” डॅडी कैसी लग रही हू मैं……..” आराधना अपनी आँखे दिखती हुई पंकज से पूछती है. आज वो बहुत हॅपी थी.
” अच्छी लग रही है लेकिन अचानक देल्ही आने का प्लान कैसे बन गया…….” पंकज आराधना से पुछ्ता है
” वो…. वो…. डॅडी……. कॉलेज….. लेकिन आप क्यू पुच्छ रहे है. आपको मेरा आना अच्छा नही लगा……..” आराधना पंकज की तरफ देखते हुए बोलती है. पंकज का चेहरा सामने की तरफ था क्यूंकी वो ड्राइविंग कर रहा था.
” नही….. नही ऐसी कोई बात नही है. मैं तो हॅपी हूँ कि तुम आ गयी. वैसे रहने का क्या प्लान है……?” पंकज आख़िर वही पुछ लेता है जिसका आराधना को डर था
” डॅडी…. कॉलेज ने तो एक होटेल बुक कर रहा है लेकिन मैं शुवर नही हू वो कैसी जगह है…….. फिर भी मैं चली जाउन्गि….” आराधना सीरीयस होते हुए बोलती है.
” नही अगर होटेल के बारे मे शुवर नही हो तो फिर जाने की कोई ज़रूरत नही है…. वैसे भी ये देल्ही है. मैं एक काम करता हू कि अपने होटेल मे ही बुकिंग करा देता हू और एक कॅब फेसिलिटी अरेंज करा देता हू जो तुम्हे डेली पिक आंड ड्रॉप कर लेगी …… ” पंकज की बात से तो जैसे आराधना का मन खुश हो जाता है. और वैसे भी वो तो यही चाहती थी.
” ओके डॅड. जैसी आपकी मर्ज़ी………” आराधना ने ऐसा रिक्ट किया जैसे वो ज़्यादा हॅपी नही है.
करीबन 15 मिनिट की ड्राइव के बाद वो उस होटेल पहुँच जाते है जहाँ पंकज रूका हुआ था. आराधना अपने बालो को अच्छे से कोंब करके कार से उतरती है. पंकज फिर से बॅग लेता है और होटेल के अंदर चल देता है.
” कॅन आइ हॅव आ रूम फॉर माइ डॉटर……..” पंकज रिसेप्षन पर जाकर पुछ्ता है.
” सॉरी सर… ऑल रूम्स आर फुल्ली बुक्ड. रूम्स बस दो दिन के बाद ही अवेलबल है……..” रिसेप्षन गाइ का रिप्लाइ नेगेटिव था.
पंकज आराधना को लेकर होटेल रिसेप्षन से थोड़ा दूर आता है. ” आरू बेटा चल किसी और होटेल मे ट्राइ कर लेते है वैसे भी यहाँ होटेल आस पास ही है…” पंकज आराधना को समझाता है.
” डॅड बस दो दिन की ही तो बात है…. क्यूँ ना मैं आपके साथ ही रह लू……” आराधना ने तो बस जैसे उस होटेल से जाना ही नही चाहती थी.
” लेकिन….. वो….. बेटा……. लेकिन……” पंकज सोच मे पड़ जाता है.
” पापा आप मुझे बता सकते है….. मैं आपकी बेटी हू और समझदार भी हू….. बताइए कि परेशानी क्या है” आराधना भी कुशल के दिल का डर निकालना चाहती थी.
” वो बेटी…… मेरा रूम तो बस सिंगल बेड रूम है………” पंकज ने आख़िर रीज़न बता ही दिया.
” डॅड……. क्या आपको मैं मोटी नज़र आती हू……..” आराधना ने सीधा खड़े होते हुए कहा. वो बहुत इनोसेंट बनते हुए सब कुच्छ कह देना चाहती थी और कह भी चुकी थी.
” नही वो ऐसी बात नही है……” इससे पहले कि पंकज कुच्छ कहता आराधना उसका हाथ पकड़ती है और लिफ्ट की तरफ चल देती है.
” वैसे भी फालतू पैसे खर्च होंगे डॅड……. कुच्छ दिन की ही तो बात है….” आराधना ज़बरदस्ती पंकज को उसके रूम की तरफ ले जाती है.
