद उसी के रूम मे बंद करके कहाँ भाग गया और वो भी बाहर से गेट बंद करके गया था. विंडो से प्रीति देखती है कि कुशल भाग कर नीचे से आ रहा है, उसको शक होता है की ये इतनी रात मे कहाँ से आ रहा है.

कुच्छ ही पलो मे दोनो लड़कियाँ प्रीति और आराधना कली से फूल बन चुकी थी.

नेक्स्ट मॉर्निंग

“ आरू……..आरू……………” आराधना जब सुबह नींद के घेरे से बाहर निकलती है तो पंकज उसे जगा रहा था. अपनी आँखो मे हाथ फिराते हुए आराधना नींद से जागती है तो देखती है कि पंकज तो जाने के लिए तैयार हो चुका था.

“ आप….आप इतनी जल्दी तैयार हो गये…………????” आराधना होश मे आते हुए बोलती है.

“ जल्दी नही 10 बज चुके है…….. अब मैं जा रहा हू और ईव्निंग तक आ जाउन्गा. तुम आराम करना और ब्रेकफास्ट कर लेना. कोई ज़रूरत हो तो फोन कर लेना. लंच कल की तरह ही लॉबी मे कर लेना. अगर कहीं बाहर घूमने का मन करे तो मे अपना क्रेडिट कार्ड भी छोड़ कर जा रहा हू………..” पंकज अपनी तरफ से जितना सपोर्ट कर सकता था वो कर रहा था और डॅड होने का पूरा फ़र्ज़ निभा रहा था.

“ थॅंक यू सो मच डॅड…. बाहर जाने का तो कहीं मूड नही है. बस आप ईव्निंग मे जल्दी आ जाना…..” आराधना स्माइल करते हुए कहती है

“ ओके देन…टेक केर आंड बाइ……” ये बोल कर वो होटेल रूम से बाहर चला जाता है

आराधना फिर से सो जाती है, कल रात की मस्त चुदाई का खुमार अभी तक नही उतरा था. वो करीब दोपहर को उठती है और वॉशरूम मे जाकर फ्रेश होती है. रूम मे ही वॉटर बाय्लर के सहारे चाइ बनाती है और फिर नीचे जाकर लंच करती है.

अब आराधना लंच करके अपने रूम मे फिर से आ जाती है. थोड़ी देर बैठ कर टीवी देखती है लेकिन उसको बोरियत हो रही थी. वो पंकज को फोन मिलाती है –

“ हाई आरू….. लंच कर लिया……….??” पंकज फोन पर पूछता है

“ हाँ डॅड कर लिया है….. बस रूम मे मन नही लग रहा है. आप कितने बजे तक आओगे???” आराधना उससे बहुत भोला बन कर पूछती है.

“ वैसे मैं होटेल के करीब ही हू तो थोड़ी देर मे आ जाउन्गा……..इतने तुम कैसे भी टाइम पास कर लो…….ठीक है??”

“ ओके डॅड… आप आइए मैं वेट कर रही हू……” और फिर कॉल डिसकनेक्ट हो जाता है. आराधना तो ऐसे एग्ज़ाइटेड हो रही थी जैसे कि उसके डॅड नही उसके हज़्बेंड आ रहे हो.

वो कुच्छ सोचती है और सोच कर एग्ज़ाइटेड हो जाती है “ क्यू ना आज डॅड को सर्प्राइज़ दे दू……….” वो अपने मन मे सोचती है और भाग कर अपने बॅग के पास जाती है. उसको ये अहसास था कि पंकज जल्दी ही आने वाला है तो वो बॅग से एक नाइट ड्रेस निकालती है.

“ आज डॅड को अपना वो रूप दिखाउंगी कि वो सपनो मे भी मुझे ही देखेंगे…….” ये सोच कर वो बाथरूम मे घुस जाती है.

अपनी फुल स्किल्स को यूज़ करती है वो कुच्छ ही मिनिट्स मे अपने आप को वो एक सेक्सी लुक दे देती है. हेर स्टाइल, लिप्स, आइज़ सब को अच्छे तरीके से उसने मेक अप किया था और उपर से वो डार्क पिंक कलर का नाइट ड्रेस. एक्सट्रा क्लीवेज से वो और भी सेक्सी लग रही थी, शायद इतनी कयामत वो पहले कभी लगी हो. अपने आप को मिरर मे देखने के बाद वो खुद भी शरमा रही थी.

बाथरूम से बाहर आकर वो ड्रेसिंग टेबल के सामने बार बार घूम कर देखती है. उपर वाले का शुक्रिया अदा भी करती है कि उसने उसे इतने सुंदर जिस्म का मालिक बनाया.

