सुबह की पहली किरण अभी खिड़की के पर्दों को ठीक से चीर भी नहीं पाई थी कि ५:०० बजे आर्यन की आँख खुल गई। कमरे में हल्की नीली रोशनी और सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ अंजलि की धीमी और लयबद्ध सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
आर्यन ने धीरे से अपनी गर्दन घुमाई और अपने बगल में सोई हुई अंजलि को निहारने लगा। रात के उस भीषण तूफ़ान के बाद, अंजलि अब शांत समंदर जैसी लग रही थी।
अंजलि का सिर आर्यन के एक बाजू पर था। उसके बिखरे हुए काले बाल उसके गोरे कंधों और तकिए पर फैले हुए थे। बिना किसी मेकअप के, भोर की उस कच्ची रोशनी में अंजलि का चेहरा किसी दूधिया संगमरमर जैसा चमक रहा था। उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जो आर्यन ने पहले कभी नहीं देखी थी।
अंजलि के शरीर पर अब भी कोई कपड़ा नहीं था, उसने बस एक पतली सफेद चादर ओढ़ रखी थी जो उसकी कमर तक खिसक गई थी। उसकी काली ब्रा फर्श पर बेजान पड़ी थी। आर्यन की नज़रें अंजलि के उन उभरे हुए सीनों पर ठहर गईं जो चादर के ऊपर से साफ़ झलक रहे थे। रात के उस ‘लावे’ के कुछ सूखे निशान अब भी उसकी त्वचा पर एक विजय-चिह्न की तरह दिख रहे थे।
आर्यन ने बिना उसे जगाए, बहुत धीरे से अपनी उंगली उसकी नाक की नोक पर फिराई। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही औरत है जिसने रात को गालियां सुनते हुए उसके ७ इंच के फौलाद को अपने कंठ तक उतार लिया था। अभी वह सिर्फ एक मासूम, थकी हुई और संतुष्ट माँ लग रही थी।
अंजलि के बदन की उस भीनी-भीनी खुशबू और उस नग्नता को करीब से देखकर, आर्यन के ७ इंच के सिपाही ने एक बार फिर सिर उठाना शुरू कर दिया। नेकर के अंदर वह फिर से अपनी जगह बनाने लगा था। आर्यन का मन किया कि वह अभी अंजलि को जगा दे और सुबह की पहली पारी शुरू करे, लेकिन उसे अंजलि की वो बात याद आ गई— “तुझे कॉलेज जाना है।”
आर्यन ने खुद पर काबू पाया और झुककर अंजलि के माथे को बड़े ही सम्मान और प्यार के साथ चूमा। अंजलि ने नींद में ही थोड़ी सी करवट बदली और आर्यन के हाथ को और कसकर पकड़ लिया, जैसे वह सपने में भी उसे कहीं जाने नहीं देना चाहती थी।
आर्यन को अहसास हुआ कि यह रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं रह गया है; यह एक ऐसी ‘ज़रूरत’ बन गया है जो अब उनकी ज़िंदगी का ऑक्सीजन है।
आर्यन ने बहुत कोशिश की कि वह दोबारा सो जाए और अपनी उत्तेजना को शांत कर ले, लेकिन नींद अब उसकी आँखों से कोसों दूर जा चुकी थी। १० मिनट तक वह बस छत को निहारता रहा, पर उसके शरीर के निचले हिस्से में मच रही खलबली उसे चैन नहीं लेने दे रही थी।
सुबह के ५:१० हो रहे थे। कमरे की मद्धम रोशनी में आर्यन ने महसूस किया कि उसका ७ इंच का मूसल नेकर के अंदर एक ज़बरदस्त ‘मॉर्निंग इरेक्शन’ की वजह से पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। वह नेकर के कपड़े को चीरकर बाहर आने के लिए बेताब था और हर धड़कन के साथ ऊपर-नीचे उछल रहा था।
आर्यन ने चादर के अंदर अपना हाथ डाला और उस गरम लोहे को छुआ। वह इतना गर्म और तना हुआ था कि आर्यन को अपनी जांघों के बीच एक मीठा सा दर्द महसूस होने लगा। रात की थकान के बाद भी, सुबह की इस ताज़गी ने उसकी मर्दानगी को फिर से जवान कर दिया था।
आर्यन ने अपनी नज़रें घुमाईं और अंजलि को देखा। वह अभी भी गहरी नींद में थी, उसका गोरा बदन चादर के नीचे अधखुला सा था। उसकी सांसों की गर्मी आर्यन के चेहरे तक पहुँच रही थी। अंजलि की भारी छाती चादर के ऊपर से ही आर्यन की बांहों को छू रही थी, जिससे उसके अंग की अकड़न और भी बढ़ गई।
आर्यन के दिमाग में दो बातें चल रही थीं। एक तरफ अंजलि का वो हुक्म कि उसे कॉलेज जाना है और अंजलि को आराम करने देना है, और दूसरी तरफ उसके ७ इंच के शैतान की वो पुकार जो कह रही थी कि ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’।
आर्यन ने बहुत धीरे से अपनी उंगलियां अंजलि की कमर की ढलान पर रखीं। उसका रेशमी बदन सुबह के वक्त और भी मुलायम लग रहा था। उसने अपनी मज़बूत जांघ को अंजलि की कोमल जांघों के बीच धीरे से सरकाया, जिससे उसका खड़ा हुआ अंग अंजलि के कूल्हों के पिछले हिस्से से जाकर सट गया।