” ओके….. जैसी तेरी मर्ज़ी…….” पंकज भी आगे की तरफ चल देता है. अब वो अग्री था आराधना वाले प्रपोज़ल पे कि वो एक ही रूम मे रह लेंगे……
पंकज का रूम सेकेंड फ्लोर पे था. वो लिफ्ट लेकर उपर चले जाते है. आराधना के हाइ हील्स के साउंड से पूरा फ्लोर गूँज रहा था, पंकज भी हैरान था कि कैसे आराधना अपनी गान्ड मटका मटका के चल रही थी.
रूम के बाहर पहुँच कर पंकज गेट खोलता है और गेट खुलते ही आराधना सामने जाकर बेड पे लेट जाती है.
” ओह्ह डॅड…… आइ आम सो टाइयर्ड आंड हंग्री……….” आराधना सीलिंग की तरफ देखते हहुए बोलती है.
” ठीक है तो तुम फ्रेश हो जाओ फिर नीचे लॉबी मे चलते है खाना खाने….”
” डॅड मुझे खाने की भूख नही बल्कि जिस्म की भूख है….” आराधना अपने मन मे ही बड़बड़ाती है.
थोड़ी देर बाद उठ कर वो बाथरूम मे चली जाती है फ्रेश होने के लिए. अंदर घुसते ही उसे अपने डॅड की फ्रेंची दिखाई देती है. आराधना गेट बंद करने के बाद उस फ्रेंची को उठाती है और उसे देख कर काफ़ी रोमॅंटिक हो जाती है. उसे ख्याल आ रहे थे कि यही है वो कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा जिसमे डॅड का एक मस्त हथियार छुपा होता है.
वो अपने डॅड की फ्रेंची पे किस करती है और फिर अपने कपड़े उतारने लगती है. सबसे पहले अपना दुपट्टा हटा कर वॉश बेसिन के करीब रखती है और मिरर मे अपने क्लीवेज को देख कर मस्त हो जाती है और हो भी क्यू ना.
अपना सूट, पाजामी, ब्रा, पैंटी सब कुच्छ उतार कर वो अपने बाथटब की तरफ बढ़ती है. उसने अभी कुच्छ नही पहना था, कितना मस्त बदन था उसका ये अहसास खुद आराधना को भी नही था. उसे वॉश बेसिन मे सिगरेट के छोटे छोटे टुकड़े दिखाई देते है और वो समझ जाती है कि ये डॅड ने ही स्मोकिंग की है.
वो बहुत हॅपी थी कि पहली बार उसे अपने डॅड का बातरूम शेर करने का मौका मिला है. शवर को ऑन करके वो नहाना शुरू करती है. उसके गरम बदन पे गिरता हुआ ठंडा पानी उसकी बाथरूम की तपिश को और बढ़ा रहा था. उसने अच्छे से शॅमपू किया और अच्छे से नहाई.
ओल्ड फिल्मी स्टाइल मे उसने अपने अगले प्लान को यूज़ किया-
” डॅड….. डॅड……..” बाथरूम के अंदर से ही आराधना पंकज को आवाज़ देती है.
” हाँ बेटा…..” पंकज उसकी आवाज़ सुनकर बोलता है.
” डॅड….. वो मैं कपड़े लिए बिना ही बाथरूम मे आ गयी… प्लीज़ आप मेरा बॅग खोल कर एक स्ट्रिंग वेस्ट टाइप ड्रेस होगी क्या आप वो दे देंगे. टवल मैने आप ही का यूज़ कर लिया है……..”
पंकज आगे बढ़ कर आराधना का बॅग खोलता है. सबसे पहला आइटम ही उसमे आराधना की पुश अप ब्रा थी. पंकज उसे हाथ मे लेकर देखता है और फिर साइड मे रख देता है, उसके दिल मे डाउट था कि आराधना कुच्छ बाथरूम के अंदर तो लेकर नही गयी तो क्या उसे ब्रा नही चाहिए होगी. वो क्या काम करता है कि ब्लू स्ट्रिंग टॉप के साथ उसकी ब्रा भी अंदर दे देता है.
