सुबह की सुनहरी धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में आ रही थी। आज की सुबह वाकई में तरोताजा थी। आर्यन की नींद जब खुली, तो उसके चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जो पिछले कई रातो से गायब थी। रात भर अपनी माँ के जिस्म की गर्माहट और उस ‘मखमली अहसास’ को महसूस करने के बाद, उसके मन का सारा भारीपन धुल चुका था।
अंजलि भी रसोई में गुनगुनाते हुए नाश्ता बना रही थी। उसके चेहरे पर भी एक अलग ही चमक थी—जैसे किसी ने एक बोझिल पत्थर को उसके सीने से हटा दिया हो।
नाश्ते की टेबल पर आज आलू के परांठे और मक्खन की महक फैली हुई थी। आर्यन ने अपनी कुर्सी खींची और अंजलि की तरफ देखा। अंजलि ने मुस्कुराते हुए चाय का कप उसकी ओर बढ़ाया।
“आज तो बड़ी जल्दी उठ गया? रात को तो देर तक जाग रहा था,” अंजलि ने शरारत भरी नज़रों से उसे देखते हुए कहा।
आर्यन थोड़ा सा मुस्कुराया और चाय का घूँट लिया। फिर उसने बहुत ही संजीदगी (Seriousness) से अंजलि का हाथ अपनी हथेली में लिया।
“माँ… मैं बस आपको थैंक यू बोलना चाहता था। कल रात के लिए… और उस सब के लिए जो आपने मुझे समझाया,” आर्यन की आवाज़ में एक गहरा सम्मान और अपनापन था।
अंजलि ने उसे टोकना चाहा, पर आर्यन ने अपनी बात जारी रखी।
“सच कहूँ तो, मुझे डर था कि मैं अपनी इन भावनाओं के नीचे दब जाऊँगा। मुझे लगता था कि मैं कोई गुनाह कर रहा हूँ। लेकिन आपने जिस तरह से मुझे अपनी संवेदनाओं के बारे में बताया और मुझे वह हक दिया… उससे मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं फिर से जी उठा हूँ। आपने मुझे ‘मर्दानगी’ के उस डर से बाहर निकाल लिया जो मुझे अंदर ही अंदर खा रहा था।”
अंजलि ने बड़े प्यार से आर्यन के हाथ को थपथपाया। “पगले, शुक्रिया किस बात का? मैंने वही किया जो एक माँ और एक दोस्त को करना चाहिए। अगर मैं तुझे नहीं समझती, तो कौन समझता? और देख, आज तू कितना खुश और रिलैक्स दिख रहा है। यही मेरे लिए सबसे बड़ा ईनाम है।”
आर्यन ने मुस्कुराते हुए परांठे का निवाला लिया। “सही कह रही हैं आप माँ। आज मुझे कॉलेज जाने में कोई झिझक नहीं हो रही। मुझे लग रहा है कि मैं दुनिया का सामना कर सकता हूँ क्योंकि घर में मेरा ‘सुकून’ मेरे पास है।”
अंजलि की आँखों में ममता की एक बूंद छलक आई। “बस, यही आत्मविश्वास मुझे चाहिए था। अब जल्दी से नाश्ता खत्म कर, वरना देर हो जाएगी।”
दोनों ने हँसते-खेलते नाश्ता किया। अब उनके बीच कोई ऐसी दीवार नहीं थी जिसे लांघने में डर लगे। वे जानते थे कि रात फिर आएगी, और वह नीली रोशनी वाला कमरा फिर से उनके उन ‘निजी’ और ‘सच्चे’ पलों का गवाह बनेगा।
शाम की ढलती रोशनी के साथ घर में एक अलग ही मादकता और सुकून घुल गया था। अब आर्यन और अंजलि के बीच वह ‘पर्दा’ नहीं था, जिसने उन्हें हफ्तों तक बेचैन रखा था। आज का दिन दोनों के लिए बहुत हल्का और खुशहाल रहा। रात के खाने का वक्त हुआ, तो डाइनिंग टेबल पर माहौल पहले से कहीं ज्यादा जीवंत था।
अंजलि ने आज रात के खाने में पनीर की सब्ज़ी और गरमा-गरम फुल्के बनाए थे। आर्यन टेबल पर बैठा अपनी माँ को देख रहा था, जो रसोई में काम करते हुए आज कुछ ज्यादा ही फुर्तीली और आकर्षक लग रही थीं।