अंजलि ने नींद में ही एक छोटी सी सिसकारी भरी और अपनी पीठ को थोड़ा सा पीछे की ओर धकेला, जिससे वह अनजाने में ही आर्यन के उस ७ इंच के खंभे पर और भी ज़्यादा रगड़ खाने लगी। आर्यन की सांसें अब रुकने लगी थीं। वह समझ गया था कि आज की सुबह सिर्फ अलार्म से नहीं, बल्कि एक नए धमाके के साथ होने वाली है।
सुबह की उस मखमली खामोशी में आर्यन का संयम अब पूरी तरह जवाब दे चुका था। अंजलि करवट लेकर सोई थी और उसकी पीठ आर्यन की तरफ थी। चादर के नीचे उन दोनों के जिस्मों की गर्माहट एक-दूसरे में घुल रही थी।
आर्यन ने बहुत ही सावधानी से अपना हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखा। उसकी रेशमी त्वचा सुबह के वक्त और भी मुलायम और ठंडी महसूस हो रही थी। लेकिन नीचे का मंजर कुछ और ही था।
आर्यन का ७ इंच का फौलाद नेकर के अंदर पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। उसने धीरे से अपनी कमर को आगे की ओर धकेला। चादर के अंदर से ही, उसका गर्म और तना हुआ अंग अंजलि की भारी और गोल गांड़ की दरार के ठीक बीचों-बीच जाकर सट गया।
जैसे ही उस गर्म लोहे का दबाव अंजलि के मांसल कूल्हों पर पड़ा, आर्यन के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। नेकर का कपड़ा बीच में होने के बावजूद, अंजलि के बदन की गोलाई और उसकी कोमलता आर्यन को पागल कर रही थी। उसने अपनी कमर को हल्का सा हिलाया , जिससे उसका अंग अंजलि की गांड़ पर ऊपर-नीचे रगड़ खाने लगा।
इस अचानक आए गर्म दबाव ने अंजलि की नींद की गहराई को हिला दिया। उसने नींद में ही एक लंबी और दबी हुई सिसकारी भरी— “उफ़्फ़…”। उसे महसूस हो रहा था कि पीछे से कोई गर्म और सख्त चीज़ उसके जिस्म में धंसने की कोशिश कर रही है।
आर्यन रुका नहीं। उसने अपने हाथ से अंजलि के एक स्तन को चादर के ऊपर से ही कसकर भींच लिया और अपनी कमर का दबाव और बढ़ा दिया। अब उसका ७ इंच का मूसल अंजलि की गांड़ की गहराई को नापने लगा था। अंजलि ने अपनी आँखें पूरी तरह नहीं खोलीं, पर उसके चेहरे पर एक मदहोश मुस्कान तैर गई। वह समझ गई कि उसका ‘शेर’ सुबह-सुबह फिर से शिकार पर निकल पड़ा है।
अंजलि ने नींद भरी आवाज़ में फुसफुसाया, “आर्यन… अभी तो ५ ही बजे हैं… सोने दे ना कमीने…” लेकिन साथ ही उसने अपनी गांड़ को थोड़ा और पीछे की ओर झटका दिया, जिससे वह आर्यन के उस उफनते हुए अंग पर और भी ज़ोर से दब गई।
“माँ… ये अब नहीं सोने वाला। इसे अब आपका ही सहारा चाहिए,” आर्यन ने उसके कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए कहा।
सुबह की उस सुनहरी और शांत बेला में आर्यन के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका था। कमरे में छाई हल्की नीली रोशनी अब उस कामुक दृश्य की गवाह बनने वाली थी, जिसकी शुरुआत रात के अंधेरे में हुई थी।
आर्यन ने बहुत ही सावधानी से, ताकि अंजलि की कच्ची नींद पूरी तरह न टूट जाए, अपने हाथों को नीचे ले जाकर नेकर के इलास्टिक को पकड़ा। उसने धीरे-धीरे उसे अपनी जांघों से नीचे सरकाया और पैरों से झटककर बिस्तर के नीचे फेंक दिया। अब वह पूरी तरह निर्वस्त्र था, और उसका ७ इंच का काला फौलाद सुबह की ताज़गी पाकर पत्थर से भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो चुका था।
आर्यन ने करवट ली और धीरे से अंजलि की पीठ से पूरी तरह सट गया। जैसे ही उसके नंगे और गर्म अंग का सीधा स्पर्श अंजलि की कोमल और मखमली गांड़ की दरार से हुआ, अंजलि के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़बरदस्त झटका दौड़ा। कपड़े की वो मामूली सी दीवार भी अब हट चुकी थी। आर्यन का अंग अंजलि के कूल्हों की गहराई में किसी गर्म लोहे की तरह धंसने लगा।
आर्यन ने अपना एक हाथ अंजलि की पतली कमर के नीचे से डाला और उसके भारी और नग्न Boobs को अपनी मज़बूत हथेली में भर लिया। अंजलि ने रात को अपनी ब्रा उतार दी थी, इसलिए आर्यन की उंगलियों को अब उन गर्म और मुलायम गोलों का सीधा अहसास मिल रहा था। उसने अपनी उंगलियों से अंजलि के सख़्त हो चुके निप्पलों को मरोड़ना शुरू किया, जिससे अंजलि के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली— “आह्ह्ह… आर्यन… तू… तू नहीं मानेगा?”
