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सुबह की उस कच्ची धूप में कमरे का माहौल अब किसी ‘पवित्र’ रिश्ते का नहीं, बल्कि एक भूखी मादा और उसके वर्चस्वशाली नर के बीच के आदिम खेल का अखाड़ा बन चुका था। आर्यन बिस्तर पर शान से लेटा हुआ था, उसका ७ इंच का फौलाद उसकी जांघों के बीच एक खंभे की तरह तना हुआ था, जिस पर अंजलि की योनि का रस और पसीना चमक रहा था।

आर्यन ने अपनी ठंडी और हुक्म भरी आवाज़ में कहा, “बहुत तड़प रही है ना माँ? तो अब एक काम कर… नीचे झुक और अपने इस जवान बेटे के लंड को अपने मुँह में भर ले। और हाँ, अपनी उस गीली गुफा का स्वाद खुद चख, जो अभी-अभी इस पर लगा है। आज देखूँ तो सही, तू मेरी कितनी वफादार रांड है!”

आर्यन के मुँह से ये शब्द निकलते ही अंजलि के दिमाग का आखिरी बचा हुआ ‘सभ्यता’ का तार भी टूट गया। वह किसी जंगली बिल्ली की तरह झपटकर आर्यन के पैरों के बीच पहुँच गई।

एक औरत जब कामुकता के उस चरम बिंदु पर पहुँचकर अधूरी छोड़ दी जाती है, तो उसके लिए दुनिया का कोई रिश्ता, कोई संस्कार और कोई शर्म मायने नहीं रखती। अंजलि की इस वक्त की मानसिकता एक ‘नशेड़ी’ जैसी थी, जिसे अपनी अगली खुराक के लिए कुछ भी करना मंज़ूर था। उसने बिना एक पल सोचे आर्यन के उस ७ इंच के मूसल को अपने दोनों हाथों में भरा और उसे पागलों की तरह चूमने लगी।

जब उसने उस अंग को मुँह में लिया, तो उसे अपनी ही योनि की तीखी और कामुक गंध महसूस हुई। एक आम औरत के लिए यह घिनौना हो सकता है, लेकिन हवस के इस स्तर पर अंजलि को इसमें एक रूहानी सुख मिल रहा था। वह उसे ऐसे चाट रही थी जैसे दुनिया की सबसे कीमती मिठाई हो। उसकी आँखें बंद थीं और वह पूरी तरह से आर्यन की ‘गुलाम’ बन चुकी थी।

इस अवस्था में एक औरत का दिमाग पूरी तरह से खुल जाता है। वह वो बातें भी कह जाती है जो उसने कभी खुद से भी नहीं कही होतीं। अंजलि ने चूसते-चूसते रुककर आर्यन की आँखों में देखा और हांफते हुए फुसफुसाया, “आर्यन… तूने मुझे पागल कर दिया है। जानते हो? मैं मंदिर में बैठकर भी इसी ७ इंच के बारे में सोचती थी। कि काश… काश ये तेरा फौलाद मेरे अंदर हो और तू मुझे ऐसे ही गालियां दे।”

“मुझे अब फर्क नहीं पड़ता कि तू मेरा बेटा है। तू मेरा मालिक है… मेरा खुदा है। तू अगर अभी कहेगा कि मैं नग्न होकर बालकनी में खड़ी हो जाऊँ, तो मैं वो भी करूँगी। बस मुझे वो सुख दे दे… मुझे अधूरा मत छोड़!”