एक एक मिनिट भारी कट रहा था उसके लिए…. वो काफ़ी एग्ज़ाइटेड थी अपने इस रूप को दिखाने के लिए वो बेकरार थी. अभी वो अपने बालो को अपने माथे से हटा ही रही थी कि तभी डोर बेल बजती है –

त्रिंगगगगगगगगग……त्रिंगगगगगग………. आराधना के दिल की धड़कने बढ़ जाती है. वो गेट खोलने के लिए आगे बढ़ती है. अपनी ड्रेस को थोड़ा सा और नीचे करती है ताकि पंकज को और भी ज़्यादा दर्शन हो पाए. वो आगे बढ़ कर गेट के करीब पहुँचती है और सर झुका कर गेट खोलती है.

वो शॉक्ड रह जाती है जब अपना सर उठाती है. उसके हाथ अपने आप अपने मूँह पर चले जाते है, उसके सामने एक करीबन 40 साल का आदमी और एक सेक्सी लेडी खड़ी थी. उस लेडी की एज भी 35 के करीब होगी लेकिन देखने मे काफ़ी सेक्सी थी.

आराधना की तो जैसे जान ही निकल गयी क्यूंकी वो थी ही ऐसी कंडीशन मे, एक ही पल मे उसकी आँखो के सामने तारे छा गये लेकिन उसने हिम्मत नही हारी. सेकेंड्स मे ही वो सोचती है कि आख़िर ये कौन है और ये क्या सोचेंगे कि ऐसी ड्रेस को पहन कर मे किसका वेट कर रही हू.

“ जी मिस्टर. ग्रोवर है??” आदमी बड़े ही जेंटल तरीके से पुछ्ता है.

“ वो बाहर गये है, शायद थोड़ी देर मे आ जाएँगे…” आराधना भी थोड़ी हिम्मत जुटा कर जवाब देती है.

“ आप…………??” आदमी आराधना से पूछना चाहता है लेकिन इससे पहले कि आराधना जवाब देती कि उस आदमी के साथ वाली लेडी बोल पड़ती है.

“ ओफफ्फ़ ऊओ…….आइडिया नही लगा सकते कि उनकी वाइफ है…..” वो लेडी आराधना की ड्रेस की तरफ इशारा करती है. आराधना को तो नकली स्माइल करनी पड़ रही थी लेकिन वो ये भी नही बोल सकती थी कि वो पंकज की बेटी है नही तो और बहुत सारे इश्यूस जेनरेट हो सकते थे.

“ बट ही ईज़ वेरी लकी…… वेरी सेक्सी वाइफ…….” सामने खड़ी लेडी एक स्माइल के साथ ये बोलती है.

“ थॅंक यू…… अंदर आइए ना………” आराधना उन्हे अंदर इन्वाइट करती है.

“ नही….शायद आप लोगो का प्रोग्राम कुच्छ और है…. वैसे भी हम उनसे बाद मे मिल लेंगे. हम इसी होटेल मे और इसी फ्लोर पर रुके है….” वो आदमी फिर से जवाब देता है.

“ चलिए ठीक है….. वो आएँगे तो उन्हे बता दूँगी………..” आराधना के ये बोलते ही वो दोनो हाथ पकड़ कर चल देते है. आराधना भी ये आइडिया लगा लेती है कि वो दोनो हज़्बेंड वाइफ है.

जाते जाते वो लेडी आराधना को पीछे मूड कर देखती है और एक प्यारी सी स्माइल देती है और आराधना भी बदले मे उसे स्माइल देती है. आराधना उन दोनो को जाते हुए देखती रहती है और वो लेडी बार बार पीछे मूड कर देख रही थी.

उस फ्लोर पर और कोई नही था. आराधना के रूम के थोड़ी ही दूरी पर वो दोनो अपने रूम मे एंटर हो जाते है, रूम मे एंटर होते होते वो लेडी फिर से पीछे देखती है और आराधना को एक स्माइल देती है. आराधना खुद शॉक्ड थी कि आख़िर ये हो क्या रहा है और ये क्या ड्रामा हो गया.

वो दोनो रूम मे एंटर हो जाते है और ये सब आराधना अपने रूम मे खड़े खड़े ही देख रही थी. रूम मे एंटर होने के टाइम वो अपने गेट को बंद नही करती, आराधना सोच रही थी कि आख़िर ये लेडी बार बार पीछे क्यू देख रही है. पता नही सही था या नही लेकिन आराधना अपना एक दुपट्टा उठाती है और उसे लपेट कर धीरे धीरे उनके रूम की तरफ चल देती है. उस फ्लोर पर और कोई नही था.

कुच्छ कदम बढ़ाने के बाद ही उनका रूम आ जाता है, आराधना चुप से एक कॉर्नर मे खड़ी हो जाती है. अंदर की फुसफुसाहट से अहसास हो रहा था कि अंदर जाते ही वो दोनो लिपट गये थे एक दूसरे से….