आर्यन का दूसरा हाथ अंजलि की चिकनी और गोरी पीठ पर रेंगने लगा। वह अपनी उंगलियों के पोरों से उसकी रीढ़ की हड्डी के पास छोटे-छोटे घेरे बना रहा था। अंजलि के बदन की महक और उस रेशमी छुअन ने आर्यन को और भी पागल कर दिया। उसने अपनी कमर को एक हल्का सा झटका दिया, जिससे उसका ७ इंच का मूसल अंजलि की गांड़ के बीचों-बीच बुरी तरह रगड़ खाने लगा।
अंजलि ने अब अपनी आँखें अधखुली कर ली थीं। उसे महसूस हो रहा था कि पीछे से उसका जवान बेटा उसे अपनी मर्दानगी के घेरे में ले चुका है। आर्यन की गर्म सांसें उसकी गर्दन पर गिर रही थीं। अंजलि ने अपनी गांड़ को थोड़ा और पीछे की ओर धकेला ताकि वह आर्यन के उस नंगे और उत्तेजित अंग को अपनी गहराई में और साफ़ महसूस कर सके।
“माँ… सुबह की ये ताज़गी और आपका ये बदन… मुझे कॉलेज जाने नहीं देंगे,” आर्यन ने उसके कान की लौ को अपने होंठों में दबाते हुए फुसफुसाया।
सुबह की उस ठंडी खामोशी में आर्यन ने अंजलि के शरीर के सबसे संवेदनशील ‘स्विच’ को पहचान लिया था। किसी भी औरत के लिए कान की लौ और गर्दन का पिछला हिस्सा वो बिजली के तार होते हैं, जिन्हें छूते ही जिस्म में हवस का करंट दौड़ने लगता है।
आर्यन ने अंजलि की गर्दन के पास अपना चेहरा झुकाया। अंजलि की त्वचा से सुबह की ताज़गी और उसकी अपनी एक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी।
आर्यन ने बहुत ही धीरे से अंजलि के दाहिने कान की कोमल लौ को अपने होंठों के बीच दबा लिया। उसने अपनी गर्म ज़ुबान की नोक से उस कोमल हिस्से को कुरेदना शुरू किया। जैसे ही उसकी गीली ज़ुबान ने कान के उस छिद्र के पास हलचल मचाई, अंजलि के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़बरदस्त झटका लगा। उसकी उंगलियाँ बिस्तर की चादर को कसकर भींचने लगीं। “आह्ह्ह… आर्यन… मम्म… ये क्या कर रहा है…” अंजलि के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकली जो साफ़ बता रही थी कि उसका आत्म-नियंत्रण अब खत्म हो रहा है।
आर्यन यहीं नहीं रुका। उसने अपने दांतों से कान की लौ को हल्का सा दबाया और फिर अपने होंठों को नीचे सरकाते हुए अंजलि की सुराहीदार गर्दन पर ले आया। कान के ठीक नीचे का वो हिस्सा, जहाँ नसें साफ़ धड़कती हैं, आर्यन ने वहाँ अपनी गर्म सांसें छोड़ीं। अंजलि का शरीर धनुष की तरह तन गया। जब आर्यन ने अपनी ज़ुबान को उसकी गर्दन की ढलान पर ऊपर से नीचे की ओर रगड़ा, तो अंजलि के रोंगटे खड़े हो गए।