वो बाथरूम का गेट नॉक करता है. आराधना थोड़ा सा गेट खोलती है, उसकी सेक्सी आइज़ पंकज से मिलती है. वो अपने एक नंगा शोल्डर भी पंकज को दिखा देती है, उसके गीले बाल, भीगे होंठ, सेक्सी आइज़, और फेस पे जो ग्लो था उसका असर पंकज पे भी था. खैर आराधना गेट खोल कर कपड़े लेती है और गेट बंद कर लेती है.
आराधना को आइडिया भी नही था कि पंकज ने उसे उसकी ब्रा भी दे दी है. लेकिन जब उसने खोल कर देखा तो उसे पता चला को पंकज ने उसे उसकी ब्रा भी दे दी है. आराधना को इस बात पे हँसी आ जाती है और वो गेट खोल कर ब्रा को साइड मे थ्रो कर देती है.
” डॅड इस स्ट्रिंग टॉप के साथ ब्रा नही पहनी जाती है……….” आराधना ने बिंदास होकर ये बात बता दी.
पंकज भी उसकी इस बात पे हैरान था. आराधना अपने हेर को ड्राइ करके और उस ब्लू टॉप को पहन कर बाहर आती है.
ओ माई गॉड….. ये पंकज पर एक और अटॅक था. जो टॉप आराधना ने पहना हुआ था वो एक दम डीप नेक था और उसके नीचे ब्रा ना होने से तो जैसे उसके आधे से ज़्यादा बूब्स विज़िबल थे. आराधना बेहद सेक्सी लग रही थी, पंकज जैसे तैसे अपना ध्यान हटाता है. लकिन ये बेहद मुश्किल भी था क्यूंकी आराधना अभी एक कछि और कसी हुई काली थी.
बाहर आते ही आराधना रूम मे रखे ड्रेसिंग टेबल के सामने आकर फिर से थोड़ा सा लिप ग्लॉस लगाती है.
” चले……..???” आराधना स्टाइल मे पंकज से पूछती है. लेकिन पंकज तो पता नही कौन सी दुनिया मे खोया हुआ था.
” डॅड…..” आराधना थोड़ी तेज आवाज़ मे बोलती है.
” यस…. यस बेटा…. लेट’स गो……” और पंकज उठ जाता है. पंकज के लिए बड़ा मुश्किल हो रहा था आराधना की तरफ देखा क्यूंकी वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी.
दोनो ग्राउंड फ्लोर लॉबी मे आ जाते है. पंकज दो प्लेट मे डिफरेंट नॉर्थ इंडियन फुड लेकर आ जाता है. आराधना जिस तरीके से हंसते हंसते पेश आ रही थी, उस जगह पे सबसे सेक्सी लग रही थी.
आज आराधना जैसे अपनी लाइफ जी रही थी. खुल कर हँसना, आज़ाद कपड़े पहन ना एट्सेटरा. उसके चेहरे की हँसी बता रही थी कि आज वो कितनी हॅपी है.
बीच बीच मे वो टेबल पर और झुक झुक कर खा रही थी. ये एक ऐसी सिचुयेशन थी जिसे कोई भी अवाय्ड नही कर सकता था, कहाँ आराधना अपना गला भी नही दिखने देती थी और आज उसके मस्त मस्त बूब्स बार बार बाहर आने को तड़प रहे थे.
पंकज की निगाहे भूले भटके वहाँ चली ही जाती थी और आराधना को अपनी बॉडी पे जैसे प्राउड हो रहा था कि उसने पंकज जैसे हाइ सेल्फ़ डिग्निटी वाले बंदे को भी अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रखा था. खास बात और अच्छी बात ये थी कि पंकज का बिहेव नॉर्मल था.
आराधना ठीक ऐसे रिक्ट कर रही थी जैसे कि वो अंजान है कि उसके बूब्स कैसे उच्छल रहे है.
थोड़ी देर बाद दोनो वहाँ से फ्री होते है और स्टेर्स की तरफ चल देते है. आज तो आराधना की चाल भी ऐसी थी वो किसी मॉडेलिंग रॅंप पर चल रही हो. उसके खुले हुए बाल पूरी गॅलरी मे खुसबु फेला रहे थे. जैसे ही वो स्टेर्स के करीब पहुँचते है तो वहाँ ‘वेट फ्लोर’ का साइन लगा हुआ था.
आराधना पंकज की तरफ देखती है जैसे उससे पुछ्ना चाह रही हो कि अब क्या करे.
