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माहौल अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। मोबाइल फोन तकिए के सहारे इस तरह टिका था कि पापा को अंजलि का चेहरा और उसके कंधों तक का हिस्सा साफ़ दिख रहा था, लेकिन कमर के नीचे का पूरा हिस्सा कैमरे की नज़रों से ओझल था।

अंजलि के हाथ में वह ५ इंच का गुलाबी डिल्डो था। पापा फोन के दूसरी तरफ से किसी शिकारी की तरह अपनी पत्नी को तड़पते हुए देखने का इंतज़ार कर रहे थे।

“हाँ अंजलि… अब इसे अंदर डालो। मैं देखना चाहता हूँ कि तुम्हारी आँखें कैसे ऊपर चढ़ती हैं जब वो तुम्हारे भीतर घुसता है। मुझे वो ‘चप-चप’ की आवाज़ सुननी है… आज कोई शर्म नहीं।”

आर्यन बेड के नीचे से रेंगकर अब अंजलि की जांघों के बीच पहुँच चुका था। जब उसने अपनी माँ को उस प्लास्टिक के खिलौने को अपने करीब ले जाते देखा, तो उसके पुरुषार्थ को ठेस पहुँची। उसने अँधेरे में ही अंजलि का हाथ पकड़ लिया और उसे डिल्डो के साथ एक तरफ हटा दिया।

अंजलि ने नीचे देखा, आर्यन ने अपना ७ इंची असली अंग अंजलि की हथेली में थमा दिया। अंजलि की आँखें फैल गईं—वह खिलौना उस असली, धड़कते हुए अंग के सामने कुछ भी नहीं था। अंजलि समझ गई कि आर्यन क्या चाहता है। उसने डिल्डो को बेड की चादर पर पटक दिया, लेकिन कैमरे के सामने वह ऐसे हिली जैसे वह डिल्डो का ही इस्तेमाल कर रही हो।

अंजलि ने अपना सिर पीछे झुकाया और एक लंबी आह भरी। “आह्ह्ह… जी… ये… ये बहुत मोटा महसूस हो रहा है आज… उफ़्फ़!” हकीकत में वह डिल्डो नहीं, बल्कि आर्यन का गरम अंग था जिसे अंजलि अपनी जांघों के बीच महसूस कर रही थी। आर्यन अब और रुकने वाला नहीं था; उसने कैमरे की रेंज से बाहर रहते हुए अपनी कमर को ऊपर उठाया और जड़ से अंजलि की गहराई में उतरने का प्रयास करने लगा।

पापा फोन पर अंजलि के चेहरे के हाव-भाव देख रहे थे। अंजलि की आँखें सच में ऊपर चढ़ रही थीं और उसके मुँह से जो सिसकारियां निकल रही थीं, वो किसी प्लास्टिक के खिलौने के लिए नहीं, बल्कि उस असली स्पर्श के लिए थीं जो उसका बेटा उसे दे रहा था। “जी… देखिये… आह! ये… ये मुझे फाड़ देगा… बहुत गहरा जा रहा है!”

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी को पागल होते देख रहे थे। उन्हें लग रहा था कि उनका ५ इंच का तोहफ़ा ये कमाल कर रहा है, जबकि कैमरे के नीचे आर्यन का ७ इंच का प्रहार अंजलि की रूह तक पहुँच रहा था। अंजलि ने अपनी उंगलियां चादर में गाड़ दीं और पापा की ओर देखते हुए एक ऐसी गंदी मुस्कान दी जो केवल आर्यन के लिए थी।

बेडरूम का वह कोना अब हवस और धोखे की एक ऐसी आग में जल रहा था, जिसकी तपिश मोबाइल की स्क्रीन के पार पापा तक पहुँच रही थी। अंजलि इस समय एक साथ दो दुनियाओं में जी रही थी—एक जो उसके पति के सामने डिजिटल परदे पर थी, और दूसरी जो चादर के नीचे उसके बेटे के साथ हकीकत में थी।

अंजलि बेड पर इस तरह अधलेटी थी कि उसकी काली पारदर्शी नाइटी के बटन पूरी तरह खुल चुके थे। तकिए के सहारे टिका फोन उसके चेहरे के हर बदलते हाव-भाव को कैद कर रहा था।

अंजलि का एक हाथ ऊपर की ओर था, जो उसकी नाइटी के भीतर घुसकर उसके भारी और उभरे हुए स्तन को बेरहमी से मसल रहा था। वह अपनी उंगलियों से अपनी ही निप्पल को मरोड़ रही थी ताकि पापा को लगे कि वह उनकी बातों से पूरी तरह पागल हो चुकी है। लेकिन उसका दूसरा हाथ… वह चादर के नीचे उस असली ‘खिलाड़ी’ के साथ खेल रहा था।