अंजलि की गर्दन अब पूरी तरह से आर्यन के हवाले थी। आर्यन ने अपने होंठों से उसकी गर्दन पर छोटे-छोटे ‘लव बाइट्स’ देना शुरू किया। हर चुंबन के साथ अंजलि की सिसकारी और गहरी होती जा रही थी। “उफ़्फ़… रुक जा… मेरा… मेरा दम निकल जाएगा… आर्यन!” अंजलि की आवाज़ अब भारी हो गई थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी योनि में एक अजीब सी हलचल और गीलापन बढ़ रहा है। गर्दन का वो स्पर्श सीधे उसकी जांघों के बीच जाकर धमाका कर रहा था।
ऊपर से गर्दन का ये जादू चल रहा था और नीचे आर्यन का ७ इंच का नंगा और सख्त फौलाद अंजलि की गांड़ की दरार में लगातार दबाव बना रहा था। अंजलि को ऐसा लग रहा था जैसे वह दो पाटों के बीच पिस रही है—एक तरफ गर्दन पर आर्यन के होंठों की आग और दूसरी तरफ पीछे से उस विशालकाय अंग की बेताबी।
अंजलि ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया ताकि आर्यन को उसकी गर्दन का और ज़्यादा हिस्सा मिल सके। उसकी सांसें अब किसी भागते हुए घोड़े की तरह चल रही थीं। गर्दन पर होने वाली उस रगड़ ने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह अब एक ‘माँ’ नहीं, बल्कि एक प्यासी मादा थी जो अपने नर के हर प्रहार को झेलने के लिए बेताब थी।
उसकी आँखें उलट गई थीं और उसके हाथ अब आर्यन के बालों में उलझकर उसे अपनी गर्दन की ओर और ज़ोर से खींच रहे थे।
सुबह की उस मद्धम रोशनी में अंजलि का संयम अब पूरी तरह राख हो चुका था। आर्यन के होठों ने उसकी गर्दन पर जो आग लगाई थी, उसने अंजलि के बदन में एक ऐसी तड़प पैदा कर दी कि वह अब और सीधी नहीं लेट पा रही थी। उसने एक गहरी सिसकारी भरी और बिस्तर पर पेट के बल औंधे मुँह लेट गई।
अंजलि के पेट के बल लेटते ही उसकी भारी और गोल गांड़ हवा में एक कामुक पहाड़ की तरह उभर आई। आर्यन ने एक पल भी जाया नहीं किया और वह एक शिकारी की तरह अंजलि के ऊपर आ गया।
जैसे ही आर्यन का पूरा वजन अंजलि की मखमली पीठ पर पड़ा, अंजलि के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। आर्यन का ७ इंच का नंगा और सख्त फौलाद अब अंजलि की गांड़ की गहरी दरार में बिल्कुल फिट हो चुका था। बिना किसी कपड़े के, उस गर्म लोहे का सीधा स्पर्श अंजलि के कूल्हों की कोमलता को चीर रहा था।
आर्यन ने अंजलि की गर्दन के पिछले हिस्से पर अपने होठों का जादू शुरू किया। उसने अपनी जीभ से अंजलि के कान के पीछे वाले हिस्से को चाटना और चूसना शुरू किया। अंजलि का शरीर बिस्तर पर मछली की तरह फड़फड़ाने लगा। जब आर्यन ने उसके कान के छेद में अपनी गर्म सांसें फूंकी, तो अंजलि के हाथ बिस्तर की चादर को फाड़ने की हद तक भिंच गए। “आह्ह्ह… आर्यन… मम्म… मार डालेगा क्या… उफ़्फ़ ये जलन!”