“ ओह..ऊऊऊऊ…. छोड़ो प्लीज़….क्यू गरम हो रहे हो उस सूपर सेक्सी वाइफ को देख कर……..” ये शायद उस लेडी की आवाज़ थी. आराधना सोच रही थी कि ये सब ये गेट खोल कर कैसे कर सकते है लेकिन वो समझ गयी थी कि वो लेडी उसी के बारे मे बात कर रही थी.

“ वैसे सिम्मी….. इस साले ग्रोवर ने कहाँ पत्थर से हीरा खोज कर निकाला है. कसम से हिला दिया उस लड़की ने तो……..” ये उस आदमी की आवाज़ थी.

“ .… तो वो हीरा है….चलो अब मे थोड़े हीरे अपने अंदर भी दिखाती हू……….” ये उस लेडी की सेक्सी वाय्स थी. आराधना को ये बात ज़्यादा परेशान कर रही थी कि अब अंदर हो क्या रहा है. वो थोड़ा आगे बढ़ कर अंदर झाँकती है. उसकी नज़र सीधी उस लेडी पर पड़ती है

लेडी को देखते ही समझ जाती है कि अब इनके बीच चुदाई होने वाली है. आराधना देखती है कि वो लेडी आगे बढ़ रही है और आगे बढ़ कर वो उस आदमी की पॅंट खोलती है –

ओह्ह्ह तो आज ये इतना आक्टिव उसी के बारे मे सोच कर हो रहा है………” उस लेडी का इशारा शायद आराधना की तरफ ही था. आराधना थोड़ा और ज़्यादा झुकती है……..ओह्ह्ह माइ गॉड……… उसे एक विकराल लंड दिखाई देता है. आराधना इससे पहले की और कुच्छ देर उसे देख पाती कि वो लेडी उसे मूँह मे भर लेती है

इस सीन ने आराधना की चूत को हिला कर रख दिया था और वो ये सोच कर एग्ज़ाइटेड थी कि खुद उसके रूप को देख कर ही उस आदमी का लंड ऐसा खड़ा हो गया था. आराधना और ज़्यादा देखना चाहती थी लेकिन तभी उसे मोबाइल की बेल सुनाई देती है जोकि उसी के रूम मे था. उसने वहाँ से हटना ही सही समझा और वो भाग कर अपने रूम मे आ जाती है.

फोन पंकज का ही था. “ हेलो डॅड………” आराधना पूछती है.

“ आरू….हाँफ क्यू रही है…..सब ठीक तो है ना………..?” पंकज को आराधना की सांसो से आइडिया लग जाता है कि वो हाँफ रही है.

“ नही वो बाथरूम मे थी और भाग कर बाहर निकली हू…………… आप कहाँ है??” आराधना पूछती है.

“ मैं बस पास मे ही हू… कुच्छ चाहिए तुम्हे…..?” पंकज पुछ्ता है.

“ नही बस आप आ जाइए…..” आराधना की इस बात से फोन डिसकनेक्ट हो जाता है. फोन काटने के बाद भी आराधना का माइंड पता नही उस रूम मे हो रही आक्टिविटीस पर था लेकिन अब पंकज आने वाला था तो उसने रूम मे रुकने का डिसिशन लिया…..

दूसरी तरफ

कुशल सोकर उठता है और अपने बेड पर हाथ फिराता है लेकिन उसे प्रीति दिखाई नही देती. वो समझ जाता है कि वो उठ चुकी है. कुशल भी अपने बेड से खड़ा होता है और गॅलरी मे आता है.

गॅलरी मे आते ही एक मीठी खुसबु उसकी सांसो से टकराती है, वो नज़रे घुमाता है तो जैसे प्रीति को देखकर बेहोश ही हो जाता है. वो एक डीप नेक टीशर्ट पहन कर कहीं जाने की तैयारी कर रही थी, उसकी टीशर्ट इतनी डीप नेक थी कि उसकी ब्रा भी दिख रही थी. ब्रा क्या उसके बूब्स भी ज़्यादा छिप नही रहे थे,

“कहाँ चली सुबह सुबह…………..?” कुशल प्रीति से पूछता है

“ तुझसे मतलब……” और प्रीति स्टाइल मे अपने बाल झटकते हुए आगे बढ़ने लगती है.

“ क्या हमारी याद तभी आती है जब छूट मारनी होती है……………..” कुशल पीछे से उसे ताना मारता है.

प्रीति रुकती है, उसकी गान्ड अभी कुशल के सामने थी. वो स्टाइल मे पीछे मुड़ती है और बालो मे हाथ फिराते हुए फिर से कुशल की तरफ बढ़ती है.