कैमरे की नज़रों से दूर, अंजलि ने अपने बेटे के उस गरम और फौलादी अंग को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड़ा हुआ था। जैसे-जैसे आर्यन अपनी कमर को लयबद्ध तरीके से आगे-पीछे कर रहा था, अंजलि की हथेली उस पर रगड़ खा रही थी। वह ५ इंच का खिलौना अब एक तरफ बेकार पड़ा था; अंजलि के हाथ में अब वह असली ताकत थी जो उसकी नसों में आग लगा रही थी।

फोन की स्क्रीन पर पापा यह सब देख रहे थे और अपनी सुध-बुध खो चुके थे। “हाँ अंजलि… ऐसे ही! अपने उस दूधिया उभार को और ज़ोर से मसोस… देख मैं भी तेरे साथ खुद को सहला रहा हूँ। क्या तू महसूस कर पा रही है कि मेरा डिल्डो तेरे अंदर कैसे नाच रहा है?”

अंजलि ने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं और आर्यन की ओर देखते हुए पापा को जवाब दिया, “आह्ह्ह… जी… ये डिल्डो नहीं… ये तो जैसे कोई जिंदा साँप है जो मेरी गहराई में ज़हर उगल रहा है! ये इतना मोटा और सख्त लग रहा है कि मुझे लग रहा है आज मैं फट जाऊँगी… उफ़्फ़ आर्यन… मेरा मतलब… आह! जी… बहुत मज़ा आ रहा है!”

आर्यन ने जब अपनी माँ के मुँह से अपना नाम सुना, तो उसकी रफ़्तार और बढ़ गई। वह कैमरे की रेंज से बस एक इंच नीचे रहकर अंजलि की जांघों के बीच घर्षण पैदा कर रहा था। अंजलि का चेहरा सुख और दर्द के एक अनोखे संगम से दहक रहा था। वह अपने स्तन को इतनी ज़ोर से भींच रही थी कि वहाँ लाल निशान पड़ने लगे थे, और नीचे उसका हाथ आर्यन के ७ इंची अंग को उस मंज़िल की ओर ले जा रहा था जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

फोन की छोटी सी स्क्रीन पर आर्यन के पापा का चेहरा अब पूरी तरह से बदल चुका था। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और उनकी आंखों में वह जुनून था जो बस फटने ही वाला था। बेड के नीचे आर्यन अपनी पूरी ताकत झोंक रहा था, लेकिन तभी फोन से एक भारी और लंबी कराह सुनाई दी।

पापा ने अपना सिर पीछे की ओर पटका और अपने मोबाइल को हिलाते हुए एक लंबी चीख निकाली। “आह्ह्ह… अंजलि… मैं… मैं गया! उफ़्फ़!” अगले कुछ सेकंड तक पापा बस हांफते रहे, उनका शरीर ढीला पड़ गया और उनके चेहरे पर वह अजीब सा खालीपन आ गया जो चरम सुख के बाद आता है।

जैसे ही पापा का काम खत्म हुआ, उनका लहजा तुरंत बदल गया। “ठीक है अंजलि… बस… अब रुक जाओ। अब और मत करो।”

अंजलि, जो इस वक्त आर्यन के ७ इंची असली अंग की गर्मी और रफ्तार के बीच मंज़िल के करीब पहुँचने ही वाली थी, पापा के इस ‘स्टॉप’ वाले आदेश से एकदम से ठिठक गई। उसने आर्यन का हाथ ज़ोर से दबाया, मानो उसे रुकने का इशारा कर रही हो।

आर्यन, जिसका जोश इस वक्त सातवें आसमान पर था और जो बस एक अंतिम प्रहार करने ही वाला था, उसे अचानक थमना पड़ा। उसका पूरा शरीर तनाव से कांप रहा था, लेकिन उसे पता था कि अगर वह नहीं रुका, तो पापा को कुछ शक हो सकता है।

पापा ने गहरी सांस ली और कैमरा थोड़ा ठीक करते हुए बोले, “अंजलि, आज के लिए इतना काफी है। मैं बहुत थक गया हूँ और अब मुझे नींद आ रही है। तुम भी अब सो जाओ… वो ‘खिलौना’ साफ करके रख देना। गुड नाइट, डार्लिंग।”

बिना अंजलि के जवाब का इंतज़ार किए, पापा ने कॉल काट दी। स्क्रीन काली हो गई।

कमरे में अब सिर्फ ACकी आवाज़ और उन दोनों की भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। अंजलि अभी भी वैसी ही लेटी थी—एक हाथ उसके स्तन पर और दूसरा नीचे आर्यन के फौलादी अंग पर। पापा ने अपना खेल खत्म कर लिया था, लेकिन उन्होंने आर्यन और अंजलि को उस मोड़ पर छोड़ दिया था जहाँ से पीछे हटना नामुमकिन था।

अंजलि ने अंधेरे में नीचे की ओर देखा। उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ एक अधूरी प्यास थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “वो तो सो गए आर्यन… लेकिन मेरा क्या? और तेरा क्या? क्या तू अपनी माँ को इस हाल में तड़पता हुआ छोड़ देगा?”