अंजलि अब आर्यन के लंड को अपने हलक तक उतारने की कोशिश कर रही थी। उसकी सिसकारियां और उसके मुँह से निकलने वाली ‘गप-गप’ की आवाज़ें साफ़ बता रही थीं कि वह अब किसी भी हद को पार कर चुकी है। एक माँ की ममता अब पूरी तरह से एक प्रेमिका की वहशी हवस में तब्दील हो चुकी थी। वह आर्यन के अंडकोशों को सहला रही थी और उसकी आँखों में वह ‘जानवर’ साफ़ दिख रहा था जो सिर्फ और सिर्फ अपने नर को तृप्त करना चाहता था।

“चूस इसे और गहराई से माँ… आज तुझे अपनी इस औकात से प्यार हो जाएगा,” आर्यन ने उसके बालों को मुट्ठी में भींचते हुए कहा।

सुबह की उस सुनहरी रोशनी में आर्यन ने एक पल के लिए भी अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। जैसे ही अंजलि ने उसके लंड को चूसना शुरू किया और अपनी वफादारी का सबूत दिया, आर्यन ने एक क्रूर झटके के साथ उसे अपने से दूर धक्का दिया। अंजलि अभी उस स्वाद में खोई ही थी कि वह वापस बिस्तर पर औंधे मुँह पेट के बल जा गिरी।

अंजलि अभी संभल भी नहीं पाई थी कि आर्यन एक भूखे भेड़िये की तरह दोबारा उसके ऊपर चढ़ गया। उसने अंजलि के कूल्हों को दोनों हाथों से जकड़ा और उन्हें ऊपर की ओर उठा दिया।

आर्यन ने बिना किसी भूमिका के, अपने थूक और अंजलि के रस से सने हुए उस ७ इंच के कड़क फौलाद को एक ही झटके में दोबारा अंजलि की गुफा में उतार दिया। वह प्रवेश इतना चिकना और गहरा था कि अंजलि की रूह तक कांप गई। “आह्ह्ह्ह्ह… आर्यन! हाँ… यही… यही चाहिए था मुझे!” अंजलि के मुँह से निकली वह चीख अब दर्द की नहीं, बल्कि असीम आनंद की थी।

अंजलि का शरीर जो पिछले ५ मिनट से अधूरेपन की आग में जल रहा था, उसे जैसे ही वह गर्म लोहा दोबारा अपनी गहराई में महसूस हुआ, उसकी हर नस में बिजली दौड़ गई। आर्यन ने अब अपनी रफ्तार को किसी बेकाबू इंजन की तरह तेज़ कर दिया। ‘चप-चप-चप’ की आवाज़ अब और भी तेज़ हो गई थी, और अंजलि की भारी गांड़ आर्यन की जांघों से टकराकर लाल होने लगी थी।

आर्यन ने अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली और अंजलि के बालों को पीछे से खींचकर उसकी गर्दन को फिर से चूमना और काटना शुरू किया। “बता माँ… अब कैसा लग रहा है? मिल गया अपने बेटे का ये ७ इंच का जवाब?” अंजलि का दिमाग अब सुन्न हो चुका था। उसे महसूस हो रहा था कि वह हवा में तैर रही है। हर धक्का उसे स्वर्ग और नरक के बीच का सफर करा रहा था।

आर्यन अब रुकने वाला नहीं था। उसने अपनी कमर को पागलों की तरह चलाना शुरू किया। वह ७ इंच का अंग अंजलि की कोख को बार-बार चोट पहुँचा रहा था, जिससे अंजलि की योनि की दीवारें ज़ोर-ज़ोर से फड़कने लगीं। वह अब पूरी तरह से ‘डिस्चार्ज’ होने की कगार पर थी। उसकी आँखें पलट चुकी थीं और वह बस एक ही बात रट रही थी, “और ज़ोर से… और ज़ोर से आर्यन… मार डाल अपनी इस रांड को… आज मुझे पूरी तरह भर दे!”