” अब तो लिफ्ट यूज़ करनी पड़ेगी…..” पंकज उसे रिप्लाइ करता है.
वो दोनो लिफ्ट की तरफ चल देते है. पंकज बटन प्रेस करता है, उन दोनो के सिवाय वहाँ कोई और नही था. क्यूंकी होटेल काफ़ी फ्लोर का था तो लिफ्ट को नीचे आने मे थोड़ा टाइम लग गया.
लिफ्ट नीचे आती है और पहले पंकज अंदर जाता है. उसके पीछे आराधना भी अंदर घुस जाती है. अंदर घुसने के बाद पंकज अपना मूँह लिफ्ट के गेट की तरफ घुमाता है और ठीक इसी तरीके से आराधना भी. अब आराधना पंकज के सामने खड़ी थी, और उसके पीछे पंकज खड़ा था.
आराधना अपने हेर से एक क्लिप हटाती है और अपने बालो को हिलाती है. हिलते हुए बाल पंकज के चेहरे पर भी लग रहे थे लेकिन आराधना ऐसे रिक्ट कर रही थी जैसे उसे पता ना हो.
पंकज को उसके बालो की खुसबु मदमस्त कर रही थी लेकिन वो चुप था. अब आराधना वो कर देती है जिसका आइडिया पंकज को भी नही था.
वो अपने हेर क्लिप को लिफ्ट के फ्लोर पे गिरा देती है और उसे उठाने के लिए नीचे झुकती है. उफफफफफफफ्फ़……. पंकज क्या लिफ्ट की दीवारे भी पिघलने को तैयार हो रही थी. वो जैसे ही झुकती है तो उसका शॉर्ट टॉप उपर हो जाता है और उसकी थिन फ्लॉरल पैंटी दिखने लगती है. और साथ ही जब वो झुकती है तो तो उसकी गान्ड पंकज के लंड के वो बहुत करीब थी.
आराधना ने जैसे जान भुज कर उस छोटी सी क्लिप को उठाने मे भी टाइम लगा दिया. एनीवे लिफ्ट उपर आती और वो दोनो उपर आ जाते है.
” डॅड….., देल्ही ईज़ नोट दट बॅड…” और ये बोल कर वो पीछे मूड कर देखती है और अपने डॅड की जीन्स की ज़िप मे उसे टेंट दिखाई से जाता है.
अच्छी बात ये थी कि फ्लोर पे कोई और नही था. आराधना को जैसे अपनी सक्सेस नज़र आ रही थी क्यूंकी उसने पंकज के लंड को खड़ा करने मे तो सक्सेस पा ली थी.
” दिल्ली तो दिलवालो की है बेटी………” पंकज आराधना की बात का जवाब देता है. और दोनो फिर से रूम मे एंटर हो जाते है.
पंकज रूम मे सीधा जाता है और सामने रखी एक चेर पे बैठ जाता है. फिर वो अपनी पॉकेट से सिगरेट बॉक्स निकालता है और उसमे से एक सिगरेट निकाल कर अपने मूँह मे लगाता है. उसकी नज़रे इधर उधर जाती है लाइटर के लिए. तभी आराधना उसकी ओर चल कर आती है और झुक कर लाइटर जलाती है. जैसे कि उसने ब्रा नही पहनी थी तो उसके झुकने से फिर से उसके बूब्स पंकज की आँखो के सामने आ गये. सेक्सी आइज़, रॉयल चीक्स, जुवैसी लिप्स, मस्त बूब्स और मस्त क्लीवेज, पंकज की तो हालत हर तरह से खराब करने पर तुली थी आराधना.
” थॅंक यू….. ” पंकज आराधना से बोलता है क्यूंकी उसने उसकी सिगरेट जलाने मे हेल्प करी.
” युवर वेलकम…..” आराधना फिर से स्माइल करके और अपने आप को झुका कर उसका अभिवादन स्वीकार करती है.
पंकज बड़े गौर से आराधना को देख रहा था.
” बेटा एक बात पुछु……..?” पंकज बड़ा सीरीयस होते हुए आराधना से पुछ्ता है.
” हाँ हाँ शुवर डॅड…….” आराधना बेड पर बैठते हुए बोलती है.