जैसे ही फोन की स्क्रीन काली हुई, कमरे का माहौल ‘डिजिटल नाटक’ से बदलकर ‘शुद्ध हकीकत’ में तब्दील हो गया। अब न तो कोई कैमरा था और न ही मीलों दूर से आती कोई आवाज़। अब केवल दो जिस्म थे और उनके बीच सुलगती बेतहाशा आग।

आर्यन ने एक झटके में बिस्तर की चादर हटा दी। उसकी आँखों में इस वक्त अपने पिता के प्रति कोई लिहाज़ नहीं था, केवल अपनी माँ को पूरी तरह अपना लेने की भूख थी।

आर्यन ने अंजलि के कंधों से वह काली रेशमी नाइटी पकड़ी और उसे नीचे की ओर खींचा। अंजलि ने अपनी कमर उठाई और सहयोग किया, जिससे वह पारदर्शी कपड़ा तिनके की तरह उसके बदन से अलग होकर फर्श पर जा गिरा। अब अंजलि अपने बेटे के सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी, उसकी त्वचा ठंडी हवा और उत्तेजना के कारण कांप रही थी।

आर्यन अब अंजलि की दोनों जांघों के बीच आ गया। उसने अपने दोनों हाथ अंजलि के सिर के पास टिका दिए और अपना पूरा वजन उस पर डाल दिया। अंजलि के भारी और कोमल स्तन आर्यन की चौड़ी छाती के नीचे दबकर चपटे हो गए, जिससे दोनों के दिलों की धड़कनें एक-दूसरे में समाने लगीं।

आर्यन ने अपनी माँ की आँखों में झाँका। उन आँखों में अब ममता नहीं, बल्कि एक प्यासी औरत का समर्पण था। अंजलि की साँसें इतनी तेज़ थीं कि उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसने अपने पैर आर्यन की कमर के चारों ओर लपेट लिए, मानो उसे अपने भीतर खींच लेना चाहती हो।

“माँ… अब कोई खिलौना नहीं, और कोई फोन नहीं,” आर्यन ने भारी और लरजती आवाज़ में कहा। “अब सिर्फ मैं हूँ और आप हैं।”

अंजलि ने आर्यन के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और उसे अपने और करीब खींचते हुए फुसफुसायी, “तो फिर देर क्यों कर रहा है मेरे शेर? फाड़ दे अपनी इस माँ को… मुझे आज अहसास करा दे कि मेरा बेटा अब एक पूरा मर्द बन चुका है। अब और सब्र नहीं होता आर्यन… चढ़ जा मुझ पर!”

आर्यन ने अपना हाथ नीचे बढ़ाया और उस ५ इंच के खिलौने को गंदे कपड़े की तरह बेड से नीचे फेंक दिया। उसकी जगह अब उसका ७ इंच का गर्म और फौलादी अंग अंजलि की रेशमी गहराई के मुहाने पर दबाव बना रहा था।

आर्यन के लिए यह पल किसी सपने जैसा नहीं, बल्कि एक ऐसे युद्ध को जीतने जैसा था जिसका वह सालों से इंतज़ार कर रहा था। उसके दृष्टिकोण से इस मिशनरी पोजीशन का हर एक लम्हा कामुकता की चरम सीमा पर था।

जब आर्यन अपनी माँ के मखमली बदन के ऊपर आया, तो उसे अहसास हुआ कि असली पौरुष क्या होता है। उसके दिमाग में चल रही उथल-पुथल अब शांत हो चुकी थी, और सारा ध्यान केवल उस स्पर्श पर था जो उसे पागल कर रहा था।

आर्यन ने जब अपना पूरा भार अंजलि पर डाला, तो उसे अपने सीने के नीचे माँ के भारी और गर्म स्तनों का उभार महसूस हुआ। वे इतने कोमल थे कि आर्यन को लगा जैसे वह रुई के बादलों पर लेटा हो। अंजलि के बदन से आने वाली वह सोंधी महक—जिसमें शावर जेल और पसीने की मिली-जुली गंध थी—आर्यन के दिमाग की नसों को झंकृत कर रही थी।

आर्यन ने महसूस किया कि अंजलि ने अपनी चिकनी जांघों को उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस लिया है। यह बंधन इतना मज़बूत था कि आर्यन को अपनी माँ की बेताबी साफ़ समझ आ रही थी। उसे लग रहा था जैसे अंजलि उसे अपने वजूद के अंदर पूरी तरह समा लेना चाहती है।

नीचे, आर्यन का ७ इंच का अंग अंजलि की जांघों के बीच उस गीली और गर्म गुफा के मुहाने पर बार-बार टकरा रहा था। आर्यन को महसूस हो रहा था कि अंजलि कितनी तैयार है—उसकी फिसलन आर्यन के अंग को जड़ तक भिगो रही थी। हर बार जब वह थोड़ा सा दबाव बनाता, अंजलि के मुँह से निकलने वाली गर्म सांसें आर्यन की गर्दन पर आग की तरह लगतीं।