आर्यन अब उसकी गर्दन से नीचे उतरा और उसकी गोरी और चिकनी पीठ पर अपने होठों की छाप छोड़ने लगा। वह अपनी ठुड्डी की हल्की रगड़ से अंजलि की रीढ़ की हड्डी पर बिजली के झटके दे रहा था। अंजलि की पीठ पसीने की बारीक बूंदों से चमक रही थी, और आर्यन का हर चुंबन उस तपिश को और बढ़ा रहा था।
ऊपर जहाँ होठों का खेल चल रहा था, वहीं नीचे आर्यन अपनी कमर से अंजलि की गांड़ पर लगातार दबाव बना रहा था। उसका ७ इंच का अंग अंजलि के कूल्हों के बीच किसी गर्म सलाख की तरह रगड़ खा रहा था। अंजलि को महसूस हो रहा था कि वह पीछे से किसी बहुत ही ताकतवर चीज़ से कुचली जा रही है। उसने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की ओर झटका दिया, जिससे वह आर्यन के उस उफनते हुए अंग पर और भी गहराई से दब गई।
अंजलि का चेहरा तकिए में धंसा हुआ था और उसकी सिसकारियां कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। आर्यन का मर्दाना हाथ अब अंजलि के बालों को अपनी मुट्ठी में भर चुका था, जिससे वह उसका सिर पीछे खींचकर उसकी गर्दन को और भी बेबाकी से चूम रहा था।
“माँ… आज कॉलेज नहीं… आज सिर्फ आपकी ये मखमली पीठ और मेरा ये फौलाद बातें करेंगे,” आर्यन ने उसकी पीठ पर एक गहरा ‘लव बाइट’ देते हुए फुसफुसाया।
सुबह की उस मखमली रोशनी में अब कोई खेल नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ‘शिकार’ शुरू हो चुका था। आर्यन ने अपनी पकड़ को किसी जंगली शिकारी की तरह और भी मज़बूत कर लिया। अंजलि अब पूरी तरह से उसके भारी जिस्म के नीचे दबी हुई थी, उसकी साँसें तेज़ थीं और शरीर पसीने से भीगने लगा था।
आर्यन ने एक पल भी ज़ाया नहीं किया और अपनी ताकत का अहसास कराते हुए अंजलि की कलाइयों को अपने मज़बूत हाथों में दबोच लिया।
आर्यन ने अंजलि के दोनों हाथ ऊपर की ओर खींचे और उन्हें बिस्तर के सिरहाने की ओर ले जाकर कसकर पकड़ लिया। अंजलि अब पूरी तरह से बेबस थी, उसका सीना बिस्तर पर रगड़ खा रहा था और उसके हाथ आर्यन की मुट्ठी में कैद थे। आर्यन ने उसके कान के पास अपनी भारी और गर्म आवाज़ में फुसफुसाया, “माँ… आज आप कहीं नहीं जा सकतीं। आज आपकी इस मखमली कैद में मेरा ये ७ इंच का शैतान अपनी सल्तनत बनाएगा।”
हाथों को काबू करने के बाद आर्यन ने अपना मुँह अंजलि की सुराहीदार गर्दन पर टिका दिया। वह पागलों की तरह उसकी गर्दन के पिछले हिस्से को चूस रहा था। अंजलि के मुँह से सिसकारियां किसी संगीत की तरह निकल रही थीं— “आह्ह्ह… आर्यन… मम्म… छोड़… बहुत… बहुत तेज़ हो रहा है सब!” गर्दन पर आर्यन के होठों की तपिश अंजलि के दिमाग की नसें हिला रही थी।
आर्यन ने अपने घुटनों और पैरों का इस्तेमाल करते हुए अंजलि की गोरी और चिकनी जांघों को धीरे-धीरे बाहर की ओर फैलाना शुरू किया। अंजलि ने थोड़ी सी रुकावट की कोशिश की, पर आर्यन के भारी शरीर और उसके पैरों के दबाव के सामने उसकी एक न चली। जैसे-जैसे उसकी जांघें फैलती गईं, उसकी चूत अब आर्यन के ७ इंच के नंगे और सख्त फौलाद के सीधे निशाने पर आ गई।
अब अंजलि पूरी तरह से ‘एक्स’ (X) के आकार में खुली हुई थी। आर्यन ने अपनी कमर को थोड़ा और नीचे धकेला। उसका गरम और नसों से भरा हुआ अंग अब अंजलि की चूत के गीले और रेशमी दरवाज़े पर दस्तक देने लगा था। उस नंगे स्पर्श ने अंजलि के बदन में बिजली की लहर दौड़ा दी। उसे महसूस हो रहा था कि अब उसके ७ इंच के ‘बेटे’ का ज्वालामुखी फटने के लिए बिल्कुल सही जगह पर पहुँच चुका है।
अंजलि का चेहरा तकिए में दबा हुआ था, उसकी आँखें चढ़ चुकी थीं और वह अपनी कमर को अनजाने में ही ऊपर की ओर झटका दे रही थी ताकि उस गरम लोहे का प्रवेश और गहरा हो सके। आर्यन ने उसकी गर्दन पर एक गहरा निशान छोड़ते हुए अपनी कमर को और भी कस लिया।
“तैयार हो जाओ माँ… आज आपका ये ७ इंच का बेटा अपनी सारी प्यास आपकी कोख में ही बुझाएगा,” आर्यन ने दहाड़ते हुए कहा।