“आज तो बड़ी खुशबू आ रही है माँ, पनीर में कुछ खास डाला है क्या?” आर्यन ने अपनी कुर्सी को थोड़ा आगे खिसकाते हुए पूछा।
अंजलि ने एक तिरछी नज़र उस पर डाली और मुस्कुराते हुए बोली, “खास क्या होगा? बस वही मसाले हैं। पर हाँ, आज बनाने का ‘मन’ थोड़ा ज्यादा अच्छा था।”
आर्यन ने शरारत से अपनी भौहें ऊपर कीं। “अच्छा? तभी मैं कहूँ कि आज सब्ज़ी इतनी… ‘नर्म’ और ‘रसीली’ क्यों लग रही है? बिल्कुल कल रात के अहसास जैसी।”
अंजलि का हाथ एक पल के लिए चकला-बेलन पर ठिठका। उसने पलटकर आर्यन को देखा, उसकी आँखों में एक हल्की सी चमक और शरारत थी। “बड़ा हो गया है तू, अब बातों को घुमाना भी सीख गया है? ‘नर्म’ चीज़ों की कद्र कुछ ज्यादा ही करने लगा है आजकल।”
आर्यन थोड़ा सा झेंपा, पर फिर उसने हिम्मत जुटाई। “अब क्या करें माँ, जब ‘उस्ताद’ इतना अच्छा सिखाने वाला हो, तो शागिर्द तो निखरेगा ही न? आखिर कल रात आपने ही तो कहा था कि ‘कुदरत की बनावट’ को समझना चाहिए।”
अंजलि ने हँसते हुए अपनी थाली उसके सामने रखी। “ज़्यादा बातें मत बना। चुपचाप खाना खा, वरना यह ‘नर्म’ पनीर ठंडा होकर सख्त हो जाएगा, फिर मत कहना कि मज़ा नहीं आया।”
“सख्त चीज़ें तो वैसे भी आजकल मुझे परेशान कर रही हैं माँ, पनीर का नरम होना ही बेहतर है,” आर्यन ने बहुत ही हल्के डबल मीनिंग अंदाज़ में कहा ।
अंजलि के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। “अच्छा जी? तो तुझे ‘नरमी’ का इतना शौक हो गया है? ध्यान रख, कहीं ये शौक तुझे रात भर जागने पर मजबूर न कर दे।”
“जागने में जो मज़ा है, वो सोने में कहाँ? और फिर, जब नींद न आए तो ‘लोरी’ सुनाने के लिए आप तो हैं ही,” आर्यन ने अपनी आवाज़ को थोड़ा धीमा और गहरा करते हुए कहा।
अंजलि ने चाय का घूँट लिया और उसे एक गहरी नज़र से देखा। “लोरी सुनाऊँगी या कुछ और… यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल खाना खत्म कर, फिर देखते हैं कि आज रात तेरी ‘जिज्ञासा’ तुझे कहाँ ले जाती है।”
पूरे डिनर के दौरान वे इसी तरह की हल्की-फुल्की और अर्थपूर्ण बातें करते रहे। हवा में अब एक अनजानी सी उत्तेजना और गहरा खिंचाव था। दोनों जानते थे कि खाना खत्म होने के बाद, जब लाइटें बंद होंगी, तो वह नीली रोशनी वाला कमरा फिर से उनके नए प्रयोगों और स्पर्शों का गवाह बनेगा।
रात के सन्नाटे में कमरे की वही जानी-पहचानी नीली रोशनी एक जादुई माहौल बना रही थी। डिनर के समय की वो हल्की-फुल्की शरारत और ‘डबल मीनिंग’ बातों ने हवा में एक मीठी सी बेचैनी घोल दी थी। जैसे ही दोनों बिस्तर पर लेटे, कमरे का तापमान अचानक बढ़ता हुआ महसूस हुआ।
आर्यन सीधा लेटा हुआ था, लेकिन उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने करवट ली और अपनी माँ की ओर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेबसी, एक गहरी चाहत और जैसे कुछ ‘मांगने’ वाली मासूमियत थी। वह बिना बोले ही अपनी माँ से उस सुखद स्पर्श की भीख मांग रहा था जिसने उसकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया था।