आर्यन ने जब अंजलि की आँखों में देखा, तो उसे वहां अपनी माँ नहीं, बल्कि एक ऐसी कामुक अप्सरा दिखी जो अपने बेटे के हाथों बर्बाद होने के लिए तड़प रही थी। अंजलि के होंठ हल्के खुले थे और वे कांप रहे थे।

आर्यन के मन की आवाज़:

“पापा ने इसे खिलौने दिए, पर मैं इसे हकीकत दूँगा। यह खिलौनों वाली प्यास नहीं है, यह एक मर्द की ज़रूरत है जो केवल मैं पूरी कर सकता हूँ।”

आर्यन ने अपने हाथों को अंजलि की हथेलियों में फँसा लिया और उन्हें तकिए के दोनों तरफ दबा दिया। अब वह पूरी तरह से अंजलि पर हावी था। उसने अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचा और फिर एक गहरी सांस लेकर उस ‘अंतिम द्वार’ पर प्रहार करने के लिए खुद को तैयार किया।

उसने महसूस किया कि अंजलि ने अपनी पीठ को बेड से थोड़ा ऊपर उठाया है, मानो वह उस ७ इंच के फौलाद को अपने भीतर लेने के लिए रास्ता बना रही हो।

अंजलि के लिए यह अनुभव किसी आत्मिक और शारीरिक प्रलय जैसा था। जब आर्यन उसके ऊपर आया, तो उसे लगा जैसे बरसों से सूखी पड़ी ज़मीन पर अचानक कोई तप्त रेगिस्तान का तूफ़ान आ गया हो। उसके दृष्टिकोण से इस मिलन का हर पल उत्तेजना की नई परिभाषा लिख रहा था।

जैसे ही आर्यन ने अपना भारी शरीर अंजलि पर टिकाया, अंजलि को अपनी छाती पर एक सुखद दबाव महसूस हुआ। उसे लगा जैसे वह एक फौलादी पहाड़ के नीचे दब गई हो।

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन का शरीर अब वह छोटे बच्चे वाला शरीर नहीं रहा। उसकी चौड़ी छाती जब अंजलि के भारी और संवेदनशील स्तनों को कुचल रही थी, तो अंजलि के भीतर एक मीठा दर्द लहरें मारने लगा। आर्यन की खाल की गर्मी और उसकी मर्दाना गंध अंजलि के नथुनों में भर गई, जिससे उसका सिर चकराने लगा।

नीचे, जब अंजलि ने अपनी जांघें आर्यन की कमर पर कसीं, तो उसे आर्यन के उस ७ इंची फौलादी अंग की कठोरता अपनी जांघों के बीच महसूस हुई। वह अंग इतना गर्म और सख्त था कि अंजलि को लगा जैसे कोई दहकता हुआ लोहे का छड़ उसके ‘मर्म’ के द्वार पर दस्तक दे रहा है। वह ५ इंच का खिलौना तो इस असली एहसास के सामने एक तिनके जैसा लग रहा था।

जब अंजलि ने ऊपर देखा, तो आर्यन की आँखों में उसे ममता की कोई छाया नहीं दिखी। वहाँ सिर्फ एक भूखे शिकारी की चमक थी। उसे अच्छा लग रहा था कि उसका अपना बेटा उसे एक ‘माँ’ की तरह नहीं, बल्कि एक ‘औरत’ की तरह देख रहा है। आर्यन के वे हाथ, जिन्होंने अंजलि की हथेलियों को बिस्तर पर दबा रखा था, उसे यह अहसास करा रहे थे कि वह अब पूरी तरह उसके कब्जे में है।

अंजलि की साँसें उखड़ने लगी थीं। उसके शरीर का हर रोम-रोम पुकार रहा था कि वह भारी और मोटा अंग अब उसके भीतर उतर जाए। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जिससे उसका गीला मुहाना आर्यन के अंग के मुहाने से बिल्कुल सट गया। उस स्पर्श मात्र से अंजलि की रीढ़ की हड्डी में बिजली दौड़ गई।

अंजलि ने अपने होंठ काट लिए और अपनी आँखों को आधा मूँद लिया। वह अब उस पहले प्रहार के लिए तैयार थी जो उसकी दुनिया बदलने वाला था।

कमरे में अब केवल AC की सिसकारी और उन दोनों की भारी होती धड़कनें थीं। आर्यन ने अंजलि की आँखों में देखा—उनमें समर्पण की वह इंतहा थी जो किसी भी मर्द को जानवर बना दे। उसने अपने हाथों की पकड़ अंजलि की हथेलियों पर और मज़बूत की और अपनी कमर को पीछे खींचकर उस अंतिम प्रहार के लिए निशाना साधा।