“ तुझे सुबह सुबह ये गंदी बाते करने के सिवाय कुच्छ और काम नही है……. क्या मैं कहीं अपने काम से नही जा सकती”. प्रीति कुशल की आँखो मे देखते हुए जवाब देती है

कुशल आगे बढ़ता है और उसकी चेहरे के करीब आते हुए बोलता है कि –“ऐसे रूप मे बाहर जाएगी तो पुच्छना ही पड़ेगा ना…..वैसे कसम से सुबह सुबह एक राउंड हो जाए तो तेरी जवानी मे निखार आ जाए……” कुशल अपने लिप्स प्रीति के लिप्स की तरफ बढ़ाता है.

प्रीति उसके लिप्स अपने लिप्स के करीब आते ही उस पर एक उंगली रख देती है और कहती है – “ तू उसकी जवानी पे निखार ला जिसके लिए कल तू मुझे बंद कर के भाग गया था….. सुबह सुबह राउंड भी उसी के साथ कर……..” और ये बोल कर प्रीति वापिस घूम कर नीचे की तरफ जाने लगती है.

“ अब अपना दिल काट कर तो तुझे यकीन नही दिला सकता कि मैं मास्टरबेशन ही कर रहा था……… और तुझे यकीन नही है तो मत कर…..” कुशल पीछे से एमोशनल डाइलॉग मरता है.

“ दिल तो क्या तू कुच्छ भी काट कर दिखा दे…….. मुझे यकीन है कि कल तूने किसी और के भी साथ……… लेकिन मुझे इस बारे मे कोई बात नही करनी……” और ये बोल कर प्रीति धीरे धीरे नीचे उतर जाती है.

अब प्रीति घर से बाहर आ चुकी थी. अभी तक कुशल को भी आइडिया नही था कि इतना सेक्सी बन कर वो कहाँ जा रही है. आक्च्युयली मे आज प्रीति का प्लान कहीं बाहर घूमने का था वैसे भी वो घर से बाहर कहीं नही जाती है जबसे उसके एग्ज़ॅम ख़तम हुए है.

वो आज सीधा आराधना के कॉलेज पहुँचती है. अभी तक भी कुच्छ आइडिया नही था कि आख़िर उसके माइंड मे क्या चल रहा है, कॉलेज मे एंटर होती है. कॉलेज मे एंटर होते ही उसकी चाल ऐसी हो जाती है जैसे कोई मॉडेल रॅंप पर चल रही हो, उसकी चाल मे एक मेचुरिटी थी जो कि अच्छी अच्छी सेक्सी लड़कियो मे भी नही होती है. एंट्रेन्स से ही कॉलेज के लड़के उसको ऐसे देखने लगे जैसे कॉलेज मे कोई बिजली कड़क रही हो, प्रीति को खुद भी इस बात का अहसास था तभी तो आज इतना सेक्सी मेक अप करके आई और उसका पूरा फ़ायदा उठना चाहती थी.

लड़कियो को अपने रूप से उतनी ही शांति मिलती है जितना की बाकी लड़के उसे देखते है, और प्रीति ने तो आज कॉलेज मे वो माहौल कर दिया था की हर लड़का उसी को देख रहा था. कुच्छ लड़को ने कॉमेंट भी गये जिन्हे प्रीति ने हंस कर टाल दिया.

प्रीति अभी कॉलेज मे एंटर होकर थोड़ी दूर ही चली थी एक रोमॅंटिक सी विज़ल उसके कानो से टकराती है. प्रीति उसे कानो से सुनती तो है लेकिन मूड कर देखती नही –

“ क्या बात है…..?” उसके कानो मे फिर ये आवाज़ टकराती है. प्रीति रुकना तो नही चाहती थी लेकिन सेकेंड के हजारवे हिस्से से आवाज़ आई कि ये तो किसी लड़की की आवाज़ है. हाँ ये तो किसी लड़की की आवाज़ है……. उसका माइंड फिर बोलता है. ये सोचते ही वो मुड़ती है –

“ हाई दीदी………….” प्रीति को सिमरन दिखाई देती है, आक्च्युयली प्रीति की तरफ विज़ल बजाने वाली और वो आवाज़ देने वाली सिमरन ही थी. वो भी क्या गजब रूप मे थी, अल्ट्रा लो वेस्ट जीन्स और टॉप. टॉप भी बहुत शॉर्ट था, जिससे उसकी नेवेल क्लियर दिख रही थी. बाल खुले हुए थे और एक मस्त सेक्सी खुसबु आ रही थी उसमे से, उसकी लिप स्टिक का कलर ज़्यादा डार्क नही था लेकिन लिप्स को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उन पर हनी पड़ा हो

“ हाई प्रीति…….. स्वीटी आज यहाँ कैसे बिजली गिरा रही है….” सिमरन आगे बढ़ प्रीति को हग करते हुए बोलती है. सिमरन एक मस्त लड़की थी तो हग करने के टाइम वो अपने बूब्स से प्रीति के बूब्स को थोड़ा सा प्रेस कर देती है लेकिन प्रीति उसकी इस आक्टिविटी को इग्नोर करती है.