सुबह की उस मखमली खामोशी में अब वह घड़ी आ गई थी, जहाँ मर्यादा और रिश्तों की सारी सीमाएं एक ज़बरदस्त विस्फोट के साथ टूटने वाली थीं। अंजलि पेट के बल लेटी हुई थी, उसके दोनों हाथ आर्यन की मज़बूत मुट्ठियों में ऊपर की ओर जकड़े हुए थे और उसके गोरे पैर आर्यन की जांघों के दबाव से पूरी तरह फैल चुके थे।
कमरे की हवा में एक भारी तनाव था। अंजलि की चूत अब पूरी तरह से गीली और गुदगुदी हो चुकी थी, जो अपने ७ इंच के ‘शिकारी’ का स्वागत करने के लिए बेताब थी। आर्यन ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचा और सही निशाना साधा।
आर्यन ने अपनी पूरी ताकत बटोरी और एक ही भीषण झटके के साथ अपना पूरा ७ इंच का नसों से भरा हुआ और खौलता हुआ फौलाद अंजलि की रेशमी गुफा में उतार दिया। वह प्रहार इतना गहरा और अचानक था कि अंजलि का शरीर बिस्तर से एक इंच ऊपर उछल गया। ७ इंच का वह मूसल अंजलि की गहराई की दीवारों को चीरता हुआ सीधे उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।
अंजलि के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो कमरे की दीवारों को चीरती हुई सन्नाटे में गूंज उठी— “आह्ह्ह्ह्ह्ह… आर्यन… माँ मर गई! उफ़्फ़… ये क्या… इतना बड़ा… आह्ह्ह!” अंजलि की आँखों के आगे अंधेरा छा गया और उसकी गर्दन पीछे की ओर झटक गई। वह दर्द और चरम सुख का ऐसा संगम था जिसने अंजलि के रूह को कंपा दिया। उसे महसूस हुआ कि उसके अंदर कुछ बहुत ही विशाल और गरम समा चुका है जो उसकी कोख तक पहुँच गया है।
आर्यन ने अपनी कमर का दबाव ज़रा भी कम नहीं किया। उसने अपने ७ इंच के अंग को अंजलि की चूत में पूरी जड़ तक धंसा दिया। अंजलि के गोल और भारी कूल्हे अब आर्यन की जांघों से ज़ोर से टकरा रहे थे। ‘चप-चप’ की एक गीली आवाज़ कमरे में गूँजने लगी, जो इस बात की गवाह थी कि ७ इंच का शैतान अब अपनी सल्तनत के अंदर पूरी तरह से कब्ज़ा कर चुका है।
अंजलि का शरीर अब थरथरा रहा था। वह दर्द से कराह रही थी, पर उस दर्द में एक ऐसा ‘नशा’ था जो उसे और गहराई की मांग करने पर मजबूर कर रहा था। उसके हाथ जो आर्यन की पकड़ में थे, अब और भी ज़ोर से भिंच गए। “आर्यन… तूने… तूने मुझे फाड़ दिया… आह्ह्ह… और अंदर… और अंदर डाल अपना ये गरम लोहा!
आर्यन ने अंजलि के बालों को पीछे से पकड़ा और उसकी गर्दन पर अपने दांत गड़ा दिए। ७ इंच का वह फौलाद अब अंजलि की गहराई में अपनी जगह बना चुका था। हर धड़कन के साथ आर्यन का अंग अंजलि की नसों को झकझोर रहा था। सुबह की पहली किरण ने देखा कि एक बेटा अपनी ही माँ को उसकी फंतासियों के चरम पर पहुँचा चुका है।
“आज आप कहीं नहीं जा पाएंगी माँ… आज ये ७ इंच आपकी रूह में उतर चुका है,” आर्यन ने भारी आवाज़ में दहाड़ते हुए अपनी कमर को तेज़ी से चलाना शुरू कर दिया।
सुबह की उस सुनहरी रोशनी में अब कोई मर्यादा शेष नहीं बची थी। आर्यन का ७ इंच का फौलाद अंजलि की कोमल गुफा के भीतर अपनी पूरी लंबाई के साथ समा चुका था। अंजलि पेट के बल लेटी हुई थी, उसकी कमर ऊपर उठी हुई थी और आर्यन एक जंगली शिकारी की तरह उसके ऊपर सवार था।
आर्यन ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी थी। कमरे में जिस्मों के टकराने की ‘चप-चप-चप’ की आवाज़ें किसी युद्ध के नगाड़े की तरह गूँज रही थीं। लेकिन इस बार आर्यन सिर्फ अपने शरीर से नहीं, बल्कि अपनी ज़ुबान से भी अंजलि की रूह को छलनी कर रहा था।
आर्यन ने अंजलि के दोनों हाथों को बिस्तर के सिरहाने पर और भी ज़ोर से जकड़ लिया। वह पागलों की तरह अपनी कमर को पीछे खींचता और फिर पूरे ज़ोर से अपना ७ इंच का मूसल अंजलि की गहराई में दे मारता। हर धक्का इतना गहरा था कि अंजलि का पूरा शरीर बिस्तर पर आगे की ओर खिसक जाता। “आह्ह्ह… आर्यन… मम्म… मर जाऊँगी… धीरे… उफ़्फ़!” अंजलि की सिसकारियां अब अनियंत्रित हो चुकी थीं।
आर्यन ने अंजलि के कान के पास झुककर अपनी भारी और मर्दाना आवाज़ में उसे ज़लील करना शुरू किया। “बता… कैसी लग रही है अपने बेटे की ये ७ इंच की लाठी? रात को बहुत शेरनी बन रही थी ना… अब बोल! बोल कि तू सिर्फ मेरी रखैल है… मेरी गंदी माँ!”