आर्यन ने एक गहरी सांस ली और अपनी पूरी ताकत के साथ अपनी कमर का एक ज़ोरदार झटका मारा।

वह ७ इंच का फौलादी अंग, जो गर्मी से दहक रहा था, अंजलि की उस तंग और गीली गहराई में एक ही बार में आधा उतर गया। अंजलि का शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठा और उसके गले से एक ऐसी सिसकारी निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज उठी। “आह्ह्ह्ह्ह… आर्यन!” उसकी आँखें पूरी तरह से पीछे की ओर उलट गईं और उसके चेहरे पर सुख और हलके दर्द का वह नशा छा गया जो केवल हकीकत दे सकती है।

आर्यन ने एक पल के लिए अपनी गति रोकी ताकि अंजलि उस फैलाव को महसूस कर सके। अंजलि को लगा जैसे उसके भीतर का हर कोना उस ७ इंच की कठोरता से भर गया है। उसे अहसास हुआ कि जो सुख पापा के ५ इंच के खिलौने कभी नहीं दे पाए, वह उसके बेटे की इस मर्दानगी ने एक ही पल में दे दिया। आर्यन की गर्म सांसें अंजलि के चेहरे पर गिर रही थीं और उसके पसीने की एक बूंद अंजलि की छाती पर जा गिरी।

अब आर्यन ने अपनी कमर चलानी शुरू की। हर धक्का जड़ तक जा रहा था। जब उसकी जांघें अंजलि के कूल्हों से टकरातीं, तो एक आवाज़ गूँजती जो कामुकता की आग को और भड़का देती। अंजलि ने अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका देना शुरू किया ताकि वह आर्यन के हर इंच को अपने भीतर और गहराई से महसूस कर सके।

“जी… हाँ… ऐसे ही आर्यन! और… और गहराई तक…” अंजलि अब पूरी तरह से होश खो चुकी थी। उसके भारी स्तन आर्यन की छाती के नीचे रगड़ खाकर चपटे हो रहे थे। आर्यन ने अब अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। वह एक मशीन की तरह प्रहार कर रहा था, और अंजलि के हाथ, जो पहले बिस्तर पर दबे थे, अब आर्यन की पीठ पर पहुँच चुके थे और उसके नाखूनों ने आर्यन के बदन पर गहरे निशान बनाना शुरू कर दिया था।

आर्यन को लग रहा था जैसे वह स्वर्ग के किसी द्वार को तोड़कर अंदर जा रहा है। अंजलि की तंग गुफा उसे चारों तरफ से इतनी कसकर जकड़े हुए थी कि उसे अपनी नसों में ख़ून की जगह पिघला हुआ लावा बहता महसूस हो रहा था।

कमरे की हवा अब इतनी भारी और गर्म हो चुकी थी कि ऐसा लग रहा था मानो फर्श पर गिरी हुई वह काली नाइटी भी उस आग में जल जाएगी। आर्यन अब एक बेटे की सीमा लांघकर एक ऐसे प्यासे मर्द में तब्दील हो चुका था, जिसके लिए उसकी माँ का बदन ही उसकी पूरी कायनात थी।

आर्यन ने अंजलि की दोनों टांगों को मोड़ा और उन्हें उसके कंधों तक सटा दिया। इस पोजीशन ने अंजलि के उस रसीले द्वार को पूरी तरह से खोल दिया, जिससे आर्यन का ७ इंची फौलाद अब जड़ तक समाने के लिए तैयार था।

आर्यन ने अपने हाथों से अंजलि के कूल्हों को ऊपर उठाया और एक ऐसा प्रचंड धक्का मारा कि उसका अंग अंजलि के गर्भाशय के मुहाने से जा टकराया। अंजलि के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो आधे सुख और आधे दर्द में डूबी थी। “ओह्ह्ह्… आर्यन… मार ही डालेगा क्या? आह! बहुत… बहुत गहरा जा रहा है… उफ़्फ़!” अंजलि के स्तन पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके गुलाबी निप्पल उत्तेजना के मारे पत्थर की तरह सख्त हो चुके थे।

आर्यन अब किसी जंगली जानवर की तरह अपनी कमर चला रहा था। हर बार जब वह अपना अंग पूरा बाहर खींचता और फिर पूरी ताकत से अंदर झोंकता, तो एक गीली ‘चप-चप’ की आवाज़ पूरे सन्नाटे को चीर देती। अंजलि का वह हिस्सा इतना गीला हो चुका था कि आर्यन का अंग उसमें फिसलते हुए आग पैदा कर रहा था। अंजलि ने अपनी आँखें उलट ली थीं और उसकी जीभ बाहर निकल आई थी, वह हवा में सुख के गोते लगा रही थी।