“ दीदी बिजली तो आप गिरा रही हो…..कसम से……..क्या बताऊ मैं आपके बारे मे कि कैसी लग रही हो…….” प्रीति सिमरन को उपर से नीचे तक देखते हुए बोलती है.

“ अबे तू तो ऐसे देख रही है जैसे लड़के भी नही देखते…….हे हे हे हे. एनीवे ये बता कि क्या अपनी बहन की कमी पूरी करने आई है क्या कॉलेज…….” सिमरन प्रीति से पूछती है.

“ नही तो मेरी एक….. एक फ्रेंड है इस कॉलेज मे….सोचा कि उससे मिल लू………..” प्रीति की आवाज़ मे लड़खड़ाहट थी.

“ ओये होये……ऐसी कौन सी फ्रेंड आ गयी स्वीटी अचानक इस कॉलेज मे…. जिससे मिलने तू ये टी-शर्ट के बटन खोल कर आई है…………” सिमरन भी कोई नादान लड़की नही थी और वो समझती थी कि प्रीति कुच्छ छिपा रही है.

“ दीदी…… क्या बताऊ……बटन बंद ही नही होते…… हा हा हा हा हा” प्रीति भी रोमॅंटिक अंदाज़ मे इस बात को टालते हुए बोलती है. खैर दोनो बात करते करते कॅंटीन मे आ जाती है और एक कॉर्नर मे आकर बैठ जाती है.

“ अच्छा अब बाते ना बना और ये बता कि क्या खाएगी………” सिमरन उठ कर कुच्छ लाने के लिए जाते हुए पुचछती है.

“ वोही जो कल रात तूने खाया था मेरे भाई से……….” प्रीति बहुत ही लो वाय्स मे बोलती है जिसे उसके सिवाय कोई और नही सुन सकता था.

“ क्या कहा तूने……?” सिमरन रुक कर पूछती है.

“ वो दीदी मैं तो बस जूस लूँगी……….” प्रीति उसे रिप्लाइ करती है. सिमरन वापिस मूड कर काउंटर पर चली जाती है. प्रीति की निगाहे उसकी मतकती हुई गान्ड पर जाती है जोकि लो वेस्ट जीन्स मे और भी गजब ढा रही थी.
“ साली ने कुशल से मरवा मरवा कर देखो क्या सेक्सी फिगर कर ली है………” प्रीति अपने मन मे सोचती है. दर असल उसे पूरी रात ऐसा लगता रहा जैसे की कुशल रात सिमरन के साथ ही था और वैसे भी दोनो घर आस पास ही है.

सिमरन जूस लेकर आती है और प्रीति के सामने चेर पर पाँव पर पाँव रख कर बैठ जाती है –

“ दीदी क्या खा रही हो आज कल….फिगर बहुत गजब कर रखा है……” प्रीति जूस का ग्लास अपने हाथ मे लेते हुए बोलती है.

“ मैं खाती भी हू और पीती भी……..” सिमरन प्रीति के करीब आते हुए और बहुत ही रोमॅंटिक अंदाज़ मे बोलती है. आक्च्युयली ये उसका नेचर ही था.

“ क्या…??” प्रीति उसकी ये बात सुनकर पूछती है.

“ खाना खाती हू और जूस पीती हू…… क्यू तूने क्या सोचा….??” सिमरन अपनी आँखो को बड़ा करते हुए प्रीति से पूछती है.

“ नही……कुच्छ नही….. आप भी ना… बहुत फन्नी हो……..” प्रीति जूस पीते हुए बोलती है.

“ अच्छा चल अब सच सच बता की कॉलेज का राउंड कैसे लगा…. कोई बॉय फ्रेंड वॉय फ्रेंड का तो चक्कर नही है. अगर है तो मुझे बता दे, आज ही तेरा टांका फिट करा देती हू………………” सिमरन फिर से मज़ाक मे बोलती है.

“ नही दीदी… ऐसी बात नही है. मुझे ऐसा कोई पसंद नही है………..” प्रीति भी उस बात को टलने के लिए जवाब दे देती है.

“ क्या……तुझे लड़के पसंद नही…………..??” सिमरन भी अपने बटन बंद करते हुए आक्टिंग करते हुए बोलती है.

“ नही… नही ऐसी बात नही है. मुझे पसंद है लेकिन अभी तो कोई नज़र मे नही है…… और वैसे भी अभी तो बच्ची हू मे……..” प्रीति भी शरमाते हुए बोलती है.

‘ ओह्ह्ह… शुक्र है. मैं तो डर गयी की कहीं हमारी प्रीति को लड़कियाँ तो पसंद नही आने लगी… हे हे हे हे हे”.

“ हा हा हा हा….. मज़ाक बहुत करती हैं आप….. आप बताइए कि आपको क्या पसंद है. लड़की कि लड़के……….” प्रीति पूछती है.