अंजलि के लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था। एक तरफ उसके शरीर के सबसे नाजुक हिस्से पर ७ इंच के गर्म लोहे का भीषण प्रहार हो रहा था, और दूसरी तरफ ‘माँ’ के पवित्र रिश्ते को सरेआम नीलाम करने वाले वो शब्द। “आर्यन… नहीं… ऐसा मत बोल… आह्ह्ह!” अंजलि रो रही थी, पर उसके आँसू दुख के नहीं, बल्कि उस चरम सुख के थे जो अपमान की आग से पैदा हो रहा था।
आर्यन ने अंजलि के कूल्हों पर एक ज़ोरदार तमाचा जड़ा— ‘चटाक’। गोरी गांड़ पर उंगलियों के लाल निशान उभर आए। “चुप रह रांड! आज तुझे तेरी औकात बताऊंगा। तूने ही कहा था ना कि तुझे गालियां पसंद हैं? तो सुन… तू मेरी वो कुतिया है जिसे मैं रोज़ सुबह इसी तरह अपनी मर्दानगी के नीचे कुचलूंगा।”
अंजलि का चेहरा पसीने और आँसुओं से भीग चुका था। वह थर-थर कांप रही थी। आर्यन की गालियां उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थीं, जिससे उसकी चूत में कामुकता का सैलाब और भी बढ़ गया। वह अपनी कमर को पागलों की तरह गोल-गोल घुमा रही थी ताकि उस ७ इंच के प्रहार का कोई भी कोना खाली न रह जाए।
“हाँ… हाँ आर्यन… मैं तेरी ही हूँ… मुझे और गालियां दे… मुझे और ज़ोर से कूट… फाड़ दे अपनी इस माँ को!” अंजलि अब पूरी तरह से टूट चुकी थी और उसने अपने बेटे की उस वहशी मर्दानगी के आगे घुटने टेक दिए थे।
सुबह की उस मखमली रोशनी में अब हैवानियत और हवस का नंगा नाच शुरू हो चुका था। कमरे में सिर्फ गोश्त से गोश्त के टकराने की ‘चटाक-चटाक’ और अंजलि की बेकाबू सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी। आर्यन अब पूरी तरह से अपनी माँ के शरीर और रूह पर कब्ज़ा कर चुका था।
आर्यन ने अपनी रफ्तार को किसी मशीन की तरह तेज़ कर दिया। उसका ७ इंच का फौलाद अंजलि की कोमल गुफा के अंदर-बाहर किसी गर्म आरी की तरह चल रहा था।
आर्यन ने अंजलि के बाल पीछे से झटके और उसके कान में दहाड़ते हुए बोला, “देख अपनी इस हालत को… कैसे कुतिया की तरह मेरे नीचे दबी हुई है! पसंद आ रहा है ना अपने ही जवान बेटे का ये कड़क लंड ? बोल… बोल कि तेरे पति का ५ इंच का खिलौना इस ७ इंच के लोहे के सामने कुछ भी नहीं है!”
गालियों के साथ-साथ आर्यन का हाथ अब अंजलि की भारी और गोल गाँड़ पर कहर बरपा रहा था। ‘चटाक… चटाक… चटाक!’ हर तमाचे के साथ अंजलि की गोरी त्वचा पर लाल निशान उभर रहे थे। “ये ले रांड! ये उन गंदी फंतासियों की सज़ा है जो तूने बरसों से दबा रखी थी। आज तेरा ये बेटा तुझे वो हर सुख देगा जो तूने माँ बनकर खो दिया था।”
अंजलि के लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था। एक तरफ चूत के अंदर वो ७ इंच का फौलादी धक्का, दूसरी तरफ गाँड़ पर पड़ते करारे तमाचे, और कानों में पड़ते वो ‘लंड’ और ‘रांड’ जैसे शब्द। इन सबने मिलकर अंजलि के अंदर कामुकता का ऐसा ज्वालामुखी फोड़ दिया कि वह पागलों की तरह थरथराने लगी।
अंजलि की आँखों के आगे सितारे नाचने लगे। उसके पैर कांपने लगे और उसकी योनि की दीवारें आर्यन के ७ इंच के अंग को पागलों की तरह भींचने लगीं। “आह्ह्ह… आर्यन… हाँ… मैं… मैं तेरी रांड हूँ! मार मुझे… और ज़ोर से कूट… उफ़्फ़ ये तेरा गरम लंड … मुझे खत्म कर देगा! मैं… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह्ह्ह!”