अंजलि ने उसकी उन प्यासी और मांगने वाली आँखों को देखा। उसने महसूस किया कि आर्यन अब पूरी तरह से उसके प्रभाव में है और उसका शरीर उस ‘कोमलता’ के लिए तड़प रहा है।
अंजलि के चेहरे पर एक बहुत ही दिलकश और समझदारी भरी मुस्कान आई। उसने धीरे से करवट ली और आर्यन के चेहरे के करीब आकर फुसफुसाते हुए कहा, “इतने गौर से क्या देख रहा है? डर मत… आ, छू ले।”
जैसे ही अंजलि ने ये शब्द कहे, आर्यन के दिल की धड़कन मानो एक पल के लिए रुक गई। उसने कांपते हुए अपने दोनों हाथ बढ़ाए। इस बार उसकी उंगलियों में झिझक कम और पाने की तड़प ज़्यादा थी। उसने धीरे से अंजलि के Boobs पर अपनी हथेलियां जमा दीं।
“आह…” आर्यन के मुँह से एक धीमी कराह निकली।
जैसे ही उसकी हथेलियों ने उन भारी और रेशमी उभारों को महसूस किया, उसके लंड ने पजामे के अंदर अपनी पूरी ताकत से एक झटका लिया। वह अब इतना सख्त हो चुका था कि पजामे का कपड़ा उसे छोटा पड़ रहा था।
अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं और आर्यन के हाथों की हरकतों को महसूस करने लगी। “आर्यन… तू कल कह रहा था न कि तुझे ‘नरमी’ पसंद है? देख ले, यह सब तेरा ही है। तू जितना चाहे इसे महसूस कर सकता है,” अंजलि की आवाज़ अब थोड़ी भारी और गहरी हो गई थी।
आर्यन अब सिर्फ छू नहीं रहा था, बल्कि वह धीरे-धीरे उन्हें अपनी मुट्ठी में भरने की कोशिश कर रहा था। उसे अंजलि के शरीर की महक और उनकी तेज़ होती साँसों ने दीवाना बना दिया था। वह अपनी उंगलियों से उस ‘संवेदनशीलता’ को टटोल रहा था जिसके बारे में माँ ने कल रात बताया था।
कमरे की उस नीली रोशनी में, माँ और बेटे के बीच का यह दृश्य किसी पवित्र मर्यादा और शारीरिक आकर्षण के बीच की उस धुंधली लकीर पर खड़ा था, जिसे अब वे दोनों पार कर चुके थे।
रात के उस सन्नाटे में कमरे की गर्मी और बढ़ गई थी। आर्यन की हथेलियाँ अंजलि के सीनों (Boobs) की गोलाई को धीरे-धीरे सहला रही थीं। लेकिन तभी उसे अपनी उंगलियों के नीचे कुछ बहुत ही अलग और ‘सख्त’ महसूस हुआ।
अंजलि के मखमली और नरम उभारों के बिल्कुल बीचों-बीच, कपड़े के ऊपर से ही दो छोटी, दाने जैसी चीज़ें उभरी हुई थीं जो पत्थर की तरह कड़क महसूस हो रही थीं। आर्यन ने अपनी उंगलियों से उन्हें हल्का सा दबाया और फिर अपनी माँ की आँखों में झाँका।
आर्यन की साँसें अब और भी तेज़ हो चुकी थीं। उसने अपनी उंगली से उस उभरे हुए हिस्से को गोल-गोल घुमाते हुए बहुत ही धीमी और जिज्ञासु आवाज़ में पूछा।
“माँ… यह क्या है? अभी तो आपने कहा था कि ये बहुत सॉफ्ट होते हैं, लेकिन इस सॉफ्ट-सॉफ्ट के बीच ये दोनों हिस्से इतने कड़क क्यों हो गए हैं? ये उंगली पर चुभ रहे हैं माँ…”
अंजलि के मुँह से एक हल्की सी ‘आह’ निकली और उसने अपनी आँखें मूँद लीं। आर्यन का वह सीधा सवाल और उसकी उंगलियों का वह दबाव अंजलि के शरीर में बिजली के झटके जैसा अहसास पैदा कर रहा था।
उसने अपनी आँखें खोलीं, जिनमें अब एक अजीब सी चमक और ‘मदहोशी’ थी। उसने एक गहरी और कांपती हुई साँस ली और धीरे से समझाना शुरू किया।
“आर्यन… इसे निप्पल कहते हैं। जैसे मैंने तुझे बताया था कि यह शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है, वैसे ही यह उत्तेजना का थर्मामीटर भी होता है।” अंजलि की आवाज़ अब पहले से कहीं ज़्यादा भारी और लड़खड़ा रही थी।