” क्या तुम भी स्मोकिंग करती हो…….?” पंकज क्वेस्चन करता है.
” व्हाट…. ये कैसा सवाल है. क्या आपको मेरे लिप्स ऐसे लगे…….” आराधना फिर से फन्नी मूड मे बोलती है.
” नही ऐसे ही पुच्छ रहा था. वैसे भी आज कल तो ये चलता है…. सिमरन भी तो करती है…….” पंकज फिर से स्मोक को हवा मे उड़ाता हुआ बोलता है.
” फिर से सिमरन…. पता नही उस बिच ने ऐसा क्या कर रखा है जो हमेशा उसकी ही बाते चलती है.” आराधना बेड पे बैठते हुए ही गुस्से मे बोलती है.
पंकज स्मोकिंग करते करते खड़ा होता है और धीरे धीरे आराधना के पास आता है.
पास आने के बाद वो एक हाथ आराधना के बालो मे फिराते हुए बोलता है –
” बेटे सिमरन की बात तो इसलिए आ गयी थी क्यूंकी वो स्मोकिंग करती है और मैं अभी स्मोकिंग ही कर रहा था………..नही तो ऐसी तो कोई बात नही…..” पंकज आराधना के सिल्की बालो मे हाथ फिराते हुए बोलता है.
आराधना अभी बेड ले बैठी हुई थी और पंकज खड़ा हुआ था. जिस वजह से आराधना का डीप नेक टॉप और भी डीप हो गया था. ये आदमी का नेचर है कि जब किसी लड़की के बूब्स दिखाई देते है तो वो अपनी आँखो पे कंट्रोल नही रख पाता और यहाँ तो आराधना फुल मूड मे थी.
अपनी छाती को थोड़ा सा और बाहर लाते हुए आराधना बोलती है-
” अगर गौर से देखोगे तो सिमरन और मेरे बीच बहुत फ़र्क है……” आराधना के चेहरे पर एक सेक्सी स्माइल थी. उसका इशारा शायद अपनी बॉडी की तरफ था.
पंकज अभी भी उसके बालो मे हाथ फिरा रहा था -” बेटे ज़्यादा गौर से नही देख सकता…….. ” और ये बोलते ही पंकज वापिस मूड जाता है और रूम के विंडो की तरफ देखने लगता है. वो काफ़ी सीरीयस था.
आराधना बेड से उठती है और धीरे धीरे पंकज की तरफ चलती है. पंकज के ठीक पीछे आकर खड़ी हो जाती है – ” आख़िर ऐसी क्या चीज़ है जो आपको रोकती है डॅडी….” आराधना और पंकज के बीच मे बस उतना ही गॅप था जितना की आराधना के बूब्स का साइज़.
” मैं नही जानता……..” पंकज एक सीधा रिप्लाइ करता है और जैसे ही मुड़ता है सीधा आराधना के बूब्स उसके सीने से टकराते है
” आहह………” आराधना के मूँह से एक सिसकारी निकल जाती है और उसकी आँखे बंद हो जाती है.
लेकिन पंकज अपने आप को संभालता है और धीरे से पीछे हो जाता है.
आराधना को उसका ऐसे पीछे होना अच्छा नही लगा और वो खुद थोड़ा आगे बढ़ती है.
” आख़िर आप मुझसे इतना डरते क्यू है ……..” आराधना पंकज के कंधे पे हाथ रखते हुए बोलती है.
पंकज को पता नही क्या होता है और वो सीध मूड कर तेज कदमो के साथ दरवाजे के पास पहुँच जाता है.
” तुम आराम करो….. मैं थोड़ा ईव्निंग ड्रिंक लेने जा रहा हू और थोड़ा टाइम लगेगा…….” पंकज की आँखे लाल थी. शायद उस पर भी असर हो रहा था. ये बोल कर वो दूरी बना कर के बाहर चला जाता है.
आराधना को उसका ये बिहेव बहुत अजीब लगा लेकिन वो समझ सकती थी कि मर्द और औरत के अलावा उनके बीच कोई और भी रिश्ता था. लेकिन आराधना इस नेगेटिविटी को भी पॉज़िटिव वे मे ले रही थी. और उसने नाइट प्लान बनाने शुरू कर दिए थे.