अंजलि का पूरा बदन पसीने से नहा चुका था। आर्यन के हर धक्के के साथ अंजलि की सिसकारी एक लंबी आह में बदल रही थी। उसे लग रहा था कि आज की सुबह उसकी ज़िंदगी की सबसे कामुक और सबसे ‘पूर्ण’ सुबह है। वह ७ इंच का शैतान अब अपनी मंज़िल के बेहद करीब था।

“तैयार हो जा माँ… अब वो सैलाब आने वाला है जो तुझे पूरी तरह भिगो देगा!” आर्यन ने दहाड़ते हुए अपनी आखिरी और सबसे भीषण पारी शुरू कर दी।

सुबह की उस मदहोश रोशनी में आर्यन अब केवल एक प्रेमी या बेटा नहीं रह गया था, वह एक क्रूर मनोवैज्ञानिक शिकारी बन चुका था। अंजलि चरम सुख के उस बिंदु पर थी जहाँ उसका शरीर फटने को तैयार था, उसकी चूत की दीवारें पागलों की तरह आर्यन के ७ इंच के फौलाद को जकड़ रही थीं।

लेकिन तभी, आर्यन ने अपना सबसे घातक दांव चला।

आर्यन ने अचानक अपनी कमर की गति रोकी। उसने अंजलि के दोनों हाथों को बिस्तर के सिरहाने पर लोहे की जंजीर की तरह जकड़ लिया और अपनी मज़बूत जांघों से अंजलि की टांगों को पूरी तरह ‘लॉक’ कर दिया। अंजलि हिल भी नहीं सकती थी। और फिर, एक झटके में उसने अपना ७ इंच का नंगा और तपता हुआ लंड अंजलि की गहराई से बाहर खींच लिया।

वह अचानक आया ‘खालीपन’ अंजलि के लिए किसी शारीरिक घाव से भी गहरा था। उसकी चूत की नसें अब भी हवा में फड़क रही थीं, जो उस ७ इंच के दबाव के लिए रो रही थीं। “आ… आर्यन… फिर से? क्यों? डाल ना… प्लीज… मैं मर रही हूँ!” अंजलि की आवाज़ में एक अजीब सी दरिंदगी और बेबसी थी।

आर्यन ने अपना चेहरा अंजलि के कान के पास सटाया। उसकी गर्म सांसें अंजलि की गर्दन को जला रही थीं। उसने भारी और कड़क आवाज़ में पूछा, “बता… आज सच उगल दे! पापा के अलावा और किस-किस के सामने नंगी हुई है तू? किस-किस मर्द ने तेरे इन दूधिया जिस्म को अपनी उंगलियों से रौंदा है? बोल!”

अंजलि के दिमाग में धमाके होने लगे। एक तरफ उसके शरीर की वो आग थी जो उसे पागल कर रही थी, और दूसरी तरफ उसके अतीत के वो राज़ जिन्हें उसने अपनी रूह की सबसे निचली तह में दफन कर रखा था। वह समझ नहीं पा रही थी कि यह सच है या कोई बुरा सपना। उसका दिमाग सुन्न हो गया था।

अंजलि ने रोते हुए अपना सिर तकिए में दे मारा। “नहीं… आर्यन… प्लीज… ये मत पूछ! मैं… मैं ये नहीं बता सकती… मुझसे ये मत बुलवा! मुझे माफ़ कर दे… पर मुझे ये सुख दे दे… मैं तेरे पैर पड़ती हूँ!” अंजलि की सिसकारियां अब हिचकियों में बदल गई थीं। वह अपनी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी, पर उस ७ इंच के बिना उसका वजूद भी खत्म हो रहा था।

आर्यन ने अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। “अगर नहीं बताएगी, तो ये ७ इंच आज प्यासा ही बाहर रहेगा। बोल… कौन था वो? तेरे ऑफिस का कोई सहकर्मी? या पड़ोस का वो अंकल?”