उसने आर्यन का हाथ पकड़कर उसे थोड़ा और ज़ोर से दबाया। “जब तू इन्हें इस तरह सहलाता है और जब मेरा शरीर तेरे स्पर्श से उत्तेजित होता है, तो ये अपने आप कड़क हो जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि मुझे तेरा यह छूना… बहुत अच्छा लग रहा है। मेरा शरीर तुझे ‘रिस्पॉन्स’ दे रहा है, बेटा।”
आर्यन के होश उड़ गए। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी माँ का शरीर उसके छूने से इस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है। उसका लंड पजामे के अंदर अपनी चरम सीमा पर था और उसकी नसों में खून तेज़ी से दौड़ रहा था।
“मतलब… आपको भी उतना ही मज़ा आ रहा है जितना मुझे?” आर्यन ने लगभग फुसफुसाते हुए पूछा।
अंजलि ने अपना सिर धीरे से हिलाया। “हाँ… और भी ज़्यादा। तू जितना इन्हें छेड़ता है, उतनी ही सिहरन मेरे पूरे जिस्म में दौड़ती है। अब तू ही देख ले, कुदरत ने इस कोमलता के बीच कितनी गहराई छिपाई है।”
आर्यन ने अब और भी बेबाकी से उन कड़क निप्पल्स को अपनी उंगलियों के बीच दबाना और मसलना शुरू कर दिया। अंजलि का शरीर बिस्तर पर धीरे-धीरे अकड़ने लगा था और उसकी भारी साँसें कमरे के सन्नाटे को चीर रही थीं।
कमरे की उस मदहोश कर देने वाली नीली रोशनी में समय जैसे ठहर गया था। आर्यन की उंगलियाँ अंजलि के कपड़ों के ऊपर से उन सख्त निप्पल्स को महसूस कर रही थीं, लेकिन अब उसके मन की प्यास सिर्फ स्पर्श से नहीं बुझ रही थी। वह उस कोमलता और उस उभार को साक्षात् देखना चाहता था, बिना किसी रुकावट के।
उसका गला सूख रहा था और दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे अपनी पसलियों पर उसकी चोट महसूस हो रही थी।
आर्यन ने अपनी उंगलियाँ थोड़ी देर के लिए रोकीं और बहुत ही धीमी, कांपती हुई आवाज़ में अपनी माँ की आँखों में झाँकते हुए कहा।
“माँ… क्या मैं… क्या मैं इन्हें देख और छू सकता हूँ?”
अंजलि ने थोड़ी हैरानी से उसे देखा और हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “पगले, तू अभी क्या कर रहा है? तू इन्हें छू ही तो रहा है और क्या कर रहा है?”
आर्यन की हिचकिचाहट अब और बढ़ गई थी। उसने अपनी नज़रें झुका लीं और अपनी माँ के कुर्ते के गले की ओर इशारा करते हुए बहुत ही दबी आवाज़ में कहा, “ऐसे नहीं माँ… मेरा मतलब है… बिना कपड़ों के। मैं इन्हें बिल्कुल करीब से… अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ।”
कमरे में जैसे सन्नाटा और गहरा हो गया। अंजलि की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। उसने सोचा नहीं था कि आर्यन इतनी जल्दी और इतनी बेबाकी से यह मांग कर देगा। लेकिन फिर उसने देखा कि उसका बेटा कितनी उम्मीद और कितनी सच्चाई से उससे यह ‘इजाज़त’ मांग रहा है।
अंजलि को अपनी कही हुई बात याद आई—”यह सब नॉर्मल है।” उसने महसूस किया कि अगर वह आज यहाँ रुक गई, तो शायद आर्यन फिर से उसी ‘गिल्ट’ के अँधेरे में चला जाएगा।