दूसरी तरफ –
हालाँकि सिचुयेशन तो घर पर काफ़ी बदल चुकी थी लेकिन फिर वहीं से शुरू करना ज़रूरी है ताकि स्टोरी मे क्लॅरिटी रहे.
प्रीति कुशल के लंड पे लगे ब्लड को देख कर हैरान हो चुकी थी. कुशल अभी भी ठीक उसके सामने खड़ा था लेकिन फिर भी प्रीति ने हिल कर थोड़ा सा उठना चाहा. उसकी चूत अभी भी दर्द से बहाल थी लेकिन प्रीति ने हिम्मत करके स्लॅप से नीचे देखा –
” ओ माई गॉड……… कुशल….. ये कितना…कितना ब्लड निकल गया…….. ” स्लॅप से नीचे देख कर प्रीति हैरान हो जाती है क्यूंकी कुशल की टाँगो से होता हुआ ब्लड फ्लोर पर आ रहा था.
प्रीति को परेशान देख कर कुशल उसके फोर्हेड को पकड़ कर प्यार से उस पर किस करता है और फिर उसकी आइज़ पर भी किस करता है.
” प्रीति, ब्लड तो निकलना ही होता है. इसमे हैरानी की क्या बात है. लेकिन अब तो तू सही फील कर रही है ना?” कुशल प्रीति मे माथे पे हाथ लगाता हुआ बोलता है.
” ब्लड…… और वो भी इतना……..” प्रीति अब भी हैरान थी.
” तू ब्लड को मत देख, वैसे भी तुझे पता है कि फ्लोर पे ज़्यादा दिखाई देता है. वैसे तू कैसा फील कर रही है…..” कुशल फिर से पुछ्ता है.
” बहुत दुख रही है………….” प्रीति थोड़ा सा और सीधा होते हुए और अपनी चूत पे हाथ रखते हुए बोलती है. वो अब वॉश बेसिन वाली स्लॅप से नीचे उतरने की कोशिश कर रही थी.
लेकिन कुशल अपनी बाँहे बढ़ा कर उसे अपनी बाँहो मे ले लेता है. प्रीति भी अपनी बाँहे उसकी गर्दन मे डाल देती है. काफ़ी रोमॅंटिक सीन था ये क्यूंकी दोनो ने अभी तक कुच्छ नही पहना था. कुशल प्रीति को अपनी बाँहो मे लेकर बाथटब के पास लाकर खड़ी कर देता है.
प्रीति को अपनी टाँगो पर खड़े होने मे भी परेशानी हो रही थी. पता नही कि वो चल भी पाती या नही. कुशल तभी शवर ऑन करता है और धीरे धीरे प्रीति को उसके नीचे ले जाता है. अपनी बॉडी पे पानी के गिरने से जैसे प्रीति को थोड़ी राहत मिलती है. कुशल उसके शोल्डर्स पे हाथ लगा कर उसकी थोड़ी मसाज स्टार्ट करता है. प्रीति की आँखे बंद हो चुकी थी, कुशल बॉडी रेफ़्रेशनेर उठाता है सबसे पहले उसे प्रीति की पीठ पर गिराता है.
अब कुशल प्रीति को जैसे नहला ही रहा था. उसकी पीठ को अच्छी तरीके से धोता है और बॉडी रेफ़्रेशनेर के झाग को आगे ले जाकर उसके बूब्स पे हाथ रख कर उन्हे भी मसलने लगता है. कुशल और प्रीति के बीचे अभी भी थोड़ा गॅप था तो कुशल थोड़ा सा आगे बढ़ता और प्रीति की पीठ से अपना सीना लगा देता है.
प्रीति तो जैसे एक डॉल की तरह थी और कुच्छ बोल नही रही थी. शायद उसकी चूत का पेन अभी भी कम नही था. कुशल अपने दोनो हाथ सामने ले जाकर उसके बूब्स पे रख देता है और उसके कानो के पास जाकर बोलता है –
” प्रीति क्या पेन ज़्यादा है…….?” कुशल की वाय्स थोड़ी ज़्यादा सीरीयस थी.