अंजलि का शरीर अब धनुष की तरह तन गया था। वह अपने परम सुखके बिल्कुल करीब थी। आर्यन की गालियों ने उसके दिमाग के उस हिस्से को झकझोर दिया था जहाँ सिर्फ आदिम हवस बसती है। वह बिस्तर की चादर को अपने दांतों से काट रही थी और उसकी गाँड़ अनजाने में ही पीछे की ओर झटके मार रही थी ताकि वह उस ७ इंच के ‘मूसल’ को अपनी कोख के और करीब महसूस कर सके।
“तैयार हो जा माँ… अब तेरा ये बेटा अपना सारा गरम लावा तेरी इस गंदी गुफा में भरने वाला है!” आर्यन ने अपनी आखिरी और सबसे तेज़ पारी शुरू करते हुए कहा।
सुबह की उस सुनहरी रोशनी में जब हवस अपने सबसे ऊँचे शिखर पर थी, कमरा ‘चप-चप’ की आवाज़ों और अंजलि की मदहोश सिसकारियों से गूँज रहा था। अंजलि चरम सुख की उस दहलीज पर खड़ी थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसकी चूत की दीवारें आर्यन के ७ इंच के फौलाद को पागलों की तरह भींच रही थीं। उसे लग रहा था कि अगले ही पल आर्यन का गर्म लावा उसकी कोख को जला देगा।
लेकिन तभी, आर्यन ने कुछ ऐसा किया जिसकी कल्पना अंजलि ने अपने बुरे सपनों में भी नहीं की थी।
आर्यन ने अचानक अपनी कमर की रफ्तार रोकी और एक झटके में अपना नंगा और कड़क लंड अंजलि की गहराई से बाहर खींच लिया। हवा के संपर्क में आते ही वह ७ इंच का मूसल और भी लाल और भयानक दिखने लगा। आर्यन बिना कुछ बोले, झटके से अंजलि के ऊपर से उतरा और बिस्तर के साइड में हाथ के सहारे सिर टिकाकर लेट गया।
जैसे ही वह गर्म लोहा बाहर निकला, अंजलि को महसूस हुआ जैसे उसके शरीर के अंदर से उसकी रूह खींच ली गई हो। वह अधखुली अवस्था में, अपनी उठी हुई गाँड़ के साथ वहीं जमी रह गई। उसकी चूत की नसें अब भी खाली हवा में फड़क रही थीं, जो उस ७ इंच के दबाव के लिए तरस रही थीं। “आ… आर्यन? ये… ये क्या किया तूने? रुक क्यों गया?” अंजलि की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और तड़प थी।
आर्यन चुपचाप लेटा हुआ अपनी माँ के उस तड़पते हुए चेहरे को निहार रहा था। उसके चेहरे पर एक विजेता जैसी मुस्कान थी। वह देखना चाहता था कि उसकी माँ, जो उसे गालियां देने पर उकसा रही थी, अब इस ‘अधूरेपन’ में कैसे तिलमिलाती है। उसकी नज़रें अंजलि की उन कांपती हुई जांघों पर थीं जो अब भी फैलने की कोशिश कर रही थीं।
अंजलि के लिए यह किसी मौत की सज़ा से कम नहीं था। जब एक औरत चरम सुख के इतने करीब हो और उसे वहीं छोड़ दिया जाए, तो उसका शरीर आग के गोले की तरह तपने लगता है। “आर्यन… बेटा… प्लीज… ऐसे मत कर… मैं… मैं मर जाऊँगी… डाल ना अपना ये गर्म लंड वापस… मुझे खत्म कर दे!” अंजलि अब गिड़गिड़ा रही थी। उसकी सिसकारियां अब रोने जैसी आवाज़ में बदल गई थीं।
आर्यन ने ठंडे लहजे में कहा, “क्यों माँ? अभी तो आप गालियां सुन रही थीं… अभी तो आप मेरी ‘रांड’ बनी हुई थीं। अब क्या हुआ? अब क्यों इस ७ इंच के लिए ऐसे तड़प रही हो?” आर्यन का यह बर्ताव अंजलि की गरिमा को पूरी तरह कुचल रहा था। उसे अहसास हुआ कि आर्यन अब सिर्फ उसका शरीर नहीं, बल्कि उसके दिमाग और उसकी तड़प के साथ भी खेल रहा है।
अंजलि ने पलटकर आर्यन की ओर देखा। उसकी आँखों में हवस की लाली और आँसुओं की नमी एक साथ थी। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और उसके होंठ कांप रहे थे। वह बिस्तर पर रेंगती हुई आर्यन के पास आई और उसके उस खड़े हुए ७ इंच के अंग को अपने हाथों में भर लिया।
“तू बहुत निर्दयी हो गया है आर्यन… ज़्यादा खतरनाक,” अंजलि ने उत्तेजना में हांफते हुए कहा, “तुझे मज़ा आ रहा है ना मुझे ऐसे तड़पता देख कर?”