“ आज सुबह तुझे देखा तो लगा कि लड़कियो को पसंद करना ही शुरू कर दू……….. सच मे ग्रेप्स से ऑरेंज बनती जा रही है.” सिमरन प्रीति के बूब्स की तरफ देखते हुए बोलती है.

“ दीदी….. अब ये चीज़े हमारे हाथ मे तो होती नही………” प्रीति का इशारा था कि बूब्स का इतना बढ़ना तो नॅचुरल है.

“ हाँ भाई ये हमारे हाथ मे नही…. ये तो उसके हाथ मे है जिनके हाथो मे ये होते है…. हा हा हा हा हा” सिमरन भी कहीं पर मज़ाक करने से नही चूकती थी.

“ वेरी फन्नी…….” प्रीति भी हंस कर उसकी बात को टाल देती है.

“ चल छोड़ और बता घर पे सब कैसे है…. कुशल कैसा है… मोम कैसी है?” सिमरन पूछती है

“ मुझे पता था यू बिच कि पहले तू कुशल के बारे मे ही पुछेगि……………” प्रीति अपने मन मे ही सोचती है

“ वो तो सब वैसे ही है जैसे आपने छोड़े थे……” प्रीति का मतलब था कि वो सब वैसे ही है जैसे कि आपने कल रात छोड़े थे.

“ गुड….” सिमरन जूस के सीप लेते हुए बोलती है.

“ गुड तो बोलेगी ही……..” प्रीति फिर से मन मे सोचती है.

“ और सुना……. क्या चल रहा है लाइफ मे…. कोई मिला या नही अभी तक…..” सिमरन बात को आगे बढ़ाती है.

“ मुझे कोई नही मिला अभी तक तो…….” प्रीति उसे जवाब देती है.

“ तो रात को कैसे सोती है मेरी स्वीटी…………… नींद आ जाती है…………..” सिमरन उसके गालो को खींचते हुए बोलती है.

“ आप कैसे सोती हो रात मे…………” प्रीति तो बस उसके मूँह से पता नही क्या सुन ना चाहती है.

“ मेरी मत पुच्छ यार……. मैं तो रात को सोती ही नही हू…………… लेकिन किसी और रीज़न से………… हे हे हे हे हे” सिमरन तो आज भी पहले की तरह ही मस्त थी.

“ सोएगी कैसे जब कुशल से सारा काम कराएगी तो…..” प्रीति अपने मन मे सोचती है.

“ तो फिर क्या करती हो रात को आप……..” प्रीति भोला बन कर पूछती है.

“ मैं………ह्म्*म्म्ममममममम……….क्या बताऊ…… तुझे आराधना बता देगी कि मैं क्या करती हू…………….” सिमरन उसे बताती है.

“ ओह्ह कहीं आराधना दीदी ने ही तो कुशल और सिमरन का कनेक्षन तो नही करा दिया… बड़ी पहुँची हुई निकली आराधना दीदी तो…….भाई और सहेली दोनो का भला करा दिया और मुझे भूल गयी………” प्रीति अपने मन मे सोचती है.

“ मेरे लिए तो आप भी आराधना दीदी जैसी ही हो…. आप ही बता दो ना कि क्या करती हो रात को आप…………………” प्रीति फिर से भोला बनते हुए बोलती है.

“ क्या बात है प्रीति……. बड़ी बेताब है जान ने के लिए………….. कहे तो प्रॅक्टिकल करके बता दू…………..” सिमरन ने ये बात भी मज़ाक मे ही कही थी.

“ बता दो ना…………” प्रीति भी बड़े रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिमरन की तरफ देखते हुए बोलती है.

“मजबूर हू……. मेरे पास एक चीज़ मिस्सिंग है नही तो बता देती कि मैं रात को क्या करती हू………….” सिमरन फिर से जूस पीते हुए बोलती है.

प्रीति उसकी बात का मतलब समझ कर शरमा जाती है. वो ये भी सोचती है कि इतनी मस्त लड़की आराधना दीदी की फ्रेंड कैसे है.

“ तो तू शरमाती भी है……… मेरी जान लाइफ एक है. और वैसे भी इन सब बातो से कौन बच पाता है………..” सिमरन बोलती है.

“ तो आप अभी तक बची हुई हो या नही………….” प्रीति का इशारा था कि चुद चुकी हो या नही.

“ आज के टाइम मे कौन बचा होता है….. और सच बोलू…….. बचा के करना भी क्या है……….. हा हा हा हा हा हा…….” सिमरन हंसते हुए बोलती है.

“ कसम से दीदी मस्त हो आप भी…… आराधना दीदी आपकी कैसे फ्रेंड बन गयी…………..” प्रीति उसकी आँखो मे देखते हुए बोलती है.