प्रीति अपनी बॉडी हिलाए बिना बोलती है -” मुझे ऐसे लग रहा है जैसे….. जैसे…… जैसे वहाँ कोई जखम हो गया है……..” प्रीति का इशारा अपनी चूत की तरफ था
कुशल जैसे जल्दी जल्दी उसकी बॉडी को धोता है और शवर पाइप को उसकी उसकी चूत के करीब लाकर उसकी चूत पे शवर के थोड़े प्रेशर से पानी डालने लगता है. प्रीति की आँखे अभी भी बंद थी.
कुशल अब अपने एक हाथ मे शवर पाइप को पकड़ता है और दूसरे हाथ को प्रीति की चूत के पास ले जाता है.
” आहह…. कुशल प्लीज़…… बहुत पेन है………” प्रीति के मूँह से ऑटोमॅटिकली ही निकल जाता है. कोई भी उसकी आवाज़ सुन कर आइडिया लगा सकता था कि उसको पेन वाकई मे बहुत ज़्यादा था. लेकिन फिर भी कुशल प्यार से उसकी चूत के होंठो को खोलता है और शवर पाइप से पानी को बोछारे कर देता है.
” आअहह…… आआआअहहिईिइ…….” प्रीति को पानी की ठंडी ठंडी बूंदे अपनी चूत के अंदर फील हो रही थी. लेकिन उसे आराम भी मिल रहा था, धीरे धीरे प्रीति अपनी टांगे खोलती है क्यूंकी अभी वो टांगे जोड़ कर खड़ी थी जिससे कुशल को ईज़ी आक्सेस नही था.
कुशल उसकी टांगे फेलाने के बाद पास मे रखी साबुन को उतता है और अपने दोनो हाथो पे लगाता है. उसके दोनो हाथ अब साबुन के झाग से भर चुके थे, वो अपने हाथो को फिर से प्रीति की चूत पे ले जाता है और उसे मसाज करने लगता है.
प्रीति को शायद थोड़ा आराम मिल रहा था. तभी तो वो आँखे बंद करके ऐसी ही खड़ी थी, कुशल अपने घुटनो के बल बैठ कर प्रीति की केर कर रहा था. ढेर सारा साबुन लगाने के बाद कुशल फिर से शवर पाइप उठता है और श्ह्ह्ह्ह्ह्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र……. के साउंड के साथ साबुन और झाग धीरे धीरे नीचे जाने लगता है.
जैसे जैसे वो पानी नीचे जा रहा था, मानो पत्थर खोद कर हीरा बाहर आ रहा हो, ठीक ऐसे ही प्रीति की चूत सामने आती जा रही थी. उसके होठ बिल्कुल खुल चुके थे. कोई भी देख कर आइडिया लगा सकता था कि वो चूत किसी मोटे लंड से चुदि है.
खैर प्रीति अब थोड़ी रिलॅक्स लग रही थी. प्रीति को अच्छे तरीके से सॉफ करने के बाद कुशल अपना टवल उठाता है और प्रीति को पोछ्ने लगता है. पता नही प्रीति को क्या होता है कि वो कुशल से टवल छीन कर बाथरूम के दूसरे कॉर्नर मे भाग जाती है. प्रीति पहली बार मुस्कुराइ कुशल को देख कर, उसने अपने अगले हिस्से को टवल से ढक रखा था. कितनी क्यूट लग रही थी वो.
प्रीति की एक तरफ चूत दूख रही थी तो दूसरी तरफ वो कुशल की केर देख कर इंप्रेस थी.
कुशल अब प्रीति की तरफ बढ़ता है और उसे अपनी गोद मे उठाता है. दोनो की नज़रे मिलती है, फन्नी मूड मे कुशल प्रीति को आँख मार देता है और प्रीति भी शरमाने की बजाय उसे रिप्लाइ मे प्यार से एक आँख दबा देती है और आगे बढ़ कर उसके लिप्स पर एक मस्त स्मूच करती है.
” लगता है लड़का तो ठीक ठाक है तू………………” प्रीति स्टाइल मे बोलती है, आज वो कुशल से काफ़ी इंप्रेस थी.
कुशल अपने रूम से बाहर ले जाकर उसे गोद मे लिए उसके रूम मे ले जाता है. और उसे उसके बेड मे ले जाकर आराम से लिटा देता है. अभी भी दोनो ने कोई कपड़ा नही पहना था.

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