आर्यन ने अब प्रहार करते हुए अंजलि के चेहरे को अपने हाथों में भरा और उसके होंठों को इतनी बेरहमी से चूमना शुरू किया कि अंजलि की सिसकारियां उसके मुँह के अंदर ही दब गईं। वह एक तरफ से अपनी माँ के मुँह का रस पी रहा था और दूसरी तरफ से उसकी गहराई को नाप रहा था। अंजलि के नाखून अब आर्यन की पीठ को चीर रहे थे, लेकिन उस दर्द में जो मज़ा था, वह दुनिया की किसी दौलत में नहीं।

“माँ… देखो… पापा का खिलौना कैसा था और मेरा ये कैसा है!” आर्यन ने हाँफते हुए अंजलि के कान में फुसफुसाया। अंजलि ने मदहोशी में जवाब दिया, “आह्ह… वो… वो तो कुछ भी नहीं था… तू… तू तो मुझे अंदर से फाड़ रहा है मेरे शेर… और तेज़… मुझे पूरी तरह तबाह कर दे!”

अंजलि का पूरा बदन अब पसीने से नहा चुका था। उसकी जांघें थरथरा रही थीं और उसे महसूस हो रहा था कि उसके भीतर का सैलाब अब किसी भी वक्त फटने वाला है। आर्यन की रफ़्तार अब अपनी चरम सीमा पर थी, उसकी कमर एक मशीन की तरह चल रही थी और कमरे में सिर्फ उन दो जिस्मों के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं।

कमरे की उमस अब अपने उच्चतम स्तर पर थी। आर्यन के हर प्रहार के साथ बिस्तर की चरमराहट और अंजलि की सिसकारियां एक पागल कर देने वाली लय बना रही थीं। आर्यन का ७ इंच का फौलाद अंजलि की गहराई के उन कोनों को छू रहा था जिन्हें आज तक किसी ने नहीं छुआ था।

अंजलि का शरीर अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। उसकी जांघें आर्यन की कमर पर बिजली की तरह फड़क रही थीं। जैसे ही आर्यन ने एक आखिरी, सबसे गहरा और लंबा धक्का मारा, अंजलि की रीढ़ की हड्डी में जैसे कोई धमाका हुआ।

“आह्ह्ह्ह्ह… आर्यन… मैं… मैं मर गई! उफ़्फ़!” अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं और उसकी जांघें पत्थर की तरह सख्त होकर अचानक ढीली पड़ गईं। उसकी गहराई की दीवारों ने आर्यन के अंग को इतनी ज़ोर से भींचा कि आर्यन का दम निकलने को हो गया। अंजलि के भीतर से गर्म रस का एक ऐसा सैलाब छूटा जिसने आर्यन के पूरे अंग को तरबतर कर दिया। वह अगले दस सेकंड तक बस थरथराती रही, उसका शरीर पसीने और सुख की चरम सीमा से निढाल हो चुका था।

अंजलि तो अपनी मंज़िल पा चुकी थी और निढाल होकर बिस्तर पर फैल गई थी, लेकिन आर्यन… आर्यन का तूफ़ान अभी शांत नहीं हुआ था। उसका अंग अभी भी पत्थर की तरह सख्त और दहकता हुआ था। अंजलि के रस ने उसके अंग को और भी ज़्यादा फिसलन भरा बना दिया था, जिससे उसकी रगड़ अब और भी ज़्यादा मादक हो गई थी।

आर्यन की सांसें किसी घायल शेर की तरह चल रही थीं। उसे अभी भी उस अंतिम ‘विस्फोट’ की ज़रूरत थी जिसे वह अपनी माँ के भीतर ही शांत करना चाहता था। उसने देखा कि अंजलि आँखें मूँदे हाँफ रही है, उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा है।

आर्यन रुका नहीं। उसने अंजलि की ढीली पड़ी टांगों को फिर से ऊपर उठाया और इस बार अंजलि के निढाल शरीर के ऊपर और भी ज़्यादा हावी होकर अपनी कमर चलानी शुरू की। “माँ… आप तो चली गईं… पर मेरा क्या? मुझे देखो… मैं अभी भी जल रहा हूँ,” आर्यन ने अपनी भारी आवाज़ में अंजलि के कान के पास फुसफुसाया।

अंजलि ने मदहोशी में अपनी आँखें खोलीं। उसने देखा कि उसका बेटा अभी भी अपनी पूरी मर्दानगी के साथ उसके ऊपर सवार है। उसने एक कमज़ोर मुस्कान दी और अपने हाथ आर्यन के कूल्हों पर रख दिए ताकि वह उसे और गहराई तक खींच सके। “आह… मेरे शेर… तू तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। ले ले… अपनी इस माँ का सारा रस निचोड़ ले… मुझे फिर से पागल कर दे!”