“ वाकई मे यार आराधना तो कई बार मुझे भी बोर कर देती है लेकिन अब धीरे धीरे लाइन पर आ रही है……” सिमरन प्रीति को बताती है.

सिमरन खड़े होते हुए बोलती है.

“ दीदी आपको कहीं क्लास वग़ैरा तो नही जाना है ना…..” प्रीति सिमरन से पूछती है.

“ क्लास तो मैं तब भी नही लेती जब आराधान कॉलेज मे होती है. कॉलेज क्लास लेने के लिए नही बना, हाँ बाकी बहुत कुच्छ है यहाँ लेने के लिए……” सिमरन फिर से मज़ाक करते हुए बोलती है.

प्रीति भी अब खड़ी हो जाती है और दोनो कॉलेज की कॅंटीन से बाहर आ जाते है. कॉलेज की गॅलरी मे वॉक करते करते दोनो बात करने लगते है. प्रीति का मेन टारगेट था कुशल और सिमरन के बीच की मिस्टरी को जान ना था.

“ दीदी आपको लड़के कैसे पसंद है……..?” प्रीति साइलेन्स को तोड़ते हुए बोलती है.

“ मुझे…… ह्म्*म्म्मम…. हाइट होनी चाहिए…… चेस्ट मे थोड़ा दम होना चाहिए…. और सबसे खास बात कि वो बेड मे बेस्ट परफॉर्मर होना चाहिए…….” सिमरन अपने पर्स से सिगरेट बॉक्स को बाहर निकालती है और एक सिगरेट को लाइटर से जलाते हुए बोलती है.

“ तो इसने इसीलिए कुशल को चुना……. सहेली का घर भी नही छोड़ा इसने…..” प्रीति अपने मन मे सोचती है.

“ तो आपको कुशल जैसे लड़के पसंद है…………..” प्रीति आख़िर बोल ही देती है.

“ कुशल………ह्म्*म्म्म… हाइट है…..ह्म्*म्म…. चेस्ट भी है………… अबे हाँ यार लेकिन तेरे मन मे कुशल का ख्याल अचानक कैसे आ गया जानी. कहीं लाइन तो नही मार रही है तू अपने भाई पे……. वैसे सही कहा तूने, पर्सनॅलिटी सही है. लेकिन मेरे सामने हमेशा छोटा रहा तो इस नज़र से कभी देखा ही नही…” सिमरन स्मोकिंग करते हुए काफ़ी सेक्सी लग रही थी.

“ मैं क्यू लाइन मारने लगी उस पे…… मैं तो घर के बाहर नही जाती ज़्यादा तो इसीलिए पुच्छ लिया कुशल के बारे मे. आख़िर वो ही तो एक लड़का है जिसे मे देखती हू…………..” प्रीति उसको रिप्लाइ करती है.

“ लाइन मारियो भी मत….. नही तो ये भोले भाले भाई सब कुच्छ मार लेते है……….. हे हे हे हे” सिमरन हंसते हुए बोलती है.

“ आपके भाई ने भी कोई हरकत की है क्या…………??” प्रीति बड़े गौर से पूछती है.

“ क्या बात है आज बड़ी एंक्वाइरी कर रही है…. चल घर चलते है वहीं बात करते है…….” सिमरन प्रीति का हाथ पकड़ कर कॉलेज के गेट की तरफ चलते हुए कहती है.

“ स्मोकिंग करती है तू…..?” सिमरन प्रीति की तरफ देखते हुए बोलती है.

“ करी तो नही है लेकिन ऐसा भी नही है कि मुझे कुच्छ परहेज़ है…….” प्रीति जवाब देती है.

“ ये हुई ना फ्रेंड्स वाली बात……. ये ले…….” और सिमरन उसे सिगरेट बॉक्स मे से एक सिगरेट ऑफर करती है.

अभी तक दोनो चलते चलते पार्किंग एरिया मे आ चुके थे. प्रीति जैसे ही सिगरेट मूँह मे लगाती है तो सिमरन अपने दोनो हाथो मे लाइटर लेकर हाथ आगे बढ़ती है और उसकी सिगेरेट जलाती है. इसी दौरान सिमरन के हाथ प्रीति के बूब्स से टच हो जाते है वैसे भी उपर से तो काफ़ी ओपन टी-शर्ट थी उसकी.

“ वेरी सॉफ्ट……” सिमरन प्रीति के बूब्स के टच को रियलाइज़ करते हुए बोलती है. प्रीति भी उसके टच से थोड़ी सी हैरान थी.

सिमरन कार मे आकर बैठती है और दूसरी साइड से प्रीति, दोनो हॉट गर्ल्स स्मोकिंग कर रही थी. सिमरन कार स्टार्ट नही करती और विंडो ग्लास खोल कर बैठ जाती है.

“ तेरे स्मोकिंग स्टाइल से लगता नही है कि तूने कभी स्मोकिंग नही करी है………..” सिमरन प्रीति से बोलती है.