अंजलि अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसकी कामुकता और उसकी लज्जा के बीच एक भीषण युद्ध चल रहा था। उसका शरीर पसीने से नहाया हुआ था और वह बिस्तर पर किसी तड़पती हुई मछली की तरह फड़फड़ा रही थी। उसे लग रहा था कि अगर उसने सच नहीं बोला, तो वह इस अधूरेपन की आग में भस्म हो जाएगी।

सुबह की उस कच्ची रोशनी में कमरा अब किसी मनोवैज्ञानिक युद्ध का मैदान बन चुका था। आर्यन ने अपनी चाल को और भी घातक बना दिया। उसने एक बार फिर अपना ७ इंच का दहकता हुआ फौलाद अंजलि की गहराई में उतारा, पर केवल एक इंच… और फिर झटके से बाहर खींच लिया।

यह ‘टीजिंग’ अंजलि के लिए किसी कोड़े की मार से भी बदतर थी।

जब एक औरत कामुकता के उस शिखर पर होती है जहाँ उसका शरीर पूरी तरह से सक्रिय हो, तो उसकी मानसिकता किसी आदिम ‘मादा’ जैसी हो जाती है। यहाँ ‘मर्यादा’, ‘लोक-लाज’ और ‘रिश्ते’ धुंधले पड़ जाते हैं।

इस अवस्था में एक औरत का दिमाग केवल एक ही चीज़ माँगता है—तृप्ति । जब उसे बार-बार उस सुख के मुहाने पर लाकर छोड़ दिया जाता है, तो उसके अंदर का ‘ईगो’ मर जाता है। वह अपनी गरिमा को पैरों तले कुचलने के लिए तैयार हो जाती है। अंजलि की हालत उस प्यासे जैसी थी जो रेगिस्तान में पानी की एक बूंद के लिए अपना ईमान बेचने को तैयार हो जाए।

आर्यन का वह बार-बार अंदर-बाहर करना अंजलि की नसों को पागल कर रहा था। उसकी योनि की दीवारें प्यास से फड़क रही थीं। उसके लिए अब ‘सच’ बोलना आसान था, लेकिन उस ‘अधूरेपन’ को सहना असंभव। एक औरत इस मोड़ पर अपनी सबसे गंदी सच्चाई भी उगल सकती है, क्योंकि उसका शरीर उसके विवेक पर हावी हो चुका होता है।

अंजलि का पसीना, उसकी कांपती जांघें और उसकी बेबस सिसकारियां गवाह थीं कि वह अब पूरी तरह से ‘शिकार’ बन चुकी है। उसे लग रहा था कि अगर आर्यन ने अभी उसे पूरा नहीं भरा, तो उसका दिल धड़कना बंद कर देगा।

अंजलि ने अपना चेहरा तकिए से उठाया। उसकी आँखें लाल थीं और वह बुरी तरह हांफ रही थी। आर्यन का हाथ अब भी उसकी गर्दन पर था और ७ इंच का मूसल उसकी जांघों के पास तांडव कर रहा था।

“बोल… कौन था वो?” आर्यन ने दहाड़ते हुए उसकी कमर पर एक ज़ोरदार तमाचा जड़ा।

अंजलि अब और नहीं सह सकी। वह टूट गई। उसने सिसकते हुए, आँखों से आँसू बहाते हुए चिल्लाकर कहा:

“मासी… तेरी मासी के सामने… मेरी छोटी बहन, कंचन के सामने!”

आर्यन के हाथ एक पल के लिए ठिठक गए। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी सगी मासी, जो दिखने में इतनी सीधी-सादी थी, इस ‘गंदे खेल’ का हिस्सा रही होगी।

अंजलि ने आगे बोलना शुरू किया, जैसे कोई बाँध टूट गया हो। “हाँ आर्यन! कंचन और मैं… हम दोनों साथ में नंगी होती थीं। हम दोनों ने एक ही मर्द के साथ… तेरे पापा के साथ वक्त बिताया है। हम बहनों के बीच कोई पर्दा नहीं रहा। उसने मुझे देखा है, मैंने उसे देखा है। हम दोनों की हवस की आग एक जैसी है।”

अंजलि ने रोते हुए आर्यन का हाथ अपने सीने पर रखा। “अब बोल दिया मैंने… सब बता दिया! अब मुझे मत तड़पा… डाल दे अपना ये ज़हर मेरे अंदर! फाड़ दे मुझे… पर मुझे ये सुख दे दे!”