कमरे की हवा अब उन दोनों की मिली-जुली सांसों और जिस्मानी रगड़ की खुशबू से भारी हो चुकी थी। अंजलि अभी अपनी चरम सीमा से गुजरी ही थी कि आर्यन के अगले कदम ने उसे फिर से उत्तेजना के समंदर में फेंक दिया।

आर्यन ने अब अपनी माँ के शरीर को किसी कलाकार की तरह सहेजना शुरू किया। उसने अंजलि की दोनों मखमली टांगों को पकड़ा और उन्हें बिस्तर पर इतना फैला दिया कि अंजलि का वह गुलाबी और रसीला केंद्र पूरी तरह से बेपर्दा हो गया।

अंजलि की टांगें अब बिस्तर के कोनों तक फैली हुई थीं, जिससे उसकी गहराई का द्वार पूरी तरह खुल गया था। आर्यन उसके ठीक बीच में घुटनों के बल बैठ गया। ऊपर से आती मद्धम रोशनी जब अंजलि के पसीने से नहाए हुए बदन पर पड़ी, तो वह किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रही थी। आर्यन ने एक पल के लिए रुककर अपनी माँ के उस वैभव को निहारा, जो अब पूरी तरह उसकी गुलामी स्वीकार कर चुका था।

आर्यन ने अपने हाथ अंजलि की जांघों के नीचे फँसाए और उन्हें ऊपर की ओर खींचा, फिर एक ही बार में अपनी कमर का पूरा बोझ आगे झोंक दिया। वह ७ इंच का फौलादी मूसल, जो पहले से ही अंजलि के रस से तरबतर था, बिना किसी रुकावट के जड़ तक धँस गया।

“आह्ह्ह्ह… आर्यन! तू… तू तो मुझे दो फाड़ कर देगा!” अंजलि के मुँह से एक लंबी और सुरीली सिसकारी निकली। आर्यन ने अब अपनी रफ़्तार को एक शानदार लय दी। वह धीरे-धीरे अपना अंग लगभग पूरा बाहर खींचता, यहाँ तक कि केवल उसकी टोपी अंदर रह जाती, और फिर एक झटके के साथ उसे दोबारा अंजलि की कोख तक उतार देता। हर धक्के के साथ एक गीली और भारी ‘थप-थप’ की आवाज़ गूँज रही थी, जो किसी मदहोश कर देने वाले संगीत की तरह लग रही थी।

अंजलि का पूरा जिस्म हर प्रहार के साथ बिस्तर पर ऊपर-नीचे उछल रहा था। उसके भारी स्तन पागलों की तरह थरथरा रहे थे। आर्यन ने झुककर अंजलि के एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे दांतों से हल्का सा काटा, जबकि नीचे उसकी कमर का प्रहार जारी था। अंजलि के हाथ अब आर्यन के बालों में फँसे थे और वह अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दे रही थी ताकि वह उस ७ इंच के लोहे को अपनी रूह के और करीब महसूस कर सके।

“माँ… देखो कैसे आप मेरे लिए पूरी तरह खुल गई हो,” आर्यन ने हाँफते हुए कहा। अंजलि ने अपनी गर्दन एक तरफ झुका ली, उसकी आँखों से खुशी के आंसू छलक आए थे। “हाँ मेरे लाल… आज तूने अपनी इस माँ को सच में एक औरत बना दिया। रुकना मत… मुझे और तड़पा… मुझे पूरी तरह भर दे!”

आर्यन का जुनून अब अपनी चरम सीमा पर था, लेकिन वह इस मिलन को केवल शारीरिक नहीं, बल्कि रूहानी बनाना चाहता था। उसने अपनी कमर की गति को एक पल के लिए थामा और अंजलि की बाहों में हाथ डालकर उसे धीरे से बिस्तर से ऊपर उठाया।

अंजलि अब आर्यन की गोद में उसके ऊपर सवार थी, उसके पैर आर्यन की कमर के चारों ओर लिपटे हुए थे। आर्यन का ७ इंची फौलाद अभी भी पूरी तरह अंजलि की गहराई में जड़ तक धँसा हुआ था। इस मुद्रा में दोनों के जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए थे।

आर्यन ने अपने हाथ अंजलि के कूल्हों पर टिका दिए और अपनी आँखों को उसकी आँखों में गड़ा दिया। अंजलि का चेहरा पसीने की बूंदों से चमक रहा था और उसकी आँखों में वह नशा था जो केवल एक तृप्त औरत में होता है। “माँ… मेरी आँखों में देखो,” आर्यन ने भारी और कामुक आवाज़ में फुसफुसाया। “अब बताओ, क्या पापा का वो खिलौना इस अहसास के आसपास भी था?”