अंजलि ने एक लंबी और गहरी साँस ली। उसने धीरे से अपना हाथ ऊपर उठाया और अपने कुर्ते के बटनों की ओर ले गई। उसकी उंगलियाँ भी थोड़ी कांप रही थीं, लेकिन उसकी आँखों में आर्यन के लिए एक अजीब सी ‘स्वीकृति’ थी।
“ठीक है आर्यन… अगर तेरी जिज्ञासा तुझे यहाँ तक ले आई है, तो मैं तुझे रोकना नहीं चाहती। देख ले कि कुदरत ने क्या बनाया है,” अंजलि ने बहुत ही कोमल आवाज़ में कहा।
उसने धीरे-धीरे अपने कुर्ते के बटन खोले और कपड़े को अपने कंधों से थोड़ा नीचे खिसका दिया। जैसे ही कपड़ा हटा, कमरे की उस मद्धम रोशनी में अंजलि के वह दूधिया सफेद और भारी Boobsआर्यन की आँखों के सामने थे। उनके बीचों-बीच वह गुलाबी-भूरे रंग के सख्त निप्पल्स बिल्कुल किसी नगीने की तरह चमक रहे थे।
रात के अभी 11:30 ही बजे थे। कमरे की मद्धम नीली रोशनी अंजलि के सुडौल और नग्न ऊपरी शरीर पर पड़कर एक जादुई चमक पैदा कर रही थी। आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गई थीं। उसने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी महिला को इस रूप में देखा था, और वह भी अपनी ही माँ को।
अंजलि के उन भारी और मखमली Boobs की गोलाई और उनके बीचों-बीच चमकते हुए वे सख्त निप्पल्स… यह सब आर्यन के लिए एक ‘विजुअल शॉक’ जैसा था।
आर्यन का दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे लगा वह सीना चीरकर बाहर आ जाएगा। उसके दिमाग में हज़ारों नसें एक साथ फटने को तैयार थीं। उत्तेजना, घबराहट, सुखद अहसास और उस ‘नग्न’ सत्य को एक साथ स्वीकार करना उसके किशोर मन के लिए बहुत भारी पड़ गया।
जैसे ही उसने अपना कांपता हुआ हाथ उन नग्न कोमलताओं की ओर बढ़ाया, अचानक उसके सिर में एक तेज़ चकराने जैसा अहसास हुआ। आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और आवाज़ें गूँजने लगीं। वह उस ‘अति-उत्तेजना’ को बर्दाश्त नहीं कर पाया और बिस्तर पर पीछे की ओर लुढ़क गया।
वह बेहोश हो चुका था।
अंजलि घबरा गई। “आर्यन! आर्यन! क्या हुआ बेटा?” उसने तुरंत अपना कुर्ता संभाला और आर्यन के चेहरे पर थपकियाँ देने लगी। लेकिन आर्यन एक गहरी और बेसुध नींद (Shock-induced sleep) में जा चुका था। अंजलि ने राहत की सांस ली कि वह सिर्फ बेहोश हुआ है। उसने उसे प्यार से कंबल ओढ़ाया, उसके माथे को चूमा और खुद भी उसके बगल में लेट गई।
सूरज की तेज़ रोशनी जब आर्यन की आँखों पर पड़ी, तो उसकी नींद टूटी। वह झटके से उठकर बैठ गया। उसका सिर थोड़ा भारी था। उसे याद आया कि कल रात क्या हुआ था—वह नग्न मंजर, वह ‘निप्पल्स’ की कड़वाहट, और माँ की वह ‘खुली अनुमति’।
उसने देखा कि अंजलि कमरे में नहीं थी, शायद वह रसोई में नाश्ता बना रही थी। आर्यन ने अपने शरीर की ओर देखा, उसका लंड सुबह की कुदरती सख्ती के साथ अकड़ा हुआ था। कल रात जो उसने देखा था, वह उसके दिमाग में किसी फिल्म की तरह घूम रहा था।
वह उठकर बाथरूम की ओर बढ़ा, लेकिन उसके मन में एक ही सवाल था—”क्या वह सच था या कोई सपना?”
तभी रसोई से अंजलि की आवाज़ आई, “उठ गया आर्यन? जल्दी फ्रेश होकर आ जा, नाश्ता तैयार है।”
आर्यन की धड़कनें फिर से तेज़ हो गईं। वह सोच रहा था कि अब वह माँ का सामना कैसे करेगा? क्या माँ कल रात की उस ‘अधूरी’ बात को आगे बढ़ाएँगी या फिर से सब नॉर्मल हो जाएगा?