आर्यन दंग रह गया। उसकी माँ और उसकी मासी के बीच का यह ‘लेस्बियन’ और ‘शेयरिंग’ वाला राज़ उसकी सोच से परे था। लेकिन इस सच ने अंजलि को और भी ज़्यादा ‘कामुक’ बना दिया था।

आर्यन के कानों में जब अपनी सगी मासी का नाम पड़ा, तो उसके दिमाग की नसें जैसे फटने को तैयार हो गईं। अपनी सगी माँ और मासी का एक साथ नग्न होना और एक ही मर्द के साथ बिस्तर साझा करना—यह एक ऐसा सच था जिसने आर्यन के अंदर के ‘बेटे’ को पूरी तरह खत्म कर दिया और एक दरिंदे को जन्म दे दिया।

उसकी उत्तेजना अब अपनी चरम सीमा को पार कर चुकी थी। ७ इंच का वह फौलाद अब किसी अंगारे की तरह दहक रहा था।

आर्यन ने अब कोई रहम नहीं दिखाया। उसने अंजलि के बालों को इतनी ज़ोर से पीछे खींचा कि अंजलि का चेहरा ऊपर की ओर तन गया और उसकी आँखें फटने लगीं।

आर्यन ने अपनी पूरी ताकत अपनी कमर में समेटी और एक ही खौफनाक झटके के साथ अपना पूरा ७ इंच का मूसल अंजलि की गहराई में जड़ तक उतार दिया। ‘धपाक’ की एक भारी आवाज़ आई और अंजलि की चीख उसके हलक में ही दब गई। यह प्रहार इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी कोख में एक असहनीय और मीठा धमाका महसूस हुआ।

अब आर्यन एक मशीन बन चुका था। उसने ‘चप-चप’ की आवाज़ों को एक निरंतर संगीत में बदल दिया। वह अंजलि की कमर को दोनों हाथों से जकड़कर उसे अपनी ओर खींचता और फिर पूरे ज़ोर से अपना लोहा उसके अंदर दे मारता। अंजलि का गोरा बदन बिस्तर पर किसी चाबुक की तरह लहरा रहा था। “आह्ह्ह… आर्यन… हाँ… यही सज़ा दे मुझे… अपनी इस गंदी माँ को फाड़ दे!”

अंजलि के लिए यह सुख किसी ‘वरदान’ से कम नहीं था। उसने अपना सबसे गंदा राज़ उगल दिया था और बदले में उसे वो ७ इंच का फौलादी सुख मिल रहा था जिसकी वह प्यासी थी। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन उसे नहीं, बल्कि उसके उन ‘पापों’ को कुचल रहा है जो उसने अपनी बहन के साथ मिलकर किए थे।

अंजलि की चूत अब आग उगल रही थी। आर्यन की गालियां और उसके झटके अंजलि को होश और बेहोशी के बीच के उस धुंधलके में ले जा रहे थे जहाँ सिर्फ और सिर्फ ‘हवस’ का राज था। वह पागलों की तरह अपनी गर्दन हिला रही थी, उसके पसीने की बूंदें आर्यन के सीने पर गिर रही थीं।

आर्यन की सांसें अब भारी हो गई थीं। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी मर्दानगी का बांध अब टूटने वाला है। उसने अंजलि के कूल्हों पर एक आखिरी और ज़ोरदार तमाचा जड़ा और अपनी जांघों को अंजलि की जांघों से पूरी तरह चिपका लिया।

“तो मासी भी ऐसी ही रांड है… तैयार रह माँ, अब तेरा ये सारा ज़हर मैं इसी ७ इंच से निकालूँगा!” आर्यन ने दहाड़ते हुए अपनी रफ्तार को नामुमकिन हद तक तेज़ कर दिया।