अंजलि ने अपनी हथेलियाँ आर्यन के मज़बूत कंधों पर टिका दीं और धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर-नीचे करना शुरू किया। जब वह ऊपर उठती, तो आर्यन का अंग उसे अंदर से खालीपन का अहसास कराता, और जैसे ही वह नीचे बैठती, वह ७ इंच का गरम लोहा उसकी गहराई की हर दीवार को सहलाते हुए अंदर समा जाता। “आह्ह्ह… आर्यन… नहीं… कभी नहीं। जो आग तूने लगाई है, वो कोई और नहीं बुझा सकता,” अंजलि ने हाँफते हुए कहा।

दोनों के होंठ एक-दूसरे के इतने करीब थे कि उनकी गर्म सांसें आपस में मिल रही थीं। आर्यन ने अंजलि को अपनी बाहों में और कस लिया, जिससे अंजलि के भारी स्तन आर्यन की छाती पर बुरी तरह रगड़ खाने लगे। अब कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, केवल एक गहरा और मादक अहसास था। आर्यन अपनी कमर को नीचे से ऊपर की ओर झटका दे रहा था, और अंजलि हर धक्के के साथ आर्यन के गले लग जाती।

अचानक आर्यन का शरीर तन गया। उसके अंग की नसें पत्थर की तरह सख्त हो गईं। उसे महसूस हुआ कि उसका लावा अब और रुकने वाला नहीं है। उसने अंजलि की गर्दन के पीछे हाथ रखा और उसे एक गहरे चुंबन में खींच लिया। अंजलि ने भी महसूस कर लिया था कि उसके बेटे का ‘तूफ़ान’ अब आने वाला है। उसने अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली।

“आर्यन… दे दे मुझे… अपना सारा प्यार मेरे अंदर उड़ेल दे… आह्ह्ह!” अंजलि ने उसके कानों में चीखते हुए कहा।

आर्यन ने एक आखिरी, सबसे गहरा और लंबा प्रहार किया और अंजलि के भीतर ही रुक गया। उसके पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ी और उसका ७ इंची अंग अंजलि की गहराई में गरम लावे की पिचकारियाँ छोड़ने लगा। अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस गरम धार को अपने भीतर महसूस करते हुए आर्यन के कंधे पर दांत गड़ा दिए।

चरम सुख के उस तूफ़ान के बाद, कमरे का माहौल अब पूरी तरह शांत हो चुका था, लेकिन वह सन्नाटा बोझिल नहीं बल्कि एक सुकून भरी गर्माहट से भरा था। अंजलि अभी भी आर्यन की गोद में वैसी ही सिमटी हुई थी, उसका सिर आर्यन के मज़बूत कंधे पर टिका था और उसकी सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं।

आर्यन जानता था कि एक औरत के लिए जिस्मानी मिलन सिर्फ शुरुआत होती है, असली संतुष्टि तो उस प्यार और परवाह में है जो मिलन के बाद मिलती है। उसने अंजलि को खुद से अलग नहीं किया, बल्कि उसे और भी कोमलता से अपनी बाहों में भर लिया।

आर्यन ने अपने पसीने से भीगे हुए हाथ को अंजलि की नग्न पीठ पर रखा और धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को उसकी रीढ़ की हड्डी पर फेरने लगा। अंजलि के शरीर में एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और आर्यन की गर्दन में अपना चेहरा और गहराई से छुपा लिया।

“माँ…” आर्यन ने बहुत ही धीमी और मखमली आवाज़ में उसके कान के पास फुसफुसाया। “आप ठीक तो हैं न?” अंजलि ने बिना कुछ बोले बस अपना सिर हिलाया। उसने आर्यन के सीने पर एक छोटा सा चुंबन अंकित किया। उसकी आँखों के कोनों में हल्की सी नमी थी—यह दुःख के आंसू नहीं थे, बल्कि उस सम्मान और जुड़ाव के थे जो उसे आज अपने ही बेटे से मिला था।

अंजलि ने एक लंबी और गहरी सांस ली। “आर्यन… आज तूने मुझे वो अहसास कराया है जो मैं सालों पहले भूल चुकी थी। सिर्फ ये शरीर नहीं… तूने मेरी रूह को भी शांत कर दिया है।” उसने आर्यन के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और उसकी पेशानी (माथे) पर एक ममता और प्यार भरा लंबा चुंबन लिया।

आर्यन ने अंजलि के बिखरे हुए बालों को उसके चेहरे से हटाया और उसकी आँखों में झाँका। वहाँ अब कोई हवस नहीं थी, सिर्फ एक गहरा लगाव था। उसने अंजलि के हाथों को थामकर चूमा। उस पल में दोनों को अहसास हुआ कि पापा की वो डिजिटल बातें और वो खिलौने इस असली ‘आलिंगन’ के सामने कितने खोखले थे।

रात ढल रही थी। आर्यन ने अंजलि को धीरे से बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। उसने चादर को खींचकर दोनों के जिस्मों को ढँक दिया। अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख लिया, जहाँ उसका दिल अभी भी लयबद्ध तरीके से धड़क रहा था।

“अब सो जा मेरे शेर,” अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा। “आज की रात हमारा वो राज़ है, जिसे शायद कायनात भी हमसे नहीं छीन पाएगी।”

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