“ स्कूल टाइम मे कभी कभी कर लेती थी…. आप तो समझती ही है कि फ्रेंड्स नही मानती……….” प्रीति उसका जवाब देती है.

“ तेरा साइज़ क्या है????” सिमरन के इस सवाल से प्रीति शॉक्ड हो जाती है, उसको आइडिया नही था कि सिमरन उससे ऐसी बात कहेगी.

“ क्या…. क्या पुच्छा आपने…….” प्रीति शुवर होना चाहती थी कि जो उसने सुना वो सही है या नही.

“ तेरा साइज़ क्या है……….??” सिमरन और भी क्लियर शब्दो मे बोलती है

“ 34 सी………..” प्रीति उसकी आँखो मे देखती हुई जवाब देती है.

“ अनटच है या……….???? सिमरन ये पुच्छना चाहती थी कि किसी ने उसके बूब्स को टच किया है या नही.

प्रीति उसकी इस बात का कुच्छ जवाब नही देती या और वो सोच रही थी कि क्या जवाब देगी. वो विंडो के बाहर देखते हुए स्मोकिंग करती रहती है.

“ खामोशी बता रही है कि हमारी रानी साहिबा काम करा चुकी है…………” सिमरन फिर से मज़ाक करते हुए कहती है.

लेकिन प्रीति अभी भी कुच्छ नही बोलती. सिमरन उसकी बात से थोड़ा सा इरिटेट होती है और अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख कर दबाते हुए बोलती है –

“ सुन रही है स्वीटी……” सिमरन के इस तरीके से बूब्स पे एक बार फिर हाथ रखे जाने से प्रीति शॉक्ड हो जाती है.

“ हाँ दीदी सुन रही हू………..” प्रीति की आवाज़ मे एक कंपन्न थी और चेहरा भी लाल हो चुका था.

“ ओये मेरे टच से ही तू तो ऐसी हो गयी….. क्या बात है…..” सिमरन प्रीति की आँखो मे देखती हुई बोलती है.

“ टच तो टच होता है दीदी…… पता नही कैसा फील होता है…” प्रीति की आइज़ बहुत नशीली हो रही थी.

सिमरन कार स्टार्ट करती है और आगे बढ़ जाती है. प्रीति भी थोड़ी हैरान थी कि पता नही सिमरन ने उसकी इस बात का जवाब नही दिया.

“ दीदी आपके घर मे कौन कौन है….. कभी आराधना दीदी से पुछ्ने का तो टाइम मिला नही………” प्रीति सिमरन से पूछती है

“ मोम, डॅड, मी आंड माइ ब्रदर…. छूटा परिवार आंड खुशियाँ अपार……” सिमरन हंसते हुए बोलती है.

“ आपका एक भाई भी है…… आपने कभी बताया नही…….. आपसे छोटा है या बड़ा है” प्रीति थोड़ा एग्ज़ाइटेड होते हुए बोलती है.

“ बहुत क्रेज़ी हो रही है… मेरा भाई तेरा भी भाई लगता है…. हे हे हे हे हे… जस्ट किडिंग…. मुझसे दो साल बड़ा है. डॅड के बिज़्नेस मे हेल्प करता है…. काफ़ी हॅंडसम भी है………” सिमरन भी हॅपी होते बताती है.

“ दीदी आप तो ऐसे एक्सप्लेन कर रही हो जैसे अपने बॉय फ्रेंड के बारे मे बता रही हो….. कहीं भैया पे लाइन तो नही मार रही हो…….. हे हे हे हे हे” प्रीति भी सिमरन की पहली बात का बदला ले लेती है.

“यार बाते बड़ी बड़ी कर रही है…… चल अब टॉपिक छिड़ ही गया है तो एक बात पुछु माइंड तो नही करेगी…….?” सिमरन प्रीति से पूछती है.

“ आप भी कैसी बाते करती हो…… पुछो जो पुच्छना है. आइ आम ऐन ओपन गर्ल………..” प्रीति भी उसके दिल से बात निकलवाना चाहती थी.

“ अच्छा घर मे कभी ऐसा हुआ है कि ग़लती से तुझे कुशल का वो दिखाई दे गया हो………..” सिमरन को ऐसी बाते करना बहुत पसंद था

“ वो क्या दीदी…..?” प्रीति भी अंजान बनते हुए बोलती है.

“ अबे एक तरफ तो बोलती है कि ई आम आन ओपन गर्ल और दूसरी तरफ ये सब भी नही समझती है वो यानी…….लंड…….” सिमरन भी आख़िर खुल के बता ही देती है.

प्रीति आक्टिंग करती है मूँह पे हाथ रख कर जैसे सिमरन के मूँह से ऐसी बात सुन कर वो शॉक्ड हो गयी हो.

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