सुबह की वह पहली किरण अब कमरे की दीवारों पर अपनी गवाह छोड़ रही थी। कमरे में जिस्मों के टकराने की गूँज और भारी साँसों का शोर अपने चरम पर था। आर्यन एक जंगली दरिंदे की तरह अंजलि के ऊपर सवार था, और उसका ७ इंच का फौलाद अंजलि की कोमल गुफा के भीतर किसी गरम आरी की तरह धंस रहा था।

अंजलि अब अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। आर्यन की गालियां, मासी वाला वो खौफनाक सच और पीछे से पड़ते ७ इंच के वो बेदर्दी धक्के—इन सबने मिलकर अंजलि के अंदर एक ऐसा ज्वालामुखी फोड़ दिया जो पिछले कई बरसों से शांत था।

अचानक अंजलि का पूरा शरीर पत्थर की तरह सख्त हो गया। उसकी आँखों की पुतलियाँ ऊपर की ओर चढ़ गईं और उसके हाथ बिस्तर की चादर को फाड़ने की हद तक भिंच गए। उसकी चूत की नसें पागलों की तरह आर्यन के उस कड़क अंग को अंदर की ओर खींचने लगीं। “आह्ह्ह्ह्ह… आर्यन… मैं… मैं मर गई! उफ़्फ़… ये क्या… मेरा… मेरा सब निकल रहा है… आह्ह्ह!” अंजलि के मुँह से एक लंबी और तीखी चीख निकली जो किसी संगीत की तरह कमरे में गूँज उठी।

अंजलि का शरीर अब थर-थर कांप रहा था। उसकी जांघों के बीच से कामुक रस का एक सैलाब बह निकला, जिसने आर्यन के ७ इंच के फौलाद को और भी ज़्यादा चिकना बना दिया। वह लगातार सिसक रही थी, उसकी आवाज़ अब भारी और टूटी हुई थी। वह ‘जड़’ चुकी थी, उसका शरीर पसीने और उस मीठे दर्द से नहाया हुआ था जिसने उसे पूरी तरह खाली कर दिया था।

लेकिन जहाँ अंजलि ढेर हो चुकी थी, वहीं आर्यन अभी भी अपनी पूरी ताकत में था। उसका ७ इंच का मूसल अभी भी पत्थर की तरह सख्त और गर्म था। उसने अपनी रफ्तार ज़रा भी कम नहीं की। अंजलि के ‘जड़ने’ के बाद उसकी चूत जो और भी ज़्यादा संवेदनशील और गीली हो चुकी थी, आर्यन अब उसे और भी गहराई से कूटना शुरू कर चुका था।

अंजलि के लिए अब यह सब असहनीय होता जा रहा था। “आर्यन… बस कर… मेरा… मेरा दम निकल जाएगा… मैं अब और नहीं सह सकती!” वह अधमरी हालत में फुसफुसा रही थी, पर आर्यन के लिए यह सिर्फ शुरुआत थी। वह अपनी माँ की उस थकी हुई और तृप्त देह को और भी बेरहमी से मसल रहा था, जैसे वह आज ही उसके अंदर का सारा ‘ज़हर’ निकाल देना चाहता हो।

आर्यन ने अंजलि के कांपते हुए कूल्हों को अपनी मज़बूत पकड़ में लिया और एक और ज़बरदस्त धक्का मारा। अंजलि की आँखें बंद थीं और वह बस एक बेजान गुड़िया की तरह उसके नीचे हिल रही थी। आर्यन की मर्दानगी अभी भी अपनी मंज़िल की तलाश में थी, और अंजलि का वो ‘तोहफा’ (सच) उसे और भी ज़्यादा उकसा रहा था।

“तू तो अभी ही ढेर हो गई माँ… अभी तो मुझे तेरा ये सारा गुमान तोड़ना है!” आर्यन ने दहाड़ते हुए अपनी कमर को और भी तेज़ी से चलाना शुरू कर दिया।

सुबह की उस सुनहरी रोशनी ने अब कमरे के हर कोने को रोशन कर दिया था, जहाँ मर्यादाओं की राख पर हवस का एक वीभत्स और नंगा साम्राज्य खड़ा था। अंजलि, जो कुछ देर पहले तक सिसक रही थी, अब पूरी तरह निढाल हो चुकी थी। उसके शरीर में जैसे अब उंगली हिलाने की भी शक्ति नहीं बची थी।

आर्यन ने महसूस किया कि अंजलि का शरीर अब किसी बेजान गुड़िया की तरह उसके धक्कों के साथ बस हिल रहा है। उसकी साँसें उखड़ी हुई थीं और उसकी आँखें छत की ओर जमी थीं, जैसे वह होश और बेहोशी के किसी बीच के लोक में पहुँच गई हो।

आर्यन ने एक आखिरी और गहरा धक्का मारा, जिससे अंजलि के हलक से एक धीमी सी ‘आह’ निकली, और फिर उसने झटके से अपना ७ इंच का नसों से भरा मूसल अंजलि की गहराई से बाहर खींच लिया। बाहर आते ही वह अंग हवा में अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन कर रहा था, जिस पर अंजलि के जिस्म का रस और पसीना चमक रहा था।

अंजलि अब पीठ के बल लेट गई थी। उसके गोरे हाथ बिस्तर पर फैले हुए थे और उसकी भारी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और थकावट थी, जैसे वह इस ‘युद्ध’ में अपनी हार स्वीकार कर चुकी हो। उसकी टांगें अब भी अधखुली थीं, जो उस ७ इंच के आतंक की गवाह दे रही थीं।

आर्यन घुटनों के बल रेंगता हुआ अंजलि के सिर के पास आया। उसने अपनी मज़बूत उंगलियों से अपने उस तपते हुए अंग को थाम लिया। वह अपनी माँ के चेहरे को गौर से देख रहा था—वही चेहरा जिसे उसने बरसों से पूजनीय माना था, आज वह उसकी हवस की ज़मीन बन चुका था। आर्यन ने तेज़ी से अपने हाथ चलाना शुरू किया और जैसे ही उसके अंदर का लावा फटने को तैयार हुआ, उसने उसका मुँह सीधे अंजलि के सूखे और प्यासे होंठों पर टिका दिया।

आर्यन की मर्दानगी का वो गाढ़ा, सफ़ेद और गर्म सैलाब एक झटके के साथ अंजलि के मुँह के अंदर भर गया। वह गरम ‘वीर्य’ अंजलि के गले की गहराई तक पहुँच रहा था। अंजलि ने अपनी आँखें नहीं खोलीं, बल्कि एक आज्ञाकारी दासी की तरह अपने बेटे के उस अंतिम उपहार को स्वीकार किया। उसने एक-एक बूंद को अपनी ज़ुबान से समेटा और उसे गप-गप करके पूरा पी गई। उसके चेहरे और होंठों के कोनों पर सफ़ेद निशान रह गए थे, जो इस घिनौने लेकिन कामुक खेल की मुहर थे।

आर्यन ने अपनी माँ की उस अवस्था को देखा—उसके मुँह से बहती हुई उसकी अपनी मर्दानगी की बूंदें और उसकी बंद आँखें। उसे एक असीम संतुष्टि मिली। उसे लगा कि आज उसने अपनी माँ को न केवल शारीरिक रूप से जीता है, बल्कि उसके वजूद को अपनी मुट्ठी में कर लिया है।

वह चुपचाप अंजलि के बगल में ढह गया। दोनों के जिस्म पसीने से चिपके हुए थे। आर्यन ने अपना एक हाथ अंजलि के गले पर रखा और अंजलि ने अनजाने में ही उसके सीने से अपना सिर सटा लिया। बाहर सुबह का शोर शुरू हो चुका था, पर कमरे के अंदर दो रूहें इस घिनौने सुख की आगोश में गहरी नींद में सो गईं।

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